छतरपुर: बागेश्वर धाम के पीठाधीश धीरेंद्र शास्त्री के छोटे भाई शालिग्राम गर्ग पर जमीन विवाद के दौरान एक व्यक्ति पर गोली चलाने का आरोप लगा है। घटना के बाद छतरपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, धीरेंद्र शास्त्री ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनका अपने भाई और परिवार से कोई संबंध नहीं है तथा कानून को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। धीरेंद्र शास्त्री ने खुद को किया अलग मामला सामने आने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनका न केवल अपने भाई बल्कि परिवार से भी कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानून अपना काम करे और जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि उन्हें हर मामले में न घसीटा जाए। जमीन विवाद के दौरान हुई गोलीबारी छतरपुर पुलिस के अनुसार, घटना मंगलवार को राजनगर थाना क्षेत्र के कोड़ा गांव में हुई। जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया, जिसके बाद गोली चलने की घटना हुई। घायल युवक मोतीलाल कुशवाहा ने आरोप लगाया कि शालिग्राम गर्ग और उसके साथ मौजूद अन्य लोगों ने उस पर हमला किया, लाठी से मारपीट की और कई राउंड फायरिंग की। उसका आरोप है कि आरोपी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। घायल का आरोप घायल युवक ने दावा किया कि शालिग्राम गर्ग ने स्वयं उस पर गोली चलाई। उसके अनुसार, हमले के दौरान उसे गोली लगी और लाठी से भी पीटा गया, जिससे उसके कान पर भी चोट आई। उसने आरोप लगाया कि गांव की कई जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही थी। पुलिस ने शुरू की जांच छतरपुर के पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को जिला अस्पताल भेजा गया। प्रारंभिक जांच में घायल के शरीर में गोली लगने की पुष्टि हुई है। पुलिस ने मामले में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। चार आरोपियों के खिलाफ FIR पुलिस के अनुसार, मामले में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। इनमें तीन नामजद आरोपी शामिल हैं, जिनमें शालिग्राम गर्ग का नाम भी है, जबकि एक आरोपी की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने मुस्लिम पक्ष की तीन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए नोटिस जारी कर दिया है। हाई कोर्ट के फैसले पर फिलहाल रोक नहीं मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें भोजशाला परिसर को माता सरस्वती का मंदिर माना गया था और परिसर में नमाज की अनुमति समाप्त कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस फैसले पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि मामले की अंतिम सुनवाई बाद में की जाएगी। शुक्रवार की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान देने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने धार जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि मुस्लिम समुदाय के लिए भोजशाला परिसर के पास ही वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए, जहां वे शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा कर सकें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था अंतिम फैसले तक अंतरिम रूप से लागू रहेगी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भी दिए निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को निर्देश दिया कि मामले के अंतिम निर्णय तक अदालत की अनुमति के बिना परिसर में कोई संरचनात्मक बदलाव नहीं किया जाए। कोर्ट ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और सभी पक्षों को शांति बनाए रखनी चाहिए। दो-तीन सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि मामले की अगली सुनवाई दो से तीन सप्ताह के भीतर की जाएगी। इस दौरान मौजूदा अंतरिम व्यवस्था जारी रहेगी और दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी जाएंगी।
भोपाल/दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है और विरोध लोकतांत्रिक एवं संगठनात्मक मर्यादा के भीतर होना चाहिए। "पेट्रोल या मिट्टी का तेल लेकर सड़क पर मत उतरिए" नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो दिखाए गए हैं, जिनमें कुछ लोग पेट्रोल या मिट्टी का तेल लेकर प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी तरह की उग्र या हिंसक गतिविधि से दूर रहें। उन्होंने कहा कि टिकट देना या न देना पार्टी का निर्णय है और वह उसका सम्मान करते हैं। यदि किसी को अपनी बात रखनी है तो उसके लिए पार्टी के भीतर तय प्रक्रिया मौजूद है। 11-12 घंटे तक जाम रहा नेशनल हाईवे-44 दतिया के जिला कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने करीब 11 से 12 घंटे तक नेशनल हाईवे-44 जाम रखा। प्रशासन ने कई बार प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ नहीं मानी और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। पथराव में पुलिस अधिकारी घायल प्रशासन के मुताबिक, पथराव में दतिया के पुलिस अधीक्षक (SP) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए। स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस दौरान लाठीचार्ज नहीं किया गया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस वाहनों समेत अन्य गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा। 3,000 से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल दतिया के पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने बताया कि प्रदर्शन में 3,000 से अधिक लोग शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने बाजार बंद कराने की कोशिश की और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने का प्रयास किया। एसपी के अनुसार, पुलिस ने आदर्श आचार संहिता का हवाला देकर लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन पथराव शुरू होने के बाद आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। हिंसा करने वालों पर होगी कार्रवाई पुलिस ने बताया कि हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि घटना की पहचान के लिए वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है तथा कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। क्यों हुआ विवाद? भारतीय जनता पार्टी ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। इसके बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने टिकट वितरण का विरोध करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो बाद में हिंसक हो गया। हालांकि, नरोत्तम मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के फैसले का सम्मान करने और कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने की अपील की है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश के कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सबसे गंभीर स्थिति गुजरात के सूरत में है, जहां पिछले 36 घंटों में 18 इंच बारिश दर्ज की गई। इस बारिश ने जुलाई 1941 में बने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। शहर के अधिकांश हिस्से जलमग्न हो गए हैं। सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में पानी भर गया, जबकि कई स्थानों पर वाहन पानी के तेज बहाव में बहते दिखाई दिए। सूरत में नौ लोगों की मौत, हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया भारी बारिश के दौरान करंट लगने, पेड़ गिरने और बिजली गिरने जैसी घटनाओं में नौ लोगों की मौत हो गई। प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान चलाकर करीब 3,400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। सूरत और नवसारी में स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं तथा लोगों से केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की गई है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में भी बारिश का असर मध्य प्रदेश के जबलपुर में मंगलवार शाम एक पांच मंजिला इमारत ढह गई, जबकि राजस्थान के जालोर में एक जीप नदी में पलट गई। चित्तौड़गढ़ में आकाशीय बिजली गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। हरियाणा के गुरुग्राम में भारी बारिश के कारण दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) का एक हिस्सा धंस गया, जिससे करीब 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। कई इलाकों में जलभराव के बीच एक स्कूल बस भी नाले में फंस गई। पुलिस ने कंपनियों से कर्मचारियों को कुछ दिनों तक वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने की अपील की है। अरुणाचल और कर्नाटक में भी अलर्ट अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से 26 जिलों के 94 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक चार लोगों की मौत, 21 लोगों के घायल होने और दो महिलाओं के लापता होने की सूचना है। वहीं कर्नाटक के बेलगावी और शिवमोगा जिलों में एहतियात के तौर पर स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखे गए हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज़ी से चला रहा है।
अलीराजपुर: मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में उगने वाला दुर्लभ और विशालकाय नूरजहां आम एक बार फिर चर्चा में है। 'आमों की मलिका' के नाम से मशहूर इस खास किस्म का 3.30 किलोग्राम वजन वाला एक आम इस सीजन में 3,800 रुपये में बिका है। आम उत्पादकों का दावा है कि मौसम अनुकूल रहा तो कुछ फलों का वजन जून के अंत तक 4 किलोग्राम तक पहुंच सकता है। 3.30 किलो का आम बना लोगों के आकर्षण का केंद्र कट्ठीवाड़ा क्षेत्र के आम उत्पादक भरतराज सिंह जादव ने बताया कि इस साल नूरजहां आम की पैदावार अच्छी रही है। उनके बगीचे में इस सीजन का सबसे बड़ा नूरजहां आम 3.30 किलोग्राम वजन का रहा, जिसे 3,800 रुपये में बेचा गया। उन्होंने बताया कि पेड़ों पर अभी भी कई बड़े आकार के फल लगे हुए हैं, जिनका अंतिम वजन आम तोड़ने के बाद ही पता चल सकेगा। देश-विदेश में बढ़ रही है मांग नूरजहां आम की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। वर्तमान में मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात से इसकी अच्छी मांग आ रही है। हाल ही में तमिलनाडु से भी इस दुर्लभ आम के लिए पूछताछ की गई है। भरतराज सिंह जादव के मुताबिक, इस सीजन में उनके बगीचे के नूरजहां आम संयुक्त अरब अमीरात (UAE), अमेरिका और स्पेन तक पहुंचे हैं। इनका औपचारिक निर्यात नहीं हुआ, बल्कि लोग अपने परिचितों और रिश्तेदारों के माध्यम से इन्हें विदेश ले गए। क्या है नूरजहां आम की खासियत? नूरजहां आम अपनी विशालकाय आकार, बेहतरीन स्वाद और सीमित उत्पादन के कारण देश की सबसे दुर्लभ और महंगी आम की किस्मों में गिना जाता है। इसकी प्रमुख विशेषताएं: एक आम का वजन 3 से 4 किलोग्राम तक हो सकता है। यह मुख्य रूप से मध्यप्रदेश के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में उगाया जाता है। स्वाद, आकार और दुर्लभता के कारण इसकी कीमत सामान्य आमों से कई गुना अधिक होती है। देश के साथ-साथ विदेशों में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। जैविक तरीके से उगाए जाने के कारण इसकी गुणवत्ता विशेष मानी जाती है। 4 किलो तक पहुंच सकता है वजन कट्ठीवाड़ा के एक अन्य आम उत्पादक शिवराज जादव ने बताया कि उनके बगीचे में नूरजहां आम के छह पेड़ हैं, जिन पर फिलहाल करीब 3 किलोग्राम वजन के कई फल लगे हुए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जून के अंत तक कुछ फलों का वजन 4 किलोग्राम तक पहुंच सकता है, जो इस सीजन का नया रिकॉर्ड भी बन सकता है। जलवायु परिवर्तन का दिख रहा असर आम उत्पादकों के अनुसार, कुछ दशक पहले नूरजहां आम का अधिकतम वजन 4.50 किलोग्राम तक पहुंच जाता था। बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के कारण अब इसका सामान्य वजन 3.50 से 3.80 किलोग्राम के बीच रह गया है। इसके बावजूद अपने विशाल आकार, सीमित उत्पादन और बेहतरीन स्वाद की वजह से नूरजहां आम आज भी देश की सबसे खास और महंगी आम प्रजातियों में शुमार है। जनवरी से शुरू होता है सफर, जून में बाजार तक पहुंचता है फल उत्पादकों के मुताबिक, नूरजहां आम के पेड़ों पर जनवरी में बौर आना शुरू हो जाता है। इसके बाद जून तक फल पूरी तरह पककर तैयार हो जाते हैं और बाजार में बिक्री के लिए पहुंचते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नूरजहां आम केवल एक फल नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की बागवानी विरासत और जैविक खेती की पहचान बन चुका है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह राज्यसभा से विदाई ले रहे हैं, लेकिन यह विदाई उनके राजनीतिक करियर का अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। 79 वर्ष की उम्र में भी सक्रिय और मुखर बने रहने वाले दिग्विजय सिंह ने साफ संकेत दिया है कि वे न तो “टायर्ड” हैं और न ही “रिटायर्ड”। मध्य प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके दिग्विजय सिंह लंबे समय तक कांग्रेस संगठन में रणनीतिकार और अहम सिपहसालार की भूमिका निभाते रहे हैं। राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि उनकी अगली राजनीतिक भूमिका क्या होगी। क्या खत्म होगी सक्रिय राजनीति? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिग्विजय सिंह के लिए सक्रिय राजनीति के विकल्प भले सीमित नजर आ रहे हों, लेकिन उनकी उपयोगिता अभी भी खत्म नहीं हुई है। मध्य प्रदेश की राजनीति में उनके बेटे जयवर्द्धन सिंह पहले से सक्रिय हैं, ऐसे में राज्य स्तर पर उनकी भूमिका कम हो सकती है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस नेतृत्व उन्हें एक रणनीतिक सलाहकार या विचारधारा के प्रतिनिधि के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। ‘हिंदुत्व’ बनाम ‘सनातन’ पर स्पष्ट रुख दिग्विजय सिंह की पहचान एक ऐसे नेता की रही है, जो ‘हिंदुत्व’ की राजनीति का विरोध करते हुए खुद को सनातन परंपरा का समर्थक बताते हैं। वे कई बार भाजपा और उससे जुड़े संगठनों को ‘सच्चे हिंदुत्व’ पर खुली बहस की चुनौती दे चुके हैं। उनका मानना है कि ‘सर्वधर्म समभाव’ ही सनातन धर्म की मूल भावना है और इसे राजनीतिक लाभ के लिए तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। नर्मदा परिक्रमा से सियासी संदेश 2017-18 की उनकी प्रसिद्ध नर्मदा परिक्रमा को उनके राजनीतिक जीवन का अहम मोड़ माना जाता है। करीब 3,300 किलोमीटर की इस पदयात्रा ने न केवल उन्हें जनता से जोड़ा, बल्कि 2018 के मध्य प्रदेश चुनावों में कांग्रेस की वापसी का आधार भी बनी। कांग्रेस में अब भी मजबूत पकड़ कांग्रेस के भीतर दिग्विजय सिंह को आज भी एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता माना जाता है। पार्टी के कई नेता मानते हैं कि वे साधु-संतों और धार्मिक वर्गों से संवाद स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं-जो कांग्रेस के लिए एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है। 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में उनका नाम सामने आना भी उनकी प्रासंगिकता को दर्शाता है, हालांकि अंततः मल्लिकार्जुन खड़गे को यह जिम्मेदारी मिली। आगे क्या? राज्यसभा से विदाई के बावजूद दिग्विजय सिंह की सक्रियता कम होने के संकेत नहीं हैं। उनके अनुभव, संगठनात्मक पकड़ और वैचारिक स्पष्टता को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि वे आने वाले समय में कांग्रेस की रणनीति और वैचारिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।