नई दिल्ली: विपक्षी गठबंधन INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) ने केंद्र सरकार के खिलाफ साझा मोर्चा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सोमवार (8 जून) को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित बैठक में 23 विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया और कई राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा कि गठबंधन पांच प्रमुख मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष करेगा और इन विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा। NEET और CBSE विवाद पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग बैठक में NEET-UG परीक्षा और CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। INDIA गठबंधन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan से तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करने के लिए जवाबदेही तय होना जरूरी है। मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल बैठक में चुनावी पारदर्शिता को लेकर भी चर्चा हुई। गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। इस संबंध में INDIA गठबंधन ने निर्णय लिया कि वह Surya Kant को पत्र लिखकर चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग करेगा। बेरोजगारी और महंगाई पर सर्वदलीय बैठक की मांग विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से देश की आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। गठबंधन का कहना है कि इन मुद्दों का असर सीधे आम जनता पर पड़ रहा है और इन पर व्यापक राजनीतिक संवाद की आवश्यकता है। मानसून सत्र के लिए विपक्ष की तैयारी बैठक में संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर भी रणनीति बनाई गई। विपक्षी दलों ने तय किया कि सत्र के दौरान समन्वय बनाए रखने के लिए प्रतिदिन नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में बैठक आयोजित की जाएगी। इसके अलावा गठबंधन की नियमित बैठकों का सिलसिला जारी रखने पर सहमति बनी है। निर्णय लिया गया कि INDIA गठबंधन की अगली बैठक हैदराबाद में आयोजित की जाएगी। बैठक में शामिल हुए प्रमुख नेता बैठक में कांग्रेस की ओर से Sonia Gandhi, Rahul Gandhi और मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद रहे। इसके अलावा Mamata Banerjee, Akhilesh Yadav, Tejashwi Yadav, Supriya Sule और Uddhav Thackeray समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। वहीं Omar Abdullah, Mehbooba Mufti, D Raja और Dipankar Bhattacharya ने भी बैठक में भाग लिया। DMK और AAP ने बनाई दूरी बैठक में Dravida Munnetra Kazhagam और Aam Aadmi Party शामिल नहीं हुईं। AAP पहले ही सार्वजनिक रूप से INDIA गठबंधन से दूरी बना चुकी है, जबकि DMK ने राजनीतिक कारणों का हवाला देते हुए बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया था। भाजपा के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ विपक्षी एकता पर जोर बैठक के दौरान नेताओं ने देश में भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और विपक्षी दलों के सामने मौजूद चुनौतियों पर भी चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सभी सहयोगी दलों से एकजुटता बनाए रखने और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ साझा संघर्ष जारी रखने की अपील की। गठबंधन नेताओं का मानना है कि आगामी राजनीतिक और संसदीय चुनौतियों का सामना करने के लिए विपक्षी एकता को और मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर जाने-माने कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बिना किसी व्यक्ति या संगठन का नाम लिए कहा कि विदेशों में बैठे कुछ लोग सोशल मीडिया और डिजिटल प्रभाव के जरिए भारत की दिशा प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। नैनीताल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कुमार विश्वास ने कहा कि कुछ लोग विदेशों में रहकर ऑनलाइन अभियानों और सोशल मीडिया समर्थन के सहारे देश के युवाओं को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत को दूसरे देशों की राह पर ले जाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि देश के युवाओं को अपने विवेक और संस्कारों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्रों, युवाओं और अभिभावकों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन में कई लोग कॉकरोच के मुखौटे पहनकर पहुंचे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार तथा जवाबदेही की मांग करते हुए नारेबाजी की। अभिजीत दीपके ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन सफल रहा और इसमें बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। दीपके ने कहा कि अब आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की योजना बनाई जा रही है। देशव्यापी अभियान की तैयारी प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में दीपके ने कहा कि संगठन आने वाले दिनों में देशभर में अभियान चलाएगा। उनके अनुसार, यदि सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। संगठन ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो विभिन्न राज्यों में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। किन मुद्दों को उठा रही है CJP? कॉकरोच जनता पार्टी खुद को युवाओं के नेतृत्व वाला ऑनलाइन और सामाजिक आंदोलन बताती है। संगठन विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, परीक्षा प्रबंधन, मूल्यांकन प्रक्रिया और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को उठा रहा है। इस अभियान में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET), केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) और कर्मचारी चयन आयोग (SSC) से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता भी हुए शामिल जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk भी शामिल हुए। इसके अलावा विभिन्न छात्र संगठनों, युवा समूहों और वामपंथी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी और पुलिस की निगरानी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि वह अमेरिका से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं और शनिवार सुबह दिल्ली पहुंचेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत के लिए निकल गया हूं। मैं अपना भविष्य संविधान के हाथों में छोड़ता हूं। जय भीम।” उनके इस संदेश के बाद राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली में प्रस्तावित है बड़ा विरोध प्रदर्शन अभिजीत दीपके ने बताया कि दिल्ली पहुंचने के बाद वह सबसे पहले संसद मार्ग थाने जाएंगे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों और पार्टी के पंजीकृत सदस्यों से भी प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। हालांकि अभी तक दिल्ली पुलिस से प्रदर्शन की औपचारिक अनुमति नहीं मिली है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan का इस्तीफा बताया जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि नीट पेपर लीक और सीबीएसई परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ियों के मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। लाखों समर्थकों का दावा एक साक्षात्कार में अभिजीत दीपके ने दावा किया कि उनकी पार्टी के 11 लाख से अधिक पंजीकृत सदस्य हैं और हजारों लोग दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में समर्थकों ने कार्यक्रम में भाग लेने की सहमति दी है। कैसे शुरू हुई कॉकरोच जनता पार्टी? कॉकरोच जनता पार्टी का नाम सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में चर्चा में आया था। बाद में यह एक संगठित ऑनलाइन आंदोलन के रूप में सामने आया। पार्टी और उसके समर्थक बेरोजगारी, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। प्रशासन की नजर प्रदर्शन पर दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। प्रदर्शन को अनुमति मिलेगी या नहीं, और इसमें कितने लोग शामिल होंगे, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल सभी की नजर अभिजीत दीपके के दिल्ली पहुंचने और उनके अगले कदम पर टिकी हुई है।
सीबीएसई और नीट परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए हैं और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाये हैं। राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है, जबकि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पलटवार करते हुए राहुल गांधी को चुनावी हार से हताश बताया। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा- राहुल गांधी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं लगती केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि CBSE ने पहले ही इस मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है और सभी प्रक्रियाएं भारत सरकार की खरीद नीति के अनुसार पूरी की गई हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। राहुल गांधी पर हमला करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “लगातार चुनावी हार के कारण राहुल गांधी हताश नजर आते हैं। उन्होंने SIR का विरोध किया, EVM का विरोध किया और डिजिटल इंडिया का भी विरोध किया। ऐसा लगता है कि वे भारत की वैज्ञानिक प्रगति के साथ खड़े नहीं हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी की बयानबाजी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित लगती है। ‘यह राजनीति करने का समय नहीं’, शिक्षा मंत्री की अपील धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परीक्षा से जुड़े विवाद के कारण छात्रों और अभिभावकों में पहले से ही तनाव है और इस समय राजनीति करने से स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने कहा, “सरकार की ओर से यदि किसी प्रकार की असुविधा हुई है, तो मैं स्वयं उसकी जिम्मेदारी लेता हूं। लेकिन अभी सबसे जरूरी बात यह है कि छात्रों का मानसिक तनाव और न बढ़े।” केंद्रीय मंत्री ने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की कि वे ऐसे बयान देने से बचें, जिससे छात्रों की चिंता और बढ़े। राहुल गांधी ने उठाये CBSE कॉन्ट्रैक्ट और कंपनी चयन पर सवाल राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शिक्षा मंत्री पर पलटवार करते हुए कहा कि व्यक्तिगत हमला करने से सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। उन्होंने लिखा, “धर्मेंद्र प्रधान जी, आप मुझ पर जितना चाहें हमला कर सकते हैं, लेकिन इससे आप अपने अपराधों से बरी नहीं होंगे और न ही यह मुझे 18.5 लाख बच्चों के लिए जवाब मांगने से रोक पाएगा।” राहुल गांधी ने CBSE के OSM कॉन्ट्रैक्ट को लेकर भी सवाल उठाये। उन्होंने पूछा कि यह कॉन्ट्रैक्ट COEMPT नाम की कंपनी को क्यों दिया गया, जबकि उसी कंपनी का पुराना नाम Globarena पहले से विवादों में रहा है। उन्होंने सवाल किया कि इस कंपनी का चयन किसके आदेश पर किया गया, बैकग्राउंड जांच क्यों नहीं हुई और कंपनी के प्रबंधन तथा केंद्र सरकार के बीच क्या संबंध हैं। राहुल गांधी बोले- दोनों ही स्थिति में सरकार जिम्मेदार राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार ने बैकग्राउंड जांच की थी और फिर भी कंपनी को काम दिया गया, तो यह गंभीर लापरवाही है। वहीं अगर जांच नहीं की गई, तो यह और भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ही परिस्थितियों में सरकार जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार को वास्तव में छात्रों की चिंता होती, तो इतने बड़े विवाद के बाद शिक्षा मंत्री को बहुत पहले ही पद से हटा दिया गया होता। परीक्षा विवाद पर बढ़ी राजनीतिक गर्मी CBSE और NEET से जुड़े विवाद पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। ऐसे में राहुल गांधी और धर्मेंद्र प्रधान के बीच बढ़ती बयानबाजी ने इस मुद्दे को और राजनीतिक बना दिया है। एक तरफ विपक्ष परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि वह किसी भी अनियमितता को गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
NEET-UG paper leak controversy मामले के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की मांग तेज हो गई है। People's Health Organization India (PHO) ने कहा है कि NEET परीक्षा में अब इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE की तरह मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। संगठन का कहना है कि लगातार सामने आ रहे विवादों और पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा कमजोर कर दिया है। PHO ने मेडिकल परीक्षा प्रक्रिया में तत्काल ढांचागत सुधार की मांग की है। “स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ेगा असर” पीएचओ ने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो इसका असर भविष्य में देश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। हर साल करीब 22 लाख छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शामिल होते हैं, जबकि देश के 824 मेडिकल कॉलेजों में लगभग 1.3 लाख सीटें ही उपलब्ध हैं। ऐसे में प्रतियोगिता बेहद कठिन हो चुकी है। मेडिकल शिक्षा के व्यवसायीकरण पर चिंता पीएचओ के संस्थापक Ishwar Gilada ने कहा कि देश में उपलब्ध मेडिकल सीटों में आधे से ज्यादा निजी संस्थानों में हैं, जहां फीस 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि असली समस्या मेडिकल शिक्षा का तेजी से बढ़ता व्यवसायीकरण है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या अभी भी मांग के मुकाबले काफी कम है, जिसके कारण छात्रों और अभिभावकों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ता है। JEE जैसी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग संगठन ने सुझाव दिया कि NEET परीक्षा में भी JEE की तरह डिजिटल निगरानी, सुरक्षित प्रश्नपत्र वितरण, परीक्षा केंद्रों पर कड़ी जांच और तकनीकी सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके। पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।
Central Bureau of Investigation ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए NTA पैनलिस्ट और वनस्पति विज्ञान विशेषज्ञ Manisha Mandhare को गिरफ्तार किया है। दिल्ली की Rouse Avenue Court ने रविवार को उन्हें 14 दिनों की सीबीआई हिरासत में भेज दिया। अदालत ने आरोपी को 30 मई 2026 को दोबारा पेश करने का निर्देश दिया है। पेपर लीक साजिश में शामिल होने का आरोप सीबीआई के अनुसार, मनीषा मंधारे ने आरोपी मनीषा वाघमारे और प्रह्लाद विट्ठल राव कुलकर्णी समेत अन्य लोगों के साथ मिलकर NEET-UG 2026 का प्रश्नपत्र और परीक्षा सामग्री छात्रों तक पहुंचाने की साजिश रची। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में भारी रकम का लेन-देन हुआ। मंधारे NTA के विशेषज्ञ पैनल का हिस्सा थीं और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल थीं। इसी दौरान उन्हें अंतिम प्रश्न सेट तक पहुंच मिली, जिसे कथित तौर पर बाद में लीक किया गया। मथुरा के होटल से हुई गिरफ्तारी सीबीआई ने आरोपी को उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित एक होटल से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद डिप्टी एसपी पवन कुमार कौशिक ने उन्हें अदालत में पेश किया। सीबीआई की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक वीके पाठक और लोक अभियोजक दर्शन लाल ने अदालत में दलील दी कि यह मामला एक बड़े संगठित गिरोह से जुड़ा है और कई आरोपी अभी भी फरार हैं। एजेंसी ने कहा कि नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचने के लिए 14 दिनों की हिरासत जरूरी है। अदालत ने माना गंभीर साजिश का मामला विशेष न्यायाधीश कोलेट रश्मी कुजूर ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि जांच से यह एक बड़े संगठित रैकेट का हिस्सा प्रतीत होता है। अदालत ने माना कि कई अन्य सदस्य अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं और उनकी पहचान के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने आदेश में कहा कि “तथ्यों, परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति को देखते हुए आरोपी को चिकित्सा परीक्षण के अधीन 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा जाता है।” डिजिटल सबूत और पैसों के लेन-देन की जांच सीबीआई ने अदालत को बताया कि अब तक कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसी डिजिटल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आर्थिक लेन-देन की गहन जांच कर रही है। एजेंसी का कहना है कि आरोपी को देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाकर पूछताछ करनी होगी ताकि पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। बचाव पक्ष ने हिरासत का किया विरोध मनीषा मंधारे की ओर से अधिवक्ता करण मान, आकाश चौहान और निखिल सरोहा अदालत में पेश हुए। बचाव पक्ष ने 14 दिन की हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी 57 वर्ष की हैं, पेशे से लेक्चरर हैं और जांच में सहयोग कर रही हैं। वकीलों ने कहा कि आरोपी पहले ही दो बार जांच में शामिल हो चुकी हैं और उनके घर से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि केवल पुणे ले जाकर पूछताछ करनी है तो इतनी लंबी हिरासत की जरूरत नहीं है। CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग बचाव पक्ष ने अदालत में मामले से संबंधित CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग भी उठाई है। अदालत ने इस पर सीबीआई से जवाब मांगा है। देशभर में जारी है जांच NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। अब तक दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहल्यानगर से कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई इस पूरे संगठित नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच नाराजगी बढ़ गई है। अब इस विवाद में मशहूर शिक्षक और यूट्यूबर खान सर की भी एंट्री हो गई है। उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। खान सर ने कहा कि लगातार पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियां छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। उन्होंने सुधार के लिए सरकार को पांच बड़े सुझाव भी दिए। NTA को भंग करने की मांग खान सर का पहला सुझाव था कि केवल परीक्षा रद्द करना काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि National Testing Agency (NTA) बार-बार परीक्षा प्रबंधन में असफल साबित हो रही है, इसलिए सरकार को इस एजेंसी को भंग करने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने NTA को “Never Trustable Agency” बताते हुए कहा कि जिस संस्था पर देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं की जिम्मेदारी है, वही लगातार विवादों में घिर रही है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग खान सर ने पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त सजा की मांग की। उनका कहना है कि दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न करे। रिटायर्ड जज की निगरानी में हो जांच उन्होंने मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपे जाने पर भी सवाल उठाए। खान सर ने मांग की कि जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की निगरानी में कराई जाए, ताकि निष्पक्षता बनी रहे और छात्रों का भरोसा वापस लौट सके। समयबद्ध जांच और नई एजेंसी की मांग खान सर ने कहा कि CBI जांच अक्सर लंबी चलती है, इसलिए इसकी समय सीमा तय होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की जिम्मेदारी ऐसी एजेंसियों को दी जाए, जो पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित कर सकें। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक छात्रों के भरोसे और मेहनत दोनों को कमजोर कर रहे हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET UG 2026) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। परीक्षा के आयोजन के बाद अब इसके पेपर लीक होने की आशंका प्रबल हो गई है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने इस मामले में गहन जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में ऐसे सबूत मिले हैं जो परीक्षा की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। जांच में सामने आया है कि इस संदिग्ध पेपर का केंद्र केरल और राजस्थान का सीकर जिला है। बताया जा रहा है कि केरल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने, जो मूलत राजस्थान के चूरू का रहने वाला है, 1 मई को एक ‘क्वेश्चन बैंक’ अपने सीकर स्थित दोस्त को व्हाट्सएप पर भेजा था। यह दोस्त सीकर में एक पीजी (PG) संचालित करता है। वहीं इस मामले में एसओजी एडीजी विशाल बंसल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होने बताया की परीक्षा से पहले व्हाट्सएप पर 150 पन्नों की एक पीडीएफ फाइल वायरल हुई थी, जिसमें कुल 400 सवाल शामिल थे। एसओजी की शुरुआती पड़ताल में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि 3 मई को आयोजित नीट परीक्षा में उस वायरल गेस पेपर से करीब 120 सवाल मिले हैं। वर्तमान में एसओजी इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि यह गेस पेपर किसने और किस आधार पर तैयार किया था। इस सिलसिले में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और मामले के ‘देहरादून लिंक’ को भी खंगाला जा रहा है। हालांकि, एसओजी ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए फिलहाल इसे आधिकारिक तौर पर ‘पेपर लीक’ नहीं कहा जा सकता। एसओजी का मुख्य कार्य साक्ष्य जुटाना और जांच करना है, जबकि परीक्षा के भविष्य पर अंतिम निर्णय संबंधित परीक्षा एजेंसी ही लेगी। पुलिस फिलहाल कड़ियां जोड़कर मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है। क्वेश्चन बैंक और परीक्षा के बीच चौंकाने वाला मिलान SOG के सूत्रों के अनुसार, छात्र द्वारा भेजे गए इस क्वेश्चन बैंक में करीब 300 सवाल शामिल थे। जब इन सवालों का मिलान मूल नीट पेपर से किया गया, तो अधिकारी हैरान रह गए। 300 में से लगभग 150 सवाल हूबहू वही थे जो परीक्षा में पूछे गए थे। नीट परीक्षा में कुल 180 सवाल हल करने होते हैं, जहां प्रत्येक प्रश्न 4 अंक का होता है। इस हिसाब से 720 में से 600 अंकों के सवाल परीक्षा से पहले ही लीक होने की आशंका बढ़ गई है। किसी भी ‘गेस पेपर’ में इतनी सटीकता होना लगभग असंभव माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ डेटा सीकर के पीजी संचालक को पेपर मिलने के बाद यह व्हाट्सएप ग्रुप्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फॉरवर्ड हुआ. पीजी संचालक ने अपने यहां रह रहे छात्रों को यह सामग्री उपलब्ध कराई, जिसके बाद कैरियर काउंसलर्स और अन्य छात्रों के माध्यम से यह जाल फैलता चला गया। आश्चर्यजनक बात यह है कि परीक्षा संपन्न होने के बाद इसी पीजी संचालक ने उद्योग नगर थाना और एनटीए (NTA) को शिकायत दी थी। SOG अब इस कोण से भी जांच कर रही है कि कहीं पकड़े जाने के डर से तो संचालक ने खुद शिकायतकर्ता बनने का नाटक नहीं किया। SOG की मास्टरमाइंड की तलाश फिलहाल SOG मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए कड़ियां जोड़ रही है। सभी संदिग्धों के कॉल लॉग्स और सोशल मीडिया चैट की फोरेंसिक जांच की जा रही है। एजेंसी अभी अंतिम रूप से यह तय नहीं कर पाई है कि इसे तकनीकी रूप से ‘पेपर लीक’ की श्रेणी में रखा जाए या कुछ और, लेकिन सबूत किसी बड़े गिरोह की ओर इशारा कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।