NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच में बड़े खुलासे सामने आए हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के मुताबिक, पेपर लीक गिरोह छात्रों के परिवार की आर्थिक स्थिति देखकर 5 लाख से 50 लाख रुपये तक वसूलता था। बाकी रकम की गारंटी के लिए ब्लैंक चेक और छात्रों के दस्तावेज अपने पास रखे जाते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि मामले में गिरफ्तार महाराष्ट्र के एक कोचिंग संचालक की 8 एकड़ जमीन पर स्कूल और कॉलेज खोलने की योजना थी। आर्थिक स्थिति देखकर तय होती थी कीमत CBI जांच के अनुसार, पेपर की कोई तय कीमत नहीं थी। गिरोह हर परिवार की आर्थिक क्षमता के हिसाब से रकम तय करता था। शुरुआत में केवल टोकन मनी ली जाती थी और पूरी रकम बाद में वसूली जाती थी। डील का तरीका यह था कि परीक्षा के बाद जब आंसर-की जारी हो जाए और यह साबित हो जाए कि दिया गया “क्वेश्चन बैंक” असली पेपर से मेल खाता है, तब बाकी रकम ली जाती थी। हालांकि परीक्षा के बाद कई अभिभावकों ने पैसे देने से इनकार भी किया। उनका कहना था कि फिजिक्स के कुछ सवाल मेल नहीं खा रहे थे। कुछ लोगों ने आधी रकम दी और बाकी रिजल्ट आने के बाद देने की बात कही। खुलासे के वक्त भी जारी थी वसूली जांच एजेंसियों के अनुसार, 8 मई की रात राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने कार्रवाई शुरू की थी। उस दौरान भी गिरोह खरीदारों से पैसे वसूलने में लगा हुआ था। सीकर में एक छात्र से पूछताछ के दौरान उसके मोबाइल पर दलाल का फोन आया, जिसमें बाकी पैसे मांगे जा रहे थे। बाद में CBI ने कई छात्रों और आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की, जहां इसी तरह के लेनदेन के सबूत मिले। 8 एकड़ जमीन पर बन रहा था स्कूल-कॉलेज मामले में गिरफ्तार महाराष्ट्र के लातूर स्थित RCC कोचिंग के संचालक शिवराज मोटेगांवकर उर्फ ‘एम सर’ के बारे में जांच में पता चला है कि वह लातूर के खोपेगांव इलाके में 8 एकड़ जमीन पर बड़ा स्कूल और कॉलेज खोलने की तैयारी कर रहा था। वहां बहुमंजिला इमारत का निर्माण तेजी से चल रहा था। CBI अब उसकी फंडिंग, जमीन खरीद और आर्थिक लेनदेन की भी जांच कर रही है। एजेंसी ने उसकी पत्नी और बेटे से भी पूछताछ की है। 5 आरोपी न्यायिक हिरासत में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी मांगीलाल खटीक, विकास बिवाल, दिनेश बिवाल, यश यादव और धनंजय लोखंडे को 2 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं आरोपी शुभम खैरनार की CBI रिमांड पांच दिन बढ़ा दी गई है। कोर्ट ने मनीषा मांढरे और मोटेगांवकर के हस्ताक्षर के नमूने लेने की भी अनुमति दी है। 21 जून को होगा री-एग्जाम धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को NEET री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने फर्जी टेलीग्राम चैनलों और सोशल मीडिया पर पेपर लीक को लेकर गलत जानकारी फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित हुई थी, जिसमें करीब 23 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। 7 मई को गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया और 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। अब दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी।
NEET परीक्षा और पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। इसी बीच Arvind Kejriwal ने NEET छात्रों के समर्थन में भावुक संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि NEET की तैयारी कर रहे छात्र केवल परीक्षार्थी नहीं, बल्कि उनके अपने बच्चों जैसे हैं और वह उनके भविष्य के लिए उसी तरह संघर्ष कर रहे हैं जैसे कोई पिता अपने बच्चों के लिए करता है। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें बड़ी संख्या में छात्रों के संदेश मिले हैं, जिनमें उन्होंने अपनी परेशानियां, मानसिक तनाव और भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इन संदेशों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। “आपका सपना टूटने नहीं देंगे” अरविंद केजरीवाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के लाखों छात्र कड़ी मेहनत करके डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं और किसी भी परिस्थिति में उनका यह सपना टूटना नहीं चाहिए। उन्होंने छात्रों से हिम्मत बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि मुश्किल हालात जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “प्रिय NEET छात्रों, आपके इतने सारे संदेशों और आपकी भावनाओं की गहराई ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। आपने मुझ पर भरोसा किया। हिम्मत बनाए रखें। एक संकल्प लें कि डॉक्टर बनकर ही रहेंगे। ईश्वर आप सभी का भला करे।” छात्रों के भविष्य को लेकर जताई चिंता केजरीवाल ने कहा कि आज के छात्र ही कल देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाएंगे। देश को ईमानदार, मेहनती और संवेदनशील डॉक्टरों की जरूरत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य की रक्षा के लिए जो भी लड़ाई जरूरी होगी, उसमें वे उनके साथ खड़े रहेंगे। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ संदेश अरविंद केजरीवाल का यह भावुक संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने उनके बयान को प्रेरणादायक बताते हुए समर्थन दिया है। गौरतलब है कि NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कई छात्र संगठन और अभिभावक परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी धनंजय लोखंडे को 6 दिन की CBI हिरासत में भेज दिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अब पूरे पेपर लीक नेटवर्क, आर्थिक लेनदेन और अन्य आरोपियों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है। सीबीआई के अनुसार, धनंजय लोखंडे को पुणे से गिरफ्तार किया गया था। एजेंसी का दावा है कि वह पेपर लीक रैकेट में अहम कड़ी के तौर पर काम कर रहा था। मामले में गिरफ्तार पांच अन्य आरोपी पहले से ही सात दिन की सीबीआई कस्टडी में हैं। 21 जून को फिर होगी NEET UG परीक्षा इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने घोषणा की है कि NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि छात्रों के हित को देखते हुए सरकार ने परीक्षा रद्द कर पुनः परीक्षा कराने का फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि अगले साल से मेडिकल प्रवेश परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी। उनके अनुसार CBT प्रणाली पारंपरिक OMR पद्धति की तुलना में अधिक सुरक्षित और पारदर्शी मानी जाती है। क्यों रद्द हुई थी NEET UG परीक्षा? 3 मई 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा पर पेपर लीक और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे थे। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 7 मई तक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कई शिकायतें मिली थीं। जांच में सामने आया कि कथित गेस पेपर के कई प्रश्न वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र से मेल खा रहे थे। इसके बाद प्रारंभिक जांच शुरू हुई और बाद में मामला CBI को सौंप दिया गया। छात्रों को मिलेगा परीक्षा शहर चुनने का विकल्प सरकार ने छात्रों को राहत देते हुए दोबारा परीक्षा के लिए अपनी पसंद का परीक्षा शहर चुनने का विकल्प दिया है। इसके लिए उम्मीदवारों को एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। एडमिट कार्ड 14 जून तक जारी होंगे परीक्षा अवधि 15 मिनट बढ़ाई गई है अब परीक्षा शाम 5:15 बजे तक चलेगी केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर छात्रों के लिए परिवहन व्यवस्था भी सुनिश्चित करेगी ताकि किसी भी छात्र को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में परेशानी न हो। शिक्षा माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी, चाहे वे NTA के अंदर हों या बाहर। CBI की जांच में लगातार हो रहे खुलासे सीबीआई अब इस मामले में डिजिटल सबूत, बैंकिंग लेनदेन और आरोपियों के बीच संपर्कों की जांच कर रही है। एजेंसी को शक है कि पेपर लीक का यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है। जांच एजेंसी जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां कर सकती है। वहीं, पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी बनी हुई है।
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने इस पूरे रैकेट के कथित मास्टरमाइंड और रसायन विज्ञान के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने परीक्षा से पहले ही छात्रों को असली प्रश्नपत्र से जुड़े सवाल और उनके जवाब याद करवाए थे। सीबीआई के मुताबिक, पीवी कुलकर्णी को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रक्रिया के दौरान प्रश्नपत्रों तक पहुंच हासिल थी। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में पुणे स्थित अपने घर पर विशेष कोचिंग सत्र आयोजित किए। छात्रों को नोटबुक में लिखवाए गए थे प्रश्न और उत्तर जांच एजेंसी के अनुसार, इन गुप्त क्लासों में छात्रों को प्रश्न, विकल्प और सही उत्तर हाथ से नोटबुक में लिखवाए गए थे। बाद में जब 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा का वास्तविक प्रश्नपत्र सामने आया, तो वह इन नोट्स से हूबहू मेल खाता पाया गया। सीबीआई का कहना है कि यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर दिया गया था। कई शहरों में छापेमारी, अब तक 7 आरोपी गिरफ्तार इस मामले में सीबीआई अब तक जयपुर, गुरुग्राम, पुणे, नासिक और अहिल्यानगर समेत कई शहरों में कार्रवाई कर चुकी है। एजेंसी ने अब तक कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पांच आरोपियों को पहले ही अदालत में पेश किया जा चुका है, जहां उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। वहीं दो अन्य आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया जा रहा है। धनंजय लोखंडे की भूमिका भी आई सामने दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने आरोपी धनंजय निवृत्ति लोखंडे को भी छह दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, लोखंडे ने कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र सह-आरोपी शुभम खैरनार को उपलब्ध कराया था। सीबीआई ने अदालत को बताया कि लोखंडे को यह प्रश्नपत्र पुणे निवासी मनीषा वाघमारे से मिला था। जांच में दोनों आरोपियों के बीच करीब छह लाख रुपये के बैंकिंग लेनदेन का भी खुलासा हुआ है। टेलीग्राम के जरिए भेजे गए थे पेपर की PDF जांच में यह भी सामने आया है कि गुरुग्राम निवासी आरोपी यश यादव को 29 अप्रैल को टेलीग्राम ऐप के जरिए प्रश्नपत्रों की PDF फाइलें भेजी गई थीं। इन फाइलों में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के प्रश्नपत्र शामिल थे। सीबीआई ने इन डिजिटल फाइलों को बरामद कर लिया है और उनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को हुई थी। लेकिन पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। सरकार ने मामले की व्यापक जांच के लिए सीबीआई को जिम्मेदारी सौंपी है। एजेंसी अब इस संगठित नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। देशभर में छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है। कई छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सीबीआई की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने माना कि परीक्षा व्यवस्था में चूक हुई है और सरकार इसकी जिम्मेदारी लेती है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। 21 जून को होगा NEET री-एग्जाम शिक्षा मंत्री ने बताया कि NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बार परीक्षा को पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ कराया जाएगा ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। उन्होंने कहा, “हम सभी छात्रों की चिंता और परेशानी को समझते हैं, लेकिन देशहित और ईमानदार अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना पड़ा।” ‘गेस पेपर’ की आड़ में लीक हुआ असली पेपर धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि 3 मई को परीक्षा होने के बाद 7 मई को National Testing Agency यानी NTA को शिकायत मिली थी कि कुछ ‘गेस पेपर’ में वही सवाल मौजूद थे, जो असली परीक्षा में पूछे गए। इसके बाद हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट ने तुरंत जांच शुरू की और मामला सरकारी एजेंसियों को सौंपा गया। 12 मई तक जांच में यह पुष्टि हो गई कि ‘गेस पेपर’ के नाम पर असली प्रश्नपत्र लीक हुआ था। इसी के बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। ‘काबिल छात्रों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे’ शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि कोई मेहनती और योग्य छात्र एग्जाम माफिया या फर्जी अभ्यर्थियों की वजह से नुकसान उठाए। उन्होंने कहा कि पिछली गड़बड़ियों के बाद बनाई गई राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों को लागू किया गया था, इसके बावजूद यह घटना हुई। उन्होंने कहा, “जो भी गलतियां हुई हैं, उसकी जिम्मेदारी सरकार लेती है। हमारी नीति गलत कामों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की है।” CBI कर रही जांच मामले की जांच अब Central Bureau of Investigation यानी CBI को सौंप दी गई है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कई सोशल मीडिया हैंडल्स गलत जानकारी फैलाकर सिस्टम को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच जरूरी थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि CBI जल्द दोषियों को सामने लाएगी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगले साल से CBT मोड में होगी परीक्षा शिक्षा मंत्री ने यह भी ऐलान किया कि अगले साल से NEET परीक्षा CBT यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट मोड में आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। री-एग्जाम के लिए नहीं लगेगी फीस NTA ने साफ किया है कि दोबारा परीक्षा के लिए छात्रों से कोई अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी। छात्रों को परीक्षा केंद्र चुनने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। इसके अलावा अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परीक्षा की अवधि भी 15 मिनट बढ़ा दी गई है। अब परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक चलेगी।
देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। National Testing Agency ने NEET-UG 2026 परीक्षा की नई तारीख का एलान कर दिया है। अब यह परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी। इससे पहले 3 मई को हुई परीक्षा को पेपर लीक की आशंका और गड़बड़ियों के आरोपों के चलते रद्द कर दिया गया था। एनटीए ने साफ किया है कि परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी और इसके लिए छात्रों को किसी तरह की अतिरिक्त फीस नहीं देनी होगी। नई परीक्षा तारीख और अन्य जरूरी दिशा-निर्देश जल्द आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। पेपर लीक विवाद के बाद बड़ा फैसला NEET-UG परीक्षा इस बार पेपर लीक के आरोपों को लेकर लगातार विवादों में रही। कई राज्यों से परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच Central Bureau of Investigation यानी CBI को सौंप दी गई। मामले को लेकर छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों उम्मीदवारों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई थी। शिक्षा मंत्री ने की उच्च स्तरीय बैठक केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने भी इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी। बैठक में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर चर्चा हुई। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि दोबारा परीक्षा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएंगे ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। मेडिकल प्रवेश के लिए अहम परीक्षा NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाती है। इसी परीक्षा के जरिए MBBS, BDS समेत कई मेडिकल और पैरामेडिकल कोर्स में दाखिला दिया जाता है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। अब नई तारीख घोषित होने के बाद छात्रों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। एनटीए ने उम्मीदवारों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और किसी भी अफवाह से बचें।
NTA ने जारी किया आधिकारिक शेड्यूल, अफवाहों से बचने की अपील देशभर के मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency) ने NEET UG 2026 री-एग्जाम की नई तारीख घोषित कर दी है। अब यह परीक्षा 21 जून 2026 (रविवार) को आयोजित की जाएगी। सरकारी मंजूरी के बाद जारी इस अपडेट के साथ ही लाखों छात्रों की तैयारी की दिशा एक बार फिर तय हो गई है। NEET UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसके जरिए MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्स में दाखिला मिलता है। क्या है नया शेड्यूल? NTA के अनुसार: परीक्षा तिथि: 21 जून 2026 (रविवार) परीक्षा: NEET UG री-एग्जाम उम्मीदवार: देशभर के लाखों छात्र एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को केवल आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करना चाहिए और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से दूर रहने की सलाह दी है। छात्रों के लिए NTA की सलाह NTA ने अभ्यर्थियों से कहा है कि अब समय कम है, इसलिए: रिवीजन पर विशेष ध्यान दें नियमित मॉक टेस्ट दें पुराने प्रश्न पत्रों का अभ्यास करें किसी भी अनऑफिशियल सूचना पर भरोसा न करें हेल्पलाइन और संपर्क जानकारी परीक्षा से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए NTA ने हेल्पलाइन और ईमेल जारी किए हैं: ईमेल: neet-ug@nta.ac.in हेल्पलाइन: 011-40759000 हेल्पलाइन: 011-69227700 परीक्षा विवाद और री-एग्जाम का कारण रिपोर्ट्स के अनुसार, 13 मई 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा के बाद कुछ अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे, जिसके चलते जांच प्रक्रिया शुरू की गई। मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (Central Bureau of Investigation) को सौंपी गई थी। इसके बाद परीक्षा से जुड़े कई सवाल उठे और री-एग्जाम का निर्णय लिया गया। परीक्षा से जुड़ा पिछला विवरण NEET UG 2026 परीक्षा: आयोजित हुई थी: 3 मई 2026 परीक्षा केंद्र: भारत के 551 शहर और विदेश के 14 शहर कुल रजिस्ट्रेशन: लगभग 22.79 लाख छात्र उपस्थित उम्मीदवार: 22,05,035 छात्रों के लिए अहम संदेश री-एग्जाम की तारीख घोषित होने के बाद अब छात्रों पर दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय अंतिम चरण की तैयारी का है, जिसमें केवल रिवीजन और प्रैक्टिस पर फोकस करना चाहिए।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा की नई तारीख घोषित कर दी है। NTA के अनुसार अब यह परीक्षा रविवार, 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी। इससे पहले 3 मई को आयोजित परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया था। NTA ने जारी की आधिकारिक सूचना NTA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि भारत सरकार की मंजूरी के बाद NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा कराने का फैसला लिया गया है। एजेंसी ने छात्रों और अभिभावकों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। NTA ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोबारा परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को नया रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता नहीं होगी और किसी प्रकार की अतिरिक्त फीस भी नहीं ली जाएगी। उच्च स्तरीय बैठक में हुई समीक्षा सूत्रों के मुताबिक परीक्षा की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी, स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार, NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह, CBSE अध्यक्ष राहुल सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में परीक्षा के निष्पक्ष आयोजन, सुरक्षा व्यवस्था और पेपर लीक रोकने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। 22 लाख से अधिक छात्रों ने दी थी परीक्षा NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को देशभर के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में आयोजित हुई थी। इस परीक्षा में लगभग 22.79 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। लेकिन पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद सरकार ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी थी। पेपर लीक मामले की जांच जारी पेपर लीक मामले की जांच फिलहाल CBI कर रही है। एजेंसी ने अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और NTA के अंदर संभावित मिलीभगत की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार इस मामले में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा पहले ही रद्द की जा चुकी है, वहीं अब राजस्थान से सामने आए एक नए खुलासे ने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। जांच में एक ऐसा “गेस पेपर” सामने आया है, जिसके करीब 120 सवाल असली परीक्षा से मेल खाते बताए जा रहे हैं। इस खुलासे के बाद पूरे मामले को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। राजस्थान SOG को छात्रों के मोबाइल में मिला PDF Rajasthan Special Operations Group (SOG) की जांच के दौरान कुछ छात्रों के मोबाइल फोन से एक PDF दस्तावेज बरामद किया गया। बताया जा रहा है कि यह करीब 150 पेज का दस्तावेज था, जिसमें 400 से ज्यादा सवाल शामिल थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस PDF में कुल करीब 410 सवाल थे और इनमें से लगभग 120 सवाल सीधे NEET UG 2026 परीक्षा में देखने को मिले। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह PDF परीक्षा से कई हफ्ते पहले ही WhatsApp के जरिए शेयर किया जा रहा था। आखिर इतने सवाल कैसे हुए मैच? आमतौर पर किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में गेस पेपर से कुछ सवाल मिल जाना सामान्य माना जाता है, लेकिन यहां मामला अलग बताया जा रहा है। जांच अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर सवालों का मेल होना संदेह पैदा करता है। इसी वजह से अब यह जांच की जा रही है कि क्या यह सिर्फ गेस पेपर था या फिर किसी संगठित नेटवर्क के जरिए असली प्रश्नपत्र से जुड़े इनपुट पहले ही लीक किए गए थे। ADGP विशाल बंसल ने क्या कहा? Vishal Bansal ने कहा कि मामला सामान्य पेपर लीक जैसा नहीं दिख रहा है। उनके मुताबिक आमतौर पर पेपर लीक करने वाले लोग प्रश्नों को सीमित लोगों तक रखते हैं ताकि आर्थिक फायदा उठाया जा सके, लेकिन इस मामले में सवालों वाला PDF बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच चुका था। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। NTA ने रद्द की परीक्षा विवाद बढ़ने के बाद National Testing Agency (NTA) ने NEET UG 2026 परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। साथ ही दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा भी कर दी गई है। केंद्र सरकार ने मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी है। सुरक्षा के बावजूद कैसे हुआ लीक? NTA का दावा है कि परीक्षा के दौरान हाई-लेवल सिक्योरिटी का इस्तेमाल किया गया था। इसमें GPS ट्रैकिंग, AI आधारित CCTV निगरानी और बायोमेट्रिक जांच जैसी तकनीकों को शामिल किया गया था। इसके बावजूद सवालों के कथित लीक और गेस पेपर से बड़े स्तर पर मैच होने के बाद एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुरक्षा में चूक आखिर कहां हुई।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET UG 2026) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। परीक्षा के आयोजन के बाद अब इसके पेपर लीक होने की आशंका प्रबल हो गई है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने इस मामले में गहन जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में ऐसे सबूत मिले हैं जो परीक्षा की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। जांच में सामने आया है कि इस संदिग्ध पेपर का केंद्र केरल और राजस्थान का सीकर जिला है। बताया जा रहा है कि केरल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने, जो मूलत राजस्थान के चूरू का रहने वाला है, 1 मई को एक ‘क्वेश्चन बैंक’ अपने सीकर स्थित दोस्त को व्हाट्सएप पर भेजा था। यह दोस्त सीकर में एक पीजी (PG) संचालित करता है। वहीं इस मामले में एसओजी एडीजी विशाल बंसल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होने बताया की परीक्षा से पहले व्हाट्सएप पर 150 पन्नों की एक पीडीएफ फाइल वायरल हुई थी, जिसमें कुल 400 सवाल शामिल थे। एसओजी की शुरुआती पड़ताल में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि 3 मई को आयोजित नीट परीक्षा में उस वायरल गेस पेपर से करीब 120 सवाल मिले हैं। वर्तमान में एसओजी इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि यह गेस पेपर किसने और किस आधार पर तैयार किया था। इस सिलसिले में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और मामले के ‘देहरादून लिंक’ को भी खंगाला जा रहा है। हालांकि, एसओजी ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए फिलहाल इसे आधिकारिक तौर पर ‘पेपर लीक’ नहीं कहा जा सकता। एसओजी का मुख्य कार्य साक्ष्य जुटाना और जांच करना है, जबकि परीक्षा के भविष्य पर अंतिम निर्णय संबंधित परीक्षा एजेंसी ही लेगी। पुलिस फिलहाल कड़ियां जोड़कर मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है। क्वेश्चन बैंक और परीक्षा के बीच चौंकाने वाला मिलान SOG के सूत्रों के अनुसार, छात्र द्वारा भेजे गए इस क्वेश्चन बैंक में करीब 300 सवाल शामिल थे। जब इन सवालों का मिलान मूल नीट पेपर से किया गया, तो अधिकारी हैरान रह गए। 300 में से लगभग 150 सवाल हूबहू वही थे जो परीक्षा में पूछे गए थे। नीट परीक्षा में कुल 180 सवाल हल करने होते हैं, जहां प्रत्येक प्रश्न 4 अंक का होता है। इस हिसाब से 720 में से 600 अंकों के सवाल परीक्षा से पहले ही लीक होने की आशंका बढ़ गई है। किसी भी ‘गेस पेपर’ में इतनी सटीकता होना लगभग असंभव माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ डेटा सीकर के पीजी संचालक को पेपर मिलने के बाद यह व्हाट्सएप ग्रुप्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फॉरवर्ड हुआ. पीजी संचालक ने अपने यहां रह रहे छात्रों को यह सामग्री उपलब्ध कराई, जिसके बाद कैरियर काउंसलर्स और अन्य छात्रों के माध्यम से यह जाल फैलता चला गया। आश्चर्यजनक बात यह है कि परीक्षा संपन्न होने के बाद इसी पीजी संचालक ने उद्योग नगर थाना और एनटीए (NTA) को शिकायत दी थी। SOG अब इस कोण से भी जांच कर रही है कि कहीं पकड़े जाने के डर से तो संचालक ने खुद शिकायतकर्ता बनने का नाटक नहीं किया। SOG की मास्टरमाइंड की तलाश फिलहाल SOG मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए कड़ियां जोड़ रही है। सभी संदिग्धों के कॉल लॉग्स और सोशल मीडिया चैट की फोरेंसिक जांच की जा रही है। एजेंसी अभी अंतिम रूप से यह तय नहीं कर पाई है कि इसे तकनीकी रूप से ‘पेपर लीक’ की श्रेणी में रखा जाए या कुछ और, लेकिन सबूत किसी बड़े गिरोह की ओर इशारा कर रहे हैं।
रांची। रांची में 3 मई 2026 को आयोजित होने वाली नीट यूजी परीक्षा को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट है। परीक्षा को कदाचार मुक्त और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए एसडीओ कुमार रजत ने परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर की परिधि में निषेधाज्ञा लगा दिया है। बीएनएसएस की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया गया है। रांची में 21 केंद्र प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नीट परीक्षा के लिए रांची में कुल 21 केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से मुख्य केंद्रों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे। यह निषेधाज्ञा 3 मई को दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान परीक्षा केंद्रों के पास पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के जमा होने पर पूरी तरह रोक रहेगी। इन गतिविधियों पर रहेगा प्रतिबंध 1. पांच या उससे अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा होना वर्जित है। 2. किसी भी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्र (लाउडस्पीकर) का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। 3. अस्त्र शस्त्र जैसे बंदूक, राइफल, बम या बारूद लेकर चलने पर रोक रहेगी। 4. लाठी डंडा, तीर धनुष और भाला जैसे हथियार लेकर चलना प्रतिबंधित है। 5. परीक्षा केंद्र के पास किसी भी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन नहीं किया जा सकेगा। डीसी ने दिया ये आदेश उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री के आदेश पर परीक्षा केंद्रों पर मजिस्ट्रेट, पुलिस बल और पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों पर यह आदेश लागू नहीं होगा। यह कदम असामाजिक तत्वों द्वारा भीड़ लगाकर विधि व्यवस्था भंग करने की आशंका को देखते हुए उठाया गया है। इन सेंटरों पर खास चौकसी जिन प्रमुख केंद्रों पर विशेष नजर रहेगी उनमें मारवाड़ी कॉलेज, सेंट जॉन्स हाई स्कूल, डोरंडा कॉलेज, निर्मला कॉलेज, केंद्रीय विद्यालय हिनू, धुर्वा और नामकुम, आर्मी पब्लिक स्कूल दीपाटोली और सेंट अलोयसियस हाई स्कूल समेत अन्य शामिल हैं।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी National Testing Agency (NTA) ने NEET UG 2026 के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए यह एक अहम अपडेट है। जिन उम्मीदवारों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया था, वे अब आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाकर अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। एडमिट कार्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए अनिवार्य दस्तावेज है। बिना हॉल टिकट के किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। ऐसे में छात्रों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर उसकी सभी जानकारी ध्यान से जांच लें। ऐसे करें NEET UG 2026 एडमिट कार्ड डाउनलोड सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाएं। होमपेज पर “NEET UG 2026 Admit Card” लिंक पर क्लिक करें। अब अपना Application Number, Date of Birth और Security Pin दर्ज करें। Submit बटन पर क्लिक करते ही आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिख जाएगा। सभी विवरण ध्यान से चेक करें और इसे डाउनलोड कर प्रिंटआउट निकाल लें। परीक्षा से जुड़ी अहम जानकारी NEET UG 2026 परीक्षा का आयोजन 3 मई 2026 को किया जाएगा। इससे पहले 13 अप्रैल को एग्जाम सिटी स्लिप जारी की गई थी, जिससे उम्मीदवारों को उनके परीक्षा शहर की जानकारी मिल चुकी है। अब एडमिट कार्ड जारी होने के बाद परीक्षा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचना चाहिए और एडमिट कार्ड के साथ एक वैध पहचान पत्र भी जरूर ले जाना चाहिए।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 के लिए आवेदन करने की आज आखिरी तारीख है। National Testing Agency (NTA) द्वारा आयोजित इस परीक्षा के लिए अभ्यर्थी 11 मार्च 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। ऐसे में जिन उम्मीदवारों ने अभी तक फॉर्म नहीं भरा है, उन्हें जल्द से जल्द आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए। फॉर्म भरते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान 1. फोटो और सिग्नेचर आवेदन फॉर्म में अपलोड की जाने वाली फोटो का बैकग्राउंड सफेद होना चाहिए। साथ ही फोटो पर उम्मीदवार का नाम और फोटो खींचे जाने की तारीख स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए। 2. कैटेगरी का सही चयन फॉर्म भरते समय कैटेगरी का चयन बेहद सावधानी से करें। एक बार आवेदन सबमिट होने के बाद इसे बदलना मुश्किल हो सकता है। 3. सही संपर्क जानकारी मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी वही दर्ज करें जो सक्रिय हो, क्योंकि परीक्षा से जुड़े सभी महत्वपूर्ण अपडेट NTA इन्हीं माध्यमों से भेजता है। महत्वपूर्ण तिथियां आवेदन की अंतिम तिथि: 11 मार्च 2026, रात 9:00 बजे तक फीस जमा करने की अंतिम तिथि: 11 मार्च 2026, रात 11:50 बजे तक परीक्षा की तारीख: 3 मई 2026 (रविवार) परीक्षा का समय: दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:20 बजे तक आवेदन शुल्क NEET UG 2026 के लिए विभिन्न श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क इस प्रकार निर्धारित किया गया है: सामान्य (General): 1700 रुपये General-EWS / OBC-NCL: 1600 रुपये SC / ST / PwBD / थर्ड जेंडर: 1000 रुपये भारत के बाहर के उम्मीदवार: 9500 रुपये ऐसे करें आवेदन उम्मीदवार सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाएं और NEET UG 2026 रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद न्यू रजिस्ट्रेशन में नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल जैसी जानकारी भरें। रजिस्ट्रेशन पूरा होने पर प्राप्त एप्लिकेशन नंबर से लॉगिन कर आवेदन फॉर्म में शैक्षणिक विवरण भरें और परीक्षा शहर का चयन करें। इसके बाद फोटो, सिग्नेचर और अंगूठे का निशान अपलोड कर अपनी कैटेगरी के अनुसार ऑनलाइन शुल्क जमा करें। अंत में कंफर्मेशन पेज डाउनलोड कर उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। इन कोर्सेज में मिलता है एडमिशन NEET UG के जरिए देशभर के मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, BAMS, BSMS, BUMS और BHMS जैसे कोर्सेज में दाखिला मिलता है। इसके अलावा Military Nursing Service (MNS) में प्रवेश के लिए भी यह परीक्षा अनिवार्य है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।