Meta AI

: Instagram app with Meta AI branding illustrating removal of the controversial AI image generation feature over privacy concerns.
Instagram पर Meta ने हटाया विवादित AI फीचर, यूजर्स की तस्वीरों से इमेज बनाने का विकल्प किया बंद

सोशल मीडिया कंपनी Meta ने यूजर्स की कड़ी आलोचना के बाद Instagram से जुड़ा अपना विवादित AI इमेज जनरेशन फीचर हटा दिया है। यह फीचर किसी भी सार्वजनिक (Public) Instagram अकाउंट को टैग करके उसकी AI तस्वीर बनाने की अनुमति देता था, जिसे लेकर गोपनीयता (Privacy) और सहमति (Consent) को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। कंपनी ने स्वीकार किया कि इस फीचर को लॉन्च करने का फैसला सही नहीं था और यूजर्स की प्रतिक्रिया के बाद इसे बंद कर दिया गया है। क्या था विवादित AI फीचर? Meta ने हाल ही में Muse Image नाम का AI इमेज जनरेशन टूल लॉन्च किया था। इस फीचर की मदद से कोई भी व्यक्ति किसी सार्वजनिक Instagram अकाउंट को प्रॉम्प्ट में टैग करके उसकी AI-जनरेटेड तस्वीर बना सकता था। इसके लिए संबंधित व्यक्ति की अनुमति की आवश्यकता नहीं थी। हालांकि, यह सुविधा केवल Public Accounts तक सीमित थी। निजी (Private) अकाउंट और 18 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स इस फीचर से बाहर रखे गए थे। क्यों हुआ विरोध? इस फीचर को लेकर सबसे बड़ी आपत्ति यह थी कि सभी सार्वजनिक Instagram अकाउंट डिफॉल्ट रूप से (Opt-in) इसमें शामिल थे। यदि कोई यूजर अपनी तस्वीरों का AI उपयोग नहीं चाहता था, तो उसे स्वयं जाकर सेटिंग्स बदलनी पड़ती थीं। इसके अलावा Meta यूजर्स को यह भी नहीं बताता था कि किसी ने उनकी प्रोफाइल का उपयोग कर AI इमेज बनाई है या नहीं। इस वजह से लोगों ने आशंका जताई कि उनकी तस्वीरों का बिना अनुमति दुरुपयोग हो सकता है। Meta ने क्या कहा? Meta ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में कहा कि कंपनी का उद्देश्य लोगों को एक उपयोगी रचनात्मक (Creative) टूल उपलब्ध कराना था और उन्हें अपने कंटेंट पर नियंत्रण देना था। हालांकि, कंपनी ने माना कि यूजर्स की प्रतिक्रिया के बाद उसे एहसास हुआ कि यह फीचर अपेक्षित मानकों पर खरा नहीं उतरा। Meta ने कहा कि इस सुविधा को अब पूरी तरह हटा दिया गया है, जबकि Muse Image का बाकी AI इमेज जनरेशन प्लेटफॉर्म पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। अब क्या बदला? फीचर हटाए जाने के बाद अब यदि कोई यूजर Meta AI में किसी Instagram अकाउंट को टैग करके उसकी AI तस्वीर बनाने की कोशिश करता है, तो AI ऐसा करने से इनकार कर देता है। इसके अलावा Meta ने Instagram सेटिंग्स से वह विकल्प भी हटा दिया है, जिसके जरिए Public Account यूजर अपने कंटेंट को AI फीचर्स में इस्तेमाल करने की अनुमति देते थे। हॉलीवुड से भी उठी थी आपत्ति इस फीचर का विरोध केवल आम यूजर्स तक सीमित नहीं रहा। हॉलीवुड की प्रमुख टैलेंट एजेंसी Creative Artists Agency (CAA), जो टॉम क्रूज़, ज़ेंडाया और मेरिल स्ट्रीप जैसे कलाकारों का प्रतिनिधित्व करती है, ने भी Meta से डिफॉल्ट सुरक्षा लागू करने की मांग की थी। एजेंसी का कहना था कि AI उपयोग के लिए लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल Opt-in यानी स्पष्ट अनुमति के बाद ही होना चाहिए, न कि डिफॉल्ट रूप से। AI फीचर्स को लेकर बढ़ रही हैं चुनौतियां Meta पहली कंपनी नहीं है जिसे AI फीचर को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले OpenAI और xAI जैसी कंपनियां भी अपने AI इमेज और वीडियो जनरेशन टूल्स को लेकर गोपनीयता और दुरुपयोग से जुड़े विवादों में घिर चुकी हैं। AI तकनीक के तेजी से विस्तार के साथ कंपनियों पर यूजर्स की निजता और सहमति की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
Meta Muse Image AI tool generating realistic images from text prompts while raising concerns over user privacy and digital identity.
Meta का नया AI टूल 'Muse Image' लॉन्च, मिनटों में बनाएगा रियल जैसी तस्वीरें, लेकिन प्राइवेसी को लेकर उठे सवाल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में Meta ने एक नया इमेज जनरेशन मॉडल Muse Image पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह टूल केवल टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के आधार पर कुछ ही सेकंड में बेहद वास्तविक (Realistic) तस्वीरें तैयार कर सकता है। इतना ही नहीं, यह मौजूदा तस्वीरों को एडिट करने और कई इमेज को मिलाकर नया विजुअल बनाने की भी क्षमता रखता है। हालांकि, इस नई तकनीक के साथ प्राइवेसी और यूजर डेटा के इस्तेमाल को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है। क्या है Meta का Muse Image? Muse Image एक AI आधारित इमेज जनरेशन मॉडल है, जो यूजर द्वारा दिए गए टेक्स्ट निर्देशों (Prompt) को समझकर नई तस्वीरें तैयार करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई यूजर समुद्र किनारे बने आधुनिक घर की तस्वीर चाहता है, तो उसे केवल उसका विवरण लिखना होगा। इसके बाद AI उसी आधार पर नई इमेज तैयार कर देगा। इसकी खास बात यह है कि यह सिर्फ नई तस्वीरें ही नहीं बनाता, बल्कि कई रेफरेंस इमेज को मिलाकर नया डिजाइन तैयार करने और पहले से मौजूद तस्वीरों में बदलाव करने की सुविधा भी देता है। किन प्लेटफॉर्म पर मिलेगा यह फीचर? Meta ने Muse Image को अपने AI इकोसिस्टम का हिस्सा बनाना शुरू कर दिया है। फिलहाल यह फीचर Meta AI ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जा रहा है। अमेरिका में इसे Instagram Stories के साथ भी जोड़ा गया है, जबकि कुछ देशों में WhatsApp पर इसकी सीमित सुविधा शुरू की गई है। कंपनी भविष्य में इसे Facebook और Marketplace जैसे अन्य प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। अभी यूजर इस सुविधा का मुफ्त उपयोग कर सकते हैं, हालांकि भविष्य में सीमित उपयोग के बाद सब्सक्रिप्शन मॉडल लागू किया जा सकता है। क्यों बढ़ा प्राइवेसी को लेकर विवाद? Muse Image का सबसे चर्चित फीचर वह है, जिसमें किसी व्यक्ति के Instagram यूजरनेम के आधार पर उसकी सार्वजनिक (Public) प्रोफाइल पर मौजूद तस्वीरों से नई AI इमेज तैयार की जा सकती है। यही सुविधा अब विवाद का कारण बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी सार्वजनिक तस्वीरों का इस्तेमाल AI इमेज बनाने में किया जाता है, तो इससे प्राइवेसी और डिजिटल पहचान से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। क्या हो सकता है गलत इस्तेमाल? तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तरह की सुविधा पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं रखा गया तो इसका गलत उपयोग भी संभव है। AI की मदद से तैयार होने वाली तस्वीरें अब पहले से कहीं अधिक वास्तविक दिखाई देती हैं। ऐसे में भविष्य में असली और AI से बनी तस्वीरों के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है। इससे फर्जी तस्वीरें, गलत जानकारी और डिजिटल पहचान से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। 'ऑप्ट-आउट' सिस्टम पर भी उठे सवाल Muse Image को लेकर एक और चिंता इसका ऑप्ट-आउट सिस्टम है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस व्यवस्था में यदि कोई यूजर नहीं चाहता कि उसका सार्वजनिक कंटेंट AI मॉडल के लिए इस्तेमाल हो, तो उसे स्वयं सेटिंग्स में जाकर यह विकल्प बंद करना होगा। ऐसे में कई लोगों को यह जानकारी भी नहीं होगी कि उनकी सार्वजनिक तस्वीरों का उपयोग AI प्रशिक्षण या इमेज जनरेशन के लिए किया जा सकता है। AI के साथ बढ़ रही जिम्मेदारी भी AI आधारित इमेज जनरेशन तकनीक क्रिएटिविटी के नए अवसर जरूर खोल रही है, लेकिन इसके साथ डेटा सुरक्षा, यूजर की सहमति और डिजिटल पहचान की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक के विस्तार के साथ कंपनियों को पारदर्शी नीतियां अपनानी होंगी, ताकि नई सुविधाओं का लाभ भी मिलता रहे और यूजर्स की निजता भी सुरक्षित रह सके।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Muse Image
Meta ने 'Muse Image' AI लॉन्च किया, Facebook और Instagram पर शुरू होंगे नए AI इमेज जनरेशन फीचर्स

सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। Meta ने अपना नया AI इमेज जनरेशन मॉडल 'Muse Image' लॉन्च कर दिया है। यह मॉडल Meta AI में उपलब्ध होगा और यूजर्स को केवल टेक्स्ट प्रॉम्प्ट ही नहीं, बल्कि फोटो, स्केच और नोट्स के आधार पर भी नई AI तस्वीरें बनाने और एडिट करने की सुविधा देगा। कंपनी ने इसे अपने नए Meta Superintelligence Labs का पहला इमेज जनरेशन मॉडल बताया है।   Instagram और WhatsApp से होगी शुरुआत   Meta के अनुसार, Muse Image की मदद से यूजर्स Instagram Stories के लिए 30 से अधिक नए AI इफेक्ट्स का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके अलावा WhatsApp में Meta AI चैट के जरिए भी AI इमेज बनाई जा सकेगी। आने वाले महीनों में यह फीचर Facebook और Messenger पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।   AI से फोटो एडिट करना होगा और आसान   नया मॉडल जटिल निर्देशों को समझने, कई तस्वीरों को मिलाकर नई इमेज तैयार करने और स्केच या ड्रॉइंग के जरिए इमेज एडिट करने में सक्षम है। Meta का दावा है कि यह मॉडल पहले की तुलना में अधिक सटीक, तेज और बेहतर गुणवत्ता वाली तस्वीरें तैयार करेगा। कंपनी ने Muse Video नाम के AI वीडियो मॉडल की शुरुआती झलक भी पेश की है।   AI रेस में Google और OpenAI को चुनौती   Muse Image के लॉन्च के साथ Meta ने AI इमेज जनरेशन की दौड़ में OpenAI और Google को सीधी चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि आने वाले समय में यह तकनीक क्रिएटर्स, विज्ञापनदाताओं और आम यूजर्स के लिए कंटेंट तैयार करने का तरीका पूरी तरह बदल सकती है।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
WhatsApp
WhatsApp में आए 6 नए फीचर्स, फोटो एडिटिंग से लेकर चैटिंग तक यूजर्स को मिलेगा नया अनुभव

नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp ने अपने यूजर्स के लिए कई नए फीचर्स शुरू कर दिए हैं। इन अपडेट्स का उद्देश्य चैटिंग को आसान बनाना, स्टोरेज मैनेजमेंट बेहतर करना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए यूजर एक्सपीरियंस को और स्मार्ट बनाना है।   फोटो एडिट करना होगा आसान   WhatsApp ने Meta AI आधारित नए फोटो एडिटिंग टूल पेश किए हैं। अब यूजर्स फोटो भेजने से पहले उसका बैकग्राउंड बदल सकेंगे, अनचाहे ऑब्जेक्ट हटा सकेंगे और AI की मदद से अलग-अलग स्टाइल भी उसमे लागू कर सकेंगे।   iPhone पर एक ही ऐप में चलेंगे दो अकाउंट   अब iPhone यूजर्स भी एक ही WhatsApp ऐप में दो अलग-अलग अकाउंट इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे पर्सनल और ऑफिस अकाउंट को अलग-अलग मैनेज करना आसान होगा। यह सुविधा पहले केवल Android यूजर्स के लिए उपलब्ध थी।   चैट ट्रांसफर हुआ और आसान   WhatsApp ने चैट ट्रांसफर फीचर को और बेहतर बनाया है। अब Android और iPhone के बीच चैट, फोटो और वीडियो ट्रांसफर करना पहले से ज्यादा आसान होगा, जिससे नया फोन लेने पर डेटा सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर किया जा सकेगा।   बड़े मीडिया फाइल्स आसानी से होंगे डिलीट    नए अपडेट के बाद यूजर्स किसी चैट के बड़े मीडिया फाइल्स को अलग से खोजकर डिलीट कर सकेंगे। इससे बिना पूरी चैट हटाए फोन की स्टोरेज खाली की जा सकेगी।   इमोजी टाइप करते ही मिलेंगे स्टिकर सुझाव   अब चैटिंग के दौरान जैसे ही यूजर कोई इमोजी टाइप करेगा, WhatsApp उससे जुड़े स्टिकर अपने आप सुझाएगा। इससे चैटिंग पहले से ज्यादा मजेदार और तेज हो जाएगी।   यूजरनेम फीचर की भी तैयारी   रिपोर्ट्स के मुताबिक WhatsApp जल्द ही Username फीचर भी लॉन्च कर सकता है। इसके बाद यूजर्स बिना मोबाइल नंबर साझा किए भी एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। यह फीचर यूजर की प्राइवेसी को और मजबूत करेगा।   चरणबद्ध तरीके से मिलेंगे अपडेट   WhatsApp ने बताया है कि ये सभी फीचर्स एक साथ सभी यूजर्स को नहीं मिलेंगे। इन्हें Android और iPhone पर चरणबद्ध तरीके से रोलआउट किया जा रहा है। यदि आपके फोन में अभी यह अपडेट नहीं आया है, तो Google Play Store या Apple App Store से WhatsApp का लेटेस्ट वर्जन अपडेट करें।

abhishek singh जून 26, 2026 0
Meta AI pendant wearable device concept that records conversations and provides AI assistance
Meta ला रही है AI पेंडेंट! गले में पहनकर करेगा बातचीत रिकॉर्ड, शर्ट पर भी लगा सकेंगे यूजर्स

सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बड़ा नाम बन चुकी Meta अब एक नए AI-पावर्ड वियरेबल डिवाइस पर काम कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी एक ऐसे स्मार्ट AI पेंडेंट की टेस्टिंग की तैयारी कर रही है जिसे यूजर्स गले में पहन सकेंगे या अपनी शर्ट पर क्लिप कर सकेंगे। यह डिवाइस केवल एक एक्सेसरी नहीं होगा, बल्कि बातचीत को सुनने, रिकॉर्ड करने और उसे व्यवस्थित करने में सक्षम AI असिस्टेंट की तरह काम करेगा। Meta का नया AI पेंडेंट क्या करेगा? लीक हुए एक इंटरनल मेमो के अनुसार, Meta अगले एक साल के भीतर इस डिवाइस की टेस्टिंग शुरू कर सकती है। बताया जा रहा है कि यह तकनीक उस AI पेंडेंट पर आधारित होगी जिसे Limitless AI ने विकसित किया था। Limitless का डिवाइस यूजर्स की बातचीत को रिकॉर्ड और प्रोसेस कर सकता था। इसे दो तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता था: गले में पेंडेंट की तरह पहनकर शर्ट या कपड़ों पर क्लिप लगाकर इसके जरिए AI असिस्टेंट आसपास की बातचीत को कैप्चर करता था और बाद में उसे व्यवस्थित जानकारी के रूप में उपलब्ध कराता था। Meta ने क्यों खरीदी थी Limitless? 2025 के आखिर में Meta ने Limitless का अधिग्रहण किया था। कंपनी का मानना था कि इस तकनीक की मदद से AI आधारित हार्डवेयर जैसे: स्मार्ट ग्लासेज स्मार्ट वॉच AI असिस्टेंट डिवाइस को तेजी से विकसित किया जा सकेगा। Meta लंबे समय से AI को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रही है और यह पेंडेंट उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बातचीत रिकॉर्ड करने पर उठ सकते हैं सवाल AI पेंडेंट का सबसे चर्चित फीचर इसकी बातचीत रिकॉर्ड करने की क्षमता है। हालांकि यही फीचर इसकी सबसे बड़ी चुनौती भी बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे डिवाइस को लेकर तीन प्रमुख चिंताएं सामने आती हैं: प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा बातचीत रिकॉर्ड होने की पारदर्शिता संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम पिछले कुछ AI वियरेबल डिवाइस भी इन्हीं कारणों से बड़े पैमाने पर लोकप्रिय नहीं हो सके थे। AI वियरेबल्स पर बढ़ रहा है दांव AI हार्डवेयर को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। Meta के अलावा OpenAI सहित कई बड़ी टेक कंपनियां ऐसे उपकरण विकसित कर रही हैं जो स्मार्टफोन के बाद अगली बड़ी तकनीकी क्रांति बन सकते हैं। कंपनियों का मानना है कि भविष्य में AI सिर्फ मोबाइल ऐप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीधे पहनने वाले डिवाइसों के जरिए लोगों के साथ लगातार जुड़ा रहेगा। "Wearables for Work" भी ला सकती है Meta रिपोर्ट्स के अनुसार Meta केवल AI पेंडेंट तक सीमित नहीं रहने वाली। कंपनी अपने AI-संचालित स्मार्ट ग्लासेज पोर्टफोलियो का भी विस्तार कर रही है। इसके अलावा Meta "Wearables for Work" नाम से एक नई सब्सक्रिप्शन सेवा लॉन्च करने की तैयारी में है, जो विशेष रूप से: कॉर्पोरेट यूजर्स ऑफिस कर्मचारियों एंटरप्राइज ग्राहकों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही है। क्या बदल सकता है AI का भविष्य? यदि Meta का यह प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो AI असिस्टेंट को इस्तेमाल करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। स्मार्टफोन निकालने की जरूरत के बिना यूजर्स सीधे अपने पहनने वाले डिवाइस के जरिए नोट्स, बातचीत और जानकारी को मैनेज कर सकेंगे। हालांकि इसकी सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि Meta प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा से जुड़े सवालों का समाधान किस तरह करती है।  

surbhi जून 1, 2026 0
Meta introduces paid subscription plans for WhatsApp, Instagram and Facebook with premium features
अब WhatsApp, Instagram और Facebook के फीचर्स के लिए पैसे लेगी Meta, लॉन्च किए नए प्रीमियम प्लान

Meta ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स Instagram, Facebook और WhatsApp के लिए नए पेड सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च किए हैं। कंपनी अब यूजर्स को एक्सक्लूसिव फीचर्स और एडवांस टूल्स देने के बदले मासिक शुल्क लेने की तैयारी में है। इस कदम से साफ संकेत मिल रहा है कि Meta अब केवल विज्ञापनों पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि प्रीमियम फीचर्स के जरिए नई कमाई का मॉडल तैयार कर रही है। Instagram और Facebook Plus में मिलेंगे खास फीचर्स रिपोर्ट के अनुसार Instagram Plus और Facebook Plus की कीमत 3.99 डॉलर प्रति माह रखी गई है, जबकि WhatsApp Plus के लिए 2.99 डॉलर प्रति माह चुकाने होंगे। हालांकि भारत में इन प्लान्स की आधिकारिक कीमत अभी घोषित नहीं की गई है। Instagram Plus यूजर्स को कई एडवांस फीचर्स मिलेंगे। इसमें यह देखने का विकल्प होगा कि किसी स्टोरी को कितनी बार दोबारा देखा गया। यूजर्स कई अलग-अलग स्टोरी ऑडियंस लिस्ट भी बना सकेंगे। इसके अलावा स्टोरी को बिना नाम दिखाए देखने, 24 घंटे से ज्यादा समय तक स्टोरी रखने और हर हफ्ते किसी खास स्टोरी को ज्यादा विजिबिलिटी देने जैसे फीचर्स भी शामिल होंगे। प्रोफाइल कस्टमाइजेशन पर Meta का फोकस प्रीमियम सब्सक्राइबर्स को एनिमेटेड “Super Heart” रिएक्शन, कस्टम ऐप आइकन, खास बायो फॉन्ट और अतिरिक्त प्रोफाइल पिन जैसे फीचर्स भी मिलेंगे। Meta का मानना है कि यूजर्स अब सोशल मीडिया पर ज्यादा पर्सनलाइजेशन और अलग अनुभव चाहते हैं। WhatsApp Plus में मिलेंगे नए मैसेजिंग टूल WhatsApp Plus यूजर्स को कस्टम थीम, यूनिक रिंगटोन, प्रीमियम स्टिकर्स और ज्यादा पिन किए गए चैट्स जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा एडवांस चैट लिस्ट मैनेजमेंट और मैसेजिंग कस्टमाइजेशन टूल्स भी दिए जाएंगे। कंपनी भविष्य में और नए फीचर्स जोड़ने की योजना बना रही है। Meta AI के लिए भी आए नए सब्सक्रिप्शन Meta ने “Meta One” नाम से नए AI और बिजनेस फोकस्ड सब्सक्रिप्शन प्लान भी लॉन्च किए हैं। Meta One Plus प्लान की कीमत 7.99 डॉलर प्रति माह होगी, जबकि Meta One Premium प्लान 19.99 डॉलर प्रति माह में मिलेगा। इन प्लान्स में AI इमेज जनरेशन, वीडियो क्रिएशन और बड़े AI टास्क के लिए ज्यादा क्षमता दी जाएगी। हालांकि Meta AI का बेसिक वर्जन मुफ्त रहेगा, लेकिन ज्यादा उपयोग करने वाले यूजर्स को लिमिट पार करने के बाद पेड प्लान लेना पड़ सकता है। क्रिएटर्स और बिजनेस के लिए अलग प्लान Meta ने कंटेंट क्रिएटर्स और बिजनेस यूजर्स के लिए भी नए प्रीमियम प्लान लॉन्च किए हैं। इनमें अकाउंट वेरिफिकेशन, प्रोफाइल प्रमोशन, एडवांस एनालिटिक्स और ह्यूमन कस्टमर सपोर्ट जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। कंपनी का लक्ष्य अपने AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे भारी खर्च की भरपाई करना और यूजर्स को अपने पूरे इकोसिस्टम से जोड़े रखना है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Meta’s AI and cloud computing plans after major employee layoffs
8 हजार कर्मचारियों की छंटनी के बाद बड़ा संकेत: अब AWS को टक्कर दे सकती है Meta

Meta के सीईओ Mark Zuckerberg ने संकेत दिए हैं कि कंपनी जल्द ही क्लाउड कंप्यूटिंग बिजनेस में एंट्री कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो Meta सीधे Amazon Web Services (AWS) और Microsoft Azure जैसी बड़ी कंपनियों को चुनौती देगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब Meta हाल ही में दुनियाभर में करीब 8,000 कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी है और कंपनी AI सेक्टर में बड़े निवेश की तैयारी कर रही है। शेयरहोल्डर मीटिंग में दिया बड़ा संकेत Meta की वार्षिक शेयरहोल्डर मीटिंग के दौरान मार्क जुकरबर्ग से पूछा गया कि क्या कंपनी क्लाउड कंप्यूटिंग बाजार में उतरने की योजना बना रही है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह विकल्प “पूरी तरह संभव” है। उन्होंने बताया कि कई कंपनियां लगातार Meta से कंप्यूटिंग पावर और API सेवाएं खरीदने को लेकर संपर्क कर रही हैं। जुकरबर्ग के मुताबिक, लगभग हर सप्ताह ऐसी मांगें सामने आ रही हैं। आखिर क्या होता है क्लाउड कंप्यूटिंग? क्लाउड कंप्यूटिंग वह तकनीक है जिसके जरिए कंपनियां इंटरनेट के माध्यम से सर्वर, डेटा स्टोरेज और नेटवर्क सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। आज OpenAI के ChatGPT और Google के Gemini जैसे AI टूल्स भी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही चलते हैं। फिलहाल Amazon, Microsoft और Google इस क्षेत्र के सबसे बड़े खिलाड़ी हैं। Meta अब तक इस बिजनेस से दूर रही है, लेकिन AI की बढ़ती मांग कंपनी को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है। AI पर अरबों डॉलर खर्च करेगी Meta रिपोर्ट के मुताबिक Meta इस साल AI से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर पर 125 से 145 अरब डॉलर तक खर्च करने की तैयारी में है। कंपनी का फोकस बड़े AI मॉडल्स और कंप्यूटिंग क्षमता को मजबूत करने पर है। हालांकि जुकरबर्ग ने साफ किया कि फिलहाल कंपनी के पास अतिरिक्त क्लाउड क्षमता उपलब्ध नहीं है। लेकिन यदि भविष्य में अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो जाता है, तो Meta क्लाउड सेवाएं बेचने के बाजार में उतर सकती है। AI की बढ़ती मांग बना रही नया बाजार AI सेक्टर में तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियों को भारी कंप्यूटिंग पावर की जरूरत पड़ रही है। इसी वजह से क्लाउड और डेटा सेंटर बिजनेस का महत्व तेजी से बढ़ा है। हाल ही में Anthropic के अधिकारियों ने भी कहा था कि कंप्यूटिंग क्षमता उनकी कंपनी के लिए “सबसे महत्वपूर्ण संसाधन” बन चुकी है। छंटनी के बाद AI पर फोकस Meta ने 20 मई को लगभग 8,000 कर्मचारियों की छंटनी की थी। इसके अलावा करीब 7,000 कर्मचारियों को AI-केंद्रित टीमों में ट्रांसफर किया गया है। कंपनी ने लागत कम करने के लिए हजारों ओपन जॉब रोल्स भी बंद किए हैं। हालांकि मार्क जुकरबर्ग ने कहा है कि इस साल कंपनी की ओर से और बड़े स्तर पर छंटनी की संभावना नहीं है।  

surbhi मई 29, 2026 0
WhatsApp introduces Incognito Chat feature for secure and private AI conversations with disappearing messages
WhatsApp का नया Incognito Chat फीचर: अब AI चैट्स होंगी ज्यादा प्राइवेट और सुरक्षित

Meta Platforms ने WhatsApp यूजर्स के लिए एक नया प्राइवेसी फीचर पेश किया है, जिसका नाम Incognito Chat रखा गया है। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स को Meta AI के साथ ज्यादा सुरक्षित और निजी बातचीत का अनुभव देना है। कंपनी के CEO Mark Zuckerberg ने हाल ही में इस फीचर की घोषणा की। Meta का दावा है कि यह नया मोड AI चैट्स को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाएगा और बातचीत खत्म होते ही मैसेज अपने आप गायब हो जाएंगे। चैट खत्म होते ही डिलीट हो जाएंगे मैसेज Meta के अनुसार, Incognito Chat में की गई बातचीत सामान्य क्लाउड सर्वर पर प्रोसेस नहीं होगी। इसके बजाय, इसे एक सिक्योर और एन्क्रिप्टेड सिस्टम के जरिए संभाला जाएगा। कंपनी का कहना है कि न तो Meta और न ही कोई बाहरी व्यक्ति इन चैट्स को पढ़ सकेगा। सबसे अहम बात यह है कि AI से हुई बातचीत सेशन खत्म होते ही अपने आप डिलीट हो जाएगी और सर्वर पर स्टोर नहीं होगी। यह फीचर उन यूजर्स के लिए खास माना जा रहा है जो AI चैट्स के दौरान अपनी निजी जानकारी को लेकर चिंतित रहते हैं। क्या है Private Processing टेक्नोलॉजी? Meta ने बताया कि Incognito Chat फीचर उसकी Private Processing टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इस तकनीक को पिछले साल WhatsApp के AI फीचर्स के साथ पेश किया गया था। इस सिस्टम में यूजर्स की रिक्वेस्ट सामान्य सर्वर पर प्रोसेस होने के बजाय Trusted Execution Environments (TEE) नाम के एन्क्रिप्टेड और आइसोलेटेड सिस्टम में प्रोसेस होती है। इसका फायदा यह है कि किसी भी थर्ड पार्टी को यूजर डेटा तक पहुंच नहीं मिल पाती और चैट की गोपनीयता बनी रहती है। Meta का दावा है कि यह फीचर दूसरे AI प्लेटफॉर्म्स से अलग है, क्योंकि कई AI सेवाएं यूजर्स की बातचीत को लंबे समय तक स्टोर करके रखती हैं। किन यूजर्स को मिलेगा यह फीचर? कंपनी के मुताबिक, Incognito Chat फीचर को फिलहाल धीरे-धीरे Android और iOS यूजर्स के लिए रोलआउट किया जा रहा है। इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को अपना WhatsApp ऐप लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करना होगा। हालांकि शुरुआती चरण में यह सुविधा केवल चुनिंदा अकाउंट्स पर उपलब्ध होगी। Meta ने यह भी कहा है कि फीचर की उपलब्धता यूजर के क्षेत्र और अकाउंट टाइप के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। जिन यूजर्स को यह अपडेट मिलेगा, उन्हें Meta AI के साथ प्राइवेट बातचीत के लिए अलग विकल्प दिखाई देगा। सुरक्षा को लेकर Meta का दावा Meta का कहना है कि उसकी Private Processing टेक्नोलॉजी की जांच कई स्वतंत्र साइबर सिक्योरिटी कंपनियों ने की है। इनमें NCC Group और Trail of Bits जैसी कंपनियां शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, इन सुरक्षा परीक्षणों में यह पाया गया कि सिस्टम यूजर्स की प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत सिक्योरिटी मानकों का पालन करता है।  

surbhi मई 14, 2026 0
Meta employees face stress and privacy concerns amid aggressive AI adoption and layoffs
AI की दौड़ में कर्मचारियों पर बढ़ा दबाव, Meta के अंदर बढ़ रही नाराजगी और डर

AI पर दांव लगा रही Meta, लेकिन कर्मचारी परेशान Meta अपने बिजनेस को तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंपनी में बदलने में जुटी है। लेकिन कंपनी के अंदर काम कर रहे हजारों कर्मचारी इस बदलाव से खुद को असहज और दबाव में महसूस कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक Meta अब अपने कर्मचारियों की कंप्यूटर गतिविधियों को ट्रैक कर रही है ताकि AI मॉडल को ट्रेन किया जा सके। इसमें यह देखा जा रहा है कि कर्मचारी कंप्यूटर पर क्या टाइप करते हैं, माउस कैसे चलाते हैं और स्क्रीन पर क्या देखते हैं। इस फैसले के बाद कंपनी के अंदर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। कर्मचारियों ने बताया ‘प्राइवेसी का उल्लंघन’ कई कर्मचारियों ने Meta के इस कदम को निजी गोपनीयता में दखल बताया। आंतरिक चैट और पोस्ट्स में कर्मचारियों ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। एक इंजीनियरिंग मैनेजर ने लिखा कि यह उन्हें बेहद असहज महसूस करा रहा है और पूछा कि क्या इससे बाहर निकलने का कोई विकल्प है। इस पर Andrew Bosworth ने जवाब दिया कि कंपनी के लैपटॉप पर काम करने वालों के पास “ऑप्ट-आउट” का विकल्प नहीं होगा। AI इस्तेमाल अब परफॉर्मेंस रिव्यू का हिस्सा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Meta अब कर्मचारियों के AI टूल इस्तेमाल को उनके प्रदर्शन मूल्यांकन का हिस्सा भी बना रही है। कंपनी अपने 78 हजार कर्मचारियों को AI टूल अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही है। इसके लिए “AI Transformation Weeks” जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जहां कर्मचारियों को AI एजेंट और AI कोडिंग टूल्स इस्तेमाल करना सिखाया गया। नौकरी कटौती से बढ़ी चिंता AI पर भारी निवेश के बीच कंपनी लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की छंटनी भी कर रही है। Meta ने हाल ही में करीब 10 प्रतिशत कर्मचारियों की कटौती की घोषणा की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग 8 हजार कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। इससे कंपनी के अंदर डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। कई कर्मचारी अब नई नौकरी तलाश रहे हैं, जबकि कुछ लोग चाहते हैं कि उन्हें भी छंटनी में शामिल किया जाए ताकि उन्हें सेवरेंस पैकेज मिल सके। ‘क्या हम अपनी जगह लेने वाले AI को ट्रेन कर रहे हैं?’ कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ी चिंता यही है कि कहीं वे खुद अपने AI रिप्लेसमेंट को ट्रेन तो नहीं कर रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि AI कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ा सकता है, लेकिन इससे काम का दबाव और मानसिक तनाव भी तेजी से बढ़ रहा है। Mark Zuckerberg लगातार AI और “Superintelligence” को कंपनी का भविष्य बता रहे हैं। Meta फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म में AI फीचर्स को तेजी से जोड़ रही है और डेटा सेंटर व AI मॉडल पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है। कंपनियों के लिए बड़ा संकेत विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में दूसरी टेक कंपनियां भी इसी तरह AI आधारित बदलाव करेंगी। लेकिन अगर कर्मचारियों की मानसिक स्थिति, प्राइवेसी और नौकरी की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया तो असंतोष और बढ़ सकता है। अब टेक इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि AI और कर्मचारियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।  

surbhi मई 11, 2026 0
Vijay Thalapathy
विजय को कमल हासन और प्रकाश राज ने बधाई दी एक्ट्रेस तृषा शपथ ग्रहण में थलापति की मां से गले मिलीं

चेन्नई, एजेंसियां। अभिनेता से नेता बने थलापति विजय ने रविवार को तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित समारोह में राहुल गांधी और तृषा समेत कई हस्तियां मौजूद रहीं। विजय के सीएम की शपथ लेने के बाद एक्टर कमल हासन और प्रकाश राज ने उन्हें बधाई दी। कमल हासन ने कहा, ‘तमिलगा वेत्री कड़गम के अध्यक्ष और तमिलनाडु के माननीय मुख्यमंत्री मेरे भाई थिरु विजय को शुभकामनाएं। उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में तमिलनाडु नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। मैं उन्हें दिल से बधाई देता हूं।’ वहीं प्रकाश राज ने ट्वीट कर लिखा, ‘मुख्यमंत्री विजय को बहुत-बहुत बधाई। नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं। उम्मीद है कि आपके नेतृत्व में राज्य और तरक्की करेगा। आर माधवन ने भी दी बधाई एक्टर आर माधवन ने भी विजय को बधाई दी। माधवन ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर विजय की एक फोटो शेयर की और साथ ही लिखा, 'भगवान आपका भला करे और मुझे आप पर बहुत गर्व है। तृषा ने विजय की मां से मुलाकात की शपथ ग्रहण समारोह में एक्ट्रेस तृषा कृष्णन भी पहुंचीं। उन्होंने विजय के परिवार से मुलाकात की और उनकी मां से गले मिलती नजर आईं। विजय ने सुबह 10.15 बजे तमिल में शपथ ली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) चीफ और एक्टर से नेता बने सी जोसेफ विजय ने रविवार सुबह 10.15 बजे तमिल में सीएम पद की शपथ ली। इस दौरान राहुल गांधी भी मौजूद रहे। विजय शपथ लेते समय निर्धारित लाइनों के अलावा और बातें बोलने लगे। इस पर राज्यपाल अर्लेकर ने उन्हें टोक दिया और कहा कि वही पढ़ें जो लिखकर दिया है। 9 मंत्रियों ने भी शपथ ली विजय के साथ 9 और मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें एन आनंद, आधव अर्जुन, डॉ. केजी अरुणराज, केए सेंगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन, डॉ. टीके प्रभु, सेल्वी एस कीर्तना शामिल हैं। ये सभी विजय की पार्टी TVK के विधायक हैं। सहयोगी दलों के किसी विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है।

Unknown मई 11, 2026 0
Meta Muse Spark AI model announcement showcasing advanced multimodal AI competing with ChatGPT and Claude
Meta का बड़ा दांव: Muse Spark AI लॉन्च, ChatGPT और Claude को टक्कर देने का दावा

दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Meta ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में बड़ा कदम उठाते हुए अपना नया AI मॉडल Muse Spark लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह अब तक का उनका सबसे एडवांस्ड मॉडल है, जो आसपास की दुनिया को समझने और जटिल समस्याओं को हल करने में सक्षम है। Meta Superintelligence Labs की पहली पेशकश Muse Spark, Meta Superintelligence Labs (MSL) द्वारा विकसित पहला मॉडल है, जिसकी अगुवाई Alexandr Wang कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस मॉडल को महज 9 महीनों में तैयार किया गया है। Meta के CEO Mark Zuckerberg ने AI सेक्टर में बढ़त हासिल करने के लिए इस प्रोजेक्ट में भारी निवेश किया था। क्या है Muse Spark की खासियत? Muse Spark एक छोटा लेकिन तेज (small and fast) LLM है, जिसे खासतौर पर मल्टीमॉडल रीजनिंग और एजेंट-आधारित टास्क के लिए डिजाइन किया गया है। जटिल साइंस, मैथ और हेल्थ से जुड़े सवाल हल करने में सक्षम एक साथ कई AI एजेंट्स को मैनेज कर सकता है यूजर के व्यवहार और बातचीत के आधार पर जवाब देने की क्षमता Meta का दावा है कि यह मॉडल कुछ मामलों में Claude Opus 4.6 और GPT-5.4 जैसे एडवांस मॉडल्स को टक्कर दे सकता है। Meta AI को करेगा पावर Muse Spark अब Meta AI के नए वर्जन को पावर देगा, जो जल्द ही Facebook, Instagram, WhatsApp और Messenger जैसे प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होगा। इसके साथ ही एक नया शॉपिंग मोड भी जोड़ा गया है, जो यूजर्स को उनके पसंदीदा क्रिएटर्स और ब्रांड्स के आधार पर सुझाव देगा। ओपन-सोर्स नहीं है Muse Spark जहां Meta के पहले Llama मॉडल्स ओपन-सोर्स थे, वहीं Muse Spark को फिलहाल क्लोज्ड-सोर्स रखा गया है। अभी यह सीमित पार्टनर्स के लिए API प्रीव्यू में उपलब्ध है, हालांकि कंपनी ने भविष्य में इसे ओपन-सोर्स करने के संकेत दिए हैं। AI रेस में बढ़ी प्रतिस्पर्धा Muse Spark के लॉन्च के साथ ही AI की दुनिया में प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है। Meta अब OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियों को सीधी चुनौती दे रही है।  

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Meta AI Support Assistant interface helping users resolve Facebook and Instagram account issues quickly
Meta का बड़ा कदम: Meta Platforms ने Facebook और Instagram पर लॉन्च किया AI Support Assistant, अब अकाउंट और कंटेंट समस्याओं का तुरंत समाधान

टेक दिग्गज Meta Platforms ने अपने प्लेटफॉर्म्स Facebook और Instagram पर एक नया AI Support Assistant रोलआउट करना शुरू कर दिया है। इस नए फीचर का उद्देश्य यूजर्स को अकाउंट से जुड़ी समस्याओं, कंटेंट मॉडरेशन और सिक्योरिटी मामलों में तुरंत सहायता देना है। 5 सेकंड में जवाब, 24x7 सपोर्ट Meta के अनुसार, यह AI असिस्टेंट यूजर्स के सवालों का जवाब 5 सेकंड से भी कम समय में दे सकता है और 24 घंटे उपलब्ध रहेगा। इसे मोबाइल (Android, iOS) और डेस्कटॉप-दोनों प्लेटफॉर्म्स पर हेल्प सेंटर में इंटीग्रेट किया गया है। क्या-क्या कर सकेगा AI Assistant? Meta AI Support Assistant यूजर्स के लिए कई महत्वपूर्ण काम कर सकता है: स्कैम या फर्जी अकाउंट रिपोर्ट करना   कंटेंट हटाए जाने की वजह समझाना   पोस्ट हटने पर अपील में मदद   पासवर्ड बदलना और प्राइवेसी सेटिंग्स मैनेज करना   प्रोफाइल एडिट करना   फिलहाल ये फीचर्स Facebook पर पूरी तरह सक्रिय हैं, जबकि Instagram पर भी जल्द इन्हें लागू किया जाएगा। स्कैम और फर्जीवाड़े पर सख्ती Meta ने बताया कि उसके नए AI सिस्टम अब पहले से ज्यादा स्मार्ट हो गए हैं। रोजाना लगभग 5,000 स्कैम प्रयासों को पहचानने में सक्षम   सेलिब्रिटी इम्पर्सोनेशन (नकली अकाउंट) में 80% तक कमी   आपत्तिजनक कंटेंट की पहचान में दोगुनी क्षमता   मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट यह AI असिस्टेंट उन भाषाओं में काम कर सकता है, जिन्हें दुनिया के 98% इंटरनेट यूजर्स इस्तेमाल करते हैं। इससे वैश्विक स्तर पर यूजर्स को बेहतर और तेज सहायता मिलेगी। AI के साथ मानव निगरानी भी जरूरी Meta ने साफ किया है कि भले ही AI को बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है, लेकिन संवेदनशील और जटिल मामलों में मानव हस्तक्षेप जारी रहेगा। कंपनी का मानना है कि AI बड़े स्तर पर काम को तेज कर सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय में इंसानी समझ जरूरी है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0