संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान और चीन की एक महत्वपूर्ण पहल को कथित तौर पर झटका लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी सहयोगी इकाई मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध सूची में शामिल करने के प्रस्ताव को आगे बढ़ने से रोक दिया है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान और चीन ने सितंबर 2025 में संयुक्त रूप से यह प्रस्ताव पेश किया था। दोनों देशों का तर्क था कि BLA और मजीद ब्रिगेड क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं और इन्हें वैश्विक आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। पाकिस्तान ने क्या कहा था? संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने दावा किया था कि BLA, मजीद ब्रिगेड, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अन्य उग्रवादी संगठन अफगानिस्तान में मौजूद ठिकानों से गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि इन संगठनों के लिए सीमा पार मौजूद ठिकाने हमलों और घुसपैठ के केंद्र बने हुए हैं। पाकिस्तान और चीन ने इसी आधार पर संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति से BLA और मजीद ब्रिगेड को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने की मांग की थी। अमेरिका ने क्यों रोकी पहल? रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के तहत किसी संगठन को सूचीबद्ध करने के लिए अल-कायदा, ISIS या उनसे जुड़े नेटवर्क के साथ स्पष्ट संबंधों के पर्याप्त साक्ष्य आवश्यक होते हैं। इसी आधार पर प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी नहीं मिल सकी। सूत्रों के मुताबिक, ब्रिटेन और फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव को लेकर आपत्तियां जताई थीं, जिसके चलते इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। दिलचस्प है अमेरिकी रुख अमेरिका पहले ही BLA को अपने घरेलू कानूनों के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है। इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र स्तर पर उसे प्रतिबंधित करने के मामले में वॉशिंगटन ने अतिरिक्त साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रियाओं की आवश्यकता बताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद से जुड़े मामलों में विभिन्न देशों के अलग-अलग दृष्टिकोण को दर्शाता है। पाकिस्तान के लिए क्या मायने? यदि रिपोर्ट्स सही हैं, तो यह पाकिस्तान और चीन की उस कोशिश के लिए झटका माना जा सकता है जिसके जरिए दोनों देश BLA के खिलाफ वैश्विक स्तर पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहते थे। अभी तक संयुक्त राष्ट्र की ओर से इस विषय पर कोई विस्तृत सार्वजनिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। इसलिए मामले को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। तालिबान प्रशासन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की सेना ने मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात अफगानिस्तान के कई क्षेत्रों में हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई। अफगान अधिकारियों का दावा है कि मृतकों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग शामिल हैं। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में कई स्थानों को निशाना बनाया। उनके अनुसार, हमले रिहायशी इलाकों पर किए गए, जिससे बड़ी संख्या में आम नागरिक प्रभावित हुए। तालिबान प्रशासन ने यह भी दावा किया है कि इस कार्रवाई में 14 महिलाएं घायल हुई हैं। तालिबान ने पाकिस्तान पर लगाया हवाई क्षेत्र उल्लंघन का आरोप जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए सैन्य कार्रवाई की। उन्होंने इस हमले की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और अफगान संप्रभुता का उल्लंघन बताया। तालिबान प्रशासन ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं, जिनके बारे में दावा किया गया है कि वे हमले में प्रभावित लोगों की हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तान की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सीमा पार संघर्ष को लेकर बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप तालिबान प्रशासन का आरोप है कि पिछले एक वर्ष के दौरान पाकिस्तान की ओर से अफगान क्षेत्र में कई सैन्य अभियान चलाए गए हैं। अफगान अधिकारियों का दावा है कि मार्च में भी पाकिस्तान की कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। हालांकि, इन घटनाओं को लेकर दोनों देशों के दावों में अंतर देखने को मिला है। 2025 के बाद और बिगड़े संबंध विश्लेषकों के अनुसार, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। अक्टूबर 2025 में दोनों देशों के बीच सीमा पार सैन्य गतिविधियों और हवाई हमलों को लेकर स्थिति और अधिक गंभीर हो गई थी। इसके बाद कई सीमावर्ती क्षेत्रों में झड़पों और विस्थापन की घटनाएं सामने आईं। पाकिस्तान की चिंता क्या है? पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे संगठन अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर उसके खिलाफ हमले करते हैं। इस्लामाबाद का कहना है कि तालिबान प्रशासन इन समूहों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा है। दूसरी ओर, तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है और कहती है कि अफगानिस्तान की भूमि का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। रिश्तों में बढ़ती खाई एक समय पाकिस्तान को तालिबान का प्रमुख समर्थक माना जाता था, लेकिन 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता गया। सीमा सुरक्षा, आतंकवादी संगठनों की गतिविधियां और सीमा पार हमलों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद गहराते गए हैं। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए, तो सीमा क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
नई दिल्ली/बिश्केक: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान रूस और पाकिस्तान ने सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों ने अवैध प्रवासन पर नियंत्रण और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और अफगानिस्तान की स्थिति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यह समझौते किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और रूस के गृह मंत्री व्लादिमीर कोलोकोल्त्सेव के बीच हुई बैठक के दौरान हुए। मोहसिन नकवी एससीओ सदस्य देशों के गृह एवं सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं। अवैध प्रवासन रोकने पर समझौता पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने अवैध प्रवासन की रोकथाम और इससे जुड़े मामलों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के तहत दोनों देश अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध रूप से रह रहे नागरिकों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। ड्रग्स तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई रूस और पाकिस्तान के बीच दूसरा समझौता मादक पदार्थों और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने से संबंधित है। दोनों देशों ने ड्रग्स नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाने, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान करने और अंतरराष्ट्रीय तस्करी से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों को मजबूत करने पर सहमति जताई। रूस-पाकिस्तान संबंधों में बढ़ती नजदीकी हाल के वर्षों में रूस और पाकिस्तान के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। दोनों देश ऊर्जा, व्यापार और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ा रहे हैं। पाकिस्तान रूस से ऊर्जा आयात बढ़ाने की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है। जुलाई 2025 में दोनों देशों ने कराची स्थित पाकिस्तान स्टील मिल को पुनर्जीवित करने के लिए एक समझौता किया था। यह परियोजना ऐतिहासिक महत्व रखती है क्योंकि इस स्टील मिल की स्थापना सोवियत संघ की सहायता से की गई थी। अफगानिस्तान और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा बैठक के दौरान अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति, सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। रूस और पाकिस्तान दोनों ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मध्य एशियाई देशों के नेताओं से भी मिले नकवी एससीओ बैठक के दौरान पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के गृह मंत्रियों के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में आतंकवाद, सीमा पार अपराध, संगठित अपराध और सुरक्षा सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। SCO मंच पर सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा बिश्केक में हुई बैठकों से संकेत मिलता है कि एससीओ सदस्य देश क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, अवैध प्रवासन और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे साझा खतरों से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने के पक्ष में हैं। रूस और पाकिस्तान के बीच हुए ये नए समझौते भी इसी व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी शहजाद भट्टी से जुड़े आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए पंजाब और हरियाणा में 18 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। एजेंसी की यह कार्रवाई दोनों राज्यों के नौ जिलों में की गई, जहां संदिग्धों के ठिकानों पर तलाशी लेकर कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए। डिजिटल उपकरण और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज जब्त एनआईए के अनुसार छापेमारी के दौरान कई डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की गई है। प्रारंभिक जांच में संचार नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी जानकारियां सामने आई हैं। एजेंसी ने बताया कि जब्त की गई सामग्री को फोरेंसिक और तकनीकी जांच के लिए भेजा गया है, ताकि नेटवर्क की कार्यप्रणाली और उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाया जा सके। सहयोगियों और स्थानीय मॉड्यूल की पहचान पर फोकस एनआईए का कहना है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य शहजाद भट्टी के सहयोगियों और विभिन्न मामलों में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान करना है। जांच के दौरान कुछ व्यक्तियों को नोटिस जारी कर आगे की पूछताछ के लिए बुलाया गया है। एजेंसी को संदेह है कि यह नेटवर्क आतंकवादी गतिविधियों और संगठित अपराध के गठजोड़ के रूप में काम कर रहा था, जिसे सीमा पार से संचालित किया जा रहा था। रोजर संधू के घर ग्रेनेड हमले में सामने आया था नाम जांच एजेंसी के मुताबिक मार्च 2025 में जालंधर स्थित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोजर संधू के आवास पर हुए ग्रेनेड हमले की साजिश में भी शहजाद भट्टी का नाम सामने आया था। इस मामले में एनआईए ने अप्रैल 2026 में शहजाद भट्टी और एक अन्य आरोपी के खिलाफ फरार आरोपी के रूप में आरोपपत्र दाखिल किया था। हरियाणा के विस्फोट मामलों से भी जुड़े तार एनआईए की जांच में यह भी सामने आया है कि नवंबर 2025 में हरियाणा के सिरसा स्थित महिला पुलिस थाने में हुए विस्फोट और जनवरी 2026 में अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन में हुए विस्फोट की साजिश रचने में भी भट्टी की कथित भूमिका रही है। सिरसा विस्फोट मामले में एजेंसी ने मई 2026 में शहजाद भट्टी, पाकिस्तान स्थित हैंडलर सोहेल अहमद समेत नौ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। अंबाला कार बम मामले में भी मिला कनेक्शन अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन से जुड़े कार बम विस्फोट मामले की जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए एक आरोपी के शहजाद भट्टी से सीधे संपर्क होने के प्रमाण मिले थे। इसके बाद इस मामले को भी एनआईए ने अपनी व्यापक जांच में शामिल कर लिया। सीमा पार से आतंकी गतिविधियों की साजिश का खुलासा करने में जुटी NIA एनआईए का कहना है कि तीनों मामलों की जांच अभी जारी है। एजेंसी का लक्ष्य इन हमलों की पूरी साजिश का पर्दाफाश करना और पाकिस्तान से संचालित आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क के सभी सहयोगियों की पहचान करना है। जांच एजेंसी के अनुसार शुरुआती संकेत बताते हैं कि भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए स्थानीय आपराधिक गिरोहों और मॉड्यूल का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी नेटवर्क की परतें खोलने के लिए आगे भी जांच जारी रहेगी।
नई दिल्ली: भारत ने पहली बार शांतिकाल में सीमित संख्या में परमाणु हथियारों की तैनाती शुरू कर दी है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा इयरबुक 2026 के अनुसार भारत ने 12 परमाणु हथियार सक्रिय रूप से तैनात किए हैं, जबकि उसका कुल परमाणु भंडार बढ़कर 190 हथियारों तक पहुंच गया है। दो वर्ष पहले यह संख्या 180 थी। रिपोर्ट के अनुसार भारत का परमाणु भंडार अब पाकिस्तान से 20 हथियार अधिक है। पाकिस्तान के पास अनुमानित 170 परमाणु हथियार हैं, उसके कितने हथियार सक्रिय रूप से तैनात हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। भारत की सरकार परमाणु हथियारों की संख्या और उनकी तैनाती से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं करती। SIPRI समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थान विभिन्न स्रोतों और आकलनों के आधार पर ये अनुमान जारी करते हैं। दुनिया नए परमाणु हथियारों की दौड़ की ओर SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया एक बार फिर परमाणु प्रतिस्पर्धा के नए दौर में प्रवेश कर रही है। अमेरिका, रूस, चीन, भारत और पाकिस्तान सहित लगभग सभी परमाणु संपन्न देश अपने हथियारों और मिसाइल प्रणालियों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2026 की शुरुआत में दुनिया के नौ परमाणु संपन्न देशों के पास कुल 12,187 परमाणु हथियार मौजूद थे। इनमें से 9,745 हथियार सैन्य भंडार में रखे गए हैं और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल इस्तेमाल किए जा सकते हैं। चीन और पाकिस्तान को ध्यान में रखकर बढ़ रही भारतीय क्षमता रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपनी रणनीतिक क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। उसका लक्ष्य ऐसे लंबी दूरी के हथियार विकसित करना है, जो चीन के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचने में सक्षम हों। विशेषज्ञों का मानना है कि 2020 की गलवान झड़प के बाद भारत ने चीन के खिलाफ अपनी सैन्य और रणनीतिक तैयारियों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है। साथ ही उसे पाकिस्तान मोर्चे पर भी संतुलन बनाए रखना है। इसी वजह से भारत दोहरे मोर्चे की रणनीति के तहत अपनी परमाणु क्षमता का विस्तार कर रहा है। MIRV तकनीक पर भारत का फोकस भारत नई पीढ़ी की परमाणु डिलीवरी प्रणालियों पर भी काम कर रहा है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक मानी जा रही है। इस तकनीक की मदद से एक ही बैलिस्टिक मिसाइल कई परमाणु हथियार ले जा सकती है और उन्हें अलग-अलग लक्ष्यों पर एक साथ दागा जा सकता है। रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की रणनीतिक क्षमता में बड़ा बदलाव मानते हैं। समुद्र में बढ़ी भारत की परमाणु ताकत SIPRI ने भारत की समुद्री परमाणु क्षमता को भी तेजी से मजबूत होता हुआ बताया है। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय परमाणु पनडुब्बियां, विशेष रूप से INS Arihant, अब देश की 'सेकेंड स्ट्राइक कैपेसिटी' का प्रमुख आधार बन चुकी हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत अब शांतिकाल में भी सीमित संख्या में परमाणु हथियारों को बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों पर तैनात करने लगा है। इससे किसी संभावित पहले हमले के बाद भी जवाबी कार्रवाई की क्षमता बरकरार रहती है। रक्षा खर्च में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल भारत रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत का रक्षा बजट बढ़कर 92.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 8.9 प्रतिशत अधिक है। रक्षा खर्च के मामले में भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश बन गया है। इस सूची में भारत से आगे केवल अमेरिका, चीन, रूस और जर्मनी हैं। हथियार आयात में भी दुनिया में दूसरे स्थान पर भारत SIPRI के आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2025 के बीच भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक रहा। इस अवधि में वैश्विक हथियार आयात में भारत की हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई। यूक्रेन, भारत, सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान मिलकर वैश्विक हथियार आयात का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा रहे। अमेरिका और रूस के पास अब भी सबसे बड़ा परमाणु जखीरा रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के लगभग 86 प्रतिशत परमाणु हथियार अब भी अमेरिका और रूस के पास हैं। दोनों देश बड़े पैमाने पर परमाणु आधुनिकीकरण कार्यक्रम चला रहे हैं। वहीं चीन का परमाणु भंडार बढ़कर 620 हथियारों तक पहुंच गया है। भारत 190 और पाकिस्तान 170 परमाणु हथियारों के साथ एशिया में अपनी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बनाए हुए हैं। ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र रिपोर्ट में भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव का भी उल्लेख किया गया है। SIPRI के अनुसार दोनों देशों के बीच कुछ दिनों तक सैन्य टकराव की स्थिति बनी रही, जिसके दौरान साइबर और डिजिटल अभियानों का भी उपयोग किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संघर्ष के दौरान दोनों देशों ने पहली बार खुले तौर पर साइबर क्षमताओं का इस्तेमाल किया। भारत की ओर से चलाए गए अभियान को "ऑपरेशन सिंदूर" नाम दिया गया था। परमाणु हथियार कम करने वाले सिर्फ तीन देश रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका, रूस और फ्रांस ऐसे तीन देश हैं जिन्होंने अपने परमाणु हथियारों की संख्या में कमी की है। अमेरिका ने 1,342, रूस ने 1,020 और फ्रांस ने 80 परमाणु हथियार अपने सक्रिय भंडार से बाहर किए हैं। वहीं इजराइल के पास अनुमानित 90 परमाणु हथियार हैं और उसकी संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वैश्विक सुरक्षा के लिए बढ़ रही चिंता SIPRI ने चेतावनी दी है कि दुनिया में परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण और बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश परमाणु शक्तियां अपने भंडार को अधिक आधुनिक, अधिक सटीक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं, जिससे भविष्य में हथियारों की नई दौड़ शुरू होने की आशंका बढ़ गई है।
पाकिस्तान के चर्चित मोटरवे गैंगरेप मामले में दोषी ठहराए गए दो आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। लाहौर हाई कोर्ट ने उनकी अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है। वर्ष 2020 में हुई इस घटना ने पूरे पाकिस्तान को झकझोर दिया था और देशभर में व्यापक आक्रोश देखने को मिला था। रात के सफर के दौरान बच्चों के सामने हुई थी दरिंदगी 9 सितंबर 2020 को फ्रांसीसी-पाकिस्तानी मूल की एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ सियालकोट-लाहौर मोटरवे से गुजर रही थी। देर रात कार का ईंधन खत्म होने के कारण परिवार सड़क किनारे फंस गया। इसी दौरान दो हमलावर वहां पहुंचे, कार का शीशा तोड़ा और महिला को जबरन बाहर खींच लिया। आरोपियों ने बच्चों के सामने हथियार के बल पर महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद उन्होंने नकदी, गहने और बैंक कार्ड लूटकर मौके से फरार हो गए। डीएनए और मोबाइल डेटा बने गिरफ्तारी की सबसे बड़ी कड़ी घटना के बाद पुलिस ने व्यापक जांच शुरू की। मोबाइल फोन लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और घटनास्थल से मिले डीएनए नमूनों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। जांच के दौरान पीड़िता ने भी दोनों आरोपियों की पहचान की थी। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी शफकत अली ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना अपराध स्वीकार करने वाला बयान भी दिया था। 2021 में सुनाई गई थी मौत की सजा मामले की सुनवाई के बाद मार्च 2021 में आतंकवाद निरोधक अदालत ने आबिद अली और शफकत अली को दोषी करार दिया था। अदालत ने दोनों को सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण, डकैती और आतंकवाद से जुड़े अपराधों में फांसी की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उन्हें अन्य मामलों में भी लंबी जेल की सजा दी गई थी। पुलिस अधिकारी के बयान ने भी खड़ा किया था विवाद घटना के बाद उस समय के लाहौर पुलिस प्रमुख उमर शेख का बयान भी विवादों में आ गया था। उन्होंने महिला के रात में यात्रा करने और दूसरा रास्ता न चुनने को लेकर टिप्पणी की थी। इस बयान की देशभर में आलोचना हुई और इसे पीड़िता को दोषी ठहराने की कोशिश बताया गया। बचाव पक्ष की दलीलें अदालत ने नहीं मानीं हाई कोर्ट में अपील करते हुए दोषियों के वकीलों ने कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी में कई विरोधाभास हैं और प्रस्तुत साक्ष्य पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करने की मांग की। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि डीएनए रिपोर्ट, डिजिटल सबूत और गवाहियों के आधार पर आरोप पूरी तरह साबित होते हैं। अदालत ने इन दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप का कोई ठोस आधार नहीं है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद मस्क की प्रतिक्रिया चर्चा में लाहौर हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद अमेरिकी उद्योगपति Elon Musk ने सोशल मीडिया पर इसकी सराहना की। उन्होंने एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान को बधाई दी और कहा कि पश्चिमी देशों में भी ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए। फैसले ने फिर छेड़ी सख्त सजा बनाम सुधार की बहस इस फैसले के बाद एक बार फिर अपराधियों को कठोर दंड देने और सुधारात्मक न्याय की अवधारणा पर बहस तेज हो गई है। जहां पाकिस्तान में अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए फांसी की सजा बरकरार रखी, वहीं कई पश्चिमी देशों में मृत्युदंड समाप्त किया जा चुका है और वहां अपराधियों के पुनर्वास पर अधिक जोर दिया जाता है।
अमेरिका के आग्रह के बावजूद पाकिस्तान ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल इजरायल को मान्यता देने के पक्ष में नहीं है। इस मुद्दे पर वॉशिंगटन में एक प्रेस कार्यक्रम के दौरान उस समय असहज स्थिति बन गई जब एक पत्रकार ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar से इजरायल को मान्यता देने को लेकर सवाल पूछा। सवाल के तुरंत बाद डार और अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio कार्यक्रम स्थल से निकल गए। रिपोर्टर के सवाल से बढ़ी चर्चा वॉशिंगटन में दोनों नेताओं की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान एक पत्रकार ने पूछा कि क्या पाकिस्तान इजरायल को मान्यता देने पर विचार कर रहा है। यह सवाल ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump कई मुस्लिम और अरब देशों से इजरायल के साथ संबंध सामान्य बनाने की अपील कर चुके हैं। इस सवाल का सीधा जवाब मौके पर नहीं दिया गया और दोनों नेता वहां से चले गए, जिससे इस मुद्दे पर नई चर्चा शुरू हो गई। पाकिस्तान ने दोहराया अपना पुराना रुख बाद में मीडिया से बातचीत में इशाक डार ने कहा कि फिलिस्तीन और गाजा के मुद्दे पर पाकिस्तान का रुख नहीं बदला है। उन्होंने कहा कि जब तक स्वतंत्र फलस्तीनी राज्य की दिशा में ठोस प्रगति नहीं होती, तब तक पाकिस्तान इजरायल के साथ अपने संबंधों या नीति में किसी बदलाव पर विचार नहीं करेगा। ट्रंप ने की थी मुस्लिम देशों से अपील राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उन्होंने Saudi Arabia, Qatar, Pakistan, Turkey, Egypt और Jordan से सामूहिक रूप से अब्राहम समझौते में शामिल होने और इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने का आग्रह किया है। अमेरिका का मानना है कि इससे पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ेगी और क्षेत्रीय तनाव कम करने में मदद मिलेगी। क्या है अब्राहम समझौता? Abraham Accords ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान शुरू की गई एक कूटनीतिक पहल थी, जिसका उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाना था। इस समझौते के तहत United Arab Emirates, Bahrain और Morocco ने इजरायल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित किए। Sudan ने भी समझौते में शामिल होने की घोषणा की थी, उसने अभी तक पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए हैं। पाकिस्तान ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव? पाकिस्तान लंबे समय से यह कहता रहा है कि वह फिलिस्तीनी मुद्दे के स्थायी समाधान और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना से पहले इजरायल को मान्यता नहीं देगा। इसी वजह से ट्रंप की अपील के बावजूद इस्लामाबाद ने अब्राहम समझौते में शामिल होने के सुझाव को फिलहाल खारिज कर दिया है। पाकिस्तान और इजरायल के बीच आज भी कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।
Donald Trump की अपील के बावजूद Pakistan ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल Abraham Accords का हिस्सा नहीं बनेगा। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने कहा कि इस्लामाबाद ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा, जो देश की “मूल विचारधारा” के खिलाफ हो। ट्रंप ने मुस्लिम देशों से की थी अपील मिडिल ईस्ट में नए कूटनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रहे ट्रंप ने हाल ही में कई मुस्लिम और अरब देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ संभावित समझौते के बाद मध्य पूर्व में स्थायी शांति का नया दौर शुरू हो सकता है। ट्रंप ने Saudi Arabia, Qatar, पाकिस्तान, Turkey, Egypt, Jordan और Bahrain जैसे देशों से इस समझौते में शामिल होने की अपील की थी। पाकिस्तान ने क्या कहा? पाकिस्तानी चैनल समा टीवी को दिए इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान ऐसे किसी समझौते में शामिल नहीं होगा, जो उसकी बुनियादी विचारधारा से टकराता हो। उन्होंने कहा, “हमारा रुख पूरी तरह साफ है। यह हमारे लिए स्वीकार्य नहीं है।” आसिफ ने इजरायल के साथ किसी संभावित समझौते पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि “आप उन लोगों के साथ कैसे बैठ सकते हैं, जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता?” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान दुनिया के उन गिने-चुने देशों में है, जिसके पासपोर्ट पर इजरायल का नाम तक नहीं लिखा जाता। सऊदी अरब भी अपने रुख पर कायम सऊदी अरब ने भी अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा है कि जब तक फिलिस्तीन को मान्यता नहीं मिलती, वह इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने पर आगे नहीं बढ़ेगा। रिपोर्टों के मुताबिक, रियाद का कहना है कि फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान उसकी पहली प्राथमिकता है। ट्रंप ने दी थी चेतावनी ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि अगर ईरान के साथ समझौता सफल नहीं हुआ तो क्षेत्र फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने इसे “मध्य पूर्व के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण समझौता” बताते हुए कहा कि अमेरिका अब्राहम अकॉर्ड्स का दायरा और बढ़ाना चाहता है। ट्रंप ने यहां तक संकेत दिया कि भविष्य में ईरान भी इस ढांचे का हिस्सा बन सकता है। क्या है अब्राहम अकॉर्ड्स? अब्राहम अकॉर्ड्स 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुए समझौते हैं, जिनके तहत कई अरब देशों ने इजरायल के साथ राजनयिक और आर्थिक संबंध सामान्य किए थे। United Arab Emirates और बहरीन इस समझौते को स्वीकार करने वाले पहले देश थे। बाद में मोरक्को और सूडान जैसे देश भी इससे जुड़े। ट्रंप का दावा है कि इससे क्षेत्रीय व्यापार, निवेश और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा मिला है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ हुए संघर्षविराम को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर बड़ा बयान दिया है। चीन यात्रा से लौटते समय एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने युद्धविराम कराकर “पाकिस्तान पर एहसान किया” है। ट्रंप के इस बयान के बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। सीजफायर में पाकिस्तान की अहम भूमिका का दावा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और Iran के बीच तनाव कम कराने में पाकिस्तान ने बैकचैनल संपर्कों के जरिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि इस्लामाबाद ने ईरान के पांच सूत्रीय प्रस्ताव को वॉशिंगटन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी, जिसके बाद युद्धविराम की दिशा में प्रगति हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पाकिस्तान ने खुद को क्षेत्रीय मध्यस्थ और संवाद मंच के रूप में पेश करने की कोशिश की है। शहबाज शरीफ और इशाक डार की तारीफ ट्रंप ने बातचीत के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और उप प्रधानमंत्री Ishaq Dar की भी तारीफ की। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह संकेत भी दिया कि अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में पाकिस्तान से लगातार सहयोग की उम्मीद करता है। होर्मुज और ऊर्जा सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान के लिए यह संघर्षविराम सिर्फ कूटनीतिक सफलता नहीं बल्कि आर्थिक जरूरत भी था। Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव से तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार प्रभावित होने का खतरा था, जिसका असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता था। युद्धविराम के बाद पाकिस्तान को अपने ऊर्जा मार्ग सुरक्षित रखने में राहत मिली है। ट्रंप के बयान के क्या मायने? ट्रंप का “पाकिस्तान पर एहसान” वाला बयान पाकिस्तान के लिए मिश्रित संकेत माना जा रहा है। एक ओर इससे इस्लामाबाद की कूटनीतिक भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत भी दिया है कि पाकिस्तान को क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, खासकर सीमा पार आतंकवाद, पर ज्यादा सक्रिय भूमिका निभानी होगी। अफगान सीमा और आतंकवाद पर भी इशारा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने हालिया सुरक्षा घटनाओं का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को अपनी सीमाओं पर सुरक्षा मजबूत करने का संदेश दिया। हाल ही में Bannu में पुलिस चौकी पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ी हलचल मध्य पूर्व में जारी तनाव, होर्मुज संकट और अमेरिका-ईरान संबंधों के बीच पाकिस्तान की भूमिका ने दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की राजनीति को नई दिशा दे दी है। फिलहाल अमेरिकी और पाकिस्तानी सरकारों की ओर से बैकचैनल कूटनीति के कई पहलुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन ट्रंप के बयान ने इस मुद्दे को वैश्विक चर्चा का विषय बना दिया है।
भारत और पाकिस्तान के संबंधों को लेकर हाल में आई कुछ अहम टिप्पणियों ने दोनों देशों के बीच संवाद की संभावनाओं पर नई बहस छेड़ दी है। Rashtriya Swayamsevak Sangh के महासचिव Dattatreya Hosabale और पूर्व सेना प्रमुख Manoj Naravane के बयानों पर पाकिस्तान ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। ‘संवाद के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं होने चाहिए’ RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख जारी रहना चाहिए। उनके बयान के बाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने भी लोगों के बीच संपर्क बनाए रखने की वकालत की। उन्होंने कहा, “सीमा के दोनों ओर आम लोग रहते हैं और उनकी रोजमर्रा की समस्याएं काफी हद तक समान हैं। लोगों के बीच संपर्क बेहतर संबंध बनाने में मदद कर सकते हैं।” पाकिस्तान ने क्या कहा? इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए Ministry of Foreign Affairs के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इन्हें “सकारात्मक संकेत” बताया। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि भारत में समझदारी की आवाजें और मजबूत होंगी। पिछले कई वर्षों से जो आक्रामक बयानबाजी और तनाव देखने को मिला है, वह खत्म होना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान संवाद को एक विकल्प के रूप में स्वीकार किए जाने का स्वागत करता है। बैकचैनल बातचीत पर टिप्पणी से इनकार ताहिर अंद्राबी ने बैकचैनल या अनौपचारिक संपर्कों को लेकर चल रही अटकलों पर टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा, “अगर मैं बैकचैनल पर टिप्पणी करूंगा, तो वह बैकचैनल नहीं रहेगा। इस विषय पर मैं कुछ नहीं कहना चाहता।” पाकिस्तान में RSS को कैसे देखा जाता है? पाकिस्तान में RSS को आमतौर पर एक हिंदू राष्ट्रवादी संगठन के रूप में देखा जाता है, जिसका भारत की मौजूदा सत्तारूढ़ व्यवस्था से करीबी संबंध माना जाता है। ऐसे में RSS नेतृत्व की ओर से संवाद पर दिया गया बयान पाकिस्तान में विशेष रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। क्या बदल सकते हैं भारत-पाक संबंध? विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच फिलहाल कई संवेदनशील मुद्दे मौजूद हैं, जिनमें आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और राजनीतिक तनाव शामिल हैं। हालांकि, संवाद और लोगों के बीच संपर्क को लेकर आई हालिया टिप्पणियां भविष्य में कूटनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं। भारत सरकार की ओर से इन बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के दौरान पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने संघर्ष के दौरान चुपचाप ईरानी सैन्य और निगरानी विमानों को अपने एयरबेस पर शरण दी। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान की विदेश नीति और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि ईरान के कुछ विमान पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर तैनात किए गए थे। इनमें ईरानी वायु सेना का RC-130 विमान भी शामिल बताया गया, जो टोही और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह विमान प्रसिद्ध लॉकहीड C-130 हरक्यूलिस का विशेष सैन्य संस्करण माना जाता है। पाकिस्तान ने आरोपों से किया इनकार हालांकि Pakistan ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि एयरबेस पर मौजूद विमान राजनयिक और प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़े थे, जो संघर्ष विराम वार्ता के दौरान वहां पहुंचे थे। इस्लामाबाद ने दावा किया कि इन विमानों की कोई सैन्य भूमिका नहीं थी और मीडिया रिपोर्ट भ्रामक अटकलों पर आधारित है। लेकिन अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की भूमिका पर बहस तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि एक ओर पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ और निष्पक्ष देश के रूप में पेश कर रहा था, वहीं दूसरी ओर वह ईरान को अप्रत्यक्ष मदद भी पहुंचा रहा था। पाकिस्तान के पुराने रिकॉर्ड पर फिर उठे सवाल इस विवाद के बाद पाकिस्तान के अतीत को भी याद किया जा रहा है। पूर्व ISI प्रमुख Hamid Gul का वह चर्चित बयान फिर चर्चा में है जिसमें उन्होंने कहा था कि ISI ने पहले अमेरिका की मदद से सोवियत संघ को हराया और फिर अमेरिका को भी अफगानिस्तान में मात दी। विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी और अमेरिकी सेना की वापसी के बाद भी अमेरिका पाकिस्तान की रणनीति को पूरी तरह समझ नहीं पाया है। कई विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाकर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करता रहा है। ट्रंप के करीबी नेता ने जताई चिंता इस मामले ने अमेरिकी राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर यह रिपोर्ट सही साबित होती है तो अमेरिका को ईरान और अन्य पक्षों के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कुछ रक्षा अधिकारियों के इजरायल विरोधी बयानों को देखते हुए ऐसे आरोप पूरी तरह चौंकाने वाले नहीं हैं। क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो इसका असर अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों, मध्य पूर्व की कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर पड़ सकता है। फिलहाल पाकिस्तान इन दावों को गलत बता रहा है, लेकिन इस मुद्दे ने एक बार फिर उसकी विदेश नीति और रणनीतिक विश्वसनीयता पर वैश्विक बहस छेड़ दी है।
संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। यूएई की प्रमुख एयरलाइन एतिहाद एयरवेज ने अबू धाबी में काम कर रहे 15 पाकिस्तानी कर्मचारियों को अचानक नौकरी से निकाल दिया है। 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश रिपोर्ट्स के मुताबिक, निकाले गए कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के इमिग्रेशन ऑफिस बुलाया गया और 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश थमा दिया गया। इस फैसले से वहां काम कर रहे पाकिस्तानी समुदाय में चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है। बिना नोटिस कार्रवाई पर सवाल बताया जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में सामान्य एचआर नियमों का पालन नहीं किया गया। आमतौर पर कंपनियां कर्मचारियों को नोटिस पीरियड देती हैं, लेकिन इस मामले में सीधे निष्कासन और देश छोड़ने का निर्देश दिया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। सीनियर कर्मचारियों पर भी असर निकाले गए लोगों में कई अनुभवी कर्मचारी भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक कर्मचारी पिछले 20 वर्षों से कंपनी में कार्यरत था। सिर्फ 48 घंटे का समय मिलने के कारण कर्मचारियों को आर्थिक और पारिवारिक व्यवस्थाएं संभालने में भारी परेशानी हो रही है। एतिहाद की चुप्पी फिलहाल एतिहाद एयरवेज की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। एविएशन सेक्टर में छंटनी आम बात है, लेकिन इस तरह इमिग्रेशन को शामिल कर त्वरित कार्रवाई असामान्य मानी जा रही है। कूटनीतिक तनाव से जोड़कर देखा जा रहा मामला विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ नौकरी से जुड़ा मामला नहीं, बल्कि यूएई और पाकिस्तान के बीच ठंडे पड़ते रिश्तों का संकेत भी हो सकता है। हाल ही में यूएई द्वारा पाकिस्तान से करीब 3 अरब डॉलर का कर्ज वापस मांगे जाने की खबरों ने भी इस तनाव को और बढ़ाया है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर असर पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है और बड़ी संख्या में उसके नागरिक विदेशों में काम करते हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं वहां की अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकती हैं, क्योंकि विदेशी कमाई (remittances) पाकिस्तान के लिए अहम स्रोत है।
पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के आंतरिक मुद्दों पर टिप्पणी कर विवाद खड़ा कर दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान भारत में मुस्लिम समुदाय, उर्दू भाषा और कश्मीर को लेकर कई आरोप लगाए। जामिया कार्यक्रम को लेकर आपत्ति अंद्राबी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े कार्यक्रम को लेकर आपत्ति जताई, जो जामिया मिलिया इस्लामिया में आयोजित होने वाला था। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी विचारधारा का “प्रचार” चिंता का विषय है और इससे संस्थानों की मूल पहचान प्रभावित हो सकती है। मुस्लिम पहचान पर चिंता जताई पाकिस्तानी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भारत में मुस्लिम समुदाय की पहचान और उनकी भाषा पर दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की और कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। ‘हेट स्पीच’ पर भी उठाए सवाल अंद्राबी ने भारतीय नेताओं के कथित बयानों को “हेट स्पीच” करार दिया और कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान समाज में विभाजन पैदा करते हैं और इन पर रोक लगनी चाहिए। कश्मीर और उर्दू पर आरोप जम्मू और कश्मीर को लेकर भी पाकिस्तान ने आरोप दोहराए। अंद्राबी के मुताबिक, वहां “जनसांख्यिकीय बदलाव” किए जा रहे हैं और उर्दू भाषा तथा मुस्लिम संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने इसे वैश्विक स्तर पर उठाने की बात कही। भारत के आंतरिक मामलों में दखल पर सवाल भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि जम्मू और कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकते हैं। पाकिस्तान की स्थिति पर भी उठते सवाल विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान में खुद अल्पसंख्यक समुदायों–जैसे हिंदू, ईसाई, शिया और अहमदिया–की स्थिति को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में भारत के आंतरिक मुद्दों पर उसकी टिप्पणी को लेकर भी बहस छिड़ जाती है।
उत्तर प्रदेश Uttar Pradesh Anti-Terrorism Squad ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नोएडा से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों आरोपी पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर्स और खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में थे और भारत में आतंकी गतिविधियों की साजिश रच रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्ला अली खान और समीर खान के रूप में हुई है। दोनों की उम्र करीब 20 वर्ष बताई जा रही है। सोशल मीडिया से हो रहा था रेडिकलाइजेशन ATS के मुताबिक, पाकिस्तानी गैंगस्टर्स शहजाद भट्टी और आबिद जट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भारतीय युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेल रहे थे। इन युवाओं को संवेदनशील स्थानों की रेकी, टारगेटेड हमले और स्लीपर सेल तैयार करने के लिए उकसाया जा रहा था। हथियार और मोबाइल बरामद छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से 32 बोर की पिस्टल, पांच जिंदा कारतूस, एक चाकू और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। ATS को मोबाइल फोन से कई अहम डिजिटल सबूत भी मिले हैं। बड़ी साजिश का खुलासा पूछताछ में सामने आया है कि तुषार को कथित तौर पर ग्रेनेड हमले और टारगेटेड हत्या जैसे काम सौंपे गए थे। इसके बदले उसे लाखों रुपये और दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजने का लालच दिया गया था। वहीं, समीर खान को कथित तौर पर "TTH" लिखने, नए लोगों को जोड़ने और नेटवर्क विस्तार की जिम्मेदारी दी गई थी। UAPA समेत कई धाराओं में केस दोनों आरोपियों के खिलाफ लखनऊ में UAPA, आर्म्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। ATS अब उनके नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है। एजेंसी का कहना है कि इस कार्रवाई से एक बड़ी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान के साथ शांति समझौता (पीस डील) पाकिस्तान में होता है, तो वह खुद Islamabad जाने पर विचार कर सकते हैं। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “पाकिस्तान बहुत अच्छा काम कर रहा है। अगर डील साइन होती है, तो मैं इस्लामाबाद जा सकता हूं।” उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था की भी तारीफ की। पाकिस्तान की भूमिका पर ट्रंप की टिप्पणी ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व शांति प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से Asim Munir और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि दोनों “बेहतरीन काम कर रहे हैं।” ईरान में चल रही कूटनीतिक हलचल इस बीच, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर इन दिनों Tehran में मौजूद हैं, जहां उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से मुलाकात की। यह मुलाकात अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता के प्रयासों के तहत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। PM मोदी को बताया ‘अच्छा दोस्त’ ट्रंप ने बातचीत के दौरान भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi की भी तारीफ की और उन्हें अपना “अच्छा दोस्त” बताया। इस बयान को भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में भी अहम माना जा रहा है। पहले भी दे चुके हैं संकेत हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है। अब उनका इस्लामाबाद जाने का संकेत देना इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया को और अहम बना देता है। अमेरिका, पाकिस्तान और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक गतिविधियों के बीच ट्रंप का यह बयान संकेत देता है कि आने वाले समय में शांति वार्ता तेज हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो इस्लामाबाद एक अहम कूटनीतिक केंद्र बन सकता है।
धनबाद: झारखंड के धनबाद में हाल ही में हुई पुलिस मुठभेड़ के बाद वासेपुर गैंग के नेटवर्क को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पूछताछ में गिरफ्तार अपराधियों ने बताया कि कुख्यात गैंगस्टर Prince Khan इस समय पाकिस्तान में छिपा हुआ है और वहां से अपने गिरोह का संचालन कर रहा है। पाकिस्तान में बदली पहचान, आतंकियों से संपर्क की आशंका पुलिस सूत्रों के अनुसार, Prince Khan ने अपना नाम बदलकर “फैज” रख लिया है और वह पाकिस्तान के बहावलपुर में रह रहा है। जांच में सामने आया है कि उसे आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammed से समर्थन मिलने की आशंका है। गिरफ्तार आरोपी के मोबाइल से एक पाकिस्तानी पहचान पत्र भी मिला है, जिसमें उसका नाम “फैज खान” दर्ज है और पता बहावलपुर का बताया गया है। यह इलाका लंबे समय से आतंकी गतिविधियों के लिए चर्चित रहा है। क्रिप्टो के जरिए हर महीने 1 करोड़ की वसूली पूछताछ में बड़ा खुलासा यह हुआ कि गैंग द्वारा वसूली गई रकम का करीब 1 करोड़ रुपये हर महीने Prince Khan तक पहुंचाया जाता है। यह पैसा सीधे बैंकिंग सिस्टम से नहीं बल्कि क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से ट्रांसफर किया जाता है। पुलिस जांच में 65 संदिग्ध बैंक खातों का भी पता चला है, जिनके जरिए इस अवैध नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था। कुछ खातों से जेल में बंद अपराधी Sujit Sinha के रिश्तेदारों तक भी पैसे भेजे जाने की जानकारी मिली है। गिरोह का ‘मैनेजर’ बना कुबेर पलामू के चैनपुर निवासी अमन सिंह उर्फ कुबेर इस पूरे नेटवर्क का अहम कड़ी बताया जा रहा है। वह Sujit Sinha और Prince Khan के बीच मीडिएटर के रूप में काम करता था। कुबेर ही व्यापारियों की जानकारी जुटाता, धमकी भरे संदेश तैयार करता और ऑडियो क्लिप एडिट कर भेजता था। साथ ही रंगदारी से मिली रकम का पूरा हिसाब-किताब भी वही संभालता था। रांची तक फैला नेटवर्क, कई लोग रडार पर जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने धनबाद और बोकारो के अलावा राजधानी रांची में भी अपना नेटवर्क फैला लिया था। रांची में स्थानीय स्तर पर कुछ लोग व्यापारियों की जानकारी जुटाने और वसूली का दबाव बनाने का काम कर रहे थे। पुलिस अब इन संदिग्धों की तलाश में जुट गई है और उनके खिलाफ साक्ष्य इकट्ठा किए जा रहे हैं।
तेहरान,एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच मसूद पेजेशकियन ने युद्ध समाप्त करने के लिए तीन अहम शर्तें रखी हैं। ईरान और Israel-United States के बीच चल रहा यह संघर्ष अब 13वें दिन में पहुंच गया है और दोनों पक्षों के बीच लगातार मिसाइल और हवाई हमले जारी हैं। इसी बीच ईरानी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने युद्ध समाप्ति का प्रस्ताव रखा है। ईरान की तीन प्रमुख शर्तें राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि क्षेत्र में शांति के लिए ईरान प्रतिबद्ध है, लेकिन युद्ध समाप्त करने के लिए कुछ शर्तें जरूरी हैं। उनकी पहली शर्त है कि ईरान के वैध अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया जाए। दूसरी शर्त के अनुसार, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिया जाए। तीसरी शर्त यह है कि भविष्य में ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई न हो, इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत सुरक्षा गारंटी दी जाए। उन्होंने बताया कि इन मुद्दों पर उन्होंने Russia और Pakistan के नेताओं से भी चर्चा की है। ट्रंप का दावा इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों में ईरान के कई सैन्य ठिकाने तबाह हो चुके हैं। उनके अनुसार, ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और कई अहम सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने अपने अधिकांश सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं और हालात ऐसे हैं कि जब चाहे युद्ध को समाप्त किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने युद्ध खत्म करने की स्पष्ट रणनीति साझा नहीं की। लेबनान में भी तेज हुए हमले दूसरी ओर, इजरायल ने हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। इजरायली सेना ने Beirut, Lebanon के दक्षिणी हिस्सों में हवाई हमले किए, जिससे कई रिहायशी इलाकों में भारी नुकसान हुआ। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हालिया हमलों में 86 बच्चों और 47 महिलाओं समेत 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,400 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।