पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेतों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अहम अपडेट सामने आया है। खबर है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी उनकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं होगी, बल्कि उनका सुरक्षा घेरा और मजबूत किया जाएगा। मौजूदा समय में उन्हें मुख्यमंत्री होने के नाते SSG सुरक्षा प्राप्त है, लेकिन इस्तीफे के बाद उन्हें Z+ श्रेणी की अतिरिक्त सुरक्षा भी दी जाएगी। इस संबंध में राज्य के गृह विभाग की विशेष शाखा की ओर से आदेश जारी किए जाने की खबर है। सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार जल्द ही राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वे 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले सकते हैं। इसके लिए उनके 8 या 9 अप्रैल को दिल्ली जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की आधिकारिक तारीख अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन बिहार की सियासत में इसे बड़े नेतृत्व परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। MLC पद छोड़ चुके, अब नजर CM कुर्सी पर नीतीश कुमार पहले ही 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। यह कदम उनके राज्यसभा जाने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री आवास छोड़ने के बाद वे किसी दूसरे सरकारी आवास में शिफ्ट हो सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में सत्ता परिवर्तन की अटकलों को और तेज कर दिया है। चारों सदनों के सदस्य बनने की ओर बड़ा कदम अगर नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ लेते हैं, तो वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल होंगे जो विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा—चारों सदनों का हिस्सा रह चुके हैं। फिलहाल, उनकी सुरक्षा और राजनीतिक भूमिका—दोनों को लेकर बिहार में हलचल तेज है।
बिहार की राजनीति में एक बार फिर बाहुबली विधायक अनंत सिंह चर्चा के केंद्र में हैं। बेऊर जेल से रिहाई के बाद आज वह अपने विधानसभा क्षेत्र मोकामा में 50 किलोमीटर लंबा मेगा रोड शो कर शक्ति प्रदर्शन करने जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव में जीत के बाद यह उनका पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम है, जिसे लेकर समर्थकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। रिहाई के बाद पहला शक्ति प्रदर्शन पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अनंत सिंह सोमवार को बेऊर जेल से रिहा हुए। जेल से बाहर आते ही समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसके बाद वह करीब 50 गाड़ियों के काफिले के साथ पटना स्थित अपने आवास पहुंचे, जहां जश्न का माहौल देखने को मिला। उनके स्वागत में आयोजित कार्यक्रम में हजारों समर्थक शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक, इस मौके पर भव्य भोज का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 15 हजार लोगों के लिए व्यवस्था की गई थी। मोकामा से बड़हिया तक 50 किमी रोड शो आज का कार्यक्रम मोकामा से शुरू होकर बड़हिया स्थित महारानी स्थान मंदिर तक जाएगा। इस दौरान अनंत सिंह रास्ते में विभिन्न स्थानों पर रुककर लोगों का अभिवादन करेंगे और अपने समर्थकों का आभार जताएंगे। पूरे मार्ग पर समर्थकों ने स्वागत के लिए तोरण द्वार, फूल-मालाएं और बैनर-पोस्टर लगाए हैं। यह रोड शो केवल विजय जुलूस नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी माना जा रहा है। मंदिर में पूजा के साथ होगा समापन रोड शो का समापन बड़हिया के प्रसिद्ध महारानी स्थान मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ होगा। इसे धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किस मामले में मिली जमानत? अनंत सिंह को अक्टूबर 2025 में दुलारचंद यादव हत्याकांड के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उनके वकीलों ने अदालत में तर्क दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयान गोलीबारी की पुष्टि नहीं करते हैं। इन्हीं आधारों पर उन्हें जमानत मिली। कौन हैं अनंत सिंह? मोकामा से पांच बार विधायक रह चुके हैं जदयू, राजद और निर्दलीय-तीनों रूपों में जीत दर्ज की समर्थकों के बीच “छोटे सरकार” के नाम से लोकप्रिय कई आपराधिक मामलों के कारण विवादों में भी रहे नीतीश कुमार के साथ संबंध समय-समय पर चर्चा में रहे सुरक्षा के कड़े इंतजाम इतने बड़े आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। ट्रैफिक और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
बिहार की राजनीति इन दिनों नए मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे और नए चेहरे की चर्चा के बीच सियासी बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। इसी क्रम में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने जहानाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार की तुलना महाभारत कालीन मगध सम्राट जरासंध से कर दी। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। सम्राट चौधरी ने न सिर्फ नीतीश कुमार को पंडित चाणक्य जैसी रणनीतिक सोच वाला नेता बताया, बल्कि उन्हें चंद्रगुप्त मौर्य और जरासंध जैसी ऐतिहासिक शख्सियतों की श्रेणी में भी रखा। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर जरासंध कौन थे और उनकी तुलना का राजनीतिक अर्थ क्या है। कौन थे जरासंध? महाभारत के अनुसार, जरासंध प्राचीन मगध (आज का बिहार) के एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली सम्राट थे। उनकी राजधानी राजगृह (आज का राजगीर) थी। वे राजा बृहद्रथ के पुत्र थे और अपनी सैन्य शक्ति तथा रणनीति के लिए प्रसिद्ध थे। जरासंध का नाम विशेष रूप से इसलिए भी चर्चित है क्योंकि वे भगवान श्रीकृष्ण के सबसे बड़े विरोधियों में गिने जाते थे। श्रीकृष्ण से दुश्मनी की वजह जरासंध की श्रीकृष्ण से दुश्मनी का मुख्य कारण पारिवारिक संबंध था। दरअसल, वे मथुरा के राजा कंस के ससुर थे। जब श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया, तो जरासंध ने इसे व्यक्तिगत अपमान माना और कृष्ण के खिलाफ कई बार युद्ध छेड़ा। कहा जाता है कि जरासंध ने बार-बार मथुरा पर आक्रमण कर श्रीकृष्ण को चुनौती दी और उन्हें काफी समय तक परेशान किया। शक्ति और महत्वाकांक्षा जरासंध सिर्फ एक योद्धा ही नहीं, बल्कि चक्रवर्ती सम्राट बनने की महत्वाकांक्षा रखने वाले शासक थे। उन्होंने 99 राजाओं को बंदी बनाकर रखा था, ताकि एक विशेष यज्ञ के जरिए अपनी सार्वभौमिक सत्ता स्थापित कर सकें। हालांकि, उन्होंने इन राजाओं की हत्या नहीं की थी। कैसे हुई जरासंध की मृत्यु? महाभारत के अनुसार, जरासंध की शक्ति को खत्म करना श्रीकृष्ण के लिए जरूरी हो गया था। इसके लिए उन्होंने भीम को मल्लयुद्ध के लिए आगे किया। राजगीर के अखाड़े में भीम और जरासंध के बीच लंबा और भीषण युद्ध हुआ। अंततः श्रीकृष्ण की रणनीति से भीम ने जरासंध के शरीर के दो हिस्से कर उन्हें विपरीत दिशाओं में फेंक दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनके पुत्र सहदेव को मगध का राजा बनाया गया। बिहार की राजनीति में जरासंध का जिक्र क्यों? हाल के वर्षों में बिहार की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान में जरासंध का नाम फिर से प्रमुखता से उभरा है। 2025 में नीतीश कुमार ने राजगीर में 21 फीट ऊंची जरासंध की प्रतिमा का अनावरण किया था। यह स्मारक करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से बना है। राजगीर स्थित जरासंध स्मृति पार्क में उनके जीवन और युद्धों को भित्तिचित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। इसके अलावा, राज्य में “जरासंध महोत्सव” का भी आयोजन किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह ऐतिहासिक पात्र अब राजनीतिक विमर्श का भी हिस्सा बन चुका है। सियासी संकेत क्या हैं? सम्राट चौधरी द्वारा की गई यह तुलना केवल ऐतिहासिक संदर्भ नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत भी मानी जा रही है। बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच यह बयान इस ओर इशारा करता है कि सत्ता हस्तांतरण की जमीन तैयार हो रही है। करीब दो दशकों तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के संभावित पदत्याग के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह इस बार पांच राज्यों-पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी-में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी। चुनाव से दूरी बनाने का ऐलान देश के इन पांच राज्यों में चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सभी दल रणनीति बनाने में जुटे हैं। इसी बीच जनता दल यूनाइटेड के इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। पार्टी ने इस बार चुनावी मैदान से दूरी बनाने का निर्णय लिया है। ‘गठबंधन धर्म’ का हवाला पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि यह फैसला गठबंधन की भावना को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन होने के कारण जेडीयू ने इन राज्यों में चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय किया है। तैयारी की कमी भी बनी वजह राजीव रंजन ने यह भी स्वीकार किया कि इन राज्यों में पार्टी की संगठनात्मक तैयारी उतनी मजबूत नहीं है। इसी कारण वर्तमान हालात का आकलन करते हुए चुनाव से दूर रहने का फैसला लिया गया। भविष्य के लिए दरवाजे खुले हालांकि पार्टी ने भविष्य के लिए संभावनाओं को खारिज नहीं किया है। जेडीयू नेताओं का कहना है कि जब संगठन जमीनी स्तर पर मजबूत होगा, तब सीट बंटवारे और चुनाव लड़ने को लेकर गठबंधन के भीतर बातचीत की जा सकती है। कब होंगे चुनाव? इन पांचों राज्यों में चुनाव की तारीखें घोषित हो चुकी हैं: पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान सभी राज्यों के नतीजे 4 मई को घोषित होंगे बदलती रणनीति के संकेत गौरतलब है कि जनता दल यूनाइटेड पहले बिहार के बाहर भी चुनाव लड़ती रही है, लेकिन इस बार पार्टी की रणनीति बदली हुई नजर आ रही है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को अपनी महत्वाकांक्षी ‘समृद्धि यात्रा’ के तहत कैमूर और रोहतास जिलों के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे कई विकास योजनाओं का उद्घाटन करेंगे और चल रही परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेंगे। कैमूर और रोहतास में कार्यक्रम तय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुबह के समय कैमूर जिले पहुंचेंगे, जहां वे विभिन्न योजनाओं का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद दोपहर में उनका कार्यक्रम रोहतास जिले में निर्धारित है, जहां वे विकास कार्यों की समीक्षा के साथ नई परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। जनता से सीधा संवाद करेंगे CM इस यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री दोनों जिलों में जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे। इन सभाओं के माध्यम से वे आम लोगों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे और सरकार की योजनाओं की जानकारी साझा करेंगे। विकास कार्यों की होगी समीक्षा ‘समृद्धि यात्रा’ का मुख्य उद्देश्य जिलों में चल रही योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन करना है। नीतीश कुमार अधिकारियों के साथ बैठक कर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे और जरूरी दिशा-निर्देश देंगे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर दोनों जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने पहले से ही सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। जिलों को मिलेंगी नई योजनाओं की सौगात इस दौरे के दौरान कैमूर और रोहतास जिले को कई नई विकास योजनाओं की सौगात मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और जनसुविधाओं में सुधार आने की संभावना जताई जा रही है।
बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लगातार सम्राट चौधरी को लेकर दिए जा रहे संकेतों ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह महज राजनीतिक संदेश है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति छिपी है? क्या बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार के बयान बीजेपी के अंदरूनी समीकरणों को प्रभावित करने की कोशिश हो सकते हैं। अगर बीजेपी सम्राट चौधरी को आगे नहीं बढ़ाती है, तो इससे कुशवाहा वोट बैंक में नाराजगी की आशंका बन सकती है। वहीं अगर उन्हें आगे किया जाता है, तो इसका श्रेय भी नीतीश कुमार ले सकते हैं। ऐसे में दोनों ही परिस्थितियों में जदयू को राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। बीजेपी के लिए ‘धर्मसंकट’ की स्थिति यह मामला बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। पार्टी खुलकर यह भी नहीं कह पा रही कि उसका मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी फिलहाल चुप्पी साधे हुए है और सही समय का इंतजार कर रही है, ताकि राजनीतिक समीकरणों के अनुसार फैसला लिया जा सके। ‘लव-कुश’ समीकरण साधने की कोशिश? राजनीति के जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार ‘लव-कुश’ (कुर्मी-कुशवाहा) सामाजिक समीकरण को मजबूत करने का संदेश देना चाहते हैं। सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाकर वे यह दिखाना चाहते हैं कि इस सामाजिक एकता में उनकी अहम भूमिका है, जो आने वाले चुनावों में निर्णायक साबित हो सकती है। क्या दोहराई जाएगी सुशील कुमार मोदी जैसी कहानी? राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कहीं सम्राट चौधरी की स्थिति भी दिवंगत सुशील कुमार मोदी जैसी न हो जाए। 2005 के बाद जदयू-भाजपा गठबंधन में सुशील मोदी और नीतीश कुमार की जोड़ी काफी मजबूत मानी जाती थी। लेकिन बाद में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ समीकरण बदलने पर सुशील मोदी को राज्य की राजनीति से हटाकर दिल्ली भेज दिया गया था। गृह मंत्री के तौर पर प्रदर्शन पर भी सवाल सम्राट चौधरी को गृह मंत्री बनाए जाने के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर कई बार विपक्ष ने सरकार को घेरा है। हालांकि इन मुद्दों पर मुख्यमंत्री की ओर से ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं आई, जिससे यह संकेत भी मिलता है कि राजनीतिक समीकरणों के चलते उन्हें फिलहाल खुला समर्थन दिया जा रहा है। आगे क्या? बिहार की राजनीति में यह पूरा घटनाक्रम आने वाले समय में और दिलचस्प हो सकता है। क्या यह रणनीति बीजेपी को दबाव में लाने के लिए है, या फिर गठबंधन की मजबूती दिखाने का प्रयास-इसका जवाब आने वाले दिनों में ही साफ होगा। फिलहाल इतना तय है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है और सभी की नजरें अगले बड़े फैसले पर टिकी हैं।
‘समृद्धि यात्रा’ के बयान से गर्म हुई सियासत बिहार की राजनीति में इन दिनों उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान दिए गए एक बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी। मंच से उन्होंने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा कि “आगे ये ही सब काम संभालेंगे”, जिसके बाद उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलें तेज हो गईं। जेडीयू ने दी सफाई, ‘अभी ऐसा कोई फैसला नहीं’ हालांकि इन अटकलों पर विराम लगाते हुए जनता दल यूनाइटेड ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री के बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। विजय चौधरी ने ‘संकेत’ को किया डिकोड बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस पूरे मामले पर स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की यह पुरानी कार्यशैली रही है कि वे अपने सहयोगियों को प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें आगे जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने साफ कहा, “मैं उस कार्यक्रम में मौजूद था, इसे उत्तराधिकारी का संकेत मानना सही नहीं है। मुख्यमंत्री अपने सहयोगियों का मनोबल बढ़ाने के लिए ऐसा कहते रहते हैं।” सम्राट चौधरी की भूमिका पर क्या बोले नेता? विजय चौधरी ने यह जरूर माना कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार में पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से काम कर रहे हैं। लेकिन उन्हें अगला मुख्यमंत्री घोषित करने जैसी कोई बात फिलहाल नहीं है। जमुई में बयान के बाद क्यों बढ़ी चर्चा? दरअसल, जमुई में ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान नीतीश कुमार लगातार दो-तीन दिनों से इसी तरह के बयान दे रहे थे। जब उन्होंने सार्वजनिक मंच से सम्राट चौधरी के लिए लोगों से समर्थन भी मांगा, तब यह चर्चा और तेज हो गई कि वह अपने उत्तराधिकारी का संकेत दे रहे हैं। आगे क्या? नीतीश कुमार के संभावित तौर पर राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद छोड़ने की अटकलों के बीच यह मुद्दा और अहम हो गया है। हालांकि जेडीयू की सफाई के बाद फिलहाल यह स्पष्ट हो गया है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में उत्तराधिकारी को लेकर सस्पेंस बरकरार है। नीतीश कुमार के संकेतों और जेडीयू की सफाई के बीच आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
सियासत में नई हलचल, ‘सम्मानजनक विदाई’ की चर्चा तेज बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राजनीतिक गलियारों में इसे उनकी सक्रिय राज्य राजनीति से ‘सम्मानजनक विदाई’ के रूप में देखा जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनके बाद जनता दल यूनाइटेड की कमान किसके हाथ में और किस रणनीति के तहत चलेगी। बदल सकती है सत्ता की पूरी संरचना विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद सत्ता के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। खासकर मुख्यमंत्री आवास ‘एक अणे मार्ग’ से लेकर प्रशासनिक ढांचे तक बदलाव संभव है। नई नेतृत्व शैली के अनुसार अफसरशाही में भी फेरबदल देखने को मिल सकता है। ललन सिंह और संजय झा की भूमिका पर सवाल जेडीयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और संजय झा को लेकर सियासी चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि सत्ता परिवर्तन में इनकी अहम भूमिका रही है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या उनकी भूमिका आगे भी उतनी ही प्रभावी रहेगी या सीमित हो जाएगी। हालांकि, राजनीति के जानकारों का एक वर्ग मानता है कि ललन सिंह अपनी लचीली राजनीतिक शैली के कारण हर परिस्थिति में खुद को ढाल सकते हैं। वहीं, संजय झा कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में संगठन की कमान संभालते हुए नए नेतृत्व को स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। निशांत कुमार की एंट्री से बदलेगा समीकरण? राजनीतिक हलकों में निशांत कुमार की संभावित एंट्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि अगर युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाया गया, तो पार्टी की दिशा और कार्यशैली दोनों में बदलाव देखने को मिल सकता है। अशोक चौधरी की राजनीति पर भी असर अशोक चौधरी को नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है। लेकिन बदलते समीकरण में उनकी राजनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, उनका धार्मिक और संतुलित व्यक्तित्व नए नेतृत्व के साथ तालमेल बैठाने में मददगार साबित हो सकता है। विजय चौधरी की विश्वसनीयता बनी रहेगी मजबूत इन सभी बदलावों के बीच विजय कुमार चौधरी की स्थिति सबसे मजबूत मानी जा रही है। वे लंबे समय से नीतीश कुमार के भरोसेमंद सहयोगी रहे हैं और ‘सेकंड मैन’ की भूमिका में रहे हैं। उनकी विश्वसनीयता और प्रशासनिक अनुभव के चलते आने वाली सरकार में भी उनकी अहम भूमिका बनी रह सकती है। आगे क्या? कुल मिलाकर, नीतीश कुमार के दिल्ली कूच के बाद बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है। पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन, नए चेहरों की एंट्री और पुराने नेताओं की भूमिका को लेकर कई तरह के समीकरण बनते-बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अब देखना होगा कि जेडीयू इस बदलाव को किस तरह संभालती है और क्या यह परिवर्तन पार्टी के लिए मजबूत साबित होता है या नई चुनौतियां लेकर आता है।
पूर्व सांसद का बड़ा बयान-‘जनता खुश नहीं’, तेजस्वी पर भी साधा निशाना, युवा नेतृत्व की वकालत पटना: पटना समेत पूरे बिहार की राजनीति इन दिनों गरमा गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने सियासी हलचल तेज कर दी है। इस फैसले पर पूर्व सांसद आनंद मोहन ने खुलकर नाराजगी जताई है और इसे जनता की भावना के खिलाफ बताया है। ‘जनता खुश नहीं’, फैसले पर उठाए सवाल मीडिया से बातचीत में आनंद मोहन ने साफ कहा कि नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाना जनता को स्वीकार नहीं है। उनके अनुसार, जिस चेहरे पर चुनाव लड़ा गया, अचानक उसका बदल जाना लोगों को निराश कर सकता है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का यह कदम बिहार की राजनीति में बड़ा असर डालेगा और आने वाले समय में इसके परिणाम देखने को मिलेंगे। मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर बढ़ी चर्चा आनंद मोहन ने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा गया था, इसलिए स्वाभाविक रूप से आगे भी उसी आधार पर निर्णय होना चाहिए था। उनके अनुसार, मौजूदा हालात में राज्य की राजनीतिक दिशा बदलती नजर आ रही है। तेजस्वी यादव पर तंज राज्यसभा चुनाव को लेकर तेजस्वी यादव के ‘लोकतंत्र की हत्या’ वाले बयान पर भी आनंद मोहन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी हार के बाद तेजस्वी के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने तेजस्वी को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें विपक्ष की भूमिका जिम्मेदारी से निभानी चाहिए, क्योंकि जनता ने उन्हें यही जिम्मेदारी दी है। निशांत कुमार की एंट्री पर जताया भरोसा राजनीति में संभावित बदलाव का संकेत देते हुए आनंद मोहन ने निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बिहार को अब युवा नेतृत्व की जरूरत है और निशांत के आने से राजनीति को नई ऊर्जा और दिशा मिल सकती है। बदलाव के दौर में बिहार की सियासत आनंद मोहन के इस बयान को बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि निशांत कुमार राजनीति में सक्रिय होते हैं, तो राज्य की सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव संभव है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले और उस पर उठ रहे सवालों के बीच बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है, जहां आने वाले समय में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
जनसंवाद के साथ विकास परियोजनाओं की समीक्षा, कई योजनाओं का होगा लोकार्पण और शिलान्यास बिहार में विकास कार्यों को रफ्तार देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ जारी है। इस यात्रा के चौथे चरण के दूसरे दिन बुधवार को मुख्यमंत्री जमुई और नवादा जिले का दौरा करेंगे। इस दौरान वे दोनों जिलों में सैकड़ों करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। जमुई को 914 करोड़ की 370 परियोजनाओं की सौगात मुख्यमंत्री का मुख्य कार्यक्रम जमुई जिले में होगा, जहां वे कुल 914 करोड़ रुपये की 370 विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इनमें 602 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 181 परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा, जबकि 312 करोड़ रुपये की 189 नई योजनाओं का शिलान्यास होगा। इससे जिले में आधारभूत संरचना और जनसुविधाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है। सिकंदरा में जनसंवाद, विकास कार्यों की समीक्षा जमुई के सिकंदरा में मुख्यमंत्री का जनसंवाद कार्यक्रम प्रस्तावित है। यहां वे स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करेंगे और क्षेत्र में चल रही योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। इसके साथ ही नवादा जिले में भी वे विभिन्न विकास परियोजनाओं का जायजा लेंगे और नई योजनाओं की घोषणा करेंगे। पहले दिन भागलपुर और बांका को मिली सौगात ‘समृद्धि यात्रा’ के चौथे चरण की शुरुआत मंगलवार से हुई थी। पहले दिन मुख्यमंत्री ने भागलपुर और बांका जिले का दौरा किया। इस दौरान भागलपुर में 441.32 करोड़ रुपये की 144 परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया, जबकि बांका में करीब 708 करोड़ रुपये की 497 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ। 20 मार्च तक तय कार्यक्रम, बढ़ सकती है अवधि आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार ‘समृद्धि यात्रा’ का यह चरण 20 मार्च तक चलना है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक इस यात्रा की अवधि बढ़ाकर 30 मार्च तक किए जाने की संभावना है। इससे राज्य के अन्य जिलों में भी विकास योजनाओं की समीक्षा और घोषणाएं की जा सकती हैं। आगे की राजनीतिक हलचल पर नजर सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अप्रैल के दूसरे सप्ताह में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। वहीं 14 अप्रैल के बाद राज्य में नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की भी चर्चा तेज हो गई है, जिससे बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ सकती है। विकास और संवाद पर फोकस ‘समृद्धि यात्रा’ के जरिए मुख्यमंत्री का जोर विकास कार्यों को जमीन पर उतारने और आम जनता से सीधा संवाद स्थापित करने पर है। इस पहल से राज्य के विभिन्न जिलों में चल रही योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव का पूरा कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इसके साथ ही यह सवाल चर्चा में आ गया है कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर पार्टी की कमान संभालेंगे या इस बार किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा। चुनाव कार्यक्रम घोषित, तारीखें तय जदयू द्वारा जारी आधिकारिक कैलेंडर के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 22 मार्च रखी गई है। इसके बाद 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जबकि 24 मार्च को नाम वापस लेने की आखिरी तारीख होगी। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में रहते हैं, तो 27 मार्च को मतदान कराया जाएगा। नीतीश कुमार का फिर अध्यक्ष बनना लगभग तय? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार का दोबारा निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। 29 दिसंबर 2023 को पार्टी की कमान संभालने के बाद उन्होंने संगठन को एकजुट बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में ऐसा कोई दूसरा चेहरा नहीं है, जिस पर सभी गुटों की सहमति बन सके। ऐसे में अगर 24 मार्च तक केवल एक ही नामांकन आता है, तो उसी दिन औपचारिक रूप से उनके नाम का ऐलान हो सकता है। दिल्ली से पटना तक तेज हुई राजनीतिक हलचल चुनाव की घोषणा के साथ ही पटना और दिल्ली स्थित जदयू दफ्तरों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस संगठनात्मक चुनाव को पार्टी की भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों ‘समृद्धि यात्रा’ के चौथे चरण में व्यस्त हैं। 17 से 20 मार्च के बीच वे भागलपुर, बांका, जमुई और गया समेत कई जिलों का दौरा कर रहे हैं और विकास योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं। क्या संगठन में होगा बदलाव या जारी रहेगी पुरानी रणनीति? यह चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे जदयू के आगामी राजनीतिक दिशा के रूप में भी देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब पार्टी के भीतर नई पीढ़ी को लेकर चर्चा हो रही है और निशांत कुमार की संभावित सक्रियता को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, यह चुनाव और भी अहम हो गया है। अब सबकी नजरें 24 मार्च और उसके बाद की स्थिति पर टिकी हैं- क्या जदयू फिर से नीतीश कुमार के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा या पार्टी किसी नए नेतृत्व की ओर कदम बढ़ाएगी।
सुबह 11 बजे लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह बिहार को शनिवार से नया राज्यपाल मिल जाएगा। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल Syed Ata Hasnain आज सुबह 11 बजे बिहार के राज्यपाल पद की शपथ लेंगे। यह शपथ ग्रहण समारोह Lok Bhavan में आयोजित होगा। उन्हें Sangam Kumar Sahu, मुख्य न्यायाधीश, Patna High Court द्वारा पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे। कई वरिष्ठ नेता रहेंगे कार्यक्रम में शामिल शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री Nitish Kumar, उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha और Samrat Choudhary शामिल होंगे। इसके अलावा बिहार विधानसभा के अध्यक्ष Prem Kumar और विधान परिषद के सभापति Awadhesh Narayan Singh सहित कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी समारोह में उपस्थित रहेंगे। पटना पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत नए राज्यपाल सैयद अता हसनैन गुरुवार को ही Patna पहुंच गए थे। एयरपोर्ट पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा सहित कई नेताओं ने उनका स्वागत किया। इस दौरान कई अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। 40 वर्षों तक सेना में निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। करीब 40 वर्षों तक सेना में सेवा देने के दौरान उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। खास तौर पर Jammu and Kashmir में आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कई रणनीतिक और सुरक्षा अभियानों का नेतृत्व किया, जिसके कारण उन्हें सुरक्षा मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का रहा उल्लेखनीय कार्यकाल इससे पहले बिहार के राज्यपाल Arif Mohammad Khan रहे, जिनका कार्यकाल करीब 428 दिनों का रहा। उनका कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा होने के बावजूद काफी सक्रिय और विवादों से दूर माना गया। उन्होंने अपने कार्यकाल में विश्वविद्यालयों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर राय रखी और राजभवन को एक सक्रिय संवाद मंच बनाने की कोशिश की। वे अक्सर छात्रों, शिक्षाविदों और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद करते नजर आते थे।
तीसरे चरण की यात्रा का अंतिम दिन बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar की चल रही “समृद्धि यात्रा” का शनिवार को आखिरी दिन है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री Begusarai और Sheikhpura जिलों का दौरा करेंगे। दौरे के दौरान वे दोनों जिलों में करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा भी करेंगे। इस दौरान मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे, जिनके साथ योजनाओं की प्रगति को लेकर विस्तृत चर्चा की जाएगी। बेगूसराय में सैकड़ों योजनाओं की शुरुआत मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के तहत बेगूसराय जिले में 109 करोड़ रुपये की लागत से 189 नई योजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा। इसके अलावा लगभग 165 करोड़ रुपये की लागत से पूरी हो चुकी 211 योजनाओं का उद्घाटन भी मुख्यमंत्री के हाथों होगा। इन योजनाओं के जरिए सड़क, आधारभूत ढांचा, स्वास्थ्य और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। शेखपुरा को भी मिलेगा विकास का बड़ा पैकेज बेगूसराय के बाद मुख्यमंत्री शेखपुरा जिले का दौरा करेंगे। यहां 144 करोड़ रुपये की लागत से 120 योजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा, जबकि 62 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 196 योजनाओं का उद्घाटन होगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री विभिन्न विकास परियोजनाओं का निरीक्षण कर सकते हैं और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दे सकते हैं। जनसंवाद कार्यक्रम में लोगों से करेंगे बातचीत इस यात्रा में मुख्यमंत्री के साथ राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary और Vijay Kumar Sinha भी मौजूद रहेंगे। बेगूसराय में मुख्यमंत्री मेडिकल कॉलेज और कुछ औद्योगिक इकाइयों का भी निरीक्षण कर सकते हैं। इसके बाद शेखपुरा में विभिन्न परियोजनाओं का जायजा लिया जाएगा। दोनों जिलों में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां मुख्यमंत्री स्वयं सहायता समूह से जुड़ी जीविका दीदियों और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करेंगे। सहरसा और खगड़िया में भी हुई थी विकास योजनाओं की शुरुआत समृद्धि यात्रा के तहत शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने Saharsa और Khagaria जिलों का दौरा किया था। इस दौरान भी कई करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया गया। जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विकास योजनाओं का उल्लेख किया और पूर्व की सरकारों की नीतियों पर भी सवाल उठाए। वहीं उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सहरसा एयरपोर्ट के लिए अगले महीने टेंडर जारी करने की घोषणा की।
बिहार की राजनीति में उस समय चर्चाएं तेज हो गईं जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने समृद्धि यात्रा के दौरान मंच पर उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary की पीठ थपथपाते हुए राज्य के विकास की बात कही। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कोई संकेत दिया गया है। पूर्णिया और कटिहार में समृद्धि यात्रा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को अपनी समृद्धि यात्रा के तहत Purnia और Katihar पहुंचे। यहां आयोजित सभाओं में उन्होंने बिहार के विकास के लिए आने वाले पांच वर्षों का रोडमैप जनता के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और खेल जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव की योजना बना रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार में विकास की रफ्तार और तेज होगी। हर प्रखंड में आदर्श स्कूल और डिग्री कॉलेज शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार हर प्रखंड में आदर्श स्कूल और डिग्री कॉलेज खोलने की योजना पर काम कर रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को अपने इलाके में ही उच्च शिक्षा की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। अस्पतालों को बनाया जाएगा विशेष अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रखंड स्तर के अस्पतालों को विशेष अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही ग्रामीण सड़कों को दो लेन में बदलने की योजना भी बनाई गई है, ताकि गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर हो सके। पटना में बनेगी आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी राजधानी Patna में एक आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी बनाने की योजना भी सामने रखी गई है। इसके जरिए खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं दी जाएंगी। सरकार खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की योजना पर भी काम कर रही है, ताकि खेलों को बढ़ावा मिल सके। मखाना किसानों के लिए विशेष योजना मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि Makhana उत्पादन से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इससे मिथिलांचल क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। मंच पर भावुक हुईं मंत्री लेशी सिंह कटिहार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंत्री Leshi Singh अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए भावुक हो गईं और मंच पर ही रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कठिन समय में उनका साथ दिया और राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर दिया। सम्राट चौधरी को लेकर बढ़ी चर्चा कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंच पर मौजूद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाकर भरोसा जताया कि राज्य में विकास कार्य इसी तरह आगे बढ़ते रहेंगे। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई कि क्या यह भविष्य के नेतृत्व को लेकर कोई संकेत है।
बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar शुक्रवार को अपनी समृद्धि यात्रा के तहत Khagaria और Saharsa जिले का दौरा करेंगे। इस दौरान खगड़िया जिले को करीब 304 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का तोहफा मिलेगा। मुख्यमंत्री यहां विभिन्न योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे तथा जनसंवाद कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। संसारपुर मैदान में होगा मुख्य कार्यक्रम खगड़िया में कार्यक्रम का आयोजन संसारपुर खेल मैदान में किया गया है। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर भव्य पंडाल बनाए गए हैं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन की ओर से पूरे इलाके में चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जा रही है। 300 करोड़ से ज्यादा की योजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री खगड़िया में 43 करोड़ रुपये की लागत से 35 योजनाओं का शिलान्यास करेंगे। 261 करोड़ रुपये की लागत से 284 योजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही जिले में चल रही विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। इस कार्यक्रम में दोनों उपमुख्यमंत्री और कई मंत्री भी मौजूद रह सकते हैं। सहरसा में भी विकास योजनाओं का तोहफा मुख्यमंत्री इसके बाद सहरसा पहुंचेंगे, जहां 90 करोड़ रुपये की लागत से 20 योजनाओं का शिलान्यास 286 करोड़ रुपये की लागत से 70 योजनाओं का उद्घाटन 136 करोड़ रुपये की लागत से 35 योजनाओं का कार्यारंभ किया जाएगा। रेलवे ओवरब्रिज का कर सकते हैं निरीक्षण समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री बूढ़ी गंडक नदी पर बन रहे खगड़िया-बख्तियारपुर बाइपास मार्ग के रेलवे ओवरब्रिज का निरीक्षण भी कर सकते हैं। यह परियोजना खगड़िया समेत आसपास के जिलों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके बन जाने से क्षेत्र में जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। पहले पूर्णिया और कटिहार को मिला था बड़ा तोहफा इससे पहले गुरुवार को मुख्यमंत्री Purnia और Katihar पहुंचे थे, जहां उन्होंने दोनों जिलों को मिलाकर करीब 895 करोड़ रुपये की योजनाओं का तोहफा दिया था। कार्यक्रम के दौरान मंत्री Leshi Singh ने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए कहा था कि उन्होंने एक अभिभावक की तरह हर कठिन समय में उनका साथ दिया और राजनीति में आगे बढ़ने का मौका दिया।
बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान Purnia में एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। जनसभा को संबोधित करते हुए बिहार सरकार की मंत्री Leshi Singh मंच पर ही भावुक हो गईं और भाषण देते-देते उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। मुश्किल समय में ढाल बने नीतीश कुमार अपने संबोधन में लेसी सिंह ने कहा कि उनके जीवन के कठिन दौर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक अभिभावक की तरह उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, “मुझ जैसी साधारण महिला को राजनीति में आगे बढ़ाने का श्रेय नीतीश कुमार जी को जाता है। जब मेरे परिवार पर मुश्किलें आईं, तब वे ‘कृष्ण’ की तरह ढाल बनकर खड़े रहे और हर संकट से बाहर निकाला।” महिलाओं को आगे बढ़ाने का श्रेय मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बिहार की आधी आबादी यानी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आज बिहार की बेटियां और महिलाएं जो सम्मान और अवसर पा रही हैं, वह मुख्यमंत्री के विजन का परिणाम है। पूर्णिया को मिली 500 करोड़ की योजनाएं कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने मत्स्य एवं पशुपालन विभाग की करीब 500 करोड़ रुपये की लागत वाली 200 योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। पूर्ववर्ती सरकार पर भी साधा निशाना अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए पूर्व की सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2005 से पहले बिहार की स्थिति काफी खराब थी, लोग शाम के बाद घर से निकलने में डरते थे और विकास के नाम पर बहुत कम काम हुआ था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बिहार को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया है और अब राज्य में कानून का राज स्थापित हुआ है।
बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar की ‘समृद्धि यात्रा’ के तीसरे चरण का आज तीसरा दिन है। मधेपुरा में रात्रि विश्राम के बाद मुख्यमंत्री आज सुबह हेलिकॉप्टर से Purnia पहुंचेंगे। इसके बाद वे Katihar का भी दौरा करेंगे। इस दौरान दोनों जिलों में करीब 895 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया जाएगा। राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद निकली इस यात्रा को राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि यह दौरा सीमांचल क्षेत्र के मुस्लिम बहुल इलाकों में हो रहा है। पूर्णिया में 485 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास मुख्यमंत्री पूर्णिया में कुल 485 करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। इनमें 321 करोड़ रुपये की लागत वाली 8 योजनाओं का शिलान्यास और 164 करोड़ रुपये की 84 योजनाओं का उद्घाटन शामिल है। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री Maa Puran Devi Temple, डेयरी, मत्स्य और पशुपालन प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण भी करेंगे। इसके अलावा वे Indira Gandhi Stadium पहुंचकर जीविका दीदियों और आम लोगों के साथ जनसंवाद करेंगे। वहीं अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा बैठक भी करेंगे। कटिहार में 410 करोड़ की 443 योजनाएं पूर्णिया के बाद मुख्यमंत्री कटिहार के लिए रवाना होंगे। यहां 181 करोड़ रुपये की लागत वाली 186 योजनाओं का शिलान्यास और 229 करोड़ रुपये की 257 योजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री स्थानीय अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे और ग्रामीणों व योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद भी करेंगे। चार दिनों में 10 जिलों का दौरा ‘समृद्धि यात्रा’ 10 मार्च से शुरू हुई है और चार दिनों में कोसी-सीमांचल क्षेत्र के 10 जिलों को कवर किया जाएगा। 13 मार्च को मुख्यमंत्री Saharsa और Khagaria का दौरा करेंगे, जबकि 14 मार्च को Begusarai और Sheikhpura जाएंगे। राज्यसभा और मुख्यमंत्री पद पर सस्पेंस बरकरार राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद शुरू हुई इस यात्रा को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब तक अपने किसी भी संबोधन में राज्यसभा जाने को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है। मुख्यमंत्री पद छोड़ेंगे या नहीं, इस सवाल पर भी उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है, जिससे बिहार की राजनीति में अटकलों का दौर जारी है।
बिहार में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार जल्द ही 45 हजार नए शिक्षकों की भर्ती करने जा रही है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने यह घोषणा बुधवार को अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान अररिया दौरे में की। उन्होंने कहा कि इस बहाली से राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी और पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार आएगा। बिहार में बढ़ी शिक्षकों की संख्या मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में लगातार काम किया है। पहले राज्य के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी थी, जिसे दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर बहाली की प्रक्रिया शुरू की गई। उन्होंने बताया कि पहले नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति की गई और बाद में Bihar Public Service Commission के माध्यम से भी शिक्षकों की भर्ती की गई। इन प्रयासों के चलते आज बिहार में सरकारी शिक्षकों की संख्या बढ़कर 5 लाख 24 हजार से अधिक हो चुकी है। अब इसी क्रम में 45 हजार और शिक्षकों की बहाली की जाएगी। बालिका शिक्षा पर सरकार का विशेष ज़ोर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2006 से ही सरकार ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू कीं। छात्राओं को साइकिल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिसका सकारात्मक असर देखने को मिला। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के कारण स्कूलों में लड़कियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। लालू-राबड़ी शासन पर साधा निशाना इस दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 24 नवंबर 2005 से पहले राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी और लोग शाम के बाद घर से निकलने से डरते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी कमज़ोर थी। सड़कों के कारण कम हुआ सफर का समय मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में सड़कों और पुल-पुलियों का बड़े पैमाने पर निर्माण कराया है। इसका परिणाम यह हुआ कि अब राज्य के अधिकांश जिलों से पटना पहुंचना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। पहले जहां कई जिलों से राजधानी पहुंचने में छह घंटे या उससे अधिक समय लगता था, वहीं अब दूरदराज के जिलों से भी करीब पांच घंटे में पटना पहुंचा जा सकता है। महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। वर्ष 2015 में शुरू की गई Saat Nischay Yojana को बिहार के विकास की बड़ी पहल माना गया। इसके विस्तार के रूप में वर्ष 2020 में इसका दूसरा चरण Saat Nischay Yojana Phase-2 लागू किया गया। अब ‘सात निश्चय-3’ के तहत भी कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा, आधारभूत संरचना और महिलाओं के सशक्तिकरण के जरिए बिहार के समग्र विकास को गति देना है।
जन सुराज अभियान के सूत्रधार Prashant Kishor ने बिहार की राजनीति को लेकर एक बार फिर तीखा बयान दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की चर्चा पर तंज कसते हुए कहा कि अब तक बिहार से केवल युवाओं का पलायन होता था, लेकिन अब तो मुख्यमंत्री का भी पलायन होने लगा है। मंगलवार को सासाराम में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान प्रशांत किशोर ने राज्य की मौजूदा स्थिति और सरकार के कामकाज पर कई सवाल उठाए। ‘सरकार के वादे पूरे नहीं हुए’ प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव के समय सरकार ने अपराध पर नियंत्रण, भ्रष्टाचार पर लगाम और पलायन रोकने जैसे कई बड़े वादे किए थे। लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए लगता है कि ये समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में युवाओं के सामने रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें दूसरे राज्यों में काम करने के लिए जाना पड़ रहा है। ‘अन्य राज्यों में 50 से ज्यादा बिहारियों की मौत’ पलायन के मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष नवंबर के बाद से 50 से अधिक बिहारियों की मौत अन्य राज्यों में हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अगर लोग धर्म, जाति और पैसे के लालच में वोट देते रहेंगे, तो बिहार की स्थिति में सुधार मुश्किल है। चुनावी हार पर भी बोले प्रशांत किशोर प्रेस वार्ता में उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में मिली हार पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने जाति, धर्म या पैसों के आधार पर राजनीति नहीं की और ईमानदारी से लोगों से बिहार के बच्चों के भविष्य के नाम पर वोट देने की अपील की थी, लेकिन जनता उनकी बात समझ नहीं पाई। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक बिहार में वास्तविक बदलाव नहीं होगा, तब तक जन सुराज आंदोलन अपनी कोशिश जारी रखेगा। ‘नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री नहीं रहने की बात सच हुई’ प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने पहले ही दावा किया था कि नीतीश कुमार लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर नहीं रह पाएंगे। उस समय लोगों ने उनका मजाक उड़ाया था, लेकिन अब उनकी बात सही साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से वह लगातार यह कह रहे थे कि नीतीश कुमार की मानसिक और शारीरिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकें। निशांत कुमार के राजनीति में आने पर क्या बोले मुख्यमंत्री के बेटे Nishant Kumar के राजनीति में आने की संभावना पर प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को राजनीति में आने का अधिकार है और उनका स्वागत है। हालांकि उन्होंने परिवारवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कई नेताओं ने अपने बच्चों के लिए सत्ता का रास्ता तैयार कर दिया है, जबकि आम जनता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर उतनी गंभीर नहीं दिखती। संगठन को मजबूत करने पर जोर प्रशांत किशोर ने बताया कि बिहार में व्यवस्था परिवर्तन और नवनिर्माण के लक्ष्य के साथ जन सुराज अभियान आने वाले छह महीनों में अपनी गतिविधियों को फिर तेज करेगा। इसके लिए पहले संगठन को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश के हर जिले में तीन दिनों का प्रवास करेंगे और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन को और प्रभावी बनाने के लिए सुझाव लेंगे।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को अपनी समृद्धि यात्रा के तहत अररिया जिले का दौरा करेंगे। इस दौरान वे करीब 545 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और कार्यारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा जिले में पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा और डेयरी क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। सुबह 10 बजे से शुरू होगा कार्यक्रम मुख्यमंत्री का कार्यक्रम सुबह करीब 10 बजे न्यू पुलिस लाइन (हरियाबाड़ा) से शुरू होगा। यहां वे लगभग 54 करोड़ रुपये की लागत से बने अत्याधुनिक पुलिस लाइन भवन का उद्घाटन करेंगे। करीब 35 एकड़ क्षेत्र में फैले इस परिसर में प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र, अस्पताल, स्कूल, महिला और पुरुष बैरक, पारिवारिक आवास, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवास तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के लिए भी आवासीय सुविधा विकसित की गई है। परिसर में मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर के लिए हेलीपैड भी बनाया गया है। इससे जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। ANM-GNM नर्सिंग संस्थान का करेंगे उद्घाटन इसके बाद मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से अररिया आरएस पहुंचेंगे, जहां वे 29.6 करोड़ रुपये की लागत से बने ANM-GNM प्रशिक्षण संस्थान (नर्सिंग कॉलेज) का उद्घाटन करेंगे। इस संस्थान का शिलान्यास वर्ष 2017 में किया गया था और अब इसका निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यहां हर साल करीब 200 छात्र-छात्राओं को नर्सिंग प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार और करियर के नए अवसर मिलेंगे। अररिया कॉलेज स्टेडियम में समीक्षा बैठक दौरे के दौरान मुख्यमंत्री अररिया कॉलेज स्टेडियम में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी करेंगे। इसके साथ ही वे जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित करेंगे और विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए विकास योजनाओं के स्टॉलों का निरीक्षण भी करेंगे। 545 करोड़ की योजनाओं का होगा शुभारंभ मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान कुल 545 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की शुरुआत की जाएगी। इसमें 330.60 करोड़ रुपये की 6 योजनाओं का शिलान्यास 157.16 करोड़ रुपये की 60 योजनाओं का उद्घाटन 58.12 करोड़ रुपये की 2 योजनाओं का कार्यारंभ शामिल है। इन योजनाओं में अररिया आरएस स्थित मिल्क चिलिंग प्लांट के नवीकरण की महत्वपूर्ण परियोजना भी शामिल है। वर्तमान में इस प्लांट की क्षमता 21 हजार लीटर प्रतिदिन है, जिसे बढ़ाकर 50 हजार लीटर प्रतिदिन किया जाएगा। इससे लगभग 350 सहकारी समितियों से दूध संग्रह की व्यवस्था और मजबूत होगी तथा डेयरी से जुड़े किसानों और पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा। दोपहर 1:30 बजे किशनगंज के लिए होंगे रवाना मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं की पूरी तैयारी कर ली है। प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है और कार्यक्रम स्थलों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री दोपहर करीब 1:30 बजे बाजार समिति हेलीपैड से हेलीकॉप्टर के माध्यम से किशनगंज के लिए रवाना होंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा अररिया जिले में विकास योजनाओं को गति देने के साथ-साथ रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है।
सुपौल: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को सुपौल जिले के निर्मली से समृद्धि यात्रा के तीसरे चरण की शुरुआत करेंगे। इस दौरान वह जिले को 569.36 करोड़ रुपये की 213 विकास योजनाओं की सौगात देंगे। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सुबह 10:45 बजे निर्मली पहुंचे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा नामांकन के बाद पहली बार किसी बड़े कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वह सुबह 10:45 बजे हेलीकॉप्टर से निर्मली अनुमंडल कार्यालय परिसर स्थित हेलीपैड पर पहुंचे। इसके बाद वह निर्मली स्थित रिंग बांध के जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण करेंगे और अनुमंडल कार्यालय परिसर में लगाए गए विभिन्न विभागों के स्टॉल का अवलोकन करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री विभिन्न हितधारकों और स्थानीय लोगों से भी बातचीत करेंगे। 213 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास मुख्यमंत्री जिले के विकास से जुड़ी कुल 569.3677 करोड़ रुपये की 213 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें 434.469 करोड़ रुपये की 84 योजनाओं का शिलान्यास और 134.8987 करोड़ रुपये की 129 योजनाओं का उद्घाटन शामिल है। इसके बाद वह निर्मली अनुमंडल सभागार में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे और आम लोगों से जनसंवाद भी करेंगे। दोपहर में मधेपुरा के लिए होंगे रवाना निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर 1:22 बजे हेलीकॉप्टर से मधेपुरा के लिए रवाना होंगे। इस तरह सुबह 10:45 बजे से दोपहर 1:22 बजे तक वह करीब दो घंटे 37 मिनट निर्मली में रहेंगे। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन अलर्ट मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सोमवार को निर्मली में डीएम सावन कुमार और एसपी शरथ आरएस की संयुक्त अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में कार्यक्रम को सुरक्षित और सफल तरीके से संपन्न कराने के लिए विस्तृत चर्चा की गई। डीएम ने अधिकारियों को रूट चार्ट, आगमन-प्रस्थान व्यवस्था, सभा स्थल की तैयारी, यातायात नियंत्रण, वीआईपी मूवमेंट और प्रशासनिक समन्वय से जुड़े सभी बिंदुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था के सख्त निर्देश एसपी शरथ आरएस ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड और रूट लाइन पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रखी जाए। भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और वीआईपी सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि कार्यक्रम से पहले स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों की समीक्षा करें और किसी भी कमी को तुरंत दूर करें, ताकि समृद्धि यात्रा का कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज