Melbourne Meets Modi

Prime Minister Narendra Modi addresses a large gathering at Melbourne's Marvel Stadium during the 'Melbourne Meets Modi' event, as organizers reject allegations that attendees were paid to participate.
मेलबर्न इवेंट के आयोजकों का कांग्रेस पर पलटवार, बोले- भीड़ किराए की नहीं, अपनी इच्छा से पहुंचे थे 30 हजार लोग

मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस के उन आरोपों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए लोगों को पैसे दिए गए थे। आयोजकों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी मांगने और आरोप वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं को भेजा पत्र कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर कहा कि 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को किसी भी तरह का भुगतान नहीं किया गया था। पत्र में कहा गया कि सिडनी से चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था सामुदायिक सहयोग से की गई थी और इसका खर्च न तो भारतीय जनता पार्टी ने उठाया और न ही किसी सरकारी एजेंसी ने। क्या था कांग्रेस का आरोप? कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं, जिनमें पवन खेड़ा भी शामिल थे, ने आरोप लगाया था कि यह एक "मैनेज्ड इवेंट" था। उनका दावा था कि लोगों को पैसे देकर कार्यक्रम में बुलाया गया और उनके लिए विशेष चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था की गई। कांग्रेस नेताओं ने अपने आरोपों के समर्थन में कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्टों का भी हवाला दिया था। आयोजकों ने आरोपों को बताया निराधार कार्यक्रम के आयोजकों में शामिल अमित करंथ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस के आरोप पूरी तरह निराधार और निराशाजनक हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोग अपनी इच्छा से पहुंचे थे और किसी को भी पैसे देकर नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोगों ने अपने यात्रा, रहने और अन्य खर्च स्वयं वहन किए। कुछ लोगों की यात्रा व्यवस्था स्थानीय भारतीय समुदाय के स्वयंसेवकों और सामुदायिक सहयोग से हुई थी। 30 हजार लोगों ने लिया था हिस्सा आयोजकों के अनुसार, 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में करीब 30 हजार लोग शामिल हुए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और विक्टोरिया की प्रीमियर जैसिंटा एलन ने भी लोगों को संबोधित किया। आयोजकों ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते संबंधों तथा ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के योगदान का उत्सव था। माफी की मांग आयोजकों ने अपने पत्र में कांग्रेस नेताओं से मांग की है कि वे भीड़ को "पैसे देकर जुटाई गई" बताने वाले आरोप वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उनका कहना है कि इस तरह के आरोपों से कार्यक्रम में शामिल हजारों भारतीय मूल के लोगों और स्वयंसेवकों का अपमान हुआ है।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addresses the Indian community in Melbourne during the 'Melbourne Meets Modi' event, highlighting India-Australia ties, Operation Sindoor and India's global role.
ऑस्ट्रेलिया में प्रवासी भारतीयों से बोले पीएम मोदी: ऑपरेशन सिंदूर का दुनिया में गूंजा संदेश, भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी पर दिया जोर

मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेलबर्न में भारतीय समुदाय के भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पूरी दुनिया को भारत की रक्षा क्षमता और आतंकवाद के खिलाफ उसकी जीरो-टॉलरेंस नीति का संदेश दिया है। कार्यक्रम के दौरान भारतीय समुदाय में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और पूरा सभागार "मोदी-मोदी" के नारों से गूंज उठा। ऑपरेशन सिंदूर का दुनिया में गया मजबूत संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतता। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकियों के ठिकानों पर की गई कार्रवाई की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी और इससे स्पष्ट संदेश गया कि भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि भारत की जीरो-टॉलरेंस नीति केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश ने इसे अपने कार्यों से भी साबित किया है। "हम भारतीय दूध में चीनी की तरह हैं" प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय जहां भी जाते हैं, वहां प्रेम, सहयोग और अपनी संस्कृति की मिठास फैलाते हैं। उन्होंने कहा, "हम भारतीय दूध में चीनी की तरह हैं। हम जहां भी जाते हैं, वहां अच्छाई और अपनापन लेकर जाते हैं।" उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों के घरों में दूध भले ऑस्ट्रेलिया का हो, लेकिन चाय भारतीय ही होती है। उनके इतना कहते ही सभागार "मोदी-मोदी" के नारों से गूंज उठा। 'भजन क्लबिंग' का किया जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय हो रहे 'भजन क्लबिंग' ट्रेंड का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी आधुनिक तरीके से आध्यात्म और संस्कृति को अपना रही है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीयों की भी सराहना करते हुए कहा कि यहां भी सप्ताहांत धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से भरे रहते हैं। उन्होंने कहा कि सत्यनारायण कथा, गुरुद्वारों में अरदास, बच्चों का भांगड़ा और भरतनाट्यम सीखना तथा भारतीय फिल्म महोत्सव जैसे आयोजन भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए हुए हैं। शिक्षा और नवाचार में बढ़ रहा सहयोग प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा के क्षेत्र में साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने बताया कि हजारों भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं अब ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय भी भारत में अपने कैंपस शुरू कर रहे हैं। उन्होंने डीकिन और वोलोंगोंग विश्वविद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई अन्य संस्थान भी भारत आने की तैयारी में हैं। भारत-ऑस्ट्रेलिया की दोस्ती दोनों देशों के लिए फायदेमंद कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने एक-दूसरे का गर्मजोशी से अभिवादन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के हित में है। उन्होंने व्यापार समझौते, तकनीक, रक्षा, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग को दोनों देशों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। स्टार्टअप और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की नई उड़ान प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने बताया कि अब पहली बार एक भारतीय निजी स्पेस स्टार्टअप अपने स्वयं के रॉकेट से उपग्रह लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि नवाचार, कौशल विकास और तकनीक के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। दुनिया के संकट में सबसे पहले मदद के लिए खड़ा होता है भारत प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत जब भी किसी देश की मदद करता है तो वह किसी का पासपोर्ट, धर्म या रंग नहीं देखता, बल्कि इंसानियत को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में वेनेजुएला में आए भूकंप सहित तुर्किये, सीरिया, म्यांमार और श्रीलंका जैसे देशों में भारत ने तेजी से राहत और बचाव सहायता पहुंचाकर पूरी दुनिया का भरोसा जीता है। उन्होंने कहा कि भारत जितना मजबूत होगा, उतना ही पूरी मानवता को उसका लाभ मिलेगा।  

Deepshikha जुलाई 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0