US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर नए सैन्य हमले की पुष्टि की है। वहीं ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास स्थित केश्म (Qeshm) द्वीप पर हुए हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं। केश्म द्वीप पर कई मिसाइलों से हमला ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, रविवार दोपहर के बाद केश्म द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर करीब एक दर्जन मिसाइलें या अन्य प्रोजेक्टाइल दागे गए। हमले के बाद इलाके में जोरदार धमाके हुए और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया। शुरुआती रिपोर्ट में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं थी, लेकिन बाद में ईरानी अधिकारियों ने पुष्टि की कि हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई है और दो लोग घायल हुए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हमले की पुष्टि की अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि रविवार (12 जुलाई) शाम 5 बजे (ईस्टर्न टाइम) से ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान शुरू किए गए। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले करने के लिए किया जा रहा है। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि यह कार्रवाई राष्ट्रपति के निर्देश पर की गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी हमलों के बाद केश्म द्वीप और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। ईरानी प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई से पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है। यदि दोनों देशों के बीच टकराव जारी रहा, तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
पटना, एजेंसियां। पटना के चर्चित शिक्षाविद् खान सर (फैजल खान) को कोचिंग विवाद से जुड़े गोलीबारी मामले में बड़ी राहत मिली है। सोमवार को पटना सिविल कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) प्रदान कर दी। इसी मामले में न्यायिक हिरासत में बंद उनके दोनों बॉडीगार्ड्स समेत कुल छह आरोपियों को भी जमानत मिल गई। कोर्ट के इस फैसले से खान सर और उनके सहयोगियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। आर्म्स एक्ट और हत्या की कोशिश की धाराओं में दर्ज था मामला खान सर की ओर से उनके वकील ने अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी, जिस पर सोमवार को फैसला सुनाया गया। उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट और हत्या के प्रयास समेत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। 10 जुलाई को फैसला सुनाया जाना था, लेकिन जिला जज की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई टल गई थी। वकील बोले- जांच में सामने आई सच्चाई खान सर के अधिवक्ता अरविंद सिंह महुआर ने कहा कि अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अग्रिम जमानत मंजूर की है। उन्होंने बताया कि हवा में फायरिंग के मामले में गिरफ्तार दोनों बॉडीगार्ड्स को भी राहत मिली है। उनके अनुसार, पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्हें केस डायरी में दर्ज किया गया और उसी आधार पर अदालत ने निर्णय लिया। क्या है पूरा मामला? यह मामला 4 जून 2026 को सामने आया था, जब खान ग्लोबल स्टडीज संस्थान के पास हुई कथित गोलीबारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद कदमकुआं थाना पुलिस ने कांड संख्या 418/2026 दर्ज कर खान सर, उनके दो सुरक्षा कर्मियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस ने दोनों सुरक्षा कर्मियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अब अदालत से मिली अग्रिम जमानत के बाद खान सर को तत्काल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है, जबकि मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। पुलिस जांच और अदालत में सुनवाई के आधार पर इस मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।
US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर दोनों देशों के दावों में टकराव सामने आया है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए यह समुद्री मार्ग खुला है, जबकि ईरान ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि ट्रांजिट परमिट के बिना यहां से गुजरना संभव नहीं होगा। अमेरिका का दावा- अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए रास्ता खुला अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य उन सभी जहाजों के लिए खुला है जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत कानूनी रूप से यात्रा करना चाहते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान का इस जलडमरूमध्य पर कोई नियंत्रण नहीं है और जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। ईरान ने अमेरिकी दावे को बताया गलत फारसी खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण (PGCA) ने अमेरिकी दावे को खारिज करते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के कारण फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन संभव नहीं है। प्राधिकरण ने कहा कि इस मार्ग से गुजरने के लिए ट्रांजिट परमिट अनिवार्य होगा और परमिट केवल आधिकारिक प्रक्रिया के तहत ही जारी किए जाएंगे। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में तनाव कम होने के बाद ही सामान्य आवाजाही बहाल की जाएगी। जहाज पर हमले के बाद बढ़ा सैन्य तनाव रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कंटेनर जहाज पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कतर, कुवैत, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की दिशा में मिसाइल हमले किए। हमले के दौरान कंटेनर जहाज में आग लग गई और चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा। अमेरिका का दावा- ईरान के 140 ठिकानों पर हमला अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि उसने ईरान के लगभग 140 सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इनमें कथित तौर पर मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, हथियार भंडार, संचार केंद्र और अन्य सैन्य प्रतिष्ठान शामिल थे। वैश्विक व्यापार के लिए अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। खाड़ी देशों से निकलने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर असर डाल सकता है।
तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की चेतावनी दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यदि क्षेत्र में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा और विदेशी शक्तियां होर्मुज के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की कोशिश करती रहीं, तो इस जलडमरूमध्य को खुला रखना संभव नहीं होगा। रविवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल ईरान की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी अन्य देश ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की तो टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। होर्मुज पर विदेशी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा और यदि ऐसा हुआ तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की मांग अराघची ने कहा कि समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर संघर्ष समाप्त होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है और अमेरिका की जिम्मेदारी है कि वह युद्धविराम लागू कराए तथा इजरायली हमलों को रोके। अमेरिका पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी अमेरिका के खिलाफ तीखा बयान दिया। संगठन के प्रवक्ता हुसैन मोहेबी ने कहा कि अमेरिका भरोसे के लायक नहीं है और वह बार-बार अपने वादों से पीछे हटता है। उन्होंने सरकारी टीवी से बातचीत में कहा, "जैसा हमने पहले भी कहा था, दुश्मन धोखेबाज है और उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वह किसी भी समय अपने वादे तोड़ सकता है।" 'हमले का मिलेगा और कड़ा जवाब' आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगियों की ओर से कोई नया सैन्य हमला किया गया तो ईरान पहले से अधिक ताकत के साथ जवाब देगा। मोहेबी ने कहा कि यदि युद्धविराम का उल्लंघन हुआ तो ईरान की प्रतिक्रिया पहले से कहीं अधिक सख्त होगी। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है असर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यदि ईरान इस मार्ग को बंद करने की दिशा में कदम उठाता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। फिलहाल क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
तेहरान: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को लेकर ईरान ने नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बाद भले ही इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को दोबारा व्यापारिक गतिविधियों के लिए खोल दिया गया हो, लेकिन अब यहां से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए अनिवार्य शर्तें लागू कर दी गई हैं। नए नियमों के तहत किसी भी जहाज को होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश से कम से कम 48 घंटे पहले अपनी यात्रा की जानकारी देनी होगी। इसके अलावा जहाजों को अग्रिम पंजीकरण, सरकारी अनुमति और पर्याप्त बीमा (इंश्योरेंस) का प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इन शर्तों का पालन किए बिना किसी भी जहाज को इस समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दुनिया की 20 फीसदी ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है इस मार्ग से होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। ऐसे में ईरान के नए नियमों का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों, ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग पर लागू नई व्यवस्था से शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम में वृद्धि हो सकती है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। नई अथॉरिटी करेगी निगरानी इन नियमों को लागू करने और समुद्री गतिविधियों की निगरानी के लिए ईरान ने एक नई संस्था 'पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' (PGSA) का गठन किया है। यह संस्था अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के तहत बनाई गई है, जिसका उद्देश्य तीन महीने से अधिक समय तक चले संघर्ष के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर सुरक्षित और नियंत्रित व्यापारिक गतिविधियों को फिर से बहाल करना है। PGSA ने कहा है कि 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' पर हस्ताक्षर और संबंधित विभागों से निर्देश मिलने के बाद इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य अथॉरिटी ने जहाज संचालकों के लिए एक आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल भी जारी किया है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के इच्छुक सभी जहाजों को इस पोर्टल पर अपनी यात्रा, कार्गो और बीमा संबंधी जानकारी पहले से दर्ज करनी होगी। अधिकारियों के मुताबिक, नई व्यवस्था का उद्देश्य जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, समुद्री यातायात को व्यवस्थित करना और क्षेत्र में किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम को कम करना है। वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर लागू नए नियमों से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ सकती है। चूंकि दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए नियमों के सख्त अनुपालन और अतिरिक्त प्रक्रियाओं का असर वैश्विक तेल बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है। ईरान का कहना है कि ये कदम सुरक्षा कारणों से उठाए गए हैं और इनका उद्देश्य व्यापारिक जहाजों की निर्बाध एवं सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास शनिवार को अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से भेजे गए कई ड्रोन को मार गिराया, जिसके बाद ईरानी तटीय निगरानी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की गई। होर्मुज की ओर बढ़ रहे थे ड्रोन: अमेरिकी सेना अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, कम से कम चार एकतरफा हमलावर ड्रोन होर्मुज जलडमरूमध्य की दिशा में बढ़ रहे थे। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ये ड्रोन क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य संसाधनों या अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बन सकते थे। सेंटकॉम ने कहा कि समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ड्रोन को नष्ट करना आवश्यक था। ड्रोन हमले के बाद रडार ठिकानों पर कार्रवाई अमेरिकी सेना के मुताबिक, ड्रोन को निष्क्रिय करने के बाद ईरान के गोरुक और क़ेश्म द्वीप स्थित तटीय निगरानी रडार केंद्रों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी पक्ष ने इसे आत्मरक्षा और समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया कदम बताया है। सेंटकॉम ने कहा कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बल किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ईरान ने चेतावनी फायरिंग का दावा किया दूसरी ओर, ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने दावा किया कि ईरानी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट समुद्री क्षेत्र में चेतावनी स्वरूप गोलियां चलाईं। रिपोर्ट के अनुसार यह गतिविधि लारक द्वीप के आसपास हुई, जो बंदर अब्बास बंदरगाह के निकट स्थित है। हईरान की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। संघर्ष विराम के बावजूद जारी है तनाव हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम और कूटनीतिक वार्ताओं की कोशिशें हुई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव कम होता नहीं दिख रहा। वॉशिंगटन और तेहरान लगातार एक-दूसरे पर समझौतों के उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी घटनाएं क्षेत्रीय स्थिरता और चल रही वार्ताओं को प्रभावित कर सकती हैं। वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम है होर्मुज होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों, तेल की कीमतों और वैश्विक शिपिंग सेक्टर पर पड़ सकता है। ट्रंप का दावा- ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हालिया अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान के कई ड्रोन निर्माण केंद्र, लॉन्चिंग सुविधाएं और मिसाइल उत्पादन से जुड़े अहम ठिकाने नष्ट कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान के पास अब भी कुछ मिसाइल और ड्रोन क्षमता मौजूद है। वार्ता जारी, लेकिन मतभेद बरकरार तनाव के बीच दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। ईरान का कहना है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अब भी गतिरोध बना हुआ है। तेहरान ने अमेरिका पर अपने कुछ वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया है, जिनमें ईरान की जमी हुई विदेशी संपत्तियों को मुक्त कराने की मांग भी शामिल है। फिलहाल दोनों देशों के बीच किसी व्यापक समझौते की संभावना पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान का रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Kharg Island एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में आ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump और इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए इस द्वीप को निशाना बनाते हैं, तो यह कदम आसान नहीं होगा। इसकी वजह यहां की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और वैश्विक ऊर्जा बाजार में इसकी अहम भूमिका है। ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र फारस की खाड़ी में स्थित खर्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। अनुमान के मुताबिक ईरान के अधिकांश कच्चे तेल का निर्यात यहीं से होता है। द्वीप पर विशाल तेल भंडारण टैंक, पाइपलाइन नेटवर्क और बड़े ऑयल टैंकरों के लिए गहरे पानी के टर्मिनल मौजूद हैं, जिससे यह देश की ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख आधार बन गया है। भारी सैन्य सुरक्षा में घिरा इलाका खर्ग द्वीप को ईरान ने कड़ी सैन्य सुरक्षा से घेर रखा है। यहां एयर डिफेंस सिस्टम, रडार नेटवर्क और मिसाइल सुरक्षा तैनात है। साथ ही Islamic Revolutionary Guard Corps और ईरानी नौसेना की इकाइयां आसपास के समुद्री क्षेत्र में लगातार गश्त करती हैं। यही वजह है कि किसी भी बाहरी सैन्य कार्रवाई को यहां अंजाम देना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। मुख्य भूमि के करीब होने से रणनीतिक बढ़त खर्ग द्वीप ईरान की मुख्य भूमि से करीब 25 से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में अगर यहां किसी तरह का हमला होता है तो ईरान अपनी मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक ताकत के जरिए तुरंत जवाबी कार्रवाई कर सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे सैन्य दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र मानते हैं। वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है असर ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक यदि खर्ग द्वीप पर हमला होता है या यहां की तेल सुविधाएं बाधित होती हैं, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका रहती है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम ठिकाना छोटे आकार के बावजूद खर्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य रणनीति दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि किसी भी संभावित संघर्ष में यह द्वीप निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।