भीषण गर्मी, पसीना और डिहाइड्रेशन के बीच नारियल पानी एक नेचुरल एनर्जी ड्रिंक बनकर उभर रहा है। इलेक्ट्रोलाइट्स, पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ पाचन और स्किन हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। अब एक्सपर्ट्स ने बताया है कि इसे किस समय पीना सबसे ज्यादा असरदार हो सकता है। सुबह खाली पेट पीना क्यों फायदेमंद? इंटीग्रेटिव न्यूट्रिशनिस्ट्स के मुताबिक, सुबह खाली पेट नारियल पानी पीने से शरीर को नेचुरल डिटॉक्स सपोर्ट मिलता है। यह पाचन को बेहतर बनाने, शरीर का pH बैलेंस बनाए रखने और दिनभर की हाइड्रेशन जरूरत पूरी करने में मदद कर सकता है। क्लिनिकल डाइटिशियन वेदिका प्रेमानी के अनुसार, गर्मियों में शरीर से पसीने के जरिए तेजी से इलेक्ट्रोलाइट्स निकलते हैं। ऐसे में नारियल पानी उन्हें प्राकृतिक तरीके से रिप्लेस करने में मदद करता है। इससे स्किन हाइड्रेटेड रहती है और थकान भी कम महसूस होती है। वर्कआउट और गर्मी के बाद भी असरदार एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेज धूप, लंबे सफर या वर्कआउट के बाद नारियल पानी पीना शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद कर सकता है। यह बाजार में मिलने वाले शुगर-लोडेड ड्रिंक्स की तुलना में हल्का और ज्यादा हेल्दी विकल्प माना जाता है। कितना नारियल पानी पीना सही? विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में दिन में 1 से 2 गिलास यानी करीब 200-300ml नारियल पानी पर्याप्त माना जाता है। हालांकि, ज्यादा गर्मी या भारी फिजिकल एक्टिविटी के दौरान इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है। लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है। खासकर किडनी रोग या डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बाद ही नियमित सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसमें पोटैशियम और नेचुरल शुगर मौजूद होती है। स्वाद और फायदे बढ़ाने के आसान तरीके एक्सपर्ट्स नारियल पानी में चिया सीड्स, नींबू या खीरा मिलाने की सलाह भी देते हैं। इससे फाइबर, विटामिन C और अतिरिक्त हाइड्रेशन का फायदा मिल सकता है। नारियल पानी के प्रमुख फायदे शरीर को तेजी से हाइड्रेट करता है इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में मदद पाचन और पेट की समस्याओं में राहत स्किन हेल्थ को सपोर्ट वर्कआउट के बाद रिकवरी में मदद गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाता है शुगर ड्रिंक्स का हेल्दी विकल्प
गर्मियों में ज्यादा फल खाना भी बन सकता है परेशानी गर्मी का मौसम आते ही बाजार आम, तरबूज, लीची और पपीते जैसे फलों से भर जाते हैं। लोग इन्हें हेल्दी मानकर बिना सोचे-समझे खूब खाते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा फल खाना शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है, खासकर डायबिटीज, मोटापा और फैटी लिवर से जूझ रहे लोगों के लिए। विशेषज्ञों के मुताबिक फलों में प्राकृतिक शुगर यानी फ्रक्टोज होता है। सीमित मात्रा में यह फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा सेवन करने पर यह लिवर पर दबाव बढ़ा सकता है और ब्लड शुगर भी बढ़ा सकता है। आम खाते समय रखें मात्रा का ध्यान आम गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल माना जाता है, लेकिन इसमें कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार: डायबिटीज वाले लोग एक दिन में आधा मध्यम आकार का आम ही खाएं। सामान्य लोग एक छोटा या मध्यम आकार का आम खा सकते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आम को भोजन के तुरंत बाद खाने के बजाय स्नैक की तरह खाएं। इसके साथ दही, पनीर, भुना चना या ड्राई फ्रूट्स लेने से शुगर तेजी से नहीं बढ़ती। मैंगो शेक, आमरस और पैकेज्ड जूस से बचने की सलाह दी गई है। तरबूज ज्यादा खाने से भी बढ़ सकती है शुगर तरबूज में पानी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए लोग इसे बड़ी मात्रा में खा लेते हैं। हालांकि यह हल्का फल माना जाता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। डायबिटीज मरीजों के लिए 100-150 ग्राम तरबूज पर्याप्त माना गया है। अन्य लोग करीब 200 ग्राम तक खा सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि तरबूज का जूस पीने से बचना चाहिए, क्योंकि उसमें फाइबर कम हो जाता है और शुगर तेजी से शरीर में पहुंचती है। लीची खाते समय बरतें सावधानी लीची स्वादिष्ट जरूर होती है, लेकिन इसमें फ्रक्टोज की मात्रा काफी ज्यादा होती है। विशेषज्ञों के अनुसार: डायबिटीज वाले लोग 3-4 लीची तक सीमित रहें। सामान्य लोग 7-8 लीची खा सकते हैं। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि कच्ची लीची खाली पेट खाना बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। बिहार में पहले भी इससे जुड़ी गंभीर बीमारियों के मामले सामने आ चुके हैं। पपीता और आड़ू बेहतर विकल्प पपीता अपेक्षाकृत हल्का और सुरक्षित फल माना जाता है। डायबिटीज मरीज 100 ग्राम तक पपीता खा सकते हैं। अन्य लोग 150-200 ग्राम तक सेवन कर सकते हैं। वहीं आड़ू और आलूबुखारा जैसे फल भी सीमित मात्रा में अच्छे विकल्प माने जाते हैं। फ्रूट प्लेटर भी बन सकता है खतरा डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग एक साथ आम, तरबूज, लीची, खरबूजा और पपीता मिलाकर बड़ा फ्रूट बाउल खा लेते हैं। देखने में यह हेल्दी लगता है, लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी ज्यादा हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि: अलग-अलग फल खाने पर भी कुल मात्रा नियंत्रित रखें। डायबिटीज वाले लोग कुल मिलाकर करीब 100 ग्राम फल ही लें। सामान्य लोग 200 ग्राम तक फल खा सकते हैं। कब खाना चाहिए फल? डॉक्टरों के मुताबिक फल खाने का सही समय भी बेहद महत्वपूर्ण है। फलों को भोजन के बीच में खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है। रात में भारी मात्रा में फल खाने से बचना चाहिए। सुबह या दिन में फल खाना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद रहता है। जूस नहीं, साबुत फल खाएं विशेषज्ञों का कहना है कि ताजे और साबुत फल हमेशा जूस से बेहतर होते हैं। जूस में फाइबर कम हो जाता है और शुगर तेजी से शरीर में पहुंचती है, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकती है।
आजकल की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में थकान, ब्लोटिंग, लो एनर्जी और स्किन ब्रेकआउट जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। कई बार ये शरीर में बढ़ती सूजन यानी inflammation के संकेत हो सकते हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें, जैसे पर्याप्त पानी पीना और सही ड्रिंक्स का चुनाव करना, शरीर को अंदर से सपोर्ट करने में मदद कर सकता है। खासतौर पर ऐसे पेय जिनमें अदरक, हल्दी, ग्रीन टी या चिया सीड्स जैसे तत्व हों, शरीर की प्राकृतिक anti-inflammatory प्रक्रिया को सपोर्ट कर सकते हैं। अच्छी बात यह है कि इन ड्रिंक्स को बनाने के लिए महंगे इंग्रीडिएंट्स या जटिल रेसिपी की जरूरत नहीं होती। किचन में मौजूद साधारण चीजों से इन्हें आसानी से तैयार किया जा सकता है। 1. हल्दी और काली मिर्च की चाय हल्दी में मौजूद curcumin को प्राकृतिक anti-inflammatory तत्व माना जाता है। वहीं काली मिर्च इसके अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद करती है। सामग्री 1 कप पानी आधा चम्मच हल्दी पाउडर या ताजी हल्दी आधा चम्मच कद्दूकस किया अदरक एक चुटकी काली मिर्च 1 चम्मच शहद (वैकल्पिक) थोड़ा दूध (वैकल्पिक) बनाने का तरीका पानी उबालकर उसमें हल्दी, अदरक और काली मिर्च डालें। 5 से 7 मिनट तक पकने दें। छानकर कप में निकालें और चाहें तो शहद या दूध मिलाएं। इसे गर्मागर्म पिएं। 2. अदरक और नींबू पानी अदरक को पाचन और सूजन कम करने में मददगार माना जाता है, जबकि नींबू शरीर को तरोताजा महसूस कराता है। सामग्री डेढ़ कप पानी 1 इंच अदरक के टुकड़े आधे नींबू का रस 1 चम्मच शहद (वैकल्पिक) बनाने का तरीका अदरक को पानी में 5-10 मिनट तक उबालें। फिर गैस बंद करके उसमें नींबू रस और शहद मिलाएं। इसे गर्म या ठंडा दोनों तरह से पिया जा सकता है। 3. पुदीना वाली ग्रीन टी ग्रीन टी में antioxidants पाए जाते हैं, जबकि पुदीना इसे और ज्यादा refreshing बना देता है। सामग्री 1 ग्रीन टी बैग या 1 चम्मच ग्रीन टी 1 कप गर्म पानी 4-5 पुदीना पत्तियां 1 नींबू स्लाइस (वैकल्पिक) बनाने का तरीका ग्रीन टी और पुदीना को 2-3 मिनट तक गर्म पानी में डालकर रखें। फिर छान लें। चाहें तो नींबू मिलाएं। इसे गर्म या ठंडा दोनों तरह से पिया जा सकता है। 4. टार्ट चेरी स्प्रिट्जर टार्ट चेरी जूस को रिकवरी और शरीर की सूजन कम करने से जोड़कर देखा जाता है। सामग्री आधा कप बिना शक्कर वाला टार्ट चेरी जूस आधा कप स्पार्कलिंग वॉटर बर्फ थोड़ा नींबू रस बनाने का तरीका गिलास में बर्फ डालें, फिर चेरी जूस और स्पार्कलिंग वॉटर मिलाएं। ऊपर से नींबू रस डालकर हल्के से मिक्स करें। 5. खीरा, पुदीना और चिया वॉटर यह ड्रिंक शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ हल्का और फ्रेश महसूस कराने में मदद कर सकती है। सामग्री 2 कप पानी 5-6 खीरे के स्लाइस 5 पुदीना पत्तियां 1 चम्मच चिया सीड्स चौथाई नींबू का रस बनाने का तरीका पानी में खीरा, पुदीना और चिया सीड्स डालें। 15-20 मिनट तक छोड़ दें ताकि चिया फूल जाए। फिर नींबू रस मिलाकर पिएं। क्यों जरूरी है consistency? हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार कोई भी ड्रिंक जादुई इलाज नहीं होती। लेकिन रोजाना sugary drinks की जगह ज्यादा पौष्टिक और hydrating विकल्प चुनना लंबे समय में शरीर को फायदा पहुंचा सकता है। छोटे लेकिन लगातार किए गए बदलाव अक्सर बड़े wellness trends से ज्यादा असरदार साबित होते हैं।
अगर आपके बाल पतले हो रहे हैं, झड़ रहे हैं या बेजान दिखते हैं, तो सिर्फ शैंपू बदलने से काम नहीं चलेगा। असली खेल न्यूट्रिशन (पोषण) का है-जो बालों की जड़ों (follicles) को मजबूत बनाता है। आइए जानते हैं वो जरूरी पोषक तत्व जो बालों को नेचुरली घना और मजबूत बनाते हैं 1. बायोटिन (Vitamin B7) बालों की ग्रोथ का सुपरस्टार केराटिन (hair protein) बनाने में मदद बालों को टूटने से बचाता है कहां से लें? अंडा, बादाम, अखरोट, सैल्मन, शकरकंद टिप: ज्यादातर लोगों को सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती 2. विटामिन D बालों की जड़ों को एक्टिव करता है कमी होने पर बालों की ग्रोथ धीमी हेयर लॉस से जुड़ा हुआ कहां से लें? धूप, फोर्टिफाइड दूध, फैटी फिश 3. आयरन (Iron) बालों की “पावर सप्लाई” ऑक्सीजन को जड़ों तक पहुंचाता है कमी से बाल पतले और झड़ने लगते हैं कहां से लें? मीट, पालक, दाल, कद्दू के बीज टिप: आयरन + विटामिन C साथ लेने से ज्यादा फायदा 4. जिंक (Zinc) हेयर रिपेयर एक्सपर्ट बालों को रिपेयर करता है डैंड्रफ और हेयर फॉल रोकने में मदद कहां से लें? ऑयस्टर, बीफ, चना, काजू 5. विटामिन E बालों की शाइन और मजबूती स्कैल्प को डैमेज से बचाता है बालों को स्मूद और चमकदार बनाता है कहां से लें? बादाम, सूरजमुखी के बीज, एवोकाडो 6. ओमेगा-3 फैटी एसिड ड्राई और बेजान बालों के लिए जरूरी स्कैल्प को हाइड्रेट करता है इंफ्लेमेशन कम करता है कहां से लें? सैल्मन, चिया सीड्स, फ्लैक्ससीड, अखरोट 7. विटामिन A स्कैल्प का नैचुरल कंडीशनर सेबम (oil) बनाता है स्कैल्प को ड्राई होने से बचाता है कहां से लें? गाजर, शकरकंद, पालक ध्यान रखें: ज्यादा मात्रा में नुकसान भी कर सकता है 8. विटामिन C सपोर्टिंग हीरो आयरन को absorb करने में मदद कोलेजन बनाकर बाल मजबूत करता है कहां से लें? संतरा, स्ट्रॉबेरी, शिमला मिर्च याद रखने वाली बात कोई एक विटामिन जादू नहीं करेगा Balanced diet ही असली solution है सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें
अगर आप बच्चों को हेल्दी और टेस्टी नाश्ता खिलाना चाहते हैं, तो ये गाजर की इडली परफेक्ट ऑप्शन है। इसका रंग, स्वाद और सॉफ्ट टेक्सचर बच्चों को तुरंत पसंद आ जाएगा बनाने के लिए सामग्री सफेद चावल – 1 कप उड़द दाल – ½ कप गाजर – 1 कप (कद्दूकस की हुई) नमक – स्वादानुसार ईनो – 1 छोटा चम्मच (या ¼ छोटा चम्मच बेकिंग सोडा) पानी – जरूरत अनुसार तेल – ग्रीस करने के लिए बनाने की आसान विधि दाल-चावल भिगोएं चावल और उड़द दाल को अलग-अलग 4–5 घंटे पानी में भिगो दें। घोल तैयार करें भीगे हुए चावल और दाल को मिक्सी में पीसकर स्मूद बैटर (घोल) बना लें (न ज्यादा पतला, न ज्यादा गाढ़ा) गाजर मिलाएं अब इसमें कद्दूकस की हुई गाजर नमक डालकर अच्छे से मिक्स करें चाहें तो हल्की तीखापन के लिए काली मिर्च या हरी मिर्च भी डाल सकते हैं ईनो डालें इडली बनाने से ठीक पहले बैटर में ईनो डालें और हल्के हाथ से मिलाएं बैटर तुरंत फूल जाएगा स्टीम करें इडली सांचे को तेल से ग्रीस करें बैटर डालें 10–12 मिनट तक स्टीम करें टूथपिक डालकर चेक करें - साफ निकले तो इडली तैयार कैसे परोसें? गरमा-गरम इडली को परोसें: नारियल चटनी टमाटर चटनी सांभर क्यों है हेल्दी? गाजर से मिलता है विटामिन A और फाइबर हल्की और आसानी से पचने वाली बच्चों और बड़ों दोनों के लिए परफेक्ट टिप अगर समय कम हो तो आप इंस्टेंट रवा इडली बैटर + गाजर मिलाकर भी बना सकते हैं
Apple, Beetroot और Carrot का कॉम्बिनेशन यानी ABC आजकल हेल्थ ट्रेंड बन चुका है। लेकिन सवाल वही है - जूस बेहतर या अचार? आइए आसान भाषा में समझते हैं 1. ABC Juice क्या है? ABC Juice ताजे सेब, चुकंदर और गाजर को ब्लेंड करके बनाया जाता है। फायदे: विटामिन A, B, C से भरपूर बॉडी को हाइड्रेट करता है स्किन ग्लो बढ़ाता है ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करता है शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद सुबह खाली पेट पीना सबसे फायदेमंद माना जाता है ध्यान दें: इसमें नैचुरल शुगर होती है, इसलिए डायबिटीज वालों को सीमित मात्रा में लेना चाहिए 2. ABC Achar क्या है? ABC Achar वही तीन चीजों से बनता है, लेकिन इसमें नमक, तेल, मसाले और सिरका मिलाकर तैयार किया जाता है। फायदे: प्रोबायोटिक्स (अच्छे बैक्टीरिया) मिलते हैं डाइजेशन बेहतर करता है खाने का स्वाद बढ़ाता है नुकसान: ज्यादा नमक और तेल → BP और पानी रुकने की समस्या ज्यादा खाने से हेल्थ पर असर 3. मुख्य अंतर पहलू ABC Juice ABC Achar पोषण विटामिन और मिनरल्स ज्यादा प्रोबायोटिक्स ज्यादा असर डिटॉक्स और एनर्जी डाइजेशन सुधार सेवन समय सुबह खाली पेट खाने के साथ रिस्क शुगर कंट्रोल जरूरी नमक-तेल कंट्रोल जरूरी 4. कैसे और कब लें? ABC Juice: सुबह खाली पेट (1 ग्लास) ABC Achar: लंच/डिनर के साथ (1 छोटा चम्मच) दोनों का ओवरयूज नुकसानदायक हो सकता है 5. कौन है ज्यादा हेल्दी? अगर आपका लक्ष्य है: डिटॉक्स, ग्लोइंग स्किन, ब्लड हेल्थ तो ABC Juice बेहतर अगर आप चाहते हैं: अच्छा डाइजेशन और गट हेल्थ तो ABC Achar बेहतर
नई दिल्ली,एजेंसियां। सुबह का नाश्ता पूरे दिन की ऊर्जा और सेहत की बुनियाद माना जाता है। भारतीय घरों में पोहा और परांठा दो ऐसे नाश्ते हैं जो सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं। दोनों ही स्वादिष्ट, जल्दी बनने वाले और अलग-अलग स्वाद के अनुसार तैयार किए जा सकते हैं। लेकिन जब बात हेल्थ की आती है, तो सवाल उठता है पोहा ज्यादा हेल्दी है या परांठा? जवाब पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी जरूरत क्या है और आप उसे किस तरीके से बना रहे हैं। परांठा: पेट भरने वाला और एनर्जी देने वाला नाश्ता परांठा आमतौर पर गेहूं के आटे से बनता है, जो कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है। इसका मतलब है कि यह शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता। अगर परांठा साबुत आटे से बनाया गया हो, तो इसमें फाइबर भी अच्छी मात्रा में होता है, जो पाचन को बेहतर बनाने और ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करता है। अगर इसमें पनीर, दाल, आलू, गोभी, पालक या मेथी जैसी स्टफिंग डाली जाए, तो यह और ज्यादा पौष्टिक बन सकता है। खासकर पनीर या दाल वाला परांठा प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। हालांकि, परांठा तभी हेल्दी माना जाएगा जब इसे कम तेल या कम घी में बनाया जाए। मक्खन, अचार या ज्यादा तेल के साथ खाने पर इसकी कैलोरी काफी बढ़ सकती है। पोहा: हल्का, कम फैट और पचने में आसान दूसरी ओर, पोहा हल्का और आसानी से पचने वाला नाश्ता है। यह चपटे चावल से बनता है और कम समय में तैयार हो जाता है। पोहा खासतौर पर उन लोगों के लिए अच्छा माना जाता है जो सुबह हल्का खाना पसंद करते हैं या वजन कंट्रोल करना चाहते हैं। इसमें कैलोरी और फैट अपेक्षाकृत कम होते हैं, इसलिए यह पेट पर भारी नहीं पड़ता। अगर पोहा में मटर, गाजर, प्याज, टमाटर, मूंगफली, करी पत्ता और नींबू डाला जाए, तो इसकी न्यूट्रिशन वैल्यू और बढ़ जाती है। इसे लोहे की कढ़ाही में बनाने पर इसमें आयरन की मात्रा भी बढ़ सकती है। पोहा शरीर को जरूरी कार्बोहाइड्रेट देता है, लेकिन परांठे की तुलना में यह हल्का महसूस होता है। आखिर कौन है ज्यादा हेल्दी? अगर आप हल्का, लो-फैट और जल्दी पचने वाला नाश्ता चाहते हैं, तो पोहा बेहतर विकल्प है। वहीं अगर आपको ज्यादा देर तक पेट भरा रखना है, ज्यादा ऊर्जा चाहिए या शारीरिक मेहनत ज्यादा होती है, तो परांठा बेहतर हो सकता है। कुल मिलाकर, दोनों ही हेल्दी हो सकते हैं—बस फर्क इस बात का है कि आप उन्हें किस सामग्री और किस मात्रा में खा रहे हैं।
नई दिल्ली,एजेंसियां। प्रोटीन हमारे शरीर के लिए सबसे जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। यह मांसपेशियों के निर्माण, हार्मोन और एंजाइम के निर्माण के साथ-साथ बाल और त्वचा के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि उन्हें रोजाना कितनी मात्रा में प्रोटीन लेना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार यह मात्रा व्यक्ति के शरीर के वजन, उम्र और शारीरिक गतिविधियों पर निर्भर करती है। वजन के अनुसार कितनी होनी चाहिए प्रोटीन की मात्रा पोषण विशेषज्ञों और कई शोधों के अनुसार एक सामान्य वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन अपने शरीर के प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से लगभग 0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति का वजन 60 किलोग्राम है, तो उसे रोजाना लगभग 48 से 60 ग्राम प्रोटीन का सेवन करना चाहिए। हालांकि यह मात्रा सभी लोगों के लिए एक समान नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय है या नियमित रूप से व्यायाम करता है, तो उसे सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा प्रोटीन की जरूरत हो सकती है। एक्सरसाइज करने वालों को ज्यादा प्रोटीन की जरूरत पोषण संबंधी कई अध्ययनों के अनुसार जो लोग नियमित रूप से जिम या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, उन्हें मांसपेशियों की मरम्मत और विकास के लिए अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। ऐसे लोगों के लिए प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से लगभग 1.2 से 1.7 ग्राम प्रोटीन की जरूरत बताई जाती है।वहीं एथलीट या अत्यधिक शारीरिक गतिविधियों में शामिल लोगों के लिए यह मात्रा 2 ग्राम प्रति किलोग्राम तक हो सकती है, जिससे शरीर के ऊतकों की मरम्मत तेजी से हो सके। उम्र और विशेष परिस्थितियों में बढ़ जाती है जरूरत बढ़ती उम्र के बच्चों और किशोरों को शरीर के विकास के लिए अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसके अलावा 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में मांसपेशियों की कमी होने लगती है, इसलिए उन्हें भी पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेने की सलाह दी जाती है।गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सामान्य लोगों की तुलना में प्रतिदिन लगभग 20 से 25 ग्राम अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता हो सकती है। प्रोटीन की कमी और ज्यादा सेवन दोनों नुकसानदायक विशेषज्ञों के अनुसार प्रोटीन की कमी होने पर बाल झड़ना, नाखून कमजोर होना, थकान और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं जरूरत से ज्यादा प्रोटीन, खासकर सप्लीमेंट्स के रूप में लेने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है। संतुलित आहार है सबसे बेहतर उपाय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोटीन के लिए प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का सेवन करना सबसे सुरक्षित तरीका है। दालें, पनीर, अंडे, दूध, सोयाबीन और नट्स जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।