Public Safety

West Bengal launches the Durga Suraksha Squad, women's help desks, cyber crime help desks, and the Dial-112 emergency response initiative to strengthen law enforcement and women's safety.
पश्चिम बंगाल में ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’ की शुरुआत, महालया से शुरू होगी डायल-112 सेवा; 5 मिनट में पुलिस पहुंचाने का लक्ष्य

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत करने और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई नई पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने नबान्न सभागार से ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’, साइबर क्राइम हेल्प डेस्क और महिला हेल्प डेस्क का शुभारंभ किया। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि महालया से राज्यभर में डायल-112 आपातकालीन सेवा शुरू होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि 112 पर सूचना मिलने के बाद पुलिस किसी भी थाना क्षेत्र में पांच मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचे। क्या है ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’? ‘दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड’ महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए गठित एक विशेष पुलिस इकाई है। यह टीम सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों, कॉलेजों और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त करेगी तथा महिला सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करेगी। सरकार के अनुसार, इस स्क्वाड का उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना है। एक साल में 5 मिनट रिस्पॉन्स टाइम का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल में पुलिस की औसत प्रतिक्रिया समय लगभग तीन घंटे है, जबकि गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पुलिस औसतन छह मिनट के भीतर मौके पर पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार अगले एक वर्ष के भीतर पश्चिम बंगाल में भी पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम घटाकर पांच मिनट करने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। इसके लिए इस वर्ष के बजट में प्रत्येक थाने को डायल-112 सेवा के लिए एक वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। अगले बजट में इन वाहनों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। 500 थानों में महिला हेल्प डेस्क सरकार ने राज्य के 500 पुलिस थानों में महिला हेल्प डेस्क की शुरुआत भी की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि महिलाओं से जुड़े मामलों में किसी भी शिकायत को नजरअंदाज न किया जाए और प्रत्येक शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साइबर अपराध से निपटने के लिए विशेष हेल्प डेस्क राज्य के सभी थानों में साइबर क्राइम हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए हैं। इनका उद्देश्य ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड से जुड़े मामलों की त्वरित शिकायत दर्ज करना और जांच प्रक्रिया को तेज करना है। पुलिस के आधुनिकीकरण का भरोसा मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और उन्हें आधुनिक तकनीक से लैस करने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस बल को राष्ट्रीय स्तर की आधुनिक एजेंसियों के अनुरूप विकसित किया जाएगा और पुलिस के कामकाज में किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होने दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाना और आम नागरिकों को तेज एवं भरोसेमंद पुलिस सहायता उपलब्ध कराना है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
women crime
महिलाओं में बढ़ते अपराध पर क्या कहते है विशेषज्ञ?

नई दिल्ली, एजेंसियां। हाल के दिनों में महिलाओं से जुड़े कुछ हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों ने समाज में नई बहस छेड़ दी है। सोनम रघुवंशी, रिया रस्तोगी और सिया गोयल जैसे मामलों के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या महिलाओं में आपराधिक प्रवृत्ति बढ़ रही है। हालांकि मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ चर्चित मामलों के आधार पर सभी महिलाओं के व्यवहार को नहीं आंका जा सकता। विशेषज्ञ के अनुसार, अपराध का किसी व्यक्ति के जेंडर से सीधा संबंध नहीं होता। जिस तरह पुरुषों द्वारा किए गए अपराधों के लिए पूरी पुरुष आबादी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, उसी तरह कुछ महिलाओं के अपराधों के आधार पर सभी महिलाओं को कटघरे में खड़ा करना भी उचित नहीं है। उनके अनुसार यह मुद्दा नैतिक मूल्यों, व्यक्तिगत परिस्थितियों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा है।   तनाव, मानसिक आघात और सामाजिक दबाव बन सकते हैं कारण विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में हिंसक या आपराधिक व्यवहार अचानक विकसित नहीं होता। इसके पीछे लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव, बचपन या जीवन में मिले मानसिक आघात (ट्रॉमा), भावनात्मक असंतुलन, नशे की लत, कुछ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, व्यक्तित्व संबंधी विकार और सामाजिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।   इसके अलावा घरेलू हिंसा का अनुभव, आर्थिक दबाव, रिश्तों में लगातार तनाव, अन्याय की भावना और समाज में हिंसा को सामान्य मानने की प्रवृत्ति भी किसी व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती आक्रामकता भी लोगों की सोच और प्रतिक्रिया को प्रभावित कर रही है।   टॉक्सिक रिश्ते और नकारात्मक संगत का भी असर साइकोलॉजिस्ट के मुताबिक कई मामलों में महिलाएं अपने जीवनसाथी या प्रेमी के प्रभाव में आकर अपराध का हिस्सा बन जाती हैं। ऐसे मामलों में 'टॉक्सिक रिलेशनशिप' और गलत संगत बड़ी भूमिका निभाते हैं। आधुनिक जीवनशैली, तकनीक तक आसान पहुंच और सामाजिक बदलावों ने महिलाओं की भागीदारी कई क्षेत्रों में बढ़ाई है, जिसका प्रभाव अपराध के पैटर्न में भी दिखाई देता है।   हिंसा को जेंडर नहीं, व्यवहार के रूप में समझने की जरूरत विशेषज्ञों का कहना है कि गुस्सा और आक्रामकता किसी एक जेंडर की विशेषता नहीं, बल्कि मानवीय व्यवहार है। इसे जैविक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और पारिवारिक कारक मिलकर प्रभावित करते हैं। इसलिए हिंसा की घटनाओं को केवल महिला या पुरुष होने के नजरिए से देखने के बजाय उनके वास्तविक कारणों को समझना अधिक जरूरी है।   मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच, भावनात्मक समस्याओं की समय रहते पहचान, परिवार और समाज का सहयोग, तनाव प्रबंधन और स्वस्थ संवाद जैसी पहलें हिंसक व्यवहार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।   जागरूकता और रिपोर्टिंग भी बढ़ी है विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि महिलाओं की शिक्षा, जागरूकता और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी बढ़ने से अपराधों की रिपोर्टिंग पहले की तुलना में अधिक हो रही है। वहीं सोशल मीडिया के कारण हर घटना तेजी से लोगों तक पहुंचती है, जिससे कई बार यह धारणा बन जाती है कि अपराध अचानक बहुत बढ़ गए हैं। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले लंबे समय के आंकड़ों और सामाजिक परिस्थितियों का संतुलित विश्लेषण करना आवश्यक है।

anjali kumari जुलाई 1, 2026 0
Punjab politics
क्या पंजाब बनेगा अगला बंगाल?

रांची। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अब पंजाब में संगठन विस्तार और चुनावी जमीन तैयार करने में जुटी है। 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी राज्य में अपनी रणनीति को धार देने में लगी है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या पंजाब भी आने वाले समय में बंगाल की तरह भाजपा और विपक्ष के बीच सीधी राजनीतिक लड़ाई का केंद्र बनेगा। बीजेपी पंजाब में कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या, किसानों से जुड़े मुद्दों और विकास के एजेंडे को प्रमुखता से उठा रही है। पार्टी का प्रयास शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी अपने संगठन को मजबूत करना है। इसके लिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और नए चेहरों को जोड़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।   राघव चड्ढा फैक्टर पर नजर पंजाब की राजनीति में राघव चड्ढा का नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आम आदमी पार्टी के प्रमुख चेहरों में रहे राघव चड्ढा को लेकर चल रही अटकलों ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दी है। हालांकि, उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी बड़े बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद उनका नाम पंजाब की बदलती सियासी तस्वीर में अहम माना जा रहा है।   क्या पंजाब में दोहराएगा बंगाल वाला समीकरण? विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियां पश्चिम बंगाल से काफी अलग हैं। यहां आम आदमी पार्टी सत्ता में है, जबकि शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और बीजेपी चार प्रमुख ताकतों के रूप में मैदान में हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए चुनौती आसान नहीं होगी। फिर भी पार्टी संगठन का विस्तार, नए सामाजिक समीकरण और आक्रामक चुनावी रणनीति के जरिए खुद को मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है।आप के दो पूर्व नेता रेस में हैं।     पंजाब की सियासी ताकत की बात करे तो पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। विधानसभा में बीजेपी के दो MLA हैं।पंजाब में लोकसभा की कुल सीटें 13 हैं। बीजेपी के पास कोई सीट नहीं है।पंजाब में राज्यसभा की कुल सीटें सात हैं। इनमें छह बीजेपी के पास हैं।   आप के दो पूर्व नेता हैं रेस में इधर पश्चिम बंगाल की जीत के बाद पंजाब को गंभीरता से ले रही बीजेपी राज्य को केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल में अधिक तवज्जो दे सकती है। चर्चा है कि पंजाब में AAP छोड़कर आए नेताओं को इनाम मिल सकता है। इनमें सेलिब्रेटी फेस राघव चड्ढा का नाम सबसे आगे है। उनके साथ अशोक मित्तल (लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी) का भी नाम चल रहा है। चर्चा है कि दोनों में किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन अभी फैसला नहीं हुआ है। रवनीत बिट्टू को बीजेपी चुनावों में झोंकना चाहती है। उनकी जगह पर हाल ही में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद बने तरुण चुघ को लाया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कद्दावर नेता चुघ पंजाब चुनाव में पार्टी को मजबूती देंगे। वह पंजाब से ही आते हैं।   अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि 2027 के विधानसभा चुनाव तक पंजाब की सियासत किस ओर करवट बैठती है ये तो आने वाला  वक्त  ही बताएगा। और क्या बीजेपी राज्य में वैसी ही राजनीतिक बढ़त हासिल कर पाएगी जैसी उसने बंगाल या अन्य राज्यों में दर्ज की है?

anjali kumari जून 30, 2026 0
Ketan Agarwal Murder Case
केतन मर्डर केस: चेतन चौधरी का होगा गेट एनालिसिस, जांच में खुल सकते हैं कई बड़े राज

पुणे, एजेंसियां। चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी चेतन चौधरी का गेट (Gait) एनालिसिस कराने का फैसला लिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस वैज्ञानिक परीक्षण से हत्या वाले दिन चेतन की गतिविधियों और घटनास्थल पर उसकी मौजूदगी से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। इसी कड़ी में पुलिस मंगलवार को चेतन को लेकर एक बार फिर लोहागढ़ किला पहुंची, जहां पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (क्राइम सीन रीक्रिएशन) किया जाएगा।   पुलिस हिरासत पांच दिन और बढ़ी सोमवार को महाराष्ट्र की एक अदालत ने मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत पांच दिन के लिए बढ़ा दी। पुलिस ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ घटनास्थल पर साक्ष्यों की पुष्टि के लिए उनका पुलिस हिरासत में रहना जरूरी है।   पासपोर्ट जलाने का भी आरोप पुलिस जांच के अनुसार, सिया गोयल ने कथित तौर पर केतन का पासपोर्ट चोरी कर उसे फाड़कर जला दिया था। दावा है कि परिवार की प्रस्तावित बाली यात्रा को रोकने और केतन के साथ विदेश जाने से बचने के लिए उसने ऐसा किया। जांच में कार चालक के बयान को भी अहम माना जा रहा है, जिसने बताया कि यात्रा के दौरान सिया कुछ देर के लिए अकेले कार तक गई थी।   हत्या की साजिश के मिले संकेत पुलिस का आरोप है कि 18 जून को लोहागढ़ किले पर केतन अग्रवाल को खाई में धक्का देकर हत्या की गई। शुरुआत में इसे हादसा माना गया था, लेकिन बाद की जांच में हत्या की आशंका सामने आई। पुलिस के मुताबिक, सिया और चेतन के बीच पिछले छह महीनों में 2,000 से अधिक फोन कॉल और लगभग 238 घंटे की बातचीत हुई थी। जांच एजेंसियों को शक है कि इन्हीं बातचीत के दौरान कथित साजिश रची गई।   पुलिस यह भी दावा कर रही है कि घटना से पहले भी केतन को खाई में धक्का देने की एक असफल कोशिश की गई थी। अब गेट एनालिसिस, क्राइम सीन रीक्रिएशन और अन्य फॉरेंसिक जांच के आधार पर पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

abhishek singh जून 30, 2026 0
Jamshedpur bus fire
जमशेदपुर में खड़ी बस में लगी आग, समय रहते टला बड़ा नुकसान

जमशेदपुर। जमशेदपुर के मानगो स्थित आजादनगर थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब ओल्ड पुरुलिया रोड नंबर-1 पर सड़क किनारे खड़ी एक यात्री बस में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और कुछ ही मिनटों में पूरी बस धू-धू कर जलने लगी। आग की ऊंची लपटों और धुएं के गुबार को देखकर आसपास के लोग मौके पर जुट गए और तत्काल पुलिस, अग्निशमन विभाग तथा बिजली विभाग को सूचना दी गई।   कुछ ही देर में बस जलकर हुई खाक प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस रोजाना की तरह रात में ड्यूटी समाप्त होने के बाद सड़क किनारे खड़ी की गई थी। बुधवार सुबह अचानक बस से धुआं निकलता दिखाई दिया, जिसके बाद आग तेजी से फैल गई। जब तक दमकल की टीम मौके पर पहुंचती, तब तक बस लगभग पूरी तरह जल चुकी थी। आग बुझाने के बाद बस का केवल लोहे का ढांचा ही बचा रह गया।   बिजली व्यवस्था भी हुई प्रभावित बस में लगी आग की चपेट में पास का बिजली पोल और बिजली के तार भी आ गए। आग की गर्मी और लपटों से बिजली के उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए, जिसके कारण आसपास के इलाके की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। घटना के बाद बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षति का आकलन शुरू किया। विभाग के कर्मचारी जल्द से जल्द बिजली बहाल करने में जुटे हुए हैं।   बड़ा हादसा टला, नहीं हुई कोई जनहानि राहत की बात यह रही कि आग लगने के समय बस में कोई यात्री या चालक मौजूद नहीं था। इसके कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि आग आसपास की दुकानों और रिहायशी क्षेत्रों तक पहुंच सकती थी, लेकिन समय रहते दमकल कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया।   आग लगने के कारणों की जांच शुरू घटना के बाद आजादनगर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी या फिर इसके पीछे किसी असामाजिक तत्व की भूमिका है। फिलहाल अधिकारियों ने सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच शुरू कर दी है।

Unknown जून 3, 2026 0
Alice Capsey and Heather Knight celebrate England’s series-winning victory against India in the decisive T20 match.
कैप्सी और हीथर नाइट के तूफान में उड़ी टीम इंडिया, निर्णायक टी20 हारकर इंग्लैंड ने 2-1 से जीती सीरीज

भारतीय महिला क्रिकेट टीम को इंग्लैंड दौरे पर बड़ा झटका लगा है। तीन मैचों की टी20 सीरीज के निर्णायक मुकाबले में मेजबान इंग्लैंड ने भारत को 6 विकेट से हराकर सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। कप्तान हरमनप्रीत कौर की शानदार अर्धशतकीय पारी के बावजूद भारतीय टीम जीत दर्ज नहीं कर सकी और टांटन में खेले गए मुकाबले में इंग्लैंड ने 9 गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया। हरमनप्रीत की कप्तानी पारी भी नहीं बचा सकी टीम टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद प्रभावशाली नहीं रही, लेकिन कप्तान हरमनप्रीत कौर ने जिम्मेदारी संभालते हुए शानदार बल्लेबाजी की। उन्होंने 40 गेंदों में नाबाद 56 रन बनाए और टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यस्तिका भाटिया और दीप्ति शर्मा ने भी 32-32 रनों का उपयोगी योगदान दिया। वहीं जेमिमा रोड्रिग्स ने अंतिम ओवरों में तेज बल्लेबाजी करते हुए 19 गेंदों पर 29 रन जोड़े। इन पारियों की बदौलत भारत ने 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 180 रन बनाए। 38 रन पर 3 विकेट के बाद भी इंग्लैंड ने पलटा मैच 181 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही। टीम ने सिर्फ 38 रन पर 3 विकेट गंवा दिए थे और ऐसा लग रहा था कि भारत मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है। लेकिन इसके बाद एलिस कैप्सी और हीथर नाइट ने भारतीय गेंदबाजों पर जोरदार हमला बोल दिया। दोनों बल्लेबाजों ने शानदार साझेदारी करते हुए मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। कैप्सी ने सिर्फ 43 गेंदों में 82 रनों की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें 9 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। दूसरी ओर अनुभवी बल्लेबाज हीथर नाइट ने 42 गेंदों में नाबाद 70 रन बनाए और अंत तक टिककर टीम को जीत दिलाई। उनकी पारी में 10 चौके शामिल थे। इंग्लैंड ने 18.3 ओवर में 4 विकेट खोकर 184 रन बनाए और मैच के साथ-साथ सीरीज पर भी कब्जा जमा लिया। भारतीय गेंदबाजों ने किया निराश भारत की हार का सबसे बड़ा कारण गेंदबाजी रही। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कुल छह गेंदबाजों का इस्तेमाल किया, लेकिन अरुंधति रेड्डी और क्रांति गौड़ के अलावा कोई भी गेंदबाज प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं रहा। रेड्डी और क्रांति ने दो-दो विकेट लेकर भारत को शुरुआती सफलता दिलाई, लेकिन बाकी गेंदबाज इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में नाकाम रहे। इसी का फायदा उठाकर कैप्सी और नाइट ने मैच भारत की पकड़ से छीन लिया। सीरीज का निर्णायक मोड़ एक समय इंग्लैंड मुश्किल में दिखाई दे रहा था, लेकिन एलिस कैप्सी और हीथर नाइट की शानदार बल्लेबाजी ने भारतीय टीम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। भारत के लिए यह हार इसलिए भी निराशाजनक रही क्योंकि 180 रन का स्कोर टी20 क्रिकेट में अक्सर जीत दिलाने वाला माना जाता है। इंग्लैंड ने इस जीत के साथ न सिर्फ मैच जीता बल्कि तीन मैचों की रोमांचक टी20 सीरीज भी 2-1 से अपने नाम कर ली।  

surbhi जून 3, 2026 0
Ramdev Oraon Surrenders
25 साल बाद कानून के सामने आत्मसमर्पण किया कुख्यात अपराधी रामदेव उरांव

गुमला। गुमला जिले में करीब 25 वर्षों से फरार चल रहा कुख्यात अपराधी रामदेव उरांव आखिरकार मुख्यधारा में लौट आया है। हत्या, अपहरण, रंगदारी, गोलीबारी और आगजनी जैसे गंभीर मामलों में वांछित रामदेव उरांव ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस इसे एक बड़ी सफलता मान रही है। लंबे समय से उसकी तलाश की जा रही थी और वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ था।   दो दर्जन से अधिक मामलों में था आरोपी जानकारी के अनुसार, रामदेव उरांव के खिलाफ विभिन्न थानों में दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर हत्या, रंगदारी वसूलने, अपहरण और अन्य संगीन अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं। वर्ष 2002 के आसपास से वह आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय था और गुमला सहित आसपास के कई क्षेत्रों में उसका प्रभाव माना जाता था। उसके नाम से लोगों में भय का माहौल बना रहता था।   पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद लिया फैसला सूत्रों के मुताबिक, लगातार पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा एजेंसियों के बढ़ते दबाव के कारण रामदेव उरांव ने सरेंडर करने का निर्णय लिया। पिछले कुछ समय से पुलिस उसके नेटवर्क को कमजोर करने और उसके सहयोगियों पर नजर रखने में जुटी हुई थी। इसी दौरान उसने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई और अंततः पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।   पूछताछ में खुल सकते हैं कई राज पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रामदेव उरांव से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। उसके नेटवर्क, सहयोगियों और पुराने आपराधिक मामलों से जुड़े कई रहस्यों से पर्दा उठने की संभावना है। जांच एजेंसियां अब उससे जुड़े मामलों की विस्तृत पड़ताल करने की तैयारी में हैं।   लोगों ने ली राहत की सांस रामदेव उरांव के सरेंडर के बाद स्थानीय लोगों ने राहत महसूस की है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लंबे समय से उसके नाम का खौफ बना हुआ था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि उसके आत्मसमर्पण के बाद इलाके में कानून-व्यवस्था और मजबूत होगी तथा शांति और सुरक्षा का माहौल बेहतर बनेगा।

Unknown मई 30, 2026 0
Stray dogs sitting near public roads as Supreme Court issues strict order on dog bite cases.
आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, आदेश में बदलाव से इनकार; डॉग लवर्स और NGO की याचिकाएं खारिज

देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों को लेकर Supreme Court of India ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी अपने पहले के आदेश में बदलाव करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने डॉग लवर्स और विभिन्न NGO की याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ कहा कि 7 नवंबर 2025 के अंतरिम आदेश में कोई संशोधन नहीं किया जाएगा। जस्टिस Vikram Nath, Sandeep Mehta और N. V. Anjaria की बेंच ने 29 जनवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। “कुत्तों के काटने की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते” फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देशभर में बच्चों और आम लोगों पर आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं बेहद गंभीर हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा, “ABC फ्रेमवर्क 2001 में शुरू किया गया था, लेकिन आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के अनुसार संसाधनों को बढ़ाने और व्यवस्थित योजना बनाने में गंभीर कमी रही है। नसबंदी और टीकाकरण अभियान बिना समुचित योजना के चलाए गए।” स्कूल, अस्पताल और हाईवे से हटाने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए गए अंतरिम आदेश में राज्यों और National Highways Authority of India (NHAI) को हाईवे, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक संस्थानों के आसपास से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जो कुत्ते आक्रामक नहीं हैं और रेबीज से संक्रमित नहीं हैं, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। कुत्ता काटे तो जिम्मेदारी किसकी? पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि किसी आवारा कुत्ते के हमले में किसी व्यक्ति की चोट या मौत होती है, तो संबंधित नगर निकाय के साथ-साथ नियमित रूप से कुत्तों को खाना खिलाने वालों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। कोर्ट ने कहा, “ऐसा नहीं हो सकता कि कोई व्यक्ति रोज कुत्तों को खाना खिलाए, लेकिन उनके काटने पर उसकी कोई जिम्मेदारी न हो।” असम के आंकड़ों पर कोर्ट ने जताई चिंता सुनवाई के दौरान कोर्ट ने असम में डॉग बाइट के मामलों पर चिंता जताई। अदालत के अनुसार, वर्ष 2024 में राज्य में 1.66 लाख डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए, जबकि 2025 में केवल जनवरी महीने में ही 20,900 घटनाएं सामने आईं। कोर्ट ने इन आंकड़ों को “बेहद भयावह” बताते हुए राज्यों को स्पष्ट और ठोस कार्ययोजना पेश करने की चेतावनी दी। कैसे शुरू हुआ मामला? यह मामला 28 जुलाई 2025 को शुरू हुआ था, जब सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों और मौतों पर स्वतः संज्ञान लिया था। उस दौरान सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें आवारा कुत्ते बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर हमला करते दिखाई दे रहे थे। इसके बाद 11 अगस्त 2025 को कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में आठ सप्ताह के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया था। हालांकि इस आदेश के खिलाफ डॉग लवर्स और पशु अधिकार संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे। बाद में 22 अगस्त 2025 को कोर्ट ने अपने आदेश में आंशिक बदलाव किया था।  

surbhi मई 19, 2026 0
unsafe transport
मालवाहक टेंपो में ढोये जा रहे स्कूली बच्चे

रांची। यह नजारा रांची के पुरुलिया रोड का है, जहां कई प्रतिष्ठित स्कूल अवस्थित हैं। यहां सड़क पर मालवाहक टेंपो में बच्चों को ढोया जा रहा है। ये बच्चे एक प्रतिष्ठित स्कूल के छात्र हैं, जो छुट्टी के बाद स्कूल से घर लौट रहे हैं। यह स्थिति कितनी खतरनाक है, आप अनुमान लगा सकते हैं। टेंपो में लटके बच्चे को देख दिल दहल जाता है। यह किसी बड़ी अनहोनी को आमंत्रण देने वाला दृश्य है। रांची की भीड़ भाड़ वाली सड़क पर इस लापरवाही को रोकनेवाला कोई नहीं है। पुलिस प्रशासन का ध्यान भी इस ओर नहीं जाता। ऐसे दृश्य हादसों को आमंत्रण देने वाले हैं। उम्मीद है पुलिस प्रशासन ऐसे मामलों को रोकने की पहल करेगा और संबंधित स्कूल के खिलाफ भी एक्शन लेगा।

Unknown मई 4, 2026 0
Vikramshila Bridge collapse
बिहारः विक्रमशिला पुल ध्वस्त, 133 नंबर पाया  गंगा नदी में गिरा, जांच के आदेश

भागलपुर, एजेंसियां। बिहार में  भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु ध्वस्त हो गया है। रविवार देर रात करीब 12:45 बजे पुल के पिलर नंबर 133 के पास सड़क का एक बड़ा स्लैब अचानक टूटकर गंगा नदी में गिर गया। इसके बाद पुल के भागलपुर छोर की ओर शुरुआती हिस्से में धंसान हुआ और बताया जा रहा है कि करीब 33 मीटर हिस्सा गंगा में समा गया। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। प्रशासन ने तत्काल पुल पर आवागमन बंद कर दिया। इधर, सरकार ने घटना की जांच का आदेश दिया है।    पुल पर मौजूद वाहन सुरक्षित हटाए गए घटना के समय पुल पर कई वाहन मौजूद थे। हालांकि, मौके पर तैनात ट्रैफिक थानेदार और पुलिस बल की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी वाहनों को पीछे हटाया और लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस घटना में किसी प्रकार की जान-माल की क्षति नहीं हुई है।   डीएम और एसएसपी मौके पर पहुंचे घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी मौके पर पहुंचे और पुल का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा को देखते हुए विक्रमशिला सेतु पर आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया है। डीएम ने बताया कि पुल के दोनों छोर पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को जांच के लिए बुलाया गया है। डीएम नवल किशोर चौधरी ने कहा कि सुरक्षा के मद्देनजर विक्रमशिला सेतु पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पुल के दोनों छोर पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को जांच के लिए बुलाया गया है।   यातायात डायवर्ट, वैकल्पिक मार्ग का निर्देश इस मामले को लेकर एसएसपी प्रमोद यादव ने बताया कि पुल पर यातायात पूरी तरह बंद है और वाहनों को वैकल्पिक मार्गों की ओर डायवर्ट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नवगछिया की ओर जाने वाले वाहनों को सुल्तानगंज होते हुए मुंगेर पुल की ओर भेजा जा रहा है। इसके लिए आवश्यक पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। एसएसपी ने आम लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और प्रशासन द्वारा बताए गए रास्ते का ही उपयोग करें।   प्रशासन की अपील प्रशासन ने भागलपुर वासियों और यात्रियों से अपील की है कि फिलहाल विक्रमशिला सेतु की ओर न जाएं। पुल की तकनीकी जांच पूरी होने और मरम्मत कार्य शुरू होने तक आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा।

Unknown मई 4, 2026 0
Jharkhand Weather update
Jharkhand Weather update: तेज तूफान फिर झकझोरेगा झारखंड को, 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

रांची। झारखंड एक बार फिर तेज तूफान की चपेट में आने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, तेज तूफान झारखंड में दस्तक देनेवाला है।  4-5 मई को तेज आंधी और बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 4 और 5 मई को राज्य के कई जिलों में मौसम अचानक बिगड़ सकता है। इन दिनों आसमान में बादल छाए रहेंगे और कई जगहों पर 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चल सकती है। इसके साथ ही मेघ गर्जन, वज्रपात और हल्की से मध्यम बारिश की भी संभावना जताई गई है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।   कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी 4 मई को रांची, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, जामताड़ा, दुमका, देवघर, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ में बादल गरजने, तेज हवा चलने और हल्की बारिश के आसार हैं। वहीं 5 मई को रांची के साथ-साथ खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, कोडरमा, देवघर, जामताड़ा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा और साहिबगंज में 50–60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है। इसी को देखते हुए मौसम विभाग ने इन दोनों दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है

Unknown मई 4, 2026 0
Uncontrolled bus crashes into crowd after rally in Asansol, injured people and chaos at scene
आसनसोल में चुनावी सभा के बाद बड़ा हादसा: बेकाबू बस भीड़ में घुसी, 7 साल की बच्ची समेत 12 घायल; इलाके में तनाव

पश्चिम बंगाल के Asansol में विधानसभा चुनाव के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस की चुनावी सभा खत्म होने के तुरंत बाद एक बेकाबू बस भीड़ में घुस गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में एक मासूम बच्ची समेत करीब 12 लोग घायल हो गए, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभा खत्म होते ही हुआ हादसा घटना Railpar इलाके की है, जहां तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उम्मीदवार Malay Ghatak के समर्थन में एक बड़ी चुनावी सभा आयोजित की गई थी। सभा समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में लोग बाहर निकल रहे थे, तभी अचानक तेज रफ्तार से आ रही एक बस भीड़ की तरफ मुड़ गई और कई लोगों को कुचलते हुए आगे बढ़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और कुछ ही सेकंड में पूरा माहौल चीख-पुकार और भगदड़ में बदल गया। कैसे बेकाबू हुई बस? स्थानीय लोगों के अनुसार: बस चालक ने अचानक वाहन पर नियंत्रण खो दिया बस कब्रिस्तान की दीवार तोड़ते हुए सड़क किनारे जा घुसी इस दौरान कई दुकानों, ऑटो और टोटो को जोरदार टक्कर मारी बताया जा रहा है कि बस की रफ्तार काफी तेज थी, जिससे नुकसान और ज्यादा बढ़ गया। चालक पर लगे गंभीर आरोप हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा देखा गया। लोगों का आरोप है कि: बस पर “पश्चिम बंगाल पुलिस” लिखा हुआ था वाहन चला रहा व्यक्ति Central Industrial Security Force (CISF) का जवान था वह कथित तौर पर नशे की हालत में था हालांकि पुलिस ने अभी इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। चालक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। घायलों की हालत गंभीर इस हादसे में घायल हुए लोगों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। घायलों में एक 7 साल की बच्ची भी शामिल है कई लोगों की हालत नाजुक बताई जा रही है डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज में जुटी है कुछ घायलों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की भी तैयारी की जा रही है। घटना के बाद बवाल और विरोध हादसे के बाद इलाके में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा: भीड़ ने बस में तोड़फोड़ की सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया कुछ समय के लिए स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई हालात को काबू में करने के लिए भारी संख्या में पुलिस और केंद्रीय बलों को मौके पर तैनात किया गया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। मौके पर पहुंचे नेता, की शांति की अपील घटना की सूचना मिलते ही Malay Ghatak मौके पर पहुंचे और घायलों का हाल जाना। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और भरोसा दिलाया कि सभी घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराया जाएगा। जांच जारी, कई सवाल बरकरार पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि: हादसा महज लापरवाही का नतीजा था या इसके पीछे कोई साजिश थी साथ ही, यह भी जांच का विषय है कि बस किसकी थी और उसे उस समय वहां क्यों चलाया जा रहा था। चुनावी सुरक्षा पर उठे सवाल चुनावी माहौल के बीच हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी सभा के बाद भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था में चूक साफ नजर आई, जो भविष्य के लिए एक चेतावनी है।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Rescue teams pulling injured passengers from bus fallen into deep gorge in Udhampur highway accident
जम्मू-कश्मीर हादसा: उधमपुर हाईवे पर बस खाई में गिरी, 7 की मौत; कई घायल, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Jammu and Kashmir के Udhampur जिले में सोमवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। रामनगर क्षेत्र के पास एक यात्री बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी, जिससे कम से कम 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा ऐसे समय हुआ जब बस दूरदराज के गांवों से यात्रियों को लेकर उधमपुर की ओर जा रही थी। पहाड़ी रास्तों और तेज रफ्तार के कारण यह दुर्घटना और भी घातक साबित हुई। कैसे हुआ दर्दनाक हादसा? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार: बस रामनगर के कागोर्ट/कनोते गांव के पास से गुजर रही थी यह इलाका घुमावदार और संकरी पहाड़ी सड़कों के लिए जाना जाता है अचानक चालक का वाहन पर नियंत्रण बिगड़ गया बस फिसलते हुए सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी स्थानीय लोगों का कहना है कि बस तेज रफ्तार में थी, जिससे चालक के लिए नियंत्रण पाना मुश्किल हो गया। हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण सबसे पहले मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया। मौत और घायलों की स्थिति इस दुर्घटना में: 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई कई यात्री घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है घायलों को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। तुरंत शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और राहत एजेंसियां सक्रिय हो गईं: पुलिस, SDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं खाई में गिरी बस से घायलों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया एंबुलेंस के जरिए घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया कई घायलों की हालत नाजुक होने के कारण उन्हें एयरलिफ्ट करने की तैयारी भी की जा रही है, ताकि समय रहते बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके। केंद्रीय मंत्री ने लिया हालात का जायजा केंद्रीय मंत्री और उधमपुर से सांसद Jitendra Singh ने हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने बताया कि: जिला प्रशासन से लगातार संपर्क में हैं राहत और बचाव कार्यों की निगरानी की जा रही है घायलों को हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। पहाड़ी इलाकों में बढ़ता हादसों का खतरा उधमपुर और रामनगर क्षेत्र की सड़कें लंबे समय से दुर्घटनाओं के लिए संवेदनशील मानी जाती हैं। यहां हादसों के पीछे कई कारण होते हैं: संकरी और घुमावदार सड़कें गहरी खाइयां और कमजोर सुरक्षा बैरियर ओवरस्पीडिंग और लापरवाही कई जगहों पर खराब सड़क स्थिति विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे इलाकों में वाहनों की गति पर सख्त नियंत्रण और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। क्या कहते हैं स्थानीय लोग? स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार: इस सड़क पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं कई जगह रेलिंग या गार्ड नहीं लगे हैं लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मार्ग पर सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। प्रशासन की आगे की कार्रवाई प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। संभावित जांच बिंदु: बस की तकनीकी स्थिति चालक की लापरवाही या थकान सड़क की स्थिति और सुरक्षा इंतजाम जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Crowd chaos at Nalanda Sheetla Temple during religious event causing stampede-like situation and casualties
नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

पटना/नालंदा, 31 मार्च 2026: बिहार के नालंदा जिले में स्थित Sheetla Temple में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। एक धार्मिक आयोजन के दौरान भारी भीड़ उमड़ने से भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसमें कम से कम 8 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। क्या हुआ था घटनास्थल पर? मिली जानकारी के अनुसार, मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे थे। भीड़ इतनी अधिक हो गई कि हालात बेकाबू हो गए और अचानक अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान कई लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े और दबने से यह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जिससे स्थिति तेजी से बिगड़ गई। राहत और बचाव कार्य जारी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मौके से सामने आई तस्वीरों में मंदिर परिसर में भारी भीड़ और अफरा-तफरी का माहौल साफ देखा जा सकता है। पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन की कमी के कारण इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। पिछले साल Sri Venkateswara Swamy Temple में भी भगदड़ में 9 लोगों की मौत हो गई थी। बड़ा सवाल: सुरक्षा व्यवस्था पर क्यों उठ रहे सवाल? यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जाते।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0