Pakistan Mediation

Iran rejects US talks amid rising tensions, diplomatic efforts for ceasefire face major setback
ईरान ने ठुकराई अमेरिका की शर्तें, बातचीत से किया इंकार; सीजफायर पर संकट गहराया

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। सीजफायर के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि ईरान ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित बातचीत में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। क्या है पूरा मामला? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक: ईरान ने मध्यस्थों को स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को तैयार नहीं है उसने अमेरिका की शर्तों को “अस्वीकार्य” बताया है इस वजह से सीजफायर के लिए चल रही बातचीत ठप पड़ गई है पाकिस्तान की कोशिशें भी नाकाम इस मामले में पाकिस्तान समेत कई क्षेत्रीय देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे थे। पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में बातचीत की मेजबानी का प्रस्ताव दिया था विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि पाकिस्तान इस प्रक्रिया में सहयोग देने को तैयार है लेकिन ईरान के इनकार के बाद यह पहल फिलहाल अधर में लटक गई है। बढ़ सकता है तनाव विशेषज्ञों का मानना है कि: बातचीत रुकने से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है सीजफायर की संभावना फिलहाल कमजोर पड़ गई है आगे क्या? अब नजर इस बात पर है कि क्या दोनों देश किसी नए मंच या शर्तों के तहत बातचीत के लिए तैयार होंगे या फिर हालात और बिगड़ेंगे।  

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
Foreign ministers meeting in Islamabad amid Iran US tensions, diplomatic talks ending without agreement
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता कोशिश फेल, समय से पहले खत्म हुई अहम बैठक

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच खुद को “पीस ब्रोकर” के तौर पर पेश करने की पाकिस्तान की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। इस्लामाबाद में आयोजित विदेश मंत्रियों की अहम बैठक तय समय से पहले ही समाप्त हो गई, जिससे इस पहल की गंभीरता और तैयारी पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक दिन में खत्म हुआ दो दिन का समिट यह बैठक 29–30 मार्च तक दो दिन चलने वाली थी, लेकिन यह सिर्फ एक दिन में ही खत्म हो गई। इस सम्मेलन में तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया था। बैठक का मकसद अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए एक मध्यस्थता ढांचा तैयार करना था, लेकिन इसमें कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। क्यों नहीं बनी सहमति? कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, बैठक के विफल होने के पीछे कई कारण रहे: ईरान की कड़ी शर्तें, जिसमें सुरक्षा की गारंटी की मांग अमेरिका पर भरोसे को लेकर स्पष्ट आश्वासन का अभाव शामिल देशों के बीच आपसी मतभेद जहां पाकिस्तान और तुर्की बातचीत को आगे बढ़ाने के पक्ष में थे, वहीं सऊदी अरब और मिस्र ने अधिक सतर्क रुख अपनाया। सऊदी और मिस्र ने क्यों छोड़ी बैठक? रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्री पहले ही दिन बैठक छोड़कर लौट गए। इन देशों का मानना था कि: किसी भी मध्यस्थता से पहले सीधे अमेरिका से बातचीत जरूरी है बिना स्पष्ट रणनीति के आगे बढ़ना जोखिम भरा हो सकता है इससे बैठक में एकजुटता की कमी साफ नजर आई। क्या आगे बनेगा रास्ता? हालांकि बैठक से कोई ठोस परिणाम नहीं निकला, लेकिन सभी देशों ने कूटनीतिक बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। पाकिस्तान और तुर्की, ईरान को शर्तों में नरमी लाने के लिए मनाने की कोशिश करेंगे अगर अमेरिका और ईरान सकारात्मक संकेत देते हैं, तो जल्द नई बैठक हो सकती है फिलहाल, यह साफ है कि क्षेत्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर एकमत बनाना आसान नहीं है।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
US Vice President JD Vance amid discussions on Iran-US conflict and possible Pakistan visit
ईरान युद्ध खत्म करने की कोशिश तेज: 3 दिन में पाकिस्तान जा सकते हैं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच युद्धविराम की कोशिशें अब तेज होती नजर आ रही हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, JD Vance (अमेरिका के उपराष्ट्रपति) अगले तीन दिनों के भीतर Pakistan का दौरा कर सकते हैं। इस संभावित यात्रा का उद्देश्य Iran और United States के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत को आगे बढ़ाना बताया जा रहा है। क्या कहती हैं रिपोर्ट्स? अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन पाकिस्तान में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करने की कोशिश कर रहा है, जिसमें जेडी वेंस की भागीदारी संभव है। हालांकि, अभी तक इस यात्रा की तारीख, स्थान और भागीदारी को लेकर अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। ईरान ने किनसे बातचीत से किया इनकार? सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने Steve Witkoff और Jared Kushner जैसे अमेरिकी दूतों के साथ दोबारा बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया है। इसके बाद पाकिस्तान ने नए चेहरे के तौर पर जेडी वेंस का नाम आगे बढ़ाया है, जिससे वार्ता को नई दिशा मिल सके। पाकिस्तान क्यों बना रहा है खुद को मध्यस्थ? Shehbaz Sharif ने हाल ही में कहा था कि उनका देश “सार्थक और निर्णायक बातचीत” को संभव बनाने के लिए तैयार है। पाकिस्तान लगातार यह कोशिश कर रहा है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाए और इस्लामाबाद को बातचीत का केंद्र बनाया जाए। व्हाइट हाउस का क्या रुख? व्हाइट हाउस ने फिलहाल इस यात्रा को लेकर कोई स्पष्ट पुष्टि नहीं की है। प्रेस सचिव ने कहा कि जेडी वेंस पहले से ही राष्ट्रीय सुरक्षा टीम का अहम हिस्सा हैं, लेकिन उनकी भूमिका में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। साथ ही, अमेरिका ने यह भी साफ नहीं किया कि वह ईरान से किस स्तर पर बातचीत कर रहा है। क्या जल्द खत्म होगा युद्ध? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान में यह वार्ता होती है, तो यह युद्धविराम की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच अविश्वास और सख्त रुख को देखते हुए बातचीत आसान नहीं मानी जा रही।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
Iran President Pezeshkian addressing global tensions mentioning Pakistan and Middle East countries amid conflict
ईरान-इसराइल तनाव के बीच राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान का बड़ा बयान, पाकिस्तान समेत कई देशों का किया ज़िक्र

मध्य-पूर्व में जारी तनाव और अमेरिका-इसराइल के साथ टकराव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने वैश्विक प्रतिक्रिया को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पाकिस्तान, तुर्की, इराक़, लेबनान, मिस्र और अन्य अरब देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों के लोग अमेरिका और इसराइल की नीतियों के खिलाफ खुलकर अपनी नाराज़गी जता रहे हैं। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने कहा, “आज हम दुनिया के कई देशों के लोगों को जागते हुए देख रहे हैं। पाकिस्तान, तुर्की, इराक़, लेबनान, मिस्र और अरब देशों के लोग अमेरिका, इसराइल और उनके अपराधों के प्रति अपनी नाराज़गी को मुखरता से व्यक्त कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि दुनिया के स्वतंत्र लोग “ज़ायनिस्टों” के साथ नहीं हैं और क्षेत्र में स्थिरता केवल आपसी सहयोग और देशों की संप्रभुता के सम्मान से ही संभव है। पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान ने इस तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से बातचीत के ज़रिए समाधान निकालने की अपील की है। 15 सूत्रीय योजना की चर्चा इस बीच अमेरिकी और इसराइली मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका ने समझौते के लिए पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को 15 सूत्रीय प्रस्ताव सौंपा है। हालांकि, इस प्रस्ताव की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक नजर मध्य-पूर्व की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। लगातार हो रहे हमलों और बयानों के बीच कूटनीतिक कोशिशें भी तेज़ हो गई हैं, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
Donald Trump speaking on Iran war with jets and nuclear symbols representing geopolitical tension
ट्रंप का बड़ा दावा: “जंग जीत ली”, बोले-ईरान परमाणु हथियार न रखने पर हुआ सहमत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस जंग को “जीत चुका है” और ईरान अब कभी परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गया है। “ईरान की परमाणु क्षमता पूरी तरह खत्म” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों में ईरान की न्यूक्लियर क्षमता पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। उन्होंने कहा: अगर हमला नहीं किया जाता, तो ईरान दो हफ्ते में परमाणु हथियार बना लेता ईरान इसका इस्तेमाल इजरायल और पूरे पश्चिम एशिया में कर सकता था अमेरिकी कार्रवाई ने इस खतरे को पूरी तरह खत्म कर दिया “तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं हमारे विमान” ट्रंप ने यह भी कहा कि जंग में ईरान की नौसेना और वायुसेना खत्म हो चुकी है। उनके मुताबिक, अमेरिकी लड़ाकू विमान तेहरान और अन्य इलाकों के ऊपर उड़ान भर रहे हैं, जो उनकी सैन्य बढ़त को दिखाता है। “समझौते के लिए तैयार है ईरान” ट्रंप ने कहा कि ईरान अब समझौता करना चाहता है। बातचीत में शामिल प्रमुख नाम: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विदेश मंत्री मार्को रूबियो विशेष दूत स्टीव विटकॉफ जेरेड कुशनर हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि वह पहले से सब कुछ सार्वजनिक नहीं करना चाहते, लेकिन ईरान परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो चुका है। ईरान में “सत्ता परिवर्तन” का दावा ट्रंप ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। उनके मुताबिक: मौजूदा नेतृत्व पहले से अलग है नए लोग सत्ता में आए हैं यह बदलाव “रिजीम चेंज” जैसा है पाकिस्तान की एंट्री: मध्यस्थता की पेशकश इस बीच पाकिस्तान ने भी इस मुद्दे पर पहल दिखाई है। ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि: पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करना चाहता है शांति वार्ता के लिए “सार्थक और निर्णायक भूमिका” निभाने को तैयार है

surbhi मार्च 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0