Natural Disaster

A McDonald's restaurant in Venezuela's La Guaira province serves as a temporary field hospital after a devastating earthquake overwhelmed local healthcare facilities.
वेनेजुएला भूकंप: मैकडॉनल्ड्स बना अस्पताल, फूड काउंटर पर बंट रहीं दवाएं; तबाही के बीच जिंदगी बचाने की जंग

काराकास: वेनेजुएला के ला गुआरा प्रांत में आए विनाशकारी भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य अभूतपूर्व परिस्थितियों में चल रहा है। अस्पतालों के क्षतिग्रस्त होने और मरीजों की भारी संख्या के कारण अब मैकडॉनल्ड्स के रेस्टोरेंट, बस टर्मिनल और अन्य सार्वजनिक स्थान अस्थायी अस्पतालों में बदल दिए गए हैं। 7.2 और 7.5 तीव्रता के लगातार आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, 2,600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,600 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मैकडॉनल्ड्स बना फील्ड हॉस्पिटल ला गुआरा के काराबालेदा इलाके में स्थित एक मैकडॉनल्ड्स रेस्टोरेंट अब फील्ड हॉस्पिटल के रूप में काम कर रहा है। जहां कभी बर्गर और फ्रेंच फ्राइज परोसे जाते थे, वहां अब मरीजों का इलाज किया जा रहा है। रेस्टोरेंट की छत से आईवी फ्लूइड की बोतलें लटकाई गई हैं और फूड काउंटर पर दवाइयां तथा मेडिकल सामग्री रखी गई है। वहीं, भोजन के रूप में लोगों को दान में मिली अरेपास (वेनेजुएला की पारंपरिक रोटी) और सैंडविच वितरित किए जा रहे हैं। 33 वर्षीय वालंटियर सर्जन कार्लीज फिगुएरा ने बताया कि यहां 30 से अधिक डॉक्टर लगातार घायलों का इलाज कर रहे हैं। उनके अनुसार, अधिकांश मरीज हाई ब्लड प्रेशर, घबराहट, डायरिया और अन्य आपात स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। बस टर्मिनल में चल रहा इलाज कैटिया ला मार बस टर्मिनल को भी अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में बदल दिया गया है, जहां अब तक करीब 4,000 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। यहां निजी सहयोग से जुटाए गए मेडिकल उपकरणों के सहारे डॉक्टर लगातार इलाज में जुटे हैं। 16 घंटे मलबे में फंसा रहा 13 वर्षीय बच्चा 13 वर्षीय इवरसन मदीना भूकंप के बाद अपने घर के मलबे में करीब 16 घंटे तक फंसा रहा। उसे गंभीर चोटों के साथ बाहर निकाला गया। इवरसन ने बताया, "मुझे लगा था कि मैं कभी बाहर नहीं निकल पाऊंगा। जब दमकलकर्मी पहुंचे, तब उम्मीद जगी।" इस हादसे में उसने अपनी दादी और एक रिश्तेदार को अपनी आंखों के सामने खो दिया। डॉक्टरों ने सुनाई भयावह तस्वीर डॉक्टर मारिया जोस पिनो, जिन्होंने स्वयं इस भूकंप का सामना किया, बताती हैं कि सड़कों पर हर तरफ तबाही का मंजर था। उनके अनुसार, "सड़कों पर शव पड़े थे, मुर्दाघरों में जगह नहीं बची थी और कई शवों का अंतिम संस्कार तक समय पर नहीं हो पा रहा था।" पैर में चोट होने के बावजूद वह लगातार राहत कार्य में जुटी हुई हैं। महामारी का खतरा बढ़ा भूकंप में 150 से अधिक बहुमंजिला इमारतें पूरी तरह ढह चुकी हैं। हजारों लोग राहत शिविरों और अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि भीड़भाड़ वाले शिविरों में अब संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। डॉ. एंटोनियो ओलाइज़ोला के अनुसार, राहत शिविरों में डायरिया, पेचिश, पेट संक्रमण और उल्टी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उनका कहना है कि अब भूकंप के बाद महामारी को रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। राहत अभियान जारी स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्यकर्मी और स्वयंसेवी संगठन लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। हालांकि भारी तबाही और सीमित संसाधनों के कारण प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं पर भारी दबाव बना हुआ है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Residents gather outdoors after two earthquakes struck Pakistan within hours, with the epicenter near Balochistan
पाकिस्तान में सुबह-सुबह दो बार कांपी धरती, 5.5 और 5.3 तीव्रता के भूकंप से दहशत; जानें कहां था केंद्र

  Pakistan Double Earthquake: पाकिस्तान में शनिवार सुबह कुछ ही घंटों के अंतराल पर दो बार भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। पहला भूकंप सुबह करीब 6:15 बजे आया, जबकि दूसरा झटका करीब 8:30 बजे दर्ज किया गया। दोनों भूकंपों की तीव्रता 5 मैग्नीट्यूड से अधिक रही। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन लगातार आए झटकों से लोगों में दहशत का माहौल है। बलूचिस्तान के पास था दूसरे भूकंप का केंद्र नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, दूसरे भूकंप की तीव्रता 5.5 मापी गई। वहीं, यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, इसका केंद्र पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बरखान शहर से करीब 63 किलोमीटर दूर था। EMSC और USGS के अनुसार भूकंप की गहराई करीब 35 किलोमीटर थी, जबकि NCS ने इसकी गहराई 40 किलोमीटर दर्ज की है। भारतीय समयानुसार यह भूकंप सुबह करीब 8:36 बजे महसूस किया गया। कुछ घंटे पहले आया था पहला झटका इससे पहले शनिवार सुबह करीब 6:15 बजे पाकिस्तान में 5.3 तीव्रता का एक और भूकंप आया था। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, पहले भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 75 किलोमीटर की गहराई में था। एक ही दिन में दो बार आए भूकंप के झटकों के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की पुष्टि नहीं की है। दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ी भूकंपीय गतिविधियां जून महीने में दुनिया के कई देशों में लगातार भूकंप दर्ज किए गए हैं। हाल ही में फिलीपींस और वेनेजुएला में भी तेज भूकंप आए थे। अब पाकिस्तान में लगातार दो झटकों ने एक बार फिर भूकंपीय गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आखिर क्यों आते हैं भूकंप? पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों में विभाजित है। ये प्लेटें पृथ्वी के भीतर मौजूद गर्म मैग्मा पर लगातार गति करती रहती हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के नीचे खिसकती हैं या उनके बीच दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है, तो अचानक बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। यही ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में फैलती है और धरती हिलने लगती है, जिसे हम भूकंप कहते हैं। इसके अलावा ज्वालामुखी विस्फोट, बड़े बांधों का निर्माण और खनन जैसी मानवीय गतिविधियां भी छोटे स्तर के भूकंप पैदा कर सकती हैं। P-वेव और S-वेव क्या होती हैं? भूकंप के दौरान दो प्रमुख प्रकार की तरंगें उत्पन्न होती हैं। P-वेव (Primary Wave) सबसे तेज गति से चलने वाली तरंग होती है। यह ठोस, तरल और गैस—तीनों माध्यमों से गुजर सकती है और सबसे पहले महसूस होती है। S-वेव (Secondary Wave) अपेक्षाकृत धीमी होती है, लेकिन सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती है। यह केवल ठोस पदार्थों में ही यात्रा कर सकती है और धरती को ऊपर-नीचे तथा दाएं-बाएं हिलाती है, जिससे इमारतों को अधिक क्षति होती है। भारत में भूकंप के कितने जोन हैं? भारत में भूकंप के जोखिम के आधार पर अब छह भूकंपीय जोन निर्धारित किए गए हैं। जोन VI (उच्चतम जोखिम): पूरे हिमालयी क्षेत्र, जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक। जोन V (बहुत अधिक जोखिम): कच्छ का रण (गुजरात) और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह। जोन IV (उच्च जोखिम): दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्से। जोन III (मध्यम जोखिम): केरल, गोवा, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, झारखंड और दक्षिण भारत के कई हिस्से। जोन II (कम जोखिम): राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के शेष क्षेत्र। जोन I (नगण्य जोखिम): नए वर्गीकरण के बाद इस श्रेणी के अधिकांश क्षेत्रों को अब जोन II में शामिल कर दिया गया है।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
Rescue teams search through collapsed buildings after the deadly Venezuela earthquake that killed hundreds and injured thousands
वेनेजुएला में भूकंप की भीषण तबाही: मृतकों की संख्या 235 पहुंची, 4,300 से अधिक घायल; हजारों अब भी लापता

  Venezuela Earthquake: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक 235 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि हजारों लोग अब भी लापता हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। वेनेजुएला के स्वास्थ्य मंत्री कार्लोस अल्वाराडो ने सरकारी मीडिया से बातचीत में बताया कि अस्पतालों में अब तक 235 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कई घायलों की हालत गंभीर है और लापता लोगों की तलाश जारी रहने के कारण स्थिति लगातार बदल रही है। एक सदी के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में शामिल बुधवार शाम आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के लगातार दो भूकंपों को वेनेजुएला के इतिहास के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में गिना जा रहा है। तेज झटकों से कई शहरों में इमारतें ढह गईं, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और हजारों लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। भूकंप का असर पड़ोसी देशों तक महसूस किया गया। ब्राजील के अमेजन क्षेत्र में भी एहतियात के तौर पर कई इमारतों  

Deepshikha जून 26, 2026 0
Rescue teams search through collapsed buildings after powerful earthquakes struck Venezuela, causing widespread destruction and casualties.
वेनेजुएला में भूकंप से तबाही: 164 लोगों की मौत, 971 घायल; राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने दी जानकारी

  Venezuela Earthquake: वेनेजुएला में बुधवार को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने गुरुवार को पुष्टि करते हुए बताया कि अब तक कम से कम 164 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 971 लोग घायल हुए हैं। सरकार का कहना है कि राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है और मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है। 30 आफ्टरशॉक्स से बढ़ी मुश्किलें डेल्सी रोड्रिगेज ने बताया कि शुरुआती दो बड़े भूकंपों के बाद अब तक करीब 30 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए हैं। सबसे अधिक नुकसान पहले आए दो तेज झटकों से हुआ। कई रिहायशी और व्यावसायिक इमारतें पूरी तरह ढह गई हैं, जबकि अनेक भवन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। राहत एजेंसियों की टीमें लगातार मलबा हटाकर फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं। अधिकारियों के अनुसार, कई इलाकों में बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र और IMF से मांगी मदद सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यवाहक राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार राहत और बचाव अभियान को तेज करने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में भेजे जा सकें। उन्होंने यह भी बताया कि पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए लगभग 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर के शुरुआती सहायता पैकेज को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से भी बातचीत की जा रही है। ला गुएरा सबसे अधिक प्रभावित सरकार के अनुसार, ला गुएरा प्रांत इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। यहां बड़ी संख्या में इमारतें ढह गई हैं और कई इलाकों में सड़क व संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे राहत कार्यों में कठिनाई आ रही है। भूकंप के झटके इतने शक्तिशाली थे कि पड़ोसी देशों तक महसूस किए गए। ब्राजील के अमेजन क्षेत्र में एहतियात के तौर पर कई इमारतों को खाली कराया गया। मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी बचाव दल क्षतिग्रस्त इमारतों में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाएं, राहत सामग्री और अस्थायी शिविरों की व्यवस्था शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित क्षेत्रों की पूरी तरह जांच नहीं हो जाती, तब तक मृतकों की अंतिम संख्या बताना संभव नहीं होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेजुएला में आई इस विनाशकारी आपदा पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ खड़ा है और हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की। अमेरिका ने भेजी मानवीय सहायता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की है कि अमेरिका वेनेजुएला के लिए तत्काल खोज एवं बचाव दल, चिकित्सा संसाधन और मानवीय सहायता भेज रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी एजेंसियां स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्यों में सहयोग कर रही हैं। जापान में भी आया 7.2 तीव्रता का भूकंप इसी बीच गुरुवार को जापान के उत्तरी तट के पास भी 7.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। हालांकि जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने स्पष्ट किया कि इस भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं है। भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 50 किलोमीटर की गहराई में था। इसके झटके पूर्वोत्तर जापान के कई इलाकों के साथ राजधानी टोक्यो में भी महसूस किए गए। जापान में फिलहाल बड़े नुकसान की सूचना नहीं जापान सरकार के शीर्ष प्रवक्ता मिनोरू किहारा ने बताया कि अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि सरकार की आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत कार्य शुरू किए जाएंगे।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
lightning strike
शादी में मौत बनकर आई आसमानी बिजली, दो की मौत

जामताड़ा, एजेंसियां। बुधवार देर रात एक शादी समारोह में खुशियां मनाते लोगों पर आसमान से मौत बनकर बिजली गिरी। जामताड़ा जिले के बिंदापाथर थाना क्षेत्र के चरकादाहा गांव में वज्रपात से दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। देखते ही देखते शादी का खुशनुमा माहौल गम और सन्नाटे में बदल गया।   बारिश से बचने के लिए शेड में थे सभी, तभी गिरी बिजली चरकादाहा गांव में शादी समारोह चल रहा था और गांव के सभी लोग उत्सव में शामिल थे। देर रात अचानक तेज आंधी और बारिश आ गई। बारिश से बचने के लिए लोग शेड का सहारा लेने लगे, लेकिन तभी जोरदार गरज के साथ वज्रपात हुआ जिसने दो लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।   अफरातफरी में अस्पताल पहुंचाए गए घायल घटना के बाद समारोह में अफरातफरी मच गई। गांव वालों ने किसी तरह मृतकों और घायलों को सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने दो को मृत घोषित किया। दोनों घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है।   पुलिस मौके पर, मुआवजे का आश्वासन घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अनुमंडल पदाधिकारी अनंत कुमार ने बताया कि मृतक परिजनों और घायलों को सरकार की ओर से उचित मुआवजा दिया जाएगा। फिलहाल पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

anjali kumari जून 25, 2026 0
Massive earthquake in Venezuela Caracas damage after two strong 7.2 and 7.5 magnitude quakes
39 सेकंड में आए दो भीषण भूकंप, वेनेजुएला में तबाही का मंजर; 10 हजार से 1 लाख मौतों की आशंका

  काराकस: वेनेजुएला में बुधवार को आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। महज 39 सेकंड के अंतराल में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के झटकों ने राजधानी काराकस समेत देश के कई हिस्सों को हिला दिया। भूकंप के बाद सड़कों में गहरी दरारें पड़ गईं, कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और हजारों लोग दहशत में घरों तथा कार्यालयों से बाहर निकल आए। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) ने शुरुआती आकलन में चेतावनी दी है कि इस आपदा में मृतकों की संख्या 10 हजार से लेकर 1 लाख तक पहुंच सकती है। हालांकि आधिकारिक तौर पर हताहतों के आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं। 39 सेकंड के भीतर आए दो बड़े झटके यूएसजीएस के अनुसार पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, जिसका केंद्र सैन फेलिप क्षेत्र के पास स्थित था। यह झटका भारतीय समयानुसार देर रात महसूस किया गया। इसके ठीक 39 सेकंड बाद दूसरा और अधिक शक्तिशाली 7.5 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र यूमारे क्षेत्र के निकट था। विशेषज्ञों ने इस घटना को "अर्थक्वेक डबलट" यानी एक-दूसरे से जुड़े दो बड़े भूकंपों की दुर्लभ घटना बताया है। दोनों भूकंपों के केंद्रों के बीच लगभग 45 किलोमीटर की दूरी थी और उनकी गहराई भी अलग-अलग दर्ज की गई। राजधानी काराकस में मची अफरा-तफरी भूकंप के तेज झटकों का असर राजधानी काराकस में भी देखने को मिला। कंपन महसूस होते ही लोग अपने घरों, दफ्तरों और व्यावसायिक इमारतों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में बिजली और संचार सेवाओं पर भी असर पड़ने की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई सेकंड तक धरती जोर-जोर से हिलती रही, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। आपातकालीन सेवाओं को तुरंत सक्रिय कर दिया गया और राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया। सड़कों में दरारें, इमारतों को भारी नुकसान सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में सामने आए वीडियो और तस्वीरों में भूकंप की भयावहता साफ दिखाई दे रही है। कई सड़कों पर लंबी दरारें पड़ गई हैं, जबकि कई इमारतों की दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं। काराकस की एक बहुमंजिला इमारत की छत पर बने स्विमिंग पूल का पानी भूकंप के झटकों से बाहर छलकता हुआ दिखाई दिया। वहीं, एक हवाई अड्डे के टर्मिनल में मौजूद यात्री कंपन महसूस होते ही सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। 1967 के भूकंप से भी ज्यादा डरावना अनुभव 80 वर्षीय मारिया रोमेरो ने स्थानीय मीडिया को बताया कि उन्होंने 1967 का विनाशकारी भूकंप भी देखा था, लेकिन इस बार का अनुभव उससे भी अधिक भयावह था। उन्होंने कहा, "यह भूकंप बेहद डरावना था। पुलिस की मदद से हमें इमारत से बाहर निकाला गया। मैंने अपने जीवन में ऐसा कंपन पहले कभी महसूस नहीं किया।" भारी जनहानि की आशंका यूएसजीएस ने अपने प्रारंभिक विश्लेषण में कहा है कि भूकंप का प्रभाव बड़े क्षेत्र में महसूस किया गया है और व्यापक नुकसान की संभावना है। संस्था ने चेतावनी दी है कि मृतकों की संख्या हजारों में पहुंच सकती है और कई क्षेत्रों में बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संरचनात्मक क्षति अधिक हुई है तो जनहानि का आंकड़ा काफी बढ़ सकता है। सरकार ने शुरू किया नुकसान का आकलन वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति Delcy Rodríguez ने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और जल्द ही देश को विस्तृत जानकारी दी जाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि प्रशासन, आपदा प्रबंधन एजेंसियां और सुरक्षा बल प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। आफ्टरशॉक का खतरा बरकरार भूकंप के बाद विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों में आफ्टरशॉक यानी भूकंप के बाद आने वाले झटकों की आशंका बनी हुई है। राहत एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं और लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों में वापस न लौटने की अपील की गई है। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश और प्रभावित इलाकों में सहायता पहुंचाने का काम कर रहे हैं।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
People evacuate buildings after a strong earthquake strikes off Japan’s Iwate coast, shaking northern regions.
वेनेजुएला के बाद जापान में जोरदार भूकंप, 7.0 तीव्रता से कांपी धरती; सुनामी का खतरा नहीं

  टोक्यो: वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंप के कुछ ही घंटों बाद जापान में भी धरती जोरदार झटकों से कांप उठी। गुरुवार सुबह उत्तरी जापान के इवाते प्रांत के तट के पास आए 7.0 तीव्रता के भूकंप ने कई इलाकों में दहशत फैला दी। भूकंप के झटके आओमोरी प्रांत के हाशिकामी शहर समेत आसपास के क्षेत्रों में सबसे अधिक महसूस किए गए। राहत की बात यह रही कि जापानी अधिकारियों ने भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं बताया है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की भी कोई सूचना नहीं मिली है। टोक्यो तक महसूस हुए भूकंप के झटके स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी टोक्यो में भी हल्के झटके महसूस किए गए। भूकंप के बाद लोग कुछ समय के लिए घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। सरकारी प्रसारक एनएचके द्वारा जारी तस्वीरों और वीडियो में प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य यातायात चलता हुआ दिखाई दिया और सार्वजनिक सेवाएं भी सुचारू रूप से संचालित होती नजर आईं। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। भूकंप की तीव्रता को लेकर अलग-अलग आंकड़े भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.0 दर्ज की गई। वहीं जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने इसकी तीव्रता 6.9 बताई है। एजेंसी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र इवाते प्रांत के निकट समुद्र में था और इसकी गहराई लगभग 50 किलोमीटर थी। अपेक्षाकृत  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Residents evacuate buildings after a powerful 6.8 magnitude earthquake strikes Central Sulawesi, Indonesia.
इंडोनेशिया में 6.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, दहशत में घरों से बाहर निकले लोग

  जकार्ता: इंडोनेशिया में मंगलवार सुबह 6.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने से लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप के तेज झटके महसूस होते ही पालू और सेंट्रल सुलावेसी समेत कई इलाकों में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए। संभावित आफ्टरशॉक और सुनामी के खतरे को देखते हुए तटीय क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। 45 किलोमीटर की गहराई में आया भूकंप नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप मंगलवार सुबह 08:57:49 बजे (भारतीय समयानुसार) आया। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.8 दर्ज की गई। इसका केंद्र 1.073 डिग्री दक्षिण अक्षांश और 120.263 डिग्री पूर्व देशांतर पर स्थित था, जबकि इसकी गहराई जमीन से 45 किलोमीटर नीचे मापी गई। कई इलाकों में महसूस हुए जोरदार झटके स्थानीय मीडिया संस्थान 'जकार्ता ग्लोब' के मुताबिक, पालू, सिगी, डोंगगाला और टोजो उना-उना क्षेत्रों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। झटकों के बाद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई परिवार घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों में एकत्र हो गए। सुनामी और आफ्टरशॉक के डर से खाली किए तटीय इलाके रिपोर्ट के अनुसार, संभावित सुनामी और आफ्टरशॉक के खतरे को देखते हुए लोगों ने एहतियातन तटीय इलाकों को खाली कर दिया। स्थानीय प्रशासन ने भी लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। नुकसान का आकलन करने में जुटे अधिकारी अभी तक किसी के हताहत होने या बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां प्रभावित इलाकों में स्थिति का जायजा लेने और संभावित नुकसान का आकलन करने में जुटी हुई हैं। जून में दक्षिण-पूर्व एशिया का दूसरा बड़ा भूकंप गौरतलब है कि जून महीने में दक्षिण-पूर्व एशिया में यह दूसरा बड़ा भूकंप है। इससे पहले 8 जून को फिलीपींस में 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसकी जानकारी भी नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने दी थी। लगातार बढ़ रही भूकंपीय गतिविधियों ने क्षेत्रीय देशों की चिंता बढ़ा दी है।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Residents stand outdoors after strong earthquake tremors in Cuba and Iran, causing widespread concern.
क्यूबा में 150 साल का सबसे शक्तिशाली भूकंप, ईरान में भी कांपी धरती; आखिर क्यों बढ़ रही हैं भूकंपीय गतिविधियां?

  तेहरान: दुनिया के कई हिस्सों में लगातार आ रहे भूकंपों ने वैज्ञानिकों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। फिलीपींस में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद अब क्यूबा और ईरान में भी धरती कांपने से लोगों में दहशत फैल गई। क्यूबा के उत्तर-पश्चिमी तट के पास आए 6.1 तीव्रता के भूकंप को विशेषज्ञों ने पिछले लगभग 150 वर्षों में क्षेत्र के सबसे शक्तिशाली झटकों में से एक बताया है। वहीं कुछ ही घंटों बाद दक्षिणी ईरान में भी 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। दोनों देशों में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में आ रहे भूकंपों ने वैश्विक स्तर पर भूगर्भीय गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्यूबा के पास समुद्र के भीतर आया शक्तिशाली भूकंप अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, क्यूबा के उत्तर-पश्चिमी तट के पास आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.1 मापी गई। इसका केंद्र समुद्र के भीतर लगभग 26 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। भूकंप का केंद्र पश्चिमी क्यूबा के मांतुआ क्षेत्र से करीब 104 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा में बताया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मेक्सिको की खाड़ी क्षेत्र में हाल के दशकों के सबसे महत्वपूर्ण भूकंपीय घटनाक्रमों में से एक है। वैज्ञानिकों ने बताया असामान्य घटना विशेषज्ञों का कहना है कि यह भूकंप कई मायनों में असामान्य है। सामान्यतः बड़े भूकंप दो टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाओं पर आते हैं, लेकिन यह झटका प्लेट के भीतर उत्पन्न हुआ। भूकंप वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्ष 1880 में सैन क्रिस्टोबल क्षेत्र के पास लगभग 6.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। उसके बाद इतने बड़े स्तर का झटका इस क्षेत्र में महसूस नहीं किया गया था। फ्लोरिडा और मेक्सिको तक महसूस हुए झटके क्यूबा में आए भूकंप का असर केवल द्वीपीय क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। इसके झटके कैरेबियन क्षेत्र, मेक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप और अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य तक महसूस किए गए। क्यूबा की राजधानी हवाना सहित कई शहरों में लोग घबराकर घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। स्थानीय निवासियों ने बताया कि इमारतों में तेज कंपन महसूस हुआ और कई लोगों ने पहली बार इतनी तीव्रता के झटके अनुभव किए। फिलहाल नहीं जारी हुई सुनामी चेतावनी भूकंप के बाद राहत एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े संरचनात्मक नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों ने संभावना जताई है कि आने वाले दिनों में कुछ हल्के आफ्टरशॉक्स महसूस हो सकते हैं, लेकिन उनके ज्यादा खतरनाक होने की आशंका नहीं है। राहत की बात यह रही कि इस भूकंप के बाद किसी प्रकार की सुनामी चेतावनी जारी नहीं की गई। ईरान में भी देर रात कांपी धरती क्यूबा में आए भूकंप के कुछ घंटों बाद दक्षिणी ईरान के होर्मोजगान प्रांत में भी भूकंप दर्ज किया गया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, सरगाज क्षेत्र के निकट आए इस भूकंप की तीव्रता 5.0 मापी गई। रात के समय आए झटकों के कारण लोग नींद से जाग गए और एहतियातन खुले स्थानों की ओर निकल आए। शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली है। गहराई और तीव्रता को लेकर अलग-अलग आंकड़े अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने ईरान के भूकंप की तीव्रता 4.9 बताई है, जबकि ईरानी अधिकारियों ने इसे 5.0 दर्ज किया है। भूकंप की गहराई को लेकर भी दोनों पक्षों के आंकड़ों में अंतर देखा गया। अमेरिकी एजेंसी ने इसकी गहराई 10 किलोमीटर बताई, जबकि ईरानी अधिकारियों के अनुसार भूकंप लगभग 22 किलोमीटर नीचे आया था। आखिर क्यों बार-बार भूकंप की चपेट में आता है ईरान? विशेषज्ञों के अनुसार ईरान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। इसकी प्रमुख वजह देश की जटिल भूगर्भीय संरचना और सक्रिय फॉल्ट लाइनें हैं। ईरान कई प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के संगम क्षेत्र में स्थित है। इसके दक्षिण-पूर्व में भारतीय प्लेट, उत्तर में यूरेशियन प्लेट और दक्षिण-पश्चिम में अरबियन प्लेट मौजूद हैं। इन प्लेटों के बीच लगातार दबाव और टकराव से भूगर्भीय तनाव पैदा होता रहता है, जो समय-समय पर भूकंप के रूप में सामने आता है। ज़ाग्रोस पर्वतीय क्षेत्र बढ़ाता है खतरा भूवैज्ञानिकों का मानना है कि अरबियन और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर से बने ज़ाग्रोस पर्वतीय क्षेत्र में लगातार भूगर्भीय गतिविधियां होती रहती हैं। यही कारण है कि ईरान में छोटे और बड़े भूकंप नियमित रूप से दर्ज किए जाते हैं। मंगलवार को आया भूकंप भी इसी भूगर्भीय प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। क्या दुनिया में अचानक बढ़ गए हैं भूकंप? विशेषज्ञों का कहना है कि क्यूबा, ईरान और फिलीपींस में आए हालिया भूकंप आपस में सीधे तौर पर जुड़े हुए नहीं हैं। ये अलग-अलग भूगर्भीय क्षेत्रों में स्थित हैं और अलग-अलग टेक्टोनिक गतिविधियों के कारण उत्पन्न हुए हैं। जब कम समय के भीतर दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बड़े भूकंप आते हैं तो लोगों को ऐसा लग सकता है कि भूकंप अचानक बढ़ गए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पृथ्वी की स्वाभाविक भूगर्भीय प्रक्रिया का हिस्सा है और फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि हालिया घटनाएं किसी एक वैश्विक कारण से जुड़ी हुई हैं। 100 वर्षों में लाखों जिंदगियां प्रभावित ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1900 के बाद से केवल ईरान में ही विभिन्न भूकंपों के कारण 1.26 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। वहीं दुनिया के अन्य भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में भी समय-समय पर आए बड़े झटकों ने भारी तबाही मचाई है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंपों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन बेहतर निर्माण मानकों, आपदा प्रबंधन और समय पर चेतावनी प्रणालियों के जरिए इनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
Philippines Earthquake
फिलीपींस में भूकंप से तबाही: चार की मौत, 200 से अधिक घायल

मनीला, एजेंसियां। फिलीपींस के दक्षिणी हिस्से में स्थित मिंडानाओ द्वीप के पास आए शक्तिशाली भूकंप ने व्यापक तबाही मचा दी। 8.1 तीव्रता के इस भूकंप के झटकों से कई इमारतें पलभर में धराशायी हो गईं, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई इलाकों में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।   इमारतें ढहीं, लोग जान बचाकर भागे भूकंप के तेज झटकों के बाद लोग घरों, स्कूलों, अस्पतालों और कार्यालयों से बाहर निकलकर खुले स्थानों की ओर भागने लगे। कई शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक भवनों को नुकसान पहुंचा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में इमारतों के गिरने और लोगों के बीच फैली दहशत साफ देखी जा सकती है। कुछ क्षेत्रों में बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।   सुनामी अलर्ट ने बढ़ाई चिंता भूकंप के बाद प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने फिलीपींस के तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी अलर्ट जारी किया। विशेषज्ञों ने कुछ इलाकों में तीन मीटर तक ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई है। प्रशासन ने समुद्र तटों के पास रहने वाले लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। कई तटीय इलाकों में चेतावनी सायरन बजाए गए और राहत शिविर स्थापित किए गए।   राहत और बचाव कार्य जारी सेना, पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। कई स्थानों पर मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका है। सड़कों में दरारें आने और भवनों को नुकसान पहुंचने से राहत कार्य प्रभावित हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का वास्तविक आंकड़ा अभी सामने आना बाकी है।   आफ्टरशॉक से लोगों में डर कायम मुख्य भूकंप के कुछ घंटों बाद 6.1 तीव्रता का आफ्टरशॉक भी दर्ज किया गया, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई। कई परिवार रातभर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। फिलीपींस 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में स्थित है, जहां भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां अक्सर होती रहती हैं। इस बार का भूकंप हाल के वर्षों की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में माना जा रहा है।

Unknown जून 8, 2026 0
Powerful 7.8 magnitude earthquake strikes Mindanao, triggering tsunami alerts across Pacific coastal regions.
फिलीपींस में 7.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, कई देशों में सुनामी अलर्ट जारी

  मनीला: फिलीपींस के दक्षिणी मिंडानाओ क्षेत्र में सोमवार को आए 7.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद पूरे प्रशांत क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है। भूकंप के बाद फिलीपींस, इंडोनेशिया समेत कई देशों के तटीय इलाकों के लिए सुनामी चेतावनी जारी की गई है। स्थानीय प्रशासन ने समुद्र किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार, भूकंप की गहराई महज 10 किलोमीटर थी, जिसके कारण इसके झटके काफी तेज महसूस किए गए। शुरुआती आकलन में भूकंप की तीव्रता अलग-अलग दर्ज की गई, लेकिन बाद में इसे संशोधित कर 7.8 बताया गया। सुनामी की आशंका से बढ़ी चिंता भूकंप के तुरंत बाद अमेरिकी सुनामी चेतावनी प्रणाली ने संभावित समुद्री लहरों को लेकर अलर्ट जारी किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी उथली गहराई पर आए शक्तिशाली भूकंप से समुद्र में बड़ी लहरें उत्पन्न हो सकती हैं, जो तटीय क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती हैं। फिलीपींस इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्केनोलॉजी एंड सीस्मोलॉजी (PHIVOLCS) ने चेतावनी दी है कि कुछ तटीय क्षेत्रों में सामान्य ज्वार स्तर से एक मीटर या उससे अधिक ऊंची लहरें पहुंच सकती हैं। एजेंसी ने लोगों को समुद्र तटों से दूर रहने और ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है। इंडोनेशिया समेत कई देशों में अलर्ट इंडोनेशिया की मौसम, जलवायु और भूभौतिकी एजेंसी (BMKG) ने भी अपने उत्तर-पूर्वी तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी चेतावनी जारी की है। इसके अलावा ताइवान, मलेशिया, पापुआ न्यू गिनी और पश्चिमी प्रशांत महासागर के अन्य देशों को भी सतर्क रहने को कहा गया है। अधिकारियों ने समुद्र किनारे रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे किसी भी आपातकालीन निर्देश का तुरंत पालन करें और अफवाहों पर ध्यान न दें। आफ्टरशॉक का खतरा बरकरार विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी तीव्रता के भूकंप के बाद कई दिनों तक आफ्टरशॉक महसूस किए जा सकते हैं। फिलीपींस की भूवैज्ञानिक एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ घंटों और दिनों में क्षेत्र में और झटके आ सकते हैं। अभी तक बड़े नुकसान की सूचना नहीं फिलीपींस और इंडोनेशिया में प्रशासन संभावित नुकसान का आकलन कर रहा है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कुछ इमारतों में दरारें आई हैं और कई लोग घबराहट में घरों से बाहर निकल आए। अब तक किसी बड़े स्तर की तबाही या जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ‘रिंग ऑफ फायर’ में स्थित है क्षेत्र फिलीपींस और इंडोनेशिया दोनों प्रशांत महासागर के उस भूगर्भीय क्षेत्र में स्थित हैं जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण अक्सर शक्तिशाली भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसी भूगर्भीय सक्रियता के कारण इस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बना रहता है।  

Deepshikha जून 8, 2026 0
Thunderstorm and rainfall over Jharkhand with lightning strikes during pre-monsoon weather activity
झारखंड में सक्रिय हुई प्री-मानसून गतिविधियां, कई जिलों में बारिश; वज्रपात से तीन लोगों की मौत

रांची: झारखंड में मानसून के आगमन से पहले ही मौसम ने करवट ले ली है। राज्यभर में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिसके चलते कई जिलों में बारिश, मेघगर्जन और तेज हवाओं का असर देखने को मिल रहा है। हालांकि बारिश से जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं आकाशीय बिजली की घटनाओं ने चिंता भी बढ़ा दी है। पिछले 24 घंटों के दौरान वज्रपात की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हो गई। वज्रपात ने ली तीन लोगों की जान गढ़वा जिले के धुरकी प्रखंड स्थित परासपानी कला गांव में शनिवार शाम आकाशीय बिजली गिरने से 12 वर्षीय क्रमु कुमार की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं रामगढ़ के गंडके पाहन टोला निवासी 30 वर्षीय राजू मुंडा और कुजू के मुरपा कठरा टोला निवासी 16 वर्षीय साहिल कुमार भी वज्रपात की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की अपील की है। कई जिलों में हुई बारिश मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। वहीं कुछ इलाकों में भारी वर्षा भी हुई। सबसे अधिक 70.3 मिमी बारिश सिमडेगा के थर्थाइटांगर में रिकॉर्ड की गई। बारिश के कारण कई क्षेत्रों में तापमान में भी गिरावट दर्ज हुई है। पिछले 24 घंटे का मौसम सर्वाधिक अधिकतम तापमान: 37.6°C (डाल्टनगंज) न्यूनतम तापमान: 21.9°C (लातेहार-AWS) सर्वाधिक वर्षा: 70.3 मिमी (थर्थाइटांगर, सिमडेगा) कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी India Meteorological Department (आईएमडी) रांची केंद्र ने राज्य के कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण और पूर्वी उत्तर प्रदेश से तेलंगाना तक फैला ट्रफ सक्रिय है। इसी वजह से झारखंड में मौसम तेजी से बदल रहा है और आगामी दिनों में भी बारिश तथा वज्रपात की संभावना बनी रहेगी। 9 जून को इन जिलों में बारिश के आसार मौसम विभाग के अनुसार 9 जून को: रांची बोकारो रामगढ़ गुमला खूंटी सहित दक्षिणी और मध्य झारखंड के कई इलाकों में मेघगर्जन, तेज हवा और बारिश की संभावना है। इसके अलावा रांची में 10 और 11 जून को भी गरज-चमक के साथ बारिश होने के संकेत दिए गए हैं। लोगों को बरतनी होगी सावधानी मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को विशेष सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है, क्योंकि अगले कुछ दिनों तक वज्रपात की घटनाएं बढ़ सकती हैं।  

surbhi जून 8, 2026 0
Strong 6.9 magnitude earthquake strikes northern Chile near the Atacama Desert region.
चिली में 6.9 तीव्रता का जोरदार भूकंप, सुनामी का खतरा नहीं

उत्तरी Chile में सोमवार शाम 6.9 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। भूकंप का केंद्र कलामा शहर के पास अटाकामा रेगिस्तान क्षेत्र में जमीन के करीब 100 किलोमीटर नीचे बताया गया है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, भूकंप के झटके काफी तेज थे, लेकिन फिलहाल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की खबर नहीं है। स्थानीय प्रशासन ने भी कहा है कि स्थिति नियंत्रण में है। सुनामी का खतरा टला चिली की राष्ट्रीय आपदा एजेंसी ने साफ किया कि इस भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं है। इसलिए तटीय इलाकों में अलर्ट जारी नहीं किया गया। क्यों बार-बार आता है चिली में भूकंप? चिली दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में गिना जाता है। यहां नाजका प्लेट, दक्षिण अमेरिकी प्लेट और अंटार्कटिक प्लेट आपस में टकराती हैं, जिसकी वजह से अक्सर तेज भूकंप आते रहते हैं। पहले भी आ चुके हैं विनाशकारी भूकंप 1960 में वाल्दिविया में 9.5 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसे अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जाता है। 2010 में 8.8 तीव्रता के भूकंप में 500 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

surbhi मई 26, 2026 0
Rescue teams inspect damaged buildings after deadly earthquake struck Guangxi region in southern China.
चीन में भूकंप से तबाही: 2 लोगों की मौत, कई घायल, 13 इमारतें क्षतिग्रस्त

China के दक्षिणी क्षेत्र ग्वांग्शी में सोमवार तड़के आए तेज भूकंप ने भारी तबाही मचाई। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.2 मापी गई। भूकंप के कारण कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है, जबकि अब तक 2 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, भूकंप के झटकों के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और हजारों लोग घरों से बाहर निकल आए। 13 इमारतें तबाह, कई लोग घायल चीनी सरकारी मीडिया China Central Television की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप से कम से कम 13 इमारतें क्षतिग्रस्त या तबाह हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि कई लोग घायल हुए हैं, हालांकि अधिकांश घायलों की स्थिति गंभीर नहीं है। घायलों में से चार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राहत एजेंसियों को आशंका है कि कुछ लोग अभी भी क्षतिग्रस्त इमारतों के भीतर फंसे हो सकते हैं। 7 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया भूकंप के बाद प्रशासन ने तेजी से राहत और बचाव अभियान शुरू किया। अब तक 7 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रही हैं। प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने की अपील की है। रेल यातायात प्रभावित भूकंप के बाद इलाके में रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा है। चीनी रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पटरियों और पुलों की सुरक्षा जांच की जा रही है, जिसके चलते कुछ ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि बिजली, पानी, गैस सप्लाई और सड़क यातायात फिलहाल सामान्य रूप से चल रहे हैं। आफ्टरशॉक को लेकर अलर्ट स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और संभावित आफ्टरशॉक को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Massive ash cloud rises after Mount Dukono volcanic eruption in Indonesia killing several hikers
इंडोनेशिया में ज्वालामुखी विस्फोट से बड़ा हादसा, 3 टूरिस्ट की दर्दनाक मौत

इंडोनेशिया में एक खतरनाक ज्वालामुखी विस्फोट ने बड़ा हादसा पैदा कर दिया. Mount Dukono ज्वालामुखी में हुए विस्फोट के दौरान कम से कम तीन हाइकर्स की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों को बचाकर नीचे लाया गया. हादसे के बाद आसमान में करीब 10 किलोमीटर ऊंचाई तक राख और धुएं का विशाल गुबार उठता दिखाई दिया. चेतावनी के बावजूद पहुंचे थे हाइकर्स स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, ज्वालामुखी के आसपास के इलाके को पहले ही “नो-गो जोन” घोषित किया गया था. वैज्ञानिकों और प्रशासन ने दिसंबर से लगातार चेतावनी जारी कर रखी थी कि लोग क्रेटर के आसपास न जाएं, क्योंकि वहां भूकंपीय गतिविधियां तेजी से बढ़ रही थीं. इसके बावजूद करीब 20 हाइकर्स का समूह ज्वालामुखी की ढलानों पर पहुंच गया. इनमें 9 पर्यटक सिंगापुर के बताए जा रहे हैं, जबकि बाकी इंडोनेशियाई नागरिक थे. अचानक फटा ज्वालामुखी रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार को अचानक ज्वालामुखी में तेज विस्फोट हुआ और गर्म राख, धुआं तथा गैस का गुबार तेजी से ऊपर उठा. विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि राख लगभग 10 किलोमीटर तक आसमान में फैल गई. हादसे में: 2 सिंगापुर के पर्यटकों और 1 स्थानीय नागरिक की मौत हो गई. अधिकारियों ने बताया कि कई लोग किसी तरह नीचे उतरने में सफल रहे, लेकिन मृतकों के शव अभी भी पहाड़ी इलाके में फंसे हुए हैं. 15 लोग सुरक्षित बचाए गए Agence France-Presse की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय पुलिस ने बताया कि अब तक 15 हाइकर्स को सुरक्षित नीचे लाया जा चुका है. हालांकि कुछ लोगों के बारे में शुरुआती घंटों में जानकारी स्पष्ट नहीं थी. पुलिस ने गाइड और एक पोर्टर को हिरासत में लिया है. उन पर प्रतिबंधित इलाके में लोगों को ले जाने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है. सोशल मीडिया कंटेंट के लिए लिया जोखिम? स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कई विदेशी पर्यटक सोशल मीडिया वीडियो और तस्वीरें बनाने के लिए जोखिम भरे इलाकों में पहुंच जाते हैं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार: “स्थानीय लोग खतरे को समझते हैं और वहां जाने से बचते हैं, लेकिन कई विदेशी पर्यटक सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के लिए चेतावनियों को नजरअंदाज कर देते हैं.” पहले ही जारी थी चेतावनी Center for Volcanology and Geological Hazard Mitigation ने पहले ही पर्यटकों को मालुपांग वारिरांग क्रेटर से कम से कम 4 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी थी. वैज्ञानिकों ने वहां बढ़ती भूकंपीय गतिविधि और संभावित विस्फोट का खतरा बताया था. “रिंग ऑफ फायर” में स्थित है इंडोनेशिया इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक ज्वालामुखीय सक्रिय देशों में शामिल है. यह देश प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं. देश में लगभग 130 सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद हैं और कई इलाकों में लगातार निगरानी रखी जाती है.  

surbhi मई 8, 2026 0
People gather outside homes after 5.2 magnitude earthquake tremors
मणिपुर में भूकंप के झटके: कामजोंग में 5.2 तीव्रता, कोई बड़ा नुकसान नहीं

इंफाल/कामजोंग: Kamjong जिले में मंगलवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। National Centre for Seismology (NCS) के अनुसार, सुबह 5:59 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.2 दर्ज की गई। जमीन के भीतर गहराई में आया झटका भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर लगभग 62 किलोमीटर की गहराई में था, जिसकी वजह से झटके तो महसूस हुए लेकिन इसका असर सीमित रहा। नुकसान की कोई खबर नहीं प्रशासन के मुताबिक, फिलहाल: किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है जनहानि की भी कोई खबर सामने नहीं आई है हालांकि, एहतियात के तौर पर स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। लोगों में दहशत, घरों से बाहर निकले सुबह-सुबह आए झटकों के कारण लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। कुछ इलाकों में हल्के कंपन की शिकायतें मिलीं, लेकिन स्थिति जल्द सामान्य हो गई। पूर्वोत्तर में क्यों आते हैं भूकंप? विशेषज्ञों के अनुसार, Northeast India भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि अधिक रहती है। इसी कारण यहां समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Landslide and heavy snowfall in Sikkim blocking roads, stranded tourists waiting for rescue
सिक्किम में बर्फबारी और भूस्खलन, 1500 पर्यटक फंसे; 15 की मौत

देशभर में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। सिक्किम से लेकर उत्तर भारत तक बारिश, बर्फबारी और आंधी-तूफान ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। सिक्किम में लैंडस्लाइड, 1500 टूरिस्ट फंसे सिक्किम के मंगन जिले में लाचेन-चुंगथांग रोड पर रविवार को भारी बारिश और बर्फबारी के कारण भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हुआ। सड़क पर बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं, जिससे करीब 1500 पर्यटक फंस गए हैं। प्रशासन और राहत टीमें मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं और पर्यटकों को सुरक्षित निकालने की कोशिश जारी है। उत्तराखंड में बर्फबारी और ओलावृष्टि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से उत्तराखंड के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिला। उत्तरकाशी के यमुनोत्री धाम समेत तीन जिलों में बर्फबारी हुई, जबकि छह जिलों में बारिश के साथ ओले गिरे। इससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। हिमाचल में भारी बर्फबारी, फसलों को नुकसान हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति के ऊंचे इलाकों में भी जोरदार बर्फबारी हुई। गोंदला: 28.5 सेमी बर्फ केलांग: 20 सेमी हंसा: 5 सेमी वहीं, शिमला, कुल्लू और मंडी में ओलावृष्टि से सेब की फसल को नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। यूपी में आंधी-बारिश का कहर, 15 की मौत उत्तर प्रदेश में आंधी, बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। पिछले 72 घंटों में बिजली गिरने से 15 लोगों की मौत हो चुकी है। काशी, गोंडा, सुल्तानपुर, कानपुर समेत 11 जिलों में रुक-रुककर बारिश हुई, जबकि कानपुर, मथुरा और संभल में ओले भी गिरे। 16 राज्यों में मौसम विभाग का अलर्ट मौसम विभाग ने देश के 16 राज्यों में आंधी, बारिश और तेज हवाओं को लेकर अलर्ट जारी किया है। आने वाले दिनों में भी मौसम ऐसा ही बना रहने की संभावना है। सतर्क रहने की सलाह प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। खासकर पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
Strong earthquake hits Indonesia sea region causing damage and minor tsunami waves along coast
इंडोनेशिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की हल्की लहरें; एक महिला की मौत

जकार्ता/मोलूका सागर, गुरुवार: इंडोनेशिया में गुरुवार को 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिससे कई इलाकों में दहशत फैल गई। भूकंप का केंद्र मोलूका सागर में जमीन से लगभग 35 किलोमीटर की गहराई में बताया गया है। तेज झटकों के बाद कुछ तटीय क्षेत्रों में सुनामी की छोटी लहरें भी दर्ज की गईं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप के झटके उत्तरी सुलावेसी और उत्तर मलुकु क्षेत्रों में 10 से 20 सेकंड तक महसूस किए गए। इस प्राकृतिक आपदा में एक महिला की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई घरों और इमारतों को नुकसान पहुंचा है। सुनामी की छोटी लहरें उठीं, बड़ा खतरा टला इंडोनेशिया की मौसम, जलवायु और भूभौतिकी एजेंसी (BMKG) ने बताया कि भूकंप के करीब आधे घंटे के भीतर कई स्थानों पर सुनामी की हल्की लहरें उठीं। बिटुंग में करीब 8 इंच पश्चिम हलमाहेरा में लगभग 1 फुट फिलीपींस में करीब 2 इंच हालांकि, प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने स्पष्ट किया कि दूर-दराज के इलाकों के लिए किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है। कई इलाकों में नुकसान, राहत-बचाव जारी आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक, टेरनेट शहर और आसपास के क्षेत्रों में हल्का नुकसान हुआ है। बटांग दुआ द्वीप में एक चर्च क्षतिग्रस्त दक्षिण टेरनेट में दो घरों को नुकसान बिटुंग में नुकसान का आकलन जारी भूकंप के बाद समुद्र के भीतर दो और झटके भी महसूस किए गए, लेकिन उनसे किसी सुनामी खतरे की पुष्टि नहीं हुई। प्रशासन ने जारी किया अलर्ट इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन की अनुमति के बिना समुद्र के पास न जाएं। खोज और बचाव टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता का मतलब भूकंप की ताकत रिक्टर स्केल पर मापी जाती है, जिससे उसके प्रभाव और संभावित नुकसान का अंदाजा लगाया जाता है: 8 या उससे अधिक: बेहद विनाशकारी, भारी तबाही की आशंका 7 से 7.9: शक्तिशाली भूकंप, बड़े क्षेत्र में नुकसान संभव 6 से 6.9: मजबूत झटके, संरचनात्मक क्षति की संभावना 5 से 5.9: मध्यम भूकंप, कमजोर इमारतों को नुकसान 2 या कम: आमतौर पर महसूस नहीं होते

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0