रांची। ऐसे अपराधी जो झारखंड से भाग कर विदेशों में छुपे हैं और वहीं से अपना आपराधिक साम्राज्य चला रहे हैं, अब उनकी खैर नहीं है। ऐसे गैंगस्टरों और अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए राज्य की CID और केंद्रीय जांच एजेंसियां पूरी तरह से रेस हैं। झारखंड से विदेश फरार अपराधियों को प्रत्यर्पण संधि के तहत वापस भारत लाने के लिए इंटरपोल और NCB ( नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) ने एक नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत फरार अपराधियों को अपराध की प्रकृति के आधार पर चार विशेष श्रेणियों में विभाजित किया गया है। सीआईडी मुख्यालय ऐसे सभी अपराधियों का डेटा बेस तैयार कर रहा है। इसमें सभी जिलों के एसपी भी सहयोग कर रहे हैं। इसे डेटा बेस को सीआईडी की ओर से इंटरपोल को भेजा जायेगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की जा सके। 4 श्रेणियों में बांटे गए अपराधी इंटरपोल और एनसीबी ने अपराधियों को उनके द्वारा किए गए अपराधों के आधार पर निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया है. श्रेणी 1 : काउंटर टेररिज्म (आतंकवाद विरोधी मामले) और संगठित अपराध श्रेणी 2 : नारकोटिक्स (नशीले पदार्थों और ड्रग्स की तस्करी) से संबंधित अपराध श्रेणी 3 : आर्थिक अपराध ( वित्तीय धोखाधड़ी ) श्रेणी 4 : साइबर क्राइम, मानव तस्करी और अन्य गंभीर मामले। अपराधियों की कुंडली तैयार करने के लिए 6 मुख्य बिंदु विदेशों में छिपे अपराधियों को कानूनी रूप से दबोचने के लिए CID बेहद पुख्ता सबूत जुटा रही है। 24 जिलों के एसपी से निम्नलिखित छह मुख्य बिंदुओं पर अपराधियों का प्रोफाइल मांगा गया है। फरार अपराधी का पूरा नाम और उसका स्थायी – अस्थायी पता। पिता का नाम और अपराधी की सही जन्म तिथि। अपराधी का पासपोर्ट नंबर और उसका हालिया रंगीन (कलर) फोटोग्राफ। फरार अपराधी के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों (केस) का पूरा विवरण। अपराधी का वर्तमान लोकेशन या वह किस देश/जगह पर छिपा है, इसकी जानकारी संबंधित केस में वांटेड अपराधी का फिंगरप्रिंट (यदि पुलिस रिकॉर्ड में उपलब्ध हो)। झारखंड के 3 बड़े गैंगस्टर जो विदेश से चला रहे हैं गैंग झारखंड पुलिस के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती तीन गैंगस्टर बने हुए हैं, जो विदेश में बैठकर झारखंड में रंगदारी, हत्या और धमकी का सिंडिकेट चला रहे हैं। प्रिंस खान (धनबाद) : धनबाद के वासेपुर का रहने वाला कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान इस सूची में सबसे ऊपर है। पुलिस इनपुट के अनुसार, वह वर्तमान में पाकिस्तान में छिपा हुआ है और वहीं से धनबाद के कोयलांचल क्षेत्र में अपना रंगदारी का नेटवर्क ऑपरेट कर रहा है। राहुल दुबे (रामगढ़) : मूल रूप से रामगढ़ जिले का रहने वाला राहुल दुबे भी विदेश से ही अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। जांच एजेंसियां लगातार इसके वर्तमान लोकेशन को ट्रैक करने का प्रयास कर रही हैं। राहुल सिंह (लातेहार) : लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र का निवासी राहुल सिंह भी विदेश फरार है। इसके पहले अजरबैजान में छिपे होने की पुख्ता जानकारी थी, लेकिन हालिया इनपुट के अनुसार वह अब वहां से भी भाग निकला है। पुलिस उसकी नई लोकेशन का पता लगा रही है। पंजाब का ड्रग्स तस्कर दलजिंदर’ इंग्लैंड फरार इन तीन गैंगस्टरों के अलावा, मूल रूप से पंजाब का रहने वाला दलजिंदर सिंह पलामू जिले में दर्ज ड्रग्स तस्करी (नारकोटिक्स) के एक बड़े मामले में वांछित है। झारखंड पुलिस को खुफिया जानकारी मिली है कि वह वर्तमान में इंग्लैंड में शरण लिए हुए है। CID इसकी भी श्रेणी तय कर प्रत्यर्पण की तैयारी में जुटी है।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले में साइबर अपराधी को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना अहिल्यापुर थाना क्षेत्र के चिकसोरिया गांव की है, जहां पुलिस की छापेमारी के दौरान ग्रामीणों और आरोपित के परिजनों ने विरोध करते हुए पथराव कर दिया। इस हमले में पुलिस का वाहन क्षतिग्रस्त हो गया और कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। गुप्त सूचना पर पहुंची थी साइबर पुलिस जानकारी के अनुसार, चामलिटी गांव निवासी साइबर अपराधी चुरामण मंडल अपने ससुराल चिकसोरिया गांव में छिपकर रह रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद गिरिडीह साइबर थाना की टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए गांव पहुंची थी। पुलिस ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की, चुरामण मंडल को इसकी भनक लग गई। भीड़ ने किया विरोध, आरोपी भाग निकला पुलिस के पहुंचते ही आरोपी और उसके सहयोगियों ने ग्रामीणों को इकट्ठा कर विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया गया। हमले के दौरान पुलिस वाहन का शीशा टूट गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी मौके का फायदा उठाकर चुरामण मंडल अपने साथियों के साथ फरार हो गया। कई लोगों पर दर्ज हुआ मामला अहिल्यापुर थाना प्रभारी ऐनुल हक खान ने बताया कि साइबर अपराधी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही थी, लेकिन ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस कार्रवाई में बाधा डालते हुए हमला कर दिया। इस मामले में 5 से 7 नामजद और 15 से 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, पुलिस पर हमला करने और अपराधी को भगाने में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फरार साइबर अपराधी चुरामण मंडल और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए जिलेभर में लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है।
पटना, एजेंसियां। बिहार के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में गरीब एवं दलित परिवारों की किशोरियां एक बेहद सुनियोजित और क्रूर त्रिस्तरीय मानव तस्करी यानी थ्री-टियर ट्रैफिकिंग नेटवर्क के निशाने पर हैं। यह नेटवर्क केवल अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित सिस्टम के रूप में काम करता है, जो गांवों से लड़कियों को बहला-फुसलाकर, धोखे से या दबाव में लेकर देश के बड़े शहरों तक पहुंचाता है। वहां उन्हें घरेलू काम, बंधुआ मजदूरी या जबरन विवाह जैसे अमानवीय हालात में धकेल दिया जाता है। हालिया आंकड़े इस भयावह सच्चाई की पुष्टि करते हैं कि बिहार अब देश के प्रमुख “सोर्स स्टेट” में शामिल हो चुका है। चौंकाने वाले आंकड़े: बिहार में गुमशुदगी का बढ़ता संकट बिहार में हर साल हजारों बच्चे लापता हो रहे हैं। यहां हर वर्ष औसतन 12,000 से 14,000 बच्चे लापता हो रहे हैं। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 14,699 तक पहुंच गया। किशोरियां सबसे अधिक निशाने पर गायब होने वाले कुल बच्चों में लगभग 60 प्रतिशत संख्या 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की है। 2023 के आंकड़े और भी चिंताजनक साल 2023 में कुल 12,299 लापता बच्चों में से लगभग 75 प्रतिशत केवल लड़कियां थीं, यानी हर चार में से तीन बच्चियां थी। रेस्क्यू ऑपरेशन के आंकड़े पिछले दो वर्षों में पुलिस और सामाजिक संगठनों ने मिलकर हजारों बेटियों को बचाया है। 2024-25 में 1,970 लड़कियों को सुरक्षित निकाला गया और 2025-26 में 1,492 लड़कियों का रेस्क्यू किया गया। कैसे काम करता है त्रिस्तरीय मानव तस्करी नेटवर्क यह पूरा सिंडिकेट तीन अलग-अलग स्तरों पर बेहद संगठित तरीके से काम करता है। लेवल-1: लोकल ट्रैपर्स (स्थानीय एजेंट) गांवों में स्थानीय युवाओं को एजेंट बनाकर लड़कियों को निशाना बनाया जाता है। दोस्ती, प्रेम, शादी या नौकरी का लालच दिया जाता है। 1 से 2 महीने के भीतर टारगेट पूरा करने का दबाव होता है। परिवार से दूर कर भरोसे में लेकर लड़कियों को गांव से बाहर निकालना होता है। लेवल-2: ट्रांजिट एजेंट (परिवहन गिरोह) जैसे ही लड़की गांव से बाहर निकलती है, उसे दूसरे नेटवर्क को सौंप दिया जाता है। रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर हैंडओवर कर दिया जाता है। फिर उन्हें नशा देकर या धमकी देकर नियंत्रण में रखा जाता है। इसके बाद लंबी दूरी की ट्रेनों के जरिए अन्य राज्यों में भेज दिया जाता है। लेवल-3: खरीद-बिक्री करने वाला नेटवर्कः महानगरों में यह अंतिम और सबसे खतरनाक स्तर सक्रिय होता है। लड़कियों को अज्ञात स्थानों पर कैद रखा जाता है एवं मानसिक और शारीरिक शोषण किया जाता है। फिर पहचान मिटाकर जबरन शादी या बंधुआ मजदूरी के लिए बेच दिया जाता है। हाल की घटनाएं: कैसे रची गई तस्करी की साजिशः केस-1: हैदराबाद कनेक्शन रूपा (बदला हुआ नाम) साहेबगंज की 19 वर्षीय रूपा (बदला हुआ नाम) 9 फरवरी 2026 को आधार कार्ड सुधरवाने घर से निकली थी। सहेली के ननिहाल से उसे हैदराबाद पहुंचा दिया गया, जहां पार्किंग में नौकरी के बहाने उसे शादी के लिए बेचने की तैयारी थी। पुलिस ने समय रहते काजीगुड़ा से बचाया। केस-2: सिकंदराबाद तक अपहरणः प्रीति (बदला हुआ नाम) कोचस की 15 वर्षीय छात्रा प्रीति (बदला हुआ नाम) 1 जून 2026 को कोचिंग जाते समय लापता हो गयी। दोस्त ने झांसा देकर उसे सासाराम स्टेशन पर अपने जीजा को सौंप दिया। नशा देकर उसे सिकंदराबाद ले जाया गया। बाद में स्टेशन से उसका रेस्क्यू हुआ। केस-3: मोबाइल नंबर का जालः संजना (बदला हुआ नाम) मोतिहारी के पिपरा की 18 वर्षीय संजना (बदला हुआ नाम) सहेली से मिले मोबाइल नंबर के झांसे में आकर सिकंदराबाद भाग गयी। वहां उससे 12 घंटे बंधुआ मजदूरी करायी गयी। जबरन शादी की तैयारी थी, पर पुलिस ने उसे बचा लिया। केस-4: कोलकाता में बेचने की कोशिशः गोपालगंज के महम्मदपुर की 22 वर्षीय रीतु (बदला हुआ नाम) 18 जनवरी 2026 को दवा लेने निकली थी। इसके बाद नहीं लौटी। आरोपी उसे शादी व नौकरी का झांसा देकर कोलकाता ले गया, जहां बेचने की तैयारी थी। 15 दिन बाद बरामद हुई। केस-5: हैदराबाद से रेस्क्यूः सीवान जामो बाजार की 21 वर्षीय रश्मि (बदला हुआ नाम) 18 जनवरी 2026 को फॉर्म भरने निकली और गायब हो गयी। मानव तस्करी नेटवर्क के जरिये उसे भी हैदराबाद पहुंचाया गया, जहां से पुलिस ने उसे मुक्त कराया। हैदराबाद-सिकंदराबाद से रेस्क्यू की गयी 6 लड़किया पिछले छह माह में सिर्फ हैदराबाद-सिकंदराबाद से ही छह से अधिक लड़कियों को बराबद किया गया है। ये लड़कियां बिहार के विभिन्न जिलों से आयी थीं। उन्हें शादी या स्थायी नौकरी देने का झांसा दिया गया था। पहले उन्हें 12-12 घंटे का काम दिया गया और बाद में शादी के लिए बेचने की तैयारी की जा रही थी।
साहिबगंज। जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत राजमहल पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। राजमहल थाना क्षेत्र के फुलवरिया पटाल बगीचा इलाके में छापेमारी कर पुलिस ने 13.7 ग्राम एमडीएमए (MDMA) ड्रग्स बरामद किया है। इस कार्रवाई में दो युवकों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में एसडीपीओ विमलेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस अधीक्षक को क्षेत्र में मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एक विशेष टीम गठित की गई और योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी अभियान चलाया गया। पुलिस को देखकर भागा आरोपी, तलाशी में मिला ड्रग्स छापेमारी के दौरान पुलिस टीम जब फुलवरिया पटाल बगीचा पहुंची, तो एक युवक संदिग्ध गतिविधि करते हुए भागने लगा। पुलिसकर्मियों ने उसका पीछा कर उसे पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से 13.7 ग्राम एमडीएमए बरामद किया गया। पूछताछ में उसकी पहचान मुर्गीटोला निवासी 29 वर्षीय फकरुद्दीन शेख उर्फ मिंटु के रूप में हुई। पूछताछ के दौरान फकरुद्दीन ने इस कारोबार में फुलवरिया निवासी सलमान शेख की संलिप्तता की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सलमान शेख को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों से ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क और अन्य जुड़े लोगों के बारे में पूछताछ की जा रही है। एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 27 के तहत मामला दर्ज किया है। एसडीपीओ ने कहा कि जिले में नशे के कारोबार को खत्म करने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि युवाओं को नशे की ओर धकेलने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद एमडीएमए कहां से लाई गई थी और इसका नेटवर्क किन-किन क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
रांची। रांची के पंडरा इलाके में अवैध रूप से संचालित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई की है। लंबे समय से मिल रही शिकायतों के आधार पर की गई इस कार्रवाई में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। छापेमारी के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जुट गए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सेंटर के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि यहां बिना आवश्यक अनुमति और नियमों का पालन किए अल्ट्रासाउंड सेवाएं संचालित की जा रही हैं। शिकायतों की जांच के बाद विशेष टीम गठित कर छापा मारा गया। निरीक्षण के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों में अनियमितताएं पाई गईं और लाइसेंस संबंधी आवश्यक कागजात भी अधूरे मिले। मौके से तीन लोग गिरफ्तार कार्रवाई के दौरान सेंटर में मौजूद तीन लोगों को पहले हिरासत में लिया गया और पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों से पूछताछ कर यह जानकारी जुटाई जा रही है कि अवैध सेंटर कब से संचालित हो रहा था और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका है। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। मशीनें और रिकॉर्ड जब्त छापेमारी के दौरान अल्ट्रासाउंड मशीन सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और मरीजों से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग अब मशीनों के पंजीकरण, मरीजों की एंट्री, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है। अवैध केंद्रों के खिलाफ जारी रहेगा अभियान स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि पीसीपीएनडीटी एक्ट और अन्य स्वास्थ्य नियमों का उल्लंघन करने वाले केंद्रों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। हाल के महीनों में राज्य के विभिन्न जिलों में ऐसे कई संदिग्ध केंद्रों की जांच की गई है। विभाग का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और कानूनी व्यवस्था बनाए रखने के लिए अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता और फलता विधानसभा सीट से पूर्व उम्मीदवार जहांगीर को भारत-नेपाल सीमा के निकट से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, जहांगीर खान पर जबरन वसूली सहित कई गंभीर आरोप हैं और वह लंबे समय से फरार चल रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तारी उत्तरी बंगाल के भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से की गई। हालांकि सुरक्षा कारणों से गिरफ्तारी की सटीक जगह और ऑपरेशन से जुड़ी अन्य जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई हैं। बताया जा रहा है कि दक्षिण 24 परगना जिले के फलता थाने में उनके खिलाफ सात अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज हैं। हाईकोर्ट से राहत खत्म होने के बाद कार्रवाई मामले में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब Calcutta High Court ने 26 मई को जहांगीर खान को मिली अंतरिम सुरक्षा को रद्द कर दिया। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हुई और उनकी तलाश के लिए कई स्थानों पर छापेमारी की गई। अंततः एसटीएफ ने उन्हें सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। चुनावी हिंसा को लेकर भी रहे चर्चा में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान फलता सीट पर मतदान के समय हिंसा और नियमों के उल्लंघन के आरोपों के कारण जहांगीर खान सुर्खियों में रहे थे। चुनाव के दौरान उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा तैनात अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी थी, जिससे मामला काफी चर्चित हुआ था। विवाद बढ़ने के बाद इस सीट पर दोबारा मतदान भी कराया गया था। पार्टी ने बनाई दूरी चुनाव से पहले जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। हालांकि उस समय यह स्पष्ट नहीं हुआ था कि यह निर्णय पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर लिया गया था या व्यक्तिगत स्तर पर। बाद में All India Trinamool Congress ने स्पष्ट किया था कि यह उनका निजी फैसला था और पार्टी का इससे कोई संबंध नहीं है। पुलिस अब जहांगीर खान से पूछताछ कर रही है और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीवान, एजेंसियां। बिहार के सीवान में सोमवार सुबह अचानक बड़ी पुलिस कार्रवाई हुई। इससे राज्य में हड़कंप मच गया है। यहां सीवान में पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे और RJD विधायक ओसामा शहाब के आवास पर पुलिस ने छापेमारी की। इस दौरान DIG और SP समेत नगर थाना पुलिस मौके पर मौजूद रही और पूरे इलाके को घेर लिया गया। पुलिस की यह कार्रवाई एक पुराने जमीन विवाद और कब्जे के आरोपों से जुड़ी बताई जा रही है। सर्च वारंट के साथ छापा शिकायत के आधार पर कोर्ट से सर्च वारंट मिलने के बाद टीम ने छापा मारा और घर के अंदर दस्तावेजों की जांच शुरू की। सुबह 8 बजे से शुरू हुई छापेमारी जानकारी के मुताबिक पुलिस टीम ने सुबह करीब 8 बजे ओसामा शहाब के नए आवास को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद घर के अंदर तलाशी अभियान चलाया गया और पूछताछ भी की गई। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। इस कार्रवाई में सीवान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुद शामिल रहे। DIG और SP के नेतृत्व में छापा DIG और SP की मौजूदगी में पूरी छापेमारी को अंजाम दिया गया, जिससे मामला और गंभीर माना जा रहा है। ओसामा शहाब पहले से ही कई मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं और हाल के दिनों में उन पर जमीन विवाद से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। अब इस ताजा रेड के बाद सीवान की राजनीति में फिर से हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने भी इस कार्रवाई पर नजर बना ली है। छापेमारी के दौरान इलाके में आम लोगों की आवाजाही भी सीमित कर दी गई। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त बल तैनात रखा ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
सीवान, एजेंसियां। बिहार के सीवान में सोमवार सुबह अचानक बड़ी पुलिस कार्रवाई हुई। इससे राज्य में हड़कंप मच गया है। यहां सीवान में पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे और RJD विधायक ओसामा शहाब के आवास पर पुलिस ने छापेमारी की। इस दौरान DIG और SP समेत नगर थाना पुलिस मौके पर मौजूद रही और पूरे इलाके को घेर लिया गया। पुलिस की यह कार्रवाई एक पुराने जमीन विवाद और कब्जे के आरोपों से जुड़ी बताई जा रही है। सर्च वारंट के साथ छापा शिकायत के आधार पर कोर्ट से सर्च वारंट मिलने के बाद टीम ने छापा मारा और घर के अंदर दस्तावेजों की जांच शुरू की। सुबह 8 बजे से शुरू हुई छापेमारी जानकारी के मुताबिक पुलिस टीम ने सुबह करीब 8 बजे ओसामा शहाब के नए आवास को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद घर के अंदर तलाशी अभियान चलाया गया और पूछताछ भी की गई। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। इस कार्रवाई में सीवान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुद शामिल रहे। DIG और SP के नेतृत्व में छापा DIG और SP की मौजूदगी में पूरी छापेमारी को अंजाम दिया गया, जिससे मामला और गंभीर माना जा रहा है। ओसामा शहाब पहले से ही कई मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं और हाल के दिनों में उन पर जमीन विवाद से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। अब इस ताजा रेड के बाद सीवान की राजनीति में फिर से हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने भी इस कार्रवाई पर नजर बना ली है। छापेमारी के दौरान इलाके में आम लोगों की आवाजाही भी सीमित कर दी गई। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त बल तैनात रखा ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
नई तकनीक के सहारे सबूत सुरक्षित, निगरानी विभाग ने तेज की कार्रवाई बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब कार्रवाई और तेज होती नजर आ रही है। राज्य के संदिग्ध अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कसने के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने करीब 200 आरोपित अफसरों की डिजिटल फाइल तैयार कर ली है। इसका उद्देश्य मामलों की सुनवाई में तेजी लाना और दोषियों को जल्द सजा दिलाना है। तकनीक के सहारे मजबूत हुई जांच भ्रष्टाचार के मामलों में अक्सर सबूतों से छेड़छाड़ और जांच में देरी की शिकायतें आती रही हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए अब आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। निगरानी विभाग ने लगभग 7 लाख रुपये की लागत से एक विशेष ‘ओपन टेक्स्ट फॉरेंसिक इमेजर’ मशीन को शामिल किया है। यह मशीन जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों-जैसे पेन ड्राइव, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों-का सटीक क्लोन तैयार करती है। एक बार डेटा इसमें सुरक्षित हो जाने के बाद उसमें किसी तरह का बदलाव संभव नहीं होता, जिससे जांच की विश्वसनीयता बढ़ गई है। 200 अफसरों की तैयार हुई प्रोफाइल इसी तकनीक के माध्यम से अब तक करीब 200 संदिग्ध अफसरों और कर्मचारियों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर लिया गया है। इसमें उनके खिलाफ मौजूद साक्ष्य और केस से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां शामिल हैं। इसके लिए विशेषज्ञों और तकनीशियनों की अलग टीम भी तैनात की गई है, जो डेटा को सुरक्षित रखने और कोर्ट में पेश करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित कर रही है। स्पीडी ट्रायल के लिए बनी खास टीम मामलों के त्वरित निपटारे के लिए एसपी स्तर के अधिकारी की अगुवाई में 10 सदस्यों की एक विशेष टीम गठित की गई है। इस टीम में डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। टीम का मुख्य काम मामलों की नियमित निगरानी करना और गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करना है, ताकि सुनवाई में देरी न हो। कोर्ट को सौंपी गई आरोपितों की सूची निगरानी विभाग ने 200 आरोपित अफसरों की सूची अदालत को भी सौंप दी है। इससे अब मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है। 25 साल में पहली बार इतनी सख्ती गौरतलब है कि वर्ष 2025 में 29 भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को सजा सुनाई गई, जो पिछले 25 वर्षों में सबसे अधिक है। इसे निगरानी विभाग की सख्त कार्रवाई और बेहतर समन्वय का परिणाम माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।