NIA investigation

NIA Pahalgam Terror Attack
NIA ने पहलगाम आतंकी हमले की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज़ सईद को बनाया आरोपी

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा कदम उठाते हुए लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज़ मोहम्मद सईद को सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी बनाया है। एजेंसी ने उसे हमले की सीमा पार से रची गई साजिश का मुख्य मास्टरमाइंड बताया है।   सीमा पार साजिश का आरोप   NIA के अनुसार, चार्जशीट में हाफिज़ सईद पर प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट के जरिए पहलगाम हमले की साजिश रचने और आतंकियों को निर्देश देने का आरोप लगाया गया है। एजेंसी ने अदालत के समक्ष सीमा पार आतंकी नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य भी पेश किए हैं।   26 लोगों की हुई थी मौत   यह आतंकी हमला अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। NIA का कहना है कि जांच में पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क और हमले में शामिल आतंकियों के बीच स्पष्ट संबंध सामने आए हैं।   जांच जारी   NIA ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी भी जारी है और आतंकी साजिश से जुड़े अन्य आरोपियों एवं सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि आतंकवाद से जुड़े पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
Ranchi RSS Office Attack
रांची RSS कार्यालय हमला में था पाकिस्तान और दुबई का हाथ

रांची। रांची स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को कई अहम सुराग मिले हैं। जांच के दौरान गिरफ्तार मुख्य आरोपी अमन अंसारी और सयाम सुजान ने कथित तौर पर स्वीकार किया है कि यह हमला एक सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा था। एनआईए के अनुसार, दोनों आरोपी पाकिस्तान और दुबई में मौजूद अपने कथित हैंडलरों के संपर्क में थे, जो उन्हें लगातार निर्देश दे रहे थे। एजेंसी ने दोनों को सात दिन की रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ शुरू कर दी है।   ऑनलाइन मिली पेट्रोल बम बनाने की ट्रेनिंग जांच में सामने आया है कि आरोपियों को पेट्रोल बम बनाने और उसका इस्तेमाल करने की कथित ट्रेनिंग ऑनलाइन दी गई थी। एनआईए के अनुसार, वे वीडियो कॉलिंग ऐप बॉटिम और व्हाट्सएप के जरिए विदेशी संपर्कों से जुड़े हुए थे और इन्हीं माध्यमों से हमले की पूरी योजना तैयार की गई। एजेंसी अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी दुबई कैसे पहुंचे और वहां किन लोगों के संपर्क में आए। प्रारंभिक जांच में उनका संबंध कथित तौर पर 'तेहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' नामक आतंकी मॉड्यूल से होने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसी इस मॉड्यूल को मिलने वाले संभावित विदेशी समर्थन की भी पड़ताल कर रही है।   दिल्ली भागने की थी योजना, फंडिंग और स्लीपर सेल पर फोकस पूछताछ के दौरान यह भी जानकारी सामने आई है कि हमले के बाद आरोपी बोकारो, कोडरमा और बिहार के रास्ते दिल्ली भागने की योजना बना रहे थे। एनआईए अब यह पता लगाने में जुटी है कि दिल्ली में उनका संपर्क किससे होने वाला था और झारखंड में उन्हें किन लोगों से मदद या शरण मिली। इसके साथ ही आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और संभावित फंडिंग नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।   एनआईए राज्य में सक्रिय संभावित स्लीपर सेल और उनसे जुड़े नेटवर्क की भी गहन पड़ताल कर रही है। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और पूछताछ में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
NIA officials conduct coordinated raids in Punjab and Haryana against Pakistan-linked terror-gangster network.
शहजाद भट्टी के आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क पर NIA का बड़ा एक्शन, पंजाब-हरियाणा में 18 ठिकानों पर छापेमारी

  नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी शहजाद भट्टी से जुड़े आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए पंजाब और हरियाणा में 18 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। एजेंसी की यह कार्रवाई दोनों राज्यों के नौ जिलों में की गई, जहां संदिग्धों के ठिकानों पर तलाशी लेकर कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए। डिजिटल उपकरण और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज जब्त एनआईए के अनुसार छापेमारी के दौरान कई डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की गई है। प्रारंभिक जांच में संचार नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी जानकारियां सामने आई हैं। एजेंसी ने बताया कि जब्त की गई सामग्री को फोरेंसिक और तकनीकी जांच के लिए भेजा गया है, ताकि नेटवर्क की कार्यप्रणाली और उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाया जा सके। सहयोगियों और स्थानीय मॉड्यूल की पहचान पर फोकस एनआईए का कहना है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य शहजाद भट्टी के सहयोगियों और विभिन्न मामलों में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान करना है। जांच के दौरान कुछ व्यक्तियों को नोटिस जारी कर आगे की पूछताछ के लिए बुलाया गया है। एजेंसी को संदेह है कि यह नेटवर्क आतंकवादी गतिविधियों और संगठित अपराध के गठजोड़ के रूप में काम कर रहा था, जिसे सीमा पार से संचालित किया जा रहा था। रोजर संधू के घर ग्रेनेड हमले में सामने आया था नाम जांच एजेंसी के मुताबिक मार्च 2025 में जालंधर स्थित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोजर संधू के आवास पर हुए ग्रेनेड हमले की साजिश में भी शहजाद भट्टी का नाम सामने आया था। इस मामले में एनआईए ने अप्रैल 2026 में शहजाद भट्टी और एक अन्य आरोपी के खिलाफ फरार आरोपी के रूप में आरोपपत्र दाखिल किया था। हरियाणा के विस्फोट मामलों से भी जुड़े तार एनआईए की जांच में यह भी सामने आया है कि नवंबर 2025 में हरियाणा के सिरसा स्थित महिला पुलिस थाने में हुए विस्फोट और जनवरी 2026 में अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन में हुए विस्फोट की साजिश रचने में भी भट्टी की कथित भूमिका रही है। सिरसा विस्फोट मामले में एजेंसी ने मई 2026 में शहजाद भट्टी, पाकिस्तान स्थित हैंडलर सोहेल अहमद समेत नौ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। अंबाला कार बम मामले में भी मिला कनेक्शन अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन से जुड़े कार बम विस्फोट मामले की जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए एक आरोपी के शहजाद भट्टी से सीधे संपर्क होने के प्रमाण मिले थे। इसके बाद इस मामले को भी एनआईए ने अपनी व्यापक जांच में शामिल कर लिया। सीमा पार से आतंकी गतिविधियों की साजिश का खुलासा करने में जुटी NIA एनआईए का कहना है कि तीनों मामलों की जांच अभी जारी है। एजेंसी का लक्ष्य इन हमलों की पूरी साजिश का पर्दाफाश करना और पाकिस्तान से संचालित आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क के सभी सहयोगियों की पहचान करना है। जांच एजेंसी के अनुसार शुरुआती संकेत बताते हैं कि भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए स्थानीय आपराधिक गिरोहों और मॉड्यूल का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी नेटवर्क की परतें खोलने के लिए आगे भी जांच जारी रहेगी।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Security agencies examine mobile phones recovered from terrorists linked to the Pahalgam attack investigation
पहलगाम हमले की जांच में बड़ा खुलासा, पाकिस्तान से जुड़े मिले आतंकियों के मोबाइल फोन

पहलगाम आतंकी हमले की जांच में सुरक्षा एजेंसियों के हाथ एक महत्वपूर्ण सुराग लगा है, जिसने हमले के संभावित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की ओर संकेत किया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच में पता चला है कि आतंकियों के पास से बरामद दो मोबाइल फोन पाकिस्तान में आयात की गई खेप का हिस्सा थे। हैरानी की बात यह है कि दोनों उपकरण वर्षों तक निष्क्रिय रहे और हमले से ठीक पहले सक्रिय किए गए। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इसके बाद शुरू हुई जांच के दौरान सुरक्षा बलों ने जुलाई 2025 में दाचीगाम के मुलनार महादेव क्षेत्र में मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराया। मारे गए आतंकियों के पास से दो शाओमी रेडमी सीरीज के मोबाइल फोन बरामद हुए थे। पाकिस्तान से आयातित खेप का हिस्सा था मोबाइल जांच में सामने आया कि बरामद रेडमी 9टी मोबाइल वर्ष 2021 में पाकिस्तान पहुंची एक आयातित खेप का हिस्सा था। तकनीकी विश्लेषण से पता चला कि फोन पाकिस्तान पहुंचने के बाद कभी इस्तेमाल नहीं किया गया और पहली बार हमले की तैयारी के दौरान सक्रिय हुआ। दूसरा फोन, रेडमी नोट 12, भी पाकिस्तान से आयातित था और उसके उपयोग का पैटर्न भी लगभग समान पाया गया। जांच अधिकारियों का मानना है कि दोनों मोबाइल फोन विशेष उद्देश्य के लिए सुरक्षित रखे गए थे और बाद में आतंकियों तक पहुंचाए गए। मोबाइल में मिले नक्शे और तस्वीरें फोन से कोई कॉल रिकॉर्ड, चैट या संदेश बरामद नहीं हुए हैं, लेकिन जांचकर्ताओं को इनमें पहलगाम और उसके आसपास के क्षेत्रों के नक्शे तथा कई तस्वीरें मिली हैं। एक तस्वीर 30 मार्च 2025 की बताई जा रही है, जिससे संकेत मिलता है कि हमलावर घटना से कई सप्ताह पहले इलाके में डेरा डाले हुए थे। तस्वीरों में एक अस्थायी टेंट और अन्य सामान भी दिखाई दे रहे हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को हमले की पूर्व तैयारी के संबंध में अहम संकेत मिले हैं। आतंकियों ने अपनाई थी वैकल्पिक संचार प्रणाली प्रारंभिक जांच के अनुसार, आतंकी मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट आधारित संचार पर निर्भर नहीं थे। अधिकारियों का मानना है कि वे लंबी दूरी की रेडियो संचार प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे उनकी गतिविधियां डिजिटल निगरानी से काफी हद तक बची रहीं। जांच को मिली नई दिशा मोबाइल फोन की उत्पत्ति, उनका वर्षों तक निष्क्रिय रहना और फिर हमले से ठीक पहले सक्रिय होना जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है। एनआईए और जम्मू-कश्मीर पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये उपकरण पाकिस्तान से आतंकियों तक कैसे पहुंचे और हमले की साजिश में उनकी क्या भूमिका रही। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन डिजिटल सबूतों से हमले के पूरे नेटवर्क, उसके संचालकों और सीमा पार मौजूद संभावित समर्थन तंत्र तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।   जांच अधिकारियों का मानना है कि दोनों मोबाइल फोन विशेष उद्देश्य के लिए सुरक्षित रखे गए थे और बाद में आतंकियों तक पहुंचाए गए। मोबाइल में मिले नक्शे और तस्वीरें फोन से कोई कॉल रिकॉर्ड, चैट या संदेश बरामद नहीं हुए हैं, लेकिन जांचकर्ताओं को इनमें पहलगाम और उसके आसपास के क्षेत्रों के नक्शे तथा कई तस्वीरें मिली हैं। एक तस्वीर 30 मार्च 2025 की बताई जा रही है, जिससे संकेत मिलता है कि हमलावर घटना से कई सप्ताह पहले इलाके में डेरा डाले हुए थे। तस्वीरों में एक अस्थायी टेंट और अन्य सामान भी दिखाई दे रहे हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को हमले की पूर्व तैयारी के संबंध में अहम संकेत मिले हैं। आतंकियों ने अपनाई थी वैकल्पिक संचार प्रणाली प्रारंभिक जांच के अनुसार, आतंकी मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट आधारित संचार पर निर्भर नहीं थे। अधिकारियों का मानना है कि वे लंबी दूरी की रेडियो संचार प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे उनकी गतिविधियां डिजिटल निगरानी से काफी हद तक बची रहीं। जांच को मिली नई दिशा मोबाइल फोन की उत्पत्ति, उनका वर्षों तक निष्क्रिय रहना और फिर हमले से ठीक पहले सक्रिय होना जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है। एनआईए और जम्मू-कश्मीर पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये उपकरण पाकिस्तान से आतंकियों तक कैसे पहुंचे और हमले की साजिश में उनकी क्या भूमिका रही। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन डिजिटल सबूतों से हमले के पूरे नेटवर्क, उसके संचालकों और सीमा पार मौजूद संभावित समर्थन तंत्र तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।  

surbhi जून 1, 2026 0
Security personnel inspect area after gelatin sticks were found near PM Modi’s Bengaluru convoy route.
पीएम मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक, जिलेटिन स्टिक मिलने के मामले में 6 पुलिसकर्मी निलंबित

प्रधानमंत्री Narendra Modi की बेंगलुरु यात्रा से पहले सुरक्षा में कथित चूक का मामला सामने आया है। प्रधानमंत्री के काफिले के रास्ते के पास जिलेटिन स्टिक मिलने के बाद छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। यह मामला 10 मई का है, जब प्रधानमंत्री मोदी Art of Living Foundation के 45 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उसके इंटरनेशनल सेंटर के दौरे पर जाने वाले थे। दौरे से पहले सुरक्षा जांच और निरीक्षण के दौरान पुलिस को संदिग्ध विस्फोटक सामग्री मिली थी। निरीक्षण के दौरान मिली जिलेटिन स्टिक जानकारी के मुताबिक, एक पुलिस कांस्टेबल को सर्किट और टाइमर लगी जिलेटिन की छड़ें बरामद हुई थीं। यह सामग्री प्रधानमंत्री के काफिले के निर्धारित मार्ग के पास मिली, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए National Investigation Agency (NIA) की टीम ने भी जांच शुरू की थी। किन पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई? बेंगलुरु दक्षिण जिले के पुलिस अधीक्षक R. Srinivas Gowda ने कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में कुल छह पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है। निलंबित अधिकारियों में शामिल हैं: एक सब-इंस्पेक्टर एक सहायक सब-इंस्पेक्टर (ASI) चार कांस्टेबल प्राथमिक जांच में सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन में लापरवाही सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। जांच जारी फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जिलेटिन स्टिक वहां कैसे पहुंची और इसके पीछे किसी साजिश की आशंका थी या नहीं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।  

surbhi मई 25, 2026 0
Security forces inspecting bomb recovery site in Bhangar ahead of West Bengal elections
बंगाल चुनाव से पहले भांगड़ में बम बरामद, NIA को सौंपी गई जांच

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है। भांगड़ विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर बम से भरा बोरा बरामद होने के बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच National Investigation Agency (NIA) को सौंप दी है। यह घटना मतदान से ठीक पहले सामने आने के कारण राजनीतिक और सुरक्षा दोनों दृष्टि से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। क्या है पूरा मामला? ताजा घटना उत्तर काशीपुर थाना क्षेत्र के मझेरैत इलाके की है, जहां एक परित्यक्त घर से बमों से भरा बोरा मिला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बमों को निष्क्रिय किया और इलाके में तलाशी अभियान चलाया। इसके बाद उसी क्षेत्र में एक और जगह से कुल 9 नए बम बरामद किए गए, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। NIA जांच का आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय, जिसकी जिम्मेदारी Amit Shah के पास है, ने इस मामले में बड़ी साजिश की आशंका जताते हुए NIA जांच के आदेश दिए हैं। चुनाव आयोग ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य पुलिस को विशेष अभियान चलाने और दोषियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। आरोप-प्रत्यारोप तेज इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। Indian Secular Front (ISF) ने आरोप लगाया है कि All India Trinamool Congress (TMC) के कार्यकर्ताओं ने इलाके में अशांति फैलाने के लिए बम छिपाए थे। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है कि ISF कार्यकर्ताओं ने ही पार्टी को बदनाम करने के लिए यह साजिश रची है। इलाके में तनाव, सुरक्षा बढ़ाई गई लगातार बम बरामद होने की घटनाओं से भांगड़ और आसपास के इलाकों में तनाव का माहौल है। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए केंद्रीय बलों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस को तैनात किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के दौरान इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए जांच एजेंसियों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है।  

surbhi अप्रैल 27, 2026 0
Security agencies detain foreign nationals linked to drone training near Mizoram Myanmar border
मिजोरम में विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी: ड्रोन ट्रेनिंग, सीमा सुरक्षा और कूटनीतिक तनाव के बीच बड़ा खुलासा

पूर्वोत्तर भारत से जुड़ा एक जटिल और संवेदनशील मामला इस समय राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों और कूटनीतिक हलकों के केंद्र में है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक को हिरासत में लेकर व्यापक जांच शुरू की है। इन गिरफ्तारियों को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट जैसे प्रमुख ट्रांजिट बिंदुओं से अंजाम दिया गया। अमेरिकी नागरिक की पहचान मैथ्यू वैनडाइक के रूप में हुई है। एजेंसी ने सभी आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और विदेशी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। संवेदनशील सीमा क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियां प्रारंभिक जांच के अनुसार, ये सभी विदेशी नागरिक बिना आवश्यक अनुमति के मिजोरम में दाखिल हुए थे। यह राज्य म्यांमार के साथ लंबी और संवेदनशील सीमा साझा करता है, जहां विदेशी नागरिकों के प्रवेश के लिए ‘Restricted Area Permit (RAP)’ अनिवार्य है। एजेंसियों का आरोप है कि इन व्यक्तियों ने न केवल इस नियम का उल्लंघन किया, बल्कि सीमा पार गतिविधियों में भी संलिप्त रहे। ड्रोन विशेषज्ञता और संभावित सुरक्षा खतरा जांच एजेंसियों के अनुसार, हिरासत में लिए गए यूक्रेनी नागरिक ड्रोन तकनीक में दक्ष हैं। खुफिया इनपुट यह संकेत देते हैं कि उन्होंने म्यांमार के भीतर सक्रिय सशस्त्र समूहों से संपर्क स्थापित किया और उन्हें कथित रूप से तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया। यदि यह आरोप पुष्ट होते हैं, तो यह परिदृश्य भारत के पूर्वोत्तर राज्यों-विशेषकर मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड-की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। आधुनिक ड्रोन तकनीक का गैर-राज्य तत्वों के हाथों में जाना सुरक्षा समीकरण को जटिल बना सकता है। कूटनीतिक स्तर पर बढ़ी संवेदनशीलता इस पूरे घटनाक्रम ने यूक्रेन और भारत के बीच कूटनीतिक संवाद को भी प्रभावित किया है। भारत में यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सैंडर पोलिशचक ने औपचारिक विरोध दर्ज कराते हुए कहा है कि: उनके नागरिकों के खिलाफ अब तक सार्वजनिक रूप से ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए   गिरफ्तारी की सूचना समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई   यूक्रेन ने इसे अंतरराष्ट्रीय दायित्वों, विशेषकर वियना संधि के प्रावधानों से जोड़ते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की है। अमेरिकी पक्ष का संतुलित रुख वहीं, अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक की हिरासत पर संयुक्त राज्य अमेरिका ने सतर्क और संतुलित प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी दूतावास ने मामले की जानकारी होने की पुष्टि की है, हालांकि गोपनीयता और कानूनी प्रक्रिया का हवाला देते हुए विस्तृत टिप्पणी से परहेज किया गया है। क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य: क्यों बढ़ी चौकसी? इस मामले को समझने के लिए भारत-म्यांमार सीमा की मौजूदा स्थिति पर ध्यान देना आवश्यक है। 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद म्यांमार में अस्थिरता बनी हुई है   विभिन्न सशस्त्र समूहों और सेना के बीच संघर्ष जारी है   सीमावर्ती भारतीय राज्यों में शरणार्थियों की आवाजाही बढ़ी है   ऐसे परिदृश्य में किसी भी विदेशी नागरिक की संदिग्ध गतिविधि को सुरक्षा एजेंसियां अत्यंत गंभीरता से ले रही हैं। कानूनी प्रक्रिया और आगे की दिशा दिल्ली की अदालत ने सभी आरोपियों की हिरासत 27 मार्च तक बढ़ा दी है। जांच एजेंसियां अब तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल कनेक्शनों और अंतरराष्ट्रीय लिंक की गहन पड़ताल कर रही हैं। साथ ही, यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कूटनीतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के पहलू भी जुड़ गए हैं। मिजोरम से जुड़ा यह घटनाक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमाई स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जटिल संतुलन को दर्शाता है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष और भारत-यूक्रेन के बीच संवाद इस मामले की दिशा और प्रभाव तय करेंगे।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0