Middle East Tensions

Iraqi desert region amid reports of alleged secret Israeli military bases and mysterious shepherd killing investigation.
Litton Das और Mushfiqur Rahim ने पाकिस्तान को किया परेशान

सिलहट टेस्ट में बांग्लादेश की पकड़ मजबूत, बढ़त पहुंची 249 रन Litton Das और Mushfiqur Rahim की शानदार बल्लेबाज़ी के दम पर Bangladesh national cricket team ने पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में मजबूत स्थिति बना ली है। सिलहट में खेले जा रहे मुकाबले के तीसरे दिन लंच तक बांग्लादेश ने दूसरी पारी में चार विकेट के नुकसान पर 203 रन बना लिए और कुल बढ़त 249 रन तक पहुंचा दी। टीम के अभी छह विकेट बाकी हैं, जिससे पाकिस्तान पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। लिटन और मुशफिकुर की साझेदारी बनी पाकिस्तान की सबसे बड़ी चुनौती लिटन दास 48 रन बनाकर नाबाद लौटे, जबकि मुशफिकुर रहीम 39 रन पर टिके रहे। दोनों बल्लेबाज़ों ने पांचवें विकेट के लिए अब तक 88 रन की नाबाद साझेदारी की है। इस साझेदारी ने पाकिस्तान के गेंदबाज़ों को पूरी तरह थका दिया और मैच को बांग्लादेश की तरफ मोड़ दिया। पहली पारी में 126 रन की शानदार शतकीय पारी खेलने वाले लिटन एक बार फिर बेहतरीन लय में दिखे। उन्होंने खराब मौसम और धीमे आउटफील्ड के बावजूद संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। सुबह के सत्र में पाकिस्तान को मिली शुरुआती सफलता बादलों से घिरे मौसम और तेज़ हवा का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज़ Khurram Shahzad ने दिन की शुरुआत में शानदार गेंदबाज़ी की। उन्होंने बांग्लादेश के कप्तान Najmul Hossain Shanto को LBW आउट कर टीम को शुरुआती सफलता दिलाई। शांतो 46 गेंदों में सिर्फ 15 रन बना सके। खुर्रम लगातार ऑफ स्टंप के बाहर गेंद को मूव करा रहे थे और बल्लेबाज़ों को परेशान कर रहे थे। धीरे-धीरे संभली बांग्लादेश की पारी सुबह के शुरुआती आठ ओवर तक बांग्लादेश कोई बाउंड्री नहीं लगा सका, लेकिन इसके बाद लिटन दास ने कवर ड्राइव के जरिए शानदार चौका जड़कर दबाव कम किया। उन्होंने पुल शॉट पर भी बेहतरीन चौका लगाया। दूसरी ओर मुशफिकुर रहीम शुरुआत में सतर्क रहे, लेकिन बाद में उन्होंने स्पिनर Sajid Khan के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने लॉन्ग-ऑन के ऊपर शानदार छक्का लगाकर पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा दीं। पाकिस्तान ने गंवाया बड़ा मौका लिटन दास को एक अहम जीवनदान भी मिला। 47वें ओवर में वह रन लेने के दौरान मिड-पिच पर फंस गए थे। मुशफिकुर ने उन्हें देर से वापस भेजा, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान के पास रन आउट का आसान मौका था। हालांकि Babar Azam सीधे स्टंप पर थ्रो नहीं लगा सके और लिटन बच गए। उस समय लिटन 38 रन पर बल्लेबाज़ी कर रहे थे। यह मौका पाकिस्तान को भारी पड़ सकता है। पहले दिन से ही बांग्लादेश का पलड़ा रहा भारी इससे पहले दूसरे दिन बांग्लादेश ने पाकिस्तान को पहली पारी में 232 रन पर ऑल आउट कर 46 रन की बढ़त हासिल की थी। बांग्लादेश की ओर से Nahid Rana और Taijul Islam ने तीन-तीन विकेट झटके। वहीं Mehidy Hasan Miraz और Taskin Ahmed को दो-दो सफलताएं मिलीं। पाकिस्तान की ओर से बाबर आज़म ने 68 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली और Salman Agha के साथ 63 रन की साझेदारी की। महमुदुल हसन जॉय ने भी दिखाई दमदार बल्लेबाज़ी बांग्लादेश की दूसरी पारी में Mahmudul Hasan Joy ने तेज़ अर्धशतक लगाकर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। उन्होंने Mominul Haque के साथ दूसरे विकेट के लिए 76 रन की अहम साझेदारी की। इस साझेदारी ने पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाया और बांग्लादेश को बड़ी बढ़त की दिशा में पहुंचा दिया। पाकिस्तान के लिए बढ़ी मुश्किलें तीसरे दिन लंच तक मुकाबला पूरी तरह बांग्लादेश के नियंत्रण में नजर आया। अगर लिटन दास और मुशफिकुर रहीम की साझेदारी लंबे समय तक जारी रहती है, तो पाकिस्तान के लिए इस टेस्ट मैच में वापसी करना बेहद मुश्किल हो सकता है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Iraqi desert region amid reports of alleged secret Israeli military bases and mysterious shepherd killing investigation.
चरवाहे ने देख लिया था इजराइल का कथित सीक्रेट सैन्य ठिकाना: इराक में गुप्त कैंप के दावों से मचा हड़कंप

Iraq के पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके में एक चरवाहे की रहस्यमयी मौत ने कथित तौर पर Israel के गुप्त सैन्य अड्डों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। 29 वर्षीय अवाद अल-शम्मारी अपनी पिकअप गाड़ी से सामान लेने निकला था, लेकिन कुछ घंटों बाद उसकी गोलियों से छलनी और जली हुई गाड़ी रेगिस्तान में मिली। स्थानीय लोगों का दावा है कि एक हेलिकॉप्टर उसका पीछा कर रहा था और लगातार फायरिंग कर रहा था। परिवार का आरोप है कि अवाद गलती से इजराइल के एक कथित सीक्रेट सैन्य ठिकाने तक पहुंच गया था, जहां उसने हेलिकॉप्टर, सैनिक और अस्थायी हवाई पट्टी देखी थी। परिवार का दावा- सेना को फोन करने के बाद हुई हत्या परिजनों के मुताबिक अवाद ने कथित सैन्य गतिविधियों की सूचना तुरंत इराकी सेना के क्षेत्रीय कमांड को दी थी। परिवार का मानना है कि इसी के बाद उसे निशाना बनाया गया। Israel Defense Forces (IDF) ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। रिपोर्ट में दो गुप्त सैन्य अड्डों का दावा अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल पिछले एक साल से अधिक समय से इराक के पश्चिमी रेगिस्तान में दो गुप्त सैन्य अड्डे चला रहा था। बताया जा रहा है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल Iran के खिलाफ सैन्य अभियानों के समर्थन के लिए किया जा रहा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक ठिकाना वही था जिसे अवाद ने कथित तौर पर देख लिया था। अमेरिका पर भी उठे सवाल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कम से कम एक कथित अड्डे की जानकारी United States को पहले से थी। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका ने इराक से यह जानकारी छिपाई कि उसकी जमीन पर एक विदेशी सेना सक्रिय थी। इराकी सांसद Waad al-Qaddo ने इसे इराक की संप्रभुता का उल्लंघन बताया। इराकी सेना को पहले से था शक इराकी सेना के यूफ्रेट्स यूनिट कमांडर Ali al-Hamdani ने कहा कि स्थानीय बेदुइन समुदाय कई हफ्तों से रेगिस्तान में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दे रहा था। लोगों ने हेलिकॉप्टरों की आवाजाही, सैनिकों की मौजूदगी और अस्थायी ढांचे देखे थे। उन्होंने कहा कि सेना को शक था कि वहां विदेशी सैन्य गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन सीधे कार्रवाई करने के बजाय निगरानी का फैसला लिया गया। जांच के लिए पहुंची सेना पर भी हमला अवाद की सूचना के बाद इराकी सेना ने इलाके में जांच के लिए टुकड़ी भेजी थी। मेजर जनरल हमदानी के अनुसार, सैनिक जैसे ही इलाके के करीब पहुंचे उन पर हमला हुआ। इस हमले में एक सैनिक की मौत हो गई जबकि दो अन्य घायल हो गए। सेना की गाड़ियों पर भी बमबारी की गई, जिसके बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा। सरकार की चुप्पी पर सवाल रिपोर्ट के मुताबिक इराकी सरकार ने अब तक आधिकारिक तौर पर इजराइली अड्डों की मौजूदगी स्वीकार नहीं की है। United States Central Command (CENTCOM) ने भी इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस खुलासे से इराक के सामने गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या उसकी सुरक्षा एजेंसियों को विदेशी सैन्य मौजूदगी की जानकारी नहीं थी या फिर उन्होंने इसे नजरअंदाज किया। ईरान-इजराइल तनाव के बीच बढ़ी चिंता  यदि इराक में इजराइल की गुप्त मौजूदगी के दावे सही साबित होते हैं, तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है।इससे Iran समर्थित समूहों को इराक में और सक्रिय होने का बहाना मिल सकता है, जबकि Iraq के लिए अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाए रखना और कठिन हो जाएगा।  

surbhi मई 18, 2026 0
Map showing submarine internet cables near Strait of Hormuz amid rising Iran digital control concerns.
ईरान का नया ‘डिजिटल हथियार’  होर्मुज की इंटरनेट केबलों पर नियंत्रण की कोशिश से दुनिया में बढ़ी चिंता

Iran अब केवल तेल और समुद्री व्यापार ही नहीं, बल्कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क को भी रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी में दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी समुद्री इंटरनेट और डेटा केबलों पर नियंत्रण और शुल्क लगाने के संकेत दिए हैं। इस कदम ने दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों, बैंकिंग सेक्टर और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन केबलों पर किसी तरह का असर पड़ा तो वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक, क्लाउड सेवाएं, ऑनलाइन कारोबार और वित्तीय लेनदेन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। गूगल-माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों पर शुल्क लगाने की तैयारी ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google, Microsoft, Meta और Amazon जैसी कंपनियों को भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट के नीचे गुजरने वाली इंटरनेट केबलों के इस्तेमाल के लिए शुल्क देना पड़ सकता है। ईरान के सैन्य प्रवक्ता Ebrahim Zolfaqhari ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संकेत दिए कि समुद्री इंटरनेट केबलों पर शुल्क लगाया जा सकता है। डिजिटल युद्ध की तरफ बढ़ रहा ईरान? विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान अब अपनी भौगोलिक स्थिति को रणनीतिक दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहता है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की पश्चिम एशिया विशेषज्ञ दीना एसफंदियारी के अनुसार, तेहरान दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि यदि उस पर हमला हुआ तो वैश्विक अर्थव्यवस्था भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। समुद्र के नीचे बिछी सबसी केबलें वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क की रीढ़ मानी जाती हैं। यूरोप, एशिया और खाड़ी देशों के बीच डेटा ट्रांसफर, बैंकिंग सिस्टम, क्लाउड कंप्यूटिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग और AI सेवाओं का बड़ा हिस्सा इन्हीं केबलों के जरिए संचालित होता है। भारत समेत एशियाई देशों पर पड़ सकता है असर रिपोर्ट्स के अनुसार, Strait of Hormuz एशिया और यूरोप के बीच एक अहम डिजिटल कॉरिडोर बन चुका है। अगर यहां इंटरनेट केबलों में बाधा आती है तो भारत की IT और आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसके अलावा खाड़ी देशों के तेल और गैस निर्यात से जुड़े डिजिटल सिस्टम, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क और शेयर बाजारों पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इंटरनेट स्पीड कम होने से कहीं बड़ा खतरा वित्तीय लेनदेन और वैश्विक डेटा ट्रैफिक में रुकावट का हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला दे रहा ईरान ईरानी मीडिया का दावा है कि यह योजना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून UNCLOS के तहत तैयार की जा रही है। इस कानून के मुताबिक, कोई भी तटीय देश अपनी समुद्री सीमा में आने वाली केबलों पर कुछ नियम लागू कर सकता है। ईरान स्वेज नहर का उदाहरण देकर यह तर्क दे रहा है कि रणनीतिक जलमार्गों से आर्थिक लाभ कमाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और स्वेज नहर की कानूनी स्थिति पूरी तरह समान नहीं है। पहले भी निशाने पर आ चुकी हैं समुद्री केबलें समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने जर्मनी की टेलीग्राफ केबल काट दी थी। हाल ही में 2024 में Houthi Movement से जुड़े हमलों में लाल सागर की तीन इंटरनेट केबल क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिससे क्षेत्रीय इंटरनेट ट्रैफिक का करीब 25 प्रतिशत प्रभावित हुआ था। हालांकि आधुनिक नेटवर्क में वैकल्पिक रूट मौजूद होते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े स्तर पर किसी केबल नेटवर्क को नुकसान पहुंचने पर वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi begins five-nation diplomatic tour starting from UAE amid global geopolitical tensions
UAE से शुरू होगा पीएम मोदी का 5 देशों का दौरा, UAE से होगी यात्रा की शुरुआत

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच Narendra Modi 15 मई से छह दिनों के विदेश दौरे पर निकलेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री United Arab Emirates, Netherlands, Sweden, Norway और Italy का दौरा करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत के रणनीतिक, व्यापारिक और तकनीकी संबंधों को मजबूत करना माना जा रहा है। UAE से होगी यात्रा की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे की शुरुआत यूएई से करेंगे, जहां उनकी मुलाकात Mohamed bin Zayed Al Nahyan से होगी। दोनों नेताओं के बीच: ऊर्जा सहयोग व्यापार और निवेश पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति भारतीय समुदाय के हित जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। साथ ही वहां 45 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं, इसलिए प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में रहेंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि मिडिल ईस्ट संकट के बीच यूएई को यात्रा का पहला पड़ाव बनाना भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है। नीदरलैंड में टेक्नोलॉजी और ग्रीन हाइड्रोजन पर फोकस यूएई के बाद प्रधानमंत्री मोदी 15 से 17 मई तक नीदरलैंड के दौरे पर रहेंगे। यह 2017 के बाद उनकी दूसरी यात्रा होगी। इस दौरान उनकी मुलाकात: Willem-Alexander Máxima Zorreguieta Rob Jetten से होगी। इस यात्रा में रक्षा, सुरक्षा, नवाचार, हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा। भारत और यूरोप के बीच सप्लाई चेन और हाई-टेक सहयोग को मजबूत करना भी इस दौरे का अहम हिस्सा माना जा रहा है। स्वीडन में AI और ग्रीन ट्रांजिशन पर चर्चा 17 से 18 मई तक पीएम मोदी स्वीडन के दौरे पर रहेंगे। यह यात्रा Ulf Kristersson के निमंत्रण पर हो रही है। दोनों देशों के बीच जिन क्षेत्रों पर चर्चा होगी, उनमें: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ग्रीन ट्रांजिशन स्टार्टअप रक्षा और अंतरिक्ष क्लाइमेट चेंज उभरती तकनीक शामिल हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी और क्रिस्टर्सन, Ursula von der Leyen के साथ “European Round Table for Industry” को भी संबोधित करेंगे। नॉर्वे में नॉर्डिक समिट 18 से 19 मई तक प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 1983 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली नॉर्वे यात्रा होगी। इस दौरान मोदी मुलाकात करेंगे: Harald V Sonja of Norway Jonas Gahr Støre से। इस यात्रा में व्यापार, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, हरित तकनीक और ब्लू इकॉनमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री मोदी भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। इटली दौरे के साथ होगा समापन अपने दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी 19 से 20 मई तक इटली जाएंगे। यह यात्रा Giorgia Meloni के निमंत्रण पर हो रही है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी: Sergio Mattarella से मुलाकात करेंगे प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे भारत और इटली के बीच रक्षा, व्यापार, निवेश और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर बातचीत होने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन के लिए इटली गए थे। क्यों अहम माना जा रहा है यह दौरा? विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह दौरा भारत और यूरोप के बीच साझेदारी को नई मजबूती देगा। ऐसे समय में जब: मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा हुआ है वैश्विक सप्लाई चेन दबाव में है ऊर्जा सुरक्षा बड़ा मुद्दा बनी हुई है यूरोप नई आर्थिक साझेदारियां तलाश रहा है भारत अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है।  

surbhi मई 12, 2026 0
Rising US-Iran tensions could disrupt global food supply, fuel prices, fertilizers and shipping routes worldwide
अमेरिका-ईरान युद्ध हुआ तो सिर्फ तेल नहीं, खाने पर भी पड़ेगा असर

अमेरिका और Iran के बीच बढ़ता तनाव अगर खुले युद्ध में बदलता है, तो इसका असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया की खाद्य सप्लाई, खेती-किसानी और आम लोगों की थाली तक पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध से भी बड़ा साबित हो सकता है, क्योंकि इस बार मामला दुनिया की सबसे अहम ऊर्जा सप्लाई रूट्स में से एक Strait of Hormuz से जुड़ा है। दुनिया का बड़ा हिस्सा यहीं से तेल और गैस प्राप्त करता है। कैसे बढ़ेगा खाद्य संकट? आधुनिक खेती पूरी तरह तीन चीजों पर निर्भर है: ईंधन (डीजल, पेट्रोल) उर्वरक (फर्टिलाइजर) ट्रांसपोर्ट सप्लाई चेन अगर युद्ध के कारण तेल सप्लाई बाधित होती है, तो: ट्रैक्टर और सिंचाई की लागत बढ़ेगी खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों की लागत कई गुना बढ़ जाएगी माल ढुलाई महंगी होगी खेत से मंडी तक अनाज पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा यानी खेती से लेकर खाने की प्लेट तक हर चरण प्रभावित होगा। खाद का संकट क्यों सबसे खतरनाक? Saudi Aramco के CEO Amin Nasser ने चेतावनी दी है कि दुनिया पहले से ही “एनर्जी सप्लाई शॉक” का सामना कर रही है। अगर हालात बिगड़े, तो असर कई साल तक रह सकता है। फर्टिलाइजर उद्योग प्राकृतिक गैस और तेल पर काफी निर्भर करता है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने का मतलब है: यूरिया और अन्य खाद की कीमतों में भारी उछाल गरीब देशों में खाद की कमी अगली फसलों की पैदावार में गिरावट यही वजह है कि विशेषज्ञ 2027 तक असर बने रहने की आशंका जता रहे हैं। गरीब देशों पर सबसे ज्यादा असर United Nations Office for Project Services ने भी चेतावनी दी है कि अगर तनाव लंबा चला, तो करोड़ों लोग खाद्य संकट की चपेट में आ सकते हैं। जो देश खाद्यान्न आयात पर निर्भर हैं, वहां हालात सबसे खराब हो सकते हैं, क्योंकि: युद्ध के समय देश अनाज निर्यात रोक सकते हैं अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं-चावल की कमी हो सकती है शिपिंग और बीमा खर्च कई गुना बढ़ जाएगा ऐसी स्थिति में अफ्रीका, दक्षिण एशिया और मध्य-पूर्व के गरीब देशों में भुखमरी का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। हॉर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम? Strait of Hormuz दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल रूट्स में से एक है। यहां तनाव बढ़ने का मतलब: तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होना शिपिंग कंपनियों का जोखिम बढ़ना वैश्विक सप्लाई चेन टूटना अगर यह रास्ता असुरक्षित होता है, तो सिर्फ तेल ही नहीं, खाद्यान्न और जरूरी सामान की वैश्विक ढुलाई भी प्रभावित होगी। आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा? अगर युद्ध लंबा चला, तो दुनिया भर में: पेट्रोल-डीजल महंगा LPG और गैस सिलेंडर महंगे सब्जियां और अनाज महंगे दूध, अंडे और खाने की चीजों की कमी ट्रांसपोर्ट और बिजली खर्च में बढ़ोतरी जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। क्या दुनिया तैयार है? विशेषज्ञ मानते हैं कि कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक सप्लाई चेन पहले ही कमजोर हो चुकी है। ऐसे में अमेरिका-ईरान युद्ध दुनिया की अर्थव्यवस्था को एक और बड़े झटके में धकेल सकता है। सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर खाद और ईंधन की सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित हुई, तो इसका असर सिर्फ कुछ महीनों का नहीं बल्कि कई सालों तक दिखाई दे सकता है।  

surbhi मई 12, 2026 0
Cargo ships passing through Strait of Hormuz amid Iran’s reported plan to impose toll charges in yuan
ईरान का बड़ा आर्थिक वार, होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर लगेगा टोल

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने के लिए एक नया प्राधिकरण बनाने का दावा किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कदम सिर्फ समुद्री नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ा आर्थिक और भू-राजनीतिक संदेश छिपा है. सबसे बड़ा झटका अमेरिका को इसलिए माना जा रहा है क्योंकि ईरान कथित तौर पर यह टोल अमेरिकी डॉलर की जगह चीन की मुद्रा युआन में लेना चाहता है. क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने “फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण” नाम की एजेंसी बनाई है. यह एजेंसी होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को ट्रांजिट अनुमति देगी और उनसे शुल्क वसूलेगी. जहाजों को पहले से अपना रूट, बीमा, चालक दल और स्वामित्व की जानकारी देनी होगी. होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है. इसलिए यहां किसी भी तरह का शुल्क या नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है. अमेरिका को क्यों लग सकता है झटका? सबसे बड़ा कारण “पेट्रोडॉलर” व्यवस्था है. दशकों से वैश्विक तेल व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता आया है. इससे डॉलर दुनिया की सबसे मजबूत रिजर्व मुद्रा बना रहा. लेकिन अगर ईरान युआन में टोल लेना शुरू करता है, तो: तेल व्यापार में डॉलर की पकड़ कमजोर हो सकती है चीन की मुद्रा युआन को अंतरराष्ट्रीय बढ़त मिल सकती है अमेरिका के आर्थिक प्रभाव को चुनौती मिल सकती है प्रतिबंधों के बावजूद ईरान को नया वित्तीय रास्ता मिल सकता है ईरान पहले से अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा है. ऐसे में डॉलर से हटकर युआन और क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान लेने की रणनीति उसे प्रतिबंधों के असर से कुछ राहत दे सकती है. चीन को क्या फायदा? चीन दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक है और ईरान के साथ उसके संबंध लगातार मजबूत हुए हैं. यदि व्यापार युआन में होता है, तो: चीन की मुद्रा का वैश्विक उपयोग बढ़ेगा एशिया-केंद्रित ऊर्जा व्यापार मॉडल मजबूत होगा चीन को अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम पर कम निर्भर रहना पड़ेगा किन देशों पर असर पड़ सकता है? जापान, दक्षिण कोरिया, भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस जैसे देश खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं. यदि टोल बढ़ता है या भुगतान व्यवस्था बदलती है, तो: तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं शिपिंग लागत महंगी हो सकती है आयात करने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है क्या सच में खत्म हो जाएगा डॉलर का दबदबा? विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी तुरंत ऐसा होना मुश्किल है, क्योंकि वैश्विक व्यापार और बैंकिंग सिस्टम अब भी बड़े पैमाने पर डॉलर पर आधारित है. लेकिन: BRICS देशों में डी-डॉलराइजेशन की चर्चा बढ़ रही है कई देश सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं चीन और कुछ अन्य देश वैकल्पिक भुगतान सिस्टम विकसित कर रहे हैं ऐसे में ईरान का यह कदम वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत माना जा रहा है.  

surbhi मई 9, 2026 0
US sanctions imposed on Chinese and Hong Kong firms accused of supporting Iran’s drone and missile programs
चीन-हांगकांग की कंपनियों पर अमेरिका का शिकंजा, ईरान को ड्रोन-मिसाइल सप्लाई का आरोप

अमेरिका ने ईरान के ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को समर्थन देने के आरोप में चीन और हांगकांग की कई कंपनियों समेत 10 संस्थाओं और व्यक्तियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की इस कार्रवाई को ईरान के सैन्य नेटवर्क पर बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है और अमेरिका-ईरान संबंधों में किसी समाधान के संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं. दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संभावित चीन दौरे से पहले इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. ड्रोन और मिसाइल निर्माण में मदद का आरोप अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, प्रतिबंधित कंपनियों और व्यक्तियों पर आरोप है कि वे ईरान को शहेद ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल बनाने के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, मशीनरी और कच्चा माल उपलब्ध करा रहे थे. अमेरिका का कहना है कि यह नेटवर्क ईरान की सैन्य क्षमता को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था. ट्रेजरी विभाग ने साफ किया कि वह भविष्य में भी ईरान के सैन्य और रक्षा ढांचे को कमजोर करने के लिए आर्थिक प्रतिबंधों का इस्तेमाल जारी रखेगा. चीन और हांगकांग की कंपनियां निशाने पर प्रतिबंधों की सूची में चीन की Yushita Shanghai International Trade Company का नाम प्रमुख रूप से शामिल है. अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यह कंपनी ईरान के हथियार कार्यक्रम के लिए सामग्री जुटाने में मदद कर रही थी. इसके अलावा दुबई स्थित Elite Energy FZCO पर भी कार्रवाई की गई है. आरोप है कि इस कंपनी ने हांगकांग की एक फर्म को करोड़ों डॉलर ट्रांसफर किए, जिनका इस्तेमाल ईरानी नेटवर्क के लिए किया गया. हांगकांग की HK Hesin Industry और बेलारूस की Armory Alliance पर भी ईरान के लिए बिचौलिये की भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है. Mustad Ltd पर गंभीर आरोप अमेरिकी अधिकारियों ने हांगकांग की Mustad Ltd पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, कंपनी ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लिए हथियारों और रक्षा उपकरणों की खरीद में मदद की. अमेरिका ने कहा कि ऐसे नेटवर्क वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा हैं और इनके खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी. विदेशी बैंकों और रिफाइनरियों पर भी नजर ट्रेजरी विभाग ने संकेत दिया है कि भविष्य में उन विदेशी बैंकों, एयरलाइंस और कंपनियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है जो ईरान के प्रतिबंधित व्यापार को सहयोग दे रहे हैं. इसमें चीन की तथाकथित “टीपॉट” ऑयल रिफाइनरियां भी शामिल हैं, जिन पर ईरानी तेल खरीदने के आरोप लगते रहे हैं. अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य ईरान को दोबारा सैन्य ताकत बढ़ाने से रोकना और उसके वैश्विक सप्लाई नेटवर्क को कमजोर करना है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Donald Trump warns Iran as tensions escalate near the Strait of Hormuz and US warships face threats
होर्मुज में तनाव बढ़ा, ट्रंप ने ईरान को दी कड़ी चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी नौसेना के तीन युद्धपोतों पर हमला किया गया. हालांकि उन्होंने कहा कि अमेरिकी जहाज सुरक्षित रहे, लेकिन जवाबी कार्रवाई में ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया. ट्रंप का दावा- अमेरिकी जहाजों पर हुआ हमला ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी नौसेना के तीन आधुनिक डेस्ट्रॉयर युद्धपोत सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया. उनके मुताबिक, अमेरिकी सेना ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और हमलावरों को भारी नुकसान पहुंचाया. हालांकि ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि हमला किस प्रकार का था और इसमें कितना नुकसान हुआ. अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से भी इस घटना को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है. ईरान को दी बड़ी धमकी ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तेहरान जल्द किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता, तो अमेरिका भविष्य में और ज्यादा कठोर तथा हिंसक कार्रवाई कर सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका अब भी डील के लिए तैयार है, लेकिन ईरान को तेजी से फैसला लेना होगा. ट्रंप के इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है. संघर्ष विराम के बाद फिर बढ़ा तनाव यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब 8 अप्रैल को लागू संघर्ष विराम के बाद क्षेत्र में हालात कुछ शांत माने जा रहे थे. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव कुछ कम हुआ था, लेकिन अब फिर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं. ईरान की सेना ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूद एक ईरानी तेल टैंकर और दूसरे जहाज को निशाना बनाया. ईरानी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी कार्रवाई संघर्ष विराम का उल्लंघन है. ईरान का पलटवार का दावा ईरानी सेना के संयुक्त कमांड ने कहा कि उसने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से और चाबहार बंदरगाह के दक्षिण में मौजूद अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाया. इसके अलावा ईरान ने अमेरिका पर किश्म द्वीप और बंदर खमीर व सीरिक जैसे तटीय इलाकों में हवाई हमले करने का भी आरोप लगाया है. ईरान का कहना है कि इन हमलों में नागरिक क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचा. परमाणु विवाद बना बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह तनाव परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद से भी जुड़ा हुआ है. वॉशिंगटन अभी भी ईरान से अपने प्रस्ताव पर जवाब का इंतजार कर रहा है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर नई शर्तों को स्वीकार करे, जबकि तेहरान कई मुद्दों पर अब भी सख्त रुख अपनाए हुए है. वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है असर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है. यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करता है. विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच हालात और बिगड़ते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Pakistan Army Chief Asim Munir meeting Iran’s Foreign Minister Abbas Araghchi in Tehran for peace talks
US-Iran तनाव: क्या पाकिस्तान कराएगा सुलह? तेहरान पहुंचे आर्मी चीफ मुनीर, 21 अप्रैल को खत्म होगा सीजफायर

  तेहरान/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे हैं। तेहरान में हाई-लेवल बातचीत तेहरान में आसिम मुनीर का स्वागत ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किया। यह मुलाकात अमेरिका-ईरान के बीच होने वाले दूसरे दौर की वार्ता को सफल बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है। अराघची ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इस पहल से पश्चिम एशिया में शांति कायम करने की उम्मीद बढ़ी है। शांति के लिए पाकिस्तान की कूटनीति पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ (Mediator) के तौर पर पेश कर रहा है। इससे पहले इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच शुरुआती बातचीत भी कराई गई थी। अब इस पूरी प्रक्रिया का लक्ष्य है— अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध खत्म करना एक स्थायी समझौते की दिशा में बढ़ना क्षेत्र में युद्ध की संभावना को टालना 21 अप्रैल को खत्म होगा सीजफायर इस बीच डोनाल्ड ट्रंप का रुख सख्त नजर आ रहा है। उन्होंने संकेत दिया है कि वह मौजूदा सीजफायर को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं, जो 21 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में बातचीत से कोई बड़ा और सकारात्मक नतीजा निकल सकता है। सऊदी अरब भी बना अहम कड़ी दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के जेद्दा में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। इस दौरान: शांति प्रयासों पर चर्चा हुई पाकिस्तान ने दावा किया कि उसकी कोशिशों से ही सीजफायर संभव हुआ स्थायी समझौते की दिशा में सहयोग की बात हुई आगे क्या? पश्चिम एशिया की नजर अब अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी है। अगर बातचीत सफल रही, तो क्षेत्र में स्थायी शांति की राह खुल सकती है। लेकिन अगर वार्ता विफल होती है और सीजफायर खत्म होता है, तो तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है। फिलहाल, पाकिस्तान की मध्यस्थता इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम कड़ी बनकर उभर रही है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Iranian Foreign Ministry spokesperson Esmail Baghaei addressing media amid rising Middle East tensions
ईरान की पड़ोसी देशों से अपील: अमेरिका-इजरायल का साथ न दें, क्षेत्र की शांति पर सवाल

  तेहरान: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए पड़ोसी देशों से अहम अपील की है। ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल क्षेत्र में अस्थिरता फैला रहे हैं और उन्हें यहां के लोगों की सुरक्षा से कोई मतलब नहीं है। ‘हमले के लिए अपनी जमीन न दें’ ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने साफ कहा कि पड़ोसी देश अपनी जमीन, समुद्र या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए न होने दें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ देशों ने “अनजाने में” अपनी सुविधाओं का गलत इस्तेमाल होने दिया है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए। ‘अमेरिका-इजरायल से शांति को खतरा’ ईरान का आरोप है कि पिछले 40 दिनों की घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिका और इजरायल की नीतियां क्षेत्र में शांति के बजाय तनाव बढ़ाने वाली हैं। तेहरान ने दोहराया कि वह अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध और संप्रभुता के सम्मान में विश्वास रखता है, लेकिन किसी भी तरह की सैन्य साझेदारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पाकिस्तान के जरिए बातचीत की कोशिश तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर तेहरान पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से हुई। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत का नया रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप का रुख सख्त वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह सीजफायर बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं, हालांकि उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद जताई है। डिप्लोमैटिक सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बड़ा अपडेट सामने आ सकता है। बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं। एक तरफ सैन्य तनाव बना हुआ है, तो दूसरी तरफ कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। अब नजर इस बात पर है कि क्या बातचीत के जरिए समाधान निकलता है या क्षेत्र में टकराव और गहराता है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Donald Trump speaking on Iran nuclear program and US-Iran tensions during a press interview.
“जंग अंत के करीब” – Donald Trump का बड़ा दावा, ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त संदेश

वॉशिंगटन: अमेरिका और Iran के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच चल रही जंग अब अपने अंत के करीब है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अगर उन्होंने ईरान के खिलाफ कड़ा कदम नहीं उठाया होता, तो तेहरान अब तक परमाणु हथियार बना चुका होता। “परमाणु हथियार होता तो ‘सर’ कहना पड़ता” Donald Trump ने तीखे अंदाज में कहा: “अगर ईरान के पास परमाणु बम होता, तो आज सबको उन्हें ‘सर’ कहना पड़ता।” उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने में बड़ी भूमिका निभाई है। “ईरान को उबरने में लगेंगे 20 साल” ट्रंप के मुताबिक: अमेरिका और Israel के हमलों से ईरान को भारी नुकसान हुआ है देश को दोबारा खड़ा होने में करीब 20 साल लग सकते हैं सीजफायर के बावजूद जारी दबाव दोनों देशों के बीच फिलहाल दो हफ्ते का युद्धविराम लागू है, जिससे हालात कुछ हद तक शांत हुए हैं। हालांकि, ट्रंप ने साफ किया कि: अमेरिका का मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है ईरान पर दबाव बनाए रखा जाएगा बातचीत के संकेत Donald Trump ने यह भी कहा कि: ईरान समझौते के लिए तैयार नजर आ रहा है जल्द ही बातचीत का नया दौर शुरू हो सकता है सूत्रों के मुताबिक, Islamabad में बैक-चैनल वार्ता जारी है। अमेरिका का फोकस ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य स्पष्ट है: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर स्थायी रोक भविष्य में किसी भी परमाणु खतरे को खत्म करना ट्रंप के बयान से संकेत मिलते हैं कि एक ओर अमेरिका युद्ध खत्म होने की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर ईरान पर कड़ा दबाव बनाए रखने की रणनीति जारी है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि हालात पूरी तरह शांत होते हैं या फिर तनाव दोबारा बढ़ता है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Donald Trump discussing US-Iran negotiations with Strait of Hormuz highlighted on a geopolitical map.
अमेरिका-ईरान वार्ता फिर शुरू होने के संकेत, लेकिन Donald Trump की 2 सख्त शर्तें

वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर शुरू होने की उम्मीद जगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि अगले दो दिनों में वार्ता का नया दौर शुरू हो सकता है। हालांकि, इस बार अमेरिका ने बातचीत से पहले दो अहम शर्तें रख दी हैं। बताया जा रहा है कि वार्ता का अगला दौर एक बार फिर Islamabad में हो सकता है, जहां पहले भी दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी। क्या हैं अमेरिका की शर्तें? पहली शर्त: होर्मुज स्ट्रेट को खोलना होगा अमेरिका चाहता है कि Strait of Hormuz को पूरी तरह और बिना किसी रुकावट के खोला जाए। यह समुद्री मार्ग दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है। अमेरिका ने साफ किया है कि अगर ईरान जहाजों की आवाजाही रोकेगा, तो उसके जहाजों को भी गुजरने नहीं दिया जाएगा। दूसरी शर्त: ईरानी टीम को मिले पूरा अधिकार अमेरिका की दूसरी शर्त है कि बातचीत करने वाली ईरानी टीम के पास अंतिम फैसला लेने का अधिकार हो। वॉशिंगटन चाहता है कि इस्लामाबाद में जो भी समझौता हो, उसे Iran के सभी बड़े संस्थान मंजूरी दें। ईरान के अंदर बढ़ रहे मतभेद रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद सामने आ रहे हैं। एक तरफ राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और विदेश मंत्री Abbas Araghchi जैसे राजनीतिक नेता हैं दूसरी तरफ शक्तिशाली Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) है बताया जा रहा है कि पहले दौर की वार्ता में IRGC के कुछ अधिकारियों ने राजनीतिक टीम को जवाब देने से रोक दिया था। ट्रंप का दावा Donald Trump ने कहा है कि उन्हें “सही लोगों” की तरफ से संपर्क मिला है और ईरान समझौते के लिए तैयार हो सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर शुरू होने की संभावना तो बनी है, लेकिन ट्रंप की सख्त शर्तें और ईरान के अंदरूनी मतभेद इस प्रक्रिया को मुश्किल बना सकते हैं। अब देखना होगा कि कूटनीति तनाव कम कर पाती है या हालात और बिगड़ते हैं।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Russian and Chinese flags symbolizing energy cooperation amid Iran sanctions and Strait of Hormuz tensions.
ईरान को घेरने की कोशिश, लेकिन रूस को फायदा: चीन को तेल सप्लाई का ऑफर

वॉशिंगटन/बीजिंग/मॉस्को: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और Strait of Hormuz की नाकेबंदी के बीच वैश्विक तेल राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ईरान को आर्थिक रूप से घेरने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं इस पूरे संकट का सबसे ज्यादा फायदा रूस को होता दिख रहा है। रूस ने चीन को दिया बड़ा ऑफर चीन दौरे पर पहुंचे रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने कहा कि: रूस, चीन की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है हॉर्मुज रूट बंद होने से जो कमी आई है, उसे रूस भर सकता है उन्होंने बीजिंग में कहा, “रूस बिना किसी शक के चीन और अन्य सहयोगी देशों की ऊर्जा कमी को पूरा कर सकता है।” ट्रंप की रणनीति, लेकिन उल्टा असर Donald Trump ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाए थे, जिनका मकसद था: ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करना तेल निर्यात पर रोक लगाना लेकिन: हॉर्मुज की नाकेबंदी से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई इसका फायदा रूस जैसे देशों को मिलने लगा रूस की ‘चांदी’ क्यों हो रही है? पहले रूस के तेल पर प्रतिबंध (Sanctions) लगे थे अब वैश्विक संकट के कारण रूसी तेल की मांग बढ़ गई रूस ज्यादा कीमत पर तेल बेचकर फायदा कमा रहा है अब चीन को अतिरिक्त सप्लाई का प्रस्ताव भी दे दिया रूस-चीन रिश्ते और मजबूत Sergey Lavrov ने Xi Jinping से मुलाकात की और कहा: दोनों देशों के संबंध “किसी भी मुश्किल में न टूटने वाले” हैं ये रिश्ते वैश्विक स्थिरता में अहम भूमिका निभाते हैं जानकारी के अनुसार: Vladimir Putin जून तक चीन दौरे पर जा सकते हैं 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद रूस-चीन साझेदारी और मजबूत हुई है वैश्विक असर हॉर्मुज रूट बंद होने से तेल सप्लाई बाधित चीन जैसे बड़े आयातक नए स्रोत तलाश रहे रूस को बड़ा आर्थिक फायदा अमेरिका की रणनीति पर सवाल ईरान को अलग-थलग करने की अमेरिकी कोशिशों के बीच वैश्विक ऊर्जा समीकरण बदलते दिख रहे हैं। जहां अमेरिका दबाव बना रहा है, वहीं रूस इस मौके को आर्थिक और रणनीतिक लाभ में बदल रहा है। आने वाले समय में यह टकराव दुनिया की ऊर्जा राजनीति को नई दिशा दे सकता है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
US Treasury Secretary Scott Bessent speaking on Iran oil sanctions and China amid Middle East tensions.
Scott Bessent की चेतावनी: “चीन को नहीं खरीदने देंगे ईरान का तेल”

वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने चीन पर सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि चीन को ईरान से तेल खरीदने की अनुमति नहीं दी जाएगी। होर्मुज स्ट्रेट पर सख्ती बेसेंट ने कहा कि अमेरिका की रणनीति Strait of Hormuz पर नियंत्रण और नाकाबंदी के जरिए यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी चीनी या अन्य जहाज ईरानी तेल लेकर न गुजर सके। उन्होंने कहा, “वे तेल ले सकते हैं, लेकिन ईरानी तेल नहीं।” चीन पर गंभीर आरोप Scott Bessent ने चीन को “अविश्वसनीय वैश्विक भागीदार” बताते हुए आरोप लगाया कि: चीन ने तेल की सप्लाई जमा (stockpile) की कुछ जरूरी वस्तुओं के एक्सपोर्ट को सीमित किया यह व्यवहार COVID-19 के दौरान मेडिकल सामान के स्टॉकिंग जैसा है तेल बाजार और सप्लाई चेन पर असर अमेरिका-ईरान-इजरायल तनाव के चलते: वैश्विक तेल कीमतों में 50% तक उछाल सप्लाई चेन बाधित समुद्री व्यापार पर दबाव खास बात यह है कि Strait of Hormuz से दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई गुजरती है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। चीन की तेल खरीद पर नजर बेसेंट के अनुसार: चीन ईरानी तेल का 90% से ज्यादा हिस्सा खरीदता रहा है यह उसकी कुल वार्षिक तेल खरीद का करीब 8% है चीन के पास पहले से बड़ा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद है ट्रंप-शी रिश्तों पर क्या असर? बेसेंट ने यह साफ नहीं किया कि इस विवाद का असर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की संभावित बीजिंग यात्रा पर पड़ेगा या नहीं। हालांकि उन्होंने कहा कि ट्रंप और Xi Jinping के बीच “अच्छे कामकाजी संबंध” हैं। ईरान के तेल को लेकर अमेरिका और चीन के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और नाकाबंदी की रणनीति से वैश्विक ऊर्जा बाजार, सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति–तीनों पर बड़ा असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह तनाव और गहरा सकता है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Pharmaceutical manufacturing facility with medicine packaging highlighting impact of Middle East tensions on drug prices.
मिडिल ईस्ट तनाव का असर: महंगी हो रही दवाएं, भारतीय फार्मा सेक्टर पर दबाव

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के फार्मा सेक्टर पर साफ दिखने लगा है। इंडियन फार्मास्यूटिकल एलायंस (IPA) के महासचिव Sudarshan Jain ने बताया कि इस संकट के चलते दवाओं के उत्पादन की लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। बढ़ी लागत, महंगा हुआ उत्पादन Indian Pharmaceutical Alliance के अनुसार, Freight (माल ढुलाई) महंगी हो गई है Insurance (बीमा प्रीमियम) में तेज बढ़ोतरी हुई है दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले Solvents (कच्चा माल) की कीमतें भी बढ़ी हैं इन कारणों से दवाओं की कुल लागत पर दबाव बढ़ रहा है। सप्लाई चेन पर असर युद्ध और तनाव के चलते समुद्री मार्ग, खासकर Strait of Hormuz जैसे अहम रूट, जोखिम भरे और महंगे हो गए हैं। शिपिंग लागत बढ़ी बीमा प्रीमियम में उछाल समय पर डिलीवरी में अनिश्चितता हालांकि, सरकार और उद्योग दोनों का फोकस इस समय दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर है, न कि कीमतों को तुरंत नियंत्रित करने पर। क्या दवाओं की कमी होगी? भारत 200 से ज्यादा देशों को दवाइयां सप्लाई करता है और दुनिया भर के करोड़ों मरीज भारतीय दवाओं पर निर्भर हैं। Sudarshan Jain के अनुसार: सरकार के फार्मा विभाग और वाणिज्य मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं सप्लाई चेन को बाधित होने से बचाने की कोशिश जारी है फिलहाल दवाओं की कमी की आशंका कम है भारतीय फार्मा सेक्टर की ताकत भारत का फार्मा उद्योग वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में है: करीब 30 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट लगभग 30 बिलियन डॉलर का घरेलू बाजार सबसे ज्यादा USFDA प्रमाणित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भारत में मौजूद 2047 का विजन भारतीय फार्मा इंडस्ट्री ने 2047 तक बड़ा लक्ष्य तय किया है: 450 बिलियन डॉलर का योगदान 100+ नए प्रोडक्ट्स का विकास “Affordable Innovation” पर फोकस मिडिल ईस्ट तनाव ने भारतीय फार्मा सेक्टर की लागत और सप्लाई चेन पर दबाव जरूर बढ़ाया है, लेकिन मजबूत उत्पादन क्षमता और सरकारी सहयोग के चलते भारत फिलहाल वैश्विक दवा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की स्थिति में है। आने वाले समय में यह सेक्टर न सिर्फ चुनौतियों से निपटेगा, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की दिशा में भी आगे बढ़ेगा।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Donald Trump addressing media about restarting Iran peace talks in Islamabad amid Middle East tensions.
Donald Trump का बड़ा बयान: “फिर इस्लामाबाद जाना चाहते हैं” – ईरान वार्ता दोबारा शुरू होने के संकेत

वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: ईरान संकट के बीच कूटनीतिक हल की कोशिशें तेज होती दिख रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ रुकी हुई बातचीत इस हफ्ते फिर से शुरू हो सकती है, और इसके लिए अमेरिका दोबारा Islamabad जाने पर विचार कर रहा है। इस्लामाबाद वार्ता फिर शुरू होने की उम्मीद न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “आपको वहीं (इस्लामाबाद) रुकना चाहिए, क्योंकि अगले दो दिनों में कुछ हो सकता है… हमारा झुकाव भी वहीं जाने का है।” गौरतलब है कि पिछले शनिवार को Islamabad में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी, जिसके बाद तनाव और बढ़ गया। होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी से बढ़ा दबाव वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने Strait of Hormuz पर नाकाबंदी लागू कर दी। अमेरिकी सेना के मुताबिक, नाकाबंदी के पहले 24 घंटों में इस अहम समुद्री मार्ग से कोई जहाज़ नहीं गुजरा, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई। युद्धविराम पर संकट मौजूदा गतिरोध ने अगले सप्ताह समाप्त होने जा रहे दो हफ्ते के युद्धविराम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अब बातचीत दोबारा शुरू होने की संभावना ने हालात में कुछ उम्मीद जगाई है। संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने कहा कि बातचीत फिर से शुरू होने की “काफी ज्यादा संभावना” है। खाड़ी देशों, Pakistan और Iran के अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि दोनों पक्षों की टीमें इस हफ्ते के अंत तक फिर से पाकिस्तान लौट सकती हैं, हालांकि अभी तारीख तय नहीं हुई है। तेल बाजार को राहत वार्ता दोबारा शुरू होने की उम्मीद से वैश्विक तेल बाजार में कुछ राहत देखने को मिली। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं, जिससे निवेशकों को थोड़ी राहत मिली।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump during a diplomatic discussion on the Iran crisis.
Narendra Modi–Donald Trump फोन कॉल: ईरान संकट के बीच 40 मिनट की अहम बातचीत

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: ईरान संकट और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत और अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व के बीच एक अहम बातचीत सामने आई है। मंगलवार (14 अप्रैल) को प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बीच करीब 40 मिनट तक फोन पर चर्चा हुई। यह बातचीत ऐसे समय पर हुई है जब पाकिस्तान में हुई अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल हो चुकी है और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। खास बात यह है कि ईरान-इजराइल-अमेरिका टकराव के दौरान यह दोनों नेताओं के बीच दूसरी बातचीत है। होर्मुज स्ट्रेट पर फोकस अमेरिका के भारत में राजदूत Sergio Gor ने जानकारी दी कि बातचीत के दौरान Strait of Hormuz की स्थिति पर विशेष चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस अहम समुद्री मार्ग को खुला और सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत-अमेरिका रिश्तों पर सकारात्मक संकेत राजदूत के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच संबंध इस समय मजबूत स्थिति में हैं। आने वाले दिनों में ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई बड़े समझौते होने की संभावना जताई गई है। बताया गया कि बातचीत के दौरान ट्रंप ने पीएम मोदी से कहा कि “हम सभी आपको पसंद करते हैं”, जो दोनों देशों के रिश्तों की गर्मजोशी को दर्शाता है। पीएम मोदी का बयान बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई। उन्होंने यह भी बताया कि मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई और Strait of Hormuz को सुरक्षित बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
US Iran conflict
ईरान के खिलाफ अमेरिका का बड़ा एक्शन: बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी शुरू, ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी

वॉशिंगटन, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के संबंध अब युद्ध के मुहाने पर पहुंच गए हैं। इस्लामाबाद में परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही उच्च स्तरीय शांति वार्ता के पूरी तरह विफल होने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। राष्ट्रपति के आदेश पर, 13 अप्रैल 2026 से ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण समुद्री नाकेबंदी (Blockade) लागू कर दी गई है। यह कार्रवाई भारतीय समयानुसार सोमवार शाम 7:30 बजे से प्रभावी हो गई है, जिसका सीधा असर अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के व्यापारिक मार्गों पर पड़ेगा।   परमाणु वार्ता की विफलता और नाकेबंदी का निर्णय अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से चल रही हाई-स्टेक बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि हालांकि अन्य कई मोर्चों पर दोनों देशों के बीच प्रगति हुई थी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा 'परमाणु कार्यक्रम' था, जिस पर कोई समझौता नहीं हो पाया। ट्रंप ने बताया कि ईरान अपने परमाणु लक्ष्यों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है, जिसके कारण वाशिंगटन को यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस सैन्य आदेश की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी जहाजों को टारगेट किया जाएगा। यह नाकेबंदी बिना किसी भेदभाव के सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी। हालांकि, सेना ने यह भी स्पष्ट किया है कि होर्मुज स्ट्रेट से होकर गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को अमेरिकी सेना द्वारा नहीं रोका जाएगा।   'प्रोटेक्शन फीस' और नौसैनिक माइंस पर तकरार इस नाकेबंदी के पीछे ईरान द्वारा जहाजों से वसूले जा रहे कथित 'अवैध टोल' को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज स्ट्रेट में 'वर्ल्ड एक्सटॉर्शन' (वैश्विक उगाही) करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईरान समुद्री माइंस बिछाने की धमकी देकर अंतरराष्ट्रीय जहाजों को डरा रहा है और उनसे सुरक्षा के नाम पर अवैध वसूली कर रहा है। ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा कि जो कोई भी इस गैर-कानूनी टोल का भुगतान करेगा, उसे खुले समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं दिया जाएगा। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के विश्लेषकों का कहना है कि ईरान ने कुछ शिपिंग लेन को 'खतरनाक क्षेत्र' घोषित कर जहाजों को अपने जलक्षेत्र में प्रवेश के लिए मजबूर किया, जहां से सुरक्षा शुल्क वसूला गया। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत इस तरह की वसूली को 'प्रोटेक्शन रैकेट' माना गया है। इसके जवाब में, अमेरिकी नौसेना के विध्वंसक जहाज 'यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन' और 'यूएसएस माइकल मर्फी' ने होर्मुज स्ट्रेट में गश्त शुरू कर दी है ताकि समुद्री माइंस को हटाया जा सके और जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जा सके।   ईरान की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयास दूसरी ओर, तेहरान ने अमेरिका के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए नाकेबंदी को अनुचित बताया है। ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान ने शांति बहाली के लिए नेक नीयती से बातचीत की थी और वे समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके थे। अराघची ने अमेरिका पर 'अत्यधिक मांगों' का आरोप लगाते हुए कहा कि दुश्मनी का जवाब दुश्मनी से ही पैदा होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की नाकेबंदी से हालात और भी ज्यादा बिगड़ सकते हैं।   इस बीच, वैश्विक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान से फोन पर चर्चा कर शांति प्रयासों में मदद की पेशकश की है। एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, अमेरिकी नौसेना जल्द ही सुरक्षित नेविगेशन रूट्स को नागरिक शिपिंग के लिए साझा करेगी। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी हैं, क्योंकि इस नाकेबंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति और बीमा दरों में भारी उछाल आने की आशंका बढ़ गई है।

Anjali Kumari अप्रैल 13, 2026 0
Aftermath of Israeli drone strike in Gaza’s Bureij refugee camp with emergency teams assisting injured civilians.
गाज़ा में फिर हिंसा: इजरायली हमलों में कम से कम 7 फिलिस्तीनियों की मौत, कई घायल

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Gaza Strip एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया है। ताजा हमलों में कम से कम सात फिलिस्तीनियों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यह घटनाएं ऐसे समय पर हुई हैं जब क्षेत्र में पहले से ही संघर्ष और मानवीय संकट गहराता जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य गाज़ा के Bureij refugee camp में सुबह-सुबह एक ड्रोन हमले ने नागरिकों के एक समूह को निशाना बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों और राहत एजेंसियों के मुताबिक, मिसाइलें एक पुलिस पोस्ट के पास गिरीं, जिससे कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि Al-Aqsa Hospital में छह शव और कई घायल पहुंचाए गए, जबकि Al-Awda Hospital में एक और मृतक तथा दो घायल लाए गए। राहत कार्य में जुटी टीमों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि हमले के बाद हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हो गए थे। इसी के साथ दक्षिणी गाज़ा के Khan Younis इलाके में भी एक ड्रोन हमले में विस्थापित लोगों के तंबू को निशाना बनाया गया। इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं। इलाके में लगातार गोलाबारी और टैंक फायरिंग की भी खबरें सामने आ रही हैं, जिससे आम नागरिकों में दहशत का माहौल है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख Volker Turk ने हालिया हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही हत्याएं और हमले यह दर्शाते हैं कि क्षेत्र में जवाबदेही की कमी बनी हुई है और नागरिकों की सुरक्षा गंभीर रूप से खतरे में है। आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2023 से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक 72,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। हाल के दिनों में भी हिंसा थमने के बजाय बढ़ती नजर आ रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और गहरी हो गई है। पश्चिमी तट यानी West Bank में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां छापेमारी और गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है। कई गांवों में आगजनी और हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Iran’s new Supreme Leader Mojtaba Khamenei reportedly injured after Tehran airstrike amid Middle East tensions.
एयरस्ट्राइक के बाद ईरान के नए सुप्रीम लीडर गंभीर रूप से घायल हो गए थे , पर्दे के पीछे से चला रहे सत्ता

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के नए सुप्रीम लीडर एक घातक एयरस्ट्राइक में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और अब भी उनका इलाज जारी है। इसके बावजूद वह देश के अहम फैसलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। एयरस्ट्राइक में लगीं गंभीर चोटें सूत्रों के अनुसार, 28 फरवरी को तेहरान में सुप्रीम लीडर के परिसर पर हुए हमले में मोजतबा खामेनेई बुरी तरह घायल हो गए थे। इस हमले में उनके पिता अयातुल्ला खामेनेई की मौत हो गई थी, जबकि परिवार के कई अन्य सदस्य भी मारे गए। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि: उनके चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं, जिससे चेहरा विकृत हो गया एक या दोनों पैरों में गंभीर चोट लगी, यहां तक कि एक पैर खोने की आशंका जताई गई वह अभी भी रिकवरी के दौर में हैं पर्दे के पीछे से संभाल रहे कमान शारीरिक रूप से कमजोर होने के बावजूद मोजतबा खामेनेई मानसिक रूप से सक्रिय बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि वह: ऑडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं युद्ध और कूटनीतिक फैसलों में भागीदारी कर रहे हैं अमेरिका के साथ वार्ता जैसे अहम मुद्दों पर अपनी राय दे रहे हैं हालांकि, 8 मार्च को सुप्रीम लीडर बनने के बाद से अब तक उनकी कोई सार्वजनिक तस्वीर या वीडियो सामने नहीं आया है, जिससे उनकी स्थिति को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सत्ता संतुलन में बदलाव के संकेत विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की सत्ता संरचना में इस समय बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। देश में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की भूमिका और प्रभाव पहले से ज्यादा मजबूत होता दिख रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई को अपने पिता जैसी पकड़ बनाने में समय लग सकता है और फिलहाल सत्ता कई केंद्रों में बंटी हुई नजर आ रही है। वार्ता पर भी असर यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है। ऐसे में ईरान के शीर्ष नेतृत्व की स्थिति वार्ता के परिणाम को भी प्रभावित कर सकती है। अनिश्चितता और सवाल सरकारी स्तर पर अब तक उनकी सेहत को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है। वहीं, सोशल मीडिया पर उनकी स्थिति को लेकर कई तरह की अटकलें और सवाल उठ रहे हैं।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
residential building in southern Lebanon amid rising Middle East tensions.
शांति वार्ता के बीच इजरायल का हमला: लेबनान में 3 की मौत, बढ़ा तनाव

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बेहद संवेदनशील मोड़ पर पश्चिम एशिया में हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। एक ओर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी ओर इजरायल ने लेबनान में ताजा हमला कर दिया है। इस हमले में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई है, जिससे क्षेत्र में शांति प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली सेना ने दक्षिण लेबनान के नबातीह क्षेत्र के मेफादौन कस्बे में एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाया। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में दो सप्ताह के संघर्षविराम (सीजफायर) को स्थायी रूप देने के लिए बातचीत की उम्मीदें जताई जा रही थीं। वार्ता पर मंडराया संकट इस पूरे घटनाक्रम ने इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता पर असर डाल दिया है। ईरान का दावा है कि हालिया सीजफायर में लेबनान भी शामिल था, जबकि इजरायल और अमेरिका इस दावे को खारिज करते रहे हैं। यही मतभेद अब शांति वार्ता के एजेंडे का सबसे बड़ा विवाद बनता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, लेबनान को लेकर बढ़ते तनाव के कारण ईरान ने पहले वार्ता में शामिल होने से हिचक दिखाई थी। हालांकि, इजरायल द्वारा बातचीत के संकेत देने के बाद ईरान वार्ता के लिए तैयार हुआ। 14 अप्रैल को नई उम्मीद इस बीच, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने घोषणा की है कि 14 अप्रैल से इजरायल और लेबनान के बीच सीधी बातचीत शुरू हो सकती है। यह बातचीत अमेरिका की मध्यस्थता में होने की संभावना है। जंग का बड़ा असर 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद से लेबनान में हालात बेहद खराब हो चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 1,900 लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है और वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। क्या आगे बढ़ेगी शांति प्रक्रिया? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लेबनान में हिंसा नहीं रुकती, तो अमेरिका-ईरान वार्ता का सकारात्मक परिणाम निकलना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्षेत्र स्थिरता की ओर बढ़ेगा या फिर एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर लौटेगा।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0