LPG Update

Petroleum Minister Hardeep Singh Puri addressing fuel price concerns amid rising global crude oil tensions.
क्या बढ़ने वाली हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें? LPG को लेकर सरकार ने क्या कहा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर देश में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की चर्चा तेज है. इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा कि फिलहाल देश में ईंधन को लेकर कोई संकट नहीं है, लेकिन यह मान लेना भी सही नहीं होगा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें आगे कभी नहीं बढ़ेंगी. चार साल से नहीं बढ़ीं कीमतें, लेकिन भविष्य हालात पर निर्भर CII Annual Business Summit 2026 में बोलते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले चार साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के फैसले पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और आर्थिक हालात पर आधारित होते हैं. उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों को सरकार ने अवसर में बदलने का काम किया है और फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है. देश के पास कितना ईंधन स्टॉक? सरकार के मुताबिक भारत के पास अभी: कच्चे तेल और LNG का करीब 69 दिनों का भंडार LPG का लगभग 45 दिनों का स्टॉक मौजूद है केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य है और देश में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी. LPG उत्पादन में बड़ा इजाफा पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए सरकार ने एलपीजी उत्पादन भी बढ़ा दिया है. मंत्री के अनुसार: पहले प्रतिदिन 35-36 हजार टन LPG उत्पादन हो रहा था अब इसे बढ़ाकर 54 हजार टन प्रतिदिन कर दिया गया है सरकार का कहना है कि यह कदम भविष्य की जरूरतों और संभावित दबाव को ध्यान में रखकर उठाया गया है. पीएम मोदी ने लोगों से क्या अपील की? प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में हैदराबाद की रैली में लोगों से ईंधन बचाने की अपील की थी. उन्होंने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया संकट का असर कम करने की कोशिश कर रही है, लेकिन लोगों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी. पीएम मोदी ने लोगों को सलाह दी कि: पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम करें मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा उपयोग करें कारपूलिंग अपनाएं इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ें पार्सल के लिए रेलवे का इस्तेमाल करें जरूरत होने पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ अपनाएं विदेश यात्राएं और सोने की खरीद फिलहाल टालें प्रधानमंत्री ने कहा कि इन कदमों से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी.  

surbhi मई 12, 2026 0
Small 5kg LPG cylinder available without address proof under new government policy in India.
बिना एड्रेस प्रूफ के मिलेगा 5 किलो LPG सिलेंडर: सरकार का बड़ा फैसला, लाखों लोगों को राहत

ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों के लिए बड़ा राहत भरा कदम उठाया है। अब 5 किलोग्राम का छोटा एलपीजी सिलेंडर खरीदने के लिए एड्रेस प्रूफ की जरूरत नहीं होगी। यह नई व्यवस्था खासतौर पर प्रवासी मजदूरों, छात्रों और अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने Free Trade LPG (FTL) cylinder की बिक्री के नियमों को सरल बना दिया है। अब कोई भी व्यक्ति सिर्फ एक वैध फोटो पहचान पत्र दिखाकर यह सिलेंडर आसानी से खरीद सकता है। एड्रेस प्रूफ का झंझट खत्म अब तक गैस कनेक्शन लेने के लिए पते का प्रमाण देना अनिवार्य था, जिससे कई लोगों को परेशानी होती थी। खासकर वे लोग जो काम या पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में रहते हैं, उनके लिए यह प्रक्रिया काफी जटिल थी। नई व्यवस्था के तहत यह बाध्यता पूरी तरह खत्म कर दी गई है। किन डॉक्यूमेंट्स से मिलेगा सिलेंडर? अब 5 किलो LPG सिलेंडर लेने के लिए आपको सिर्फ इनमें से कोई एक आईडी दिखानी होगी: आधार कार्ड पैन कार्ड वोटर आईडी ड्राइविंग लाइसेंस केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी कोई भी फोटो पहचान पत्र क्यों लिया गया यह फैसला? पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई चेन में आई रुकावटों के चलते ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में सरकार छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाकर आम लोगों पर पड़ने वाले असर को कम करना चाहती है। 23 मार्च से अब तक देशभर में 6.6 लाख से ज्यादा छोटे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। अकेले 4 अप्रैल को ही करीब 90,000 सिलेंडर की बिक्री हुई, जो इसकी बढ़ती मांग को दर्शाता है। किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा? स्टूडेंट्स और बैचलर: जो अकेले रहते हैं और कम मात्रा में खाना बनाते हैं प्रवासी मजदूर: जिनके पास स्थायी पता नहीं होता बैकअप यूजर: बड़े सिलेंडर खत्म होने पर इमरजेंसी उपयोग ट्रैवलर्स: पिकनिक या यात्रा के दौरान आसानी से ले जाने योग्य रिफिल पर भी कोई रोक नहीं इस योजना की खास बात यह है कि ग्राहक साल में कितनी भी बार सिलेंडर रिफिल करवा सकते हैं। डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट्स पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया गया है, जिससे सप्लाई में किसी तरह की कमी न हो।  

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
LPG rate list April 1 2026
आज से महंगा हुआ कमर्शियल LPG सिलेंडर, यहां जानें आपके शहर का नया रेट

 नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में 1 अप्रैल 2026 से कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय हालात और मिडिल ईस्ट तनाव का असर अब भारतीय बाजार पर भी दिखने लगा है।   दिल्ली-कोलकाता में सबसे ज्यादा असर नई दरों के अनुसार, दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में ₹195.50 की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद इसकी कीमत ₹2078.50 हो गई है। पहले यह ₹1884.50 में मिल रहा था। वहीं कोलकाता में इसकी कीमत ₹218 बढ़कर ₹2208 हो गई है।   अलग-अलग शहरों में नई कीमतें कमर्शियल LPG सिलेंडर की ताजा कीमतें इस प्रकार हैं: दिल्ली – ₹2078.50 कोलकाता – ₹2208 मुंबई – ₹2031 चेन्नई – ₹2246.50 पटना – ₹2365 जयपुर – ₹2031 रांची – ₹2120 5 किलो फ्री ट्रेड LPG भी महंगा केवल 19 किलो वाला सिलेंडर ही नहीं, बल्कि 5 किलो फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर की कीमत भी बढ़ा दी गई है। अब इसकी कीमत ₹549 प्रति रिफिल हो गई है, यानी इसमें ₹51 की बढ़ोतरी हुई है।   मार्च में भी बढ़ चुकी थीं कीमतें यह पहली बार नहीं है जब कमर्शियल गैस महंगी हुई है। इससे पहले 1 मार्च 2026 को भी कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में ₹114.50 की बढ़ोतरी की गई थी। वहीं 7 मार्च को घरेलू गैस सिलेंडर भी ₹60 महंगा हुआ था। कुल मिलाकर, पिछले एक महीने में कमर्शियल LPG की कीमतों में लगभग ₹300 तक का इजाफा हो चुका है।

Anjali Kumari अप्रैल 1, 2026 0
LPG cylinder with Aadhaar eKYC verification on mobile app, highlighting mandatory gas KYC update process
झारखंड में LPG उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सूचना: E-KYC नहीं कराया तो रुक सकती है गैस सप्लाई

झारखंड में घरेलू गैस उपभोक्ताओं के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है। गैस कंपनियों ने अब E-KYC (E-KYC) को अनिवार्य कर दिया है। यदि उपभोक्ता समय रहते अपनी KYC पूरी नहीं करते हैं, तो आने वाले दिनों में गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गैस का लाभ केवल वास्तविक उपभोक्ताओं तक ही पहुंचे। क्यों जरूरी है E-KYC? गैस कंपनियों के अनुसार, E-KYC के जरिए उपभोक्ताओं की पहचान सत्यापित की जा रही है। इससे फर्जी कनेक्शन और गलत उपयोग पर रोक लगेगी। अगर किसी उपभोक्ता ने अभी तक KYC नहीं कराया है, तो उसे जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है, वरना गैस सप्लाई में बाधा आ सकती है। घर बैठे ऐसे करें E-KYC अब उपभोक्ताओं को लंबी लाइन में लगने की जरूरत नहीं है। वे अपने मोबाइल फोन के जरिए आसानी से यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। सबसे पहले अपने फोन में गैस कंपनी का मोबाइल ऐप और Aadhaar FaceRD App इंस्टॉल करें। स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया गैस कंपनी के ऐप को खोलें और उसी मोबाइल नंबर से लॉगिन करें, जो आपके कनेक्शन से जुड़ा है ऐप के ‘सर्विस’ या ‘मेनू’ सेक्शन में जाएं वहां ‘Aadhaar E-KYC’ या ‘Re-KYC’ विकल्प पर क्लिक करें नियम और शर्तों को स्वीकार करें इसके बाद फेस वेरिफिकेशन के लिए आगे बढ़ें जैसे ही आप आगे बढ़ेंगे, Aadhaar FaceRD App अपने आप खुल जाएगा। फेस स्कैन से होगा वेरिफिकेशन फेस स्कैन के दौरान आपको अपने मोबाइल के फ्रंट कैमरे के सामने आकर चेहरे को स्कैन करना होगा। प्रक्रिया के दौरान आंखें झपकाने जैसी गतिविधि करनी होती है, जिससे बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा होता है। इसके बाद आपकी आधार डिटेल स्क्रीन पर दिखाई देगी।   सबमिट करते ही पूरी होगी प्रक्रिया अंत में ‘सबमिट’ बटन पर क्लिक करते ही आपकी E-KYC प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। अगर कोई उपभोक्ता मोबाइल से यह प्रक्रिया नहीं कर पा रहा है, तो वह अपनी नजदीकी गैस एजेंसी पर जाकर भी KYC करा सकता है। इसके लिए आधार नंबर और उपभोक्ता संख्या साथ ले जाना जरूरी होगा। समय रहते पूरा करें प्रक्रिया गैस कंपनियों ने साफ किया है कि भविष्य में केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराई जाएगी, जिनकी KYC पूरी होगी। इसलिए उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे बिना देरी किए यह प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Long queues of LPG cylinders in Patna amid backlog and panic booking surge
पटना में गैस सिलेंडर को लेकर हड़कंप: 1.8 लाख का बैकलॉग, अफवाहों से बढ़ी बुकिंग

पटना: बिहार की राजधानी पटना में इन दिनों घरेलू LPG गैस को लेकर अफरातफरी का माहौल देखने को मिल रहा है। अचानक बढ़ी बुकिंग और सीमित आपूर्ति के कारण गैस सिलेंडरों का बैकलॉग 1.80 लाख से ज्यादा पहुंच गया है। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि यह स्थिति अस्थायी है और जल्द ही सामान्य हो जाएगी। अफवाहों से बढ़ी ‘पैनिक बुकिंग’ जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस सप्लाई में कमी की खबरों के बाद लोगों में डर फैल गया। इसी वजह से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने एक साथ गैस बुक कराना शुरू कर दिया। हालात यह हो गए कि जिन लोगों को तत्काल सिलेंडर की जरूरत नहीं थी, वे भी बुकिंग कराने लगे, जिससे सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव बन गया। सप्लाई से ज्यादा हो रही बुकिंग पटना में रोजाना करीब 32 हजार गैस सिलेंडरों की सप्लाई हो रही है, जबकि बुकिंग का आंकड़ा 40 हजार के आसपास पहुंच गया है। कुछ दिन पहले यह संख्या 50 हजार से भी ऊपर चली गई थी। इस असंतुलन के कारण महज 12 दिनों में बैकलॉग बढ़कर 1.84 लाख से अधिक हो गया। पटना का गैस गणित समझिए राजधानी में कुल 136 गैस एजेंसियां हैं, जो करीब 16.65 लाख उपभोक्ताओं को सेवा देती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एक दिन में औसतन 33,603 सिलेंडर की खपत होती है। लेकिन हाल के दिनों में बुकिंग की संख्या अचानक बढ़ने से वितरण व्यवस्था प्रभावित हो गई। प्रशासन ने की संयम बरतने की अपील पटना के जिलाधिकारी Dr. Chandrashekhar Singh Tyagarajan और एडीएम सप्लाई Ravindra Kumar Diwakar ने स्थिति की समीक्षा की है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना जरूरत गैस बुक न करें और अफवाहों पर ध्यान न दें। अधिकारियों का कहना है कि अगर बुकिंग का दबाव कम हुआ तो अगले 7 से 10 दिनों में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो सकती है। क्या सच में खत्म हो रही है गैस? प्रशासन ने साफ तौर पर कहा है कि पटना में गैस की कोई स्थायी कमी नहीं है। मौजूदा संकट सिर्फ ‘पैनिक बुकिंग’ का नतीजा है, न कि सप्लाई की असली समस्या।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
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भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0