Rajya Sabha Elections 2026

Rajya Sabha Elections
राज्यसभा चुनाव: क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए एनडीए ने विधायकों को होटल में किया शिफ्ट

रांची। झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपने सभी विधायकों को रांची के होटल रेडिसन ब्लू में ठहराने का फैसला किया है। चुनाव संपन्न होने तक सभी विधायक एक साथ इसी होटल में रहेंगे और यहीं से चुनावी रणनीति तैयार की जाएगी।   एक साथ रहेंगे, एक साथ करेंगे मतदान गठबंधन नेतृत्व ने सभी एनडीए विधायकों को निर्धारित समय तक होटल पहुंचने के निर्देश दिए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मतदान तक सभी विधायक एक ही स्थान पर रहेंगे, ताकि संगठनात्मक एकजुटता बनी रहे और किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोका जा सके। मतदान के दिन सभी विधायक होटल से एक साथ विधानसभा के लिए रवाना होंगे। इस दौरान उन्हें राज्यसभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया और वरीयता क्रम के अनुसार वोट डालने का प्रशिक्षण भी दिया जा सकता है।   परिमल नथवाणी की जीत पर पूरा जोर एनडीए इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए प्रथम वरीयता के 28 मतों की आवश्यकता होती है। फिलहाल एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं, जिनमें भाजपा के 21 तथा आजसू, लोजपा और जदयू के एक-एक विधायक शामिल हैं।   चार अतिरिक्त वोट जुटाने की रणनीति बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए एनडीए को अभी चार और वोटों की जरूरत है। माना जा रहा है कि होटल में आयोजित बैठकों के दौरान इन्हीं अतिरिक्त मतों के समर्थन को लेकर रणनीति तैयार की जाएगी। गठबंधन नेतृत्व का उद्देश्य न केवल अपने विधायकों को एकजुट रखना है, बल्कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की राजनीतिक टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना को भी पूरी तरह खत्म करना है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव से पहले एनडीए की यह बाड़ेबंदी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

anjali kumari जून 16, 2026 0
Rajya Sabha elections 2026
राज्यसभा चुनाव से पहले 16 को कांग्रेस व JMM और 17 जून को गठबंधन की बैठक

रांची। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन अंतिम तैयारी में जुटा है। कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू ने दावा किया है कि महागठबंधन दोनों सीटों पर जीत दर्ज करेगा। इसे लेकर 16 जून को कांग्रेस नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें चुनावी रणनीति और विधायकों के समन्वय पर चर्चा होगी। वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा भी बैठक कर रणनीति बनायेगा।  17 जून को होगी महागठबंधन की अहम बैठक राज्यसभा चुनाव को लेकर 17 जून को महागठबंधन की संयुक्त बैठक होगी। इस बैठक में कांग्रेस, झामुमो और गठबंधन के अन्य घटक दलों के नेता शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि चुनाव से एक दिन पहले होने वाली यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण होगी, जिसमें वोटिंग की रणनीति और सभी विधायकों के बीच समन्वय को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। ये बैठकें सीएम आवास में 6 बजे से होगी।  कौन-कौन है प्रत्याशी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि झामुमो ने बैजनाथ राम को मैदान में उतारा है। वहीं भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नाथवाणी चुनाव लड़ रहे हैं। महागठबंधन नेतृत्व को भरोसा है कि गठबंधन के दोनों उम्मीदवार जीत हासिल करेंगे।

anjali kumari जून 15, 2026 0
Rajya Sabha Elections 2026
राज्यसभा चुनाव 2026: जेएमएम-कांग्रेस उम्मीदवारों ने भरा नामांकन

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां सोमवार को चरम पर रहीं। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि पर सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र जमा कर दिया। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की ओर से बैद्यनाथ राम और कांग्रेस की ओर से प्रणव झा ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश की। दोनों उम्मीदवारों के नामांकन के साथ ही राज्य की राजनीति में चुनावी माहौल और गर्म हो गया है।   मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी रही खास नामांकन प्रक्रिया के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहे। उन्होंने दोनों प्रत्याशियों का स्वागत करते हुए गठबंधन की मजबूती और एकजुटता का संदेश दिया। उनके साथ गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन की एकजुटता का स्पष्ट संकेत है।   जीत को लेकर उम्मीदवारों ने जताया भरोसा नामांकन दाखिल करने के बाद बैद्यनाथ राम और प्रणव झा ने अपनी जीत को लेकर विश्वास जताया। दोनों नेताओं ने कहा कि उन्हें गठबंधन के सभी विधायकों का समर्थन प्राप्त है और वे राज्य के हितों को राज्यसभा में मजबूती से उठाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने महागठबंधन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का भरोसा भी दिया।   समर्थकों की रही भारी मौजूदगी नामांकन केंद्र के बाहर सुबह से ही समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भीड़ देखने को मिली। चुनावी नारों और उत्साह के बीच दोनों उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान गठबंधन के नेताओं ने विपक्ष को भी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की।   अब चुनावी समीकरणों पर टिकी निगाहें नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राजनीतिक दलों और पर्यवेक्षकों की नजर आगामी चुनावी प्रक्रिया पर टिकी है। राज्यसभा सीटों के लिए संख्या बल और समर्थन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। गठबंधन को उम्मीद है कि उसके उम्मीदवार आसानी से जीत दर्ज करेंगे, जबकि विपक्ष भी अपनी रणनीति पर नजर बनाए हुए है।

Unknown जून 8, 2026 0
JMM Rajya Sabha Ticket
JMM ने बैजनाथ राम को थमाया राज्यसभा चुनाव का टिकट

रांची। राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी सरगर्मी के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने एक प्रत्याशी की घोषणा कर दी है। पार्टी विधायक बैजनाथ राम को अपना पहला उम्मीदवार बनाया है।  पार्टी का कहना है कि देर शाम तक दूसरे प्रत्याशी की भी घोषणा हो सकती है। मालूम हो कि आज शाम ही प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही झामुम ने प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दी है।

Unknown जून 6, 2026 0
Rajya Sabha Parliament building view as 2026 elections announced for 37 seats across 10 states
राज्यसभा चुनाव 2026: 10 राज्यों की 37 सीटों पर वोटिंग, कई दिग्गजों का निर्विरोध चुना जाना तय

  नई दिल्ली: देश में 2026 Rajya Sabha Elections को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है। इन राज्यों में Maharashtra, Tamil Nadu, West Bengal, Bihar, Assam, Odisha, Telangana, Chhattisgarh, Haryana और Himachal Pradesh शामिल हैं। चुनाव आयोग के अनुसार नामांकन की अंतिम तारीख 5 मार्च और नाम वापसी की अंतिम तिथि 9 मार्च थी। मतदान 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना की जाएगी। कई राज्यों में दिग्गजों का निर्विरोध चुना जाना तय कई राज्यों में राजनीतिक समीकरण पहले से तय होने के कारण कई बड़े नेताओं के निर्विरोध राज्यसभा पहुंचने की संभावना है। बिहार: बिहार की पांच सीटों में से चार पर NDA की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar और भाजपा नेता Nitin Naveen का राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि पांचवीं सीट पर Rashtriya Janata Dal ने A. D. Singh को मैदान में उतारकर मुकाबला दिलचस्प बना दिया है। महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की 7 सीटों में से कई सीटों पर बड़े नेताओं का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। इनमें Sharad Pawar, Ramdas Athawale और भाजपा के Vinod Tawde के नाम प्रमुख हैं। असम: असम की तीन सीटों पर NDA की स्थिति मजबूत बताई जा रही है। यहां Jogen Mohan, Terash Gowalla और Pramod Boro के निर्विरोध चुने जाने की संभावना जताई जा रही है। तमिलनाडु: तमिलनाडु में छह उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना है। इनमें Tiruchi Siva (DMK) और M. Thambidurai (AIADMK) शामिल हैं। छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा को एक-एक सीट मिलने की संभावना है। कांग्रेस ने Phulo Devi Netam को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने Laxmi Verma को मैदान में उतारा है। जहां मुकाबला दिलचस्प कुछ राज्यों में मुकाबला काफी रोचक बना हुआ है। बिहार: बिहार में पांचवीं सीट पर मुकाबला कड़ा माना जा रहा है। आरजेडी के उम्मीदवार ए.डी. सिंह के मैदान में उतरने से NDA को अतिरिक्त समर्थन जुटाने की जरूरत पड़ सकती है। ओडिशा: ओडिशा में चार सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई है। कांग्रेस ने Biju Janata Dal का समर्थन किया है, जबकि भाजपा ने निर्दलीय नेता Dilip Ray को समर्थन दिया है। हरियाणा: हरियाणा की दो सीटों पर चुनाव होना है। भाजपा ने एक उम्मीदवार उतारा है, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों के बीच मुकाबला होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के राज्यसभा चुनाव केंद्र और राज्यों के राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकते हैं। कई जगह NDA की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है, जबकि विपक्ष भी जहां मौका मिल रहा है, वहां कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है। बिहार, ओडिशा और हरियाणा जैसे राज्यों में चुनावी रोमांच सबसे ज्यादा देखने को मिल सकता है।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
Congress announces six Rajya Sabha candidates for 2026
राज्यसभा चुनाव 2026: कांग्रेस ने जारी की 6 उम्मीदवारों की सूची, अभिषेक मनु सिंघवी और नरेंद्र रेड्डी को मिला टिकट

कांग्रेस ने घोषित किए राज्यसभा उम्मीदवार आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने अपने छह उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। पार्टी की ओर से जारी सूची में अलग-अलग राज्यों से नेताओं को मैदान में उतारा गया है। घोषित उम्मीदवारों में तेलंगाना से अभिषेक मनु सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी को टिकट दिया गया है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ से फूलो देवी नेताम, हरियाणा से करमवीर सिंह बौद्ध, हिमाचल प्रदेश से अनुराग शर्मा और तमिलनाडु से एम क्रिस्टोफर तिलक को उम्मीदवार बनाया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी के बाद इन नामों की घोषणा की गई। पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि संबंधित राज्यों के लिए उम्मीदवारों को अंतिम रूप दे दिया गया है। तेलंगाना में खाली हो रही हैं दो सीटें तेलंगाना में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होने जा रहा है। मौजूदा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी और केआर सुरेश रेड्डी का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। राज्य में फिलहाल कांग्रेस की सरकार होने और विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल के कारण अभिषेक मनु सिंघवी के दोबारा राज्यसभा पहुंचने की संभावना मजबूत मानी जा रही है। वेम नरेंद्र रेड्डी ने जताया आभार राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पूर्व विधायक वेम नरेंद्र रेड्डी ने पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार जताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी समेत कई नेताओं का धन्यवाद किया। 16 मार्च को होगा राज्यसभा चुनाव निर्वाचन आयोग के अनुसार राज्यसभा की 37 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव 16 मार्च को आयोजित किए जाएंगे। यह चुनाव देश के 10 राज्यों-महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और बिहार-में होंगे। इन चुनावों की जरूरत इसलिए पड़ी है क्योंकि इन राज्यों से चुने गए कई मौजूदा सांसदों का कार्यकाल इस साल समाप्त हो रहा है। सीटों के हिसाब से महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 7 सीटों पर मतदान होगा। वहीं तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और बिहार में 6-6 सीटें खाली हो रही हैं। ओडिशा में 4, असम में 3 और छत्तीसगढ़, हरियाणा तथा तेलंगाना में 2-2 सीटों के लिए चुनाव होंगे। हिमाचल प्रदेश में एक सीट पर मतदान कराया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेलंगाना, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है और पार्टी यहां अपनी सीटें बढ़ाने की कोशिश करेगी।  

surbhi मार्च 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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