Kylian Mbappe

Spain players celebrate after defeating France 2-0 to reach the FIFA World Cup 2026 final with a historic clean-sheet record.
FIFA World Cup 2026: स्पेन ने रचा 96 साल का इतिहास, फ्रांस को 2-0 से हराकर फाइनल में बनाई जगह, छह क्लीन शीट का अनोखा रिकॉर्ड

2026 फीफा विश्व कप के पहले सेमीफाइनल में स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फ्रांस को 2-0 से हराकर फाइनल में जगह बना ली। इस जीत के साथ स्पेन ने सिर्फ 16 साल बाद विश्व कप फाइनल में वापसी ही नहीं की, बल्कि 96 साल के विश्व कप इतिहास में ऐसा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया, जो आज तक कोई भी टीम नहीं बना सकी थी। स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में अपनी मजबूत रक्षा पंक्ति और अनुशासित खेल का शानदार प्रदर्शन किया। यही कारण रहा कि फ्रांस जैसी मजबूत टीम भी स्पेन के डिफेंस को भेदने में पूरी तरह नाकाम रही। 96 साल में पहली बार बना यह रिकॉर्ड स्पेन एक ही फीफा विश्व कप में छह क्लीन शीट दर्ज करने वाली पहली टीम बन गई है। फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में मिकेल ओयार्जाबेल और पेड्रो पोरो के गोलों ने जीत सुनिश्चित की, लेकिन मैच की सबसे बड़ी ताकत स्पेन की मजबूत डिफेंस और गोलकीपर उनाई सिमोन का बेहतरीन प्रदर्शन रहा। पूरे टूर्नामेंट में स्पेन ने सात मुकाबलों में केवल एक गोल खाया, जबकि छह मैचों में विरोधी टीम एक भी गोल नहीं कर सकी। एम्बाप्पे समेत फ्रांस के स्टार खिलाड़ी रहे बेअसर किलियन एम्बाप्पे, माइकल ओलिसे और फ्रांस की आक्रामक लाइन से बड़े प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन स्पेन की रणनीतिक डिफेंस ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका ही नहीं दिया। पूरे मुकाबले में फ्रांस लय हासिल नहीं कर सका और सेमीफाइनल से बाहर हो गया। टूटा पुराना विश्व रिकॉर्ड इससे पहले एक विश्व कप संस्करण में सबसे अधिक पांच क्लीन शीट का रिकॉर्ड नीदरलैंड्स (1974), इटली (1990), ब्राजील (1994), फ्रांस (1998) और स्पेन (2010) के नाम दर्ज था। अब स्पेन ने छह क्लीन शीट के साथ यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 44 साल बाद दोहराया गया खास कारनामा मौजूदा यूरो चैंपियन स्पेन अब विश्व कप फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीम बन गई है, जिसने यूरो चैंपियन रहते हुए लगातार दूसरी बार विश्व कप फाइनल में जगह बनाई है। इससे पहले यह उपलब्धि वेस्ट जर्मनी ने 1974 और 1982 में हासिल की थी। स्पेन ने 2008 यूरो जीतने के बाद 2010 विश्व कप जीता था और अब यूरो 2024 चैंपियन रहते हुए 2026 विश्व कप के फाइनल में पहुंच गया है। लगातार 37 मैचों से अजेय स्पेन स्पेन की यह जीत लगातार 37वां अजेय मुकाबला भी रही। टीम ने इस मामले में इटली के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। यदि स्पेन फाइनल मुकाबला जीतता है, तो वह लगातार 38 मैचों तक अजेय रहने वाली पहली राष्ट्रीय फुटबॉल टीम बन जाएगी। फ्रांस के लिए निराशाजनक रिकॉर्ड फ्रांस के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही। 1986 विश्व कप में वेस्ट जर्मनी से 0-2 की हार के बाद यह नॉकआउट चरण में उसकी सबसे बड़ी हार मानी जा रही है। सेमीफाइनल जैसे बड़े मुकाबले में फ्रांस का आक्रमण पूरी तरह स्पेन के डिफेंस के सामने बेअसर साबित हुआ। हार के बाद फ्रांस में उठे सवाल सेमीफाइनल में हार के बाद फ्रांसीसी मीडिया और कई पूर्व खिलाड़ियों ने टीम की रणनीति और प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं। कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने भी स्वीकार किया कि टीम से सामरिक और तकनीकी स्तर पर कई गलतियां हुईं, जिनका फायदा स्पेन ने पूरी तरह उठाया। क्या खत्म होने वाला है डिडिएर डेशॉम्प्स का दौर? फ्रांस के मुख्य कोच डिडिएर डेशॉम्प्स के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके नेतृत्व में फ्रांस ने 2018 में विश्व कप जीता, 2022 में फाइनल खेला और 2026 में सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि स्पेन के खिलाफ मिली हार के बाद अब उनके भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। अब स्पेन की नजर 19 जुलाई को होने वाले विश्व कप फाइनल पर है। यदि टीम खिताब जीतने में सफल रहती है तो वह न केवल विश्व चैंपियन बनेगी, बल्कि कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज करेगी। फिलहाल स्पेन ने यह साबित कर दिया है कि फुटबॉल में मजबूत रक्षा पंक्ति भी उतनी ही अहम होती है जितना शानदार आक्रमण।  

surbhi जुलाई 16, 2026 0
Spain players celebrate after defeating France 2-0 to qualify for the FIFA World Cup 2026 Final in Dallas.
फीफा वर्ल्ड कप 2026: एम्बाप्पे रहे बेअसर, 16 साल बाद फाइनल में पहुंचा स्पेन; फ्रांस को 2-0 से हराया

डलास: फीफा विश्व कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में स्पेन ने दमदार प्रदर्शन करते हुए फ्रांस को 2-0 से शिकस्त देकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। पूरे मुकाबले में स्पेन ने आक्रामक और अनुशासित खेल का बेहतरीन संतुलन दिखाया, जबकि किलियन एम्बाप्पे की अगुआई वाली फ्रांसीसी टीम लगातार संघर्ष करने के बावजूद गोल करने में नाकाम रही। इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार विश्व कप फाइनल में प्रवेश किया और अब वह 16 साल बाद दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने से सिर्फ एक कदम दूर है। शुरुआत से ही स्पेन ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखा और फ्रांस की रक्षापंक्ति पर लगातार दबाव बनाया। स्पेन की तेज पासिंग और सामूहिक खेल के सामने फ्रांस की टीम लय में नजर नहीं आई। दूसरी ओर, एम्बाप्पे को स्पेनिश डिफेंडरों ने पूरे मैच में खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। पेनल्टी से मिली शुरुआती बढ़त मैच का पहला बड़ा मौका 22वें मिनट में आया, जब स्पेन को पेनल्टी मिली। इस मौके को मिकेल ओयरजाबल ने बिना कोई गलती किए शानदार अंदाज में गोल में बदल दिया। उन्होंने गोलकीपर को गलत दिशा में भेजते हुए गेंद को नेट में पहुंचाया और स्पेन को 1-0 की अहम बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद स्पेन का आत्मविश्वास और बढ़ गया। टीम ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और फ्रांस के हमलों को बीच मैदान में ही रोकने की रणनीति अपनाई। फ्रांस ने बराबरी करने की कोशिश जरूर की, लेकिन उसके हमलों में धार की कमी साफ दिखाई दी। पहले हाफ में स्पेन का रहा दबदबा हाफ टाइम तक स्पेन 1-0 से आगे था। फ्रांस ने कुछ मौके जरूर बनाए, लेकिन स्पेन की मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने हर चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया। एम्बाप्पे और फ्रांस के अन्य स्टार खिलाड़ी स्पेनिश डिफेंस को भेदने में असफल रहे। स्पेन ने पहले हाफ में न सिर्फ बढ़त हासिल की, बल्कि खेल की रफ्तार पर भी अपना नियंत्रण बनाए रखा। मिडफील्ड में उसकी पकड़ ने फ्रांस को खुलकर खेलने का अवसर नहीं दिया। पेड्रो पोरो ने जीत पर लगाई मुहर दूसरे हाफ की शुरुआत भी स्पेन ने आक्रामक अंदाज में की। 58वें मिनट में पेड्रो पोरो ने शानदार गोल दागकर स्कोर 2-0 कर दिया। इस गोल ने फ्रांस की वापसी की उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया। इसके बाद फ्रांस ने आक्रमण तेज करने की कोशिश की, लेकिन स्पेन की रक्षापंक्ति ने कोई बड़ी गलती नहीं की। स्पेन ने संयमित खेल दिखाते हुए गेंद पर कब्जा बनाए रखा और मैच के अंतिम मिनटों तक फ्रांस को कोई स्पष्ट गोल करने का मौका नहीं दिया। एम्बाप्पे का जादू नहीं चला पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाले किलियन एम्बाप्पे इस बड़े मुकाबले में अपना प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं रहे। स्पेन के डिफेंडरों ने उन्हें लगातार मार्क किया और खतरनाक मूव बनाने का मौका नहीं दिया। फ्रांस के अन्य स्टार खिलाड़ी भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। 16 साल बाद फिर विश्व कप फाइनल में स्पेन इस शानदार जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार फीफा विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई है। अब उसकी नजर 16 साल बाद दूसरी बार विश्व कप ट्रॉफी जीतने पर होगी। दूसरी ओर, फ्रांस का लगातार दूसरा विश्व कप जीतने का सपना सेमीफाइनल में ही समाप्त हो गया। स्पेन के लिए यह जीत केवल फाइनल का टिकट नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की टीम के आत्मविश्वास और शानदार सामूहिक प्रदर्शन का भी बड़ा प्रमाण है।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
Kylian Mbappe and Lamine Yamal ahead of the FIFA World Cup 2026 semifinal between France and Spain.
FIFA World Cup 2026: फ्रांस और स्पेन के बीच सेमीफाइनल महामुकाबला आज, Mbappe और Yamal पर रहेंगी सबकी नजरें

FIFA World Cup 2026 का पहला सेमीफाइनल फुटबॉल प्रशंसकों के लिए किसी महायुद्ध से कम नहीं होने वाला है। मौजूदा टूर्नामेंट की दो सबसे मजबूत टीमों फ्रांस और स्पेन का आमना-सामना आज अमेरिका के टेक्सास स्थित डलास स्टेडियम में होगा। इस मुकाबले की विजेता टीम सीधे विश्व कप फाइनल में अपनी जगह पक्की करेगी। यह मुकाबला केवल दो टीमों के बीच नहीं, बल्कि दो अलग-अलग फुटबॉल शैलियों की भी टक्कर माना जा रहा है। एक ओर फ्रांस की तेज़ और आक्रामक खेल शैली है, तो दूसरी ओर स्पेन का गेंद पर नियंत्रण और संयमित खेल। Mbappe बनाम Yamal पर टिकी रहेंगी निगाहें सेमीफाइनल का सबसे बड़ा आकर्षण फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एम्बाप्पे और स्पेन के युवा सनसनी लामिन यामाल होंगे। एम्बाप्पे इस विश्व कप में शानदार फॉर्म में हैं और अब तक 8 गोल और 3 असिस्ट के साथ गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। वहीं 18 वर्षीय यामाल अपने शानदार प्रदर्शन से स्पेन को लगातार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। फुटबॉल विशेषज्ञ इस मुकाबले को मौजूदा दौर के सुपरस्टार और भविष्य के सबसे बड़े सितारे के बीच की भिड़ंत भी मान रहे हैं। फ्रांस की ताकत है तेज़ आक्रमण कोच डिडिएर डेशां की टीम पूरे टूर्नामेंट में अपनी तेज़ काउंटर अटैक रणनीति के लिए जानी गई है। टीम के पास एम्बाप्पे के अलावा- उस्मान डेम्बेले माइकल ओलिसे डिज़िरे डुए जैसे आक्रामक खिलाड़ी मौजूद हैं, जो कुछ ही मिनटों में मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। फ्रांस गेंद पर लंबे समय तक कब्जा रखने की बजाय मौके मिलने पर तेज़ हमले करना पसंद करता है। स्पेन का मजबूत डिफेंस और मिडफील्ड दूसरी ओर स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में संतुलित प्रदर्शन किया है। टीम के मिडफील्ड में- रोड्री पेड्री ने खेल की गति को नियंत्रित किया है, जबकि डिफेंस में- आयमेरिक लापोर्ट पाउ कुबार्सी मार्क कुकुरेला की तिकड़ी विपक्षी टीमों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में अब तक केवल एक गोल ही खाया है। हेड-टू-हेड रिकॉर्ड अब तक दोनों टीमों के बीच कुल 38 मुकाबले खेले गए हैं। स्पेन की जीत: 18 फ्रांस की जीत: 13 ड्रॉ: 7 हाल के वर्षों में स्पेन का पलड़ा भारी रहा है। उसने फ्रांस को यूरो 2024 और पिछले वर्ष UEFA Nations League सेमीफाइनल में भी हराया था। मैच का फैसला कहां हो सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि मुकाबले का परिणाम केवल एम्बाप्पे या यामाल के प्रदर्शन पर निर्भर नहीं करेगा। यदि स्पेन के रोड्री और पेड्री मिडफील्ड पर नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो मैच उनकी गति के अनुसार आगे बढ़ सकता है। वहीं यदि फ्रांस गेंद छीनकर तेज़ काउंटर अटैक करने में सफल रहता है, तो एम्बाप्पे और उनके साथी खिलाड़ी स्पेन के डिफेंस को मुश्किल में डाल सकते हैं। दोनों टीमों की संभावित प्लेइंग इलेवन फ्रांस (4-2-3-1) माइक मेग्नां; जूल्स कुंडे, दायो उपामेकानो, विलियम सलीबा, लुकास डिग्ने; औरेलियन त्चौमेनी, एड्रियन राबियो; उस्मान डेम्बेले, माइकल ओलिसे, डिज़िरे डुए; किलियन एम्बाप्पे। स्पेन (4-3-3) उनाई सिमोन; पेड्रो पोरो, आयमेरिक लापोर्ट, पाउ कुबार्सी, मार्क कुकुरेला; मार्टिन जुबिमेंडी, रोड्री, पेड्री; लामिन यामाल, मिकेल ओयारजाबाल, निको विलियम्स। भारत में कब और कहां देखें मैच? फ्रांस और स्पेन के बीच FIFA World Cup 2026 का पहला सेमीफाइनल भारतीय समयानुसार 15 जुलाई को रात 12:30 बजे शुरू होगा। मैच का सीधा प्रसारण Unite8 Sports पर देखा जा सकेगा, जबकि लाइव स्ट्रीमिंग ZEE5 ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। फाइनल की दौड़ में कौन मारेगा बाजी? फ्रांस लगातार तीसरी बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने का इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरेगा। वहीं स्पेन 2010 के बाद पहली बार विश्व कप फाइनल में जगह बनाने की कोशिश करेगा। ऐसे में दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला टूर्नामेंट का सबसे रोमांचक मैच साबित हो सकता है।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Kylian Mbappe celebrates after scoring against Morocco in the FIFA World Cup 2026 quarter-final and setting a historic goal record.
किलियन एम्बाप्पे ने रचा इतिहास, 30 साल से पहले 20 वर्ल्ड कप गोल करने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर बने

फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में मोरक्को के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। उन्होंने इस मुकाबले में गोल कर विश्व कप इतिहास में ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसे अब तक कोई भी खिलाड़ी हासिल नहीं कर पाया था। फ्रांस ने मोरक्को को 2-0 से हराकर लगातार तीसरी बार विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बनाई। इस जीत में एम्बाप्पे ने गोल करने के साथ-साथ एक असिस्ट भी दर्ज किया। 30 साल की उम्र से पहले 20 वर्ल्ड कप गोल का रिकॉर्ड मोरक्को के खिलाफ किया गया गोल एम्बाप्पे का विश्व कप करियर का 20वां गोल था। इसके साथ ही वह 30 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले विश्व कप में 20 गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। यह उपलब्धि उन्हें विश्व फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों की सूची में और मजबूत स्थान दिलाती है। गोल्डन बूट की दौड़ में लियोनेल मेसी की बराबरी एम्बाप्पे का यह गोल मौजूदा विश्व कप का उनका आठवां गोल भी था। इसके साथ उन्होंने लियोनेल मेसी की बराबरी कर ली और दोनों खिलाड़ी अब गोल्डन बूट की दौड़ में संयुक्त रूप से शीर्ष पर हैं। पेनाल्टी चूकी, लेकिन बाद में किया शानदार गोल मैच के पहले हाफ में एम्बाप्पे के पास पेनाल्टी के जरिए गोल करने का मौका था, लेकिन मोरक्को के गोलकीपर यासीन बोनू ने उनका शॉट रोक दिया। हालांकि दूसरे हाफ में एम्बाप्पे ने शानदार गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई और बाद में उस्मान डेम्बेले के गोल में भी अहम असिस्ट किया। चोट की आशंका के बीच बदले गए बाहर मैच के 76वें मिनट में एम्बाप्पे को मैदान से बाहर बुला लिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें कुछ शारीरिक असहजता महसूस हुई थी, जिसके बाद कोच दिदिएर डेशां ने उन्हें आराम देने का फैसला किया। हालांकि उनकी चोट को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक गंभीर अपडेट सामने नहीं आया है। फ्रांस की नजर लगातार तीसरे फाइनल पर फ्रांस ने इस जीत के साथ लगातार तीसरी बार विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। अब टीम का अगला मुकाबला स्पेन और बेल्जियम के बीच होने वाले क्वार्टर फाइनल के विजेता से होगा। फ्रांस 2018 में विश्व चैंपियन बना था, जबकि 2022 में उपविजेता रहा था। अब टीम लगातार तीसरे विश्व कप फाइनल में पहुंचने की कोशिश करेगी। लगातार दमदार प्रदर्शन कर रहे हैं एम्बाप्पे किलियन एम्बाप्पे पिछले कई वर्षों से विश्व फुटबॉल के सबसे खतरनाक स्ट्राइकरों में गिने जाते हैं। विश्व कप जैसे बड़े मंच पर उनका प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है और वह हर टूर्नामेंट में नए रिकॉर्ड अपने नाम कर रहे हैं। मोरक्को के खिलाफ उनका प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि बड़े मुकाबलों में एम्बाप्पे फ्रांस के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हैं।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Morocco head coach reacts after FIFA World Cup 2026 quarter-final defeat to France, focusing on revenge in the 2030 World Cup.
फ्रांस से हार के बाद मोरक्को कोच का बड़ा ऐलान, बोले- 2030 वर्ल्ड कप में लेंगे बदला

फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में फ्रांस के हाथों 2-0 की हार के बाद मोरक्को के मुख्य कोच मोहम्मद ओआहबी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह हार उनकी टीम के लिए सीख साबित होगी और अगली बार जब विश्व कप में फ्रांस का सामना होगा तो मोरक्को उसे बाहर करने की पूरी कोशिश करेगा। फ्रांस ने बोस्टन के गिलेट स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में दूसरे हाफ में किलियन एम्बाप्पे और उस्मान डेम्बेले के गोल की बदौलत जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में जगह बनाई। इसके साथ ही लगातार दूसरे विश्व कप में फ्रांस ने मोरक्को को 2-0 के अंतर से टूर्नामेंट से बाहर किया। 2030 विश्व कप पर टिकी हैं नजरें हार के बावजूद ओआहबी ने भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि टीम अब अगले विश्व कप की तैयारी करेगी, जिसकी मेजबानी मोरक्को, स्पेन और पुर्तगाल संयुक्त रूप से करेंगे। उन्होंने कहा, "फ्रांस दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक है। वे पिछले दो विश्व कप के फाइनल तक पहुंचे हैं और उनके पास शानदार खिलाड़ी हैं। आज वे हमसे बेहतर थे, लेकिन हमें यकीन है कि अगले चार वर्षों में हम और मजबूत होकर लौटेंगे और उन्हें हराने की कोशिश करेंगे।" हार से निराश, लेकिन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भरोसा कोच ने स्वीकार किया कि टीम इस हार से निराश है, क्योंकि उनका लक्ष्य सिर्फ क्वार्टर फाइनल तक पहुंचना नहीं बल्कि विश्व कप जीतना था। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने मैदान पर जीत के लिए हरसंभव प्रयास किया और पूरी प्रतिबद्धता के साथ मुकाबला खेला। हालांकि, फ्रांस की गुणवत्ता ने आखिरकार अंतर पैदा कर दिया। अब अफ्रीका कप ऑफ नेशंस पर रहेगा फोकस मोहम्मद ओआहबी ने बताया कि फिलहाल टीम का अगला बड़ा लक्ष्य अफ्रीका कप ऑफ नेशंस (AFCON) होगा, जिसका आयोजन अगले वर्ष केन्या, युगांडा और तंजानिया में होना है। उनका कहना है कि टीम पहले इस टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन करने और खिताब जीतने पर ध्यान देगी, जिसके बाद 2030 विश्व कप की तैयारियां तेज की जाएंगी। युवा खिलाड़ियों से भविष्य की उम्मीद कोच ने कहा कि मोरक्को के पास प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों की मजबूत फौज है और फुटबॉल संघ भी लगातार टीम के विकास पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्व कप का यह अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगा और इससे भविष्य में टीम और मजबूत बनकर उभरेगी। फ्रांस की ताकत को भी सराहा ओआहबी ने फ्रांस के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी टीम शुरुआत से ही दबाव बना रही थी और वह पहले भी गोल कर सकती थी। उन्होंने माना कि फ्रांस ने बेहतर फुटबॉल खेली, लेकिन मोरक्को के खिलाड़ी पूरे मैच में संघर्ष करते रहे और अंत तक मुकाबले में बने रहने की कोशिश की। कोच ने भरोसा जताया कि टीम सितंबर में फिर से एकजुट होकर नई ऊर्जा के साथ तैयारी शुरू करेगी और आने वाले वर्षों में बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करेगी।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
FIFA World Cup 2026
FIFA World Cup 2026: किलियन एम्बाप्पे ने रचा इतिहास, वर्ल्ड कप नॉकआउट में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने

नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में स्वीडन के खिलाफ 3-0 की जीत में उन्होंने दो गोल दागकर न सिर्फ टीम को अगले दौर में पहुंचाया, बल्कि विश्व कप इतिहास में एक नया कीर्तिमान भी अपने नाम कर लिया। 27 वर्षीय स्टार फॉरवर्ड अब वर्ल्ड कप के नॉकआउट मुकाबलों में सबसे ज्यादा 10 गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने 88 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए इतिहास रच दिया।   रोनाल्डो और लियोनिडास को छोड़ा पीछे इससे पहले विश्व कप के नॉकआउट चरण में सबसे अधिक गोल करने का संयुक्त रिकॉर्ड ब्राजील के महान खिलाड़ियों लियोनिडास और रोनाल्डो के नाम था, जिन्होंने आठ-आठ गोल किए थे। एम्बाप्पे ने स्वीडन के खिलाफ दो गोल कर अपने नॉकआउट गोलों की संख्या 10 तक पहुंचा दी और दोनों दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया।   एम्बाप्पे ने 2018 विश्व कप में अर्जेंटीना के खिलाफ दो गोल और फाइनल में क्रोएशिया के खिलाफ एक गोल किया था। 2022 विश्व कप में उन्होंने पोलैंड के खिलाफ दो गोल और अर्जेंटीना के खिलाफ फाइनल में हैट्रिक लगाई थी। 2026 संस्करण में स्वीडन के खिलाफ दो गोल के साथ उनका रिकॉर्ड और भी मजबूत हो गया है।   गोल्डन बूट की दौड़ में बढ़त स्वीडन के खिलाफ दो गोल के बाद एम्बाप्पे के मौजूदा टूर्नामेंट में छह गोल हो चुके हैं। वह गोलों के मामले में लियोनेल मेसी के बराबर पहुंच गए हैं, लेकिन दो असिस्ट के कारण गोल्डन बूट की रेस में उनसे आगे निकल गए हैं।   वहीं, विश्व कप इतिहास में एम्बाप्पे के कुल गोलों की संख्या अब 18 हो गई है। उन्होंने जर्मनी के दिग्गज मिरोस्लाव क्लोज के 16 गोल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इस सूची में अब उनसे आगे केवल लियोनेल मेसी हैं, जिनके नाम 19 गोल दर्ज हैं। अब राउंड ऑफ 16 में पैराग्वे के खिलाफ होने वाले मुकाबले में एम्बाप्पे के पास इस रिकॉर्ड की बराबरी या उसे तोड़ने का सुनहरा मौका होगा।

anjali kumari जुलाई 1, 2026 0
Lionel Messi
FIFA World Cup 2026: मेसी का मैजिक बरकरार, हैट्रिक के साथ वर्ल्ड कप में बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

नई दिल्ली, एजेंसियां। लियोनेल मेसी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें फुटबॉल का महानतम खिलाड़ियों में क्यों गिना जाता है। 2026 FIFA World Cup के अपने पहले मुकाबले में अर्जेंटीना ने अल्जीरिया को 3-0 से हराया, जिसमें मेसी ने शानदार हैट्रिक लगाकर कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। 20 साल पहले 2006 में जिस टूर्नामेंट में उन्होंने वर्ल्ड कप करियर की शुरुआत की थी, उसी मंच पर उन्होंने एक और यादगार उपलब्धि हासिल की।   वर्ल्ड कप में गोलों के रिकॉर्ड की बराबरी यह मुकाबला मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का 200वां मैच भी था। हैट्रिक की बदौलत उन्होंने वर्ल्ड कप में अपने कुल गोलों की संख्या 16 तक पहुंचा दी और जर्मनी के महान स्ट्राइकर Miroslav Klose के सर्वाधिक 16 गोलों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। इसके साथ ही उन्होंने फ्रांस के स्टार खिलाड़ी Kylian Mbappé के 14 गोलों के आंकड़े को भी पीछे छोड़ दिया। एम्बाप्पे ने इससे पहले सेनेगल के खिलाफ दो गोल दागे थे, लेकिन मेसी की हैट्रिक ने उन्हें फिर शीर्ष पर पहुंचा दिया।   सबसे ज्यादा वर्ल्ड कप मैच खेलने वाले खिलाड़ी   मेसी ने इस मैच के साथ वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा मुकाबले खेलने का अपना रिकॉर्ड भी मजबूत किया। अब उनके नाम 27 विश्व कप मैच हो गए हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर जर्मनी के Lothar Matthäus हैं, जिन्होंने 25 मैच खेले थे। वहीं अर्जेंटीना के लिए मेसी के अंतरराष्ट्रीय गोलों की संख्या 120 तक पहुंच गई है। खास बात यह रही कि लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में यह उनकी पहली वर्ल्ड कप हैट्रिक है।   अब ऑस्ट्रिया से होगी टक्कर ग्रुप चरण में शानदार जीत के बाद अर्जेंटीना का अगला मुकाबला 22 जून को ऑस्ट्रिया से खेला जाएगा। इसके बाद 27 जून को टीम ग्रुप चरण के अपने अंतिम मैच में जॉर्डन का सामना करेगी। मेसी की शानदार फॉर्म को देखते हुए अर्जेंटीना की टीम खिताब की प्रबल दावेदारों में शामिल मानी जा रही है।

abhishek singh जून 19, 2026 0
Lionel Messi
फीफा वर्ल्ड कप में मेसी सिर्फ एक गोल दूर विश्व रिकॉर्ड बनाने से

नई दिल्ली, एजेंसियां। अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी फीफा वर्ल्ड कप के 96 साल के इतिहास में नया कीर्तिमान स्थापित करने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। मेसी अब विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बनने से सिर्फ एक गोल दूर हैं। यदि वह अर्जेंटीना के अगले मुकाबले में गोल करने में सफल रहते हैं तो जर्मनी के दिग्गज मिरोस्लाव क्लोजे का रिकॉर्ड टूट जाएगा।   अर्जेंटीना ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत करते हुए 16 जून को अल्जीरिया को 3-0 से हराया। इस मैच में टीम की जीत के सबसे बड़े नायक मेसी रहे, जिन्होंने हैट्रिक लगाकर तीनों गोल दागे। इस प्रदर्शन के साथ मेसी के विश्व कप में कुल 16 गोल हो गए और उन्होंने क्लोजे के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।   22 जून को रिकॉर्ड पर होगी सबकी नजर अब अर्जेंटीना का अगला मुकाबला 22 जून को ऑस्ट्रिया से होगा। इस मैच में यदि मेसी एक और गोल करते हैं तो वह फीफा वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे सफल गोल स्कोरर बन जाएंगे। फुटबॉल प्रेमियों की नजर अब इसी मुकाबले पर टिकी हुई है।   एम्बापे भी दौड़ में शामिल रिकॉर्ड की इस दौड़ में फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एम्बापे भी पीछे नहीं हैं। 27 वर्षीय एम्बापे अब तक विश्व कप में 14 गोल कर चुके हैं और वह भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के करीब पहुंच रहे हैं। वहीं ब्राजील के दिग्गज रोनाल्डो नाजारियो 15 गोल के साथ सूची में तीसरे स्थान पर हैं।   विश्व कप में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी   16 गोल – मिरोस्लाव क्लोजे (जर्मनी) 16 गोल – लियोनेल मेसी (अर्जेंटीना) 15 गोल – रोनाल्डो नाजारियो (ब्राजील) 14 गोल – किलियन एम्बापे (फ्रांस) यदि मेसी अगले मैच में गोल करते हैं, तो विश्व कप इतिहास का सबसे बड़ा व्यक्तिगत रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज हो।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Kylian Mbappe injured knee controversy with Real Madrid medical team
मेडिकल लापरवाही पर घिरी Real Madrid, गलत स्कैन के बाद चोटिल घुटने के साथ खेले Kylian Mbappe

स्पेनिश फुटबॉल दिग्गज Real Madrid इस समय मैदान के प्रदर्शन से ज्यादा मेडिकल मैनेजमेंट को लेकर विवादों में घिर गया है। क्लब के स्टार खिलाड़ी Kylian Mbappe को लेकर सामने आई रिपोर्ट ने पूरे फुटबॉल जगत में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्लब की मेडिकल टीम की एक बड़ी चूक के कारण एमबाप्पे को चोटिल घुटने के बावजूद खेलने की अनुमति दे दी गई, जिससे उनकी चोट और गंभीर हो गई।   क्या हुई बड़ी गलती? दिसंबर 2025 में एमबाप्पे को घुटने में चोट लगी थी। लेकिन जांच के दौरान कथित तौर पर डॉक्टरों ने उनके गलत घुटने (राइट नी) का MRI स्कैन कर दिया, जबकि चोट लेफ्ट नी में थी। स्कैन में कोई समस्या नहीं दिखी खिलाड़ी को खेलने की अनुमति दे दी गई एमबाप्पे ने तीन मैच खेले इस दौरान चोट और बिगड़ गई बाद में जब सही जांच हुई, तो लेफ्ट नी के लिगामेंट में आंशिक चोट का पता चला।   खिलाड़ी की नाराजगी और असर इस घटना के सामने आने के बाद Kylian Mbappe कथित तौर पर काफी नाराज हुए। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घटना ने उनके निजी मेडिकल स्टाफ में बदलाव के फैसले को भी प्रभावित किया। हालांकि, सार्वजनिक रूप से एमबाप्पे ने कहा कि उनकी फिटनेस अब बेहतर है और वे पूरी तरह ठीक होने की ओर बढ़ रहे हैं।   क्लब पर बढ़ता दबाव इस घटना के बाद Real Madrid की मेडिकल टीम पर सवाल उठने लगे हैं। हाल के समय में कई खिलाड़ियों की चोट मेडिकल स्टाफ में बार-बार बदलाव टीम के प्रदर्शन पर असर इन सबने क्लब के मैनेजमेंट को कठघरे में खड़ा कर दिया है।   AI के इस्तेमाल पर भी उठे सवाल विवाद तब और गहरा गया जब पूर्व न्यूट्रिशनिस्ट ने आरोप लगाया कि क्लब का स्टाफ सप्लीमेंट्स के लिए AI टूल्स, जैसे ChatGPT, की मदद ले रहा था। इससे प्रोफेशनल स्टैंडर्ड और मेडिकल प्रोटोकॉल पर भी बहस शुरू हो गई है।   अहम समय पर बढ़ी मुश्किलें यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब: टीम FC Barcelona से लीग में पीछे चल रही है Bayern Munich के खिलाफ चैंपियंस लीग मुकाबला सामने है ऐसे में यह मामला टीम के मनोबल और प्रदर्शन दोनों पर असर डाल सकता है।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0