नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री और 'बिग बॉस' फेम सनी लियोनी को कर्नाटक क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने ₹2400 करोड़ के कथित 'शिवम एसोसिएट्स' निवेश घोटाले से जुड़े मामले में नोटिस जारी किया है। हालांकि जांच एजेंसी ने साफ किया है कि सनी लियोनी पर किसी तरह के गलत काम का आरोप नहीं है। उनसे केवल एक फिल्म के लिए मिली फीस के भुगतान से संबंधित जानकारी मांगी गई है। क्या है पूरा मामला? कर्नाटक CID 'शिवम एसोसिएट्स' और उसके प्रमोटर शिवानंद नीलन्नवर के खिलाफ जांच कर रही है। आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति निवेश योजनाएं चलाकर करीब 40,700 निवेशकों से हजारों करोड़ रुपये जुटाए और ऊंचे रिटर्न का लालच देकर कथित तौर पर धोखाधड़ी की। जांच के अनुसार, शिवानंद नीलन्नवर ने वर्ष 2023 में कन्नड़ फिल्म 'चैंपियन' का निर्माण किया था। इसी फिल्म के लोकप्रिय गीत 'डिंगारा बिल्लि नानू' में सनी लियोनी ने विशेष प्रस्तुति दी थी, जिसके लिए उन्हें लगभग ₹1 करोड़ की फीस दी गई थी। सनी लियोनी से क्या जानना चाहती है CID? जांच एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि अभिनेत्री को भुगतान किस माध्यम से किया गया और क्या यह रकम कथित निवेश घोटाले से जुड़े फंड से आई थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ पूछताछ की प्रक्रिया का हिस्सा है और सनी लियोनी को आरोपी के रूप में नहीं देखा जा रहा है। क्या है ₹2400 करोड़ का शिवम एसोसिएट्स घोटाला? शिवम एसोसिएट्स पर आरोप है कि उसने कर्नाटक और महाराष्ट्र के निवेशकों को 36 से 60 प्रतिशत तक वार्षिक रिटर्न का वादा कर निवेश कराया। शुरुआती जांच में सामने आया कि कुछ धन निवेशकों को लौटाया गया, जबकि बड़ी रकम शेयर बाजार और निजी खातों में ट्रांसफर की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक: लगभग ₹540 करोड़ शेयर बाजार में लगाए गए। इसमें करीब ₹170 करोड़ का नुकसान हुआ। करीब ₹55 करोड़ निजी खातों में ट्रांसफर किए गए। आरोपी पहले ही हो चुका है गिरफ्तार मुख्य आरोपी शिवानंद नीलन्नवर को मई 2026 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मामला CID को सौंपा गया। जांच एजेंसी ने 30 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है और कथित तौर पर निवेशकों के पैसों से खरीदी गई कई लग्जरी संपत्तियां और वाहन जब्त किए हैं। सनी लियोनी के कारोबार और नेटवर्थ सनी लियोनी फिल्मों और टीवी शो के अलावा कई व्यवसायों से भी जुड़ी हुई हैं। उनकी अनुमानित कुल संपत्ति ₹98 करोड़ से ₹115 करोड़ के बीच बताई जाती है। उनके प्रमुख कारोबारों में शामिल हैं: 'स्टार स्ट्रक' कॉस्मेटिक ब्रांड 'अफेटो फ्रैग्रेंस' परफ्यूम ब्रांड 'आई एम एनिमल' वीगन फैशन ब्रांड वेलनेस ब्रांड्स में निवेश 'चिका लोका' रेस्टोरेंट 'सनसिटी मीडिया एंड एंटरटेनमेंट' प्रोडक्शन कंपनी डिजिटल और गेमिंग प्रोजेक्ट्स फिलहाल, कर्नाटक CID की जांच का उद्देश्य केवल पैसों के स्रोत और लेन-देन की कड़ी को समझना है।
Kiara Advani इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups को लेकर लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। फिल्म में वह ‘नादिया’ नाम का अहम किरदार निभा रही हैं। अब एक्ट्रेस ने अपने इस रोल और फिल्म की कहानी को लेकर खुलकर बात की है। कियारा ने बताया कि ‘टॉक्सिक’ का उनका किरदार काफी अलग और चुनौतीपूर्ण है। इस फिल्म ने उन्हें रिश्तों और प्यार को नए नजरिए से समझने का मौका दिया। ‘नादिया’ के किरदार ने सोच बदल दी: कियारा एक इंटरव्यू के दौरान कियारा आडवाणी ने कहा कि जब निर्देशक Geetu Mohandas ने उन्हें फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाई थी, तब शुरुआत में वह इसकी भावनात्मक गहराई और रिश्तों की जटिलता को पूरी तरह समझ नहीं पाई थीं। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि प्यार को हमेशा तय सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। यही बात उन्हें फिल्म की कहानी में सबसे ज्यादा प्रभावित कर गई। कियारा के मुताबिक यह फिल्म पुरुष और महिला के रिश्तों को एक नए तरीके से दिखाएगी, जो दर्शकों की सोच को बदल सकती है। यश ने भी बताई फिल्म की खासियत फिल्म में सुपरस्टार Yash लीड रोल में नजर आएंगे। हाल ही में यश ने भी ‘टॉक्सिक’ को लेकर कहा था कि यह एक सामान्य गैंगस्टर ड्रामा फिल्म नहीं होगी। उनके मुताबिक फिल्म में भावनात्मक गहराई और महिला किरदारों का मजबूत दृष्टिकोण देखने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि आमतौर पर गैंगस्टर फिल्मों में कहानी पुरुषों के नजरिए से दिखाई जाती है, लेकिन गीतू मोहनदास ने इसे बेहद संवेदनशील अंदाज में पेश किया है। फिल्म में दिखेगी दमदार स्टारकास्ट ‘टॉक्सिक’ में यश और कियारा आडवाणी के अलावा Nayanthara, Huma Qureshi, Rukmini Vasanth और Tara Sutaria भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म को KVN Productions और Monster Mind Creations मिलकर प्रोड्यूस कर रहे हैं। रिलीज डेट फिर टली पहले यह फिल्म 4 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब इसकी रिलीज डेट एक बार फिर टाल दी गई है। हालांकि मेकर्स ने अभी नई रिलीज डेट का ऐलान नहीं किया है।
फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर कन्नड़ फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री से एक दुखद खबर सामने आई है। मशहूर अभिनेता और प्रोड्यूसर Dileep Raj का बुधवार तड़के हार्ट अटैक से निधन हो गया। वह 47 वर्ष के थे। परिवार के मुताबिक, उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द हुआ, जिसके बाद तुरंत अस्पताल ले जाया गया। हालांकि डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री और फैंस के बीच शोक की लहर फैल गई है। ‘Milana’ फिल्म से मिली थी बड़ी पहचान Dileep Raj को साल 2007 में आई Milana से खास पहचान मिली थी। इस फिल्म में उन्होंने दिवंगत अभिनेता Puneeth Rajkumar के साथ काम किया था। इसके अलावा वह U Turn और Boyfriend जैसी फिल्मों में भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे। टीवी इंडस्ट्री का भी बड़ा नाम थे Dileep Raj फिल्मों के अलावा Dileep Raj ने कन्नड़ टेलीविजन इंडस्ट्री में भी लंबा सफर तय किया। वह लोकप्रिय टीवी शो Hitler Kalyana में मुख्य भूमिका निभाकर घर-घर में मशहूर हुए थे। उन्होंने अपने प्रोडक्शन हाउस DR Creations के तहत कई टीवी सीरियल्स भी प्रोड्यूस किए थे। थिएटर से शुरू हुआ था अभिनय करियर टीवी और फिल्मों में पहचान बनाने से पहले Dileep Raj थिएटर से जुड़े हुए थे। वह नटरंग और दृष्टि जैसे प्रसिद्ध थिएटर ग्रुप्स के साथ काम करते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात अभिनेत्री Nanditha से हुई, जिन्होंने उन्हें टेलीविजन की दुनिया से परिचित कराया। कई लोकप्रिय धारावाहिकों में किया काम Dileep Raj ने अपने करियर में कई हिट टीवी सीरियल्स में अभिनय किया। इनमें Janani, Ardha Satya, Rangoli, Kumkuma Bhagya, Mangalya और Rathasapthami जैसे नाम शामिल हैं। डबिंग आर्टिस्ट के रूप में भी बनाई पहचान अभिनय और प्रोडक्शन के अलावा Dileep Raj एक बेहतरीन डबिंग आर्टिस्ट भी थे। उन्होंने Aa Dinagalu जैसी फिल्मों में अपनी आवाज दी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने अपने करियर में 24 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और थिएटर से जुड़ाव कभी नहीं छोड़ा। उनकी सहज अभिनय शैली और मजबूत सहायक किरदारों की वजह से उन्हें कन्नड़ टीवी इंडस्ट्री के सबसे भरोसेमंद कलाकारों में गिना जाता था।
कन्नड़ सुपरस्टार Yash की बहुप्रतीक्षित फिल्म Toxic: A Fairytale for Grown-Ups को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। फिल्म की रिलीज डेट एक बार फिर टाल दी गई है। पहले यह फिल्म 4 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ा दिया गया है। ग्लोबल रिलीज की तैयारी में लिया गया फैसला Yash ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि फिल्म पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसे बड़े स्तर पर दुनिया भर में रिलीज करने के लिए नई रणनीति पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि CinemaCon में फिल्म को मिले शानदार रिस्पॉन्स के बाद टीम ने तय किया कि ‘Toxic’ को ग्लोबल स्तर पर सही तरीके से पेश किया जाए। इसके लिए रिलीज टाइमलाइन को दोबारा तय किया जा रहा है। “कुछ कहानियां सब्र मांगती हैं” Yash ने अपने संदेश में लिखा कि कुछ फिल्में सिर्फ बनाई नहीं जातीं, बल्कि वे हमें सिनेमा से प्यार करने की वजह याद दिलाती हैं। उन्होंने फैंस से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा–“कुछ कहानियां वक्त मांगती हैं, और हम आपको एक ऐसी फिल्म देना चाहते हैं जिस पर भारतीय सिनेमा को गर्व हो।” नई रिलीज डेट का इंतजार हालांकि नई रिलीज डेट की घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन मेकर्स ने भरोसा दिलाया है कि फिल्म जल्द ही दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। दमदार स्टारकास्ट और कहानी ‘Toxic: A Fairytale for Grown-Ups’ 1960 के दशक के गोवा पर आधारित एक पिता-पुत्र की रिवेंज स्टोरी है। फिल्म में Kiara Advani, Nayanthara, Huma Qureshi, Tara Sutaria और Rukmini Vasanth जैसे सितारे नजर आएंगे। इसके अलावा Akshay Oberoi, Sudev Nair और Amit Tiwari भी अहम भूमिकाओं में हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।