नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर लगाए गए 'गुमशुदा' पोस्टरों ने राजनीतिक विवाद को हवा दे दी है। शहर के कई इलाकों में लगाए गए इन पोस्टरों में राहुल गांधी की तस्वीर के साथ उन्हें "गुमशुदा" बताया गया है और उनकी विदेश यात्राओं को लेकर तंज कसा गया है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। पोस्टरों में क्या लिखा है? दिल्ली में लगाए गए पोस्टरों में बड़े अक्षरों में "गुमशुदा" लिखा गया है। पोस्टर में राहुल गांधी की तस्वीर के साथ लिखा गया है: नाम: राहुल गांधी पहचान: हमेशा विदेश में पाए जाते हैं। किसी पब में हो सकते हैं, किसी बीच पर हो सकते हैं। तलाश जारी है। इन पोस्टरों के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए उन्हें "पर्यटन का नेता" और "लापता राहुल बाबा" बताया। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में बिना छुट्टी लिए लगातार काम किया है, जबकि राहुल गांधी महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसरों पर अक्सर विदेश यात्राओं पर चले जाते हैं। पूनावाला ने आरोप लगाया कि जब संसद, देश या उनकी पार्टी को उनकी जरूरत होती है, तब राहुल गांधी विदेश में होते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का खर्च किस स्रोत से उठाया जाता है। अर्जुन राम मेघवाल ने भी किया हमला केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी पोस्टरों के मुद्दे पर राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का तरीका "झूठ बोलो और फिर भाग जाओ" जैसा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कई बार ऐसे मुद्दों पर राजनीति करते हैं, जिनसे देश में भ्रम और अशांति फैलती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी नीति या परीक्षा व्यवस्था पर सुझाव हैं तो उन्हें रचनात्मक तरीके से रखा जाना चाहिए। कांग्रेस की ओर से नहीं आई प्रतिक्रिया पोस्टर विवाद पर कांग्रेस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद सत्र और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच यह मुद्दा सियासी बहस का हिस्सा बना रह सकता है। दिल्ली में लगे इन पोस्टरों ने एक बार फिर राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गाजा में जारी संघर्ष को लेकर भारत की विदेश नीति पर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा केंद्र सरकार की नीति की आलोचना करने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस ने सरकार पर गाजा संकट को लेकर "चुप्पी" साधने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर "वोट बैंक की राजनीति" करने का आरोप लगाया। सोनिया गांधी ने उठाए सवाल सोनिया गांधी ने एक लेख में कहा कि गाजा को लेकर केंद्र सरकार का रुख भारत की पारंपरिक विदेश नीति और नैतिक जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी से भारत की नैतिक और रणनीतिक स्थिति प्रभावित हुई है। राहुल गांधी ने भी किया समर्थन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोनिया गांधी के लेख का समर्थन करते हुए कहा कि भारत को "नैतिक स्पष्टता" के साथ अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार का रुख भारत की पारंपरिक कूटनीतिक नीति से अलग दिखाई देता है। भाजपा का पलटवार भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत की गाजा नीति संतुलित रही है। पार्टी का कहना है कि भारत ने लगातार शांति, मानवीय सहायता और युद्धविराम की आवश्यकता का समर्थन किया है तथा संयुक्त राष्ट्र में भी इसी दिशा में अपना रुख स्पष्ट किया है। भाजपा ने कांग्रेस पर विदेश नीति के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। विदेश नीति पर बढ़ी राजनीतिक बहस गाजा संकट को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच जारी बयानबाज़ी से यह मुद्दा घरेलू राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि सरकार ने अपनी आधिकारिक नीति में कोई बदलाव घोषित नहीं किया है और भारत अब भी क्षेत्र में शांति, मानवीय सहायता तथा संवाद के माध्यम से समाधान की बात दोहरा रहा है।
रांची। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी बुधवार को रांची पहुंचे। रांची प्रेस क्लब में "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों और पेपर लीक मामलों पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पूरे देश में शिक्षा के चौपट होते भविष्य को बचाने के लिए एक बड़े आंदोलन की शुरुआत की जा रही है। 23 लाख छात्र मानसिक तनाव में, कई ने गंवाई जान NEET परीक्षा का जिक्र करते हुए इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि पेपर लीक के कारण करीब 23 लाख छात्र भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों में कई छात्रों ने इस भ्रष्ट व्यवस्था से निराश होकर अपनी जान गंवा ली। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा — "तुझको कितनों का लहू चाहिए ऐ अर्ज-ए-वतन, कितनी आहों से कलेजा तेरा ठंडा होगा।" उन्होंने इन मौतों का जिम्मेदार सीधे तौर पर लचर सिस्टम को ठहराया। थर्मामीटर बदलने से बुखार नहीं उतरता सरकार द्वारा एयरफोर्स के विमानों से परीक्षा केंद्रों तक पेपर पहुंचाने के फैसले पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि गठरी बदलने से सामान नहीं बदलता और थर्मामीटर बदलने से बुखार नहीं उतरता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए सेना का इस्तेमाल कर रही है और यदि एक पेपर सुरक्षित करवाने के लिए भी सेना की मदद लेनी पड़े तो शिक्षा मंत्रालय को ही बर्खास्त कर देना चाहिए। सरकार के अंदर बैठे हैं बड़े मगरमच्छ इमरान प्रतापगढ़ी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक करने वाले लोग सरकारी सिस्टम के अंदर से ही काम कर रहे हैं। सरकार केवल छोटी मछलियों को पकड़कर खानापूर्ति कर रही है जबकि बड़ी कुर्सियों पर बैठे मगरमच्छों को बचाया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे हर साल "परीक्षा पर चर्चा" का इवेंट करते हैं लेकिन 23 लाख छात्रों का भविष्य अधर में लटकने पर एक शब्द भी नहीं बोला। कांग्रेस की तीन बड़ी मांगें सांसद ने बताया कि कांग्रेस देश के 28 प्रमुख शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तीन मांगें उठा रही है — पेपर लीक मुक्त पारदर्शी परीक्षा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा और हर प्रतियोगी परीक्षा का वार्षिक कैलेंडर जारी करना। 9 अगस्त को दिल्ली चलो का आह्वान इमरान प्रतापगढ़ी ने बताया कि राहुल गांधी पटना, इलाहाबाद, बेंगलुरु और दिल्ली में छात्रों से लगातार मिल रहे हैं। 9 अगस्त को देशभर के छात्रों को दिल्ली बुलाया गया है जहां वे संसद का घेराव कर सरकार को कड़ा संदेश देंगे।
देश में शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने 25 जून को ‘छात्रों की गूंज’ नाम से राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इस अभियान के तहत पार्टी के 28 वरिष्ठ नेता देश के अलग-अलग शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों और छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे। कांग्रेस ने इस अभियान के माध्यम से केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की है। शिक्षा सुधार पर राष्ट्रीय बहस शुरू करने की कोशिश अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अभियान का उद्देश्य देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख मुद्दा बनाना है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों पर गंभीर चर्चा और नीतिगत बदलाव की जरूरत है। कांग्रेस के अनुसार, यह अभियान छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े सभी हितधारकों की आवाज को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने का प्रयास है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति के लिए केंद्र सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। पार्टी का आरोप है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा क्षेत्र को प्रभावी दिशा देने में असफल रहे हैं। पार्टी ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में सुधार की शुरुआत जवाबदेही तय करने से होनी चाहिए और इसी कारण शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है। केंद्र सरकार पर निजीकरण और केंद्रीकरण को बढ़ावा देने का आरोप कांग्रेस ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर शिक्षा क्षेत्र में निजीकरण, केंद्रीकरण और वैचारिक हस्तक्षेप को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि पिछले वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और रोजगारोन्मुख बनाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए। कांग्रेस के अनुसार, देश के सामने केवल बेरोजगारी का संकट नहीं है, बल्कि युवाओं की रोजगार क्षमता (Employability) भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। 28 शहरों में आयोजित होंगी प्रेस कॉन्फ्रेंस ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत देशभर के 28 शहरों में कांग्रेस नेताओं को प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी शिक्षा नीति, रोजगार, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों पर अपनी बात रखेगी। इन नेताओं को मिली जिम्मेदारी कांग्रेस ने विभिन्न शहरों के लिए अपने नेताओं की जिम्मेदारी तय की है। इसके तहत अहमदाबाद में सतेज पाटिल, बेंगलुरु में वर्षा गायकवाड़, भोपाल में इमरान मसूद, भुवनेश्वर में पवन खेड़ा, दिल्ली में गौरव गोगोई, चेन्नई में प्रियंक खड़गे, कोलकाता में सुप्रिया श्रीनेत और पुणे में कन्हैया कुमार प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। इसके अलावा अन्य शहरों में भी पार्टी के वरिष्ठ नेता अभियान का नेतृत्व करेंगे। छात्रों और नागरिकों से जुड़ने की कोशिश कांग्रेस का कहना है कि यह अभियान केवल राजनीतिक आलोचना तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के भविष्य को लेकर एक व्यापक राष्ट्रीय संवाद शुरू करने का प्रयास है। पार्टी ने छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और आम नागरिकों से इस चर्चा का हिस्सा बनने की अपील की है। कांग्रेस के अनुसार, एक आधुनिक, समावेशी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए सभी पक्षों की भागीदारी आवश्यक है। ऐसे में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को शिक्षा सुधार के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख थलापति विजय ने रविवार को अपना 52वां जन्मदिन मनाया। इस मौके पर देशभर से उन्हें शुभकामनाएं मिलीं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संदेश की रही। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर विजय को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य और सफल भविष्य की कामना की। साथ ही उन्होंने कहा कि वह तमिल लोगों के अधिकारों, सम्मान और आकांक्षाओं की रक्षा तथा राज्य की प्रगति के लिए विजय के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राहुल गांधी ने अपने संदेश में लिखा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थिरु जोसेफ विजय को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने कहा कि वह विजय के सभी प्रयासों की सफलता की कामना करते हैं और राज्य के विकास के लिए उनके साथ खड़े हैं। राहुल गांधी और थलापति विजय राहुल गांधी और थलापति विजय के बीच राजनीतिक रिश्ते पिछले कुछ समय में काफी मजबूत हुए हैं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने डीएमके के साथ चुनाव लड़ा था, लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इसके बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों के समर्थन का ऐलान कर राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दी। दोनों दलों की नजदीकियों का एक और उदाहरण दोनों दलों की नजदीकियों का एक और उदाहरण हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में देखने को मिला। टीवीके ने कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट दी, जिस पर कांग्रेस ने प्रवीण चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया और वे संसद के उच्च सदन पहुंचे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भविष्य में दोनों दलों के बीच सहयोग को और मजबूत करने का संकेत है। राहुल गांधी के जन्मदिन संदेश को केवल औपचारिक शुभकामना नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस और टीवीके के मजबूत होते रिश्तों के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले समय में दोनों दलों की रणनीति और साझेदारी पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक पहल की सराहना करने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय नाविकों की सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के रुख का समर्थन करते हुए थरूर के बयान को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और राहुल गांधी को निशाने पर लिया। थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सार्वजनिक और निजी दोनों बैठकों में भारत की चिंताओं को स्पष्ट रूप से रखा। उन्होंने कहा कि युद्ध की परिस्थितियों में वाणिज्यिक जहाजों पर तैनात नागरिक नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए, क्योंकि वे सैनिक नहीं होते। थरूर ने यह भी कहा कि भारतीय ध्वज वाले और अन्य जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक कार्यरत हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा भारत की प्राथमिक चिंता है। कांग्रेस ने उठाए थे सवाल इससे पहले कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि ओमान की खाड़ी में एक व्यापारिक पोत पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पार्टी ने सवाल उठाया था कि अमेरिका से इस घटना पर जवाब या खेद व्यक्त करने की मांग क्यों नहीं की गई। भाजपा ने राहुल गांधी को घेरा थरूर के बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार किया। भाजपा प्रवक्ता Pradeep Bhandari ने कहा कि थरूर की टिप्पणी ने राहुल गांधी के आरोपों की पोल खोल दी है। उन्होंने दावा किया कि जब राष्ट्रीय हित की बात आती है तो प्रधानमंत्री मोदी मजबूती से भारत का पक्ष रखते हैं, जबकि कांग्रेस नेतृत्व लगातार सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाता रहा है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की यह द्विपक्षीय मुलाकात जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान लगभग 16 महीने बाद हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, भारतीय नाविकों की सुरक्षा और अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के 56वें जन्मदिन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित कार्यक्रम ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में चित्रित किया गया, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी आपत्ति जताई है। वाराणसी में अनोखे अंदाज में मनाया गया जन्मदिन वाराणसी में गंगा घाट पर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का जन्मदिन प्रतीकात्मक हिंदू रीति-रिवाजों के साथ मनाया। इस दौरान उनकी एक तस्वीर प्रदर्शित की गई, जिसमें उन्हें भगवान परशुराम के स्वरूप में दिखाया गया था। तस्वीर में राहुल गांधी के एक हाथ में फरसा और दूसरे हाथ में भारतीय संविधान की प्रति दिखाई गई। कार्यकर्ताओं ने तस्वीर पर दूध अर्पित कर जन्मदिन मनाया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। BJP ने जताई कड़ी आपत्ति भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता Shehzad Poonawalla ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे हिंदू धर्म और उसकी आस्थाओं का अपमान बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कांग्रेस के लिए राहुल गांधी भगवान हो सकते हैं, लेकिन हिंदुओं के लिए नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में चित्रित करना हिंदू धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर हिंदू परंपराओं का लगातार अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने समय-समय पर हिंदू परंपराओं, धार्मिक प्रतीकों और मान्यताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अतीत में "हिंदू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और कई अवसरों पर हिंदू धार्मिक आयोजनों को लेकर विवादित टिप्पणियां कीं। कांग्रेस की ओर से नहीं आई आधिकारिक प्रतिक्रिया इस विवाद पर समाचार लिखे जाने तक कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दिखाने का उद्देश्य सामाजिक न्याय, संविधान और समानता के संदेश को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करना था। राजनीतिक बहस तेज राहुल गांधी के जन्मदिन समारोह के दौरान सामने आई इस तस्वीर ने एक बार फिर धर्म और राजनीति के संबंधों पर बहस छेड़ दी है। भाजपा इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रही है, जबकि कांग्रेस समर्थक इसे प्रतीकात्मक राजनीतिक अभिव्यक्ति के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद राजनीतिक रूप से और तूल पकड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब देश में विभिन्न दल धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर एक-दूसरे पर लगातार निशाना साध रहे हैं।
नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शुक्रवार (19 जून, 2026) को 56 वर्ष के हो गए। उनके जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी। प्रधानमंत्री ने लिखा, "लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं। उनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करता हूं।" 56 साल के हुए राहुल गांधी राहुल गांधी का जन्म 19 जून, 1970 को नई दिल्ली में हुआ था। वह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के पुत्र हैं। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद हैं और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। राहुल गांधी पिछले 22 वर्षों से सक्रिय राजनीति में हैं और कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया प्रेरणास्रोत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने X पर पोस्ट कर राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा कि संविधान के आदर्शों के प्रति राहुल गांधी की अटूट निष्ठा और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। खरगे ने कहा कि समावेशिता, सामाजिक न्याय, सद्भाव और करुणा की कांग्रेस पार्टी की परंपरा राहुल गांधी के सार्वजनिक जीवन और नेतृत्व में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि जनता के बीच निरंतर संवाद और सत्ता के सामने निर्भीक होकर सच बोलने के कारण राहुल गांधी ने समाज के कमजोर और हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज को मजबूती से उठाया है। पवन खेड़ा ने राहुल गांधी के संघर्ष को सराहा कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने कहा कि बहुत कम नेताओं ने लंबे समय तक इतनी तीखी आलोचना और लगातार सार्वजनिक जांच-परख का सामना किया है। पवन खेड़ा ने कहा, "ऐसी परिस्थितियों में अधिकांश लोग सार्वजनिक जीवन से पीछे हट जाते हैं, लेकिन राहुल गांधी को कमजोर करने का हर प्रयास उनके संकल्प को और मजबूत करता गया, उनकी राजनीति को और परिपक्व बनाता गया तथा जनता से उनके संबंध को और गहरा करता गया।" राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर देशभर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके लंबे एवं स्वस्थ जीवन की कामना की।
रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए कल 19 जून को चुनाव होंगे। इसमें दो सीटों के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में हैं। इसलिए गुरुवार को वोटिंग होगी। बीजेपी के समर्थन से परिमल नाथवानी के निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक बन गया है। नाथवानी 755 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं। राजनीतिक गलियारे में माना जा रहा है कि वह ‘हिसाब-किताब’ करके मैदान में डटे हैं। उनके इस गणित को कांग्रेस हॉर्स ट्रेडिंग का नाम दे रही है। तेजस्वी के 4 विधायक सबसे अहम इंडी ब्लॉक के पास 56 विधायक हैं। अगर सब एकजुट रहे तो उनकी दोनों सीटों पर जीत तय है। नाथवानी या कांग्रेस के प्रणव झा जीतेंगे यह तेजस्वी के चार विधायक तय करेंगे। एक सीट जीतने के लिए चाहिए 28 विधायक राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 विधायक चाहिए। इंडी ब्लॉक के पास 56 विधायक हैं। इसके अनुसार सभी ने वोट दिए और कोई क्रॉस वोटिंग नहीं हुई, तो गठबंधन के दोनों उम्मीदवार जीत जाएंगे। लेकिन, भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी की मौजूदगी ने इस खेल को इतना सीधा और आसान नहीं रहने दिया है। क्या है संख्या बल? झारखंड में विधानसभा की कुल 81 सीटें हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 28 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत है। इंडिया ब्लॉक में शामिल झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा माले के 2 विधायक हैं। दूसरी ओर NDA में भाजपा के 21, आजसू के 1, जेडीयू के 1 और LJP (R) के 1 विधायक हैं। कुल संख्या 24 हुई। इस हिसाब से NDA को चार विधायकों की जरूरत है। झामुमो के बैजनाथ राम की जीत पक्की हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली पार्टी झामुमो के उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत पक्की मानी जा रही है। उन्हें 28 वोट चाहिए और पार्टी के पास 34 विधायक हैं। मतलब जरूरत से 6 अधिक। इंडिया ब्लॉक की ओर से दूसरे उम्मीदवार कांग्रेस के प्रणव झा हैं। इनका मुकाबला परिमल नाथवानी से है। क्यों तेजस्वी यादव के हाथ आई जीत दिलाने की ताकत? कांग्रेस के प्रणव झा को जीत तभी मिलेगी, जब उन्हें झामुमो के बचे हुए 6, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा माले के 2 विधायक वोट दें। दूसरी ओर नाथवानी को NDA के 24 विधायकों का वोट मिलना तय माना जा रहा है। ऐसे में इंडी ब्लॉक की पार्टियों के चार विधायक टूट जाते हैं और नाथवानी के समर्थन में वोट कर देते हैं, तो उनकी जीत हो जाएगी। बिहार में बीजेपी कर चुकी खेला तेजस्वी यादव की पार्टी राजद के चार विधायक हैं। इनके पास ताकत है कि नाथवानी या प्रणव में से किसी एक को जीत दिला दें। बिहार में भाजपा ने मार्च में हुए राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के विधायकों को तोड़कर पहले ही उदाहरण पेश कर दिया है। इधर, कांग्रेस के नेताओं ने पटना में तेजस्वी यादव से मुलाकात की है। उनसे राज्यसभा चुनाव में राजद के चारों विधायकों के वोट कांग्रेस उम्मीदवार को दिलाने की अपील की। क्या बिहार का बदला झारखंड में ले सकते हैं तेजस्वी? मार्च में बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। सत्ताधारी गठबंधन NDA के पास 4 प्रत्याशी को जीत दिलाने लायक संख्या बल था। वहीं, विपक्ष की सभी पार्टियों के विधायक वोट देते तो महागठबंधन की ओर से राजद के उम्मीदवार ए़डी सिंह जीत सकते थे। 16 मार्च 2026 को मतदान हुए, नतीजे चौंकाने वाले आए। कांग्रेस के तीन विधायक गायब रहे। राजद के एक विधायक भी वोट डालने नहीं आए। इसके चलते एनडीए के 5वें उम्मीदवार को जीत मिल गई। बिहार में कांग्रेस के 6 विधायक हैं, इनमें से 3 ने राजद उम्मीदवार को वोट नहीं दिया। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है कि क्या तेजस्वी बिहार में मिली हार का बदला झारखंड में कांग्रेस उम्मीदवार को हराकर ले सकते हैं। राहुल गांधी ने तीन बार हेमंत सोरेन से बात की ऐसा न हो इसके लिए कांग्रेस नेतृत्व भी एक्टिव है। राहुल गांधी ने हेमंत सोरेन से तीन बार बात की है। बिहार में कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह के माध्यम से कांग्रेस नेतृत्व की बात तेजस्वी यादव से हुई है। दूसरी ओर एक चर्चा यह भी है कि NDA में भी टूट हो सकती है। विधायक सरयू राय की नाराजगी की खबर आती रहती है। परिमल को जिताने के लिए NDA के पास 2 ऑप्शन 1- RJD के चारों विधायकों को तोड़ लें। ऐसा करने पर NDA के 24 और राजद के 4 विधायक मिलकर 28 हो जाएंगे। वह कांग्रेस या भाकपा माले के विधायकों को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्हें किसी तरह चार विधायकों का वोट चाहिए। 2- दूसरा विकल्प है कि 10 विधायकों को वोट नहीं देने या इस तरह मतदान करने के लिए मना लें कि उनके वोट रद्द हो जाएं। ऐसे में कुल वैध वोटों की संख्या 71 हो जाएगी। जीत के लिए जरूरी संख्या बल गिरकर 24 हो जाएगा।
नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। होर्मुज स्ट्रेट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर भारतीय नाविकों की मौत और ओमान के डुक्म बंदरगाह पर एक अन्य भारतीय नागरिक की मृत्यु का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने सरकार पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका की कार्रवाई में भारतीय नागरिकों की मौत के बावजूद न तो माफी मांगी गई और न ही भारत सरकार ने कोई सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र देश को आदेशात्मक भाषा स्वीकार नहीं करनी चाहिए। ‘कंप्रोमाइज्ड पीएम’ कहकर साधा निशाना कांग्रेस नेता ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी को ‘कंप्रोमाइज्ड पीएम’ बताते हुए कहा कि सरकार अमेरिकी दबाव के सामने चुप है और एक ‘आज्ञाकारी नौकर’ की तरह व्यवहार कर रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार अपेक्षित दृढ़ता नहीं दिखा रही है। उन्होंने लिखा कि विदेशी ताकतें भारतीय नागरिकों को नुकसान पहुंचा रही हैं, जबकि सरकार मौन बनी हुई है। राहुल गांधी ने इसे देश के सम्मान और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। भारतीय नागरिक की मौत का भी उठाया मुद्दा राहुल गांधी ने ओमान के डुक्म बंदरगाह पर खड़े एक जहाज पर सवार भारतीय नागरिक निशांत उर्थनाथन की मौत का मुद्दा भी उठाया। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, निशांत उर्थनाथन की मृत्यु बीमारी के कारण हुई और उनका पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। इस घटना का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि विदेशों में मुश्किल परिस्थितियों में फंसे भारतीयों की मदद के लिए सरकार को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ा है तनाव हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस क्षेत्र से होकर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक और व्यापारिक जहाज गुजरते हैं, जिसके कारण भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने पहले भी क्षेत्रीय तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं, विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया और विदेश नीति को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। सियासी बहस तेज राहुल गांधी के इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में एक नई बहस छिड़ने की संभावना है। कांग्रेस जहां सरकार की विदेश नीति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र को घेर रही है, वहीं सरकार की ओर से अभी तक राहुल गांधी की ताजा टिप्पणियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। होर्मुज क्षेत्र में जारी तनाव और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा आने वाले दिनों में देश की राजनीति और कूटनीतिक चर्चाओं का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय इंदिरा भवन में गुरुवार को कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने की। इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi, महासचिव Priyanka Gandhi Vadra, संगठन महासचिव K. C. Venugopal, जयराम रमेश समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य प्रभारी शामिल हुए। आपात बैठक क्यों बुलाई गई? यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब देश की राजनीति में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों, विपक्षी दलों में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों और तृणमूल कांग्रेस (TMC) में कथित अंदरूनी खींचतान के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने स्थिति की समीक्षा की। बताया जा रहा है कि बैठक में कुछ टीएमसी सांसदों के अलग रुख अपनाने और विपक्षी एकजुटता पर पड़ने वाले संभावित असर पर भी चर्चा हुई। भाजपा के अभियान का जवाब देने की तैयारी बैठक में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे प्रचार अभियान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड से जुड़े राजनीतिक विमर्श का जवाब देने की रणनीति पर भी विचार किया गया। कांग्रेस नेतृत्व ने जनता के बीच अपनी राजनीतिक और वैचारिक बात प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर जोर दिया। INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर फोकस बैठक में विपक्षी गठबंधन INDIA को और मजबूत बनाने, क्षेत्रीय दलों के साथ समन्वय बढ़ाने तथा दल-बदल की बढ़ती घटनाओं पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं ने राज्यों में सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने की जरूरत पर बल दिया। गौरतलब है कि हाल ही में INDIA गठबंधन की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि सभी सहयोगी दल हर दो महीने में बैठक करेंगे। गठबंधन की अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में प्रस्तावित है। इसके अलावा विपक्ष ने मतदाता सूची, चुनावी अनियमितताओं, NEET और CBSE से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है।
नई दिल्ली: विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) की महत्वपूर्ण बैठक में एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ साझा रणनीति बनाने पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर गठबंधन के भीतर मौजूद कुछ पुराने मतभेद भी सामने आए। बैठक में शामिल नेताओं ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ संयुक्त रूप से संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई, साथ ही भविष्य की राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर भी चर्चा की। बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का प्रभावी मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों का एकजुट रहना आवश्यक है। उन्होंने नागरिक समाज के आंदोलनों से जुड़ाव बढ़ाने और गठबंधन के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर बल दिया। कांग्रेस से ‘बड़ा दिल’ दिखाने की अपील समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गठबंधन सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत विपक्षी दल को समर्थन देने के लिए कांग्रेस को उदार रवैया अपनाना चाहिए। अखिलेश ने यह भी कहा कि किसी चुनावी हार या जीत के आधार पर जल्दबाजी में राजनीतिक निष्कर्ष नहीं निकाले जाने चाहिए। 2029 के लिए अभी से तैयारी का सुझाव राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने बैठक में कहा कि विपक्ष को केवल वर्तमान राजनीतिक चुनौतियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अभी से व्यापक रणनीति बनाने और लगातार जनसंपर्क अभियान चलाने की आवश्यकता बताई। नियमित समन्वय बैठकों की मांग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गठबंधन सहयोगियों के बीच नियमित बैठकों का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हालिया चुनावी अनुभवों से यह स्पष्ट हुआ है कि बेहतर समन्वय विपक्ष की सबसे बड़ी आवश्यकता है। CJP अभियान पर भी हुई चर्चा बैठक के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अभियान का भी उल्लेख हुआ। सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस अभियान के प्रति सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि यदि कोई जन-अभियान लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है तो उससे संवाद किया जाना चाहिए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इस अभियान के अचानक उभार और इसकी वैचारिक पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस की ओर से इस विषय पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की गई। DMK ने गठबंधन से दूरी बनाई बैठक से पहले द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने स्पष्ट कर दिया कि वह अब INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। पार्टी प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और कांग्रेस के साथ मतभेदों के चलते पार्टी ने यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में पूर्व सहयोगी दल अब अलग राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, ऐसे में DMK स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक दिशा तय करेगी। उन्होंने भविष्य में किसी व्यापक धर्मनिरपेक्ष और भाजपा-विरोधी मंच की संभावना से इनकार नहीं किया। आम आदमी पार्टी ने भी दोहराई दूरी आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी पहले ही गठबंधन से अलग होने का निर्णय सार्वजनिक कर चुकी है। AAP की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय हितों की बजाय अपने राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाना रहा है। उन्होंने कांग्रेस के साथ भविष्य में किसी संभावित गठबंधन की संभावना को भी खारिज कर दिया। केरल को लेकर कांग्रेस-वाम दलों में तकरार बैठक में वाम दलों ने केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर नाराजगी व्यक्त की। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी. राजा ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी होने के बावजूद वाम दलों पर सार्वजनिक हमले उचित नहीं थे। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा कि केरल में उठाए गए विषय राज्य कांग्रेस की चुनावी रणनीति का हिस्सा थे। बैठक में मौजूद कई नेताओं ने सुझाव दिया कि पुराने विवादों को पीछे छोड़कर भाजपा के खिलाफ साझा संघर्ष पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। भाजपा के खिलाफ साझा संघर्ष पर जोर बैठक का समापन विपक्षी एकता और समन्वय को मजबूत करने के संदेश के साथ हुआ। नेताओं ने माना कि भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों के बीच विश्वास, संवाद और साझा रणनीति पहले से कहीं अधिक जरूरी है।
नई दिल्ली: विपक्षी गठबंधन INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) ने केंद्र सरकार के खिलाफ साझा मोर्चा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सोमवार (8 जून) को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित बैठक में 23 विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया और कई राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा कि गठबंधन पांच प्रमुख मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष करेगा और इन विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा। NEET और CBSE विवाद पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग बैठक में NEET-UG परीक्षा और CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। INDIA गठबंधन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan से तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करने के लिए जवाबदेही तय होना जरूरी है। मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल बैठक में चुनावी पारदर्शिता को लेकर भी चर्चा हुई। गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। इस संबंध में INDIA गठबंधन ने निर्णय लिया कि वह Surya Kant को पत्र लिखकर चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग करेगा। बेरोजगारी और महंगाई पर सर्वदलीय बैठक की मांग विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से देश की आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। गठबंधन का कहना है कि इन मुद्दों का असर सीधे आम जनता पर पड़ रहा है और इन पर व्यापक राजनीतिक संवाद की आवश्यकता है। मानसून सत्र के लिए विपक्ष की तैयारी बैठक में संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर भी रणनीति बनाई गई। विपक्षी दलों ने तय किया कि सत्र के दौरान समन्वय बनाए रखने के लिए प्रतिदिन नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में बैठक आयोजित की जाएगी। इसके अलावा गठबंधन की नियमित बैठकों का सिलसिला जारी रखने पर सहमति बनी है। निर्णय लिया गया कि INDIA गठबंधन की अगली बैठक हैदराबाद में आयोजित की जाएगी। बैठक में शामिल हुए प्रमुख नेता बैठक में कांग्रेस की ओर से Sonia Gandhi, Rahul Gandhi और मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद रहे। इसके अलावा Mamata Banerjee, Akhilesh Yadav, Tejashwi Yadav, Supriya Sule और Uddhav Thackeray समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। वहीं Omar Abdullah, Mehbooba Mufti, D Raja और Dipankar Bhattacharya ने भी बैठक में भाग लिया। DMK और AAP ने बनाई दूरी बैठक में Dravida Munnetra Kazhagam और Aam Aadmi Party शामिल नहीं हुईं। AAP पहले ही सार्वजनिक रूप से INDIA गठबंधन से दूरी बना चुकी है, जबकि DMK ने राजनीतिक कारणों का हवाला देते हुए बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया था। भाजपा के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ विपक्षी एकता पर जोर बैठक के दौरान नेताओं ने देश में भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और विपक्षी दलों के सामने मौजूद चुनौतियों पर भी चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सभी सहयोगी दलों से एकजुटता बनाए रखने और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ साझा संघर्ष जारी रखने की अपील की। गठबंधन नेताओं का मानना है कि आगामी राजनीतिक और संसदीय चुनौतियों का सामना करने के लिए विपक्षी एकता को और मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
जयपुर: राजस्थान की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे 25 सितंबर 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर अपनी चुप्पी तोड़ी है। गहलोत ने स्पष्ट किया कि उस समय कांग्रेस विधायकों का विरोध पार्टी आलाकमान के खिलाफ नहीं था, बल्कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावनाओं को लेकर असहमति का परिणाम था। उन्होंने कहा कि उस पूरे प्रकरण को गलत तरीके से कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग थी। ‘आलाकमान के खिलाफ नहीं था कोई विद्रोह’ अशोक गहलोत ने कहा कि सितंबर 2022 की घटना को लेकर कई तरह की धारणाएं बनाई गईं, लेकिन कांग्रेस विधायकों ने कभी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत नहीं की। उन्होंने कहा, “यह विरोध उस व्यक्ति के खिलाफ था जिसका नाम मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा में था। इसे आलाकमान के खिलाफ विद्रोह कहना सही नहीं है। विधायकों ने उस समय पार्टी और सरकार को बचाने की जिम्मेदारी निभाई थी।” कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ और विवाद का दौर गहलोत ने याद दिलाया कि उस समय उनका नाम कांग्रेस अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल था।घटनाक्रम के बाद हालात बदल गए और पूरे विवाद का असर उनकी राजनीतिक छवि पर भी पड़ा। उन्होंने बताया कि उस समय उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर उन्होंने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के समक्ष खेद भी व्यक्त किया था। सचिन पायलट को दी नसीहत, बोले- सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए सचिन पायलट का नाम लिए बिना गहलोत ने कहा कि राजनीति में हर व्यक्ति से गलतियां हो सकती हैं और यदि कोई भूल हुई है तो उसे स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा, “सच्चाई का कोई विकल्प नहीं होता। उस समय की परिस्थितियों को समझना और स्वीकार करना जरूरी है।” 2020 के मानेसर प्रकरण का भी किया जिक्र पूर्व मुख्यमंत्री ने वर्ष 2020 के राजनीतिक संकट को भी याद किया, जब सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के मानेसर में ठहरे थे। गहलोत ने कहा कि उस समय उनके खिलाफ विद्रोह की धारणा बनाई गई थी, जबकि वास्तविक स्थिति कुछ और थी। उन्होंने संकेत दिया कि उस संकट के दौरान भी पार्टी को गंभीर राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। ‘हम सचिन पायलट के दुश्मन नहीं हैं’ गहलोत ने अपने और सचिन पायलट के रिश्तों को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनका परिवार से वर्षों पुराना संबंध रहा है और व्यक्तिगत स्तर पर उनके बीच कोई दुश्मनी नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं उनके परिवार को बचपन से जानता हूं। हम उनके विरोधी नहीं हैं। राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत रिश्ते अलग होते हैं।” गहलोत ने यह भी दावा किया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के दौरान उन्होंने सचिन पायलट को केंद्रीय मंत्री बनाए जाने में सहयोग किया था, इसका कभी सार्वजनिक उल्लेख नहीं किया गया। कांग्रेस नेताओं से एकजुट रहने की अपील राजस्थान की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि कांग्रेस को इस समय संगठनात्मक मजबूती की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और अन्य नेताओं को मिलकर पार्टी को मजबूत बनाने के लिए काम करना चाहिए। राहुल गांधी की सराहना का किया जिक्र गहलोत ने हाल ही में पुष्कर में आयोजित कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने राजस्थान कांग्रेस के कामकाज की सराहना की थी और विशेष रूप से गोविंद सिंह डोटासरा तथा टीकाराम जूली के नेतृत्व की प्रशंसा की थी। ‘अब पद की नहीं, संगठन की चिंता’ अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर अशोक गहलोत ने कहा कि उन्होंने राजनीति में बहुत कुछ हासिल किया है और अब उनकी प्राथमिकता केवल संगठन को मजबूत करना है। उन्होंने कहा, “तीन बार मुख्यमंत्री बनना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। भविष्य में कौन मुख्यमंत्री बनेगा, इसका फैसला समय करेगा। फिलहाल मेरी पूरी ऊर्जा कांग्रेस को मजबूत करने में लगी है।”
नई दिल्ली: विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) की सोमवार को राजधानी दिल्ली में अहम बैठक होने जा रही है। लोकसभा चुनाव के बाद यह गठबंधन की पहली बड़ी बैठक होगी, जिसमें 23 राजनीतिक दलों के शामिल होने की पुष्टि की गई है। बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना और आगामी चुनावों के लिए विपक्षी एकजुटता को मजबूत करना बताया जा रहा है। बैठक नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होगी। कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने कहा कि विचारधारात्मक और क्षेत्रीय विविधताओं के बावजूद गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और सभी दल साझा राजनीतिक उद्देश्यों के साथ बैठक में भाग ले रहे हैं। कई दिग्गज नेताओं के शामिल होने की संभावना बैठक में कांग्रेस नेता Rahul Gandhi और Mallikarjun Kharge, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee, Abhishek Banerjee, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav, राजद नेता Tejashwi Yadav तथा शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख Uddhav Thackeray समेत कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। साझा रणनीति और चुनावी तैयारियों पर फोकस सूत्रों के मुताबिक बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा होगी। विपक्षी दल भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ साझा राजनीतिक एजेंडा तैयार करने की कोशिश कर सकते हैं। बैठक में महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों सहित कई राष्ट्रीय विषयों को लेकर संयुक्त अभियान चलाने पर भी विचार हो सकता है। गठबंधन के भीतर मतभेद भी रहेंगे चर्चा में बैठक में विपक्षी दलों के बीच हाल के दिनों में उभरे मतभेदों पर भी चर्चा होने की संभावना है। विशेष रूप से कांग्रेस और वाम दलों के बीच कुछ राज्यों में चुनावी रणनीति को लेकर सामने आए विवादों पर बातचीत हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि सहयोगी दल चाहते हैं कि गठबंधन के भीतर संवाद बढ़े और सार्वजनिक स्तर पर होने वाले आरोप-प्रत्यारोप से बचा जाए। कुछ प्रमुख दल रह सकते हैं दूर रिपोर्टों के अनुसार, कुछ सहयोगी दल इस बैठक में शामिल नहीं हो सकते। कांग्रेस का कहना है कि जो दल बैठक में मौजूद नहीं रहेंगे, वे भी गठबंधन के व्यापक राजनीतिक उद्देश्यों के समर्थन में बने हुए हैं। बीजेपी ने उठाए विपक्षी एकता पर सवाल बैठक से पहले भाजपा ने INDIA गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्षी गठबंधन के भीतर कई मुद्दों पर मतभेद मौजूद हैं और साझा नेतृत्व को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। विपक्षी दलों का दावा है कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मुद्दों पर वे एकजुट हैं तथा बैठक का उद्देश्य इसी एकता को और मजबूत करना है। लोकसभा चुनाव के बाद पहली बड़ी राजनीतिक बैठक INDIA गठबंधन की पिछली प्रमुख बैठक लोकसभा चुनाव 2024 के अंतिम चरण के मतदान से पहले हुई थी। इसके बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर विपक्षी दल एक मंच पर जुट रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है, क्योंकि इससे आने वाले वर्षों में विपक्ष की रणनीति और दिशा का संकेत मिल सकता है।
बेंगलुरु: आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 18 जून को होने वाले इस चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के साथ पवन खेड़ा और मंसूर अली खान शामिल हैं। राहुल गांधी की मौजूदगी में दाखिल किया नामांकन कर्नाटक से राज्यसभा चुनाव के लिए मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, रणदीप सिंह सुरजेवाला और के.सी. वेणुगोपाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। खरगे ने कर्नाटक विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन विधानसभा सचिव एम.के. विशालाक्षी को सौंपा। ‘कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत पक्की करने के लिए एकजुट रहें’ नामांकन के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों और नेताओं ने एकमत से उनके नाम का समर्थन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी चुनाव में सभी कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी पूरी तरह एकजुट रहेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव 18 जून को होना है और कांग्रेस संगठन को मजबूत एकता के साथ मैदान में उतरना होगा। 25 जून को समाप्त हो रहा है खरगे का कार्यकाल मल्लिकार्जुन खरगे वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं और उनका कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो रहा है। इसी कारण पार्टी ने उन्हें एक बार फिर उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने घोषित किए तीन उम्मीदवार कांग्रेस ने कर्नाटक से राज्यसभा के लिए तीन उम्मीदवार उतारे हैं। खरगे के अलावा पार्टी ने पवन खेड़ा, जो कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख हैं, और मंसूर अली खान, जो राष्ट्रीय सचिव हैं, को भी उम्मीदवार बनाया है। नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 8 जून तय की गई है। पवन खेड़ा और मंसूर अली खान अपने नामांकन बाद में दाखिल करेंगे।
लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की पोस्ट-रिजल्ट फीस व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में होने वाली संभावित त्रुटियों को सुधारने के लिए भी छात्रों से शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यदि सीबीएसई की ओर से मूल्यांकन में गलती होती है तो उसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने लिखा कि स्कैन कॉपी, री-टोटलिंग और री-इवैल्यूएशन जैसी प्रक्रियाओं के लिए छात्रों से अलग-अलग शुल्क लिया जा रहा है। फीस व्यवस्था पर उठाए सवाल राहुल गांधी के अनुसार, डिजिटल स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए प्रति विषय 100 रुपये, री-टोटलिंग के लिए प्रति पेपर 100 रुपये और री-इवैल्यूएशन के लिए प्रति प्रश्न 25 रुपये शुल्क निर्धारित है। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराने के लिए करीब 2,000 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि यदि लाखों छात्र पुनर्मूल्यांकन और संबंधित प्रक्रियाओं के लिए आवेदन कर रहे हैं तो इससे बोर्ड को कितनी आय प्राप्त हो रही है। 'शिक्षा को व्यवसाय बनाया जा रहा' राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब शिक्षा को सेवा के बजाय व्यवसाय के रूप में संचालित किया जाता है तो व्यवस्थागत त्रुटियों का बोझ छात्रों पर डाल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों को न केवल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, बल्कि उनके समय, आत्मविश्वास और भविष्य पर भी असर पड़ता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली में होने वाली संभावित त्रुटियों के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को अपने अंकों की दोबारा जांच कराने की आवश्यकता पड़ती है। CBSE ने दिया स्पष्टीकरण इस बीच ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे सवालों के बीच सीबीएसई ने कहा है कि मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। बोर्ड ने एक बयान जारी कर कहा कि उसके सेवा प्रदाता के ऑनमार्क पोर्टल में चिन्हित तकनीकी कमजोरियों की निगरानी की जा रही है और विभिन्न सरकारी एजेंसियों तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की टीम सिस्टम को और मजबूत बनाने में जुटी है। सीबीएसई के अनुसार, पहचानी गई कमजोरियों को नियंत्रित कर लिया गया है और पोर्टल की सुरक्षा को और बेहतर बनाने की प्रक्रिया जारी है। बोर्ड ने संभावित खामियों की जानकारी देने वाले जागरूक नागरिकों और एथिकल हैकर्स का भी आभार व्यक्त किया है। शिक्षा व्यवस्था पर फिर छिड़ी बहस राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद परीक्षा मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन शुल्क और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। विपक्ष जहां छात्रों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ का मुद्दा उठा रहा है, वहीं सीबीएसई का कहना है कि वह मूल्यांकन प्रक्रिया की गुणवत्ता और तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सीयूईटी-यूजी 2026 परीक्षा के दौरान कुछ केंद्रों पर तकनीकी खराबी के कारण हुई देरी को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार 'विश्वगुरु' बनने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन एक भी परीक्षा ईमानदारी और व्यवस्थित तरीके से आयोजित नहीं कर पा रही है। CUET में तकनीकी समस्या के बाद उठे सवाल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने शनिवार को बताया कि देशभर में आयोजित कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG 2026) कुछ परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्याओं के कारण निर्धारित समय से देरी से शुरू हुआ। इस घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी देखी गई। इसी मुद्दे को लेकर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सरकार को घेरते हुए लिखा कि हाल के वर्षों में नीट, सीबीएसई, एसएससी और अब सीयूईटी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश की शिक्षा व्यवस्था को संभालने में विफल रही है। पीएम मोदी पर साधा निशाना राहुल गांधी ने कहा, "नीट, सीबीएसई, एसएससी और आज सीयूईटी। चार परीक्षाएं, लाखों छात्र और एक भी परीक्षा ठीक से नहीं हो पाई। देश के अंदर एक भी परीक्षा ढंग से आयोजित नहीं हो रही, लेकिन विश्वगुरु बनने के दावे किए जा रहे हैं।" उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है, वही आने वाले समय में इसका जवाब देंगे। पहले भी उठाते रहे हैं परीक्षा व्यवस्था पर सवाल राहुल गांधी इससे पहले भी नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार पर हमला बोल चुके हैं। उन्होंने छात्रों से बातचीत का हवाला देते हुए कहा था कि युवाओं का परीक्षा प्रणाली और सरकारी संस्थाओं पर भरोसा कमजोर हुआ है। उनका आरोप है कि पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं पर सरकार पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रही। शिक्षा व्यवस्था पर फिर छिड़ी बहस सीयूईटी परीक्षा में आई तकनीकी दिक्कतों और राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद एक बार फिर देश की परीक्षा प्रणाली, पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है, वहीं परीक्षा एजेंसियां व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का दावा कर रही हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को एक बार फिर आम लोगों के बीच अलग अंदाज में नजर आए। कांग्रेस सांसद ने दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास पर ऑटो रिक्शा चालकों से मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और उनके साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया। राहुल गांधी इस दौरान ऑटो ड्राइवरों की वर्दी पहने हुए दिखाई दिए। उन्होंने ऑटो चालकों के साथ बातचीत कर उनकी रोजमर्रा की चुनौतियों, सामाजिक सुरक्षा, बीमा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। संसद में आवाज उठाने का दिया आश्वासन मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने ऑटो चालकों को भरोसा दिलाया कि उनके मुद्दों को संसद में उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मेहनतकश वर्ग की समस्याओं को समझना और उन्हें उचित मंच पर रखना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। ऑटो चालकों ने भी अपने अनुभव साझा किए और परिवहन क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न समस्याओं की जानकारी दी। राहुल गांधी ने उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना और आवश्यक सहायता के लिए प्रयास करने का आश्वासन दिया। चालकों के साथ सादा भोजन किया कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने ऑटो चालकों के साथ जमीन पर बैठकर सादा भोजन भी किया। इस दौरान उन्होंने अनौपचारिक बातचीत करते हुए उनकी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के बारे में जानकारी ली। मुलाकात के बाद एक ऑटो चालक ने बताया कि राहुल गांधी ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और बीमा योजनाओं समेत अन्य सुविधाओं के मुद्दे पर सहयोग का आश्वासन दिया। चालक ने कहा कि यह मुलाकात उनके लिए यादगार अनुभव रही। पहले भी आम लोगों के बीच पहुंचते रहे हैं राहुल गांधी यह पहला अवसर नहीं है जब राहुल गांधी आम लोगों के बीच इस तरह पहुंचे हों। इससे पहले भी वे भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ट्रक चालकों के साथ सफर करते, मैकेनिकों के साथ काम करते और विभिन्न वर्गों के लोगों से सीधे संवाद करते नजर आए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी लगातार विभिन्न पेशों से जुड़े लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने और उनसे संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में ऑटो चालकों के साथ उनकी यह मुलाकात भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
NEET-UG पेपर लीक विवाद के बीच 21 जून को होने वाले री-टेस्ट को लेकर केंद्र सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया में बड़े बदलाव करने का फैसला लिया है। गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर हुई हाईलेवल बैठक में तय किया गया कि अब परीक्षा के प्रश्नपत्रों के परिवहन और सुरक्षा में सेना और भारतीय वायुसेना की मदद ली जाएगी। बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार का उद्देश्य इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। यूपीएससी जैसी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की तैयारी बैठक में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर मजबूत बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके तहत प्रश्नपत्र तैयार करने, प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को मल्टी-लेयर निगरानी में रखा जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन के लिए सेना और वायुसेना की सहायता देने पर सहमति जताई है। अब एयरफोर्स की मदद से प्रश्नपत्रों को संवेदनशील और दूरस्थ परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। शिक्षा मंत्री बोले- छात्रों का भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बैठक के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछली परीक्षाओं में डाक विभाग और गृह मंत्रालय की भूमिका प्रमुख थी, लेकिन इस बार सुरक्षा व्यवस्था में कई अहम बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों और अभिभावकों का भरोसा वापस जीतना है। इसके लिए परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी निगरानी में रखा जाएगा। फीस रिफंड के लिए बैंक डिटेल जमा करने की तारीख बढ़ी NEET री-टेस्ट को लेकर NTA ने छात्रों को राहत देते हुए फीस रिफंड प्रक्रिया की डेडलाइन भी बढ़ा दी है। अब उम्मीदवार 22 जून रात तक अपने बैंक खाते की जानकारी जमा कर सकेंगे। पहले यह अंतिम तिथि 27 मई निर्धारित की गई थी। बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों की मांग के बाद एजेंसी ने समय सीमा बढ़ाने का फैसला लिया। प्रधानमंत्री खुद रख रहे तैयारियों पर नजर सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद NEET री-टेस्ट की तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई जा रही है। सरकार इस बार किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहती है, क्योंकि पेपर लीक विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। कोएम्प्ट एजूटेक कंपनी पर भी उठे सवाल विवाद के बीच सीबीएसई की ओर से OSM कॉन्ट्रैक्ट पाने वाली कंपनी Coempt Edutech भी जांच के घेरे में आ गई है। यह कंपनी पहले Globarena नाम से जानी जाती थी और तेलंगाना बोर्ड परीक्षा से जुड़े विवादों में उसका नाम सामने आया था। बताया जा रहा है कि 2019 और 2023 में परीक्षा प्रबंधन से जुड़े विवादों के दौरान कई छात्रों ने आत्महत्या की थी। अब विपक्ष इस कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी ने छात्र के परिवार से मुलाकात कर सरकार पर साधा निशाना कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को NEET की तैयारी कर रहे छात्र प्रदीप मेघवाल के परिवार से मुलाकात की। प्रदीप ने कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं और ‘क्वेश्चन बैंक’ लीक की खबरों के बाद आत्महत्या कर ली थी। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि एक भ्रष्ट और टूट चुकी परीक्षा व्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि “मोदी-प्रधान की जोड़ी इस परिवार के सामने जवाबदेह है।” CBI की जांच तेज, अब तक 13 गिरफ्तार NEET पेपर लीक मामले की जांच कर रही CBI ने कार्रवाई तेज कर दी है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी डॉ. मनोज शिरुरे और तेजस हर्षद कुमार शाह को 1 जून तक CBI हिरासत में भेज दिया है। वहीं प्रह्लाद कुलकर्णी और शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को 10 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। CBI ने देशभर में अब तक 49 स्थानों पर छापेमारी की है और कई अहम दस्तावेज, लैपटॉप तथा मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इस मामले में अब तक कुल 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। 3 मई को हुई थी परीक्षा, 12 मई को रद्द करना पड़ा NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। NTA के अनुसार, 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया और 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। अब 21 जून को री-टेस्ट आयोजित किया जाएगा।
सीबीएसई और नीट परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए हैं और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाये हैं। राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है, जबकि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पलटवार करते हुए राहुल गांधी को चुनावी हार से हताश बताया। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा- राहुल गांधी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं लगती केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि CBSE ने पहले ही इस मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है और सभी प्रक्रियाएं भारत सरकार की खरीद नीति के अनुसार पूरी की गई हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। राहुल गांधी पर हमला करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “लगातार चुनावी हार के कारण राहुल गांधी हताश नजर आते हैं। उन्होंने SIR का विरोध किया, EVM का विरोध किया और डिजिटल इंडिया का भी विरोध किया। ऐसा लगता है कि वे भारत की वैज्ञानिक प्रगति के साथ खड़े नहीं हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी की बयानबाजी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित लगती है। ‘यह राजनीति करने का समय नहीं’, शिक्षा मंत्री की अपील धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परीक्षा से जुड़े विवाद के कारण छात्रों और अभिभावकों में पहले से ही तनाव है और इस समय राजनीति करने से स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने कहा, “सरकार की ओर से यदि किसी प्रकार की असुविधा हुई है, तो मैं स्वयं उसकी जिम्मेदारी लेता हूं। लेकिन अभी सबसे जरूरी बात यह है कि छात्रों का मानसिक तनाव और न बढ़े।” केंद्रीय मंत्री ने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की कि वे ऐसे बयान देने से बचें, जिससे छात्रों की चिंता और बढ़े। राहुल गांधी ने उठाये CBSE कॉन्ट्रैक्ट और कंपनी चयन पर सवाल राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शिक्षा मंत्री पर पलटवार करते हुए कहा कि व्यक्तिगत हमला करने से सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। उन्होंने लिखा, “धर्मेंद्र प्रधान जी, आप मुझ पर जितना चाहें हमला कर सकते हैं, लेकिन इससे आप अपने अपराधों से बरी नहीं होंगे और न ही यह मुझे 18.5 लाख बच्चों के लिए जवाब मांगने से रोक पाएगा।” राहुल गांधी ने CBSE के OSM कॉन्ट्रैक्ट को लेकर भी सवाल उठाये। उन्होंने पूछा कि यह कॉन्ट्रैक्ट COEMPT नाम की कंपनी को क्यों दिया गया, जबकि उसी कंपनी का पुराना नाम Globarena पहले से विवादों में रहा है। उन्होंने सवाल किया कि इस कंपनी का चयन किसके आदेश पर किया गया, बैकग्राउंड जांच क्यों नहीं हुई और कंपनी के प्रबंधन तथा केंद्र सरकार के बीच क्या संबंध हैं। राहुल गांधी बोले- दोनों ही स्थिति में सरकार जिम्मेदार राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार ने बैकग्राउंड जांच की थी और फिर भी कंपनी को काम दिया गया, तो यह गंभीर लापरवाही है। वहीं अगर जांच नहीं की गई, तो यह और भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ही परिस्थितियों में सरकार जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार को वास्तव में छात्रों की चिंता होती, तो इतने बड़े विवाद के बाद शिक्षा मंत्री को बहुत पहले ही पद से हटा दिया गया होता। परीक्षा विवाद पर बढ़ी राजनीतिक गर्मी CBSE और NEET से जुड़े विवाद पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। ऐसे में राहुल गांधी और धर्मेंद्र प्रधान के बीच बढ़ती बयानबाजी ने इस मुद्दे को और राजनीतिक बना दिया है। एक तरफ विपक्ष परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि वह किसी भी अनियमितता को गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।