पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को ईरानी ड्रोन का पीछा करते हुए दिखाया गया है। दावा किया जा रहा है कि कम कीमत वाला ईरानी ड्रोन अमेरिकी जेट को चकमा देने में सफल रहा। हालांकि, इस वीडियो की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। क्या दिख रहा है वायरल वीडियो में? आसमान में अमेरिकी F-15 फाइटर जेट ईरान के कथित शाहेद ड्रोन का पीछा इसके बाद जमीन पर जोरदार धमाका और धुएं का गुबार सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स का दावा है कि अमेरिकी जेट ड्रोन को रोकने में नाकाम रहा, जिससे सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। एरबिल में तेल प्लांट पर हमला रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना इराक के एरबिल शहर में एक ब्रिटिश कंपनी के मोटर ऑयल प्लांट पर हुए हमले से जुड़ी हो सकती है। प्लांट में भीषण आग लगी आसमान में काला धुआं फैल गया सुबह के समय तीन ड्रोन से हमला किए जाने की बात बताया जा रहा है कि यह प्लांट एक ब्रिटिश ब्रांड का था, जिसे सरदार ग्रुप संचालित करता है। आधिकारिक पुष्टि नहीं अब तक अमेरिका, ब्रिटेन या किसी सहयोगी देश की ओर से इस हमले या वायरल वीडियो की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में दावों की सत्यता पर सवाल बने हुए हैं। इराक में बढ़ता तनाव मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर इराक पर भी साफ दिख रहा है: अमेरिका और ईरान समर्थित समूहों के बीच टकराव बढ़ा कई सैन्य ठिकानों पर हमले इराक सरकार संतुलन बनाने की कोशिश में इराक ने कुछ समूहों को आत्मरक्षा की अनुमति दी है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि अमेरिकी हितों पर हमले करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। क्या संकेत देता है यह मामला? यदि वायरल दावे सही साबित होते हैं, तो यह दिखाता है कि कम लागत वाले ड्रोन भी बड़ी सैन्य चुनौती बन सकते हैं पारंपरिक फाइटर जेट्स के सामने नई रणनीतिक चुनौतियां उभर रही हैं
अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार सुबह राष्ट्र को संबोधित करते हुए बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ जंग में “जीत” मिल चुकी है और जल्द ही हालात पूरी तरह उनके नियंत्रण में होंगे। ट्रम्प के दावे क्या हैं? ट्रम्प ने कहा: ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता खत्म हो चुकी है ईरानी नौसेना को भी भारी नुकसान पहुंचा है ईरान की सैन्य ताकत अब काफी कमजोर हो गई है यह अभियान अपने अंतिम लक्ष्य के करीब है 2-3 हफ्तों में बड़े हमले की चेतावनी ट्रम्प ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका आने वाले 2-3 हफ्तों में बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। ‘स्टोन एज’ वाली सख्त चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो अमेरिका ईरान को “स्टोन एज” (पाषाण काल) में पहुंचा देगा। उनके इस बयान को अब तक का सबसे सख्त रुख माना जा रहा है। ईरान में सत्ता परिवर्तन का दावा ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और नई लीडरशिप पहले के मुकाबले कम कट्टर है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरान का पलटवार ट्रम्प के बयान के बाद ईरान की सेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सैन्य कमान खातम अल-अनबिया ने कहा कि युद्ध जारी रहेगा अमेरिका और इजरायल को करारा जवाब दिया जाएगा आने वाले समय में और बड़े हमलों की चेतावनी दी गई बढ़ता तनाव, वैश्विक चिंता मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते इस तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। दोनों पक्षों के सख्त बयानों से हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच दोनों देशों के बयान एक-दूसरे के खिलाफ सख्त होते जा रहे हैं। ईरान ने साफ कहा है कि अब उसे अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि यह युद्ध अगले 2 से 3 हफ्तों में खत्म हो सकता है। ईरान का सख्त रुख ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ पिछले अनुभव खराब रहे हैं, इसलिए अब किसी भी समझौते पर भरोसा करना मुश्किल है। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका पहले भी इस डील से पीछे हट चुका है। अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका के साथ सीधे बातचीत नहीं हो रही है। हालांकि, सहयोगी देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन इसे औपचारिक बातचीत नहीं माना जा सकता। ट्रम्प का दावा- जल्द खत्म होगी जंग वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में कहा कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और ऑपरेशन अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा, “ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना हमारा मकसद था, जो अब पूरा हो चुका है। समझौता होने पर युद्ध और जल्दी खत्म हो सकता है।” जमीनी हमले पर ईरान की चेतावनी अराघची ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जमीनी हमला किया गया तो ईरान पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, “हम उनका इंतजार कर रहे हैं।” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान जमीनी युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी स्थिति का जवाब देने में सक्षम है। मिडिल ईस्ट की अर्थव्यवस्था पर असर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध का असर पूरे मध्य पूर्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अनुमान है कि: क्षेत्र की GDP में 3.7% से 6% तक गिरावट आ सकती है करीब 18 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो सकता है होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही 70% से ज्यादा घट गई है कच्चे तेल की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है 16 लाख से 36 लाख नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है बढ़ता तनाव, अनिश्चित भविष्य दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और कड़े बयानों से साफ है कि हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं। एक तरफ जहां अमेरिका युद्ध के जल्द खत्म होने का दावा कर रहा है, वहीं ईरान का सख्त रुख संकेत देता है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य होने से दूर है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के ‘शाहेद’ ड्रोन अब युद्ध की तस्वीर बदलते दिख रहे हैं। ये कम लागत वाले ड्रोन अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। अब इस चुनौती से निपटने के लिए खाड़ी देश एक ऐसे देश की ओर देख रहे हैं, जो करीब 4,000 किलोमीटर दूर है-Ukraine। महंगे बचाव बनाम सस्ते हमले का गणित ईरान के Shahed drones बेहद सस्ते हैं-इनकी कीमत लगभग 20,000 से 30,000 डॉलर के बीच होती है। इसके मुकाबले: Patriot missile की कीमत करीब 40 लाख डॉलर प्रति मिसाइल THAAD जैसे सिस्टम भी बेहद महंगे F-16 जैसे लड़ाकू विमान को उड़ाना भी हजारों डॉलर प्रति घंटे का खर्च यानी हमले की लागत कम, लेकिन बचाव बेहद महंगा-यही इस युद्ध का सबसे बड़ा आर्थिक संकट बन गया है। यूक्रेन का ‘स्मार्ट सॉल्यूशन’ Ukraine ने रूस के साथ अपने युद्ध के दौरान इन ड्रोन का सामना किया और एक नया रास्ता निकाला-सस्ते और स्मार्ट इंटरसेप्टर। यूक्रेन ने दो खास सिस्टम विकसित किए: Sting interceptor Bullet interceptor ये इंटरसेप्टर: बेहद कम लागत में तैयार होते हैं 70–90% तक ड्रोन मार गिराने में सक्षम FPV (फर्स्ट पर्सन व्यू) तकनीक से ऑपरेट होते हैं कुछ मामलों में AI का भी इस्तेमाल ‘Shahed killers’ कैसे बदल रहे हैं गेम यूक्रेन के ये इंटरसेप्टर ‘किलर ड्रोन’ के रूप में उभरे हैं: Sting की स्पीड 300+ किमी/घंटा Bullet को 3D प्रिंटिंग से भी बनाया जा सकता है जरूरत पड़ने पर ये वापस बेस पर लौट सकते हैं इसके विपरीत, Shahed drones एकतरफा (suicide) ड्रोन हैं, जो टारगेट पर जाकर खुद ही नष्ट हो जाते हैं। खाड़ी देश यूक्रेन की ओर क्यों मुड़े? खाड़ी देशों-जैसे सऊदी अरब, UAE और कतर-ने अब Volodymyr Zelenskyy के नेतृत्व वाले यूक्रेन के साथ समझौते किए हैं। इस सहयोग के पीछे मुख्य कारण: खर्च कम करना: महंगे मिसाइल सिस्टम की जगह सस्ते इंटरसेप्टर अनुभव: यूक्रेन को ड्रोन युद्ध का वर्षों का अनुभव तेजी से उत्पादन: बड़े पैमाने पर सस्ते ड्रोन बनाना यूक्रेन ने पहले ही 200 से अधिक एंटी-ड्रोन विशेषज्ञ मध्य-पूर्व भेजे हैं। अमेरिका की रणनीति पर सवाल शुरुआत में Donald Trump ने कहा था कि वह यूक्रेन से मदद नहीं लेंगे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अरबों डॉलर का युद्ध खर्च लगातार हमलों से सैन्य ठिकानों को नुकसान महंगे सिस्टम की सीमित उपलब्धता इन कारणों से अमेरिका और उसके सहयोगियों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। निष्कर्ष ईरान के सस्ते ड्रोन ने आधुनिक युद्ध का एक नया मॉडल पेश किया है, जहां कम लागत में बड़े नुकसान किए जा सकते हैं। इसके जवाब में यूक्रेन का “सस्ता लेकिन स्मार्ट” समाधान अब वैश्विक स्तर पर अपनाया जा रहा है। यह सिर्फ एक सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि भविष्य के युद्धों की दिशा भी तय कर सकता है-जहां तकनीक, लागत और नवाचार सबसे बड़ी ताकत होंगे।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक गंभीर घटना सामने आई है। ईरानी सूत्रों के मुताबिक, United States की ओर से किए गए हवाई हमले में Iran के Mashhad International Airport पर खड़ा एक नागरिक विमान क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि यह विमान Mahan Air का था, जो भारत के New Delhi के लिए एक मानवीय मिशन के तहत रवाना होने वाला था। मानवीय मिशन पर था विमान रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विमान दवाइयों और मेडिकल उपकरणों को लाने-ले जाने के मिशन का हिस्सा था। भारत और ईरान के बीच चल रहे मानवीय सहयोग के तहत इसे दिल्ली आना था। हालांकि, हमले के बाद यह मिशन बाधित हो गया है। इस पूरे मामले पर अभी तक अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ईरान का कड़ा रुख: ‘यह युद्ध अपराध’ ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए “वॉर क्राइम” करार दिया है। ईरान ने Chicago Convention और Montreal Convention का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी नागरिक विमान को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अलावा, Geneva Conventions के तहत भी मानवीय मिशन से जुड़े नागरिक संसाधनों पर हमला करना युद्ध अपराध माना जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग ईरान ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से इस घटना की तत्काल जांच की मांग की है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन और मानवीय कानूनों के लिए एक बड़ा झटका होगा। बढ़ता खतरा: नागरिक उड्डयन पर असर यह घटना ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में सैन्य संघर्ष तेज हो रहा है। इससे नागरिक विमानों की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं, खासकर उन इलाकों में जहां युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है।
पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, United States और Israel ने Iran के प्रमुख शहर Isfahan में एक बड़े हथियार गोदाम को निशाना बनाते हुए कथित तौर पर संयुक्त हमला किया है। इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें भीषण विस्फोट और आसमान में नारंगी रोशनी दिखाई देती है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ‘बंकर-बस्टर बम’ के इस्तेमाल का दावा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में 2000 पाउंड के ‘बंकर-बस्टर बम’ का इस्तेमाल किया गया। ये ऐसे विशेष बम होते हैं, जो जमीन के अंदर बने मजबूत ठिकानों, जैसे बंकर, सुरंग या हथियार भंडार, को नष्ट करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। इन बमों की खासियत यह होती है कि ये पहले जमीन या कंक्रीट को भेदते हैं और फिर अंदर जाकर विस्फोट करते हैं, जिससे अंदर मौजूद संरचनाओं को भारी नुकसान होता है। इस्फहान क्यों है अहम? इस्फहान ईरान का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और सैन्य केंद्र है, जहां कई रणनीतिक ठिकाने मौजूद हैं। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि यहां भूमिगत ठिकानों में संवर्धित यूरेनियम का भंडार हो सकता है, जो इसे और अधिक संवेदनशील बनाता है। हालांकि, इस हमले के बाद हुए नुकसान को लेकर ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बढ़ता तनाव और वैश्विक असर यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। हाल के दिनों में बार-बार चेतावनियां और सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं, जिससे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के बीच एक अहम खबर सामने आई है-अगर अमेरिका जमीनी सैन्य कार्रवाई करता है, तो इजरायल उसमें सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लेगा। इजरायली मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला क्षेत्रीय रणनीति और बढ़ते तनाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इससे संकेत मिलते हैं कि संभावित ग्राउंड ऑपरेशन में अमेरिका को अकेले ही आगे बढ़ना पड़ सकता है। इजरायल ने क्यों बनाई दूरी? विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल का यह रुख कई रणनीतिक कारणों से जुड़ा है: जमीनी युद्ध में उतरने से क्षेत्रीय संघर्ष और भड़क सकता है इजरायल पहले से ही अपनी सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है बड़े युद्ध में सीधे शामिल होने से राजनीतिक और सैन्य जोखिम बढ़ सकता है हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इजरायल खुफिया या तकनीकी सहयोग देगा या नहीं। अमेरिका के लिए बढ़ी चुनौती अगर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन शुरू करता है, तो यह मिशन काफी जटिल और जोखिम भरा हो सकता है। बिना बड़े सहयोगी के जमीनी युद्ध कठिन होगा ईरान जैसे विशाल और मजबूत देश में सैन्य कार्रवाई आसान नहीं लॉजिस्टिक्स, संसाधन और रणनीति की बड़ी चुनौती अमेरिका ने पहले ही क्षेत्र में अपने एयरक्राफ्ट कैरियर, युद्धपोत और फाइटर जेट्स की संख्या बढ़ा दी है, जिससे दबाव की रणनीति अपनाई जा रही है। ईरान की ओर से भी सख्त रुख इस बीच IRGC (ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड) लगातार आक्रामक बयान दे रही है और अमेरिका को खुली चुनौती दे रही है। इससे यह साफ है कि अगर जमीनी युद्ध शुरू होता है, तो संघर्ष और भी उग्र हो सकता है। क्या होगा आगे? फिलहाल अमेरिका ने जमीनी सैनिक उतारने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। लेकिन मौजूदा हालात “तूफान से पहले की शांति” जैसे नजर आ रहे हैं। अगर हालात बिगड़ते हैं, तो यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक राजनीति पर इसका असर पड़ सकता है।
सोमवार, 30 मार्च को भारतीय शेयर बाजार ने बेहद कमजोर शुरुआत की, जिससे निवेशकों के बीच हड़कंप मच गया। वैश्विक तनाव और मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के असर से बाजार खुलते ही भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 1,137 अंक (करीब 1.55%) गिरकर 72,445 के स्तर पर आ गया, जबकि Nifty 50 भी 336 अंक (1.47%) टूटकर 22,483 के नीचे फिसल गया। इस तेज गिरावट से निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब गए। बैंकिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा मार आज के कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग शेयरों पर देखा गया। Nifty Bank करीब 2.1% तक गिर गया, जो दिन का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। हालांकि, गिरावट के इस माहौल में Nifty Metal ने थोड़ी राहत दी और 0.4% की बढ़त के साथ टॉप गेनर बना रहा। पिछले हफ्ते से जारी है गिरावट बाजार में कमजोरी का यह सिलसिला नया नहीं है। पिछले सप्ताह भी सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1.27% की गिरावट दर्ज की गई थी। शुक्रवार को भी बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ था, जिससे निवेशकों का भरोसा पहले से ही कमजोर था। एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव देखा गया: Nikkei 225 4.65% तक गिरा Kospi 3.51% टूटा Hang Seng Index 1.84% नीचे ASX 200 1.18% कमजोर मिडिल-ईस्ट तनाव और तेल की कीमतों का असर विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल-ईस्ट में बढ़ते युद्ध जैसे हालात और वैश्विक अनिश्चितता ने बाजार पर गहरा असर डाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ईरान के तेल को “जब्त” करने वाले बयान ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा, जहां Brent Crude $116 प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI भी $102 से ऊपर ट्रेड कर रहा है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे समय में निवेशकों को सतर्क रहने और जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक और बड़ा संकेत दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संकट गहराया हुआ है, और अब ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमले जारी रहे, तो वह बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को भी बंद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ऐसा होता है तो दुनिया के सामने ऊर्जा आपूर्ति का संकट और गंभीर रूप ले सकता है। युद्ध के 26वें दिन बढ़ी टकराव की आशंका ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के 26वें दिन हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान ने न केवल शांति प्रस्ताव को ठुकराया है, बल्कि साफ संकेत दिया है कि वह युद्ध को नए क्षेत्रों तक फैलाने के लिए तैयार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कहा है कि अगर उस पर दबाव या हमले जारी रहे, तो वह बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में भी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। यह कदम वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। क्यों अहम है बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट? बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और आगे जाकर अरब सागर तथा हिंद महासागर से मिलता है। इस मार्ग से रोजाना लगभग 60 से 70 लाख बैरल तेल का परिवहन होता है यूरोप और एशिया के बीच व्यापारिक जहाजों का प्रमुख रास्ता वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा। दोहरे संकट की आशंका पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव है। ऐसे में यदि बाब-अल-मंदेब भी प्रभावित होता है, तो यह “डबल चोकपॉइंट” स्थिति बन सकती है, जिससे: तेल की कीमतों में तेज उछाल सप्लाई चेन बाधित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर वैश्विक बाजार पर संभावित असर विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों अहम समुद्री मार्गों पर संकट गहराने से ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता आ सकती है। खासतौर पर एशिया और यूरोप जैसे बड़े उपभोक्ता क्षेत्रों को इसका सीधा असर झेलना पड़ सकता है।
मध्य-पूर्व में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के बीच इजरायल ने लेबनान को लेकर बड़ा दावा किया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान के करीब 10% हिस्से पर नियंत्रण स्थापित करेगी। लिटानी नदी तक बनेगा ‘बफर ज़ोन’ काट्ज के मुताबिक, इजरायली सेना लिटानी नदी तक इलाके को नियंत्रित करेगी और वहां एक मजबूत रक्षात्मक बफर ज़ोन तैयार किया जाएगा। यह नदी इजरायल की सीमा से लगभग 30 किलोमीटर अंदर है और यह क्षेत्र लेबनान के कुल भूभाग का करीब एक-दसवां हिस्सा माना जाता है। उन्होंने कहा, “सेना लिटानी नदी तक बचे हुए पुलों और सुरक्षा क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लेगी।” काट्ज ने यह भी दावा किया कि जिन इलाकों में “आतंकवाद” मौजूद है, वहां नागरिकों को रहने की अनुमति नहीं होगी। ‘सुरक्षा सुनिश्चित होने तक वापसी नहीं’ इजरायल ने साफ किया है कि जब तक उसकी उत्तरी सीमा पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक सेना पीछे नहीं हटेगी। रक्षा मंत्री के अनुसार, दक्षिणी लेबनान से लाखों लोग पहले ही उत्तर की ओर पलायन कर चुके हैं और उनकी वापसी सुरक्षा हालात सुधरने पर ही संभव होगी। क्यों लिया गया फैसला? इजरायल का कहना है कि यह कदम हिजबुल्लाह के खतरे को खत्म करने और अपनी सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। इजरायली सेना पहले ही लिटानी नदी के आसपास कई पुलों को निशाना बना चुकी है, ताकि हिजबुल्लाह के लड़ाके और हथियार दक्षिणी इलाकों में न पहुंच सकें। काट्ज ने इसे “फॉरवर्ड डिफेंस लाइन” बताया। हिजबुल्लाह की चेतावनी हिजबुल्लाह ने इजरायल के इस प्लान को लेबनान के लिए “अस्तित्व का खतरा” बताया है और कहा है कि किसी भी कब्जे की कोशिश का जोरदार विरोध किया जाएगा। जंग में नया मोड़ यह बयान ऐसे समय में आया है जब हिजबुल्लाह लगातार इजरायल के शहरों-हाइफा और नाहारिया-पर रॉकेट हमले कर रहा है। वहीं ईरान की ओर से भी ड्रोन हमले जारी हैं। इसके अलावा, बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर धमाकों की खबरें भी सामने आई हैं। कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं फिलहाल कमजोर दिख रही हैं। इजरायल का यह बयान मिडिल ईस्ट संघर्ष को और गंभीर मोड़ दे सकता है। अगर दक्षिणी लेबनान में बफर ज़ोन बनाने की योजना आगे बढ़ती है, तो इससे क्षेत्र में जंग और लंबी तथा व्यापक हो सकती है।
वॉशिंगटन: ईरान के साथ जारी युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इसके साथ ही अमेरिकी प्रशासन के भीतर फैसलों को लेकर सवाल और गहरे होते जा रहे हैं। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक नया बयान देकर विवाद को और बढ़ा दिया है, जिसमें उन्होंने युद्ध की शुरुआत के लिए अपने रक्षा मंत्री Pete Hegseth की भूमिका की ओर इशारा किया है। “लेट्स डू इट” से शुरू हुआ विवाद टेनेसी में आयोजित एक राउंडटेबल चर्चा के दौरान ट्रंप ने कहा कि सैन्य कार्रवाई का सुझाव सबसे पहले हेगसेथ ने दिया था। ट्रंप के अनुसार, हेगसेथ ने कहा था कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए कार्रवाई जरूरी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब युद्ध की शुरुआत को लेकर प्रशासन के भीतर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। किसी के अनुसार, इजरायल पहले ही हमले की तैयारी में था, जिससे अमेरिका की भागीदारी अनिवार्य हो गई, जबकि अन्य का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार के करीब था। विरोधाभासी दावे और बढ़ती उलझन ट्रंप के बयान में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। कुछ ही घंटे पहले उन्होंने दावा किया था कि ईरान की जवाबी कार्रवाई अप्रत्याशित थी, जबकि मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि संभावित हमलों को लेकर पहले से चेतावनी दी गई थी। इन विरोधाभासों ने प्रशासन की रणनीति और निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। युद्ध का चेहरा बने हेगसेथ इस पूरे घटनाक्रम में Pete Hegseth लगातार अग्रिम पंक्ति में नजर आ रहे हैं। पेंटागन में उन्होंने ईरान के मिसाइल कार्यक्रम, ड्रोन उत्पादन और नौसैनिक शक्ति को कमजोर करने के लक्ष्य को दोहराया है। हालांकि, युद्ध की समयसीमा को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। प्रशासन के भीतर मतभेद रिपोर्ट्स के अनुसार, उपराष्ट्रपति JD Vance इस सैन्य कार्रवाई को लेकर पूरी तरह सहमत नहीं थे, हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई विरोध नहीं जताया है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और मीडिया उद्योगपति Rupert Murdoch जैसे प्रभावशाली व्यक्तियों के समर्थन की भी चर्चा है। इस बीच, राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र के पूर्व प्रमुख जो केंट का इस्तीफा इस बात का संकेत है कि प्रशासन के भीतर मतभेद गहरे हैं। बातचीत पर भी असमंजस ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ बातचीत की संभावना बनी हुई है और मध्यस्थता के लिए Jared Kushner तथा दूत स्टीव विटकॉफ सक्रिय हैं। हालांकि, ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। अनिश्चितता बरकरार ट्रंप द्वारा तय की गई समयसीमा को भी आगे बढ़ा दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि युद्ध की दिशा और परिणाम दोनों ही अभी अनिश्चित हैं। लगातार बदलते बयान, विरोधाभासी दावे और कूटनीतिक अस्पष्टता इस संघर्ष को और जटिल बना रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब भारत के ईंधन बाजार पर साफ दिखने लगा है। सोमवार, 23 मार्च 2026 को देश के कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव देखने को मिला। जहां कुछ राज्यों में तेल महंगा हुआ है, वहीं कुछ जगहों पर मामूली राहत भी मिली है। ग्लोबल मार्केट में Brent Crude Oil $112 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि WTI Crude Oil भी $100 के करीब है। मिडिल ईस्ट तनाव और डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी के बाद तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर भारत में ईंधन कीमतों पर पड़ा है। मेट्रो शहरों में क्या है आज का रेट? देश की तेल कंपनियों ने सुबह 6 बजे नए रेट जारी किए। प्रमुख महानगरों में कीमतें इस प्रकार हैं: दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77 | डीजल ₹87.67 प्रति लीटर मुंबई: पेट्रोल ₹103.54 | डीजल ₹90.03 प्रति लीटर कोलकाता: पेट्रोल ₹105.45 | डीजल ₹92.02 प्रति लीटर चेन्नई: पेट्रोल ₹100.84 | डीजल ₹92.39 प्रति लीटर इन शहरों में आज कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इन राज्यों में बढ़े दाम कई राज्यों में आज ईंधन महंगा हो गया है: बिहार: पेट्रोल ₹106.95, डीजल ₹93.14 उत्तर प्रदेश: पेट्रोल ₹95.00, डीजल ₹88.72 झारखंड: पेट्रोल ₹99.16, डीजल ₹93.89 गोवा: पेट्रोल ₹96.96, डीजल ₹88.71 केरल: पेट्रोल ₹96.96, डीजल ₹96.02 तमिलनाडु: पेट्रोल ₹102.34, डीजल ₹93.89 इसके अलावा हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और मणिपुर में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन राज्यों में मिली राहत कुछ राज्यों में तेल की कीमतों में गिरावट भी देखी गई: गुजरात: पेट्रोल ₹95.07, डीजल ₹90.77 कर्नाटक: पेट्रोल ₹102.41, डीजल ₹90.48 मध्य प्रदेश: पेट्रोल ₹106.18, डीजल ₹91.56 महाराष्ट्र: पेट्रोल ₹105.43, डीजल ₹91.94 ओडिशा: पेट्रोल ₹102.23, डीजल ₹93.79 उत्तराखंड: पेट्रोल ₹94.51, डीजल ₹89.44 पश्चिम बंगाल: पेट्रोल ₹105.80, डीजल ₹92.37 क्यों बदलते हैं रोज दाम? पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम, डॉलर-रुपया विनिमय दर और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए VAT शामिल हैं। यही वजह है कि हर राज्य और शहर में कीमतें अलग-अलग होती हैं। घर बैठे ऐसे चेक करें रेट आप अपने शहर का ताजा रेट SMS के जरिए भी जान सकते हैं: Indian Oil: RSP <City Code> भेजें 9224992249 पर BPCL: RSP भेजें 9223112222 पर HPCL: HP Price भेजें 9222201122 पर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान द्वारा कतर के प्रमुख गैस केंद्र रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर किए गए हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला कर रख दिया है। इस हमले के कारण कतर की लगभग 17% LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) उत्पादन क्षमता प्रभावित हो गई है, जिसे पूरी तरह बहाल होने में 3 से 5 साल तक का समय लग सकता है। 20 अरब डॉलर का नुकसान, वर्षों तक असर कतर एनर्जी के CEO साद अल-काबी के अनुसार, हमले में 14 LNG ट्रेनों में से दो और एक गैस-टू-लिक्विड (GTL) प्लांट को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इससे हर साल करीब 12.8 मिलियन टन LNG उत्पादन प्रभावित होगा और अनुमानित 20 अरब डॉलर का राजस्व नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस संकट का असर अगले 5 वर्षों तक बना रह सकता है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होगी। ‘फोर्स मेज्योर’ लागू, सप्लाई पर संकट कतर को अपने कई अंतरराष्ट्रीय अनुबंधों पर ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करना पड़ा है, जिसका मतलब है कि वह तय आपूर्ति पूरी नहीं कर पाएगा। इसका असर इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों पर पड़ेगा, जो कतर की LNG पर निर्भर हैं। इस हमले का असर बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर भी पड़ा है, जिनमें ExxonMobil और Shell शामिल हैं, जिनकी इस प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी है। भारत के लिए क्यों है खतरे की घंटी? भारत अपनी गैस जरूरतों का लगभग 50-60% हिस्सा कतर से आयात करता है। ऐसे में इस हमले का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। LPG (रसोई गैस) की कीमतों में बढ़ोतरी उद्योगों के लिए गैस सप्लाई में कमी बिजली उत्पादन लागत में वृद्धि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो भारत को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ सकती है। वैश्विक बाजार में हड़कंप कतर दुनिया की लगभग 20% LNG सप्लाई करता है, ऐसे में इस हमले का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई यूरोप में गैस कीमतों में 24% तक उछाल LPG, हीलियम, कंडेन्सेट और अन्य उत्पादों में भारी गिरावट क्षेत्रीय तनाव और गहराया यह हमला उस समय हुआ जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। ईरान ने यह कार्रवाई अपने गैस ढांचे पर हुए हमलों के जवाब में की। साद अल-काबी ने इस घटना को ‘क्षेत्र के लिए बड़ा झटका’ बताते हुए कहा कि इससे मध्य पूर्व की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। तेल और गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।
कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमले की खबर के बाद भारतीय शेयर बाजार में गैस कंपनियों के स्टॉक्स दबाव में आ गए। गुरुवार को Petronet LNG और GAIL (India) के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। Petronet LNG और GAIL के शेयरों में गिरावट कारोबार के दौरान Petronet LNG का शेयर लगभग 5.85% तक टूटकर 274.55 रुपये के इंट्राडे लो पर पहुंच गया। वहीं GAIL (India) का शेयर भी करीब 3.15% गिरकर 146.2 रुपये तक फिसल गया। पिछले दो सत्रों में तेजी दिखाने वाले इन स्टॉक्स में अचानक आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हमले से क्यों बढ़ी चिंता? कतर का रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी दुनिया का सबसे बड़ा LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) निर्यात केंद्र माना जाता है। यहां से वैश्विक LNG सप्लाई का बड़ा हिस्सा जाता है। कतर अधिकारियों के अनुसार, इस इलाके पर ईरान की ओर से मिसाइल हमला किया गया, जिसमें कई हमले नाकाम किए गए, लेकिन एक मिसाइल टकराने से नुकसान हुआ। इसके बाद आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं। ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी QatarEnergy ने बताया कि कई LNG सुविधाएं प्रभावित हुई हैं और वहां बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है। हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। वैश्विक सप्लाई पर असर, भारत भी प्रभावित रास लाफान वैश्विक गैस सप्लाई का अहम केंद्र है। यहां किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ता है। भारत की कंपनियां जैसे Petronet LNG LNG आयात पर काफी निर्भर हैं। ऐसे में सप्लाई बाधित होने की आशंका से इन कंपनियों के मार्जिन और भविष्य की लागत पर असर पड़ सकता है। मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव यह हमला ऐसे समय हुआ है जब मध्य पूर्व में पहले से ही तनाव चरम पर है। हाल ही में इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाने के बाद हालात और बिगड़ गए। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि कतर, सऊदी अरब और यूएई के ऊर्जा प्रतिष्ठान भी निशाने पर आ सकते हैं। इसी कड़ी में अब यह हमला क्षेत्रीय संकट को और गहरा करता दिख रहा है। अमेरिका की चेतावनी अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि अगर कतर की LNG सुविधाओं पर दोबारा हमला हुआ तो अमेरिका कड़ी प्रतिक्रिया देगा।
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान को अब तक का सबसे बड़ा रणनीतिक झटका लगा है। इजरायली हमले में ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था के प्रमुख अली लारिजानी की मौत की पुष्टि खुद सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने की है। इस हमले में उनके बेटे और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह नुकसान केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि ईरान की सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीति के केंद्र को झटका है। क्यों थे अली लारिजानी इतने अहम? अली लारिजानी ईरान की सत्ता संरचना के उन दुर्लभ चेहरों में थे, जिनका प्रभाव राजनीति, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति-तीनों स्तरों पर फैला हुआ था। उन्होंने वर्षों तक ईरान के सरकारी मीडिया तंत्र को नियंत्रित किया बाद में वे सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के करीबी सुरक्षा सलाहकार बने 2005 में उन्हें देश का शीर्ष परमाणु वार्ताकार नियुक्त किया गया वे रूस, चीन जैसे देशों में भी मजबूत कूटनीतिक नेटवर्क रखते थे लारिजानी की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि वे अलग-अलग सत्ता केंद्रों के बीच संतुलन बनाकर फैसले लागू कराने की क्षमता रखते थे। क्यों उनकी मौत को “सुप्रीम लीडर से भी बड़ा झटका” कहा जा रहा है? सवाल यही है कि एक सिक्योरिटी चीफ की मौत को इतना बड़ा नुकसान क्यों माना जा रहा है। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं: 1. रणनीतिक दिमाग का नुकसान लारिजानी केवल पद पर बैठे अधिकारी नहीं थे, बल्कि ईरान की सुरक्षा और विदेश नीति के प्रमुख रणनीतिकार थे। उनकी अनुपस्थिति में तत्काल निर्णय लेने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है। 2. अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का टूटना उनके रूस, चीन और पश्चिमी देशों के साथ स्थापित रिश्ते किसी और के पास उसी स्तर पर नहीं हैं। इससे युद्ध के बाद संभावित बातचीत और सीजफायर प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। 3. सत्ता के भीतर संतुलन बिगड़ना ईरान की राजनीति कई धड़ों में बंटी हुई है। लारिजानी उन कुछ नेताओं में थे जो इन धड़ों के बीच संतुलन बनाए रखते थे। उनके जाने से आंतरिक अस्थिरता बढ़ सकती है। 4. युद्ध के बीच नेतृत्व में खालीपन 18 दिनों से जारी इस संघर्ष के बीच ऐसे समय पर शीर्ष सुरक्षा नेतृत्व का खत्म होना युद्ध संचालन पर सीधा असर डाल सकता है। क्या यह हमला सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि रणनीतिक निशाना था? विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि ईरान की भविष्य की रणनीति को कमजोर करने की सोची-समझी कोशिश है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लग रहे हैं कि वे संभावित सीजफायर और अमेरिका-ईरान वार्ता के रास्ते को रोकना चाहते हैं-और लारिजानी उस प्रक्रिया के अहम सूत्रधार हो सकते थे। पिछले बड़े झटकों से तुलना विशेषज्ञ इस घटना की तुलना 2020 में बगदाद में हुए उस हमले से कर रहे हैं, जिसमें ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत हुई थी। माना जा रहा है कि उसके बाद यह ईरान के लिए सबसे बड़ा झटका है। लारिजानी की मौत से न केवल युद्ध की दिशा प्रभावित हो सकती है, बल्कि मध्य-पूर्व में शक्ति संतुलन भी बदल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ईरान इस नुकसान की भरपाई कैसे करता है और क्या यह घटना संघर्ष को और भड़का देगी या कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को और कमजोर कर देगी।
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच इजरायल द्वारा ईरान के शीर्ष नेता अली लारिजानी को निशाना बनाकर एयरस्ट्राइक किए जाने का दावा सामने आया है। हालांकि इस हमले में लारिजानी की स्थिति- मृत्यु या घायल होने- को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और ईरान की ओर से भी चुप्पी बनी हुई है। IDF का बड़ा ऑपरेशन, शीर्ष नेतृत्व निशाने पर रिपोर्ट्स के अनुसार, Israel Defense Forces ने इस एयरस्ट्राइक में न सिर्फ लारिजानी, बल्कि बासिज बल के एक वरिष्ठ कमांडर को भी निशाना बनाया। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में पहले से ही युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है और दोनों पक्षों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई जारी है। हमले से पहले लारिजानी का तीखा बयान एयरस्ट्राइक से ठीक एक दिन पहले अली लारिजानी ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने वैश्विक मुस्लिम समुदाय और इस्लामी देशों को संबोधित करते हुए एक खुला पत्र जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि: ईरान को अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिला अधिकांश मुस्लिम देशों ने केवल बयानबाजी की, ठोस समर्थन नहीं दिया अमेरिका-इजरायल पर गंभीर आरोप अपने पत्र में लारिजानी ने: अमेरिका को “बड़ा शैतान” और इजरायल को “छोटा शैतान” बताया उन्होंने आरोप लगाया कि: ईरान पर हमलों में नागरिकों और सैन्य अधिकारियों की मौत हुई इसके बावजूद ईरान ने “दृढ़ इच्छाशक्ति” के साथ जवाब दिया इस्लामी देशों पर उठाए सवाल लारिजानी ने मुस्लिम देशों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा: क्या वे निष्पक्ष रहेंगे या किसी पक्ष का समर्थन करेंगे? जिन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, वहां से ईरान पर हमले हो रहे हैं उन्होंने यह भी पूछा कि क्या ईरान चुप बैठा रहे, जबकि उसके खिलाफ हमले जारी हैं। एकता की अपील और क्षेत्रीय संदेश अपने पत्र के अंत में लारिजानी ने इस्लामी देशों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि: अमेरिका भरोसेमंद नहीं है इजरायल क्षेत्र का दुश्मन है यदि मुस्लिम देश एकजुट हों, तो सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित हो सकती है क्या बढ़ेगा टकराव? इस घटनाक्रम ने मध्य-पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शीर्ष नेताओं को निशाना बनाए जाने की घटनाएं बढ़ती हैं, तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के सबसे उन्नत विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford को बड़ा झटका लगा है। दुनिया के सबसे महंगे और अत्याधुनिक युद्धपोतों में शामिल इस ‘समुद्री दैत्य’ पर लगी आग ने इसकी संचालन व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। 30 घंटे की मशक्कत के बाद बुझी आग रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाज के मुख्य लॉन्ड्री सेक्शन में आग लगी, जिसे बुझाने में चालक दल को करीब 30 घंटे का समय लगा। आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन धुएं के कारण कई सैनिकों को सांस लेने में परेशानी हुई कुछ को मामूली चोटों के चलते इलाज देना पड़ा जहाज की रोजमर्रा की सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं 600 से ज्यादा सैनिकों की दिनचर्या प्रभावित इस हादसे के बाद: 600 से अधिक नौसैनिकों के सोने की व्यवस्था प्रभावित कई सैनिकों को फर्श और टेबल पर सोने को मजबूर होना पड़ा लॉन्ड्री सेक्शन जलने से कपड़े धोने की सुविधा ठप करीब 4,500 सैनिक और पायलट इस पोत पर तैनात हैं, जो पहले ही लंबे समय से लगातार मिशन पर हैं। 11 महीने की लंबी तैनाती से बढ़ा दबाव यह एयरक्राफ्ट कैरियर पिछले साल जून से लगातार समुद्र में तैनात है और इसकी तैनाती अब 11वें महीने में पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी लंबी तैनाती: तकनीकी समस्याओं को बढ़ाती है चालक दल की कार्यक्षमता पर असर डालती है मानसिक और शारीरिक थकान पैदा करती है अगर यह मिशन और लंबा चला, तो यह वियतनाम युद्ध के बाद की सबसे लंबी तैनाती का रिकॉर्ड तोड़ सकता है। टॉयलेट से लेकर बेसिक सुविधाओं तक संकट The Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार: सैनिकों को टॉयलेट के लिए 45 मिनट तक लाइन में लगना पड़ रहा है साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हैं कई तकनीकी खामियां पहले से ही सामने आ रही थीं क्या अब भी यह ऑपरेशनल ‘महाबली’ है? US Central Command का कहना है कि: आग से जहाज की मुख्य युद्ध प्रणाली को नुकसान नहीं हुआ पोत अभी भी पूरी तरह ऑपरेशनल है हालांकि जमीनी स्थिति यह संकेत देती है कि लगातार दबाव और आंतरिक समस्याएं इसकी क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। दुनिया का सबसे एडवांस एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford की प्रमुख खासियत: इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम (EMALS) रोजाना 160–220 उड़ानों का संचालन 75 से ज्यादा लड़ाकू विमान तैनात दो परमाणु रिएक्टर, 25 साल तक बिना ईंधन ऑपरेशन लगभग 13.3 बिलियन डॉलर की लागत यह युद्धपोत अमेरिका की नौसैनिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात इसकी तैयारियों और रखरखाव पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
Iraq की राजधानी Baghdad में स्थित United States के दूतावास पर हमले की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दूतावास परिसर को निशाना बनाकर मिसाइल या ड्रोन से हमला किया गया, जिसके बाद इलाके में धुआं उठता देखा गया। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक एक मिसाइल दूतावास की इमारत से टकराई, जिसके बाद परिसर से धुआं उठता दिखाई दिया। हालांकि इस हमले में हुए नुकसान या हताहतों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं Associated Press की रिपोर्ट के अनुसार मिसाइल दूतावास परिसर के भीतर बने हेलिपैड पर गिरी। दूसरी ओर Agence France-Presse (AFP) ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि दूतावास पर एक ड्रोन के जरिए हमला किया गया। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब हाल ही में बगदाद में हुए एक अन्य हमले में Iran समर्थित दो लड़ाकों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। माना जा रहा है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यह घटना हालात को और ज्यादा गंभीर बना सकती है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां हमले की जांच में जुटी हैं और दूतावास के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब बिहार तक महसूस किया जा रहा है। Gaya जिले के बहेरा गांव में इन दिनों डर और बेचैनी का माहौल है। गांव के एक दर्जन से अधिक लोग काम के सिलसिले में विदेश गए हुए हैं और क्षेत्र में जारी Iran–Israel युद्ध के कारण उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। मुस्लिम टोला में चिंता और दुआओं का माहौल डोभी प्रखंड के बहेरा गांव के मुस्लिम टोला में इन दिनों रमजान और आने वाली ईद के बीच खुशी की जगह चिंता का माहौल है। गांव के कई लोग रोज़गार की तलाश में खाड़ी देशों और अन्य देशों में काम करते हैं, लेकिन युद्ध जैसे हालात की खबरों से परिवारों की रातों की नींद उड़ गई है। हर घर में बस एक ही दुआ की जा रही है कि विदेश में गए लोग सुरक्षित रहें और जल्द घर लौट आएं। अलग-अलग देशों में फंसे गांव के लोग गांव के करीब 12 से अधिक लोग Saudi Arabia, Dubai, Qatar और Russia में काम कर रहे हैं। सऊदी अरब में: ताहिर हुसैन, सजमा खातुन, शाहिद अंसारी और अशरफ दुबई में: कमर इकबाल, एकलाख, नौशाद और दानिश कतर में: शालुक और शाहरुख रूस में: एनाम, शेरु, अदनान और जिशान परिजनों का कहना है कि जब भी फोन नहीं लगता या नेटवर्क की समस्या होती है, तो परिवार के लोगों की चिंता और बढ़ जाती है। एक कॉल न आए तो बढ़ जाती है बेचैनी गांव के लोगों के अनुसार, अगर एक दिन भी विदेश में काम कर रहे परिजनों से फोन पर बात नहीं हो पाती है तो घरों में डर का माहौल बन जाता है। कई बार नेटवर्क समस्या या फोन बंद होने से परिवार के लोग घबरा जाते हैं और तरह-तरह की आशंकाएं होने लगती हैं। ईद की खुशियां फीकी रमजान के अंतिम दिनों में जहां आमतौर पर गांव में ईद की तैयारियां होती हैं, वहीं इस बार बहेरा गांव में माहौल अलग है। परिवारों का कहना है कि जब तक उनके अपने सुरक्षित नहीं लौटते, तब तक ईद की खुशी अधूरी ही रहेगी। गांव के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि हालात जल्द सामान्य हों और विदेश में फंसे उनके परिजन सुरक्षित अपने घर लौट सकें।
एशियाई शेयर बाजारों में मंगलवार को तेजी देखी गई, क्योंकि निवेशक Iran के साथ जारी युद्ध के खत्म होने के संभावित संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच अमेरिकी बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रहे, जबकि तेल की कीमतों में हल्की बढ़त दर्ज की गई। जापान का प्रमुख सूचकांक Nikkei 225 2.1% बढ़कर 55,387.75 पर पहुंच गया। दक्षिण कोरिया का Kospi 3.5% की मजबूत बढ़त के साथ 5,724.30 पर बंद हुआ। अन्य बाजारों का हाल: Hang Seng Index (हांगकांग) 0.3% बढ़कर 26,039.23 Shanghai Composite 0.1% बढ़कर 4,127.34 S&P/ASX 200 (ऑस्ट्रेलिया) 0.5% चढ़कर 8,738.50 ताइवान का बेंचमार्क इंडेक्स लगभग 3.9% ऊपर रहा। अमेरिकी बाजारों का हाल अमेरिका में भी बाजार में हल्की कमजोरी रही: S&P 500 0.2% गिरकर 6,781.48 Dow Jones Industrial Average 34 अंक यानी 0.1% गिरकर 47,706.51 Nasdaq Composite लगभग सपाट बढ़त के साथ 22,697.10 पर रहा। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव की बड़ी वजह तेल की कीमतें हैं। Brent Crude का दाम लगभग $85.36 प्रति बैरल रहा। WTI Crude Oil करीब $83.81 प्रति बैरल पर पहुंच गया। हालांकि सोमवार को तेल की कीमतें लगभग $120 प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर था। युद्ध का बाजार पर असर तेल की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह United States, Israel और Iran के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, जिससे उम्मीद जगी कि मध्य-पूर्व से तेल की सप्लाई सामान्य हो सकती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव दुनिया के तेल व्यापार के लिए अहम Strait of Hormuz पर भी तनाव बना हुआ है। इस जलमार्ग से दुनिया के लगभग 20% तेल का परिवहन होता है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान इस रास्ते से तेल की आपूर्ति रोकता है तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने Stagflation का खतरा पैदा हो सकता है, जिसमें आर्थिक विकास धीमा पड़ जाता है और महंगाई लगातार ऊंची बनी रहती है। करेंसी मार्केट डॉलर बढ़कर 158.26 जापानी येन पर पहुंच गया। यूरो $1.1625 पर ट्रेड करता दिखा।
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार (11 मार्च) को तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। BSE Sensex दिन के उच्च स्तर से करीब 1,000 अंक टूट गया, जबकि Nifty 50 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा। करीब 11:38 बजे Sensex 878.12 अंक यानी 1.12% गिरकर 77,327.86 पर था, जबकि Nifty 242.40 अंक यानी लगभग 1% गिरकर 24,019.20 पर ट्रेड कर रहा था। इस दौरान 2,149 शेयरों में तेजी, 1,469 में गिरावट और 179 शेयरों में कोई बदलाव नहीं देखा गया। बाजार गिरने के प्रमुख कारण 1️. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। 10 मार्च को FIIs ने करीब ₹4,673 करोड़ की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹6,333 करोड़ की खरीदारी की। VK Vijayakumar के अनुसार, पिछले एक साल का पैटर्न फिर दिखाई दे रहा है-FIIs की बिक्री को DIIs की खरीद संतुलित कर रही है। 2️. मुनाफावसूली (Profit Booking) पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में अच्छी तेजी आई थी। Nifty करीब 24,261 पर बंद हुआ था Sensex करीब 78,206 पर इस तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार दबाव में आ गया। 3️. मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्य-पूर्व में तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। खबरों के मुताबिक United States और Israel ने Iran पर बड़े हमले किए हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। साथ ही Donald Trump ने कहा कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। इससे निवेशक सतर्क बने हुए हैं। 4️. बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में गिरावट बाजार की गिरावट में बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों का बड़ा योगदान रहा। सबसे ज्यादा दबाव इन शेयरों पर रहा: Kotak Mahindra Bank Bajaj Finserv Bajaj Finance SBI Life Insurance Bharti Airtel Tata Consumer Products इसके अलावा HDFC Bank और ICICI Bank भी करीब 1.4% तक गिर गए। 5️. सेक्टोरल दबाव ऑटो, आईटी, एफएमसीजी और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों में 0.6% से 1.3% तक गिरावट दर्ज की गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि: स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 0.5% ऊपर रहा मिडकैप इंडेक्स लगभग सपाट रहा टेक्निकल संकेत Aakash Shah के अनुसार: निफ्टी के लिए 24,100 और 24,000 अहम सपोर्ट लेवल हैं ऊपर की ओर 24,400–24,500 बड़ा रेजिस्टेंस है अगर निफ्टी 24,500 के ऊपर निकलता है तो 24,600–24,700 तक तेजी आ सकती है, जबकि 24,000 के नीचे जाने पर बाजार में अल्पकालिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज