Rahul Gandhi

Lok Sabha session in progress with MPs discussing CAPF Bill 2026 in Parliament
आज लोकसभा में CAPF बिल पर चर्चा, राज्यसभा से हो चुका पास

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के बीच गुरुवार को लोकसभा में CAPF (सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस) जनरल एडमिनिस्ट्रेशन बिल 2026 पेश किया जाएगा। इससे पहले यह बिल बुधवार को राज्यसभा से पास हो चुका है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय इसे लोकसभा में पेश कर सकते हैं। कार्यवाही की शुरुआत श्रद्धांजलि से सदन की कार्यवाही गुरुवार को दो पूर्व सांसदों को श्रद्धांजलि देने के साथ शुरू हुई। इसके बाद विधायी कामकाज आगे बढ़ाया गया। CAPF बिल में क्या प्रावधान हैं? इस बिल का मुख्य उद्देश्य CAPF में वरिष्ठ पदों पर डिपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) के नियम तय करना है: IG (इंस्पेक्टर जनरल) स्तर के 50% पद डिपुटेशन से भरे जाएंगे ADG (एडिशनल डायरेक्टर जनरल) के कम से कम 67% पद डिपुटेशन से SDG और DG के सभी पद डिपुटेशन से ही भरे जाएंगे विपक्ष का विरोध इस बिल को लेकर विपक्ष ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया कि: “बिल ऐसे दिन लाया गया है जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी असम दौरे पर हैं।” राज्यसभा में आज क्या होगा? राज्यसभा में आज आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती से जुड़ा बिल पेश किया जाएगा, जिसे लोकसभा पहले ही पास कर चुकी है। क्या बढ़ेगा बजट सत्र? आज बजट सत्र का आखिरी दिन माना जा रहा है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक: सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं किया जाएगा सरकार इसे अप्रैल के तीसरे हफ्ते में फिर बुला सकती है बुधवार को पास हुए अहम बिल आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2026 – लोकसभा इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) बिल 2026 – राज्यसभा CAPF जनरल एडमिनिस्ट्रेशन बिल 2026 – राज्यसभा IBC से जुड़ा एक और बिल – राज्यसभा

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Amit Shah delivering a powerful speech in Lok Sabha targeting opposition over Naxalism issue
लोकसभा में 90 मिनट का सियासी प्रहार: अमित शाह ने नक्सलवाद पर विपक्ष को घेरा

अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर लगभग 90 मिनट तक ऐसा आक्रामक और रणनीतिक भाषण दिया, जिसने पूरे सदन का माहौल बदल दिया। उनका यह संबोधन केवल एक राजनीतिक जवाब नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित सियासी हमला था, जिसमें उन्होंने आंकड़ों, इतिहास और तर्कों के जरिए विपक्ष को घेरने की कोशिश की। खामोशी से शुरुआत, रणनीति की तैयारी भाषण देने से करीब दो घंटे पहले ही अमित शाह सदन में मौजूद थे। वे शांत बैठकर हर वक्ता की बात ध्यान से सुन रहे थे और अहम बिंदुओं को नोट कर रहे थे। इस दौरान विपक्ष की बेंच काफी हद तक खाली दिखीं- Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra और Dimple Yadav जैसे बड़े चेहरे मौजूद नहीं थे। बहस के बीच भावनात्मक मोड़ बीजेपी सांसद Nishikant Dubey ने अपने परिवार की निजी त्रासदी का जिक्र किया, जिसमें उनके दादा की नक्सलियों द्वारा हत्या की बात सामने आई। इससे बहस का माहौल भावनात्मक हो गया। वहीं अभिनेत्री और सांसद Kangana Ranaut ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला, जिससे सदन में हंगामा भी हुआ। 6:04 बजे शुरू हुआ ‘मुख्य प्रहार’ शाम 6:04 बजे अमित शाह बोलने के लिए खड़े हुए और सीधे इतिहास से शुरुआत की। उन्होंने Indira Gandhi पर नक्सल विचारधारा को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया, जिस पर विपक्ष ने जोरदार विरोध किया। ‘गरीबी नहीं, नक्सलवाद से फैली गरीबी’ अपने भाषण के दौरान शाह ने विपक्ष के तर्क को पलटते हुए कहा: “नक्सलवाद गरीबी की वजह से नहीं फैला, बल्कि नक्सलवाद की वजह से गरीबी फैली।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार नक्सल हिंसा के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगी- “जो हथियार उठाएंगे, उन्हें समझाया जाएगा, नहीं मानेंगे तो बल का इस्तेमाल होगा।” तारीख, डेटा और रणनीतिक रोडमैप अमित शाह ने अपने तर्कों को मजबूत करने के लिए कई अहम तारीखें पेश कीं: 20 अगस्त 2019: पुनर्वास और मुख्यधारा में लाने की नीति की शुरुआत 24 अगस्त 2024: भारत को 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त करने का लक्ष्य उन्होंने दावा किया कि सरकार की रणनीति और लगातार कार्रवाई से देश नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। 90 मिनट में बदला पूरा माहौल करीब 7:25 बजे जब उनका भाषण खत्म हुआ, तब तक सदन में कई बार हंगामा और नारेबाजी हो चुकी थी। लेकिन यह साफ था कि अमित शाह ने बहस की दिशा तय कर दी थी। उनका यह भाषण एक राजनीतिक प्रदर्शन जैसा था-जो खामोशी से शुरू हुआ और आक्रामक अंदाज में खत्म हुआ।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
Congress campaign Kerala Assam
केरल और असम में कांग्रेस का हाई-वोल्टेज अभियान, मेगा कैंपेन में उतरेंगे ये तीन दिग्गज नेता

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस ने केरल और असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए आक्रामक चुनावी रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों राज्यों में प्रचार अभियान की अगुवाई करेंगे।   9 अप्रैल को मतदान, 4 मई को नतीजे केरल की 140 और असम की 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि 4 मई को परिणाम घोषित किए जाएंगे। कांग्रेस केरल में यूडीएफ गठबंधन के तहत करीब 95 सीटों पर और असम में विपक्षी गठबंधन के साथ लगभग 100 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।   26 मार्च के बाद तेज होगा प्रचार अभियान पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 26 मार्च के बाद प्रचार अभियान पूरी रफ्तार पकड़ेगा। राहुल गांधी कई जनसभाओं को संबोधित करेंगे और पार्टी के सामाजिक कल्याण व विकास एजेंडे को प्रमुखता देंगे। साथ ही केरल में एलडीएफ और असम में एनडीए पर निशाना साधेंगे। महिला और स्थानीय मुद्दों पर फोकस प्रियंका गांधी महिला मतदाताओं को साधने पर विशेष ध्यान देंगी, जो दोनों राज्यों में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। पार्टी अपने घोषणापत्र में महिलाओं, स्थानीय जनजातियों और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने की तैयारी में है।   केरल में ज्यादा उम्मीद, असम में चुनौती कांग्रेस को केरल में जीत की उम्मीद ज्यादा नजर आ रही है, जबकि असम में मुकाबला कड़ा माना जा रहा है। केरल में राहुल और प्रियंका करीब 10-12 रैलियां करेंगे और सभी 14 जिलों को कवर करने की योजना है।   एनडीए को टक्कर देने की रणनीति असम में पार्टी ऊपरी क्षेत्रों की करीब 35 सीटों पर खास फोकस कर रही है। कांग्रेस का लक्ष्य एनडीए सरकार की नाकामियों को उजागर करते हुए अपने विजन को मतदाताओं तक पहुंचाना है।

Anjali Kumari मार्च 23, 2026 0
Rahul Gandhi Chaibasa visit
Rahul Gandhi चाईबासा में 22 मार्च को लगायेंगे कांग्रेसियों की क्लास

रांची। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा “संगठन सृजन” अभियान के तहत देशभर में जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) अध्यक्षों का चयन किया गया है। इसी क्रम में संगठन को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से चयनित जिला अध्यक्षों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उक्त क्रम में झारखंड एवं ओडिशा के जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों के लिए 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन झारखंड के चाईबासा स्थित ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (TRTC) में किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण शिविर 22 मार्च से 31 मार्च 2026 तक संचालित होगा। इस संबंध में जानकारी देते हुए मीडिया चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी ने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना, जिला स्तर पर नेतृत्व क्षमता का विकास करना तथा कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। शिविर में जनसंपर्क, संगठन विस्तार, राजनीतिक रणनीति एवं जनहित के मुद्दों पर प्रभावी कार्यशैली जैसे विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की विशेषता यह है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शिविर के दौरान एक दिन के लिए उपस्थित होकर जिला अध्यक्षों एवं कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे। उनके आगमन को लेकर कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है।  प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा सभी संबंधित जिला अध्यक्षों से निर्धारित समय के भीतर प्रशिक्षण स्थल पर पहुंचकर अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने की अपील की गई है। यह प्रशिक्षण शिविर संगठन को जमीनी स्तर पर सुदृढ़ करने एवं आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

Anjali Kumari मार्च 19, 2026 0
Opposition prepares no-confidence motion against India’s Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar.
विपक्ष का नया निशाना CEC: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

  नई दिल्ली: संसद में सियासी टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। लोकसभा अध्यक्ष Om Birla के खिलाफ प्रस्ताव की चर्चा के बाद अब विपक्ष ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को भी निशाने पर ले लिया है। जानकारी के अनुसार विपक्षी दल उन्हें हटाने के प्रस्ताव की तैयारी में जुट गए हैं और इसके लिए सांसदों के हस्ताक्षर जुटाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस सप्ताह ही लोकसभा और राज्यसभा के सचिवालयों में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से संबंधित नोटिस जमा कराया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार होगा जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए औपचारिक नोटिस दिया जाएगा।   TMC की अगुवाई में तैयार हो रहा प्रस्ताव मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस पहल की अगुवाई All India Trinamool Congress कर रही है। प्रस्ताव पर विपक्षी गठबंधन INDIA Alliance से जुड़े दलों के अलावा Aam Aadmi Party के सांसदों ने भी हस्ताक्षर किए हैं। सूत्रों के अनुसार नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त पर करीब आधा दर्जन आरोप लगाए गए हैं। इनमें कथित पक्षपातपूर्ण रवैया और मतदाता सूची से नाम हटाने जैसे गंभीर आरोप शामिल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि गुरुवार तक यह नोटिस संसद सचिवालय में जमा किया जा सकता है।   आवश्यक संख्या से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर बुधवार रात तक लोकसभा के लिए करीब 120 सांसदों और राज्यसभा के लिए लगभग 60 सांसदों के हस्ताक्षर जुटाए जा चुके थे। नियमों के अनुसार लोकसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को लेकर विपक्षी दलों की नाराजगी पिछले कुछ महीनों से बढ़ती रही है। तृणमूल कांग्रेस पहले से ही उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही थी। इसी बीच कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने भी ‘वोट चोरी’ अभियान के जरिए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।   स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव के बाद नया राजनीतिक मोर्चा हाल ही में विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को हटाने के प्रस्ताव का भी समर्थन किया था। हालांकि बजट सत्र के दौरान यह प्रस्ताव वॉइस वोट से खारिज हो गया। इसके बाद विपक्ष ने दोनों सदनों के सांसदों के हस्ताक्षर जुटाकर अपनी राजनीतिक एकजुटता का प्रदर्शन किया है।   मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल और सख्त है। यह प्रक्रिया लगभग उसी तरह होती है जैसे Supreme Court of India के न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है। कानून के अनुसार यह कार्रवाई केवल ‘कदाचार’ या ‘अक्षमता’ के आधार पर ही संभव है। 1968 के जजेस (इंक्वायरी) एक्ट के तहत यदि नोटिस स्वीकार हो जाता है, तो लोकसभा स्पीकर या राज्यसभा के सभापति तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करते हैं। यह समिति आरोपों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करती है। इसके बाद दोनों सदनों में इस पर चर्चा होती है। प्रस्ताव पारित करने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत आवश्यक होता है-जिसमें सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत शामिल होता है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Rahul Gandhi during Bharat Jodo Yatra linked to Savarkar defamation case hearing in Nashik court
सावरकर मानहानि मामले में राहुल गांधी को बड़ी राहत, नाशिक कोर्ट ने खत्म की पूरी कार्यवाही

  नाशिक: कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi को सावरकर मानहानि मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। नाशिक की अदालत ने इस मामले की पूरी कार्यवाही आधिकारिक रूप से समाप्त कर दी है, जिसके बाद अब इस केस में आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। यह मामला वर्ष 2022 में राहुल गांधी के बयान को लेकर दर्ज किया गया था, जो उन्होंने अपनी Bharat Jodo Yatra के दौरान दिया था। अदालत के इस फैसले के साथ ही यह मामला पूरी तरह खत्म हो गया है।   क्या था मामला नवंबर 2022 में राहुल गांधी महाराष्ट्र के वाशिम और अकोला जिलों में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान पहुंचे थे। 17 नवंबर 2022 को अकोला में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी Vinayak Damodar Savarkar से जुड़े कुछ दस्तावेज दिखाते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। राहुल गांधी के इसी बयान को आधार बनाकर नाशिक के सामाजिक कार्यकर्ता Devendra Bhutada ने उनके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी के बयान से सावरकर की छवि को नुकसान पहुंचा और इससे करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुईं।   राहुल गांधी ने क्या कहा था कांग्रेस नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सावरकर द्वारा ब्रिटिश सरकार को लिखे गए एक पत्र का उल्लेख करते हुए दावा किया था कि उन्होंने डर के कारण अंग्रेजों से माफी मांगी थी और बाद में पेंशन भी ली थी। इस बयान को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया था।   अदालत ने किया अंतिम निपटारा राहुल गांधी के वकीलों के अनुसार, नाशिक के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले का अंतिम निपटारा करते हुए पूरी कार्यवाही समाप्त कर दी है। इससे पहले जुलाई 2025 में अदालत ने राहुल गांधी को इस मामले में जमानत दी थी, लेकिन अब अदालत के फैसले के बाद यह केस पूरी तरह बंद हो गया है।   कांग्रेस ने बताया बड़ी राहत नाशिक कोर्ट के इस फैसले के बाद Rahul Gandhi एक बड़े कानूनी विवाद से मुक्त हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने इसे बड़ी राहत बताते हुए कहा कि अदालत के फैसले से मामले पर अब पूरी तरह विराम लग गया है।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
Union Home Minister Amit Shah speaking in Lok Sabha during debate on no-confidence motion against Speaker
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
Lok Sabha session amid uproar as opposition moves no-confidence motion against Speaker Om Birla
लोकसभा में हंगामे के बीच स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस, विपक्ष ने मिडिल ईस्ट संकट पर चर्चा की मांग उठाई

  संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में तीखी राजनीतिक हलचल देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष को लेकर विपक्ष ने सदन में तत्काल चर्चा की मांग की, जिससे सदन का माहौल गरमा गया। इसी बीच लोकसभा अध्यक्ष Om Birla के खिलाफ विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भी सियासी टकराव तेज हो गया। सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने मिडिल ईस्ट संकट पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग रखी। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भारत की सुरक्षा, कूटनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए इस मुद्दे पर संसद में गंभीर चर्चा जरूरी है।   अविश्वास प्रस्ताव को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार बिहार के किशनगंज से सांसद Mohammad Jawed ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव को सदन में रखने के लिए आवश्यक 50 सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे स्वीकार कर लिया गया और उस पर चर्चा कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि लोकसभा अध्यक्ष ने सदन के संचालन में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है और विपक्ष को पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष तरीके से चलनी चाहिए और सभी दलों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए।   ‘दुखी हैं, लेकिन मजबूर’ – गौरव गोगोई बहस के दौरान कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना किसी भी विपक्षी दल के लिए आसान निर्णय नहीं होता। उन्होंने कहा कि यह कदम “दुख के साथ” उठाया गया है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में विपक्ष खुद को मजबूर महसूस कर रहा है। गोगोई ने आरोप लगाया कि सदन के संचालन में संतुलन बनाए रखना अध्यक्ष की जिम्मेदारी होती है, लेकिन हाल के दिनों में विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है।   हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित इससे पहले सोमवार को भी लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा किया था। लगातार शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी और अंततः दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। जब दोपहर तीन बजे सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो पीठासीन सभापति Jagadambika Pal ने कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद को स्पीकर के खिलाफ अपना प्रस्ताव रखने के लिए कहा। हालांकि उस दौरान भी विपक्षी सदस्य पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी करते रहे और कई सांसद आसन के समीप पहुंच गए।   संसद में बढ़ा सियासी तापमान इस पूरे घटनाक्रम के चलते लोकसभा का माहौल काफी गरमाया हुआ नजर आया। एक ओर विपक्ष अंतरराष्ट्रीय संकट जैसे गंभीर मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ने राजनीतिक टकराव को और तीखा कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सदन में इस प्रस्ताव पर बहस और मतदान की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और सरकार तथा विपक्ष के बीच जारी टकराव का क्या परिणाम निकलता है।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
Rahul Gandhi interacting with students at Marian College Kuttikkanam discussing The Kerala Story 2 controversy
‘लोग केरल स्टोरी-2 नहीं देख रहे, यह अच्छी खबर’ – केरल में छात्रों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी का बयान

  कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने कहा कि फिल्म The Kerala Story 2: Goes Beyond को ज्यादा लोग नहीं देख रहे हैं और यह एक अच्छी खबर है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजकल फिल्मों, टीवी और मीडिया का इस्तेमाल तेजी से प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए किया जा रहा है। राहुल गांधी ने यह टिप्पणी Marian College Kuttikkanam में छात्रों से बातचीत के दौरान की। कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा ने फिल्मों के प्रोपेगैंडा के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर सवाल पूछा था। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि “अच्छी बात यह है कि केरल स्टोरी लोगों को खोखली लग रही है और वे इसे देखने नहीं जा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि इससे यह भी साफ होता है कि कई लोग केरल की परंपरा और संस्कृति को सही तरीके से समझ नहीं पाए हैं।   फिल्मों और मीडिया के इस्तेमाल पर जताई चिंता राहुल गांधी ने कहा कि आज फिल्मों, टेलीविजन और मीडिया का इस्तेमाल नफरत फैलाने के लिए किया जा रहा है। इनके जरिए लोगों को बदनाम करने और समाज में फूट डालने की कोशिश होती है, जिससे कुछ लोगों को फायदा मिलता है और दूसरों को नुकसान। छात्रों से बातचीत में कही ये बातें छात्रों के साथ संवाद के दौरान राहुल गांधी ने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी: उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में एक खास विचारधारा का दबाव बढ़ रहा है और कई वाइस-चांसलर की नियुक्ति उसी आधार पर की जा रही है। AI और डेटा: राहुल ने कहा कि भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अपने डेटा पर नियंत्रण रखना होगा, क्योंकि अमेरिका और चीन इस क्षेत्र में काफी आगे हैं। वैश्विक राजनीति: उन्होंने कहा कि वेस्ट एशिया में तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है, क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा उत्पादन का केंद्र है। व्यक्तिगत रुचियां: राहुल गांधी ने बताया कि उन्हें शतरंज और मार्शल आर्ट पसंद है और फिट रहने के लिए वे तैराकी, दौड़ और व्यायाम करते हैं। कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं केसी वेणुगोपाल और डीन कुरियाकोस के साथ केरल के पारंपरिक मार्शल आर्ट कलारीपयट्टू के कुछ स्टेप्स भी आजमाए।  

surbhi मार्च 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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surbhi मार्च 31, 2026 0