Meta

WhatsApp logo displayed on a smartphone as the Indian government seeks clarification from Meta over the upcoming username feature.
WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर सरकार सख्त, जवाब देने के लिए Meta को 9 जुलाई तक की मोहलत

नई दिल्ली: मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp के नए यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी चिंता जताई है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस मामले में Meta को विस्तृत जवाब देने के लिए 9 जुलाई तक का समय दिया है। पहले कंपनी से 6 जुलाई तक जवाब मांगा गया था, लेकिन अब तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत दी गई है। सरकार का कहना है कि मोबाइल नंबर की जगह यूजरनेम से पहचान होने की सुविधा का गलत इस्तेमाल साइबर अपराधी कर सकते हैं। ऐसे में इस फीचर के सुरक्षा पहलुओं और संभावित जोखिमों पर स्पष्ट जानकारी मांगी गई है। क्या है WhatsApp का नया यूजरनेम फीचर? WhatsApp अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसा फीचर ला रहा है, जिसके तहत यूजर अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना दूसरे लोगों से चैट कर सकेंगे। कंपनी के अनुसार— हर यूजर के लिए एक यूनिक यूजरनेम होगा। डिस्प्ले नेम और यूजरनेम अलग-अलग होंगे। डिस्प्ले नेम एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम प्रत्येक अकाउंट के लिए अलग होगा। इसका उद्देश्य यूजर्स की प्राइवेसी को बेहतर बनाना है। सरकार को क्यों है चिंता? MeitY का मानना है कि यदि मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा तो इससे कानून-व्यवस्था और साइबर सुरक्षा से जुड़े नए खतरे पैदा हो सकते हैं। सरकार की प्रमुख चिंताएं हैं— अपराधी फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों को निशाना बना सकते हैं। किसी की पहचान छिपाकर धोखाधड़ी और साइबर अपराध को अंजाम देना आसान हो सकता है। फर्जी प्रोफाइल और तस्वीरों का दुरुपयोग बढ़ सकता है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए अपराधियों की पहचान करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। Meta से क्या जानकारी मांगी गई है? सरकार ने Meta से यूजरनेम फीचर के कई तकनीकी और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। इनमें शामिल हैं— फीचर का तकनीकी ढांचा। यूजर की पहचान सत्यापित करने की प्रक्रिया। फर्जी अकाउंट और दुरुपयोग रोकने के उपाय। साइबर अपराध की स्थिति में जांच एजेंसियों को मिलने वाली सहायता। प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की व्यवस्था। फिलहाल फीचर लागू न करने की सलाह सरकार ने Meta से कहा है कि जब तक इस फीचर पर समीक्षा और आवश्यक चर्चा पूरी नहीं हो जाती, तब तक भारत में इसे व्यापक स्तर पर लागू करने से बचा जाए। सरकार पहले यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नया फीचर उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की रक्षा करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी प्रभावी समाधान उपलब्ध कराए। अब इस मामले में सभी की नजर Meta के जवाब पर है, जिसे कंपनी को 9 जुलाई तक केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Meta Instagram
केंद्र ने Meta को Instagram पर बाल यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों को तुरंत हटाने का निर्देश दिया, सात दिन में मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनी Meta को कड़ा नोटिस जारी करते हुए Instagram पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री से जुड़े विज्ञापनों और कंटेंट को तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी से इस मामले में सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब भी मांगा है। यह कार्रवाई मीडिया रिपोर्टों में ऐसे विज्ञापनों के सामने आने के बाद की गई है।   तुरंत हटाने और जवाब देने का निर्देश   सरकारी सूत्रों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने Meta को स्पष्ट निर्देश दिया है कि Instagram पर ऐसे सभी विज्ञापन और कंटेंट तत्काल निष्क्रिय किए जाएं, जो बाल यौन शोषण सामग्री तक पहुंच को बढ़ावा देते हों या उसकी सुविधा उपलब्ध कराते हों। मंत्रालय ने यह भी पूछा है कि ऐसे विज्ञापन प्लेटफॉर्म की निगरानी व्यवस्था से कैसे बच निकले और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।   आईटी और POCSO कानूनों के तहत हो सकती है कार्रवाई   सरकार ने संकेत दिया है कि यदि Meta संतोषजनक जवाब देने में विफल रहता है या निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और POCSO अधिनियम सहित लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सरकार ने ऑनलाइन बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीर अपराध बताया है।   ऑनलाइन बाल सुरक्षा पर सरकार का सख्त रुख   केंद्र सरकार ने कहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण की सामग्री को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंत्रालय ऐसे मामलों की लगातार निगरानी कर रहा है और सभी सोशल मीडिया कंपनियों से भारतीय कानूनों तथा सुरक्षा दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करने की अपेक्षा की गई है।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
America Jobs
अमेरिका में सुस्त पड़ा जॉब मार्केट, जून में सिर्फ 57 हजार नई नौकरियां

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका में रोजगार बाजार की रफ्तार लगातार धीमी होती नजर आ रही है। जून 2026 में देश में केवल 57 हजार नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार की अपेक्षाओं से काफी कम हैं। ताजा रोजगार आंकड़ों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऊंची महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और व्यापार नीतियों के कारण कंपनियां नई भर्तियों को लेकर सतर्क हो गई हैं।   ट्रेड और टैरिफ नीतियों का असर विशेषज्ञों के अनुसार, आयात शुल्क और व्यापार से जुड़ी नीतियों के कारण कई कंपनियों की लागत बढ़ी है। इससे निवेश और नई भर्ती की रफ्तार प्रभावित हुई है। विपक्षी दलों ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक और व्यापारिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि इन फैसलों का असर रोजगार बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।   बेरोजगारी दर घटी, लेकिन तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं जून में अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत से घटकर 4.2 प्रतिशत हो गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट पूरी तरह सकारात्मक संकेत नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों ने नौकरी की तलाश ही छोड़ दी है, जिसके कारण वे आधिकारिक बेरोजगारों की सूची से बाहर हो गए। इसी वजह से बेरोजगारी दर कम दिखाई दे रही है।   श्रम भागीदारी पांच साल के निचले स्तर पर लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट घटकर 61.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है। वहीं 25 से 54 वर्ष आयु वर्ग की श्रम भागीदारी भी घटकर 83.3 प्रतिशत रह गई है। यह संकेत देता है कि रोजगार बाजार में सक्रिय लोगों की संख्या लगातार कम हो रही है।   टेक सेक्टर में जारी है छंटनी जहां निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र में कुछ नई नौकरियां पैदा हुई हैं, वहीं टेक सेक्टर में छंटनी का दौर जारी है। मेटा, माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। कमजोर रोजगार आंकड़ों ने अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सामने भी ब्याज दरों को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Logos of WhatsApp, Telegram and Signal displayed on a smartphone, representing the government's scrutiny of username-based messaging features over cybersecurity concerns.
यूजरनेम फीचर पर सरकार सख्त: WhatsApp के बाद Telegram और Signal को भी भेजा नोटिस

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर प्रस्तावित और मौजूदा 'यूजरनेम फीचर' को लेकर सख्त रुख अपनाया है। WhatsApp को नोटिस जारी करने के बाद अब सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने Telegram और Signal को भी नोटिस भेजकर उनके यूजरनेम सिस्टम और उससे जुड़े सुरक्षा उपायों पर जवाब मांगा है। सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स से पूछा है कि यूजरनेम फीचर के जरिए होने वाली धोखाधड़ी, फर्जी पहचान (Impersonation) और साइबर अपराधों को रोकने के लिए उन्होंने क्या सुरक्षा इंतजाम किए हैं। Telegram और Signal से मांगा जवाब सरकार ने नोटिस में पूछा है कि दोनों प्लेटफॉर्म अपने यूजरनेम फीचर को जारी रखने के पक्ष में क्या तर्क देते हैं और यह फीचर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किस तरह काम करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, Telegram को भेजे गए नोटिस में सरकार ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि उसे यूजरनेम फीचर बनाए रखने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए। गौरतलब है कि Telegram और Signal पर यूजरनेम फीचर पहले से उपलब्ध है, जिससे बिना मोबाइल नंबर साझा किए भी यूजर्स एक-दूसरे से संपर्क कर सकते हैं। WhatsApp को भी भेजा गया था नोटिस इससे पहले केंद्र सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर आपत्ति जताई थी। सरकार ने कहा था कि जब तक इस विषय पर विस्तृत चर्चा पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च नहीं किया जाए। सरकार की चिंता है कि मोबाइल नंबर की जगह यूजरनेम आधारित पहचान से ऑनलाइन ठगी, फर्जी प्रोफाइल और पहचान छिपाकर अपराध करने के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। आईटी नियमों के तहत मांगा जवाब सरकार ने Meta से यह भी पूछा है कि प्रस्तावित फीचर को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। नोटिस में कहा गया है कि यदि यह फीचर पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना लागू किया जाता है, तो इससे साइबर अपराध और ऑनलाइन फ्रॉड का खतरा बढ़ सकता है। WhatsApp ने किया फीचर का बचाव WhatsApp ने सरकार की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि प्रस्तावित यूजरनेम फीचर में उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। कंपनी का दावा है कि इसमें फर्जी पहचान, प्रतिरूपण (Impersonation) और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय पहले से शामिल किए गए हैं। भारत है सबसे बड़ा बाजार भारत WhatsApp के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है। देश में WhatsApp के करीब 50 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। वहीं, Telegram और Signal के भी लाखों सक्रिय यूजर्स हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन पहचान और साइबर धोखाधड़ी को रोकने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
Zoho founder Sridhar Vembu announces Arattai will remove username accounts following India’s messaging platform security concerns.
Arattai में भी बंद होगा यूजरनेम फीचर, WhatsApp पर सरकार की सख्ती के बाद Zoho के श्रीधर वेम्बु का बड़ा फैसला

नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर रोक लगाए जाने के बाद स्वदेशी टेक कंपनी Zoho ने भी बड़ा फैसला लिया है। कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने घोषणा की है कि उनका मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Arattai भी यूजरनेम आधारित अकाउंट फीचर को बंद करेगा। इस कदम के साथ Arattai सरकार के निर्देशों का समर्थन करने वाला पहला भारतीय मैसेजिंग ऐप बन गया है। श्रीधर वेम्बु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार के नए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए Arattai में यूजरनेम आधारित अकाउंट की सुविधा समाप्त की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह बदलाव कब तक लागू होगा, लेकिन स्पष्ट किया कि कंपनी नियामकीय नियमों का पूरी तरह पालन करेगी। पहले से मौजूद था यूजरनेम फीचर Arattai में यूजरनेम के आधार पर अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने की सुविधा पहले से उपलब्ध थी। इस फीचर के जरिए यूजर बिना मोबाइल नंबर साझा किए दूसरे लोगों से जुड़ सकते थे। लेकिन अब कंपनी इसे चरणबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी कर रही है। वेम्बु के इस फैसले को भारत सरकार की डिजिटल सुरक्षा और साइबर फ्रॉड रोकने की नीति के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। WhatsApp को सरकार ने क्यों रोका? हाल ही में Meta ने WhatsApp के लिए यूजरनेम फीचर पेश करने की घोषणा की थी। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स को अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना चैट करने की सुविधा देना था। कंपनी का दावा था कि इससे प्राइवेसी और सुरक्षा बेहतर होगी। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस फीचर को लेकर गंभीर सुरक्षा चिंताएं जताईं। सरकार का मानना है कि यदि यूजरनेम सिस्टम बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के लागू किया गया, तो साइबर अपराधी बैंक, सरकारी संस्थानों, कंपनियों और प्रसिद्ध हस्तियों के नाम से फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकते हैं। इससे फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन स्कैम जैसे मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। Meta से मांगी गई तकनीकी जानकारी रिपोर्ट्स के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta से इस फीचर की विस्तृत तकनीकी जानकारी मांगी है। इसमें यूजरनेम सिस्टम का आर्किटेक्चर, सुरक्षा व्यवस्था, पहचान सत्यापन और धोखाधड़ी रोकने के उपायों की जानकारी शामिल है। जब तक सरकार और Meta के बीच इस विषय पर चर्चा पूरी नहीं हो जाती और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक भारत में WhatsApp के यूजरनेम फीचर के रोलआउट पर रोक रहेगी। Meta ने क्या दी सफाई? Meta का कहना है कि उसने कई महत्वपूर्ण यूजरनेम पहले से ही सुरक्षित (Reserved) रखे हैं। इनमें सरकारी संस्थान, प्रमुख कंपनियां, मशहूर हस्तियां और Meta Verified अकाउंट शामिल हैं। यदि कोई सामान्य यूजर ऐसे नाम से यूजरनेम बनाने की कोशिश करता है, तो सिस्टम उसे बताएगा कि वह नाम उपलब्ध नहीं है। कंपनी का दावा है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी अकाउंट और पहचान की चोरी को रोकना है। डिजिटल सुरक्षा पर बढ़ा फोकस WhatsApp और Arattai से जुड़े हालिया घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए सुरक्षा और पहचान सत्यापन से जुड़े नियम लगातार सख्त हो रहे हैं। सरकार चाहती है कि नए फीचर्स लॉन्च करने से पहले कंपनियां पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें, ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
A smartphone displaying the WhatsApp logo alongside a government notice symbolizing regulatory scrutiny over the platform's proposed username feature in India.
WhatsApp के ‘यूजरनेम’ फीचर पर सरकार की सख्ती, मेटा को नोटिस; तीन दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने WhatsApp के प्रस्तावित 'यूजरनेम' फीचर को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर इस फीचर के रोलआउट पर सवाल उठाए हैं और तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक उसके सभी सुरक्षा संबंधी सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक भारत में यह फीचर लॉन्च नहीं किया जा सकेगा। नोटिस में क्या कहा गया? सरकार ने अपने नोटिस में कहा है कि WhatsApp का यूजरनेम फीचर ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी पहचान वाले साइबर अपराधों को बढ़ावा दे सकता है। नोटिस के अनुसार, यदि लोग केवल यूजरनेम के माध्यम से संपर्क कर सकेंगे, तो साइबर अपराधियों के लिए अपनी पहचान छिपाकर लोगों को निशाना बनाना अधिक आसान हो जाएगा। कानूनी कार्रवाई की चेतावनी सरकार ने मेटा से पूछा है कि जब कंपनी को इस फीचर से संभावित साइबर अपराधों का अंदेशा है, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। मेटा को इस संबंध में लिखित और विस्तृत जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। सरकार की प्रमुख चिंताएं सरकार ने नोटिस में कई संभावित जोखिमों का उल्लेख किया है। डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन स्कैम: सरकार का मानना है कि बिना फोन नंबर साझा किए केवल यूजरनेम के जरिए संपर्क की सुविधा मिलने पर साइबर अपराधियों के लिए लोगों तक पहुंचना आसान हो सकता है। फर्जी पहचान का खतरा: धोखेबाज किसी व्यक्ति, कंपनी या सरकारी संस्था से मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। सरकारी एजेंसियों की नकल: आशंका जताई गई है कि अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, बैंक या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से ठगी कर सकते हैं। यूजरनेम फीचर क्या है? WhatsApp जिस फीचर पर काम कर रहा है, उसके तहत उपयोगकर्ता अपने मोबाइल नंबर के बजाय एक यूजरनेम के जरिए दूसरों से जुड़ सकेंगे। इससे फोन नंबर साझा किए बिना बातचीत करने का विकल्प मिलेगा। यह सुविधा पहले से कई अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। भारत सरकार का मानना है कि इस फीचर को लागू करने से पहले पर्याप्त सुरक्षा उपाय और पहचान सत्यापन की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है। फिलहाल मेटा की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार के जवाब की समीक्षा के बाद ही भारत में WhatsApp के यूजरनेम फीचर के भविष्य पर फैसला लिया जाएगा।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
CRED founder Kunal Shah after being appointed as the new global CEO of WhatsApp.
CRED से बनाई अरबों की दौलत, अब WhatsApp के CEO बने ₹15,000 करोड़ के मालिक कुणाल शाह

नई दिल्ली: भारतीय स्टार्टअप जगत के चर्चित उद्यमी कुणाल शाह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। फिनटेक कंपनी CRED को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के बाद अब वह दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp की कमान संभालने जा रहे हैं। Meta ने उन्हें WhatsApp का नया ग्लोबल CEO नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ भारतीय उद्यमिता को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी पहचान मिली है। हाल ही में कुणाल शाह ने CRED के CEO पद से हटने की घोषणा की थी। कंपनी की दैनिक जिम्मेदारियां अब मितेन संपत संभालेंगे, जबकि कुणाल शाह शेयरधारक और रणनीतिक भूमिका में जुड़े रहेंगे। कौन हैं कुणाल शाह? मुंबई में जन्मे कुणाल शाह एक गुजराती कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता फार्मास्युटिकल व्यवसाय से जुड़े थे। इंजीनियरिंग के बजाय उन्होंने मुंबई के विल्सन कॉलेज से फिलॉसफी में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने NMIMS से MBA शुरू किया, लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़कर उद्यमिता की राह चुन ली। उनका पहला बड़ा वेंचर PaisaBack था। इसके बाद वर्ष 2010 में उन्होंने FreeCharge की सह-स्थापना की। यह कंपनी इतनी सफल रही कि 2015 में Snapdeal ने इसे लगभग 2,800 करोड़ रुपये में खरीद लिया। कैसे बना CRED भारत का बड़ा फिनटेक ब्रांड? FreeCharge की सफलता के बाद कुणाल शाह ने 2018 में CRED की शुरुआत की। कंपनी का उद्देश्य समय पर क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान करने वाले ग्राहकों को रिवॉर्ड देना था। धीरे-धीरे CRED ने भुगतान, लोन, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट और क्रेडिट कार्ड सेवाओं तक अपना विस्तार किया। CRED से जुड़े प्रमुख आंकड़े विवरण आंकड़े स्थापना वर्ष 2018 यूजर्स 1.7 करोड़ से अधिक FY25 राजस्व ₹2,735 करोड़ वैल्यूएशन 4.5 अरब डॉलर Meta की हिस्सेदारी लगभग 20% Meta ने हाल ही में CRED में 90 करोड़ डॉलर (करीब 8,550 करोड़ रुपये) का निवेश भी किया है। WhatsApp में क्या होगी नई भूमिका? रिपोर्ट्स के अनुसार, कुणाल शाह WhatsApp के बिजनेस मॉडल को और मजबूत बनाने पर काम करेंगे। उनकी प्राथमिकता विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन आधारित सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर्स के विस्तार पर होगी। वह मौजूदा प्रमुख विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जिन्होंने पिछले सात वर्षों में WhatsApp के यूजर बेस को दोगुने से भी अधिक बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। कुणाल शाह का मानना है कि WhatsApp ने अब तक शानदार सफर तय किया है, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमता अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है। कितनी है कुणाल शाह की नेटवर्थ? विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 में कुणाल शाह की अनुमानित कुल संपत्ति करीब 15,000 करोड़ रुपये है। उनकी संपत्ति के प्रमुख स्रोत हैं: CRED में हिस्सेदारी FreeCharge की बिक्री से मिली पूंजी 200 से अधिक स्टार्टअप्स में एंजेल निवेश विभिन्न टेक कंपनियों में निवेश दिलचस्प बात यह है कि कुणाल शाह लंबे समय तक CRED से बेहद कम प्रतीकात्मक वेतन लेने के कारण भी चर्चा में रहे हैं। WhatsApp में उनकी नई भूमिका भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।  

surbhi जून 24, 2026 0
Meta’s AI and cloud computing plans after major employee layoffs
8 हजार कर्मचारियों की छंटनी के बाद बड़ा संकेत: अब AWS को टक्कर दे सकती है Meta

Meta के सीईओ Mark Zuckerberg ने संकेत दिए हैं कि कंपनी जल्द ही क्लाउड कंप्यूटिंग बिजनेस में एंट्री कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो Meta सीधे Amazon Web Services (AWS) और Microsoft Azure जैसी बड़ी कंपनियों को चुनौती देगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब Meta हाल ही में दुनियाभर में करीब 8,000 कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी है और कंपनी AI सेक्टर में बड़े निवेश की तैयारी कर रही है। शेयरहोल्डर मीटिंग में दिया बड़ा संकेत Meta की वार्षिक शेयरहोल्डर मीटिंग के दौरान मार्क जुकरबर्ग से पूछा गया कि क्या कंपनी क्लाउड कंप्यूटिंग बाजार में उतरने की योजना बना रही है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह विकल्प “पूरी तरह संभव” है। उन्होंने बताया कि कई कंपनियां लगातार Meta से कंप्यूटिंग पावर और API सेवाएं खरीदने को लेकर संपर्क कर रही हैं। जुकरबर्ग के मुताबिक, लगभग हर सप्ताह ऐसी मांगें सामने आ रही हैं। आखिर क्या होता है क्लाउड कंप्यूटिंग? क्लाउड कंप्यूटिंग वह तकनीक है जिसके जरिए कंपनियां इंटरनेट के माध्यम से सर्वर, डेटा स्टोरेज और नेटवर्क सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। आज OpenAI के ChatGPT और Google के Gemini जैसे AI टूल्स भी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही चलते हैं। फिलहाल Amazon, Microsoft और Google इस क्षेत्र के सबसे बड़े खिलाड़ी हैं। Meta अब तक इस बिजनेस से दूर रही है, लेकिन AI की बढ़ती मांग कंपनी को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है। AI पर अरबों डॉलर खर्च करेगी Meta रिपोर्ट के मुताबिक Meta इस साल AI से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर पर 125 से 145 अरब डॉलर तक खर्च करने की तैयारी में है। कंपनी का फोकस बड़े AI मॉडल्स और कंप्यूटिंग क्षमता को मजबूत करने पर है। हालांकि जुकरबर्ग ने साफ किया कि फिलहाल कंपनी के पास अतिरिक्त क्लाउड क्षमता उपलब्ध नहीं है। लेकिन यदि भविष्य में अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो जाता है, तो Meta क्लाउड सेवाएं बेचने के बाजार में उतर सकती है। AI की बढ़ती मांग बना रही नया बाजार AI सेक्टर में तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियों को भारी कंप्यूटिंग पावर की जरूरत पड़ रही है। इसी वजह से क्लाउड और डेटा सेंटर बिजनेस का महत्व तेजी से बढ़ा है। हाल ही में Anthropic के अधिकारियों ने भी कहा था कि कंप्यूटिंग क्षमता उनकी कंपनी के लिए “सबसे महत्वपूर्ण संसाधन” बन चुकी है। छंटनी के बाद AI पर फोकस Meta ने 20 मई को लगभग 8,000 कर्मचारियों की छंटनी की थी। इसके अलावा करीब 7,000 कर्मचारियों को AI-केंद्रित टीमों में ट्रांसफर किया गया है। कंपनी ने लागत कम करने के लिए हजारों ओपन जॉब रोल्स भी बंद किए हैं। हालांकि मार्क जुकरबर्ग ने कहा है कि इस साल कंपनी की ओर से और बड़े स्तर पर छंटनी की संभावना नहीं है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Abhijeet Deepke discussing hacked Instagram account amid CJP social media controversy
टेंशन में CJP संस्थापक अभिजीत दीपके, इंस्टाग्राम अकाउंट हैक होने का दावा; बैकअप अकाउंट भी हटाया गया

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक Abhijeet Deepke ने दावा किया है कि उनका इंस्टाग्राम अकाउंट हैक हो गया है। उन्होंने कहा कि वह अब अपने अकाउंट को एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि काफी कोशिशों के बावजूद उन्हें अकाउंट वापस नहीं मिल पाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि Cockroach Janta Party (CJP) का बैकअप इंस्टाग्राम अकाउंट भी हटा दिया गया है। इस मामले में अब तक Meta की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थी CJP 15 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की “पैरासाइट” और “कॉकरोच” टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर CJP तेजी से चर्चा में आ गई थी। इसके अगले ही दिन बने इस ऑनलाइन मूवमेंट को बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूजर्स, एक्टिविस्ट्स, कलाकारों और युवाओं का समर्थन मिलने लगा। बाद में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सफाई देते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया और उनका बयान फर्जी डिग्री लेकर कानून पेशे में आने वालों के लिए था। इसके बावजूद “कॉकरोच” चुनाव चिन्ह वाली CJP इंटरनेट पर तेजी से वायरल होती चली गई। 2.1 करोड़ से ज्यादा थे फॉलोअर्स अभिजीत दीपके के मुताबिक CJP के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर 2.1 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स थे। ऐसे में अकाउंट के हटने और हैक होने के दावे के बाद समर्थकों के बीच चिंता बढ़ गई है। उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि बैकअप अकाउंट भी हटा दिया गया है, जिससे संगठन की सोशल मीडिया मौजूदगी को बड़ा झटका लगा है। भारत में ब्लॉक हुआ X अकाउंट 21 मई को Cockroach Janta Party का X अकाउंट भी भारत में ब्लॉक कर दिया गया था। CJP_2029 नाम वाले अकाउंट पर अब “Account Withheld” का संदेश दिखाई दे रहा है। साथ ही लिखा है कि भारत में कानूनी मांग के जवाब में इस अकाउंट को रोका गया है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि अकाउंट पर कार्रवाई किस शिकायत या कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई।  

surbhi मई 23, 2026 0
Meta logo representing the company amidst AI investment and potential workforce cuts.
AI पर बढ़ते खर्च के बीच Meta में बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी? रिपोर्ट में 20% कर्मचारियों की कटौती की चर्चा

  अमेरिकी टेक कंपनी Meta Platforms में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी की संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश की योजना के बीच अपने ऑपरेशन्स को अधिक कुशल बनाने के लिए कर्मचारियों की संख्या कम करने पर विचार कर रही है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वर्कफोर्स में करीब 20% तक कटौती पर चर्चा हुई है। अगर ऐसा होता है तो लगभग 16,000 कर्मचारियों की नौकरी प्रभावित हो सकती है। दिसंबर के अंत तक कंपनी में करीब 79,000 कर्मचारी काम कर रहे थे। हालांकि कंपनी के प्रवक्ता Andy Stone ने इन खबरों को “सैद्धांतिक संभावनाओं पर आधारित अटकलें” बताया है और कहा कि अभी तक छंटनी के पैमाने या समय को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न टीमों से यह आकलन करने को कहा है कि ऑपरेशन्स को कैसे और अधिक सुव्यवस्थित किया जा सकता है। दरअसल, कंपनी के सीईओ Mark Zuckerberg चाहते हैं कि Meta जनरेटिव AI क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को और तेज करे। इसी रणनीति के तहत कंपनी AI टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा निवेश कर रही है। यदि यह छंटनी होती है तो यह Meta के इतिहास में सबसे बड़ा पुनर्गठन होगा। इससे पहले कंपनी ने 2022 और 2023 में लागत घटाने के लिए कुल मिलाकर 21,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी की थी। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर किसी बड़े फैसले की पुष्टि नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट के बाद टेक सेक्टर में संभावित छंटनी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0