US-Iran Conflict: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए जाने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। अमेरिका ने 90 ठिकानों को बनाया निशाना अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, हालिया सैन्य अभियान में ईरान के लगभग 90 सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्च साइट, सैन्य ठिकाने और अन्य रणनीतिक ठिकानों पर कार्रवाई की गई। अमेरिका का कहना है कि यह अभियान क्षेत्र में अमेरिकी हितों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया गया। ईरान का पलटवार, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमला अमेरिकी हमलों के कुछ ही समय बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, मिसाइलों और ड्रोन के जरिए कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान के अनुसार, जिन प्रमुख ठिकानों पर हमला किया गया उनमें शामिल हैं: कुवैत का कैंप आरिफजान अली अल सलेम एयर बेस बहरीन का जुफफायर सैन्य ठिकाना शेख ईसा एयर बेस हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान और हताहतों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। IRGC की अमेरिका को कड़ी चेतावनी आईआरजीसी ने बयान जारी कर अमेरिका पर समझौते तोड़ने और आक्रामक कार्रवाई करने का आरोप लगाया। संगठन ने कहा कि यदि अमेरिका ने आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रखी तो जवाब और अधिक व्यापक होगा। आईआरजीसी ने कहा कि अगली कार्रवाई में क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। ईरानी संसद अध्यक्ष का बयान ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने भी अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि दादागिरी और वादाखिलाफी की अब भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका हमला करेगा तो ईरान उसका जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। अमेरिका ने जारी किया अभियान का वीडियो अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अभियान के कुछ ब्लैक एंड व्हाइट वीडियो भी जारी किए हैं। इन वीडियो में ईरान के सैन्य ठिकानों, रनवे और मिसाइल लॉन्चरों पर सटीक हमले दिखाए गए हैं। CENTCOM ने कहा कि फिलहाल हवाई हमलों का यह चरण पूरा हो चुका है, लेकिन अमेरिकी सेना पूरी तरह हाई अलर्ट पर है और राष्ट्रपति के अगले निर्देश मिलते ही किसी भी नए अभियान के लिए तैयार है। पूरे पश्चिम एशिया में बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की है।
US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। लगातार दो दिनों से दोनों देशों के बीच जवाबी हमले जारी हैं। इस बीच अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान ने आशंका बढ़ा दी है कि यह संघर्ष कुछ दिनों नहीं, बल्कि महीनों तक चल सकता है। अधिकारी ने संकेत दिया कि आगे की कार्रवाई काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले जारी रखता है या नहीं। अमेरिकी अधिकारी का दावा- संघर्ष लंबा खिंच सकता है अमेरिकी समाचार वेबसाइट Axios की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि मौजूदा सैन्य अभियान एक-दो दिन, एक सप्ताह या कई महीनों तक चल सकता है। अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका का उद्देश्य ईरान को यह संदेश देना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि ईरान अपनी आक्रामक गतिविधियां जारी रखता है, तो अमेरिकी कार्रवाई भी जारी रहेगी। ट्रंप बोले- हर हमले का मिलेगा कई गुना जवाब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच लागू अंतरिम युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। उनका दावा है कि ईरान के हमलों के बाद अमेरिका अब सख्त सैन्य नीति अपनाएगा। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान अमेरिका पर एक हमला करेगा तो जवाब में उससे कई गुना बड़ी कार्रवाई की जाएगी। अमेरिका ने 90 ठिकानों पर की कार्रवाई अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरी रात ईरान के लगभग 90 ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समुद्री मार्ग को खुला रखना है। बताया गया कि इस अभियान में ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान का पलटवार अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। ईरान ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा और किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब देता रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव की सबसे बड़ी वजह दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बन गया है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल निर्यात इसी समुद्री मार्ग से होता है। ऐसे में यहां जारी सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर भी पड़ सकता है.
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में एक नया विवाद चर्चा का विषय बन गया है। गीतकार और लेखक अखिलेश कश्यप का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अभिनेत्री अंजना सिंह को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव के करीबी माने जाने वाले अखिलेश कश्यप के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है। 'अगर पोल खोल दी तो काफी चर्चा हो जाएगी' अखिलेश कश्यप ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दो वीडियो साझा किए हैं। पहले वीडियो में उन्होंने बिना किसी का नाम लिए नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कुछ लोग लगातार उनसे जवाब देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं होता। इसके बाद दूसरे वीडियो में उन्होंने कहा कि, "अगर मैंने पोल खोल दी तो फ्री में ही काफी चर्चा हो जाएगी।" साथ ही उन्होंने लखनऊ आने का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कुछ दिखाने की बात भी कही। हालांकि, इन बयानों में उन्होंने किसी आरोप के समर्थन में कोई सबूत सार्वजनिक नहीं किया है और न ही विवाद के पूरे कारण का खुलासा किया है। सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चाएं अखिलेश कश्यप के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स उनके बयान पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग पूरे मामले की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल इस मामले पर अभिनेत्री अंजना सिंह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कौन हैं अंजना सिंह? अंजना सिंह भोजपुरी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। उन्होंने कम उम्र में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की और शुरुआती वर्षों में ही कई फिल्मों में अभिनय कर अपनी पहचान बना ली। उन्होंने अपने करियर में दिनेश लाल यादव 'निरहुआ', पवन सिंह, रवि किशन समेत भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े सितारों के साथ काम किया है। उनकी चर्चित फिल्मों में दिल ले गई ओढ़नियावाली, दिलदार सांवरिया, बिहारी रिक्शावाला, सांकी दरोगा, नागराज और खून भरी हमार मांग जैसी फिल्में शामिल हैं। निजी जीवन भी रहा चर्चा में अंजना सिंह ने वर्ष 2013 में अभिनेता यश कुमार मिश्रा से विवाह किया था। बाद में दोनों ने वर्ष 2018 में आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया। दोनों की एक बेटी भी है। फिलहाल अखिलेश कश्यप के वायरल वीडियो और अंजना सिंह को लेकर दिए गए बयान चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालांकि, पूरे विवाद को लेकर दोनों पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।
पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, United States और Israel ने Iran के प्रमुख शहर Isfahan में एक बड़े हथियार गोदाम को निशाना बनाते हुए कथित तौर पर संयुक्त हमला किया है। इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें भीषण विस्फोट और आसमान में नारंगी रोशनी दिखाई देती है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ‘बंकर-बस्टर बम’ के इस्तेमाल का दावा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में 2000 पाउंड के ‘बंकर-बस्टर बम’ का इस्तेमाल किया गया। ये ऐसे विशेष बम होते हैं, जो जमीन के अंदर बने मजबूत ठिकानों, जैसे बंकर, सुरंग या हथियार भंडार, को नष्ट करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। इन बमों की खासियत यह होती है कि ये पहले जमीन या कंक्रीट को भेदते हैं और फिर अंदर जाकर विस्फोट करते हैं, जिससे अंदर मौजूद संरचनाओं को भारी नुकसान होता है। इस्फहान क्यों है अहम? इस्फहान ईरान का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और सैन्य केंद्र है, जहां कई रणनीतिक ठिकाने मौजूद हैं। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि यहां भूमिगत ठिकानों में संवर्धित यूरेनियम का भंडार हो सकता है, जो इसे और अधिक संवेदनशील बनाता है। हालांकि, इस हमले के बाद हुए नुकसान को लेकर ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बढ़ता तनाव और वैश्विक असर यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। हाल के दिनों में बार-बार चेतावनियां और सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं, जिससे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।