Middle East Tensions

US airstrikes target Iranian military sites after alleged drone attack on a commercial cargo ship in the Strait of Hormuz
ट्रंप की डील मतलब… छिटपुट हमले! फिर भिड़े ईरान-अमेरिका, बरसाने लगे बारूद; होर्मुज फिर हुआ ब्लॉक

  US-Iran Attack Hormuz Strait: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक वाणिज्यिक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमले के आरोप के बाद अमेरिका ने ईरान के मिसाइल, ड्रोन भंडारण ठिकानों और तटीय रडार केंद्रों पर हवाई हमले किए। जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। ताजा घटनाक्रम के बाद दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही एक बार फिर बाधित हो गई है। ड्रोन हमले के बाद अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि उसकी सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के साथ-साथ तटीय रडार साइट्स पर सटीक हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना के अनुसार यह कार्रवाई 25 जून को M/V Ever Lovely नामक सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज पर हुए कथित ड्रोन हमले के जवाब में की गई। CENTCOM ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है और अमेरिकी बल लगातार समुद्री यातायात की सुरक्षा के लिए सहयोग कर रहे हैं। कार्रवाई के बाद अमेरिकी सेना ने हमलों का 37 सेकंड का वीडियो भी जारी किया। अमेरिका ने ईरान पर लगाया युद्धविराम उल्लंघन का आरोप अमेरिका का दावा है कि मालवाहक जहाज ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा था, तभी उस पर ड्रोन हमला किया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया। CENTCOM ने कहा कि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना नौवहन की स्वतंत्रता पर हमला है और इससे वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है। हमलों की जगह का खुलासा नहीं अमेरिका ने यह नहीं बताया कि ईरान के किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया गया। उधर ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि दक्षिणी बंदरगाह शहर सिरिक के ताहेरोयेह घाट के पास देर रात विस्फोटों की आवाज सुनी गई। सैन्य सूत्रों के हवाले से कहा गया कि क्षेत्र में किसी प्रोजेक्टाइल के गिरने से धमाके हुए। ट्रंप बोले- युद्धविराम का 'मूर्खतापूर्ण उल्लंघन' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित ड्रोन हमले को युद्धविराम समझौते का "मूर्खतापूर्ण उल्लंघन" बताया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि एक ड्रोन ने बेहद महंगे मालवाहक जहाज को सीधे निशाना बनाया, जबकि तीन अन्य ड्रोन को मार गिराया गया। ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि युद्धविराम का मतलब पूरी तरह गोलीबारी बंद होना नहीं, बल्कि हिंसा में कमी आना है। ताजा घटनाओं ने दोनों देशों के बीच तनाव को फिर बढ़ा दिया है। जेडी वेंस ने दी सख्त चेतावनी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि यदि ईरान की ओर से दोबारा हमला किया गया तो अमेरिका उसका कड़ा जवाब देगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यदि ईरान को समझौते के किसी पहलू पर आपत्ति है तो बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए, लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से ही दिया जाएगा। ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही समय बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया है। IRGC ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने फिर किसी प्रकार की सैन्य कार्रवाई की तो उसका जवाब पहले से कहीं अधिक व्यापक होगा। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने शांति समझौते के अनुच्छेद-5 का उल्लंघन किया है। ईरान का कहना है कि जिस मालवाहक जहाज को निशाना बनाया गया, उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना अनुमति निर्धारित मार्ग से अलग रास्ता अपनाया था। फिर ठप हुआ होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य से होता है। फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद यहां समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया था। बाद में युद्धविराम के बाद सीमित स्तर पर जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू हुई थी। अब ताजा हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद एक बार फिर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। अप्रैल से लागू है युद्धविराम अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से युद्धविराम लागू है। इसके बावजूद बीच-बीच में समुद्री सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों को लेकर तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच 17 जून को 14 सूत्रीय शांति समझौते पर सहमति बनी थी, जिसमें सैन्य गतिविधियां रोकने और 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया गया था। स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच पहली दौर की वार्ता भी हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 28 और 29 जून को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में दूसरे दौर की वार्ता प्रस्तावित है, जहां स्थायी शांति समझौते के अगले चरण पर चर्चा की जाएगी।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
US Senate passes resolution limiting President Donald Trump’s authority for military action against Iran.
ईरान युद्ध पर ट्रंप को झटका, अमेरिकी संसद में सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव पास

  अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। अमेरिकी संसद के दोनों सदनों ने एक ऐसे प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसमें ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को सीमित करने और राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों पर नियंत्रण लगाने की मांग की गई है। खास बात यह रही कि ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसदों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। सीनेट में 50-48 वोट से पारित हुआ प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में युद्ध शक्तियों (War Powers) से जुड़े इस प्रस्ताव के पक्ष में 50 वोट पड़े, जबकि 48 सांसदों ने इसका विरोध किया। मतदान के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के चार सीनेटरों ने पार्टी लाइन से हटकर प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया। वहीं, दो रिपब्लिकन सांसद मतदान के समय अनुपस्थित रहे। यह प्रस्ताव राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी के बिना किसी बड़े सैन्य संघर्ष को आगे बढ़ाने से रोकने की मंशा से लाया गया है। प्रस्ताव के पारित होने को ट्रंप प्रशासन की विदेश और सुरक्षा नीति के लिए एक राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी मिला समर्थन इससे पहले अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी यह प्रस्ताव पारित हो चुका है। वहां इसके समर्थन में 215 वोट पड़े, जबकि विरोध में 208 सांसदों ने मतदान किया। हाउस में भी चार रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर प्रस्ताव का समर्थन किया था। ट्रंप की पार्टी में बढ़ी असहमति रिपब्लिकन पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कई सांसदों का मानना है कि कांग्रेस की मंजूरी के बिना राष्ट्रपति को व्यापक सैन्य कार्रवाई का अधिकार नहीं होना चाहिए। दूसरी ओर ट्रंप समर्थक नेताओं का कहना है कि राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में त्वरित निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। क्या ट्रंप पर पड़ेगा कोई असर? हालांकि यह प्रस्ताव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इसका तत्काल कानूनी प्रभाव सीमित है। यह एक ‘कॉनकरेंट रिजॉल्यूशन’ है, जिसे राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं होती और यह सीधे कानून का रूप भी नहीं लेता। व्हाइट हाउस ने प्रस्ताव को प्रतीकात्मक बताते हुए कहा है कि इसका प्रशासन की सैन्य नीति पर कोई बाध्यकारी प्रभाव नहीं पड़ेगा। प्रशासन का तर्क है कि राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों को इस तरह के प्रस्तावों से सीमित नहीं किया जा सकता। अदालत तक पहुंच सकता है मामला संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति और कांग्रेस की युद्ध संबंधी शक्तियों को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है। ऐसे में यदि इस प्रस्ताव को लेकर टकराव बढ़ता है तो मामला अदालतों तक पहुंच सकता है। व्हाइट हाउस पहले ही इस तरह के प्रस्तावों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठा चुका है। ईरान के साथ जारी है कूटनीतिक बातचीत यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बातचीत जारी है। दोनों देशों के बीच हाल के हफ्तों में कई दौर की वार्ताएं हुई हैं और कूटनीतिक प्रयास तेज हुए हैं। ऐसे में अमेरिकी संसद का यह संदेश संकेत देता है कि कांग्रेस का एक बड़ा वर्ग मध्य पूर्व में किसी नए सैन्य संघर्ष से बचने के पक्ष में है। अमेरिकी राजनीति में बढ़ी हलचल विश्लेषकों का मानना है कि प्रस्ताव के पक्ष में रिपब्लिकन सांसदों का मतदान ट्रंप के लिए केवल राजनीतिक झटका नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति का संकेत भी है। आने वाले दिनों में ईरान नीति और सैन्य शक्तियों के मुद्दे पर अमेरिका की राजनीति में बहस और तेज होने की संभावना है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
US Senate votes on proposal to limit President Trump's military powers regarding Iran conflict.
ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर ट्रंप प्रशासन को झटका, अमेरिकी सीनेट ने सीमित करने वाले प्रस्ताव को दी मंजूरी

  अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य शक्तियों को सीमित करने से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य ईरान के खिलाफ किसी भी बड़े सैन्य अभियान में राष्ट्रपति की स्वतंत्र कार्रवाई पर नियंत्रण सुनिश्चित करना है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ संभावित शांति समझौते और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर कूटनीतिक प्रयासों में भी जुटा हुआ है। 50-48 वोट से पारित हुआ प्रस्ताव मंगलवार को हुए मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 50 और विरोध में 48 वोट पड़े। दिलचस्प बात यह रही कि राष्ट्रपति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों—रैंड पॉल, सुसान कॉलिन्स, लिसा मर्कोव्स्की और बिल कैसिडी—ने डेमोक्रेट सांसदों के साथ मिलकर प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं, डेमोक्रेट सांसद जॉन फेटरमैन ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। इस मतदान ने अमेरिकी राजनीति में ईरान नीति को लेकर दोनों दलों के भीतर मौजूद मतभेदों को भी उजागर कर दिया। प्रतिनिधि सभा से भी मिल चुकी है मंजूरी इससे पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है। वहां यह प्रस्ताव 215-208 वोटों से पारित हुआ था। हाउस में भी कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर इसका समर्थन किया था। प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इसकी आलोचना करते हुए समर्थक सांसदों को निशाने पर लिया था। क्या है इस प्रस्ताव का उद्देश्य? यह प्रस्ताव अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच युद्ध संबंधी शक्तियों के संतुलन से जुड़ा हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रपति किसी बड़े सैन्य संघर्ष में देश को शामिल करने से पहले कांग्रेस की स्वीकृति प्राप्त करें। अमेरिका में लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि सैन्य कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण फैसलों में कांग्रेस की भूमिका को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि युद्ध संबंधी निर्णयों पर लोकतांत्रिक नियंत्रण बना रहे। क्या ट्रंप प्रशासन पर पड़ेगा कोई असर? राजनीतिक रूप से यह प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन कानूनी दृष्टि से इसका प्रभाव सीमित है। यह एक "कॉनकरेंट रिजॉल्यूशन" है, जिसे कानून का दर्जा प्राप्त नहीं होता और न ही इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक होती है। व्हाइट हाउस का कहना है कि इस प्रस्ताव का प्रशासन की सैन्य नीति पर कोई बाध्यकारी प्रभाव नहीं पड़ेगा। प्रशासन के अनुसार, यह केवल एक प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश है। व्हाइट हाउस ने बताया प्रतीकात्मक कदम व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने प्रस्ताव को महज राजनीतिक अभिव्यक्ति बताया है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों पर इसका कोई प्रत्यक्ष असर नहीं पड़ेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले पहले की तरह कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे। प्रशासन ने यह भी दावा किया कि वर्तमान में ईरान के साथ किसी सक्रिय सैन्य संघर्ष की स्थिति नहीं है और हालिया युद्धविराम के बाद तनाव में कमी आई है। कांग्रेस में बढ़ रही सैन्य कार्रवाई को लेकर चिंता सीनेट में हुए इस मतदान ने संकेत दिया है कि कांग्रेस के कई सदस्य मध्य पूर्व में संभावित सैन्य तनाव को लेकर चिंतित हैं। सांसदों का एक वर्ग मानता है कि बिना कांग्रेस की मंजूरी के बड़े सैन्य कदम उठाने से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है और अमेरिका लंबे संघर्ष में उलझ सकता है। इसी वजह से हाल के महीनों में ईरान से जुड़े युद्ध शक्तियों के मुद्दे पर कांग्रेस में कई बार बहस और मतदान हो चुके हैं। अमेरिका-ईरान वार्ता पर बनी हुई है नजर सीनेट के इस फैसले के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी है। दोनों देशों के बीच हाल में हुई वार्ताओं को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि सीनेट का यह प्रस्ताव भले ही कानूनी रूप से बाध्यकारी न हो, लेकिन यह स्पष्ट संकेत देता है कि अमेरिकी संसद का एक बड़ा वर्ग ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई पर अधिक राजनीतिक और संसदीय निगरानी चाहता है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
US President Donald Trump speaks after Switzerland talks, warning Iran over compliance with the interim peace agreement.
60 दिन की राहत, लेकिन सख्त चेतावनी भी; डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को किया आगाह

  वॉशिंगटन/बर्गेनस्टॉक: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई तनावपूर्ण वार्ता के एक दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ कहा कि यदि ईरान अंतरिम शांति समझौते के तहत किए गए वादों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका सख्त जवाबी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, "अगर ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता या उसका रवैया ठीक नहीं रहता, तो हम वही करेंगे जो जरूरी होगा।" उनके इस बयान को तेहरान के लिए स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। पहले दौर की वार्ता में दिखा था तनाव स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत के दौरान भी तनाव देखने को मिला। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ट्रंप की टिप्पणी पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने नाराजगी जताई और कुछ समय के लिए वार्ता कक्ष छोड़कर बाहर चला गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए अंतरिम समझौते के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे थे। जेडी वेंस बोले- मजबूत समझौते की नींव पड़ी शुरुआती तनाव के बावजूद वार्ता बाद में पटरी पर लौटती दिखाई दी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरानी अधिकारियों के साथ हुई बातचीत ने अंतिम समझौते के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। ईरान ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि वार्ता का दायरा उसके परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) तक बढ़ा दिया गया है। ईरान को आर्थिक राहत, प्रतिबंधों में मिली छूट अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान को सीमित आर्थिक राहत देने का फैसला किया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय (US Treasury Department) ने 21 अगस्त तक कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी छूट प्रदान की है। इस फैसले के बाद ईरान को तेल और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात की अनुमति मिल गई है। साथ ही उसे इन निर्यातों के बदले भुगतान प्राप्त करने की भी मंजूरी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रतिबंधों से जूझ रही ईरानी अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिल सकती है। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई बातचीत अमेरिका और ईरान के बीच यह वार्ता पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में आयोजित की गई। दोनों देशों ने पिछले सप्ताह हुए अंतरिम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए 60 दिनों का रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई है। इस रोडमैप का उद्देश्य स्थायी समझौते की दिशा में आगे बढ़ना, क्षेत्रीय तनाव कम करना और लंबित विवादित मुद्दों का समाधान निकालना है। दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने और कूटनीतिक माध्यमों से समाधान तलाशने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है। 60 दिन की राहत, लेकिन दबाव बरकरार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा दी गई 60 दिनों की राहत ईरान को आर्थिक और कूटनीतिक अवसर प्रदान करती है, लेकिन ट्रंप की चेतावनी यह भी स्पष्ट करती है कि वाशिंगटन समझौते के उल्लंघन पर कठोर रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। ऐसे में आने वाले दो महीने अमेरिका-ईरान संबंधों और मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
US President Donald Trump speaks as he issues a fresh warning to Iran amid ongoing peace talks in Switzerland.
ट्रंप ने ईरान को दी खुली चेतावनी, कहा- लेबनान में प्रॉक्सी नहीं रोके तो होगा और भीषण हमला

  Donald Trump Iran Warning: मध्य पूर्व में शांति बहाली की कोशिशों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन इसी दौरान ट्रंप ने ईरान को सीधे सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देकर तनाव बढ़ा दिया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दी धमकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक सख्त पोस्ट साझा करते हुए कहा कि ईरान को लेबनान में सक्रिय अपने समर्थित सशस्त्र गुटों और प्रॉक्सी संगठनों को तुरंत हिंसक गतिविधियां रोकने के लिए कहना चाहिए। ट्रंप ने लिखा, "यदि ईरान ने अपने भारी भुगतान पाने वाले प्रॉक्सी संगठनों को तबाही मचाने से नहीं रोका, तो अमेरिका फिर से बड़ा हमला करेगा। यह हमला पिछले सप्ताह की कार्रवाई से भी कहीं अधिक भीषण होगा।" शांति वार्ता के बीच बढ़ा कूटनीतिक दबाव ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए महत्वपूर्ण वार्ता चल रही है। इस बैठक में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा तथा आर्थिक प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। ट्रंप की नई चेतावनी ने इस शांति प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ईरान पर अतिरिक्त कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। लेबनान में ईरान समर्थित गुटों को लेकर अमेरिका चिंतित अमेरिका लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि ईरान लेबनान में सक्रिय अपने समर्थित संगठनों, विशेष रूप से हिज्बुल्लाह, के जरिए क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करता है। वॉशिंगटन का मानना है कि इन संगठनों की गतिविधियां न केवल इजरायल बल्कि पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए चुनौती हैं। ट्रंप ने अपने संदेश में स्पष्ट संकेत दिया कि यदि ईरान ने इन समूहों पर नियंत्रण नहीं किया, तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। वार्ता पर पड़ सकता है असर विश्लेषकों का कहना है कि एक तरफ शांति वार्ता और दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी, दोनों मिलकर अमेरिका-ईरान संबंधों को और जटिल बना सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ईरान ट्रंप की चेतावनी पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या स्विट्जरलैंड में जारी वार्ता किसी ठोस समझौते तक पहुंच पाती है। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच ट्रंप का यह बयान एक बार फिर इस क्षेत्र की नाजुक स्थिति को उजागर करता है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Rising tensions over the Indus Waters Treaty spark concerns for Pakistan's economy and regional stability.
सिंधु जल समझौते पर बढ़ा तनाव, पाकिस्तान ने दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी; अर्थव्यवस्था पर गहराया संकट

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि यदि उनके देश की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ, तो पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान पहले से ही गंभीर जल संकट और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को स्थगित किए जाने के फैसले का असर पाकिस्तान के कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों पर दिखाई देने लगा है। क्या है विवाद की वजह? अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया था। भारत ने स्पष्ट किया था कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह फैसला लागू रहेगा। हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के उस बयान के बाद पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई, जिसमें संकेत दिया गया था कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के उपयोग को लेकर भारत अपनी रणनीति मजबूत कर सकता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर क्यों है असर? सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। देश की लगभग 80 प्रतिशत खेती इसी जल स्रोत पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र— पाकिस्तान की GDP में लगभग 23 प्रतिशत योगदान देता है। कुल कार्यबल के 40 प्रतिशत से अधिक लोगों को रोजगार देता है। ग्रामीण आबादी के बड़े हिस्से की आजीविका का आधार है। कपास और टेक्सटाइल उद्योग पर बढ़ी चिंता पाकिस्तान का टेक्सटाइल उद्योग उसकी अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र है। देश के कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा इसी सेक्टर से आता है और इससे अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। कपास की खेती के लिए सिंधु नदी का पानी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो इसका असर कपास उत्पादन और उससे जुड़े पूरे टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ सकता है। बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव विशेषज्ञों का मानना है कि जल सुरक्षा से जुड़े मुद्दे दक्षिण एशिया में संवेदनशील विषय हैं और दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार का तनाव क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे मामलों में कूटनीतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की भूमिका अहम मानी जाती है।  

surbhi जून 22, 2026 0
US President Donald Trump speaks as tensions rise over Iran and the strategic Strait of Hormuz during talks in Switzerland.
'होर्मुज बंद हुआ तो अपने देश नहीं लौट पाओगे', ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा अमेरिका-ईरान तनाव

  वॉशिंगटन/बर्गेनस्टॉक: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही महत्वपूर्ण वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी सैन्य चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को बंद करने की कोशिश की, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। ट्रंप के इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान को ट्रंप की सीधी चेतावनी फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर तुम होर्मुज बंद करने की कोशिश करोगे, तो अपने देश तक भी वापस नहीं पहुंच पाओगे।" उनके इस बयान को ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त चेतावनियों में से एक माना जा रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को बाधित नहीं होने देगा। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का सख्त रुख ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता विफल हो जाती है, तो वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य पर सीधे नियंत्रण स्थापित करने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। उन्होंने कहा, "जरूरत पड़ी तो हम होर्मुज का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकते हैं।" ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ऐसी स्थिति में अमेरिका वहां से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स या टोल लगाने का कदम उठा सकता है। जहाजों पर 20 प्रतिशत तक टोल लगाने की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि ईरान समझौते के रास्ते पर नहीं आता है, तो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर उनके तेल कार्गो के मूल्य का लगभग 20 प्रतिशत तक टोल लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा कदम वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। लेबनान और हिज्बुल्लाह का भी किया जिक्र ट्रंप ने ईरान से लेबनान में सक्रिय संगठन हिज्बुल्लाह पर नियंत्रण रखने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों को बढ़ाने वाली गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए और ईरान को अपने सहयोगी समूहों की गतिविधियों को नियंत्रित करना होगा। स्विट्जरलैंड में जारी है अहम वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर महत्वपूर्ण बातचीत चल रही है। हालांकि, ट्रंप के ताजा बयान के बाद इन वार्ताओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप की चेतावनी केवल ईरान पर दबाव बनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर अमेरिकी रणनीतिक पकड़ को मजबूत करने का भी संकेत है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Cargo ships carrying fertilizers safely pass through the Strait of Hormuz before renewed regional disruptions.
होर्मुज बंद होने से पहले भारत के लिए राहत, खाद से लदे 12 जहाज सुरक्षित निकले; टला बड़ा संकट

नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उर्वरक और कच्चा माल लेकर भारत आ रहे करीब 10 से 12 मालवाहक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा बंद होने से ठीक पहले इस रणनीतिक मार्ग को पार करने में सफल रहे हैं। इससे देश में संभावित खाद संकट फिलहाल टलता नजर आ रहा है। व्यापार जगत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इन जहाजों में यूरिया, डीएपी और अमोनिया जैसे महत्वपूर्ण उर्वरक और कच्चा माल लदा हुआ है। इनकी समय पर आवाजाही से खरीफ सीजन के दौरान किसानों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। युद्ध की शुरुआत में फंस गए थे 16 जहाज ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारत के लिए रवाना हुए कुल 16 जहाज प्रभावित हुए थे। इनमें शामिल थे— 8 जहाज यूरिया से लदे हुए 4 जहाज डीएपी (DAP) लेकर जा रहे थे 1 जहाज अमोनिया से भरा था 3 जहाज सल्फर लेकर आ रहे थे इन जहाजों के फंसने से भारत में उर्वरकों की आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई थी। खरीफ सीजन के लिए अहम है यह आपूर्ति पश्चिम एशिया भारत के लिए उर्वरकों और उनके कच्चे माल का प्रमुख स्रोत है। जून से शुरू होने वाले खरीफ सीजन के दौरान किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराना बेहद जरूरी होता है। यदि यह आपूर्ति बाधित होती, तो किसानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो सकती थी और बाजार में खाद की कीमतों में भी तेजी आ सकती थी। घरेलू उत्पादन पर भी पड़ा था असर होर्मुज मार्ग में व्यवधान के कारण एलएनजी (LNG) की आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे देश में यूरिया उत्पादन भी धीमा पड़ गया था। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने अतिरिक्त एलएनजी की व्यवस्था की और वैश्विक बाजार से यूरिया खरीदने के लिए नए टेंडर जारी किए। कीमतों में मिल सकती है राहत विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी रहती है, तो अमोनिया और सल्फर जैसे कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे उर्वरकों की कीमतों में धीरे-धीरे नरमी देखने को मिल सकती है। हालांकि, पूरी सप्लाई चेन के सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है।  

surbhi जून 22, 2026 0
Smoke rises over southern Lebanon after Israeli airstrikes as Hezbollah and Israeli forces exchange attacks amid escalating regional tensions.
Israel-Hezbollah Conflict: लेबनान में इजरायली हमले तेज, 18 लोगों की मौत; ईरान-अमेरिका वार्ता टली

  बेरूत/तेल अवीव: इजराइल और हिजबुल्ला के बीच तनाव एक बार फिर हिंसक टकराव में बदल गया है। इजरायली सेना ने शुक्रवार (19 जून) को दक्षिणी लेबनान और पूर्वी बेका घाटी में हिजबुल्ला के ठिकानों पर रातभर हवाई हमले किए, जबकि जवाबी कार्रवाई में हिजबुल्ला ने इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। संघर्ष में अब तक कम से कम 18 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी नेशनल न्यूज एजेंसी (NNA) के अनुसार, इजरायली हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। वहीं, इजराइल ने कहा है कि उसकी सैन्य कार्रवाई अभी समाप्त नहीं हुई है और हिजबुल्ला के सैन्य ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। इजराइल के चार सैनिक भी मारे गए इजराइली सेना के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान में जारी संघर्ष के दौरान एक लेफ्टिनेंट कर्नल समेत चार सैनिक मारे गए हैं। इसके अलावा एक विस्फोटक ड्रोन हमले में पांच सैनिक घायल हुए हैं, जिनका इलाज किया जा रहा है। बेका घाटी में भी सैन्य कार्रवाई दक्षिणी लेबनान के अलावा इजरायली सेना ने पूर्वी बेका घाटी में भी कई ठिकानों पर हमले किए। सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य हिजबुल्ला की सैन्य क्षमताओं और बुनियादी ढांचे को कमजोर करना है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि जब तक हिजबुल्ला से उत्पन्न खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक इजरायली सेना लेबनान में अपनी कार्रवाई जारी रखेगी। ईरान-अमेरिका वार्ता स्थगित इजराइल-हिजबुल्ला संघर्ष के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित ईरान-अमेरिका वार्ता को स्थगित कर दिया गया है। इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के शामिल होने की संभावना थी। क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, मध्यस्थ नई तारीख तय करने और वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं। मौजूदा हालात ने हाल ही में हुए ईरान-अमेरिका प्रारंभिक युद्धविराम समझौते के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। युद्धविराम समझौते पर संकट हालिया समझौते में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने और क्षेत्रीय अखंडता एवं संप्रभुता का सम्मान करने की प्रतिबद्धता जताई गई थी। लेकिन जमीनी हालात इस समझौते की भावना के विपरीत दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लेबनान में हिंसा नहीं थमी, तो पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लग सकता है। हॉर्मुज जलमार्ग खुलने से राहत इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच हुए प्रारंभिक समझौते के बाद हॉर्मुज जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए फिर से खुल गया है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति को राहत मिली है। युद्ध के दौरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता पैदा हो गई थी। इजराइल-हिजबुल्ला के बीच फिर बढ़ते संघर्ष ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की संभावनाओं को एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में पहुंचा दिया है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
US President Donald Trump speaks after claiming Iran agreed not to build nuclear weapons and denying reports of a $300 million payment.
Trump on Iran Nuclear Deal: ट्रंप का दावा- ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, 300 मिलियन डॉलर देने की खबर को बताया फेक न्यूज

  वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने पर सहमति दे दी है। इसके साथ ही उन्होंने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका शांति समझौते के तहत ईरान को 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर देने जा रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा, "ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो गया है।" उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान को 300 मिलियन डॉलर दिए जाने की खबर पूरी तरह फर्जी है और इसे डेमोक्रेट्स द्वारा फैलाया जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से फिर शुरू हुई जहाजों की आवाजाही अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है और कई तेल टैंकर सुरक्षित रूप से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों तक चले संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से हुए डिजिटल शांति समझौते के बाद सामने आया है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है और इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को राहत मिलने की उम्मीद है। शुक्रवार को हो सकती है अंतिम डील ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाली बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर औपचारिक रूप से आमने-सामने हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। 'होर्मुज हमेशा के लिए शुल्क मुक्त रहेगा' 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुए समझौते से यह सुनिश्चित होगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य हमेशा के लिए शुल्क मुक्त रहेगा और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की निर्बाध आवाजाही जारी रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गलीबाफ के साथ एक कार्यढांचा समझौते (Framework Agreement) पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर भी किए हैं। वैश्विक बाजार की नजर अंतिम समझौते पर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है, वैश्विक तेल आपूर्ति स्थिर हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊर्जा कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर अभी भी आगे की वार्ताओं की जरूरत बनी हुई है।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Donald Trump speaks on Iran allegations as tensions rise over Indian ships in Strait of Hormuz
ईरान ने भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला किया? ट्रंप का बड़ा दावा, तेहरान ने आरोपों को बताया झूठ

ट्रंप ने ईरान पर लगाया भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की, जिसे विफल कर दिया गया। उन्होंने इस घटना को "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया और ईरान की कड़ी आलोचना की। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि भारतीय जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए चिंताजनक है। ओमान तट के पास हमलों के बाद बढ़ा विवाद ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब इस सप्ताह ओमान तट के पास भारतीय क्रू वाले कई जहाजों पर हमले हुए हैं। इनमें सबसे चर्चित मामला एमटी सेटेबेलो जहाज का रहा, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं को लेकर भारत पहले ही चिंता जता चुका है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर चुका है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नागरिक जहाजों पर हो रहे हमलों को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है। ईरान ने ट्रंप के आरोपों को किया खारिज ट्रंप के आरोपों के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत में ईरानी दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। ईरान का कहना है कि यह आरोप लोगों का ध्यान उन घटनाओं से हटाने की कोशिश है, जिनमें हाल के दिनों में अमेरिकी कार्रवाई के दौरान भारतीय जहाज प्रभावित हुए और भारतीय नागरिकों की जान गई। तेहरान ने कहा कि भारत और ईरान के बीच मजबूत संबंध हैं और भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप तथ्यहीन है। प्रस्तावित शांति समझौते पर भी बढ़ा विवाद इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर भी बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की ओर से सामने आया समझौते का कथित मसौदा वास्तविक सहमति से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा प्रस्तुत जानकारी सच्चाई से दूर है और वार्ता में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व से जल्द स्पष्ट रुख अपनाने की अपील भी की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने दी सफाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी समझौते को लेकर फैल रही अफवाहों का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान को कोई नकद भुगतान नहीं किया जा रहा है और न ही सिर्फ समझौते पर हस्ताक्षर करने के बदले आर्थिक सहायता दी जाएगी। उनके अनुसार, किसी भी आर्थिक राहत को ईरान द्वारा तय शर्तों के पालन से जोड़ा गया है। ईरान बोला- समझौता पहले से ज्यादा करीब वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पहले की तुलना में कहीं ज्यादा करीब पहुंच चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्ष युद्ध समाप्त करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत के लिए क्यों अहम है यह पूरा घटनाक्रम? होर्मुज जलडमरूमध्य Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आने वाले तेल और गैस आयात पर निर्भर करता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव, जहाजों पर हमले और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक खींचतान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर सीधा असर डाल सकती है। इसलिए नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Commercial vessel near Oman coast after attack that killed three Indian crew members.
भारतीय नाविकों की मौत पर ईरान की तीखी प्रतिक्रिया, अमेरिका की कार्रवाई पर उठाए सवाल; भारत ने जताई चिंता

  ओमान के तट के निकट भारतीय चालक दल वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। इस घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जिसके बाद ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। वहीं भारत ने भी घटना की निंदा करते हुए क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की है। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में भारतीय नागरिकों की मौत पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बगाई ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। भारतीय नागरिकों के प्रति जताई संवेदना ईरानी प्रवक्ता ने मृत भारतीय नाविकों के परिवारों, मित्रों, भारतीय जनता और भारत सरकार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की मौत किसी भी परिस्थिति में दुखद है और ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। भारत ने भी की हमले की निंदा भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने ओमान के तट के पास वाणिज्यिक जहाज ‘सेटेबेलो’ पर हुए हमले की निंदा की। मंत्रालय ने बताया कि जहाज पर सवार 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों में से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया था, जबकि तीन भारतीयों के लापता होने की सूचना मिली थी। बाद में खोज एवं बचाव अभियान के दौरान तीनों नाविकों के शव बरामद किए गए। मृत भारतीय नाविकों की पहचान केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने मृतकों की पहचान की पुष्टि करते हुए शोक व्यक्त किया। मृत नाविकों में: हिमाचल प्रदेश के डेक कैडेट आदित्य शर्मा उत्तर प्रदेश के इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया आंध्र प्रदेश के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश शामिल थे। ये सभी पलाऊ के झंडे वाले जहाज एमटी सेटेबेलो के चालक दल का हिस्सा थे। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर भारत की चिंता विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। मंत्रालय के अनुसार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। भारत ने कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष और अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। कूटनीतिक समाधान पर जोर भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील दोहराई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। बयान में कहा गया कि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए जारी कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Indian sailors affected amid rising maritime tensions in Hormuz Strait and Gulf of Oman.
होर्मुज क्षेत्र में जहाजों पर हमलों के बाद भारत की चिंता बढ़ी, तीन भारतीयों की मौत पर अमेरिका से उठाया नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा

  नई दिल्ली: होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी में बढ़ते समुद्री एवं सैन्य तनाव के बीच जहाजों पर हुई हालिया घटनाओं में तीन भारतीय नागरिकों की मौत की खबर सामने आई है। इसके बाद भारत सरकार ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में कुछ विदेशी ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हुई सैन्य कार्रवाइयों के दौरान भारतीय नागरिक प्रभावित हुए हैं। भारत ने इस मुद्दे को अमेरिका के सामने उठाते हुए क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि संबंधित घटना के बाद अमेरिकी अधिकारियों को भारत की चिंताओं से अवगत कराया गया और क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया। भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्बाध और सुरक्षित आवागमन वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रभावित जहाजों में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक अधिकारियों के अनुसार, हालिया घटनाओं में शामिल जहाज विदेशी ध्वज वाले थे, लेकिन उनमें भारतीय चालक दल के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद थे। कुछ जहाजों से चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि कुछ मामलों में भारतीय नागरिकों की मौत की सूचना मिली है। सरकार ने कहा है कि वह प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है। मृतकों के परिवारों को सहायता बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि मृत भारतीय नाविकों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। हालिया घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारत ने दोहराया है कि वह पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्गों के पक्ष में है तथा अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाता रहेगा।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Maritime security teams monitor vessel activity near Oman’s Shinas Port amid regional tensions.
ओमान के शिनास बंदरगाह के पास जहाज से जुड़ी नई घटना, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर

  Muscat: ओमान के तट पर जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बीच गुरुवार को एक और समुद्री सुरक्षा घटना सामने आई है। शिनास बंदरगाह के पास एक जहाज से जुड़ी घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। मामले की निगरानी लगातार की जा रही है और स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है। भारतीय दूतावास ने दी जानकारी मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि 11 जून को शिनास बंदरगाह के निकट एक जहाज से जुड़ी घटना की सूचना प्राप्त हुई है। दूतावास ने कहा कि वह स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। दूतावास के अनुसार, स्थिति का आकलन किया जा रहा है और आवश्यक जानकारी जुटाने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय जारी है। 24 घंटे के भीतर दूसरी समुद्री घटना यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब ओमान के तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले को 24 घंटे भी नहीं हुए हैं। हाल के दिनों में क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं और समुद्री मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर समुद्री यातायात पर भी दिखाई दे रहा है, जिसके कारण क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में भारतीय मिशन भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वह मामले से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर नजर रख रहा है और स्थानीय प्रशासन से लगातार जानकारी प्राप्त कर रहा है। फिलहाल घटना की प्रकृति और उससे हुए संभावित नुकसान को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता लगातार सामने आ रही घटनाओं ने ओमान और खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां हालात पर बारीकी से नजर रख रही हैं, जबकि क्षेत्र में जहाजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
Military tension escalates in the Gulf region as reports emerge of US strikes and Iranian actions near the Strait of Hormuz.
अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने का किया ऐलान

  वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की सख्त चेतावनी के कुछ घंटों बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की। हमलों के बाद दक्षिणी ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं, जबकि तेहरान ने जवाबी कदम उठाते हुए होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा कर दी है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सिरिक, मिनाब, बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप और गोर्गान समेत कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। हालात की गंभीरता को देखते हुए ईरान ने कई संवेदनशील क्षेत्रों में अपने एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए हैं और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ट्रंप प्रशासन की चेतावनी के बाद हुई कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पहले ही संकेत दिया था कि यदि ईरान अपने रवैये में बदलाव नहीं करता, तो उसके महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। अमेरिकी हमले उसी चेतावनी के बाद किए गए, जिससे दोनों देशों के बीच टकराव और गहरा गया है। ईरान ने बंद किया होर्मुज स्ट्रेट अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के संयुक्त सैन्य कमान ने गुरुवार को घोषणा की कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को तत्काल प्रभाव से बंद किया जा रहा है। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अब इस समुद्री मार्ग से किसी भी तेल टैंकर या व्यावसायिक जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान ने चेतावनी दी कि प्रतिबंध के बावजूद इस मार्ग का इस्तेमाल करने की कोशिश करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। घोषणा के कुछ समय बाद ईरानी मीडिया ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने का प्रयास कर रहे दो जहाजों को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने रोक दिया। अमेरिका ने किया ईरानी दावों का खंडन अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात जारी है और अंतरराष्ट्रीय नौवहन गतिविधियों पर फिलहाल कोई व्यापक असर नहीं पड़ा है। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव लगातार बढ़ता है, तो इसका सीधा प्रभाव वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से आक्रामक बयानबाजी जारी है और क्षेत्रीय हालात पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
Military activity near the Strait of Hormuz amid escalating US-Iran tensions and reported retaliatory strikes.
अपाचे हेलीकॉप्टर घटना के बाद अमेरिका का ईरान पर हमला, तेहरान ने दी कड़ी चेतावनी

  वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा यह दावा किए जाने के बाद कि ईरान ने अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को निशाना बनाया, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। वहीं ईरान ने भी अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का उचित जवाब दिया जाएगा। दक्षिणी ईरान में कई स्थानों पर हमले अमेरिकी कार्रवाई के बाद दक्षिणी ईरान के विभिन्न इलाकों से विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मोजगान प्रांत, बंदर अब्बास, सीरिक क्षेत्र और केश्म द्वीप के आसपास कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ हमले रणनीतिक सैन्य ठिकानों और निगरानी प्रणालियों को निशाना बनाकर किए गए। बताया जा रहा है कि कार्रवाई में लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। हेलीकॉप्टर हादसे के बाद बढ़ा तनाव पूरा घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर गश्त के दौरान एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर पर हमला किया गया। अमेरिका का आरोप है कि हेलीकॉप्टर को एक ईरानी ड्रोन ने निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हेलीकॉप्टर में सवार दोनों पायलट सुरक्षित हैं और उन्हें सफलतापूर्वक बचा लिया गया। उन्होंने संकेत दिया था कि अमेरिका इस घटना का जवाब देगा। एयर डिफेंस सिस्टम बने निशाना अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में ईरान के कई एयर डिफेंस सिस्टम, रडार प्रतिष्ठानों और निगरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस अभियान को "आत्मरक्षा में उठाया गया कदम" बताया है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्य बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई। ईरान ने दी सख्त प्रतिक्रिया ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी हमलों के बाद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी सैन्य दबाव या धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है और देश की सशस्त्र सेनाएं हर चुनौती का जवाब देने के लिए तैयार हैं। अराघची ने विदेशी सैन्य बलों को क्षेत्र छोड़ने की सलाह देते हुए कहा कि बाहरी हस्तक्षेप क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाता है और इससे गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पहले भी दिया था जवाबी कार्रवाई का संकेत ईरानी मीडिया ने हमलों से पहले सैन्य सूत्रों के हवाले से कहा था कि यदि हेलीकॉप्टर घटना को आधार बनाकर ईरान के खिलाफ कोई नई सैन्य कार्रवाई की गई तो उसका "निर्णायक जवाब" दिया जाएगा। ईरान ने अमेरिकी आरोपों को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है और हेलीकॉप्टर गिराने के दावे पर भी स्पष्ट टिप्पणी से परहेज किया है। वैश्विक बाजारों की बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका प्रभाव पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Stock market traders monitor falling Sensex and Nifty amid rising Middle East geopolitical tensions
Share Market Fall: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से शेयर बाजार धड़ाम, निवेशकों के ₹5 लाख करोड़ स्वाहा, सेंसेक्स 800 अंक टूटा

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को वैश्विक और भारतीय शेयर बाजारों पर साफ दिखाई दिया। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 800 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी 250 अंकों से ज्यादा फिसल गया। सुबह करीब 9:20 बजे सेंसेक्स 784.77 अंक यानी 1.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,458.57 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 234.80 अंक यानी 1 प्रतिशत गिरकर 23,131.90 अंक पर पहुंच गया। निवेशकों को ₹5 लाख करोड़ का झटका बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में बड़ा नुकसान हुआ है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर लगभग 456 लाख करोड़ रुपये रह गया। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों की करीब 5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई। सेंसेक्स के 30 में से 28 शेयर लाल निशान में सेंसेक्स के अधिकांश शेयर दबाव में रहे। सबसे ज्यादा गिरावट एयरलाइन कंपनी इंडिगो के शेयर में दर्ज की गई। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, टीसीएस, बीईएल और लार्सन एंड टुब्रो जैसे दिग्गज शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि टेक महिंद्रा और सन फार्मा के शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए, जिससे बाजार को सीमित सहारा मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी भारी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 1.51 प्रतिशत की गिरावट निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में 1.52 प्रतिशत की गिरावट सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो रियल्टी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी रही। दूसरी ओर फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र के शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट भारतीय बाजार के साथ-साथ एशियाई शेयर बाजारों में भी हड़कंप देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का बाजार 9 प्रतिशत से अधिक गिर गया, जिसके बाद कुछ समय के लिए कारोबार रोकना पड़ा। जापान का निक्केई सूचकांक लगभग 5 प्रतिशत लुढ़क गया। हांगकांग का हैंग सेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट भी 1 प्रतिशत से अधिक टूट गए। क्यों टूटा शेयर बाजार? बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव है। ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइल हमले के बाद क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने की आशंका गहरा गई है। इससे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति प्रयासों को भी झटका लगा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड करीब 3.37 प्रतिशत बढ़कर 96.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इंडियन बास्केट का मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। तेल की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।  

surbhi जून 8, 2026 0
US military operations near the Strait of Hormuz amid rising tensions with Iran.
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बढ़ा तनाव: ड्रोन गिराने का अमेरिकी दावा, ईरान के रडार ठिकानों पर जवाबी हमला

  मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास शनिवार को अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से भेजे गए कई ड्रोन को मार गिराया, जिसके बाद ईरानी तटीय निगरानी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की गई। होर्मुज की ओर बढ़ रहे थे ड्रोन: अमेरिकी सेना अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, कम से कम चार एकतरफा हमलावर ड्रोन होर्मुज जलडमरूमध्य की दिशा में बढ़ रहे थे। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ये ड्रोन क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य संसाधनों या अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बन सकते थे। सेंटकॉम ने कहा कि समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ड्रोन को नष्ट करना आवश्यक था। ड्रोन हमले के बाद रडार ठिकानों पर कार्रवाई अमेरिकी सेना के मुताबिक, ड्रोन को निष्क्रिय करने के बाद ईरान के गोरुक और क़ेश्म द्वीप स्थित तटीय निगरानी रडार केंद्रों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी पक्ष ने इसे आत्मरक्षा और समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया कदम बताया है। सेंटकॉम ने कहा कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बल किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ईरान ने चेतावनी फायरिंग का दावा किया दूसरी ओर, ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने दावा किया कि ईरानी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट समुद्री क्षेत्र में चेतावनी स्वरूप गोलियां चलाईं। रिपोर्ट के अनुसार यह गतिविधि लारक द्वीप के आसपास हुई, जो बंदर अब्बास बंदरगाह के निकट स्थित है। हईरान की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। संघर्ष विराम के बावजूद जारी है तनाव हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम और कूटनीतिक वार्ताओं की कोशिशें हुई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव कम होता नहीं दिख रहा। वॉशिंगटन और तेहरान लगातार एक-दूसरे पर समझौतों के उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी घटनाएं क्षेत्रीय स्थिरता और चल रही वार्ताओं को प्रभावित कर सकती हैं। वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम है होर्मुज होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों, तेल की कीमतों और वैश्विक शिपिंग सेक्टर पर पड़ सकता है। ट्रंप का दावा- ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हालिया अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान के कई ड्रोन निर्माण केंद्र, लॉन्चिंग सुविधाएं और मिसाइल उत्पादन से जुड़े अहम ठिकाने नष्ट कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान के पास अब भी कुछ मिसाइल और ड्रोन क्षमता मौजूद है। वार्ता जारी, लेकिन मतभेद बरकरार तनाव के बीच दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। ईरान का कहना है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अब भी गतिरोध बना हुआ है। तेहरान ने अमेरिका पर अपने कुछ वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया है, जिनमें ईरान की जमी हुई विदेशी संपत्तियों को मुक्त कराने की मांग भी शामिल है। फिलहाल दोनों देशों के बीच किसी व्यापक समझौते की संभावना पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
Donald Trump and Benjamin Netanyahu amid rising tensions over Israel's military operations in Lebanon
नेतन्याहू पर भड़के ट्रंप, लेबनान हमलों को लेकर फोन पर जताई नाराजगी

  अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर तीखी बातचीत हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल के बढ़ते हमलों पर नाराजगी जताते हुए नेतन्याहू से सीधे सवाल किए। माना जा रहा है कि इस मुद्दे ने वॉशिंगटन और तेल अवीव के बीच उभरते मतभेदों को भी सामने ला दिया है। लेबनान में बढ़े हमलों से बढ़ी क्षेत्रीय तनाव की आशंका रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल ने हाल के दिनों में लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाकों में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। इसके साथ ही दक्षिणी लेबनान में जमीनी सैन्य अभियान भी आगे बढ़ाया गया है। इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका को चिंता है कि क्षेत्र में बढ़ता तनाव ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक वार्ताओं को प्रभावित कर सकता है। वहीं, ईरान ने भी चेतावनी दी है कि ऐसी सैन्य कार्रवाइयां शांति प्रयासों को कमजोर कर सकती हैं। रिपोर्ट में ट्रंप की कड़ी प्रतिक्रिया का दावा डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म Axios की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू के फैसलों को लेकर तीखी नाराजगी जताई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप का मानना है कि इजराइल की मौजूदा रणनीति उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर सकती है और अमेरिका की कूटनीतिक कोशिशों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि बातचीत के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू के रवैये पर बेहद कठोर टिप्पणी की और कहा कि उनके कदमों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। “आखिर आप कर क्या रहे हैं?”: रिपोर्ट एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि फोन वार्ता के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू से नाराजगी भरे लहजे में पूछा, “आखिर आप कर क्या रहे हैं?” रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना था कि लगातार सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय हालात को और जटिल बना सकती है। इन दावों पर व्हाइट हाउस या इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बेरूत में हमलों के बाद बढ़ी लोगों की चिंता सोमवार को नेतन्याहू और इजराइल के रक्षा मंत्री ने बेरूत के दहियेह इलाके में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर कार्रवाई का आदेश दिया। इजराइल का आरोप है कि हिजबुल्लाह युद्धविराम समझौते का उल्लंघन कर रहा है और उसके क्षेत्र पर हमले कर रहा है। हमलों की खबर के बाद बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में दहशत का माहौल बन गया। संभावित हवाई हमलों की आशंका के बीच कई लोगों ने सुरक्षित स्थानों की ओर रुख किया। ईरान ने दी नई चेतावनी Iran ने कहा है कि लेबनान में जारी इजराइली सैन्य अभियान अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं को प्रभावित कर सकता है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए लेबनान में युद्धविराम बनाए रखना आवश्यक है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि लेबनान मोर्चे पर तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर न केवल इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष पर पड़ेगा, बल्कि अमेरिका-ईरान संबंधों और पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता पर भी दिखाई दे सकता है।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
Satellite imagery shows activity at Iran’s underground missile facilities after reported restoration efforts
ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकाने फिर सक्रिय! रिपोर्ट का दावा- 69 में से 50 सुरंगें खुलीं

अमेरिका और इजरायल के लगातार सैन्य हमलों के बावजूद ईरान की मिसाइल क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में दावा किया गया है कि ईरान ने अपने अधिकांश भूमिगत मिसाइल अड्डों तक पहुंच बहाल कर ली है और युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त हुई कई सुरंगों के प्रवेश द्वार दोबारा खोल दिए हैं। 69 में से 50 सुरंगों के रास्ते फिर खुले रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष के दौरान 18 भूमिगत मिसाइल ठिकानों पर हुए हमलों में कुल 69 सुरंग प्रवेश मार्ग प्रभावित हुए थे। इनमें से 50 प्रवेश द्वारों को ईरान ने साफ कर फिर से चालू कर दिया है। सैटेलाइट तस्वीरों में बुलडोजर, लोडर और डंप ट्रक जैसे भारी उपकरण मलबा हटाते और क्षतिग्रस्त रास्तों को बहाल करते दिखाई दिए हैं। हमलों के बाद शुरू हुआ मरम्मत अभियान अमेरिका और इजरायल ने हमलों के दौरान मिसाइल ठिकानों के प्रवेश मार्ग, लॉन्चिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और संपर्क सड़कों को मुख्य निशाना बनाया था। कई सुरंगों के मुहाने मलबे से बंद हो गए थे और पहुंच मार्गों पर बड़े गड्ढे बन गए थे। युद्धविराम लागू होने के बाद ईरान ने इन इलाकों में तेजी से मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। मिसाइल भंडार अब भी सुरक्षित होने का अनुमान विश्लेषकों का मानना है कि सुरंगों के प्रवेश द्वारों को नुकसान पहुंचाना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन पहाड़ों और चट्टानों की गहराई में छिपाए गए मिसाइल भंडार को पूरी तरह नष्ट करना कहीं अधिक मुश्किल है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमलों के बावजूद ईरान की बड़ी संख्या में मिसाइलें सुरक्षित बची हो सकती हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान के पास अब भी लगभग 1,000 मिसाइलें भूमिगत सुविधाओं में मौजूद हो सकती हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी तेजी से बहाली युद्धविराम के बाद ली गई नई तस्वीरों में कई मिसाइल अड्डों पर बड़े पैमाने पर मरम्मत कार्य दिखाई दिया है। इस्फहान के पास स्थित एक मिसाइल स्थल पर डंप ट्रकों और निर्माण मशीनों को क्षतिग्रस्त रास्तों की मरम्मत करते देखा गया। खोमेन क्षेत्र की एक अन्य सुविधा में कम से कम 10 निर्माण वाहन एक साथ काम करते नजर आए, जहां बंद हो चुके सुरंग मार्गों को फिर से खोला जा रहा था। विश्लेषकों का कहना है कि मरम्मत की यह गति दिखाती है कि साधारण निर्माण संसाधनों के जरिए भी सैन्य हमलों के असर को अपेक्षाकृत कम समय में काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने क्या कहा? जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉनप्रोलिफरेशन स्टडीज के रिसर्च एसोसिएट सैम लेयर के अनुसार, जब तक ईरान के पास मिसाइल लॉन्चर और प्रशिक्षित ऑपरेटर मौजूद हैं, तब तक उसकी मिसाइल क्षमता को पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि मौजूदा मिसाइल भंडार को लॉन्चरों से जोड़ने में कोई बड़ी तकनीकी बाधा नहीं है, इसलिए ईरान अभी भी जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता रखता है। मिसाइल कार्यक्रम रहा हमलों का मुख्य लक्ष्य अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष के दौरान कई बार कहा था कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को कमजोर करना अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। अमेरिका और इजरायल ने केवल मिसाइल अड्डों को ही नहीं, बल्कि मिसाइल निर्माण से जुड़े कारखानों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण केंद्रों और रॉकेट ईंधन सुविधाओं को भी निशाना बनाया था। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों और विशेषज्ञों के आकलन से संकेत मिल रहे हैं कि ईरान अपनी सैन्य संरचना और मिसाइल नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्सों को दोबारा सक्रिय करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। युद्ध खत्म नहीं, तनाव बरकरार अमेरिका और ईरान के बीच अब तक कोई औपचारिक शांति समझौता नहीं हुआ है। 28 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष चौथे महीने में प्रवेश कर चुका है। ऐसे में ईरान की भूमिगत मिसाइल क्षमताओं की बहाली की खबरें क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की रणनीतिक स्थिति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर रही हैं।  

surbhi जून 1, 2026 0
British and French naval forces prepare mine-clearing operations near the Strait of Hormuz amid Iran deal talks.
होर्मुज से माइंस हटाने की तैयारी में ब्रिटेन-फ्रांस, ईरान डील पर टिकी नजर

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अब होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा सुरक्षित और सामान्य बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की चर्चाओं के बीच ब्रिटेन और फ्रांस ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर वे होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने में सहयोग करेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटिश रॉयल नेवी ने जिब्राल्टर में तैनात अपने युद्धपोत RFA Lyme Bay को इस मिशन के लिए तैयार रखा है। इस जहाज पर ब्रिटेन और फ्रांस के सैनिक मौजूद हैं। साथ ही माइंस को निष्क्रिय करने वाले विशेष समुद्री ड्रोन और सैन्य उपकरण भी तैनात किए गए हैं। शांति समझौते के बाद शुरू हो सकता है ऑपरेशन ब्रिटेन ने साफ किया है कि वह सीधे ईरान युद्ध में शामिल नहीं होगा। हालांकि, यदि अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक समझौता हो जाता है और हालात सामान्य होते हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य से माइंस हटाने का अभियान शुरू किया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान के साथ समझौते को लेकर “व्यापक सहमति” बन चुकी है, हालांकि अंतिम रूप अभी बाकी है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हालिया तनाव के दौरान यहां बड़ी संख्या में समुद्री माइंस बिछाई थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने जहाजों को केवल निर्धारित रूट से गुजरने के निर्देश भी दिए थे। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है। ट्रंप ने NATO देशों की आलोचना की थी ईरान के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिका चाहता था कि NATO सहयोगी देश होर्मुज को सुरक्षित बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। लेकिन कई यूरोपीय देशों ने साफ कर दिया था कि वे सीधे युद्ध का हिस्सा नहीं बनेंगे। ब्रिटेन और फ्रांस ने अब संकेत दिया है कि शांति बहाल होने के बाद वे माइंस हटाने और समुद्री मार्ग को सामान्य बनाने में मदद करेंगे। ब्रिटिश रक्षा मंत्री ने किया युद्धपोत का दौरा ब्रिटेन के रक्षा मंत्री John Healey (कुछ रिपोर्टों में रक्षा अधिकारियों का हवाला) ने जिब्राल्टर में मौजूद RFA Lyme Bay का दौरा किया। यह एक amphibious warship है, जिसे समुद्री सुरक्षा और माइंस हटाने के विशेष अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ईरान ने इजरायली ड्रोन गिराने का दावा किया इस बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुजगान प्रांत के ऊपर उड़ रहे एक इजरायली टोही ड्रोन को मार गिराया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, नौसेना ने ड्रोन का मलबा भी बरामद कर लिया है। इजरायल की ओर से इस दावे पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

surbhi मई 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जून 30, 2026 0