Lalu Prasad Yadav

Lalu Yadav Birthday Celebration
79 साल के हुए लालू यादव, राबड़ी आवास में देर रात मना जन्मदिन

रोहिणी का भावुक संदेश— हर मुश्किल में आप मेरी ढाल बनकर खड़े रहें... पटना, एजेंसियां। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का आज 11 जून को 79वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर राबड़ी आवास में बुधवार देर रात पारिवार के बीच लालू यादव ने केक काटा और सभी ने जन्मदिन सेलिब्रेट किया। इस दौरान राबड़ी देवी ने अपने हाथों से लालू यादव को केक खिलाकर जन्मदिन की बधाई दी।  रोहिणी ने किया भावुक पोस्ट इधर, लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने पिता के जन्मदिन पर भावुक संदेश सोशल मीडिया पर साझा किया। रोहिणी ने अपने पोस्ट में लिखा- हर मुश्किल में आप मेरी ढाल बनकर खड़े रहें... रोहिणी ने लिखा कि उनकी जिंदगी में पिता का स्थान कोई और नहीं ले सकता। उनके पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया, उन्हें संभलना और आगे बढ़ना सिखाया। हर मुश्किल घड़ी में ढाल बनकर खड़े रहे। अपने संदेश में रोहिणी ने पिता के प्रेम, त्याग और आशीर्वाद को अपनी सबसे बेशकीमती धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि पिता का स्नेह और मार्गदर्शन ही उनकी ताकत है, जिसने जीवन के हर मोड़ पर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इसके बाद आगे रोहिणी ने ईश्वर से पिता के लिए लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि उनके सिर पर पिता के आशीर्वाद का हाथ हमेशा बना रहे, यही उनकी सबसे बड़ी इच्छा है।  मुख्यमंत्री सम्राट ने लालू यादव के जन्मदिन पर दी बधाई बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी पूर्व सीएम लालू यादव के जन्मदिन पर ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं दीं हैं। सीएम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए राजद सुप्रीमो को बर्थडे की बधाई दी।  राजद कार्यकर्ता मना रहे जश्न इस मौके को लेकर राजद कार्यकर्ताओं में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी कार्यालय को खूबसुरत और आकर्षक ढंग से सजाया गया है। पूरे बिहार में लालू के समर्थक अलग-अलग जगह केक काटकर, मिठाईय़ां बांटकर अपने नेता का जन्मदिन मना रहे हैं।

abhishek singh जून 11, 2026 0
Rabari Devi Tej Pratap
राबड़ी देवी की तबीयत बिगड़ी, हालचाल जानने पहुंचे तेज प्रताप

पटना, एजेंसियां। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की तबीयत खराब होने की खबर के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। शनिवार को उनके बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव पटना स्थित राबड़ी आवास पहुंचे और अपनी मां का हालचाल जाना। मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए राबड़ी देवी की सेहत और परिवार की सुरक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं पर प्रतिक्रिया दी। मां की तबीयत जानने पहुंचे तेज प्रताप राबड़ी आवास से बाहर निकलने के बाद तेज प्रताप यादव ने बताया कि उनकी मां अस्वस्थ हैं, इसलिए वह उनसे मिलने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि परिवार के लिए मां की सेहत सबसे महत्वपूर्ण है और इसी कारण वह उनका हाल जानने आए थे। हालांकि, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की ओर से अब तक राबड़ी देवी की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सुरक्षा हटाने के दावे को बताया गलत तेज प्रताप यादव ने उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा जा रहा था कि लालू परिवार ने अपनी सरकारी सुरक्षा वापस कर दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि परिवार ने सुरक्षा हटाने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उनके अनुसार, सुरक्षा कर्मियों ने दबाव में होने और अपना कमांड हटाए जाने की जानकारी दी थी, लेकिन परिवार की ओर से सुरक्षा लौटाने जैसी कोई कार्रवाई नहीं हुई। तेज प्रताप ने कहा कि बिहार में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और सरकार को इस दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए। आरजेडी ने लगाया सरकार पर आरोप दूसरी ओर, आरजेडी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने दावा किया कि लालू परिवार ने सरकार द्वारा किए जा रहे कथित अपमान के विरोध में सुरक्षा वापस करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि अब पार्टी कार्यकर्ता और नेता ही लालू परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। इस बयान के बाद राबड़ी आवास के बाहर बड़ी संख्या में आरजेडी समर्थकों की मौजूदगी भी देखी गई। सुरक्षा व्यवस्था में हाल ही में हुआ बदलाव गौरतलब है कि दो दिन पहले बिहार सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को दी गई जेड प्लस सुरक्षा में बदलाव करते हुए उन्हें बिहार पुलिस की विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराई थी। वहीं तेज प्रताप यादव की वाई श्रेणी सुरक्षा भी समाप्त कर दी गई थी और उनकी सुरक्षा में केवल एक बॉडीगार्ड तैनात किया गया था। सरकार के इस फैसले के बाद से बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। अब राबड़ी देवी की तबीयत और सुरक्षा को लेकर उठे सवालों ने इस विवाद को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है।

Unknown जून 6, 2026 0
Rohini Acharya
‘लालू परिवार को नुकसान हुआ तो अंजाम भुगतेगी सरकार’, रोहिणी आचार्य का बड़ा बयान

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में एक बार फिर सुरक्षा का मुद्दा गरमा गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव , पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजश्वी यादव  द्वारा अपनी सुरक्षा लौटाए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच सिंगापुर में मौजूद लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने बिहार सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी  पर तीखा हमला बोला है। रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में कटौती का फैसला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कम करने के बाद औपचारिक रूप से सुरक्षा बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसी कारण राबड़ी देवी ने अपने आधिकारिक आवास से सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजने का फैसला किया। ‘करोड़ों लोग हैं लालू परिवार का सुरक्षा कवच’ रोहिणी ने अपने बयान में कहा कि बिहार की करोड़ों जनता ही लालू परिवार की असली सुरक्षा है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि लालू प्रसाद, राबड़ी देवी या परिवार के किसी भी सदस्य को कोई नुकसान पहुंचता है, तो उसके परिणामों की जिम्मेदारी सरकार पर होगी। उन्होंने राजद समर्थकों से भी अपील की कि वे बड़ी संख्या में राबड़ी देवी के आवास पहुंचकर अपना समर्थन दर्ज कराएं। जेडीयू का पलटवार, नीरज कुमार ने उठाए सवाल दूसरी ओर, नीरज कुमार ने रोहिणी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राबड़ी देवी को अभी भी जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त है। उन्होंने दावा किया कि सुरक्षाकर्मियों को औपचारिक प्रक्रिया के बिना वापस भेजा गया। नीरज कुमार ने यह भी कहा कि यदि परिवार सरकारी सुविधाएं छोड़ना चाहता है तो अन्य सुविधाओं पर भी पुनर्विचार कर सकता है। लालू परिवार की सुरक्षा को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब बिहार की राजनीति में नया मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

Unknown जून 6, 2026 0
Lalu Rabari Tejashwi Security
लालू-राबड़ी की Z+ सुरक्षा हटी, तेज प्रताप को सिर्फ एक बॉडीगार्ड; तेजस्वी का Y+ कवर बरकरार

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। राज्य सुरक्षा समिति की बैठक के बाद जारी आदेश के अनुसार दोनों नेताओं की Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली गई है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें विशेष सुरक्षा व्यवस्था मिलती रहेगी। नई सुरक्षा व्यवस्था में क्या मिलेगा? सरकार के नए आदेश के मुताबिक लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को अब बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के 2 से 8 जवान हाउस गार्ड के रूप में उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा पटना जिला बल के दो बॉडीगार्ड, बुलेटप्रूफ वाहन, एचक्यूआरटी पायलट और पुलिस एस्कॉर्ट की सुविधा भी जारी रहेगी। राबड़ी देवी की सुरक्षा में महिला अंगरक्षक की तैनाती भी बनी रहेगी। तेजस्वी यादव की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह बरकरार रखी गई है। उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी। इस सुरक्षा व्यवस्था के तहत बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस के चार जवान, पटना जिला बल के छह बॉडीगार्ड, वाहन और एस्कॉर्ट सुविधा पहले की तरह उपलब्ध रहेंगे। तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में कटौती की गई है। अब तक उन्हें A श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन नए आदेश के बाद उनकी श्रेणी समाप्त कर दी गई है। अब उनकी सुरक्षा के लिए केवल एक व्यक्तिगत अंगरक्षक तैनात रहेगा। परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा यथावत राज्य सुरक्षा समिति के आदेश के अनुसार लालू परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। राज्यसभा सांसद मीसा भारती को तीन अंगरक्षक और राजश्री यादव को एक अंगरक्षक की सुविधा पहले की तरह मिलती रहेगी। सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Unknown जून 6, 2026 0
Benjamin Netanyahu speaks on expanding Israeli military control over large parts of Gaza amid ongoing conflict
गाजा के 70% हिस्से पर कब्जे की तैयारी में इजराइल, नेतन्याहू बोले- धीरे-धीरे बढ़ाएंगे नियंत्रण

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी के 70 प्रतिशत हिस्से पर सैन्य नियंत्रण स्थापित करने का संकेत देकर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है। वेस्ट बैंक में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली सेना धीरे-धीरे गाजा के बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण में ले रही है और अब सैन्य दबाव को और बढ़ाया जाएगा। नेतन्याहू बोले- “एक-एक कदम आगे बढ़ेंगे” कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा, “हम इस समय हमास को दबा रहे हैं। पहले हम गाजा के 50 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित कर रहे थे, अब यह बढ़कर 60 प्रतिशत हो चुका है।” उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने सैन्य नियंत्रण को और बढ़ाने का आदेश दिया है। इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने “100 प्रतिशत” कब्जे की मांग करते हुए नारे लगाए। इस पर नेतन्याहू ने जवाब दिया, “एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं। पहले 70 प्रतिशत तक पहुंचते हैं। फिलहाल वहीं से शुरुआत करते हैं।” सीजफायर समझौते के खिलाफ माना जा रहा कदम विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि इजराइल का यह कदम अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते की शर्तों के विपरीत है। समझौते के तहत इजराइली सेना को एक तय “येलो लाइन” के पीछे हटना था। उस समय गाजा का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा इजराइली नियंत्रण में माना जा रहा था। हालांकि हमास का आरोप है कि इजराइल धीरे-धीरे इस सीमा को आगे बढ़ा रहा है और अब गाजा के लगभग 60 से 64 प्रतिशत हिस्से पर उसका नियंत्रण हो चुका है। शांति वार्ता ठप, दोनों पक्ष आमने-सामने इजराइल और हमास के बीच जारी शांति योजना के अगले चरण में हमास के हथियार छोड़ने और इजराइली सेना की वापसी का प्रस्ताव शामिल है। लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिलहाल पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। इजराइल का कहना है कि वह हमास को पूरी तरह कमजोर किए बिना पीछे नहीं हटेगा, जबकि हमास इजराइली सैन्य कार्रवाई को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बता रहा है। गाजा में मानवीय संकट और गहरा सकता है विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इजराइल गाजा के 70 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तो वहां मानवीय संकट और गंभीर हो सकता है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी स्थिति में गाजा की करीब 22 लाख आबादी को कुल जमीन के एक-तिहाई से भी कम हिस्से में रहने को मजबूर होना पड़ सकता है। युद्ध, बमबारी और लगातार विस्थापन के कारण गाजा के ज्यादातर इलाके पहले ही तबाह हो चुके हैं। “हर खाली जगह पर टेंट लगे हैं” यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विजिटिंग फेलो मुहम्मद शेहादा ने कहा कि हालात पहले से ही बेहद खराब हैं। उन्होंने कहा, “हर खाली जगह पर विस्थापित परिवारों के टेंट लगे हुए हैं। अगर इलाका और छोटा हो गया, तो बड़ी संख्या में लोगों के पास रहने की जगह नहीं बचेगी।” सीजफायर के बाद भी जारी हैं हमले इजराइल और हमास के बीच अक्टूबर 2025 में युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बावजूद गाजा में सैन्य कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकी। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक करीब 900 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इजराइली सेना ने “येलो लाइन” के आसपास के बड़े इलाके को नो-मैन्स-लैंड घोषित कर दिया है, जहां किसी भी गतिविधि को खतरा मानते हुए कार्रवाई की जा रही है। संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई चिंता संयुक्त राष्ट्र की हालिया ब्रीफिंग में उत्तरी गाजा के जबालिया इलाके में इजराइली टैंकों की बढ़ती आवाजाही और ड्रोन हमलों को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध हलचल को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों में भय और असुरक्षा बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की संभावना गाजा में बढ़ती सैन्य कार्रवाई और संभावित क्षेत्रीय कब्जे की रणनीति को लेकर इजराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है। मानवाधिकार संगठनों और कई देशों ने पहले भी गाजा में नागरिकों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो पश्चिम एशिया में संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Lalu yadav news
आज सिंगापुर जायेंगे लालू यादव, क्या रोहिणी आचार्य की पार्टी में वापसी होगी?

पटना, एजेंसियां। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव शुक्रवार 29 मई को रात 11 बजे सिंगापुर के लिए रवाना होंगे। वे दिल्ली से सिंगापुर के लिए फ्लाईट पकड़ेंगे। जानकारी के अनुसार लालू प्रसाद रूटीन हेल्थ चेकअप के लिए सिंगापुर जा रहे हैं। उनकी एक बेटी रोहिणी आचार्य सिंगापुर में ही रहती है। लालू प्रसाद  10 जून तक भारत लौट आयेंगे। 11 जून को लालू प्रसाद का जन्मदिन है, लिहाजा उनकी वापसी की तारीख 10 जून मानी जा रही है। रोहिणी की वापसी का प्रयास करेंगे चर्चा है कि सिंगापुर यात्रा के दौरान लालू प्रसाद अपनी पुत्री रोहिणी आचार्य को वापस पार्टी में लाने का भी प्रयास करेंगे। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान रोहिणी आचार्य पार्टी से और अपने भाई तेजस्वी यादव से नाराज हो गयीं थी। लालू प्रसाद रोहिणी को राजद में संगठन के किसी पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इधर, एक चर्चा यह भी है कि लालू प्रसाद के बडे बेटे तेजप्रताप यादव को पार्टी में वापस लाया जायेगा। उन्हें बिहार विधान परिषद में एमएसली बनाया जा सकता है। सन आफ लालू प्रसाद ने की पुष्टि इधर, लालू प्रसाद के बेहद करीबी और सन आफ लालू प्रसाद के नाम से चर्चित राजद नेता इरफान अहमद अंसारी ने लालू प्रसाद के सिंगापुर जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि रोहिणी आचार्या को पार्टी में वापस लाया जा रहा है।

Unknown मई 29, 2026 0
Lalu Prasad Yadav
लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका, CBI जांच पर नहीं मिली राहत

पटना, एजेंसियां। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को ‘लैंड फॉर जॉब्स’ मामले में बड़ा झटका लगा है। Supreme Court of India ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने Central Bureau of Investigation (CBI) की जांच रद्द करने की मांग की थी।    कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ किया कि इस स्तर पर जांच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। हालांकि कोर्ट ने लालू यादव को राहत देते हुए कहा कि वे ट्रायल के दौरान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A से जुड़े कानूनी मुद्दे उठा सकते हैं। साथ ही निचली अदालत को मामले की सुनवाई मेरिट के आधार पर करने का निर्देश दिया गया है।   धारा 17A पर विवाद यह मामला मुख्य रूप से Prevention of Corruption Act की धारा 17A से जुड़ा है। इस प्रावधान के तहत किसी सरकारी अधिकारी के फैसलों की जांच से पहले पूर्व स्वीकृति जरूरी होती है। लालू यादव के वकील Kapil Sibal ने दलील दी कि बिना मंजूरी के जांच अवैध है, लेकिन कोर्ट ने इस पर फिलहाल अंतिम निर्णय नहीं दिया।   CBI का पक्ष CBI की ओर से दलील दी गई कि इस मामले में पूर्व स्वीकृति जरूरी नहीं थी, क्योंकि आरोपित गतिविधियां आधिकारिक कर्तव्यों के दायरे में नहीं आतीं। कोर्ट ने माना कि इन पहलुओं की जांच ट्रायल कोर्ट में बेहतर तरीके से हो सकती है।    क्या है ‘लैंड फॉर जॉब्स’ मामला? यह मामला 2004-2009 के दौरान रेलवे में भर्ती घोटाले से जुड़ा है, जब लालू यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि नौकरी देने के बदले जमीन ली गई। इस केस में Rabri Devi, Tejashwi Yadav और Misa Bharti समेत कई लोगों पर आरोप तय हो चुके हैं।

Unknown अप्रैल 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 5, 2026 0