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Kedarnath Temple decorated with flowers as devotees gather for opening ceremony in 2026
केदारनाथ धाम के कपाट खुले: 6 महीने बाद शुरू हुई पवित्र यात्रा, पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

  शुभ मुहूर्त में खुले बाबा केदार के द्वार उत्तराखंड के पवित्र तीर्थ केदारनाथ धाम के कपाट आज 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसी के साथ विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ यात्रा 2026 का विधिवत शुभारंभ हो गया। मंदिर को इस खास मौके पर लगभग 51 क्विंटल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया, जिससे पूरा धाम आस्था और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया। भक्तों में जबरदस्त उत्साह, गूंजा ‘हर-हर महादेव’ कपाट खुलने के मौके पर करीब 6 से 8 हजार श्रद्धालु धाम में मौजूद रहे। बाबा केदार की डोली के पहुंचते ही पूरा क्षेत्र “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे और उन्होंने प्रधानमंत्री के नाम से विशेष पूजा-अर्चना की। कपाट खुलने के साथ ही अब अगले छह महीनों तक श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे। छह महीने बाद फिर शुरू हुई धार्मिक परंपरा गौरतलब है कि पिछले वर्ष 23 अक्टूबर 2025 (भैया दूज) को केदारनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए थे। करीब छह महीने बाद एक बार फिर धाम में धार्मिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं, जिससे चारधाम यात्रा का नया चरण शुरू हो गया है। पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं, बद्रीनाथ की भी तैयारी तेज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कपाट खुलने पर श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए इसे आस्था और भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने बाबा केदार से सभी यात्रियों की सुरक्षित और मंगलमय यात्रा की कामना की। वहीं, बद्रीनाथ धाम के कपाट खोलने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। नरसिंह मंदिर से आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी और गरुड़ डोली बद्रीनाथ के लिए रवाना हो चुकी है। इस साल चारधाम यात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह है–अब तक 21 लाख से अधिक श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या केदारनाथ और बद्रीनाथ यात्रा के लिए है।  

surbhi अप्रैल 22, 2026 0
Chardham Yatra
चारधाम यात्रा पर जाने से पहले जान लें रजिस्ट्रेशन से लेकर पूरा रूट

देहरादून, एजेंसियां। चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और लाखों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा पर निकलने की योजना बना रहे हैं। उत्तराखंड सरकार ने इस बार ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाया है, ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो।   ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करें? श्रद्धालु हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून में बनाए गए रजिस्ट्रेशन काउंटर पर जाकर ऑफलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान और ऋषिकेश के ट्रांजिट कैंप व ISBT जैसे स्थानों पर विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा यात्रा मार्ग पर भी कई जगह जैसे जानकीचट्टी, सोनप्रयाग, गौरीकुंड, जोशीमठ और गोविंद घाट में रजिस्ट्रेशन सेंटर उपलब्ध हैं। बिना रजिस्ट्रेशन यात्रा करने पर दिक्कतें आ सकती हैं, इसलिए पहले से पंजीकरण अनिवार्य है।   जरूरी दस्तावेज क्या हैं? रजिस्ट्रेशन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य वैध पहचान पत्र जरूरी है। इसके साथ एक सक्रिय मोबाइल नंबर देना होगा। यात्रा की तारीख और परिवार के एक सदस्य का संपर्क नंबर भी दर्ज करना आवश्यक है।   चारधाम यात्रा का पूरा रूट चारधाम यात्रा में यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन शामिल होते हैं। यात्रा आमतौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है। पहले यमुनोत्री (जानकीचट्टी से 6 किमी ट्रेक), फिर गंगोत्री (सीधा सड़क मार्ग), इसके बाद केदारनाथ (गौरीकुंड से लगभग 16 किमी ट्रेक) और अंत में बद्रीनाथ (सड़क मार्ग) पहुंचा जाता है। केदारनाथ का रास्ता सबसे कठिन माना जाता है।   हेल्थ और सुरक्षा के सख्त नियम सरकार ने इस बार स्वास्थ्य प्रोटोकॉल सख्त किए हैं। 55 वर्ष से अधिक उम्र या बीमार यात्रियों के लिए मेडिकल चेकअप जरूरी है। यात्रा मार्ग पर हेल्थ सेंटर और मेडिकल पोस्ट बनाए गए हैं। साथ ही रात 10 बजे के बाद वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Anjali Kumari अप्रैल 20, 2026 0
Devotees visiting Kedarnath and Badrinath temples during Char Dham Yatra in Uttarakhand Himalayas
चार धाम यात्रा 2026: श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर, जानिए कपाट खुलने-बंद होने की तिथियां, रजिस्ट्रेशन और पूरा शेड्यूल

भारत की सबसे पवित्र और आध्यात्मिक यात्राओं में से एक चार धाम यात्रा 2026 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु इस दिव्य यात्रा में शामिल होकर भगवान के दर्शन करते हैं और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं। उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित ये चार पवित्र धाम-केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री-भक्ति, श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। कब खुलेंगे चारों धाम के कपाट? हिंदू पंचांग के अनुसार पुजारियों द्वारा तय तिथियों के अनुसार इस वर्ष चारधाम यात्रा का शुभारंभ अप्रैल में ही हो जाएगा- यमुनोत्री और गंगोत्री: 19 अप्रैल 2026 केदारनाथ: 22 अप्रैल 2026 (सुबह 08:00 बजे) बद्रीनाथ: 23 अप्रैल 2026 (सुबह 06:15 बजे) इन तिथियों के साथ ही आधिकारिक रूप से चारधाम यात्रा की शुरुआत मानी जाएगी। बंद होने की तिथियां चारों धाम के कपाट हर वर्ष दीपावली के बाद भाई दूज के आसपास बंद होते हैं। हालांकि, अभी आधिकारिक बंद होने की तिथियों की घोषणा बाद में की जाएगी। रजिस्ट्रेशन कैसे करें? चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इसके लिए आप- ‘Tourist Care Uttarakhand’ मोबाइल ऐप आधिकारिक वेबसाइट: registrationandtouristcare.uk.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। हेलीकॉप्टर बुकिंग जो श्रद्धालु हवाई सेवा का लाभ लेना चाहते हैं, वे केवल आधिकारिक वेबसाइट heliservices.uk.gov.in से ही बुकिंग करें। किसी भी अनधिकृत एजेंट से बचने की सलाह दी जाती है। यात्रा का सबसे अच्छा समय मई से जून: गर्मियों में मौसम अपेक्षाकृत अनुकूल रहता है सितंबर से अक्टूबर: मानसून के बाद का समय भी यात्रा के लिए सुरक्षित और सुंदर माना जाता है चारधाम का आध्यात्मिक महत्व चारधाम यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग मानी जाती है। केदारनाथ: भगवान शिव को समर्पित, 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बद्रीनाथ: भगवान विष्णु का धाम, 3,133 मीटर पर यमुनोत्री: यमुना नदी का उद्गम स्थल गंगोत्री: गंगा नदी का पवित्र स्रोत इन चारों धामों के दर्शन से व्यक्ति को मानसिक शांति, आध्यात्मिक संतुलन और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
Langar preparation during Amarnath Yatra affected due to LPG gas shortage
अमरनाथ यात्रा पर गैस संकट: वडोदरा के लंगर आयोजकों की बढ़ी चिंता, हजार सिलेंडरों की मांग

नई दिल्ली/वडोदरा। आगामी अमरनाथ यात्रा से पहले एक गंभीर चुनौती सामने आई है। वडोदरा के लंगर आयोजक रसोई गैस की भारी कमी से जूझ रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं की सेवा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन और पेयजल की व्यवस्था हेतु कम से कम 1000 एलपीजी सिलेंडरों की तत्काल आवश्यकता है, जबकि मौजूदा आपूर्ति बेहद सीमित है। आस्था के बीच बढ़ी अनिश्चितता हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस कठिन यात्रा पर निकलते हैं। इस दौरान विभिन्न संस्थाओं द्वारा लगाए गए लंगर श्रद्धालुओं के लिए जीवनरेखा साबित होते हैं। लेकिन इस बार स्थिति अलग है—भक्ति के साथ चिंता भी जुड़ गई है। एक लंगर आयोजक ने बताया कि बिना पर्याप्त गैस आपूर्ति के चाय, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था करना संभव नहीं होगा। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे को प्राथमिकता देने की अपील की है। ठंड में भोजन की कमी बन सकती है खतरा अमरनाथ यात्रा के दौरान ऊंचाई, कठिन मार्ग और कड़ाके की ठंड में गर्म भोजन और पानी अत्यंत आवश्यक होते हैं। ऐसे में गैस की कमी केवल सेवा को प्रभावित नहीं करेगी, बल्कि श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी जोखिम पैदा कर सकती है। एक श्रद्धालु ने चिंता जताते हुए कहा कि उनकी यात्रा सरकार के फैसलों पर निर्भर है और उम्मीद है कि उन्हें बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार से विशेष कोटा की मांग स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आयोजकों ने राज्य और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अमरनाथ यात्रा को विशेष श्रेणी में रखते हुए एलपीजी सिलेंडरों का अलग कोटा सुनिश्चित किया जाए, ताकि लंगर सेवा निर्बाध रूप से जारी रह सके। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन समय रहते समाधान न निकलने पर यह संकट यात्रा की व्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकता है।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0