मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कतर ने पाकिस्तान को बड़ा झटका देते हुए पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा ऑन अराइवल (VoA) सुविधा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इस फैसले से कतर जाने वाले पाकिस्तानियों को अब पहले से वीजा लेना अनिवार्य हो गया है। पाकिस्तान को क्यों लगा झटका? कतर में स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने अपने नागरिकों को जारी एडवाइजरी में कहा है कि: बिना पूर्व वीजा के कतर पहुंचने पर एंट्री रोकी जा सकती है एयरपोर्ट पर यात्रियों को वापस भेजा भी जा सकता है मौजूदा हालात को देखते हुए यह सुविधा फिलहाल निलंबित है विशेषज्ञ मानते हैं कि क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक संतुलन की कोशिशों के बीच पाकिस्तान की स्थिति कमजोर पड़ती दिख रही है। भारत को मिल रही राहत जहां पाकिस्तान के लिए नियम सख्त हुए हैं, वहीं भारत के साथ कतर के मजबूत संबंधों का असर साफ दिख रहा है। भारतीय नागरिकों के लिए: वीजा ऑन अराइवल सुविधा जारी 30 दिन का फ्री वीजा मिल रहा है जरूरत पड़ने पर वीजा अवधि बढ़ाई भी जा सकती है यह फैसला ऐसे समय में भी बरकरार है जब पूरे मध्य पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है। भारतीय यात्रियों के लिए जरूरी शर्तें कतर जाने वाले भारतीयों को कुछ नियमों का पालन करना होगा: पासपोर्ट कम से कम 6 महीने वैध हो रिटर्न या आगे की यात्रा का टिकट होना जरूरी होटल बुकिंग या रहने की व्यवस्था का प्रमाण हेल्थ इंश्योरेंस अनिवार्य क्षेत्रीय तनाव का असर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब खाड़ी देशों की नीतियों पर भी दिखने लगा है। कतर का यह फैसला सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों से जुड़ा माना जा रहा है।
तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिकी नागरिकों को संबोधित करते हुए एक खुला पत्र लिखा है, जिसे उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर साझा किया। इस पत्र में उन्होंने युद्धविराम का कोई उल्लेख नहीं किया, जबकि इससे कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान की ओर से सीजफायर की मांग की गई है। “ईरान ने कभी युद्ध शुरू नहीं किया” अपने पत्र में पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान ने “कभी कोई युद्ध शुरू नहीं किया” और देश लंबे समय से “हमलों और कब्ज़े” का सामना करता रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी जनता का अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों के लोगों के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है। ट्रंप के दावे से अलग संदेश ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि ईरान के “नए शासन” ने युद्धविराम की अपील की है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि यह अपील किसने की। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका युद्धविराम पर तभी विचार करेगा जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह सुरक्षित और खुला होगा। उन्होंने ईरान के खिलाफ कड़ी चेतावनी देते हुए सख्त कार्रवाई की बात भी कही। संवाद बनाम टकराव की अपील पेज़ेश्कियान ने अपने पत्र के अंत में कहा कि दुनिया के सामने आज सबसे बड़ा विकल्प “टकराव और संवाद” के बीच है। उन्होंने चेतावनी दी कि आज लिया गया फैसला आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को तय करेगा। बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक संदेश विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पत्र सीधे अमेरिकी सरकार की बजाय वहां के नागरिकों को संबोधित कर एक कूटनीतिक संदेश देने की कोशिश है। इसमें शांति और संवाद की बात तो की गई है, लेकिन औपचारिक रूप से युद्धविराम का प्रस्ताव नहीं रखा गया।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान का रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Kharg Island एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में आ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump और इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए इस द्वीप को निशाना बनाते हैं, तो यह कदम आसान नहीं होगा। इसकी वजह यहां की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और वैश्विक ऊर्जा बाजार में इसकी अहम भूमिका है। ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र फारस की खाड़ी में स्थित खर्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। अनुमान के मुताबिक ईरान के अधिकांश कच्चे तेल का निर्यात यहीं से होता है। द्वीप पर विशाल तेल भंडारण टैंक, पाइपलाइन नेटवर्क और बड़े ऑयल टैंकरों के लिए गहरे पानी के टर्मिनल मौजूद हैं, जिससे यह देश की ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख आधार बन गया है। भारी सैन्य सुरक्षा में घिरा इलाका खर्ग द्वीप को ईरान ने कड़ी सैन्य सुरक्षा से घेर रखा है। यहां एयर डिफेंस सिस्टम, रडार नेटवर्क और मिसाइल सुरक्षा तैनात है। साथ ही Islamic Revolutionary Guard Corps और ईरानी नौसेना की इकाइयां आसपास के समुद्री क्षेत्र में लगातार गश्त करती हैं। यही वजह है कि किसी भी बाहरी सैन्य कार्रवाई को यहां अंजाम देना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। मुख्य भूमि के करीब होने से रणनीतिक बढ़त खर्ग द्वीप ईरान की मुख्य भूमि से करीब 25 से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में अगर यहां किसी तरह का हमला होता है तो ईरान अपनी मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक ताकत के जरिए तुरंत जवाबी कार्रवाई कर सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे सैन्य दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र मानते हैं। वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है असर ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक यदि खर्ग द्वीप पर हमला होता है या यहां की तेल सुविधाएं बाधित होती हैं, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका रहती है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम ठिकाना छोटे आकार के बावजूद खर्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य रणनीति दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि किसी भी संभावित संघर्ष में यह द्वीप निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 2500 मरीन सैनिकों को तैनात करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद रणनीतिक रूप से बेहद अहम जलमार्ग Strait of Hormuz को लेकर अमेरिका की संभावित सैन्य योजना पर चर्चा तेज हो गई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना बेहद जोखिम भरी हो सकती है। ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के तेल निर्यात के प्रमुख केंद्र Kharg Island पर हमला किया है। इसके बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के आसपास स्थित द्वीपों पर कब्जा करने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिकी नौसेना के पूर्व अधिकारी और रक्षा विशेषज्ञ Malcolm Nance ने इस संभावित योजना को “खतरनाक” बताते हुए कहा कि इसका विश्लेषण अमेरिकी सैन्य कमांडरों ने करीब 40 साल पहले ही किया था। उनके मुताबिक, उस समय अनुमान लगाया गया था कि इस तरह के ऑपरेशन के लिए कम से कम 6000 मरीन सैनिकों और भारी सैन्य उपकरणों की जरूरत होगी। पहले द्वीपों पर कब्जे की रणनीति नैंस के अनुसार, उस योजना के तहत सबसे पहले Larak Island, Hormuz Island और Qeshm Island पर कब्जा कर Bandar Abbas को चारों तरफ से घेरने की रणनीति थी। इसके बाद प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र को पार कर आगे बढ़ने की योजना बनाई गई थी। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि 1988 में जब ईरानी बारूदी सुरंगों से अमेरिकी जहाजों को खतरा हुआ था, तब भी अमेरिका ने इस तरह की कार्रवाई नहीं की थी। ईरान की जवाबी कार्रवाई का खतरा नैंस के मुताबिक अगर अमेरिका ऐसा कदम उठाता है तो Islamic Revolutionary Guard Corps और बासिज बल पहाड़ी इलाकों से द्वीपों पर मिसाइल और आत्मघाती हमले कर सकते हैं। इसके अलावा ईरान पनडुब्बी ड्रोन, सुसाइड बोट और समुद्री बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल भी कर सकता है। रसद सप्लाई भी बड़ी चुनौती विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस अभियान की सप्लाई लाइन भी बड़ी समस्या बन सकती है। अमेरिकी सेना को अपने ठिकानों United Arab Emirates और Qatar से रसद सप्लाई करनी होगी, जो संभावित हमलों के निशाने पर आ सकते हैं। नैंस ने कहा कि इस तरह के विवादित और खतरनाक जलमार्ग से सप्लाई भेजना “पागलपन” जैसा कदम होगा। होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगों की आशंका हालिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान Strait of Hormuz में बारूदी सुरंगें बिछा रहा है। हालांकि अगर पेंटागन इटली से एक्सपेडिशनरी सी बेस जहाज हिंद महासागर में तैनात करता है तो अमेरिका को कुछ रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। फिलहाल इस दिशा में कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना जल्दबाजी में बनाई गई प्रतीत होती है और इससे पूरे क्षेत्र में बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है।
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण सैन्य टकराव अब 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है। बीते 11 दिनों में यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता का कारण बन गया है। लगातार हवाई हमलों, मिसाइल हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाई के बीच क्षेत्र में तनाव चरम पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल इस युद्ध का कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आ रहा है, लेकिन इसके लंबे समय तक खिंचने से वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। रात भर पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में एयर डिफेंस सायरन बजते रहे और मिसाइलों के दागे जाने की खबरें सामने आती रहीं। इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सहयोगी देशों पर हमले तेज कर दिए हैं। ईरान का बड़ा सैन्य अभियान, इजरायल के दावे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अपने सैन्य अभियान की 35वीं लहर शुरू कर दी है। इस चरण में मध्य-पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों और इजरायल के मध्य क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई उसके खिलाफ हो रहे हमलों का जवाब है। दूसरी ओर, इजरायली सेना का दावा है कि उसने तेहरान में ईरानी सरकार से जुड़े कई अहम ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा हालात उनके लिए एक ऐतिहासिक अवसर हो सकते हैं। उन्होंने ईरानियों से अपील करते हुए कहा कि वे मौजूदा शासन के खिलाफ आवाज उठाकर अपनी स्वतंत्रता की दिशा में कदम बढ़ाएं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव इस युद्ध के बीच सबसे बड़ी चिंता का विषय हॉर्मुज जलडमरूमध्य बन गया है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। यदि यह मार्ग बाधित होता है तो दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ सकती है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने इस क्षेत्र के आसपास ईरान के 16 नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया है। इन जहाजों में कुछ ऐसे पोत भी शामिल थे जिनका इस्तेमाल समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए किया जा सकता था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति मार्ग को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से की गई। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ईरान इस जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा था, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता था। बढ़ता मानवीय संकट संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से अब तक अमेरिका और इजरायल के हमलों में 1300 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है। कई शहरों में भारी तबाही और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, 28 फरवरी को दक्षिणी ईरान में एक प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले के बाद मिले मिसाइल के अवशेष अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने स्वीकार किया है कि ईरान की जवाबी कार्रवाई में लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। इनमें से 8 सैनिकों की हालत गंभीर बताई जा रही है। लेबनान और खाड़ी देशों तक फैला संघर्ष यह युद्ध अब धीरे-धीरे पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में लेता नजर आ रहा है। लेबनान की राजधानी बेरूत के दहिया इलाके में इजरायल ने हवाई हमले किए हैं। यह इलाका ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह का मजबूत गढ़ माना जाता है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम 95 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं हिज्बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए एक ही दिन में इजरायल पर 30 हमले करने का दावा किया है। खाड़ी देशों में भी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। बहरीन ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसने 106 मिसाइल और 176 ड्रोन मार गिराए हैं। कतर ने अपने क्षेत्र में 7 मिसाइल हमलों की पुष्टि की है। कुवैत ने अपने हवाई क्षेत्र में 5 ड्रोन के प्रवेश की जानकारी दी है। सऊदी अरब ने 4 ड्रोन और 7 बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने का दावा किया है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसके खिलाफ 1475 ड्रोन और 260 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जा चुकी हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ता खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और लंबा खिंचता है या हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ऊर्जा संकट और वैश्विक व्यापार में बाधा जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। कुल मिलाकर, ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी यह टकराव अब एक क्षेत्रीय संघर्ष से आगे बढ़कर वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास इस संकट को शांत कर पाएंगे या यह युद्ध और व्यापक रूप ले सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज