LPG News

Oil storage tanks symbolizing India's plan to strengthen crude reserves and fuel security.
अब नहीं मचेगा पेट्रोल-डीजल और LPG पर हाहाकार? चीन की राह पर चल सकता है भारत, सरकार बना रही बड़ी रणनीति

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी थीं। महंगे तेल के कारण देश का आयात बिल बढ़ा, चालू खाते के घाटे पर दबाव पड़ा और रुपये की कमजोरी भी देखने को मिली। अब भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए भारत चीन की तर्ज पर बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार घरेलू रिफाइनरियों को अधिक मात्रा में कच्चे तेल का भंडार तैयार करने और उसे लंबे समय तक बनाए रखने की नीति पर काम कर सकती है। चीन की रणनीति से मिला सबक ईरान संकट के दौरान चीन ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा तेल खरीदने के बजाय अपने विशाल रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) का इस्तेमाल किया। इससे उसे कीमतों में उछाल का असर कम झेलना पड़ा। अब भारत भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहा है ताकि भविष्य में सप्लाई बाधित होने या कीमतों में अचानक वृद्धि की स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतें प्रभावित न हों। फिलहाल सिर्फ 15 दिन का स्टॉक रखती हैं रिफाइनरियां वर्तमान में भारतीय रिफाइनरियां अपनी परिचालन जरूरतों के लिए लगभग 15 दिनों का कच्चा तेल स्टोर करती हैं। नई योजना के तहत इस क्षमता को बढ़ाकर लगभग 30 दिनों की मांग के बराबर किया जा सकता है। इसके लिए करीब 150 मिलियन बैरल कच्चे तेल की जरूरत होगी, क्योंकि भारत की दैनिक खपत लगभग 5 मिलियन बैरल है। 60 हजार करोड़ रुपये तक का खर्च यदि रिफाइनरियों को अपने भंडार को दोगुना करना पड़ता है, तो मौजूदा कीमतों के आधार पर केवल अतिरिक्त कच्चे तेल की खरीद पर लगभग 60,000 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। इसके अलावा: नए स्टोरेज टैंक बनाने होंगे। हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करना पड़ेगा। पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में कई साल लग सकते हैं। इसी कारण कुछ रिफाइनरियां इस प्रस्ताव को लेकर चिंता भी जता सकती हैं। पोर्ट्स के पास बनाए जा सकते हैं स्टोरेज विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार रिफाइनरियों को बंदरगाहों के पास स्टोरेज सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। इससे दो बड़े फायदे होंगे: अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का व्यापार आसान होगा। भारत भविष्य में क्षेत्रीय ऊर्जा व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। सिंगापुर का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि विशाल तेल भंडारण क्षमता ने उसे एशिया के प्रमुख तेल व्यापारिक केंद्रों में शामिल कर दिया है। रणनीतिक भंडार में भारत अभी काफी पीछे यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अंत तक विभिन्न देशों के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार इस प्रकार थे: चीन: 1,397 मिलियन बैरल अमेरिका: 413 मिलियन बैरल जापान: 263 मिलियन बैरल भारत: केवल 21 मिलियन बैरल इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भारत अभी कई बड़े देशों से काफी पीछे है। क्या इससे पेट्रोल और LPG की कीमतों पर असर पड़ेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार होगा, तो अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान देश को तुरंत महंगा तेल खरीदने की मजबूरी कम होगी। इससे: पेट्रोल और डीजल की सप्लाई स्थिर रह सकती है। LPG की उपलब्धता प्रभावित नहीं होगी। आयात बिल और रुपये पर दबाव कम किया जा सकेगा। ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। हालांकि, यह एक दीर्घकालिक योजना है और इसके परिणाम आने में समय लग सकता है।  

surbhi जून 17, 2026 0
Samrat Chaudhary
पटना नहीं, अब पाटलीपुत्र कहिए जनाब, बिहार के सीएम ने कर दिया ऐलान

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना का नाम अब पाटलीपुत्र होगा। राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह घोषणा फुलवारीशरीफ के नदियावां गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की। हालांकि यह नया नाम नहीं है, बल्कि राजधानी पटना को पहले पाटलीपुत्र के नाम से ही जाना जाता था। 16वीं शताब्दी में शेरशाह सूरी के शासनकाल के दौरान पाटलीपुत्र से बदलकर पटना किया गया। भविष्य में 'पाटलिपुत्र' के नाम से पहचान मिलेगी मुख्यमंत्री ने फुलवारीशरीफ के नदियावां गांव में आयोजित प्रखंड सहयोग सह जनकल्याण शिविर में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने बिहार के विकास, कानून-व्यवस्था, उद्योग, किसानों के हित और राजधानी पटना के भविष्य को लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 'बड़ा पटना' की अवधारणा पर काम कर रही है, जिसे भविष्य में 'पाटलिपुत्र' के नाम से पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि राजधानी का विकास केवल वर्तमान शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसके ऐतिहासिक गौरव को भी नई पहचान दी जाएगी। साथ ही नए और आधुनिक टाउनशिप विकसित कर आर्थिक गतिविधियों और निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों, उद्योग और कानून-व्यवस्था पर सरकार का फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को अधिक मुआवजा देने के लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाएगी। उन्होंने बताया कि आपदा, संकट या शादी-विवाह जैसी परिस्थितियों में जरूरतमंद परिवारों को तत्काल सहायता देने के लिए जिलाधिकारियों को विशेष अधिकार दिए गए हैं।  बिहार में अपराधियों के लिए जगह नही कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि अपराधियों के लिए बिहार में कोई जगह नहीं है। महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी सरकार पूरी गंभीरता से कार्रवाई कर रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उद्योगों के विस्तार, नए टाउनशिप और बढ़ते बजट के कारण बिहार तेजी से आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है और आने वाले वर्षों में राज्य की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Commercial LPG cylinder price hike from May 1 impacts restaurants and small businesses in India
कमर्शियल LPG सिलेंडर पर बड़ा झटका: 1 मई से ₹993 महंगा, घरेलू गैस कीमत स्थिर

देशभर में महंगाई के मोर्चे पर एक और बड़ा झटका सामने आया है। 1 मई से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में ₹993 की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। राजधानी दिल्ली में अब इस सिलेंडर की नई कीमत ₹3,071.50 हो गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और छोटे व्यवसायों पर पड़ेगा, जहां LPG का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। तेल कंपनियों द्वारा लिया गया यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पहले से ही कारोबारी लागत बढ़ी हुई है। लगातार दूसरे महीने कीमतों में इजाफा होने से छोटे व्यापारियों के लिए खर्च संभालना और मुश्किल हो सकता है। पिछले महीने भी 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर के दाम ₹195 से ₹218 तक बढ़ाए गए थे, वहीं 5 किलो वाले मिनी सिलेंडर की कीमत में करीब ₹51 का इजाफा हुआ था। घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, कीमत में कोई बदलाव नहीं जहां कमर्शियल सिलेंडर महंगा हुआ है, वहीं आम जनता के लिए राहत की खबर है। 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में इसकी कीमत अभी ₹913 पर ही बनी हुई है। इससे पहले 7 मार्च को इसमें ₹60 की बढ़ोतरी की गई थी। हर महीने की पहली तारीख को तय होते हैं दाम देश की प्रमुख तेल कंपनियां–इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम–हर महीने की पहली तारीख को LPG सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और रुपये-डॉलर के उतार-चढ़ाव के आधार पर तय होती हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल ₹94.72 प्रति लीटर और डीजल ₹87.62 प्रति लीटर मिल रहा है। पिछले साल मार्च में ₹2 प्रति लीटर की कटौती के बाद से इनके दाम स्थिर बने हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बनी वजह कमर्शियल LPG की कीमतों में इस तेज बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन में रुकावट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50% तक की वृद्धि हो चुकी है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम मार्ग पर असर पड़ने से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर अब घरेलू बाजार में भी दिखने लगा है।  

surbhi मई 1, 2026 0
People standing in long queues outside LPG gas agency amid supply concerns in India
LPG आपूर्ति पर संकट की आशंका: जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने लागू किया ESMA, रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का निर्देश

  पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने LPG की संभावित कमी और जमाखोरी को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए Essential Services Maintenance Act (ESMA) के प्रावधान लागू कर दिए हैं। सरकार ने तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को LPG उत्पादन अधिकतम करने और उपलब्ध हाइड्रोकार्बन संसाधनों को LPG पूल की ओर मोड़ने का निर्देश दिया है, ताकि घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अनिश्चितता बढ़ गई है। खास तौर पर Strait of Hormuz के आसपास की स्थिति ने तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता पैदा कर दी है। भारत अपने कुल कच्चे तेल और गैस आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से प्राप्त करता है, जो इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं।   LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश सरकार ने आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए देश की सभी प्रमुख रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उद्देश्य यह है कि घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जा सके और बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति पैदा न हो। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की कुल LPG खपत लगभग 3.13 करोड़ टन रही, जबकि घरेलू स्तर पर इसका उत्पादन करीब 1.28 करोड़ टन ही हो पाया। शेष मांग को आयात के जरिए पूरा करना पड़ा। ऐसे में वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान की आशंका को देखते हुए सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं।   प्राकृतिक गैस वितरण की प्राथमिकताएं तय सरकार ने आवश्यक वस्तु कानून के प्रावधान लागू करते हुए प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और वितरण की प्राथमिकता भी तय कर दी है। इसके तहत पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और वाहनों के लिए संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) को पहली प्राथमिकता दी गई है और इन्हें 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी प्राथमिकता उर्वरक उत्पादन करने वाले संयंत्रों को दी गई है। इन संयंत्रों को उनकी पिछले छह महीनों की औसत जरूरत के आधार पर कम से कम 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है, ताकि कृषि क्षेत्र पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।   ESMA क्या है Essential Services Maintenance Act (ESMA) एक ऐसा कानून है, जिसे आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए लागू किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि आम जनता के दैनिक जीवन से जुड़ी सेवाएं-जैसे सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं और ऊर्जा आपूर्ति-किसी भी स्थिति में बाधित न हों।   महाराष्ट्र में गैस सिलेंडर के लिए कतारें इस बीच गैस की संभावित कमी की खबरों के बाद कुछ क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के बीच चिंता भी बढ़ती दिखाई दे रही है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी और कोल्हापुर जैसे शहरों में LPG सिलेंडर लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें देखी गई हैं। कई उपभोक्ता समय से पहले ही सिलेंडर जमा करने की कोशिश कर रहे हैं। रत्नागिरी शहर की ‘शांतादुर्गा गैस एजेंसी’ समेत कई वितरण केंद्रों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की भीड़ देखी गई, जिससे स्थानीय स्तर पर आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।   सरकार की अपील सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे घबराहट में गैस सिलेंडर का अतिरिक्त भंडारण न करें। अधिकारियों का कहना है कि देश में घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और फिलहाल घबराने की कोई जरूरत नहीं है।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0