गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में शुक्रवार को पुलिस और कुख्यात दीपक नंदन गैंग के बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में चार शूटर मारे गए, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी SGT यूनिवर्सिटी के संस्थापक के बेटे के घर पर फिरौती के दबाव में फायरिंग करने पहुंचे थे। मुठभेड़ में क्राइम ब्रांच के तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। कंट्रोल रूम की सूचना के बाद शुरू हुई कार्रवाई पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक, कंट्रोल रूम को सूचना मिली थी कि एक महिंद्रा स्कॉर्पियो में कुछ हथियारबंद संदिग्ध सवार हैं। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच की टीम सुशांत लोक इलाके में पहुंची। इसी दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर व्यवसायी के घर के बाहर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस पर भी की फायरिंग पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर आरोपियों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने पुलिस टीम पर ही गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ में पांचों हमलावर गोली लगने से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने चार को मृत घोषित कर दिया, जबकि एक आरोपी का इलाज जारी है। तीन पुलिसकर्मी भी घायल फायरिंग के दौरान क्राइम ब्रांच के तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस के अनुसार, उनकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। विदेश से संचालित होता है गैंग प्रारंभिक जांच में पुलिस का कहना है कि मारे गए बदमाश विदेश से संचालित होने वाले कुख्यात दीपक नंदन गैंग से जुड़े थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, गैंग ने कथित तौर पर फिरौती के लिए व्यवसायी को निशाना बनाया था। हालांकि पुलिस अभी पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और गैंग के अन्य सदस्यों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। एफएसएल टीम जुटा रही साक्ष्य घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस उपायुक्त (अपराध) हितेश यादव और डीसीपी (पूर्व) संदीप कुमार वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। घटनास्थल को सील कर दिया गया है। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और तकनीकी टीम मौके से हथियार, कारतूस और अन्य साक्ष्य जुटाकर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। पुलिस करेगी विस्तृत जांच पुलिस का कहना है कि आरोपियों की पहचान, उनके आपराधिक रिकॉर्ड, फायरिंग की साजिश और गैंग के नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों में से एक को मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस के अनुसार, आरोपी को घटना से जुड़े सबूतों की बरामदगी के लिए एक सुनसान इलाके में ले जाया गया था। इसी दौरान उसने पुलिस की गिरफ्त से भागने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने की कोशिश की। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में आरोपी गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस जघन्य घटना ने पूरे इलाके में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। इससे पहले पुलिस ने मामले में आनंद सरदार, प्रभास मंडल और दिवाकर सरदार समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पीड़िता के परिवार से मुलाकात की मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को बारुईपुर पहुंचकर पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें त्वरित एवं निष्पक्ष न्याय का भरोसा दिलाया। इस दौरान राज्य के पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। क्या है मामला? यह मामला तब सामने आया जब शनिवार को लापता हुई बच्ची का शव रविवार सुबह रेलवे लाइन के पास एक तालाब से बरामद हुआ। शव मिलने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। मुख्यमंत्री ने मॉब लिंचिंग में जान गंवाने वाले युवक के परिजनों से भी मुलाकात कर सांत्वना दी। इस बीच स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि बच्ची के लापता होने की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस महानिदेशक ने स्पष्ट किया है कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस की कथित लापरवाही की भी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। फिलहाल इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सीतामढ़ी, एजेंसियां। बिहार के सीतामढ़ी जिले के रीगा थाना क्षेत्र में पुलिस और लूट की वारदातों में शामिल बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक आरोपी के पैर में गोली लगी, जबकि मौके से कुल पांच अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उनके पास से हथियार, कारतूस और वारदात में इस्तेमाल किए गए वाहन भी बरामद किए हैं। गुप्त सूचना पर पहुंची थी पुलिस पुलिस को सूचना मिली थी कि रीगा इलाके में कुछ बदमाश किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने इलाके की घेराबंदी की। खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ के दौरान एक बदमाश घायल हो गया और बाकी आरोपियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। हथियार और वाहन बरामद गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से एक पिस्तौल, कई जिंदा कारतूस, मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद की गई है। घायल आरोपी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि अन्य आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह किन-किन आपराधिक घटनाओं में शामिल रहा है। पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जांच सीतामढ़ी पुलिस के अनुसार गिरफ्तार बदमाशों का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है। प्रारंभिक जांच में गिरोह के सदस्यों के खिलाफ लूट, रंगदारी और हथियार अधिनियम से जुड़े कई मामलों की जानकारी मिली है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के बाद गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में सोना और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी का दौर जारी है। सोमवार, 20 अप्रैल को भी दोनों कीमती धातुओं के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम पर ₹347 बढ़कर ₹1,52,002 पहुंच गई, जबकि चांदी ₹1,214 महंगी होकर ₹2,51,000 प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई। लगातार बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के साथ-साथ आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों की भी चिंता बढ़ा दी है। इस साल रिकॉर्ड तेजी, हजारों रुपये महंगे हुए सोना-चांदी आईबीजेए के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में करीब ₹19,000 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, चांदी लगभग ₹21,000 प्रति किलो महंगी हो चुकी है। इस दौरान दोनों धातुओं ने रिकॉर्ड स्तर भी छुआ। 29 जनवरी को चांदी की कीमत ₹3.86 लाख प्रति किलो तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग को इस तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है। बड़े शहरों में भी ऊंचे दाम, खरीदारी से पहले बरतें सावधानी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, भोपाल और लखनऊ सहित देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1.55 लाख से ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने के बढ़ते दामों के बीच ग्राहकों को खरीदारी करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। केवल BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदें और खरीदारी से पहले विश्वसनीय स्रोतों से ताजा कीमत की पुष्टि अवश्य करें। इससे नकली आभूषण या गलत मूल्य वसूले जाने जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस और बदमाश के बीच हुई मुठभेड़ में एक लाख रुपये का इनामी अपराधी संजय उर्फ संजीव मारा गया। पुलिस के अनुसार, संजय 27 मई 2026 को पीजीआई थाना क्षेत्र में हुए चर्चित बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड का मुख्य शूटर था और लंबे समय से फरार चल रहा था। मुठभेड़ लखनऊ के इंदिरा नहर रोड पर हुई, जहां पुलिस ने उसे घेर लिया। जवाबी कार्रवाई में संजय मारा गया। पुलिस ने मौके से हथियार और अन्य सामान भी बरामद किया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड का था मुख्य आरोपी पुलिस के मुताबिक, संजय उर्फ संजीव 27 मई 2026 को पीजीआई थाना क्षेत्र में हुए बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड का मुख्य शूटर था। घटना के बाद से ही वह फरार था और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही थी। उसकी सूचना देने पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। कई जिलों में दर्ज थे गंभीर आपराधिक मामले पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, संजय के खिलाफ अंबेडकर नगर, बस्ती, अयोध्या सहित कई जिलों में हत्या, रंगदारी और अन्य गंभीर अपराधों के कई मामले दर्ज थे। वह लंबे समय से संगठित अपराध की गतिविधियों में सक्रिय था। संगठित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप जांच एजेंसियों के अनुसार, संजय का संबंध अंबेडकर नगर के कुख्यात अपराधियों दिलीप वर्मा और खान मुबारक के आपराधिक नेटवर्क से भी था। पुलिस का कहना है कि वह इस गिरोह के लिए कई बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुका था। पुलिस ने बताया बड़ी सफलता उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि संजय के मारे जाने से प्रदेश में सक्रिय संगठित अपराध के एक बड़े नेटवर्क को झटका लगा है। पुलिस अब उसके अन्य सहयोगियों और आपराधिक नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी है।
चतरा। झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र स्थित हडगड़ी जंगल में पुलिस और अपहरणकर्ताओं के बीच हुई मुठभेड़ में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने अपहृत छह ग्रामीणों को सकुशल मुक्त करा लिया, जबकि दो वयस्क आरोपियों समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। तीन अन्य नाबालिगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। ग्रामीणों का अपहरण कर मांगी थी एक लाख की फिरौती जानकारी के अनुसार, 18 जून की रात करीब 10:30 बजे हथियारबंद अपराधियों ने तेलियाडीह और गोवदा गांव में धावा बोलकर छह ग्रामीणों का अपहरण कर लिया था। इसके बाद सभी को जंगल में ले जाया गया। अपराधियों ने परिजनों को फोन कर खुद को एमसीसी (MCC) का सदस्य बताते हुए एक लाख रुपये की फिरौती मांगी और रकम नहीं देने पर बंधकों की हत्या की धमकी दी। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। सर्च ऑपरेशन के दौरान हुई मुठभेड़ सूचना मिलते ही एसपी अनिमेष नैथानी के निर्देश पर सिमरिया एसडीपीओ के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। पुलिस ने रात में ही जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जैसे ही पुलिस टीम अपराधियों के ठिकाने के करीब पहुंची, बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। कुछ देर चली मुठभेड़ के बाद पुलिस की घेराबंदी से घबराकर अपराधियों ने सभी बंधकों को छोड़ दिया और भागने लगे। पुलिस ने पीछा कर पांच आरोपियों को पकड़ लिया। हथियार और मोबाइल बरामद, फरार आरोपियों की तलाश जारी पुलिस ने जिन छह ग्रामीणों को सुरक्षित मुक्त कराया, उनमें विनोद साव, महेंद्र साव, संतोष साव, प्रदीप साव, बिंदु देवी और सोनी देवी शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों में रमेश कुमार गंझू और सतीश कुमार गंझू की पहचान हुई है, जबकि तीन नाबालिगों को भी हिरासत में लिया गया है। मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने देशी हथियार, पिस्टल जैसा दिखने वाला लाइटर, चाकू और लूटे गए मोबाइल फोन समेत कई सामान बरामद किए हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और फरार अपराधियों की तलाश में जंगल में लगातार सर्च अभियान चला रही है।
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में व्यापारी विनीत राय हत्याकांड के मुख्य आरोपियों में शामिल एक लाख रुपये का इनामी बदमाश कमलेश चौधरी उर्फ कमलेश बिंद पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। वह 29 मई को हुए चर्चित हत्याकांड के बाद से फरार चल रहा था और पुलिस उसकी लगातार तलाश कर रही थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि कमलेश कुर्था क्षेत्र में पवहारी बाबा आश्रम के पास छिपा हुआ है। इसके बाद पुलिस और स्वाट टीम ने इलाके में घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। रोकने पर पुलिस पर की फायरिंग पुलिस अधीक्षक डॉ. इरज राजा के अनुसार, बुधवार देर रात बिना नंबर प्लेट की मोटरसाइकिल पर सवार एक संदिग्ध को रोकने का प्रयास किया गया। इस दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें आरोपी घायल हो गया। बाद में उसकी पहचान कमलेश बिंद के रूप में हुई। अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित मुठभेड़ में घायल होने के बाद कमलेश को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दौरान स्वाट टीम प्रभारी और सब-इंस्पेक्टर रोहित मिश्रा भी गोली लगने से घायल हो गए। उनके कंधे में गोली लगी है और उनका इलाज जारी है। मौके से हथियार और बाइक बरामद पुलिस ने मुठभेड़ स्थल से एक अवैध .32 बोर पिस्तौल, कारतूस और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। बरामद सामान को कब्जे में लेकर आगे की जांच की जा रही है। कई गंभीर मामलों में था आरोपी पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, कमलेश के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, हमला, धमकी और शस्त्र अधिनियम सहित सात आपराधिक मामले दर्ज थे। उसका आपराधिक इतिहास वर्ष 2017 से जुड़ा हुआ था। हत्याकांड के बाद पुलिस ने चारों नामजद आरोपियों पर इनाम घोषित किया था। कमलेश और मुख्य आरोपी शंकर पांडे पर एक-एक लाख रुपये का इनाम रखा गया था। रंगदारी विवाद में हुई थी व्यापारी की हत्या जांच के अनुसार, 29 मई की रात गाजीपुर के होटल व्यवसायी विनीत राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। प्रारंभिक जांच में एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का मामला सामने आया था। बताया गया कि चार हमलावर दो मोटरसाइकिलों पर होटल पहुंचे थे। बीयर खरीदने के बहाने वे होटल के गेट तक पहुंचे और फिर विनीत राय पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जान बचाने के लिए भागते समय भी हमलावरों ने विनीत राय पर कई राउंड फायरिंग की। गंभीर रूप से घायल व्यापारी को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अन्य आरोपी अभी भी फरार पुलिस के अनुसार, इस मामले के अन्य आरोपी शंकर पांडे, सोनू यादव और मोनू त्रिपाठी अभी भी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और पुलिस विभिन्न स्थानों पर तलाश अभियान चला रही है।
चक्रधरपुर। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर अनुमंडल के पोड़ाहाट जंगल में केड़ाबीर के पास मंगलवार की सुबह सुरक्षा बल और नक्सलियों के बीच घंटों मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में अब तक किसी नक्सली के मारे जाने की खबर सामने नहीं आई है। यह घटना सोनुवा थाना अंतर्गत केड़ाबीर इलाके में हुई। नक्सलियों का भारी सामान बरामद सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह ने जानकारी दी है कि मुठभेड़ स्थल की गहन तलाशी के दौरान नक्सलियों के दैनिक उपयोग की कई सामग्री और जरूरी सामान बरामद किए गए हैं। आईजी ने स्पष्ट किया कि इस मुठभेड़ में फिलहाल किसी भी नक्सली के मारे जाने की पुष्टि नहीं हुई है। मिसिर बेसरा के दस्ते की तलाश खुफिया जानकारी के अनुसार, यह मुठभेड़ प्रतिबंधित नक्सली संगठन के मिसिर बेसरा के दस्ते के साथ हुई है। लंबे समय से पोड़ाहाट और कोल्हान के जंगलों में मिसिर बेसरा के दस्ते की सक्रियता देखी जा रही थी, जिसे देखते हुए सुरक्षा बलों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस इस दस्ते की तलाश में लगातार अभियान चला रही है।
मोतिहारी: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में सोमवार देर रात पुलिस और अपराधियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में दो कुख्यात बदमाश मारे गए, जबकि एक STF जवान शहीद हो गए। यह एनकाउंटर चकिया थाना क्षेत्र के रामडीहा गांव में रात करीब 2:30 बजे हुआ, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। धमकी के बाद एक्शन में आई पुलिस पुलिस के मुताबिक, कुख्यात अपराधी कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे ने चकिया थाने के अपर थानाध्यक्ष को नेपाल के नंबर से फोन कर खुली चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि “शहर अब उनकी गुंडई देखेगा” और 10-15 पुलिसकर्मियों की हत्या की धमकी भी दी थी। इसी कॉल को ट्रेस करते हुए STF और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए रामडीहा गांव में घेराबंदी की। घेराबंदी होते ही शुरू हुई ताबड़तोड़ फायरिंग जैसे ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, अपराधियों ने सरेंडर करने के बजाय अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी मोर्चा संभाला, जिससे मुठभेड़ तेज हो गई। इस दौरान STF के जवान श्रीराम यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी शहादत से पूरे पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई है। जवाबी कार्रवाई में दोनों बदमाश ढेर पुलिस की जवाबी फायरिंग में कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे मौके पर ही मारे गए। दोनों के खिलाफ आर्म्स एक्ट समेत कई आपराधिक मामले दर्ज थे। हालांकि, अंधेरे का फायदा उठाकर उनके कुछ साथी मौके से फरार होने में सफल रहे। घटनास्थल से हथियार और अन्य संदिग्ध सामान बरामद होने की संभावना जताई जा रही है। पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। DIG और SP के नेतृत्व में पूरे चकिया क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए सघन तलाशी अभियान चला रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को खत्म किया जाएगा। नेपाल सीमा से जुड़ा अपराध का नेटवर्क मोतिहारी का यह इलाका नेपाल सीमा के करीब होने के कारण संवेदनशील माना जाता है। अक्सर अपराधी वारदात को अंजाम देकर सीमा पार फरार हो जाते हैं, जिससे पुलिस के लिए चुनौती बढ़ जाती है। कानून-व्यवस्था पर सख्त संदेश इस एनकाउंटर को पुलिस की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। हालांकि STF जवान श्रीराम यादव की शहादत ने इस सफलता को दर्दनाक बना दिया है। पुलिस ने साफ किया है कि अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
गुप्त सूचना पर पुलिस का ऑपरेशन झारखंड के धनबाद में पुलिस ने कुख्यात अपराधी प्रिंस खान गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके तीन गुर्गों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई भागाबांध ओपी क्षेत्र में की गई, जहां पुलिस और अपराधियों के बीच हुई गोलीबारी में तीनों बदमाश घायल हो गए। घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि प्रिंस खान गिरोह के कुछ सदस्य इलाके में मौजूद हैं और किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। सूचना मिलते ही धनबाद पुलिस ने इलाके में सघन तलाशी अभियान शुरू किया और संदिग्धों की घेराबंदी कर दी। पुलिस को देखते ही अपराधियों ने की फायरिंग पुलिस की घेराबंदी के दौरान जब संदिग्ध अपराधियों ने पुलिस को अपने करीब आते देखा, तो उन्होंने मौके से भागने की कोशिश की। इसी दौरान अपराधियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ हो गई। इस कार्रवाई में गिरोह के तीन बदमाश घायल हो गए। पुलिस ने तुरंत उन्हें पकड़कर अस्पताल पहुंचाया, जहां फिलहाल उनका इलाज चल रहा है। दो को गोली लगी, एक का पैर टूटा पुलिस के अनुसार मुठभेड़ के दौरान दो अपराधियों को गोली लगी, जबकि तीसरा बदमाश भागने के दौरान घायल हो गया। बताया जा रहा है कि एक आरोपी छत से कूदकर भागने की कोशिश कर रहा था, उसी दौरान उसका पैर टूट गया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। घायल आरोपियों की पहचान पुलिस ने मुठभेड़ में घायल हुए तीनों अपराधियों की पहचान कर ली है। इनमें अमन सिंह उर्फ कुबेर (पलामू निवासी) विक्की डोम (धनबाद निवासी) अफजल उर्फ अमन (वासेपुर निवासी) शामिल हैं। इनमें अमन सिंह और विक्की डोम को गोली लगी है, जबकि अफजल उर्फ अमन का पैर गिरने से टूट गया। घटनास्थल से हथियार और कारतूस बरामद मुठभेड़ के बाद पुलिस ने इलाके की तलाशी ली। इस दौरान आरोपियों के पास से हथियार और कई जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इन हथियारों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल पहले किन-किन अपराधों में किया गया था। प्रिंस खान गिरोह से जुड़े हैं आरोपी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी धनबाद के वासेपुर इलाके के फरार अपराधी प्रिंस खान के करीबी बताए जा रहे हैं। प्रिंस खान लंबे समय से फरार है और उस पर धनबाद व आसपास के क्षेत्रों में रंगदारी, धमकी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। गिरोह के नेटवर्क की तलाश में पुलिस फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से गिरोह के नेटवर्क और अन्य सदस्यों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। पुलिस ने गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश भी तेज कर दी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।