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difference between kidney stones and gallbladder stones
Kidney Stone या Gallbladder Stone? पेट दर्द को न करें नजरअंदाज, ऐसे पहचानें पथरी कहां है

आजकल बदलती जीवनशैली, कम पानी पीने की आदत और असंतुलित खानपान के कारण पथरी (स्टोन) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई बार लोगों को पेट या कमर में तेज दर्द होता है, लेकिन वे इसे गैस या अपच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि यह किडनी स्टोन या गॉलब्लैडर स्टोन का संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर सही पहचान और इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि दोनों तरह की पथरी में क्या अंतर होता है और इनके लक्षण कैसे अलग-अलग होते हैं। किडनी स्टोन और गॉलब्लैडर स्टोन में क्या अंतर है? किडनी स्टोन मूत्र तंत्र (यूरिनरी सिस्टम) से जुड़ी समस्या है। यह तब बनती है जब पेशाब में मौजूद कैल्शियम, यूरिक एसिड या अन्य खनिज मिलकर कठोर कण बना लेते हैं। वहीं गॉलब्लैडर स्टोन पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या है। यह पित्ताशय (गॉलब्लैडर) में बनती है और आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन जैसे तत्वों के जमने से विकसित होती है। कई मामलों में दोनों प्रकार की पथरी लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के भी रह सकती है। परेशानी तब शुरू होती है जब पथरी रास्ता रोकने लगती है। दर्द से कैसे करें पहचान? किडनी स्टोन के लक्षण कमर या पीठ के एक तरफ अचानक तेज दर्द होना। दर्द का पेट के निचले हिस्से या जांघ तक फैलना। दर्द का रुक-रुक कर तेज होना। पेशाब के दौरान दर्द या जलन महसूस होना। मतली या उल्टी की शिकायत होना। कुछ मामलों में पेशाब में खून भी आ सकता है। गॉलब्लैडर स्टोन के लक्षण दाईं ओर ऊपरी पेट या पसलियों के नीचे तेज दर्द। तला-भुना या ज्यादा वसायुक्त भोजन खाने के बाद दर्द बढ़ना। दर्द कई घंटों तक बना रह सकता है। मतली और उल्टी की समस्या। यदि पथरी पित्त नली में फंस जाए तो बुखार और पीलिया जैसी स्थिति भी हो सकती है। किन लोगों में अधिक होता है पथरी का खतरा? कुछ आदतें और स्वास्थ्य स्थितियां स्टोन बनने का जोखिम बढ़ा सकती हैं, जैसे- दिनभर पर्याप्त पानी न पीना। अधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन। मोटापा या बढ़ता वजन। नियमित शारीरिक गतिविधि की कमी। परिवार में पहले किसी को किडनी स्टोन होने का इतिहास। असंतुलित खानपान और खराब जीवनशैली। कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें? यदि पेट, कमर या पसलियों के नीचे लगातार तेज दर्द हो, पेशाब में खून आए, तेज बुखार, पीलिया या बार-बार उल्टी जैसी समस्या हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। अल्ट्रासाउंड, यूरिन टेस्ट और अन्य जांचों के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि पथरी किडनी में है या गॉलब्लैडर में। समय पर पहचान और उचित उपचार से अधिकांश मरीज बिना किसी गंभीर जटिलता के स्वस्थ हो सकते हैं। नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Pahari Mandir
सावन में रांची के इन प्रसिद्ध शिव मंदिरों में करें दर्शन, मिलेगा महादेव का आशीर्वाद

रांची। भगवान शिव की आराधना का पवित्र महीना सावन इस वर्ष 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। हिंदू धर्म में सावन को शिव भक्ति का सबसे शुभ समय माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र के जाप के माध्यम से भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं। इस वर्ष सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं, जिन्हें विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। राजधानी रांची के प्रमुख शिव मंदिरों में भी सावन को लेकर विशेष तैयारियां शुरू हो गई हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।   पहाड़ी मंदिर में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़ रातू रोड स्थित पहाड़ी मंदिर रांची के सबसे प्रसिद्ध शिवालयों में से एक है। लगभग 350 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 400 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। सावन की प्रत्येक सोमवारी को यहां विशेष जलाभिषेक, श्रृंगार और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से रांची शहर का मनमोहक दृश्य भी दिखाई देता है।   सुरेश्वर धाम और शिव शक्ति धाम में भी विशेष आयोजन चुटिया स्थित सुरेश्वर धाम मंदिर अपने 108 फीट ऊंचे विशाल शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। सावन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं। वहीं, चिरौंदी स्थित शिव शक्ति धाम प्राकृतिक वातावरण और आध्यात्मिक शांति के लिए जाना जाता है। यहां सावन के दौरान भगवान शिव और मां शक्ति की विशेष पूजा-अर्चना होती है।   आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनेंगे शिवालय सावन महीने में रांची के ये शिव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का भी प्रमुख केंद्र बन जाते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि इस पवित्र माह में भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने और इन शिवालयों के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी कारण हर वर्ष सावन में इन मंदिरों में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
Person repeatedly checking a smartphone, highlighting signs of mobile addiction and excessive screen time affecting daily life.
Mobile Addiction: हर कुछ मिनट में फोन चेक करते हैं? ये 5 संकेत बताते हैं कि कहीं आप मोबाइल की लत का शिकार तो नहीं

आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। कामकाज, पढ़ाई, बैंकिंग, मनोरंजन और लोगों से जुड़े रहने तक लगभग हर काम मोबाइल के जरिए होने लगा है। हालांकि, जब इसका इस्तेमाल जरूरत से बढ़कर आदत और फिर लत में बदल जाता है, तो इसका असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोग बिना समझे ही मोबाइल एडिक्शन का शिकार हो जाते हैं। यदि आपके व्यवहार में भी कुछ खास बदलाव दिखाई दे रहे हैं, तो समय रहते सावधान होना जरूरी है। बार-बार मोबाइल देखने की आदत अगर बिना किसी जरूरी कॉल, मैसेज या नोटिफिकेशन के भी आप हर थोड़ी देर में फोन अनलॉक करके देखते रहते हैं, तो यह मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता का संकेत हो सकता है। धीरे-धीरे यह आदत आपकी एकाग्रता और उत्पादकता को भी प्रभावित कर सकती है। फोन दूर होने पर बेचैनी महसूस होना कुछ लोगों को मोबाइल कुछ समय के लिए भी अपने पास न होने पर घबराहट, चिड़चिड़ापन या बेचैनी होने लगती है। यदि आपके साथ भी ऐसा होता है, तो यह मोबाइल की लत का स्पष्ट संकेत माना जा सकता है। सुबह उठते ही और रात को सोने से पहले फोन इस्तेमाल करना यदि आपकी सुबह की शुरुआत मोबाइल देखने से होती है और रात को सोने से पहले भी लंबे समय तक स्क्रीन पर नजरें टिकी रहती हैं, तो यह आदत धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकती है। देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है और शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। काम, पढ़ाई और परिवार से ज्यादा मोबाइल को प्राथमिकता देना जब सोशल मीडिया, वीडियो देखने या मोबाइल गेम्स की वजह से पढ़ाई, नौकरी या परिवार के साथ बिताने वाला समय कम होने लगे, तो यह गंभीर चेतावनी हो सकती है। ऐसी स्थिति में व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। स्क्रीन टाइम कम करने में बार-बार असफल होना अगर आपने कई बार मोबाइल का इस्तेमाल कम करने का फैसला किया, लेकिन हर बार कुछ समय बाद फिर पहले जैसी आदत लौट आई, तो यह भी मोबाइल एडिक्शन का प्रमुख संकेत माना जाता है। मोबाइल की लत से हो सकते हैं ये नुकसान मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल लंबे समय में कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। इनमें शामिल हैं: आंखों में जलन, दर्द और सिरदर्द की समस्या। नींद की गुणवत्ता खराब होना और लगातार थकान महसूस होना। तनाव और मानसिक दबाव बढ़ना। ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी आना। पढ़ाई और कामकाज की कार्यक्षमता प्रभावित होना। परिवार और दोस्तों के साथ संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ना। मोबाइल इस्तेमाल कैसे करें संतुलित? मोबाइल का उपयोग पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है, लेकिन इसकी आदत को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें, सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन का इस्तेमाल बंद करें, अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद रखें और खाली समय में किताब पढ़ने, व्यायाम करने या परिवार के साथ समय बिताने जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता दें। अगर मोबाइल का अत्यधिक उपयोग आपकी दिनचर्या, मानसिक स्थिति या सामाजिक जीवन को लगातार प्रभावित कर रहा है, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या काउंसलर से सलाह लेना भी लाभदायक हो सकता है।    

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Person experiencing painful mouth ulcers while applying a soothing home remedy for relief and oral care.
Mouth Ulcers: मुंह के छालों से परेशान हैं? अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय, जल्द मिल सकती है राहत

मुंह के छाले (Mouth Ulcers) एक आम समस्या है, लेकिन इनके कारण खाना, पानी पीना और बोलना तक मुश्किल हो सकता है। ये छोटे-छोटे घाव जीभ, होंठों के अंदर, मसूड़ों या गालों की अंदरूनी सतह पर हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकतर मामलों में ये 7 से 14 दिनों के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालांकि सही देखभाल और कुछ घरेलू उपाय दर्द कम करने और घाव भरने की प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं। नोट: घरेलू उपाय केवल सामान्य और हल्के छालों में राहत के लिए हैं। यदि समस्या गंभीर या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। मुंह में छाले क्यों होते हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, मुंह के छालों के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे: विटामिन B12, आयरन या फोलिक एसिड की कमी मानसिक तनाव हार्मोनल बदलाव बहुत मसालेदार या खट्टा भोजन मुंह के अंदर चोट लगना कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली छाले होने पर सबसे पहले क्या करें? अगर मुंह में छाले हो गए हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें: मसालेदार, ज्यादा गर्म और खट्टे भोजन से बचें। दिन में 3–4 बार गुनगुने नमक वाले पानी से कुल्ला करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट रखें। मुलायम और ठंडा भोजन खाएं। मुलायम ब्रिसल वाले टूथब्रश का इस्तेमाल करें। ज्यादा दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह से ओरल जेल का उपयोग करें। मुंह के छालों के लिए घरेलू उपाय 1. नमक वाले गुनगुने पानी से कुल्ला आधा चम्मच नमक गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से संक्रमण का खतरा कम हो सकता है और दर्द में राहत मिल सकती है। 2. शहद शहद में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। दिन में 2–3 बार प्रभावित स्थान पर थोड़ा शहद लगाने से आराम मिल सकता है। 3. नारियल तेल नारियल तेल सूजन कम करने और घाव भरने में सहायक माना जाता है। इसे साफ उंगली या कॉटन की मदद से प्रभावित हिस्से पर लगाया जा सकता है। 4. बेकिंग सोडा थोड़ा-सा बेकिंग सोडा पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मुंह का pH संतुलित रखने में मदद मिल सकती है, जिससे जलन कम हो सकती है। 5. ठंडी चीजों का सेवन बर्फ का छोटा टुकड़ा या ठंडा पानी दर्द और सूजन कम करने में राहत दे सकता है। किन चीजों से बचना चाहिए? छालों के दौरान इन चीजों से दूरी बनाना बेहतर माना जाता है: बहुत तीखा और मसालेदार भोजन अधिक खट्टे फल धूम्रपान और तंबाकू शराब बहुत गर्म चाय या कॉफी डॉक्टर से कब संपर्क करें? अगर निम्न में से कोई स्थिति हो, तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें: छाले 2 सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें। बार-बार छाले निकलते हों। तेज बुखार के साथ छाले हों। खाना या पानी निगलने में परेशानी हो। छाले बहुत बड़े या अत्यधिक दर्दनाक हों। अधिकांश सामान्य छाले कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, अच्छी ओरल हाइजीन और समय पर देखभाल से इस समस्या से जल्दी राहत पाने में मदद मिल सकती है।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Numerology chart highlighting Life Path Number 1 compatibility with numbers 2, 3, and 9 for relationships.
Numerology: क्या आपका मूलांक 1 है? जानिए किन मूलांकों के साथ बनती है सबसे अच्छी जोड़ी

अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो अंक ज्योतिष के अनुसार आपका मूलांक 1 माना जाता है। इस मूलांक का स्वामी सूर्य है, जिसे नेतृत्व, आत्मविश्वास, सफलता और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक 1 के लोग महत्वाकांक्षी, स्वतंत्र विचारों वाले और नेतृत्व क्षमता से भरपूर होते हैं। हालांकि रिश्तों और वैवाहिक जीवन में इनका तालमेल कुछ विशेष मूलांकों के साथ अधिक अच्छा माना जाता है। ध्यान दें: अंक ज्योतिष पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसके दावों का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। मूलांक 2 के साथ अच्छा तालमेल यदि किसी व्यक्ति का जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो उसका मूलांक 2 होता है। अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक 2 का स्वामी चंद्रमा है, जो शांति, संवेदनशीलता और भावनात्मक संतुलन का प्रतीक माना जाता है। क्यों मानी जाती है अच्छी जोड़ी? मूलांक 1 का आत्मविश्वासी स्वभाव मूलांक 2 की शांत प्रकृति से संतुलित होता है। दोनों एक-दूसरे की कमियों को पूरा करने की क्षमता रखते हैं। रिश्तों में सहयोग और समझ बेहतर रहने की मान्यता है। मूलांक 3 के साथ बनती है मजबूत साझेदारी 3, 12, 21 या 30 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 3 होता है, जिसका स्वामी बृहस्पति (गुरु) माना जाता है। अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक 3 के लोग बुद्धिमान और सकारात्मक सोच वाले माने जाते हैं। वे मूलांक 1 की नेतृत्व क्षमता को सही दिशा देने में मदद कर सकते हैं। विवाह के साथ-साथ बिजनेस पार्टनरशिप में भी यह संयोजन शुभ माना जाता है। मूलांक 9 के साथ दमदार रिश्ता यदि जन्म तिथि 9, 18 या 27 है, तो मूलांक 9 होता है। इसका स्वामी मंगल माना जाता है। क्या कहते हैं अंक ज्योतिष के जानकार? मूलांक 1 और 9 दोनों ऊर्जा, साहस और नेतृत्व के प्रतीक माने जाते हैं। इनके बीच आकर्षण और उत्साह अधिक हो सकता है। दोनों का स्वभाव मजबूत होने के कारण कभी-कभी मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इन्हें जल्द सुलझाने की क्षमता भी मानी जाती है। मूलांक 1 के लोगों की प्रमुख विशेषताएं अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक 1 वाले लोगों में आमतौर पर ये गुण देखे जाते हैं: नेतृत्व क्षमता आत्मविश्वास स्वतंत्र सोच महत्वाकांक्षा सम्मान पाने की इच्छा नए कार्यों की पहल करने का स्वभाव हालांकि किसी भी रिश्ते की सफलता केवल अंक ज्योतिष पर निर्भर नहीं करती। आपसी विश्वास, संवाद, सम्मान और समझदारी किसी भी संबंध को मजबूत बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Close-up of a palm showing the Money Triangle formation explained in palmistry and financial success beliefs.
Palmistry: हथेली में बनता है 'मनी ट्रायंगल' तो क्या सचमुच मिलती है आर्थिक सफलता? जानें क्या कहता है हस्तरेखा शास्त्र

हस्तरेखा शास्त्र में हथेली पर मौजूद रेखाओं और चिन्हों को व्यक्ति के स्वभाव, करियर और आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखा जाता है। इन्हीं में एक प्रमुख निशान 'मनी ट्रायंगल' (धन त्रिकोण) भी माना जाता है। मान्यता है कि जिन लोगों की हथेली में यह त्रिकोण स्पष्ट रूप से बनता है, उन्हें जीवन में आर्थिक स्थिरता, धन संचय और वित्तीय प्रबंधन में सफलता मिल सकती है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि हस्तरेखा शास्त्र धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसके दावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। क्या होता है मनी ट्रायंगल? हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार मनी ट्रायंगल हथेली के मध्य भाग में बनता है। यह आकृति तब बनती है जब मस्तिष्क रेखा (Head Line), बुध रेखा (Mercury Line) और भाग्य रेखा (Fate Line) एक विशेष स्थिति में मिलकर त्रिकोण का आकार बनाती हैं। यदि यह त्रिकोण स्पष्ट, गहरा और पूरी तरह बंद हो, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। क्या माना जाता है इसका महत्व? मान्यताओं के अनुसार जिन लोगों की हथेली में मनी ट्रायंगल होता है, उनमें: धन कमाने की अच्छी क्षमता होती है। बचत और निवेश की समझ बेहतर मानी जाती है। आर्थिक फैसले सोच-समझकर लेने की प्रवृत्ति होती है। करियर और व्यवसाय में अच्छे अवसर मिलने की संभावना मानी जाती है। कठिन समय में भी वित्तीय संतुलन बनाए रखने की क्षमता देखी जाती है। अधूरा या टूटा हुआ त्रिकोण क्या दर्शाता है? हस्तरेखा शास्त्र में यह भी कहा गया है कि यदि मनी ट्रायंगल: टूटा हुआ हो, धुंधला दिखाई दे, या पूरी तरह बंद न हो, तो व्यक्ति को धन संचय में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी मान्यता है कि ऐसे लोगों के पास धन तो आता है, लेकिन उसे लंबे समय तक बचाकर रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। केवल रेखाओं से तय नहीं होती सफलता हस्तरेखा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि हथेली की रेखाएं केवल संभावनाओं या पारंपरिक संकेतों का प्रतिनिधित्व करती हैं। किसी व्यक्ति की वास्तविक आर्थिक सफलता उसकी मेहनत, सही निर्णय, वित्तीय अनुशासन, निवेश की समझ और निरंतर प्रयास पर अधिक निर्भर करती है। इसलिए यदि आपकी हथेली में मनी ट्रायंगल दिखाई देता है, तो इसे एक सकारात्मक मान्यता के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे सफलता की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Comparison of earbuds, over-ear headphones and bone-conduction headphones highlighting safer listening options for ear health.
Earbuds या Headphones? जानिए कानों के लिए कौन-सा ऑडियो डिवाइस है सबसे सुरक्षित

आज के दौर में स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट के साथ ऑडियो डिवाइस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लोग संगीत, कॉल, पॉडकास्ट और वीडियो सुनने के लिए घंटों तक ईयरबड्स या हेडफोन का उपयोग करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इनमें से कौन-सा डिवाइस आपके कानों के लिए सबसे सुरक्षित है? विशेषज्ञों के अनुसार, केवल डिवाइस ही नहीं बल्कि उसे इस्तेमाल करने का तरीका भी आपकी सुनने की क्षमता पर बड़ा असर डालता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का अनुमान है कि असुरक्षित तरीके से तेज आवाज में ऑडियो सुनने की आदत के कारण दुनिया भर में 1 अरब से अधिक युवा सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचाने के खतरे में हैं। Earbuds, Headphones और Bone-Conduction डिवाइस में क्या है अंतर? Earbuds: ईयरबड्स सीधे कान की नली (Ear Canal) में लगाए जाते हैं। तेज आवाज और लंबे समय तक इनके इस्तेमाल से कान के पर्दे पर अधिक दबाव पड़ सकता है। गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर संक्रमण और सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ जाता है। Over-Ear Headphones: ये पूरे कान को ढक लेते हैं और बाहरी शोर को काफी हद तक कम कर देते हैं। इससे कम आवाज में भी ऑडियो स्पष्ट सुनाई देता है, जिससे कानों पर दबाव कम पड़ता है। Bone-Conduction Devices: ये डिवाइस गाल की हड्डियों (Cheekbones) के जरिए ध्वनि पहुंचाते हैं और कान की नली खुली रहती है। इसलिए बाहर की आवाज भी सुनाई देती रहती है। दौड़ने, साइकिल चलाने या सार्वजनिक स्थानों पर इनका इस्तेमाल अधिक सुरक्षित माना जाता है। विशेषज्ञ क्या कहते हैं? पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक के वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मुरारजी घाडगे के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप किस आवाज में और कितनी देर तक ऑडियो सुनते हैं। तेज वॉल्यूम और लंबे समय तक लगातार सुनना सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचाने का सबसे बड़ा कारण है। उनका कहना है कि सामान्य तौर पर Over-Ear Headphones, ईयरबड्स की तुलना में अधिक सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि इनमें कम वॉल्यूम पर भी बेहतर ऑडियो अनुभव मिलता है। WHO की Safe Listening Guidelines विशेषज्ञ और WHO सुरक्षित सुनने के लिए कुछ जरूरी सुझाव देते हैं: वॉल्यूम को अधिकतम 60% तक रखें। लगातार 60 मिनट से अधिक ऑडियो न सुनें। हर घंटे कम से कम 5 से 10 मिनट का ब्रेक लें। सोते समय ईयरफोन या ईयरबड्स का इस्तेमाल न करें। बच्चों और किशोरों को तेज आवाज में ऑडियो सुनने से बचाएं। यदि कानों में घंटी बजने (Tinnitus), सुनने में कठिनाई या कान बंद होने जैसा महसूस हो तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लें। Noise-Cancelling हेडफोन क्यों हो सकते हैं बेहतर? Noise-Cancelling हेडफोन बाहरी शोर को कम कर देते हैं, जिससे उपयोगकर्ता को आवाज तेज करने की जरूरत नहीं पड़ती। यही वजह है कि लंबी यात्रा, फ्लाइट या भीड़भाड़ वाली जगहों पर ये कानों के लिए बेहतर विकल्प माने जाते हैं। किन संकेतों को नजरअंदाज न करें? यदि आपको ये समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो यह सुनने की क्षमता प्रभावित होने का संकेत हो सकता है: कानों में लगातार घंटी बजना आवाज साफ सुनाई न देना बातचीत समझने में परेशानी ऑडियो सुनने के बाद कान बंद महसूस होना लोगों से बार-बार बात दोहराने के लिए कहना कौन-सा डिवाइस है सबसे सुरक्षित? विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो Noise-Cancelling Over-Ear Headphones सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं। वहीं बाहर की गतिविधियों के दौरान Bone-Conduction Devices बेहतर विकल्प हो सकते हैं। दूसरी ओर, तेज आवाज में लंबे समय तक Earbuds का इस्तेमाल सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है। कुल मिलाकर, डिवाइस से ज्यादा जरूरी है कि आप कम वॉल्यूम, सीमित समय और नियमित ब्रेक के साथ ऑडियो सुनने की आदत अपनाएं।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Woman with color-treated hair protecting vibrant hair color during the monsoon season with proper hair care.
मानसून में हेयर कलर को फीका होने से कैसे बचाएं? अपनाएं ये आसान हेयर केयर टिप्स

बारिश का मौसम रंगे हुए बालों के लिए क्यों बन जाता है चुनौती? मानसून की ठंडी फुहारें भले ही गर्मी से राहत देती हों, लेकिन कलर-ट्रीटेड बालों के लिए यह मौसम कई समस्याएं लेकर आता है। हवा में बढ़ी नमी, पसीना, धूल, प्रदूषण और बारिश का पानी बालों की बाहरी परत (क्यूटिकल) को कमजोर कर देते हैं। इसका असर यह होता है कि हेयर कलर जल्दी फीका पड़ने लगता है, बाल रूखे और बेजान दिखते हैं, साथ ही फ्रिज़, स्प्लिट एंड्स और टूटने की समस्या भी बढ़ जाती है। अगर आपने हाल ही में बालों में कलर कराया है, तो मानसून के दौरान उनकी अतिरिक्त देखभाल करना बेहद जरूरी है। 1. घर से निकलने से पहले लगाएं लीव-इन कंडीशनर बारिश में बाहर निकलने से पहले बालों को हल्का गीला करके कलर-प्रोटेक्ट लीव-इन कंडीशनर लगाएं। इससे बालों पर एक सुरक्षात्मक परत बनती है जो नमी, प्रदूषण और बारिश के पानी से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करती है। घर लौटने के बाद बालों को ठंडे पानी से धोना भी फायदेमंद रहता है। 2. सल्फेट-फ्री शैंपू का करें इस्तेमाल साधारण शैंपू में मौजूद सल्फेट बालों के प्राकृतिक तेल और नमी को कम कर सकता है, जिससे हेयर कलर जल्दी फीका पड़ सकता है। इसलिए मानसून में सल्फेट-फ्री या SLS-फ्री शैंपू चुनना बेहतर विकल्प माना जाता है। यह बालों को बिना नुकसान पहुंचाए साफ करता है और रंग को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है। 3. कंडीशनर लगाना बिल्कुल न छोड़ें कलर किए गए बाल सामान्य बालों की तुलना में अधिक ड्राई और फ्रिज़ी हो सकते हैं। हर बार शैंपू के बाद कंडीशनर जरूर लगाएं और इसे 2–3 मिनट तक बालों में रहने दें। आर्गन ऑयल, मोनोई ऑयल या अन्य मॉइस्चराइजिंग तत्वों वाले कंडीशनर बालों को मुलायम बनाए रखते हैं और कलर की चमक बनाए रखने में मदद करते हैं। 4. माइक्रोफाइबर टॉवल का इस्तेमाल करें गीले बाल सबसे ज्यादा कमजोर होते हैं। ऐसे में सामान्य तौलिये से जोर-जोर से बाल रगड़ने की बजाय माइक्रोफाइबर टॉवल से हल्के हाथों से अतिरिक्त पानी सोखें। इससे बाल कम टूटते हैं, फ्रिज़ कम होता है और स्कैल्प भी बेहतर तरीके से सूखता है। 5. हीट स्टाइलिंग से पहले हीट प्रोटेक्शन जरूर लगाएं अगर आप हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर या कर्लिंग आयरन का इस्तेमाल करते हैं, तो पहले हीट प्रोटेक्टेंट स्प्रे जरूर लगाएं। यह बालों को गर्मी से बचाने के साथ-साथ नमी और पर्यावरणीय नुकसान से भी सुरक्षा देता है, जिससे हेयर कलर ज्यादा समय तक चमकदार बना रहता है। 6. सप्ताह में एक बार हेयर मास्क लगाएं मानसून में सप्ताह में कम से कम एक बार डीप-कंडीशनिंग हेयर मास्क लगाना फायदेमंद होता है। इससे बालों की नमी बनी रहती है, उनकी मजबूती बढ़ती है और हेयर कलर लंबे समय तक फ्रेश दिखाई देता है। 7. नियमित रूप से करें तेल की मालिश हल्की तेल मालिश स्कैल्प को पोषण देने, बालों को मजबूत बनाने और हेयर फॉल कम करने में मदद करती है। मानसून में भारी तेल की बजाय हल्के और आसानी से अवशोषित होने वाले हेयर ऑयल का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है। इन बातों का भी रखें ध्यान बारिश में भीगने के बाद बालों को जल्द से जल्द साफ पानी से धो लें। गीले बालों में कंघी करने से बचें। लंबे समय तक गीले बाल बांधकर न रखें। संतुलित आहार लें और पर्याप्त पानी पिएं ताकि बाल अंदर से भी स्वस्थ रहें। मानसून के दौरान थोड़ी अतिरिक्त देखभाल अपनाकर आप अपने हेयर कलर की चमक लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं और बालों को स्वस्थ, मुलायम व मजबूत रख सकते हैं।  

surbhi जुलाई 7, 2026 0
Tight jeans button showing increasing belly fat and early signs of abdominal weight gain
जींस की बटन हो रही है टाइट? ये संकेत बताते हैं कि पेट की चर्बी बढ़नी शुरू हो गई है

शरीर देता है शुरुआती संकेत, जिन्हें अक्सर लोग कर देते हैं नजरअंदाज आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब खानपान, कम शारीरिक गतिविधि और बढ़ते तनाव के कारण पेट की चर्बी बढ़ना एक आम समस्या बन चुकी है। हालांकि बेली फैट अचानक नहीं बढ़ता, बल्कि शरीर इसके संकेत काफी पहले से देना शुरू कर देता है। समस्या यह है कि ज्यादातर लोग इन शुरुआती लक्षणों को पहचान नहीं पाते। यदि समय रहते इन संकेतों पर ध्यान दिया जाए, तो पेट की बढ़ती चर्बी को नियंत्रित करना आसान हो सकता है। कमर और पेट का आकार धीरे-धीरे बढ़ना पेट की चर्बी बढ़ने का सबसे सामान्य संकेत कमर का आकार बढ़ना है। कई बार शरीर का कुल वजन ज्यादा नहीं बढ़ता, लेकिन पेट और कमर के आसपास फैट जमा होने लगता है। इसका असर कपड़ों की फिटिंग पर दिखाई देता है। पहले जो जींस या पैंट आराम से फिट आती थी, वह धीरे-धीरे टाइट महसूस होने लगती है। यह शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने का शुरुआती संकेत हो सकता है। पेट हमेशा फूला-फूला महसूस होना यदि आपको अक्सर पेट भारी या फूला हुआ महसूस होता है, तो इसे सिर्फ गैस या अपच समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पाचन तंत्र की धीमी गति और शरीर में बढ़ते फैट के कारण ऐसा हो सकता है। समय के साथ यही स्थिति पेट के बाहर निकलने और चर्बी बढ़ने का कारण बन सकती है। छोटी-छोटी गतिविधियों में थकान महसूस होना जब शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है, तो ऊर्जा का स्तर प्रभावित होने लगता है। यदि आपको सामान्य काम करने के बाद भी जल्दी थकान महसूस होती है या हर समय सुस्ती बनी रहती है, तो यह बढ़ते बेली फैट का संकेत हो सकता है। इसके पीछे मेटाबॉलिज्म का धीमा होना भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना यदि थोड़ी दूरी चलने, तेज गति से चलने या कुछ सीढ़ियां चढ़ने के बाद ही सांस फूलने लगे, तो यह भी शरीर में बढ़ती चर्बी का संकेत हो सकता है। पेट और शरीर में जमा अतिरिक्त फैट हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे सामान्य गतिविधियों में भी अधिक मेहनत करनी पड़ती है। कपड़ों की फिटिंग में बदलाव को न करें नजरअंदाज कपड़ों की फिटिंग में बदलाव बेली फैट बढ़ने का सबसे आसान और स्पष्ट संकेत माना जाता है। यदि आपकी पसंदीदा ड्रेस, शर्ट या जींस पेट और कमर के आसपास पहले की तुलना में ज्यादा टाइट महसूस होने लगी है, तो यह संकेत हो सकता है कि शरीर में धीरे-धीरे चर्बी जमा हो रही है। स्वस्थ जीवनशैली से करें बचाव विशेषज्ञों के अनुसार नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन पेट की चर्बी को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शुरुआती संकेतों को पहचानकर समय पर कदम उठाने से भविष्य में होने वाली कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है।  

surbhi जून 2, 2026 0
Elderly person sitting alone looking stressed while another performs exercise highlighting mental and physical health contrast
डिप्रेशन और शारीरिक निष्क्रियता बढ़ा रहे गंभीर बीमारियों का खतरा, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

एक नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी में यह सामने आया है कि डिप्रेशन और शारीरिक निष्क्रियता मिलकर बुजुर्गों में कई गंभीर बीमारियों के खतरे को तेजी से बढ़ा रहे हैं। खासतौर पर कार्डियोमेटाबोलिक मल्टीमॉर्बिडिटी–जिसमें डायबिटीज, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक जैसी बीमारियां शामिल हैं–का जोखिम काफी बढ़ जाता है। 9 साल की स्टडी में चौंकाने वाले आंकड़े चीन में की गई इस लॉन्ग-टर्म स्टडी में 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 2,661 लोगों को करीब 9 साल तक फॉलो किया गया। शुरुआत में सभी प्रतिभागी इन बीमारियों से मुक्त थे, लेकिन अध्ययन के दौरान 797 लोगों में कार्डियोमेटाबोलिक मल्टीमॉर्बिडिटी विकसित हो गई। डिप्रेशन और एक्सरसाइज की कमी का डबल असर स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों को डिप्रेशन था और जो बिल्कुल भी तीव्र शारीरिक गतिविधि (VPA) नहीं करते थे, उनमें इस तरह की बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा पाया गया। यह भी सामने आया कि: डिप्रेशन वाले लेकिन एक्टिव लोग भी जोखिम में रहे बिना डिप्रेशन लेकिन निष्क्रिय लोग भी खतरे से बाहर नहीं थे यानी मानसिक स्वास्थ्य और फिजिकल एक्टिविटी–दोनों ही अलग-अलग तरीके से जोखिम बढ़ाते हैं। एक्सरसाइज से मिल सकती है आंशिक राहत अध्ययन में यह भी पाया गया कि नियमित शारीरिक गतिविधि, खासकर तेज एक्सरसाइज, इस जोखिम को कुछ हद तक कम कर सकती है। हालांकि यह पूरी तरह से खतरे को खत्म नहीं करती, लेकिन निष्क्रिय लोगों की तुलना में एक्टिव लोगों की स्थिति बेहतर पाई गई। क्यों है यह चिंता का विषय? विशेषज्ञों के अनुसार, कार्डियोमेटाबोलिक मल्टीमॉर्बिडिटी एक बार हो जाए तो इसे मैनेज करना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में शुरुआती स्तर पर ही डिप्रेशन और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है। रोकथाम के लिए क्या करें? स्टडी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि: मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए उम्र बढ़ने के साथ हेल्थ चेकअप और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
seraikela elephant attack
सरायकेला में जंगली हाथियों घर में घुसकर ली दो की जान

सरायकेला। झारखंड के सरायकेला जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां जंगली हाथियों के झुंड ने एक परिवार पर हमला कर दो लोगों की जान ले ली। यह घटना ईचागढ़ थाना क्षेत्र के हाड़ात गांव की है, जहां देर रात हाथियों का झुंड अचानक गांव में घुस आया।   घर तोड़ा, परिवार को बनाया निशाना जानकारी के अनुसार, हाथियों ने कई घरों को नुकसान पहुंचाया और एक मकान को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इसी दौरान घर के अंदर सो रहे परिवार के पांच सदस्य हाथियों की चपेट में आ गए। अचानक हुए हमले से गांव में चीख-पुकार मच गई, लेकिन हाथियों के उग्र रूप के कारण ग्रामीण कुछ कर नहीं सके।   मां-बेटी की मौके पर मौत हमले में चाइना देवी और उनकी 13 वर्षीय बेटी अमिता बाला की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं परिवार के अन्य सदस्य—मोहन महतो और सतुला देवी—गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए जमशेदपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है।   गांव में दहशत, प्रशासन से नाराजगी घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग की लापरवाही पर नाराजगी जताई है और समय पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है।   मुआवजे और सुरक्षा की मांग स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने और क्षेत्र में हाथियों के प्रवेश को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाओं ने ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Unknown अप्रैल 25, 2026 0
Raghav Chadha
राघव चड्ढा को मिल सकती है Z सुरक्षा, पंजाब सरकार ने पहले वापस लिया था सुरक्षा कवर

नई दिल्ली, एजेंसियां। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्डा को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। खबर है कि केंद्र सरकार उन्हें जल्द ही Z श्रेणी की सुरक्षा प्रदान कर सकती है। यह चर्चा ऐसे समय में तेज हुई है जब हाल ही में पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने उनका सुरक्षा कवर वापस ले लिया था। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली और पंजाब में उन्हें Z सुरक्षा दी जा सकती है, जबकि अन्य राज्यों में Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलने की संभावना है। Z सुरक्षा देश में उच्च स्तर की सुरक्षा श्रेणियों में से एक मानी जाती है, जिसमें लगभग 20 से अधिक सुरक्षाकर्मी, जिनमें NSG कमांडो भी शामिल होते हैं, तैनात किए जाते हैं।   पार्टी में मतभेद और पद से हटाया जाना हाल ही में पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया था और उनकी जगह अशोक मित्तल  को जिम्मेदारी सौंपी गई। इस फैसले के बाद से पार्टी और चड्ढा के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। राघव चड्ढा ने भी अपने बयानों में कहा था कि उन्हें “खामोश किया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता।” इससे साफ है कि पार्टी के अंदरूनी समीकरणों में बदलाव आया है।   सुरक्षा वापसी और नई अटकलें पंजाब में Bhagwant Mann की सरकार ने उनका सुरक्षा कवर वापस ले लिया था, जिसके बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया। अब केंद्र स्तर पर उन्हें उच्च सुरक्षा दिए जाने की संभावनाओं ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राघव चड्ढा की राजनीतिक भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है।

Unknown अप्रैल 15, 2026 0
Man applying beard oil to well-groomed beard for smooth and stylish look grooming routine
परफेक्ट स्टाइल के लिए टॉप 5 बियर्ड ऑयल

मैं बियर्ड ऑयल के बारे में खुलकर बात करना चाहता हूँ, क्योंकि दाढ़ी सिर्फ एक लुक नहीं–ये एक लाइफस्टाइल है। जब मैंने बियर्ड ग्रूमिंग की दुनिया में कदम रखा, तो मैंने अपने तीन “पर्सनल ग्रूमिंग एक्सपर्ट्स” की मदद ली–मेरे भाई (बियर्ड गोल्स), मेरे पापा (ओरिजिनल स्मूद ऑपरेटर) और मेरी खुद की दाढ़ी (जिसे मैं रॉयल्टी की तरह ट्रीट करता हूँ)। कई हफ्तों तक सबकी मॉर्निंग रूटीन को ऑब्ज़र्व करने, अलग-अलग ऑयल्स ट्राय करने और भाई-पापा की राय लेने के बाद, मैंने समझा कि असल में क्या काम करता है। ऐसे ऑयल्स जो आपकी दाढ़ी को शानदार खुशबू दें और जिद्दी बालों को आसानी से सेट कर दें–ये वही बेस्ट बियर्ड ऑयल्स हैं जो आपकी स्टाइल को परफेक्शन तक ले जाते हैं। टॉप बियर्ड ऑयल्स जो आपके ग्रूमिंग गेम को बनाएंगे शानदार सच कहें तो बियर्ड केयर, मेंस सेल्फ-केयर का अहम हिस्सा है। ये 5 बियर्ड ऑयल्स आपके लुक में शाइन, सॉफ्टनेस, खुशबू और स्टाइल–सब कुछ जोड़ देते हैं। चाहे आप रफ-टफ लुक चाहते हों या क्लीन और क्लासी स्टाइल–ये ऑयल्स आपको बेसिक से बॉस बना देंगे। 1. Jack Black Beard Oil मेरा भाई ग्रूमिंग को लेकर काफी पिकी है। जब उसने Jack Black Beard Oil इस्तेमाल किया, तो मैं समझ गया कि ये खास है। “भाई, ये तो कमाल है,” उसने शीशे में खुद को देखते हुए कहा।  हल्का लेकिन बेहद नॉरिशिंग दाढ़ी को सॉफ्ट और स्मूद बनाता है सबटल (हल्की) खुशबू, जो लोगों को पसंद आए इसमें Kalahari melon और marula जैसे नैचुरल ऑयल्स होते हैं, जो बिना चिपचिपाहट के हाइड्रेशन देते हैं। 2. Premium Beard Oil ये ऑयल हमारे घर में एक तरह की “विरासत” बन चुका है। पापा ने इसे भाई को गिफ्ट किया था, और अब ये दोनों का फेवरेट है। पापा इसे “मॉर्निंग आर्मर” कहते हैं, जबकि भाई इसे लगभग परफ्यूम की तरह इस्तेमाल करता है।  हल्का लेकिन गहराई से मॉइस्चराइजिंग दाढ़ी को स्मूद और सेट करता है शानदार और क्लासी खुशबू ये वो ऑयल है जो हमेशा बाथरूम शेल्फ से गायब रहता है  3. Arlo’s 99% Natural Beard Oil Pro-Growth मेरे पापा किसी भी प्रोडक्ट को आसानी से पसंद नहीं करते। लेकिन जब उन्होंने इसे “मस्ट-हैव” कहा, तो समझिए ये खास है।  99% नैचुरल फॉर्मूला दाढ़ी को सॉफ्ट और शाइनी बनाता है फ्लाईअवे (उड़े हुए बाल) कंट्रोल करता है सबसे खास बात–ये बियर्ड ग्रोथ में भी मदद करता है। पापा हमेशा कहते हैं: “अगर दाढ़ी बढ़े, तो चमके भी।”  4. Forest Essentials Grooming Beard Oil ये पापा का सबसे भरोसेमंद (ride-or-die) बियर्ड ऑयल है। एक बार उन्होंने गलती से सुगंध वाला ऑयल लगा लिया और पूरा दिन “नाइटक्लब” जैसी खुशबू में बिताया 😄 तब से उन्होंने फ्रेगरेंस-फ्री ऑयल ही चुना–और यही उनका फेवरेट बन गया।  बिना खुशबू (fragrance-free)   हल्का और नॉन-ग्रीसी   स्किन-फ्रेंडली, कोई एलर्जी नहीं ये सादा लेकिन असरदार ऑयल है–एकदम क्लासिक। 5. Maharajah Beard Oil (10ml Travel Size) ये छोटा सा ऑयल मेरे दोस्त की वजह से हमारे घर में आया–और अब सबका फेवरेट बन चुका है।  शानदार और रॉयल खुशबू दाढ़ी को स्मूद और सॉफ्ट बनाता है ट्रैवल-फ्रेंडली और कॉम्पैक्ट अब हाल ये है कि मैं, मेरा भाई और पापा–तीनों इसे इस्तेमाल कर रहे हैं। लगता है हमारे घर में “Maharajah Beard Oil क्लब” बन चुका है  बियर्ड ऑयल इस्तेमाल करने के टिप्स हल्की गीली दाढ़ी पर लगाएं 2–5 बूंद काफी होती हैं स्किन तक मसाज करें कंघी से अच्छे से फैलाएं

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Healthy Indian Breakfast Poha vs Paratha comparison
पोहा या परांठा, जानें कौन-सा नाश्ता ज्यादा हेल्दी?

नई दिल्ली,एजेंसियां। सुबह का नाश्ता पूरे दिन की ऊर्जा और सेहत की बुनियाद माना जाता है। भारतीय घरों में पोहा और परांठा दो ऐसे नाश्ते हैं जो सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं। दोनों ही स्वादिष्ट, जल्दी बनने वाले और अलग-अलग स्वाद के अनुसार तैयार किए जा सकते हैं। लेकिन जब बात हेल्थ की आती है, तो सवाल उठता है पोहा ज्यादा हेल्दी है या परांठा? जवाब पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी जरूरत क्या है और आप उसे किस तरीके से बना रहे हैं।   परांठा: पेट भरने वाला और एनर्जी देने वाला नाश्ता परांठा आमतौर पर गेहूं के आटे से बनता है, जो कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है। इसका मतलब है कि यह शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता। अगर परांठा साबुत आटे से बनाया गया हो, तो इसमें फाइबर भी अच्छी मात्रा में होता है, जो पाचन को बेहतर बनाने और ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करता है।   अगर इसमें पनीर, दाल, आलू, गोभी, पालक या मेथी जैसी स्टफिंग डाली जाए, तो यह और ज्यादा पौष्टिक बन सकता है। खासकर पनीर या दाल वाला परांठा प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। हालांकि, परांठा तभी हेल्दी माना जाएगा जब इसे कम तेल या कम घी में बनाया जाए। मक्खन, अचार या ज्यादा तेल के साथ खाने पर इसकी कैलोरी काफी बढ़ सकती है।   पोहा: हल्का, कम फैट और पचने में आसान दूसरी ओर, पोहा हल्का और आसानी से पचने वाला नाश्ता है। यह चपटे चावल से बनता है और कम समय में तैयार हो जाता है। पोहा खासतौर पर उन लोगों के लिए अच्छा माना जाता है जो सुबह हल्का खाना पसंद करते हैं या वजन कंट्रोल करना चाहते हैं। इसमें कैलोरी और फैट अपेक्षाकृत कम होते हैं, इसलिए यह पेट पर भारी नहीं पड़ता। अगर पोहा में मटर, गाजर, प्याज, टमाटर, मूंगफली, करी पत्ता और नींबू डाला जाए, तो इसकी न्यूट्रिशन वैल्यू और बढ़ जाती है। इसे लोहे की कढ़ाही में बनाने पर इसमें आयरन की मात्रा भी बढ़ सकती है। पोहा शरीर को जरूरी कार्बोहाइड्रेट देता है, लेकिन परांठे की तुलना में यह हल्का महसूस होता है।   आखिर कौन है ज्यादा हेल्दी? अगर आप हल्का, लो-फैट और जल्दी पचने वाला नाश्ता चाहते हैं, तो पोहा बेहतर विकल्प है। वहीं अगर आपको ज्यादा देर तक पेट भरा रखना है, ज्यादा ऊर्जा चाहिए या शारीरिक मेहनत ज्यादा होती है, तो परांठा बेहतर हो सकता है। कुल मिलाकर, दोनों ही हेल्दी हो सकते हैं—बस फर्क इस बात का है कि आप उन्हें किस सामग्री और किस मात्रा में खा रहे हैं।

Unknown अप्रैल 2, 2026 0
गर्मियों में खीरा खाने के फायदे और नुकसान सेहत टिप्स
गर्मियों में खीरा खाते हैं? पहले जान लें इसे खाने का सही तरीका

नई दिल्ली,एजेंसियां। गर्मी का मौसम आते ही लोग अपनी डाइट में ठंडी, हल्की और पानी से भरपूर चीजों को शामिल करना शुरू कर देते हैं। इन्हीं में खीरा सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। खीरा शरीर को हाइड्रेट रखने, पाचन सुधारने, वजन कंट्रोल करने और शरीर को ठंडक देने में मदद करता है। लेकिन कई बार लोग इसे ऐसे तरीके से खा लेते हैं, जिससे इसके फायदे कम और नुकसान ज्यादा हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, खीरे का गलत सेवन पेट से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है। खासकर कुछ लोग इसे सुबह खाली पेट या रात में ज्यादा मात्रा में खा लेते हैं, जिससे दिक्कतें शुरू हो सकती हैं।   खाली पेट या रात में खाने से हो सकती है परेशानी सुबह खाली पेट अधिक मात्रा में खीरा खाने से कुछ लोगों को एसिडिटी, पेट दर्द, गैस या जलन जैसी शिकायत हो सकती है। खीरे में पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है, जो हर किसी के पाचन तंत्र को सूट नहीं करती। वहीं, रात में खीरा खाना भी कई लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। रात के समय पाचन तंत्र थोड़ा धीमा काम करता है, ऐसे में खीरा ठीक से पच नहीं पाता और ब्लोटिंग, अपच और गैस की समस्या हो सकती है।   बिना धोए या बहुत ठंडा खीरा खाना भी सही नहीं खीरे को बिना धोए खाना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। बाजार में मिलने वाली सब्जियों पर अक्सर धूल, गंदगी, बैक्टीरिया और कीटनाशकों के अंश लगे हो सकते हैं। ऐसे में बिना साफ किए खाया गया खीरा पेट के संक्रमण या अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसके अलावा, फ्रिज से निकला बहुत ठंडा खीरा तुरंत खाना भी नुकसानदायक हो सकता है। इससे कुछ लोगों को गले में खराश, सर्दी-जुकाम या पाचन संबंधी परेशानी महसूस हो सकती है। इसलिए खीरे को कुछ देर सामान्य तापमान पर रखने के बाद खाना बेहतर माना जाता है।   सही तरीका क्या है? खीरे को खाने से पहले अच्छी तरह धोना जरूरी है। चाहें तो इसे हल्के नमक वाले पानी से भी साफ किया जा सकता है। अगर छिलका सख्त या कड़वा लगे तो उसे हटाकर खाना बेहतर होता है। खीरे में हल्का नमक, काली मिर्च या नींबू मिलाकर खाने से स्वाद भी बढ़ता है और पाचन भी बेहतर हो सकता है।

Unknown अप्रैल 2, 2026 0
Men wearing similar style t-shirts in different colors showcasing smart fashion and minimal wardrobe choices
एक ही चीज़ बार-बार क्यों खरीदते हैं पुरुष? आदत नहीं, स्मार्ट स्टाइल का खेल!

अगर आपने कभी ध्यान दिया हो, तो आपने भी जरूर देखा होगा-कई पुरुष एक ही तरह की शर्ट या टी-शर्ट अलग-अलग रंगों में खरीदते रहते हैं। पहली नजर में यह आदत थोड़ी अजीब लग सकती है, लेकिन इसके पीछे गहरी सोच और व्यवहारिकता छिपी होती है। 1. जब एक स्टाइल फिट बैठ जाए, वही बन जाती है पहचान स्टाइल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सही फिट और सिल्हूट ढूंढना सबसे मुश्किल काम होता है। जब किसी पुरुष को एक ऐसा कट मिल जाता है जो उसके शरीर, व्यक्तित्व और आत्मविश्वास के साथ पूरी तरह मेल खाता है, तो वह उसे बार-बार अपनाता है। David Beckham और Vicky Kaushal जैसे स्टाइल आइकन भी इसी सिद्धांत पर चलते हैं-एक बार सही लुक मिल जाए, तो वही उनकी पहचान बन जाता है। 2. रोज़ के फैसलों को आसान बनाना हर दिन क्या पहनना है, यह तय करना भी एक तरह का मानसिक दबाव होता है। यही कारण है कि कई सफल लोग “uniform dressing” अपनाते हैं। Virat Kohli या Ryan Gosling को देखें-उनका ऑफ-ड्यूटी स्टाइल अक्सर एक जैसा रहता है। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक रणनीति है ताकि रोज़मर्रा के फैसलों को आसान बनाया जा सके। 3. रंगों के जरिए एक्सप्रेशन पुरुष पूरी तरह एक्सपेरिमेंट नहीं करते, लेकिन रंगों के जरिए खुद को व्यक्त जरूर करते हैं। ब्लैक की जगह वाइन, ग्रे की जगह नेवी या बेज की जगह ऑलिव-यही छोटे बदलाव उनके स्टाइल को नया बनाते हैं, बिना रिस्क लिए। 4. कपड़ों से जुड़ी भावनाएं कई बार कपड़े सिर्फ फैशन नहीं होते, बल्कि यादों से जुड़े होते हैं। एक शर्ट जो किसी खास मौके पर पहनी गई हो या जो हमेशा तारीफ दिलाए-वही एहसास दोबारा पाने के लिए पुरुष उसी कपड़े को दूसरे रंग में खरीद लेते हैं। Ranveer Singh जैसे फैशन-फॉरवर्ड स्टार भी कुछ खास कट्स को बार-बार अपनाते हैं, क्योंकि उनमें एक “comfort memory” जुड़ी होती है। 5. कब बन जाता है यह कमजोरी? हालांकि, एक ही चीज़ को बार-बार खरीदना तब समस्या बन सकता है जब यह आदत बन जाए और उसमें कोई सोच या बदलाव न हो। सही तरीका यह है कि पुरुष अपने स्टाइल को समय के साथ अपडेट करें-बेहतर फैब्रिक, बेहतर फिट और नए डिटेल्स के साथ।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
parenting mistakes affecting children
बच्चों के सामने पैरेंट्स से बचें ये 5 गलत आदतें, पड़ सकता है मानसिक असर

नई दिल्ली, एजेंसियां। बच्चों के लिए माता-पिता हमेशा रोल मॉडल होते हैं। बच्चे अपने आसपास हो रही हर छोटी-बड़ी चीज़ को ध्यान से देखते हैं और अनजाने में उसे सीखते भी हैं। इसलिए पैरेंट्स का हर व्यवहार उनके व्यक्तित्व और भावनात्मक विकास पर गहरा असर डालता है। कई बार माता-पिता अनजाने में ऐसे काम कर जाते हैं जो सामान्य लग सकते हैं, लेकिन बच्चों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।   1. बच्चों के सामने झगड़ा करना घर में पैरेंट्स के बीच होने वाले झगड़े बच्चों पर गहरा असर डालते हैं। चिल्लाना, बहस या तनाव देख कर बच्चा असुरक्षित महसूस करता है। इससे उसके अंदर डर, चिंता और गुस्सा बढ़ सकता है, जो आगे चलकर उसके व्यवहार में भी दिखाई देता है। इसलिए कोशिश करें कि बच्चों के सामने मतभेद या बहस न करें।   2. बार-बार डांटना या नीचा दिखाना अगर बच्चे को हर छोटी बात पर डांटा जाए या दूसरों के सामने उसकी बेइज्जती की जाए, तो उसका आत्मविश्वास कमजोर होता है। बच्चा खुद को कमतर समझने लगता है और धीरे-धीरे मनोबल गिरता है। बच्चों को प्यार और पेशेंस के साथ समझाना चाहिए ताकि वे सीखें और उनका आत्मविश्वास भी बढ़े।   3. गलत भाषा या गाली-गलौज का इस्तेमाल बच्चे घर की भाषा जल्दी सीख लेते हैं। अगर माता-पिता गाली-गलौज या अशिष्ट शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो बच्चा भी वही भाषा अपनाने लगता है। इससे उसकी पर्सनैलिटी और सोशल बिहेवियर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए हमेशा साफ और पॉजिटिव भाषा का इस्तेमाल करें।   4. मोबाइल या स्क्रीन में ज्यादा व्यस्त रहना अगर पैरेंट्स हमेशा मोबाइल या टीवी में लगे रहते हैं, तो बच्चा भी स्क्रीन की ओर आकर्षित हो जाता है। इससे उसके साथ आपका इमोशनल कनेक्शन कमजोर हो जाता है। बच्चों के साथ समय बिताना, बात करना और खेलना बहुत जरूरी है।   5. झूठ बोलना या गलत आदतें दिखाना बच्चे माता-पिता को रोल मॉडल मानते हैं। अगर आप झूठ बोलते हैं या गलत आदतें दिखाते हैं, तो बच्चा उन्हें सही मानकर सीख सकता है। कोशिश करें कि आप हमेशा ईमानदारी और अच्छी आदतों का पालन करें, ताकि बच्चा भी वही सीखे।    

Unknown मार्च 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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