Narendra Modi ने Norway में आयोजित तीसरे India-Nordic Summit के बाद आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता या दोहरा रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आतंकवाद पर हमारा स्पष्ट और एकजुट रुख है — नो कॉम्प्रोमाइज, नो डबल स्टैंडर्ड्स।” भारत और नॉर्डिक देश ‘नेचुरल पार्टनर्स’ पीएम मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देश स्वाभाविक साझेदार हैं और टेक्नोलॉजी दोनों की साझा प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों पक्षों के संबंधों में तेजी से प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि भारत और नॉर्डिक देशों के बीच व्यापार में चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पिछले एक दशक में भारत में नॉर्डिक निवेश 200 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है। वैश्विक शांति और नियम-आधारित व्यवस्था पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि चाहे Ukraine का युद्ध हो या पश्चिम एशिया की स्थिति, भारत हमेशा शांति और जल्द समाधान के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक तनाव के दौर में भारत और नॉर्डिक देश मिलकर नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। रिसर्च, स्टार्टअप और इनोवेशन में बढ़ेगा सहयोग पीएम मोदी ने कहा कि अनुसंधान और इनोवेशन भारत-नॉर्डिक साझेदारी का अहम आधार बन चुके हैं। दोनों पक्ष विश्वविद्यालयों, रिसर्च लैब्स और स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच सहयोग को और मजबूत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आर्कटिक और ध्रुवीय अनुसंधान के क्षेत्र में साझेदारी को गहरा करने पर सहमति बनी है। स्वच्छ ऊर्जा और ब्लू इकोनॉमी पर खास फोकस शिखर सम्मेलन में स्थिरता, स्वच्छ ऊर्जा, उभरती तकनीक, ब्लू इकोनॉमी और हरित विकास जैसे मुद्दों पर विशेष चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों की साझेदारी लगातार अधिक मजबूत और गतिशील होती जा रही है, जो भविष्य में वैश्विक विकास और स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। स्वीडन, फिनलैंड और डेनमार्क के साथ तकनीकी साझेदारी पीएम मोदी ने कहा कि भारत नॉर्डिक देशों की विशेषज्ञता को अपनी प्रतिभा और नवाचार क्षमता के साथ जोड़कर वैश्विक समाधान विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि: Sweden की उन्नत विनिर्माण और रक्षा तकनीक Finland की दूरसंचार और डिजिटल विशेषज्ञता Denmark की साइबर सुरक्षा और स्वास्थ्य तकनीक को भारत की तकनीकी क्षमता के साथ जोड़कर दुनिया के लिए भरोसेमंद समाधान तैयार किए जाएंगे। कौशल विकास और प्रतिभा आवागमन पर भी सहमति प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों के बीच कौशल विकास और प्रतिभा आदान-प्रदान के नए अवसर भी विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए साझा दृष्टिकोण पर आधारित है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 18 अप्रैल को रात के 8.30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि वे कुछ चौकाने वाली घोषणाएं कर सकते हैं। कुछ लोगों कयास लगा रहे हैं कि पीएम मोदी लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास नहीं होने पर कुछ खासे कहना चाहते हैं।
असम विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बरपेटा में जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास न तो लंबी सोच है और न ही विकास का विजन, यही वजह है कि पार्टी को लगातार चुनावी हार का सामना करना पड़ रहा है। “कांग्रेस की हार की सेंचुरी बनाएंगे असम के लोग” पीएम मोदी ने कहा कि इस बार असम की जनता ने दो बड़े संकल्प लिए हैं-पहला, राज्य में भाजपा-एनडीए की हैट्रिक सुनिश्चित करना और दूसरा, कांग्रेस की हार की “सेंचुरी” पूरी करना। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली में बैठे कांग्रेस के “शाही परिवार” के नामदारों के हार का रिकॉर्ड भी असम के लोग ही बनाएंगे। BJP कार्यकर्ताओं को दी बधाई बीजेपी के स्थापना दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि बीजेपी “नेशन फर्स्ट” के मंत्र के साथ मां भारती की सेवा में समर्पित है। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है। “बीजेपी देती है रिपोर्ट कार्ड, कांग्रेस नहीं” पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी सरकार हमेशा अपनी उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखती है, जबकि कांग्रेस ऐसा करने से बचती है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी साफ नीयत से काम करती है और जनता को बताती है कि उनके लिए क्या किया गया। “विकसित असम की दिशा में बढ़ रहा राज्य” प्रधानमंत्री ने असम के लोगों से अपील करते हुए कहा कि उनका वोट “विकसित असम” की नींव को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी असम को उस ऊंचाई तक ले जाने के लिए काम कर रही है, जिसका राज्य के लोग हकदार हैं। उन्होंने आगे कहा, “पिछला दशक असम को डर और अस्थिरता से बाहर निकालने के लिए समर्पित था। अब आने वाला दशक असम को आत्मनिर्भर बनाने और उसकी पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का होगा।” किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस पर हमला पीएम मोदी ने किसानों के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले कांग्रेस सरकार के 10 साल में धान किसानों को केवल 4 लाख करोड़ रुपये का MSP मिला, जबकि पिछले 10 साल में उनकी सरकार ने 16 लाख करोड़ रुपये दिए। उन्होंने यह भी बताया कि 2013 में धान का MSP करीब 1,300 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर लगभग 2,370 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। साथ ही, असम की भाजपा सरकार भी इसमें अतिरिक्त बढ़ोतरी कर रही है। चुनावी माहौल हुआ तेज पीएम मोदी की इस रैली के साथ ही असम में चुनावी माहौल और गरमा गया है। सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं, लेकिन बीजेपी पूरी ताकत के साथ जीत की हैट्रिक लगाने की कोशिश में जुटी हुई है।
गुवाहाटी/धेमाजी: असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए प्रचार तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्य में कई रैलियों को संबोधित करते हुए भरोसा जताया कि बीजेपी के नेतृत्व वाला NDA एक बार फिर सरकार बनाएगा और हैट्रिक पूरी करेगा। पीएम मोदी का बड़ा बयान गोगामुख और धेमाजी में जनसभाओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि असम ने पिछले 10 वर्षों में अभूतपूर्व विकास देखा है। उन्होंने कहा, “इस बार का चुनाव विकसित भारत (Viksit Bharat) बनाने का संकल्प है। जनता का उत्साह बता रहा है कि NDA फिर से सत्ता में आएगा।” कांग्रेस पर तीखा हमला प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के बाद कांग्रेस को एक और बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी “हार का शतक” लगाने की ओर बढ़ रहे हैं। पीएम मोदी ने यह भी दावा किया कि असम में कांग्रेस की हार तय है। चुनावी रैलियां और कार्यक्रम पीएम मोदी ने आज धेमाजी और बिस्वनाथ जिलों में रैलियों को संबोधित किया सुबह 11 बजे गोगामुख में पहली रैली हुई इसके बाद बिस्वनाथ के बेहाली में दूसरी जनसभा आयोजित हुई वह 31 मार्च को ही डिब्रूगढ़ पहुंच चुके थे बीजेपी का ‘संकल्प पत्र’ (घोषणापत्र) बीजेपी ने असम चुनाव के लिए 31 वादों वाला ‘संकल्प पत्र’ जारी किया है, जिसमें विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर जोर दिया गया है। मुख्य वादे: असम को बाढ़ मुक्त बनाने के लिए 18,000 करोड़ रुपये का ‘बाढ़ मुक्त असम मिशन’ 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर असम को ‘ईस्टर्न गेटवे’ बनाना युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर किसानों की आय सुरक्षा मजबूत करना मछुआरों को आर्थिक सहायता महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण हर जिले में यूनिवर्सिटी और शिक्षा ढांचे को मजबूत करना गरीब परिवारों को मुफ्त राशन और सस्ती दरों पर जरूरी खाद्य सामग्री जनजातीय और स्वदेशी समुदायों के लिए भूमि और अधिकारों की सुरक्षा सामाजिक और जनजातीय मुद्दों पर फोकस 7 समुदायों को OBC सूची में शामिल कराने का प्रयास विभिन्न जनजातीय स्वायत्त परिषदों को संवैधानिक दर्जा देने की दिशा में काम चाय बागान और आदिवासी समुदायों के समग्र विकास का वादा चुनाव की तारीख असम में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को होने हैं, जिसे लेकर सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है।
असम: प्रधानमंत्री Narendra Modi के असम दौरे का शनिवार को दूसरा दिन है। PM सुबह Silchar पहुंचे, जहां उन्होंने करीब ₹23,550 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। अपने संबोधन में उन्होंने असम के विकास, नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। PM मोदी ने कहा कि सिलचर को बराक घाटी का गेटवे कहा जाता है, जहां इतिहास, भाषा, संस्कृति और उद्यम ने मिलकर एक अनोखी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि यहां बांग्ला, असमिया और विभिन्न जनजातीय परंपराओं की आवाज सुनाई देती है और यही विविधता इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत है। कांग्रेस पर तीखा हमला प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया कि Indian National Congress ने लंबे समय तक असम और नॉर्थ ईस्ट को नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीतियों ने यहां के युवाओं को गुमराह किया और उन्हें हिंसा व आतंकवाद के रास्ते पर धकेल दिया। PM ने कहा कि भाजपा की सरकार ने युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों, स्कॉलरशिप और कौशल विकास के नए अवसर खोले हैं। उनके मुताबिक, आज असम विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है और भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी अहम भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। “कांग्रेस झूठी रील बनाने की इंडस्ट्री चला रही” प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर सोशल मीडिया के जरिए गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने “झूठी रील बनाने की इंडस्ट्री” खोल रखी है। उन्होंने युवाओं से सतर्क रहने की अपील की और कहा कि कांग्रेस के पास देश के लिए कोई स्पष्ट विजन नहीं है। नॉर्थ ईस्ट को मिला नया कनेक्शन मोदी ने कहा कि पहले की सरकारों ने नॉर्थ ईस्ट को दिल्ली से और दिल से दूर रखा था, लेकिन भाजपा की “डबल इंजन सरकार” ने इस क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों से मजबूती से जोड़ा है। उनके मुताबिक आज नॉर्थ ईस्ट दक्षिण एशिया को जोड़ने वाला सेतु बनता जा रहा है। किसानों और चाय बागान श्रमिकों का जिक्र प्रधानमंत्री ने कहा कि असम के विकास में किसानों और चाय बागान श्रमिकों का बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत असम के किसानों को अब तक हजारों करोड़ रुपये की सहायता मिल चुकी है। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार की सराहना करते हुए कहा कि चाय बागानों में काम करने वाले हजारों परिवारों को भूमि अधिकार देकर उन्हें सुरक्षा और सम्मान देने का ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। बराक वैली बनेगी विकास का नया केंद्र मोदी ने कहा कि आने वाले समय में बराक वैली केवल कृषि उत्पादन के लिए ही नहीं बल्कि कृषि शिक्षा और रिसर्च के लिए भी जानी जाएगी। यहां नए एग्रीकल्चर कॉलेज के निर्माण की शुरुआत की गई है, जिससे युवाओं को कृषि स्टार्टअप और आधुनिक खेती के क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि असम में रेलवे कनेक्टिविटी और इलेक्ट्रिफिकेशन पर तेजी से काम हो रहा है और इसका बड़ा फायदा बराक घाटी को मिलेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में यह क्षेत्र टूरिज्म, उद्योग और कृषि विकास का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।