भारतीय स्मार्टफोन बाजार में मोटोरोला और वीवो के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है। ₹45,000 से ₹50,000 के प्रीमियम सेगमेंट में अब Motorola Edge 70 Pro+ और Vivo V70 एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। दोनों स्मार्टफोन बड़ी बैटरी, 90W फास्ट चार्जिंग और 50MP कैमरा जैसे आकर्षक फीचर्स के साथ आते हैं। हालांकि, दोनों की खूबियां अलग-अलग हैं। अगर आप इस बजट में नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि कौन सा फोन आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। डिस्प्ले और डिजाइन: Motorola का बड़ा फायदा Motorola Edge 70 Pro+ में 6.8 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट और 5,200 निट्स की पीक ब्राइटनेस के साथ आता है। दूसरी तरफ Vivo V70 में 6.59 इंच का AMOLED पैनल मिलता है, जिसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और 5,000 निट्स ब्राइटनेस दी गई है। अगर आप गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और आउटडोर विजिबिलिटी को महत्व देते हैं, तो Motorola का डिस्प्ले ज्यादा प्रभावशाली साबित हो सकता है। वहीं, Vivo V70 का कॉम्पैक्ट डिजाइन उन यूजर्स को पसंद आएगा जो हल्का और आसानी से पकड़ में आने वाला फोन चाहते हैं। कैमरा: ZEISS बनाम पेरिस्कोप जूम Motorola Edge 70 Pro+ में 50MP Sony LYT-710 प्राइमरी कैमरा के साथ 50MP पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस मिलता है, जो 3.5x ऑप्टिकल जूम और 50x डिजिटल जूम सपोर्ट करता है। इसके अलावा सभी कैमरों से 4K 60fps वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। वहीं, Vivo V70 में ZEISS ट्यूनिंग वाला 50MP कैमरा सिस्टम दिया गया है, जो प्राकृतिक रंगों और शानदार पोर्ट्रेट फोटोग्राफी के लिए जाना जाता है। जूम फोटोग्राफी पसंद है? Motorola बेहतर विकल्प। पोर्ट्रेट और कलर साइंस महत्वपूर्ण है? Vivo V70 मजबूत दावेदार। परफॉर्मेंस और गेमिंग: Motorola को बढ़त Motorola Edge 70 Pro+ में MediaTek Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर और बड़ा वेपर कूलिंग सिस्टम दिया गया है, जिससे हैवी गेमिंग और मल्टीटास्किंग के दौरान बेहतर प्रदर्शन मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर Vivo V70 में Snapdragon 7 Gen 4 चिपसेट मिलता है, जो सामान्य उपयोग और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पर्याप्त है। रॉ परफॉर्मेंस के मामले में Motorola Edge 70 Pro+ थोड़ा आगे दिखाई देता है। बैटरी और चार्जिंग दोनों स्मार्टफोन में: 6,500mAh बैटरी 90W फास्ट चार्जिंग की सुविधा मिलती है। हालांकि Motorola Edge 70 Pro+ में अतिरिक्त 15W वायरलेस चार्जिंग भी दी गई है, जो इसे एक अतिरिक्त बढ़त देती है। सॉफ्टवेयर अपडेट: Vivo का फायदा Vivo V70: 4 बड़े Android अपडेट Motorola Edge 70 Pro+: 3 बड़े Android अपडेट अगर आप फोन को लंबे समय तक इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो Vivo V70 का लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट आपके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है। कौन सा फोन खरीदना चाहिए? Motorola Edge 70 Pro+ चुनें अगर: आपको बेहतर डिस्प्ले चाहिए हैवी गेमिंग करते हैं वायरलेस चार्जिंग चाहते हैं जूम कैमरा आपके लिए महत्वपूर्ण है Vivo V70 चुनें अगर: ZEISS कैमरा एक्सपीरियंस पसंद है बेहतर पोर्ट्रेट फोटोग्राफी चाहते हैं लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट प्राथमिकता है कॉम्पैक्ट डिजाइन पसंद करते हैं
स्मार्टफोन निर्माता Motorola जल्द ही भारतीय बाजार में अपना नया प्रीमियम स्मार्टफोन Motorola Edge 70 Pro+ लॉन्च करने जा रहा है। कंपनी 4 जून को इस डिवाइस को पेश करेगी और लॉन्च से पहले इसके कई प्रमुख फीचर्स सामने आ चुके हैं। Motorola Edge 70 Pro+ को Edge 70 सीरीज का सबसे प्रीमियम मॉडल माना जा रहा है। फोन में शानदार कैमरा सिस्टम, बड़ी बैटरी, दमदार प्रोसेसर और प्रीमियम डिजाइन मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि कंपनी इस बार कैमरा क्वालिटी और AI फीचर्स पर विशेष फोकस कर रही है। प्रीमियम डिजाइन और यूनिक फिनिश Motorola Edge 70 Pro+ को अलग-अलग टेक्सचर फिनिश के साथ लॉन्च किया जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार यह स्मार्टफोन Pantone Chicory Coffee, Pantone Stormy Sea और Pantone Zinfandel कलर ऑप्शन में उपलब्ध होगा। Chicory Coffee वेरिएंट में वुडन-स्टाइल बैक पैनल मिलेगा, जबकि अन्य वेरिएंट्स में फैब्रिक और सैटिन फिनिश देखने को मिल सकती है। फोन के फ्रेम पर एक अतिरिक्त बटन भी दिया गया है, जिसे AI फीचर्स, कैमरा कंट्रोल या कस्टम शॉर्टकट के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। सुरक्षा के लिहाज से फोन में IP68 और IP69 रेटिंग मिलेगी, जिससे यह धूल और पानी से सुरक्षित रहेगा। इसके अलावा MIL-STD-810H मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी और Gorilla Glass 7i प्रोटेक्शन भी दिया जाएगा। 50MP ट्रिपल कैमरा सेटअप होगा खास आकर्षण Motorola Edge 70 Pro+ का सबसे बड़ा आकर्षण इसका कैमरा सिस्टम माना जा रहा है। फोन में मिलेगा: 50MP Sony LYT-710 प्राइमरी कैमरा (OIS सपोर्ट के साथ) 50MP अल्ट्रावाइड कैमरा 50MP पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा पेरिस्कोप कैमरा 3.5x ऑप्टिकल जूम सपोर्ट करेगा। वहीं AI आधारित 50x सुपर जूम फीचर भी दिया जाएगा, जिससे दूर स्थित ऑब्जेक्ट्स की तस्वीरें बेहतर तरीके से कैप्चर की जा सकेंगी। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 50MP ऑटोफोकस फ्रंट कैमरा मिलेगा। वीडियो रिकॉर्डिंग 4K HDR10+ 60fps तक सपोर्ट कर सकती है। डिस्प्ले और परफॉर्मेंस में भी दम फोन में 6.8 इंच का बड़ा AMOLED डिस्प्ले दिया जा सकता है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करेगा। मुख्य डिस्प्ले फीचर्स: 6.8 इंच AMOLED स्क्रीन 144Hz रिफ्रेश रेट 5200 निट्स पीक ब्राइटनेस Gorilla Glass 7i प्रोटेक्शन परफॉर्मेंस के लिए डिवाइस में MediaTek Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर मिलने की उम्मीद है। बेहतर थर्मल मैनेजमेंट के लिए वेपर कूलिंग चेंबर भी दिया जाएगा। संभावित मेमोरी विकल्प: 12GB RAM 256GB स्टोरेज 6500mAh बैटरी के साथ फास्ट चार्जिंग Motorola Edge 70 Pro+ में 6500mAh की बड़ी सिलिकॉन-कार्बन बैटरी मिलने की चर्चा है। चार्जिंग फीचर्स: 90W फास्ट चार्जिंग 15W वायरलेस चार्जिंग रिवर्स चार्जिंग सपोर्ट इतनी बड़ी बैटरी के साथ यह फोन लंबे समय तक इस्तेमाल और हैवी मल्टीटास्किंग के लिए उपयुक्त साबित हो सकता है। संभावित कीमत हालांकि कंपनी ने अभी आधिकारिक कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक Motorola Edge 70 Pro+ की कीमत 50,000 रुपये से कम रखी जा सकती है। इस सेगमेंट में इसका मुकाबला संभावित रूप से निम्न स्मार्टफोन्स से हो सकता है: OnePlus 15R Realme 16 Pro+ iQOO 15R अगर Motorola इन फीचर्स को आक्रामक कीमत पर लॉन्च करता है, तो यह प्रीमियम मिड-रेंज स्मार्टफोन बाजार में मजबूत चुनौती पेश कर सकता है।
स्मार्टफोन बाजार में एक बार फिर हलचल मचाते हुए Motorola ने अपनी G-सीरीज के तहत दो नए स्मार्टफोन Moto G37 और Moto G37 Power को लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इन डिवाइस को खासतौर पर उन यूजर्स को ध्यान में रखकर पेश किया है, जो लंबी बैटरी लाइफ और स्थिर परफॉर्मेंस वाले फोन की तलाश में हैं। बैटरी बना सबसे बड़ा हाइलाइट दोनों स्मार्टफोन के बीच सबसे बड़ा अंतर बैटरी का है। Moto G37 में 5200mAh की बैटरी दी गई है, जबकि Moto G37 Power में 7000mAh की बड़ी बैटरी मिलती है। कंपनी का दावा है कि पावर वेरिएंट एक बार चार्ज करने पर करीब 78 घंटे तक चल सकता है। इसके साथ 30W फास्ट चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग का भी सपोर्ट दिया गया है। परफॉर्मेंस और डिस्प्ले दोनों डिवाइस में 6nm आधारित MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर दिया गया है, जो डेली यूज और हल्की गेमिंग के लिए उपयुक्त माना जाता है। स्मार्टफोन में 6.67 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 1050 निट्स तक की ब्राइटनेस के साथ आता है। स्क्रीन की सुरक्षा के लिए Corning Gorilla Glass 7i का इस्तेमाल किया गया है। कैमरा और मजबूती फोटोग्राफी के लिए दोनों फोन में 50MP का प्राइमरी कैमरा दिया गया है। वहीं, फोन को धूल और पानी के छींटों से बचाने के लिए IP64 रेटिंग दी गई है। इसके अलावा MIL-STD-810H सर्टिफिकेशन फोन की मजबूती को और बढ़ाता है। ये स्मार्टफोन लेटेस्ट Android 16 पर चलते हैं। कीमत और उपलब्धता Moto G37 की कीमत 249 यूरो (करीब 27,000 रुपये) रखी गई है, जबकि Moto G37 Power की कीमत 279 यूरो (करीब 31,000 रुपये) है। फिलहाल इन स्मार्टफोन्स को जर्मनी में लॉन्च किया गया है और उम्मीद है कि जल्द ही अन्य बाजारों में भी इन्हें पेश किया जाएगा।
भारतीय स्मार्टफोन बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी का दौर जारी है। अब इस सूची में Motorola का नाम भी जुड़ गया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी ने अपने कई लोकप्रिय स्मार्टफोन्स, खासकर Motorola Edge 60 Fusion, Moto G35 5G और Moto G57 Power की कीमतों में इजाफा कर दिया है। हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक इस बदलाव पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सबसे ज्यादा असर मिड-रेंज सेगमेंट में देखने को मिला है। Motorola Edge 60 Fusion, जिसे अप्रैल 2025 में लॉन्च किया गया था, अब सभी वेरिएंट्स में ₹2,000 तक महंगा हो गया है। इसका बेस वेरिएंट (8GB + 128GB) अब ₹20,999 की जगह ₹22,999 में मिल रहा है। वहीं, 8GB + 256GB मॉडल ₹24,999 और टॉप वेरिएंट 12GB + 256GB अब ₹26,999 तक पहुंच गया है। एंट्री-लेवल सेगमेंट की बात करें तो Moto G35 5G के 4GB + 128GB वेरिएंट की कीमत ₹11,999 से बढ़कर ₹12,499 हो गई है, यानी ₹500 की बढ़ोतरी। वहीं इसका 8GB + 128GB वर्जन अब ₹12,999 से बढ़कर ₹13,999 हो गया है, जो ₹1,000 की वृद्धि को दर्शाता है। इसी तरह Moto G57 Power के 8GB + 128GB वेरिएंट की कीमत भी ₹14,999 से बढ़कर ₹15,999 कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन कंपनियों के लिए लंबे समय तक आक्रामक (कम) कीमत बनाए रखना अब मुश्किल होता जा रहा है। ग्लोबल मार्केट में DRAM और मेमोरी कंपोनेंट्स की कीमतों में बढ़ोतरी, खासकर AI डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग के कारण, कंपनियों की लागत बढ़ा रही है। यही वजह है कि Samsung, OnePlus, Vivo और iQOO जैसे अन्य ब्रांड्स ने भी हाल के दिनों में अपने कई मॉडल्स की कीमतों में संशोधन किया है। फिलहाल, यह साफ नहीं है कि ये कीमतें स्थायी हैं या भविष्य में इनमें और बदलाव देखने को मिल सकता है। लेकिन इतना तय है कि आने वाले समय में स्मार्टफोन खरीदना थोड़ा महंगा जरूर हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।