Railway Vacancy 2026

Railway Recruitment Board notification for Section Controller Recruitment 2026 with 119 vacancies for graduate candidates.
RRB Section Controller Recruitment 2026: रेलवे में सेक्शन कंट्रोलर के 119 पदों पर भर्ती, आज से आवेदन शुरू; जानें योग्यता, उम्र सीमा और पूरी डिटेल

RRB Section Controller Recruitment 2026: रेलवे में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने सेक्शन कंट्रोलर के 119 पदों पर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के लिए 15 जुलाई 2026 से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि आवेदन करने की अंतिम तिथि 14 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। इस भर्ती की खास बात यह है कि उम्मीदवारों का चयन मुख्य रूप से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के आधार पर किया जाएगा। हालांकि, अंतिम चयन से पहले डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल परीक्षण भी अनिवार्य होगा। महत्वपूर्ण तिथियां ऑनलाइन आवेदन शुरू: 15 जुलाई 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 14 अगस्त 2026 (रात 11:59 बजे तक) आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि: 14 अगस्त 2026 एप्लिकेशन करेक्शन विंडो: बाद में घोषित होगी CBT परीक्षा की तिथि: बाद में घोषित होगी एडमिट कार्ड: परीक्षा से पहले जारी किए जाएंगे कुल रिक्तियां रेलवे भर्ती बोर्ड ने इस भर्ती अभियान के तहत 119 पदों पर नियुक्तियां निकाली हैं। श्रेणीवार पदों का विवरण श्रेणी पद सामान्य (UR) 50 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) 29 अनुसूचित जाति (SC) 19 अनुसूचित जनजाति (ST) 12 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) 9 कुल 119 शैक्षणिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) की डिग्री होना अनिवार्य है। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 20 वर्ष अधिकतम आयु: 33 वर्ष आरक्षण के अनुसार आयु में छूट: SC/ST: 5 वर्ष OBC: 3 वर्ष अन्य आरक्षित वर्गों को नियमानुसार छूट मिलेगी। मेडिकल फिटनेस पर विशेष ध्यान इस भर्ती में मेडिकल मानकों का विशेष महत्व है। रेलवे के निर्धारित मेडिकल मानदंडों के अनुसार: कमजोर दृष्टि वाले उम्मीदवार पात्र नहीं होंगे। जिन उम्मीदवारों ने LASIK या अन्य प्रकार की आंखों की सर्जरी कराई है, वे इस भर्ती के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे। अंतिम पात्रता का निर्धारण रेलवे के मेडिकल परीक्षण के आधार पर किया जाएगा। आवेदन कैसे करें? रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। Section Controller Recruitment 2026 लिंक पर क्लिक करें। नए उम्मीदवार पहले रजिस्ट्रेशन करें। आवेदन पत्र में सभी आवश्यक जानकारी भरें। जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें। फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। चयन प्रक्रिया उम्मीदवारों का चयन निम्न चरणों के आधार पर किया जाएगा: कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन मेडिकल एग्जामिनेशन आवेदन शुल्क सामान्य / OBC / EWS आवेदन शुल्क: ₹500 CBT परीक्षा में शामिल होने पर ₹400 (बैंक शुल्क काटकर) वापस किए जाएंगे। SC / ST / PwBD / पूर्व सैनिक / महिला / ट्रांसजेंडर / अल्पसंख्यक / EBC आवेदन शुल्क: ₹250 भर्ती का संक्षिप्त विवरण भर्ती संस्था: रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) पद: सेक्शन कंट्रोलर कुल पद: 119 आवेदन शुरू: 15 जुलाई 2026 अंतिम तिथि: 14 अगस्त 2026 योग्यता: स्नातक आयु सीमा: 20–33 वर्ष चयन प्रक्रिया: CBT, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट रेलवे में कंट्रोलिंग और ऑपरेशन से जुड़े पद पर करियर बनाने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती एक महत्वपूर्ण अवसर है। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को आधिकारिक नोटिफिकेशन में दिए गए मेडिकल मानकों, योग्यता और अन्य सभी शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़ लेना चाहिए।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
North East Frontier Railway apprentice recruitment notification highlighting 6,777 vacancies for 10th pass and ITI-qualified candidates.
Railway Vacancy 2026: रेलवे में 6777 अप्रेंटिस पदों पर भर्ती, 10वीं पास और ITI उम्मीदवारों के लिए सुनहरा मौका

Railway Apprentice Recruitment 2026: रेलवे में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) ने वर्ष 2026 के लिए 6777 अप्रेंटिस पदों पर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती के तहत मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इंजीनियरिंग, अकाउंट्स, मेडिकल, पर्सनल सहित कई विभागों में एक वर्ष की अप्रेंटिसशिप कराई जाएगी। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 20 जुलाई 2026 से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया 19 अगस्त 2026 तक जारी रहेगी। चयनित अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग के दौरान हर महीने स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। महत्वपूर्ण तिथियां आवेदन शुरू: 20 जुलाई 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 19 अगस्त 2026 कुल पद कुल रिक्तियां: 6777 यूनिट वाइज वैकेंसी यूनिट पद कटिहार (KIR) एवं तिंधारिया वर्कशॉप 1103 अलीपुरद्वार 651 रंगिया 750 लुमडिंग 1274 टिनसुकिया 860 न्यू बोंगाईगांव वर्कशॉप एवं इंजीनियरिंग वर्कशॉप 881 डिब्रूगढ़ वर्कशॉप 763 मुख्यालय मालीगांव (विभिन्न विभाग) 495 कुल 6777 शैक्षणिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं (मैट्रिक) में न्यूनतम 50% अंक। संबंधित ट्रेड में NCVT/SCVT से ITI सर्टिफिकेट अनिवार्य। मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नीशियन (पैथोलॉजी एवं रेडियोलॉजी) पदों के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के साथ 12वीं भी आवश्यक है। एससी, एसटी और PwBD उम्मीदवारों को 10वीं में न्यूनतम अंकों की शर्त से छूट मिलेगी। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 15 वर्ष अधिकतम आयु: 24 वर्ष आरक्षण के अनुसार आयु में छूट: SC/ST: 5 वर्ष OBC: 3 वर्ष PwBD: 10 वर्ष आवश्यक दस्तावेज 10वीं की मार्कशीट ITI फाइनल मार्कशीट NCVT/SCVT ट्रेड सर्टिफिकेट 12वीं की मार्कशीट (जहां लागू हो) पासिंग सर्टिफिकेट एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज स्टाइपेंड चयनित अप्रेंटिस उम्मीदवारों को प्रशिक्षण अवधि के दौरान कम से कम ₹9,600 प्रति माह स्टाइपेंड दिया जाएगा। चयन प्रक्रिया रेलवे इस भर्ती में कोई लिखित परीक्षा आयोजित नहीं करेगा। चयन पूरी तरह मेरिट के आधार पर होगा। 10वीं और ITI में प्राप्त अंकों के औसत के आधार पर मेरिट तैयार होगी। समान अंक होने पर अधिक आयु वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता मिलेगी। लैब टेक्नीशियन पदों के लिए 10वीं एवं 12वीं (PCB) के अंकों के आधार पर मेरिट बनेगी। मेरिट लिस्ट के बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट होगा। इसके बाद अंतिम चयन सूची जारी की जाएगी। आवेदन शुल्क सामान्य/OBC/EWS उम्मीदवार: ₹100 SC/ST/PwBD/EBC एवं महिला उम्मीदवार: कोई आवेदन शुल्क नहीं भर्ती का संक्षिप्त विवरण भर्ती संस्था: नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) पद: अप्रेंटिस कुल पद: 6777 योग्यता: 10वीं + ITI आयु सीमा: 15–24 वर्ष आवेदन प्रारंभ: 20 जुलाई 2026 अंतिम तिथि: 19 अगस्त 2026 प्रशिक्षण अवधि: 1 वर्ष न्यूनतम स्टाइपेंड: ₹9,600 प्रतिमाह यदि आप 10वीं पास हैं और संबंधित ट्रेड में ITI कर चुके हैं, तो रेलवे में अनुभव और भविष्य के करियर के लिए यह भर्ती एक बेहतरीन अवसर साबित हो सकती है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन शुरू होते ही सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें और अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय पर आवेदन करें।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0