Pakistan Cricket

Pakistan women’s cricket team players during a tense match amid reports of dressing room disagreements
खेल खत्म, कलेश शुरू! लगातार हार के बीच पाकिस्तान महिला टीम में बढ़ा तनाव, ड्रेसिंग रूम विवाद ने खड़े किए बड़े सवाल

लंदन: मैदान पर खराब प्रदर्शन और लगातार हार किसी भी टीम का मनोबल तोड़ सकती है, लेकिन जब हार के साथ-साथ ड्रेसिंग रूम की अंदरूनी कलह भी सुर्खियां बनने लगे, तो हालात और गंभीर हो जाते हैं। इन दिनों इंग्लैंड में खेले जा रहे महिला टी20 विश्व कप में Pakistan women's national cricket team का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। टीम लगातार हार झेल रही है और अब खिलाड़ियों, कप्तान तथा टीम प्रबंधन के बीच मतभेदों की खबरें भी सामने आने लगी हैं। हालांकि Pakistan Cricket Board ने इन रिपोर्ट्स पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाएं टीम के भीतर बढ़ते असंतोष और अनुशासन संबंधी समस्याओं की ओर इशारा कर रही हैं। जीत का इंतजार कर रही है पाकिस्तान टीम पाकिस्तान महिला टीम का अभियान इस टूर्नामेंट में बेहद खराब रहा है। लीड्स में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली हार टीम की लगातार चौथी शिकस्त थी। लगातार हार के कारण टीम अंक तालिका में संघर्ष करती नजर आ रही है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि विश्व कप से पहले आयरलैंड और वेस्टइंडीज के साथ खेली गई त्रिकोणीय सीरीज में भी टीम जीत दर्ज नहीं कर सकी थी। पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान महिला क्रिकेट का प्रदर्शन लगातार गिरा है और बड़े टूर्नामेंटों में टीम उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई है। विश्लेषकों का मानना है कि मैदान पर खराब प्रदर्शन के पीछे केवल तकनीकी कमियां नहीं, बल्कि टीम के भीतर बढ़ता असंतोष भी एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। कप्तान फातिमा सना और वहाब रियाज़ के बीच बढ़ा विवाद रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले से पहले टीम होटल में हुई एक घटना ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया। बताया जा रहा है कि कप्तान Fatima Sana ने सीनियर खिलाड़ी Aliya Riaz के पति के टीम होटल में ठहरने पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद कथित तौर पर उन्हें होटल छोड़ने के लिए कहा गया। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब आलिया रियाज़ ने एक महत्वपूर्ण अभ्यास सत्र में हिस्सा नहीं लिया। कप्तान फातिमा सना इस व्यवहार को अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें प्लेइंग इलेवन से बाहर रखना चाहती थीं। लेकिन टीम में मेंटर की भूमिका निभा रहे Wahab Riaz के हस्तक्षेप के बाद आलिया को अंतिम एकादश में जगह दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश से हार और खिलाड़ियों के खराब प्रदर्शन के बाद कप्तान और टीम प्रबंधन के बीच तनाव खुलकर सामने आ गया। रणनीति बन रही, लेकिन मैदान पर नहीं दिख रहा असर सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि टीम के भीतर कई समूह बन चुके हैं। कोचिंग स्टाफ और कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों के बीच तालमेल की कमी साफ दिखाई दे रही है। कोचिंग स्टाफ का मानना है कि मैचों के लिए तैयार की गई रणनीतियां खिलाड़ियों द्वारा मैदान पर सही तरीके से लागू नहीं की जा रहीं। इससे टीम का प्रदर्शन लगातार प्रभावित हो रहा है। क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय टीम की सफलता के लिए ड्रेसिंग रूम का माहौल सकारात्मक होना बेहद जरूरी है। यदि खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ एक ही दिशा में काम नहीं करते, तो उसका असर सीधे प्रदर्शन पर दिखाई देता है। पुरानी बीमारी फिर बनी परेशानी पाकिस्तानी क्रिकेट में ड्रेसिंग रूम विवाद कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बड़े टूर्नामेंटों के दौरान टीम के भीतर मतभेद और गुटबाजी की खबरें सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब टीम लगातार हारती है, तो आंतरिक मतभेद और अधिक उभरकर सामने आते हैं। यही वजह है कि मौजूदा विश्व कप में खराब प्रदर्शन के साथ-साथ ड्रेसिंग रूम विवाद भी चर्चा का विषय बन गया है। PCB की नीतियों पर भी उठ रहे सवाल टीम की मौजूदा स्थिति के लिए कई क्रिकेट जानकार Pakistan Cricket Board की नीतियों को भी जिम्मेदार मान रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में महिला टीम के कोचिंग सेटअप में लगातार बदलाव किए गए हैं। कभी विदेशी कोचों को जिम्मेदारी दी गई, तो कभी स्थानीय दिग्गजों को मौका मिला। लेकिन लगातार बदलती रणनीतियों और नेतृत्व के कारण टीम में स्थिरता नहीं बन पाई। विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी टीम को सफलता दिलाने के लिए लंबी अवधि की योजना और स्थिर नेतृत्व जरूरी होता है। बार-बार बदलाव करने से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और टीम संस्कृति दोनों प्रभावित होते हैं। क्या वापसी कर पाएगी पाकिस्तान? विश्व कप में पाकिस्तान महिला टीम के सामने अब केवल मैच जीतने की चुनौती नहीं है, बल्कि टीम के भीतर भरोसा और एकजुटता बनाए रखने की भी बड़ी जिम्मेदारी है। यदि ड्रेसिंग रूम विवादों को समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो इसका असर भविष्य के टूर्नामेंटों पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में PCB और टीम प्रबंधन इस स्थिति से कैसे निपटते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।  

surbhi जून 25, 2026 0
Pakistan cricket team players during a Test match amid captaincy change speculation
पाकिस्तान क्रिकेट में फिर भूचाल! शान मसूद की कप्तानी पर संकट, सलमान आगा बन सकते हैं नए टेस्ट कप्तान

इस्लामाबाद: पाकिस्तान क्रिकेट टीम में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। लगातार खराब प्रदर्शन के कारण टेस्ट कप्तान Shan Masood की कप्तानी पर खतरा मंडरा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Salman Ali Agha को पाकिस्तान की टेस्ट टीम का नया कप्तान बनाया जा सकता है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन Mohsin Naqvi इस बदलाव को लेकर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। शान मसूद का कप्तानी रिकॉर्ड बना चिंता का कारण दिसंबर 2023 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद शान मसूद को टेस्ट टीम की कमान सौंपी गई थी। लेकिन उनके नेतृत्व में पाकिस्तान का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। कप्तान के रूप में 16 टेस्ट मैच 12 मैचों में हार हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ लगातार चौथी टेस्ट हार विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में पाकिस्तान सबसे निचले स्थानों में रहा सबसे चिंताजनक बात यह रही कि टेस्ट क्रिकेट के प्रमुख देशों में शान मसूद ऐसे कप्तान बन गए जिन्होंने अपने शुरुआती 12 टेस्ट मैचों में जीत का स्वाद नहीं चखा। मोहसिन नकवी बदलाव के मूड में रिपोर्ट्स के मुताबिक, शान मसूद ने नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने के लिए उन्हें मौका देने की अपील की है। हालांकि PCB नेतृत्व टीम के खराब प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं है। सूत्रों का दावा है कि आगामी चुनौतीपूर्ण विदेशी दौरों को देखते हुए बोर्ड नए नेतृत्व की ओर बढ़ना चाहता है। पाकिस्तान को जल्द ही वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के कठिन दौरे पर जाना है, जहां टीम को पांच महत्वपूर्ण टेस्ट मुकाबले खेलने हैं। क्यों आगे हैं सलमान आगा? 32 वर्षीय सलमान अली आगा पिछले कुछ समय से पाकिस्तान टीम के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। मार्च 2025 से वह टी20 टीम की कप्तानी भी संभाल रहे हैं। टेस्ट करियर की बात करें तो: 25 टेस्ट मैच 1663 रन 3 शतक 12 अर्धशतक सर्वोच्च स्कोर 132* रन उनकी नेतृत्व क्षमता और लगातार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें टेस्ट टीम की कमान सौंपे जाने की संभावना बढ़ गई है। बल्लेबाजी में भी संघर्ष कर रहे हैं मसूद कप्तानी के अलावा शान मसूद का व्यक्तिगत प्रदर्शन भी सवालों के घेरे में है। हालिया टेस्ट श्रृंखला में वह चार पारियों में केवल एक अर्धशतक ही लगा सके। ऐसे में टीम में उनकी जगह भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा रही है। कोचिंग स्टाफ में भी हो सकते हैं बदलाव रिपोर्ट्स के अनुसार: Sarfaraz Ahmed मुख्य कोच बने रह सकते हैं। Umar Gul गेंदबाजी कोच के रूप में अपनी भूमिका जारी रख सकते हैं। बल्लेबाजी कोच के पद पर नया चेहरा लाया जा सकता है। पूर्व कप्तान Mohammad Hafeez को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट निदेशक बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों से लगातार नेतृत्व और प्रबंधन में बदलाव देखने को मिले हैं। ऐसे में यदि शान मसूद की कप्तानी जाती है, तो यह पाकिस्तान क्रिकेट में एक और बड़े बदलाव के रूप में देखा जाएगा।  

surbhi जून 8, 2026 0
Australia players celebrate a crucial ODI win over Pakistan to level the series 1-1
ऑस्ट्रेलिया ने दिखाई दमदार वापसी, अब पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव; निर्णायक मुकाबले में दांव पर सीरीज

पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जा रही वनडे सीरीज अब रोमांचक मोड़ पर पहुंच गई है। शुरुआती मुकाबले में करारी हार झेलने के बाद युवा और अनुभवहीन ऑस्ट्रेलियाई टीम ने शानदार वापसी करते हुए दूसरा वनडे जीत लिया और सीरीज 1-1 से बराबर कर दी। अब लाहौर में होने वाला तीसरा और अंतिम मुकाबला सीरीज का फैसला करेगा। इस सीरीज की सबसे बड़ी खासियत बल्लेबाजों की परीक्षा लेने वाली धीमी और स्पिन-अनुकूल पिचें रही हैं। आधुनिक वनडे क्रिकेट के हाई-स्कोरिंग दौर में यह सीरीज 1990 के दशक की क्रिकेट की याद दिला रही है, जहां बल्लेबाजों को हर रन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है और स्पिन गेंदबाज मैच का रुख तय कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया की जुझारू बल्लेबाजी ने बदला माहौल दूसरे वनडे में ऑस्ट्रेलिया ने 231 रन का स्कोर खड़ा किया, जो इन परिस्थितियों में काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। कप्तान जोश इंग्लिस और कैमरून ग्रीन ने मुश्किल हालात में धैर्य दिखाते हुए पारी को संभाला। ग्रीन की अर्धशतकीय पारी खास रही। वह शुरुआत में लय तलाशते नजर आए, लेकिन दबाव के बीच उन्होंने महत्वपूर्ण रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। इसके बाद मैट रेनशॉ और 19 वर्षीय ओली पीक ने अंतिम ओवरों में तेज रन जोड़कर पाकिस्तान पर दबाव बना दिया। रेनशॉ का प्रदर्शन पूरी सीरीज में शानदार रहा है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी बेहतरीन शॉट चयन और स्ट्राइक रोटेशन से खुद को ऑस्ट्रेलिया के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में साबित किया है। नाथन एलिस और स्पिनरों ने पाकिस्तान को किया परेशान गेंदबाजी में नाथन एलिस ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े मैच विनर साबित हुए। धीमी और पकड़ वाली पिच पर उन्होंने शानदार लाइन-लेंथ के साथ करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। स्पिन विभाग ने भी अहम भूमिका निभाई। मैट शॉर्ट ने तीन विकेट लेकर पाकिस्तान की बल्लेबाजी को झटका दिया, जबकि एडम जम्पा और टैनवीर संघा ने भी रन गति पर अंकुश बनाए रखा। पाकिस्तान के लिए बढ़ी चिंता पाकिस्तान के लिए इस सीरीज में कुछ सकारात्मक संकेत जरूर मिले हैं। युवा ऑलराउंडर अराफात मिन्हास ने बल्ले और गेंद दोनों से प्रभावित किया है, जबकि गाजी घोरी ने भी अपने प्रदर्शन से भविष्य की उम्मीदें जगाई हैं। हालांकि टीम की कई कमजोरियां अभी भी सामने आ रही हैं। बल्लेबाजी लगातार दबाव में नजर आई है और मध्यक्रम स्थिरता नहीं दिखा सका। शादाब खान ने दूसरे वनडे में 71 रन बनाकर टीम को मुकाबले में बनाए रखा, लेकिन गेंदबाजी में उनका संघर्ष जारी है। पाकिस्तान ने 2015 के बाद से अपने घर में सिर्फ एक द्विपक्षीय वनडे सीरीज गंवाई है। ऐसे में अगर वह निर्णायक मुकाबला हारता है तो हाल ही में बांग्लादेश के खिलाफ मिली सीरीज हार के बाद टीम पर सवाल और गहरे हो सकते हैं। नजरें इन खिलाड़ियों पर साहिबजादा फरहान टी20 क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुके फरहान वनडे में अभी तक प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं। उन्होंने कुछ अच्छी शुरुआत की हैं लेकिन उन्हें बड़ी पारी में बदलने में असफल रहे हैं। निर्णायक मुकाबले में पाकिस्तान को उनसे मजबूत शुरुआत की उम्मीद होगी। मैट रेनशॉ ऑस्ट्रेलिया के लिए रेनशॉ इस सीरीज के सबसे प्रभावशाली बल्लेबाज रहे हैं। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने लगातार रन बनाए हैं। उनकी फॉर्म ऑस्ट्रेलिया के लिए निर्णायक मुकाबले में सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकती है। टीम संयोजन पर नजर पाकिस्तान अब तक बिना बदलाव के उतरा है और संभावना है कि निर्णायक मुकाबले में भी वही संयोजन बरकरार रहेगा। हालांकि स्पिनर सुफियान मोकीम को मौका देने की मांग तेज हो रही है। वहीं ऑस्ट्रेलिया के लिए मार्नस लाबुशेन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। लगातार खराब प्रदर्शन के बावजूद टीम प्रबंधन उन्हें एक और मौका दे सकता है। पिच और मौसम रिपोर्ट लाहौर में एक बार फिर धीमी और स्पिन-अनुकूल पिच देखने को मिल सकती है। बल्लेबाजों को रन बनाने के लिए धैर्य और समझदारी दिखानी होगी। मौसम गर्म रहने की संभावना है, हालांकि हल्की बारिश मुकाबले में थोड़ी भूमिका निभा सकती है। रिकॉर्ड पर नजर एडम जम्पा को वनडे क्रिकेट में 200 विकेट पूरे करने के लिए सिर्फ 3 विकेट की जरूरत है। ऑस्ट्रेलिया ने 1998 के बाद पाकिस्तान में कोई वनडे सीरीज नहीं जीती है। नाथन एलिस ने सिर्फ 5 वनडे में बाबर आजम को 3 बार आउट किया है, जो इस प्रारूप में किसी भी गेंदबाज द्वारा बाबर के खिलाफ संयुक्त रूप से सबसे अधिक है। निर्णायक मुकाबला दोनों टीमों के लिए बेहद अहम होगा। ऑस्ट्रेलिया 28 साल बाद पाकिस्तान में वनडे सीरीज जीतने का सपना पूरा करना चाहेगा, जबकि पाकिस्तान घरेलू सरजमीं पर अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए मैदान में उतरेगा।  

surbhi जून 3, 2026 0
Sahibzada Farhan celebrating after scoring century in ICC T20 World Cup match for Pakistan
ICC का बड़ा सम्मान: पाकिस्तान के साहिबजादा फरहान बने ‘प्लेयर ऑफ द मंथ’, टी20 वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक प्रदर्शन

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पाकिस्तान के उभरते सितारे Sahibzada Farhan को शानदार प्रदर्शन का बड़ा इनाम मिला है। International Cricket Council (ICC) ने उन्हें फरवरी 2026 के लिए ‘मेन्स प्लेयर ऑफ द मंथ’ चुना है। यह सम्मान उन्हें ICC Men's T20 World Cup 2026 में उनके धमाकेदार प्रदर्शन के लिए दिया गया है, जहां उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से रिकॉर्ड बुक में खास जगह बना ली। रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन से जीता दिल साहिबजादा फरहान ने पूरे टूर्नामेंट में कुल 383 रन बनाए, जो इस एडिशन में सबसे ज्यादा रहे। उन्होंने दो शतक लगाए वह टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में एक ही संस्करण में दो शतक लगाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए उनका पहला शतक नामीबिया के खिलाफ आया, जहां उन्होंने 58 गेंदों में 100 रन ठोके। दूसरा शतक श्रीलंका के खिलाफ पल्लेकेले में आया, जिसमें उन्होंने अपने ओपनिंग पार्टनर Fakhar Zaman के साथ 176 रन की शानदार साझेदारी की। टीम के लिए अकेले संभाला मोर्चा पूरे टूर्नामेंट में फरहान ने पाकिस्तान की बल्लेबाजी की जिम्मेदारी लगभग अकेले ही संभाली। मुश्किल परिस्थितियों में भी उनकी निरंतरता और आक्रामकता ने उन्हें इस अवॉर्ड का सबसे मजबूत दावेदार बनाया। फरहान ने अवॉर्ड मिलने पर कहा कि यह उनके लिए “अविश्वसनीय एहसास” है और दुनियाभर के फैंस का समर्थन इसे और खास बनाता है। PCB विवादों के बीच आई राहत टूर्नामेंट से पाकिस्तान के बाहर होने के बाद Pakistan Cricket Board (PCB) पर खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं। हालांकि बोर्ड ने इन दावों को खारिज कर दिया और कहा कि कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया गया है, लेकिन भविष्य में जवाबदेही सुनिश्चित करने के उपाय किए जाएंगे। ऐसे माहौल में फरहान का यह अवॉर्ड पाकिस्तान क्रिकेट के लिए एक बड़ी सकारात्मक खबर बनकर सामने आया है।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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