काराकास: दक्षिण अमेरिकी देश Venezuela में आए भीषण भूकंपों के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार अब तक 1,943 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 58,870 से अधिक इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाने का कार्य जारी होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। हजारों मौतों की आशंका अमेरिकी United States Geological Survey के आकलन के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में वास्तविक नुकसान और मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र के वेनेजुएला स्थित मानवीय समन्वयक Gianluca Rampolla ने बताया कि संभावित बढ़ती मृत्यु संख्या को देखते हुए सरकार और संयुक्त राष्ट्र लगभग 10,000 बॉडी बैग की व्यवस्था करने की तैयारी कर रहे हैं। राहत कार्यों में संसाधनों की कमी भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक La Guaira में राहत अभियान जारी है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कई स्थानों पर ईंधन और भारी मशीनों की कमी के कारण मलबा हटाने का काम प्रभावित हो रहा है। भारत का 'ऑपरेशन अमिस्ताद' भारत ने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए ऑपरेशन अमिस्ताद (Operation Amistad) के तहत चिकित्सा सहायता अभियान शुरू किया है। भारतीय मेडिकल टीमें प्रभावित इलाकों में घायलों का उपचार कर रही हैं और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। S. Jaishankar ने डॉक्टर्स डे के अवसर पर वेनेजुएला में तैनात भारतीय चिकित्सा दलों की सराहना करते हुए उनके मानवीय योगदान को प्रेरणादायक बताया। विदेश मंत्रालय ने साझा किए राहत कार्य Ministry of External Affairs के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा कीं, जिनमें भारतीय फील्ड हॉस्पिटल की टीमें प्रभावित लोगों को चिकित्सा सहायता देती दिखाई दे रही हैं। साझा किए गए वीडियो में स्थानीय नागरिकों ने भी भारतीय मेडिकल टीमों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में भारत की सहायता उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है। नासा का आकलन NASA के शोधकर्ताओं के अनुसार, हालिया दोहरे भूकंपों से वेनेजुएला के मध्य और उत्तरी हिस्सों में करीब 58,870 इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। राहत एजेंसियां अभी भी खोज एवं बचाव, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास कार्यों में जुटी हुई हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने महत्वपूर्ण मंगल मिशन MAVEN को आधिकारिक रूप से समाप्त करने का फैसला किया है। दिसंबर 2025 में अंतरिक्षयान से संपर्क टूटने के बाद वैज्ञानिकों ने उसे दोबारा सक्रिय करने के कई प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। मंगल के वातावरण को समझने के लिए भेजा गया था मिशन मावेन मिशन को 18 नवंबर 2013 को लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य Mars के वायुमंडल, जलवायु और समय के साथ हुए परिवर्तनों का अध्ययन करना था। यह मिशन मूल रूप से केवल एक वर्ष के लिए निर्धारित था, लेकिन अंतरिक्षयान ने 11 वर्षों से अधिक समय तक सफलतापूर्वक काम करते हुए वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराईं। मंगल के पीछे जाते ही गायब हुआ सिग्नल नासा के अनुसार, मावेन से अंतिम संपर्क 6 दिसंबर 2025 को हुआ था। उस समय अंतरिक्षयान मंगल ग्रह के पीछे से गुजर रहा था। इसी दौरान उसका सिग्नल अचानक बंद हो गया और फिर दोबारा स्थापित नहीं किया जा सका। लंबी समीक्षा और तकनीकी विश्लेषण के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अंतरिक्षयान अब मिशन संचालन की स्थिति में नहीं है। तकनीकी गड़बड़ी बनी मिशन समाप्ति की वजह प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि मंगल के पीछे से निकलने के बाद अंतरिक्षयान अनियंत्रित रूप से तेजी से घूमने लगा था। इससे उसकी निर्धारित कक्षा प्रभावित हुई और ऊर्जा प्रणाली पर गंभीर असर पड़ा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि लगातार घूमने की वजह से सौर ऊर्जा उत्पादन बाधित हुआ, जिसके चलते बैटरियां पूरी तरह खत्म हो गईं। घटना के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट वर्ष के अंत तक आने की उम्मीद है। मंगल विज्ञान में मावेन का ऐतिहासिक योगदान मावेन नासा का पहला ऐसा मिशन था जिसका मुख्य उद्देश्य मंगल ग्रह के वातावरण के विकास और उसके क्षरण की प्रक्रिया को समझना था। इस मिशन के आंकड़ों ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की कि अरबों वर्ष पहले मंगल पर मौजूद घना वातावरण और जल संसाधन समय के साथ कैसे समाप्त हुए। इन जानकारियों ने लाल ग्रह के अतीत और संभावित जीवन की संभावनाओं पर शोध को नई दिशा दी। एक मिशन खत्म, लेकिन वैज्ञानिक विरासत कायम मावेन अब सक्रिय नहीं रहेगा, लेकिन उसके द्वारा जुटाए गए विशाल वैज्ञानिक डेटा का अध्ययन आने वाले वर्षों तक जारी रहेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस मिशन की उपलब्धियां भविष्य के मंगल अभियानों और मानव मिशनों की योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। 11 साल से अधिक समय तक चले इस मिशन को मंगल अनुसंधान के इतिहास में नासा की सबसे सफल परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।
अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस की स्पेस कंपनी ब्लू ओरिजिन को बड़ा झटका लगा है। कंपनी के न्यू ग्लेन रॉकेट में टेस्टिंग के दौरान लॉन्चपैड पर विस्फोट हो गया। हादसे का वीडियो सामने आने के बाद अंतरिक्ष क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। फुटेज में देखा जा सकता है कि धमाके के बाद रॉकेट आग के बड़े गोले में तब्दील हो गया। फ्लोरिडा के लॉन्चपैड पर हुआ हादसा ब्लू ओरिजिन के मुताबिक, यह हादसा अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केप कैनावेरल लॉन्च कॉम्प्लेक्स में गुरुवार रात करीब 9 बजे हुआ। कंपनी न्यू ग्लेन रॉकेट का “हॉटफायर टेस्ट” कर रही थी, तभी तकनीकी गड़बड़ी के कारण विस्फोट हो गया। यह टेस्ट आने वाले अंतरिक्ष मिशन की तैयारी के तहत किया जा रहा था। क्या होता है हॉटफायर टेस्ट? हॉटफायर टेस्ट किसी भी रॉकेट लॉन्च से पहले की बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है। इस दौरान रॉकेट को लॉन्चपैड पर क्लैम्प्स की मदद से मजबूती से बांध दिया जाता है और उसके इंजनों को पूरी क्षमता से चालू करके उनकी कार्यक्षमता जांची जाती है। इस परीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि लॉन्च के दौरान इंजन सही तरीके से काम करें। जेफ बेजोस बोले- “फिर से बनाएंगे और उड़ान भरेंगे” हादसे के बाद ब्लू ओरिजिन के संस्थापक जेफ बेजोस ने बयान जारी करते हुए कहा कि सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। उन्होंने कहा, “आज का दिन बेहद कठिन रहा। हम हादसे की वजह का पता लगाने में जुटे हैं। जिस भी चीज को दोबारा बनाने की जरूरत होगी, हम उसे फिर बनाएंगे और उड़ान पर वापस लौटेंगे।” अमेरिकी स्पेस फोर्स और अधिकारी जांच में जुटे ब्रेवार्ड काउंटी इमरजेंसी मैनेजमेंट ने कहा कि लॉन्चपैड पर हुए विस्फोट से आम जनता को कोई खतरा नहीं है। अमेरिकी स्पेस फोर्स ने जानकारी दी कि इमरजेंसी टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गई थीं और अब अधिकारी उपलब्ध डेटा की जांच कर हादसे के सटीक कारण का पता लगाने में जुटे हैं। स्पेस फोर्स ब्लू ओरिजिन के साथ मिलकर पूरे मामले की जांच कर रही है। नासा ने कहा- स्पेसफ्लाइट आसान नहीं नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जैरेड इसाकमैन ने भी घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “स्पेसफ्लाइट किसी को माफ नहीं करती। हैवी-लिफ्ट लॉन्च क्षमता विकसित करना बेहद कठिन काम है।” उन्होंने कहा कि नासा इस घटना की पूरी जांच का समर्थन करेगा और भविष्य के मिशनों पर इसके प्रभावों का आकलन करेगा। पिछले महीने भी सामने आई थी तकनीकी समस्या ब्लू ओरिजिन के लिए हाल के महीनों में यह दूसरी बड़ी समस्या है। पिछले महीने फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने एक असफल सैटेलाइट लॉन्चिंग से जुड़े मामले में जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद न्यू ग्लेन रॉकेट को अस्थायी रूप से ग्राउंडेड किया गया था। नवंबर में मिली थी बड़ी सफलता हालांकि पिछले साल नवंबर में ब्लू ओरिजिन ने न्यू ग्लेन रॉकेट की सफल लॉन्चिंग कर बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। उस मिशन के दौरान कंपनी ने पहली बार अपने रीयूजेबल बूस्टर की सफल लैंडिंग भी कराई थी। ब्लू ओरिजिन ने लगभग 10 साल और अरबों डॉलर खर्च करके न्यू ग्लेन रॉकेट को विकसित किया है। 29 मंजिला इमारत जितना बड़ा है न्यू ग्लेन न्यू ग्लेन रॉकेट करीब 29 मंजिला इमारत जितना ऊंचा है। इसका पहला चरण दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, यानी यह रीयूजेबल रॉकेट तकनीक पर आधारित है। इसे खास तौर पर इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के फॉल्कन रॉकेट्स और स्टारशिप को चुनौती देने के लिए तैयार किया गया है। स्टारलिंक को टक्कर देने की तैयारी थी दिलचस्प बात यह है कि हादसे से ठीक एक दिन पहले ब्लू ओरिजिन ने घोषणा की थी कि वह न्यू ग्लेन रॉकेट के जरिए अमेजन के 48 लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। अमेजन इन सैटेलाइट्स की मदद से वैश्विक ब्रॉडबैंड इंटरनेट नेटवर्क तैयार करना चाहता है, जो सीधे तौर पर इलॉन मस्क के स्टारलिंक नेटवर्क को चुनौती देगा। इलॉन मस्क ने जताई प्रतिक्रिया रॉकेट विस्फोट का वीडियो सामने आने के बाद स्पेसएक्स के प्रमुख इलॉन मस्क ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण। रॉकेट्स बनाना और उनका संचालन करना वाकई बेहद कठिन काम है।” अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और तेज विशेषज्ञों का मानना है कि यह हादसा ब्लू ओरिजिन के लिए बड़ा झटका जरूर है, लेकिन निजी अंतरिक्ष उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए कंपनी जल्द वापसी की कोशिश करेगी। अमेजन, स्पेसएक्स और अन्य निजी कंपनियों के बीच सैटेलाइट इंटरनेट और अंतरिक्ष तकनीक को लेकर मुकाबला लगातार तेज होता जा रहा है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने चांद पर स्थायी मानव बस्ती बसाने की दिशा में बड़ा ऐलान किया है। एजेंसी ने करीब 20 अरब डॉलर की महत्वाकांक्षी “मून बेस” योजना पेश की है, जिसका उद्देश्य चांद पर ऐसा स्थायी ठिकाना बनाना है जहां वैज्ञानिक लंबे समय तक रहकर रिसर्च कर सकें। NASA ने इस मिशन के लिए विस्तृत रोडमैप जारी करते हुए रोवर, लैंडर और ड्रोन तकनीक विकसित करने के लिए अरबों डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट भी दिए हैं। आर्टेमिस मिशन के बाद नई तैयारी NASA का यह कदम आर्टेमिस-II मिशन की सफलता के बाद सामने आया है। अप्रैल 2026 में आर्टेमिस-II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद की परिक्रमा की थी। यह 1972 के अपोलो-17 मिशन के बाद पहला मानव मिशन था जिसने लो अर्थ ऑर्बिट से आगे यात्रा की। अब NASA का लक्ष्य 2028 तक आर्टेमिस-III मिशन के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को दोबारा चांद की सतह पर उतारना है। NASA ने जारी किया मून बेस का ब्लूप्रिंट वॉशिंगटन डीसी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में NASA प्रमुख Jared Isaacman ने कहा कि चांद पर बनने वाला यह बेस मानवता का दूसरे खगोलीय पिंड पर पहला स्थायी ठिकाना होगा। उन्होंने बताया कि मून बेस में लूनर रोवर, ड्रोन, वैज्ञानिक उपकरण और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा ताकि इंसान चांद जैसे कठिन वातावरण में लंबे समय तक रहना सीख सकें। 2026 में शुरू होंगे तीन बड़े मिशन NASA ने 2026 के लिए तीन शुरुआती “मून बेस मिशन” घोषित किए हैं। इनका उद्देश्य इंसानों के पहुंचने से पहले तकनीक का परीक्षण करना और जोखिम कम करना है। Moon Base-I मिशन क्या करेगा? पहले मिशन “Moon Base-I” के तहत Blue Origin के “Blue Moon Mark-1 Endurance” लैंडर का उपयोग किया जाएगा। यह मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित Shackleton Connecting Ridge इलाके में उतरेगा। यहां वैज्ञानिक उपकरण भेजे जाएंगे, जिनमें स्टीरियो कैमरे और लेजर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव सिस्टम शामिल होंगे। NASA के मुताबिक: स्टीरियो कैमरे यह जांचेंगे कि रॉकेट थ्रस्टर चांद की सतह को कैसे प्रभावित करते हैं। लेजर सिस्टम अंतरिक्ष यानों को सटीक लोकेशन पहचानने में मदद करेगा। Moon Base-II में भेजा जाएगा भारी सामान दूसरे मिशन “Moon Base-II” में चांद पर 1100 पाउंड से ज्यादा सामान पहुंचाया जाएगा। यह मिशन Astrobotic Technology के “Griffin Lander” के जरिए भेजा जाएगा। इस मिशन में Astrolab का FLIP रोवर भी शामिल होगा। इसका उद्देश्य चांद की सतह पर भारी सामान ले जाने और मूवमेंट तकनीक विकसित करना है। Moon Base-III करेगा रहस्यमयी ‘लूनर स्वर्ल्स’ की जांच तीसरा मिशन “Moon Base-III” चांद की सतह पर दिखने वाले रहस्यमयी चमकीले पैटर्न “Lunar Swirls” का अध्ययन करेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि इनका संबंध चांद के नीचे मौजूद चुंबकीय क्षेत्रों से हो सकता है। इस मिशन में यूरोपियन और कोरियन स्पेस एजेंसियों के उपकरण भी शामिल होंगे। तीन चरणों में बनेगा चांद का बेस NASA ने पूरे कार्यक्रम को तीन चरणों में बांटा है। पहला चरण (2026-2028) नई तकनीकों का परीक्षण चांद की सतह पर ऑपरेशन की तैयारी लूनर वाहन और रोवर की तैनाती दूसरा चरण (2029-2032) स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना पावर ग्रिड और सपोर्ट सिस्टम बनाना रहने योग्य मॉड्यूल विकसित करना तीसरा चरण (2032 के बाद) चांद पर लगातार मानव मौजूदगी नियमित क्रू रोटेशन स्थायी वैज्ञानिक रिसर्च करोड़ों डॉलर में बनेंगे चंद्र रोवर NASA ने Astrolab और Lunar Outpost को चांद पर चलने वाले रोवर बनाने की जिम्मेदारी दी है। Astrolab को करीब 219 मिलियन डॉलर Lunar Outpost को करीब 220 मिलियन डॉलर दिए गए हैं। इन रोवरों को तीन तरीकों से संचालित किया जा सकेगा: अंतरिक्ष यात्री खुद चलाएंगे पृथ्वी से रिमोट कंट्रोल पूरी तरह स्वायत्त संचालन NASA का लक्ष्य है कि ये रोवर चांद पर करीब एक साल तक सक्रिय रह सकें। ब्लू ओरिजिन को मिली बड़ी जिम्मेदारी Jeff Bezos की कंपनी Blue Origin को इन रोवरों को चांद तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी को इसके लिए 188 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त 280 मिलियन डॉलर तक दिए जा सकते हैं। 2028 में भेजे जाएंगे उड़ने वाले ड्रोन NASA 2028 में चांद पर चार छोटे “हॉपिंग ड्रोन” भी भेजेगा। इनका काम उन इलाकों की तस्वीरें लेना होगा जहां रोवर पहुंचना मुश्किल होगा। इन ड्रोन को ले जाने वाला स्पेसक्राफ्ट Firefly Aerospace तैयार करेगी। “अब चांद पर स्थायी मौजूदगी बनाने का समय” NASA के मून बेस प्रोग्राम अधिकारी कार्लोस गार्सिया-गालान ने कहा कि आने वाले वर्षों में ऐसी स्थिति बनाई जाएगी जहां इंसान लगातार चांद पर मौजूद रह सकें। NASA प्रमुख जेरेड आइजैकमैन ने कहा कि यह मिशन सिर्फ अमेरिका का नहीं बल्कि पूरी मानवता का भविष्य बदलने वाला कदम साबित होगा।
रांची। झारखंड में भीषण गर्मी के बीच मौसम विभाग ने राहत भरी खबर दी है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में बुधवार दोपहर बाद मौसम बदलने के संकेत हैं। विभाग के अनुसार कई जिलों में आंशिक बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि उत्तर-पश्चिमी जिलों गढ़वा, पलामू और चतरा में हीट वेव का असर अभी भी बना रहेगा। तेज हवा और वज्रपात की चेतावनी मौसम विभाग ने राज्य के पूर्वी और मध्य हिस्सों में गरज के साथ तेज हवा और वज्रपात की संभावना जताई है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। वहीं Simdega, Gumla, कोडरमा और हजारीबाग में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है। कई जिलों में 45 डिग्री तक पहुंचेगा पारा उत्तर-पश्चिमी झारखंड के गढ़वा, पलामू और चतरा में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यह राज्य का सबसे गर्म क्षेत्र बना रहेगा। वहीं देवघर, धनबाद और पाकुड़ में अधिकतम तापमान 41 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में अधिकतम तापमान 39 डिग्री तथा न्यूनतम 26 डिग्री रहने का अनुमान है। बोकारो, रामगढ़, खूंटी और हजारीबाग में भी तापमान 39 से 42 डिग्री के बीच रह सकता है। बारिश से मिल सकती है राहत मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। लगातार बादल और हल्की बारिश से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि फिलहाल उमस और गर्म हवाओं से परेशानी बनी रह सकती है। मौसम विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर में बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का ऐतिहासिक मिशन Artemis-2 सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। 11 अप्रैल की सुबह करीब 5:37 बजे Orion spacecraft ने Pacific Ocean में सुरक्षित स्प्लैशडाउन किया। इस मिशन में शामिल चारों अंतरिक्षयात्री चंद्रमा का चक्कर लगाकर सही-सलामत पृथ्वी पर लौट आए। 21वीं सदी का पहला मानव चंद्र मिशन Artemis-2 मिशन 21वीं सदी में इंसानों का पहला चंद्रमा मिशन बन गया है। करीब 54 साल बाद इंसान फिर से चंद्रमा के इतने करीब पहुंचे हैं। इस दौरान अंतरिक्षयात्रियों ने पृथ्वी से लगभग 4,06,778 किलोमीटर की दूरी तय की, जो मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में एक बड़ा रिकॉर्ड है। मिशन में कौन-कौन थे शामिल इस ऐतिहासिक मिशन में ये चार अंतरिक्षयात्री शामिल थे: Reid Wiseman (कमांडर) Victor Glover (पायलट) Christina Koch (मिशन स्पेशलिस्ट) Jeremy Hansen (मिशन स्पेशलिस्ट) सुरक्षित स्प्लैशडाउन और रेस्क्यू पृथ्वी के घने वातावरण में एंट्री के दौरान स्पेसक्राफ्ट को तेज गर्मी और दबाव का सामना करना पड़ा। इसके बाद पैराशूट खुलते ही कैप्सूल सुरक्षित समुद्र में उतर गया। US Navy और NASA की टीमों ने तुरंत कैप्सूल को रिकवर कर लिया और अंतरिक्षयात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। ट्रंप ने दी बधाई, मंगल मिशन की बात अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने मिशन की सफलता पर टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह मिशन पूरी तरह सफल रहा और लैंडिंग परफेक्ट थी। ट्रंप ने संकेत दिया कि अब अगला बड़ा कदम मंगल मिशन की दिशा में होगा। अंतरिक्ष अन्वेषण में बड़ी उपलब्धि Artemis-2 की सफलता को अंतरिक्ष विज्ञान में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह मिशन भविष्य के चंद्र मिशनों और मंगल अभियान के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा।
अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने हाल ही में पृथ्वी की कुछ बेहद शानदार तस्वीरें साझा की हैं, जो अंतरिक्ष से ली गई हैं। खास बात यह है कि ये तस्वीरें किसी हाई-एंड स्पेस कैमरे से नहीं, बल्कि iPhone 17 Pro Max से कैप्चर की गई हैं। ये तस्वीरें Artemis II मिशन के दौरान Orion spacecraft से ली गईं, जब अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की ओर उड़ान पर थे। अंतरिक्ष से पृथ्वी का मनमोहक नजारा NASA द्वारा शेयर की गई तस्वीर में पृथ्वी को Orion कैप्सूल की खिड़की से देखा जा सकता है। यह दृश्य न सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी बेहद खास माना जा रहा है। जब सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने पूछा कि यह तस्वीर कैसे ली गई, तो NASA ने पुष्टि की कि इसे iPhone 17 Pro Max से शूट किया गया है। अंतरिक्ष में iPhone क्यों? कई लोगों के लिए यह हैरानी की बात थी कि NASA ने अपने मिशन में iPhone जैसे स्मार्टफोन को अनुमति दी। NASA के अनुसार: iPhone का उपयोग मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि मिशन डॉक्यूमेंटेशन और खास पलों को कैद करने के लिए किया जा रहा है अंतरिक्ष में इंटरनेट और ब्लूटूथ का इस्तेमाल नहीं होता NASA के प्रशासक जारेड इसाकमैन ने बताया कि यह कदम अंतरिक्ष यात्रियों को उनके अनुभव को दुनिया के साथ साझा करने में मदद करेगा। कड़े परीक्षण के बाद मिली मंजूरी NASA के मिशन में किसी भी डिवाइस को शामिल करना आसान नहीं होता। हार्डवेयर की सख्त जांच संभावित खतरों का आकलन बैकअप और सुरक्षा योजनाएं इसी प्रक्रिया के बाद iPhone को मिशन के लिए मंजूरी दी गई। इससे पहले NASA मुख्य रूप से Nikon D5 और GoPro Hero 11 जैसे कैमरों का उपयोग करता रहा है। iPhone 17 Pro Max कैमरा क्यों खास? iPhone 17 Pro Max की कैमरा टेक्नोलॉजी इसे अंतरिक्ष में भी उपयोगी बनाती है: 48MP ट्रिपल कैमरा सिस्टम 4x और 8x ऑप्टिकल क्वालिटी जूम हाई-रेजोल्यूशन 24MP फोटो एडवांस मैक्रो और टेलीफोटो लेंस यही वजह है कि यह स्मार्टफोन अंतरिक्ष से भी शानदार तस्वीरें लेने में सक्षम साबित हुआ। क्या बदल रही है अंतरिक्ष फोटोग्राफी? NASA का यह कदम दिखाता है कि अब पारंपरिक कैमरों के साथ-साथ आधुनिक स्मार्टफोन भी स्पेस मिशन का हिस्सा बन रहे हैं। यह अंतरिक्ष डॉक्यूमेंटेशन के तरीके में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक नई शुरुआत कर रहा Artemis II mission अपने पहले ही दिन एक अनपेक्षित तकनीकी समस्या से जूझता नजर आया। 1 अप्रैल 2026 को लॉन्च हुए इस मिशन का उद्देश्य 50 वर्षों बाद इंसानों को चंद्रमा की परिक्रमा कराना है, लेकिन यात्रा के कुछ ही घंटों बाद अंतरिक्ष यात्रियों को एक साधारण दिखने वाली, पर अहम दिक्कत का सामना करना पड़ा-वे ईमेल नहीं भेज पा रहे थे। मिशन के कमांडर Reid Wiseman ने रिपोर्ट किया कि उनके पर्सनल कंप्यूटिंग डिवाइस पर Microsoft Outlook काम नहीं कर रहा था। उन्होंने मिशन कंट्रोल से संपर्क कर बताया कि Outlook के दो इंस्टेंस खुल ही नहीं रहे हैं और तकनीकी सहायता की जरूरत है। बताया जाता है कि यह डिवाइस Microsoft Surface Pro था, जिसका उपयोग क्रू संचार और अन्य डिजिटल कार्यों के लिए कर रहा था। अंतरिक्ष में इंटरनेट और सॉफ्टवेयर के सीमित संसाधनों के बीच यह समस्या क्रू के लिए परेशानी का कारण बन गई। हालांकि, NASA की ग्राउंड टीम ने तेजी से प्रतिक्रिया देते हुए रिमोट एक्सेस के जरिए इस समस्या को ठीक कर दिया। मिशन कंट्रोल ने बताया कि Outlook अब खुल रहा है, हालांकि वह “ऑफलाइन” मोड में रहेगा-जो कि अंतरिक्ष में सामान्य स्थिति मानी जाती है। अन्य तकनीकी चुनौतियाँ भी आई सामने Outlook की समस्या के अलावा मिशन को एक और तकनीकी चुनौती का सामना करना पड़ा। लॉन्च के तुरंत बाद अंतरिक्ष यान के टॉयलेट सिस्टम का फैन जाम हो गया था, जिसे बाद में ग्राउंड टीम के निर्देशों से ठीक किया गया। इस दौरान बैकअप सिस्टम का उपयोग किया गया। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस मिशन से पहले भी कई तकनीकी परेशानियां सामने आई थीं, जिनमें हाइड्रोजन और हीलियम लीक तथा हीट शील्ड में खराबी शामिल थीं। बावजूद इसके, 3 अप्रैल को क्रू ने सफलतापूर्वक ट्रांस-लूनर इंजेक्शन बर्न पूरा किया, जिससे यान चंद्रमा की दिशा में आगे बढ़ सका। सोशल मीडिया पर मजेदार प्रतिक्रियाएँ इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने मजेदार मीम्स और प्रतिक्रियाओं की बाढ़ ला दी। कई लोगों ने कहा कि “Outlook की समस्या से कोई भी नहीं बच सकता-चाहे वह पृथ्वी हो या अंतरिक्ष।” कुछ यूजर्स ने NASA के सॉफ्टवेयर चयन पर भी सवाल उठाए। मिशन का महत्व Artemis II मिशन में कुल चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं- Reid Wiseman (कमांडर) Victor Glover (पायलट) Christina Koch (मिशन स्पेशलिस्ट) Jeremy Hansen (मिशन स्पेशलिस्ट) यह मिशन भविष्य में चंद्रमा पर मानव लैंडिंग की तैयारी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए NASA का Artemis II मिशन अब अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है। इस मिशन के तहत Orion स्पेसक्राफ्ट सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा से निकलकर चंद्रमा की ओर बढ़ चुका है। ट्रांस-लूनर इंजेक्शन (TLI) बर्न के सफल होने के बाद अब यह मिशन डीप स्पेस में प्रवेश कर चुका है और पूरी दुनिया की निगाहें इस पर टिकी हैं। लॉन्च के बाद क्यों रोका गया था मिशन? मिशन लॉन्च के तुरंत बाद अंतरिक्ष यात्रियों को सीधे चांद की ओर नहीं भेजा गया। वैज्ञानिकों ने पहले पृथ्वी की कक्षा में ही स्पेसक्राफ्ट के सभी सिस्टम-जैसे लाइफ सपोर्ट, नेविगेशन और पावर-की गहन जांच की। सभी सिस्टम सुरक्षित पाए जाने के बाद ही आगे बढ़ने की अनुमति दी गई। कब पहुंचेगा चांद के सबसे करीब? मिशन की योजना के अनुसार, ओरियन स्पेसक्राफ्ट अपनी यात्रा के छठे दिन यानी लगभग 6–7 अप्रैल 2026 को चांद के सबसे करीब पहुंचेगा। इस दौरान इसकी दूरी चांद से करीब 7,500 किलोमीटर होगी। यह वही क्षण होगा जब अंतरिक्ष यात्री चांद के ‘फार साइड’ (पिछले हिस्से) को देखेंगे और ‘अर्थराइज’ यानी चांद से उगती पृथ्वी का अद्भुत दृश्य अनुभव करेंगे। बन सकता है नया रिकॉर्ड इस मिशन के दौरान स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी से लगभग 4 लाख किलोमीटर दूर तक जाएगा। यह 1972 के Apollo 17 के बाद पहली बार होगा जब इंसान इतनी दूरी तक जाएगा। क्या चांद पर उतरेंगे एस्ट्रोनॉट्स? इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, लेकिन कोई भी चांद की सतह पर लैंड नहीं करेगा। यह मिशन चांद की परिक्रमा कर वापस लौटने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि भविष्य के मानव मिशनों के लिए तकनीक का परीक्षण किया जा सके। कितने दिन चलेगा पूरा मिशन? पूरा मिशन लगभग 10 दिनों का है: शुरुआती 1–2 दिन: सिस्टम जांच अगले 3–4 दिन: चांद की ओर यात्रा फिर: चांद के पास परिक्रमा अंत में: पृथ्वी पर वापसी यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो मिशन 11 अप्रैल 2026 तक समाप्त हो जाएगा। वापसी सबसे चुनौतीपूर्ण क्यों? वापसी के दौरान स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी के वातावरण में करीब 25,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से प्रवेश करेगा। यह मिशन का सबसे जोखिम भरा चरण माना जाता है, जहां हीट और स्पीड दोनों ही बड़ी चुनौती होती हैं। यह मिशन इतना महत्वपूर्ण क्यों है? Artemis-II एक टेस्ट मिशन है, जो भविष्य में इंसानों को चांद पर उतारने की तैयारी का अहम हिस्सा है। इस मिशन के जरिए NASA स्पेसक्राफ्ट, तकनीक और अंतरिक्ष यात्रियों की क्षमता का परीक्षण कर रहा है। इसकी सफलता ही आने वाले बड़े मिशनों-खासतौर पर मानव लैंडिंग-की नींव तय करेगी।
नई दिल्ली,एजेंसियां। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA का Artemis II मिशन एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। इस मिशन पर करीब 93 अरब डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग ₹7.71 लाख करोड़ खर्च होने का अनुमान है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर कदम नहीं रखेंगे। इसकी वजह मिशन का असली उद्देश्य है। NASA का Artemis II मिशन दरअसल चांद पर उतरने के लिए नहीं, बल्कि वहां भविष्य में इंसानी मिशन भेजने की तैयारी का अहम चरण है। इस 10 दिन के मिशन में 4 अंतरिक्ष यात्री चांद के चारों ओर परिक्रमा करेंगे और फिर पृथ्वी पर लौट आएंगे। इस दौरान SLS रॉकेट, Orion कैप्सूल, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन और ऑनबोर्ड टेक्नोलॉजी की वास्तविक परिस्थितियों में जांच की जाएगी। क्यों जरूरी है यह मिशन? NASA का मानना है कि चांद पर इंसानों को सुरक्षित उतारने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि अंतरिक्ष यान, क्रू सिस्टम और वापसी की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित हो। इसलिए Artemis II को एक क्रिटिकल टेस्ट मिशन माना जा रहा है। इसका मुख्य लक्ष्य है—क्रू को सुरक्षित भेजना और वापस लाना। आगे क्या होगा? Artemis कार्यक्रम एक लंबी योजना का हिस्सा है। Artemis I में बिना इंसानों के सिस्टम टेस्ट किया गया था। Artemis II में इंसानी क्रू के साथ फ्लाइट हो रही है। Artemis III और IV के जरिए भविष्य में चांद पर लैंडिंग और वहां बेस तैयार करने का रास्ता साफ किया जाएगा। इस मिशन पर भारी खर्च इसलिए हो रहा है क्योंकि इसमें सिर्फ एक उड़ान नहीं, बल्कि भविष्य के चंद्र अभियानों की नींव तैयार की जा रही है। यानी अभी चांद पर कदम नहीं, लेकिन यह मिशन आने वाले ऐतिहासिक मून लैंडिंग मिशनों की सबसे बड़ी तैयारी जरूर है।
वॉशिंगटन/फ्लोरिडा: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने 50 से ज्यादा साल बाद इंसानों को चंद्रमा की दिशा में भेजते हुए Artemis-II मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। यह मिशन कैनेडी स्पेस सेंटर से चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ रवाना हुआ और इसे अपोलो-17 (1972) के बाद सबसे बड़ा मानव चंद्र मिशन माना जा रहा है। क्या है Artemis-II मिशन? Artemis-II NASA का पहला मानवयुक्त (Crewed) डीप स्पेस मिशन है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से बाहर निकलकर चंद्रमा के पास तक जाएंगे। यह मिशन करीब 10 दिनों का होगा और इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों की वापसी की तैयारी करना है। मिशन में कौन-कौन शामिल? इस ऐतिहासिक मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं: रीड वाइजमैन (कमांडर) विक्टर ग्लोवर (पायलट) क्रिस्टिना कोच (मिशन विशेषज्ञ) जेरेमी हैनसन (कनाडा) खास बात: विक्टर ग्लोवर – डीप स्पेस में जाने वाले पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टिना कोच – इस मिशन की पहली महिला जेरेमी हैनसन – चंद्र क्षेत्र में जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी चंद्रमा तक कैसे पहुंचेगा मिशन? पहले 24–25 घंटे पृथ्वी में परीक्षण फिर “ट्रांसलूनर इंजेक्शन” के जरिए चंद्रमा की ओर रवाना दूरी: लगभग 3.9 लाख किमी (2,44,000 मील) चंद्रमा तक पहुंचने में समय: करीब 3 दिन चंद्रमा पर लैंडिंग क्यों नहीं? Artemis-II मिशन चंद्रमा पर उतरेगा नहीं। वजह: Orion स्पेसक्राफ्ट सिर्फ यात्रा के लिए बना है लैंडिंग के लिए अलग मॉड्यूल की जरूरत होती है यह मिशन केवल चंद्रमा की परिक्रमा (Flyby) करेगा और फिर पृथ्वी पर लौट आएगा। कितना खास है यह मिशन? इंसानों की 54 साल बाद डीप स्पेस में वापसी Apollo-13 का दूरी रिकॉर्ड टूट सकता है अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से 2.5 लाख मील दूर तक जा सकते हैं चंद्रमा के “फार साइड” (दूर वाले हिस्से) का अवलोकन मिशन का मुख्य उद्देश्य Artemis-II का मकसद सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारी है: लाइफ-सपोर्ट सिस्टम का परीक्षण नेविगेशन और सुरक्षा तकनीक की जांच अंतरिक्ष में मानव शरीर पर प्रभाव का अध्ययन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की तस्वीरें लेना भविष्य की योजना NASA का लक्ष्य: 2028 तक इंसानों को चंद्रमा पर उतारना भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी बेस (Moon Base) बनाना Artemis-II इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आगे आने वाले Artemis-III और Artemis-IV मिशनों की नींव तैयार करेगा। कितना महंगा है मिशन? एक लॉन्च की लागत: लगभग 4 बिलियन डॉलर (₹37,000+ करोड़) इसमें कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और निजी कंपनियों का योगदान
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।