रांची। रांची यूनिवर्सिटी (आरयू) प्रशासन ने अपने अंतर्गत आने वाले 24 अंगीभूत कॉलेजों की 43,530 सीटों पर स्नातक (UG) एडमिशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह प्रक्रिया शैक्षणिक सत्र 2026-30 (चार वर्षीय रेगुलर कोर्स) और वोकेशनल कोर्स सत्र 2026-29 के लिए शुरू की गई है। इच्छुक छात्र चांसलर पोर्टल के माध्यम से 12 जून से 29 जून तक ऑनलाइन आवेदन भर सकेंगे। बड़ा बदलाव: बॉटनी और जूलॉजी की बजाय 'लाइफ साइंस'... स्नातक स्तर पर इस सत्र से एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब बॉटनी और जूलॉजी को अलग-अलग विषय के रूप में हटाकर 'लाइफ साइंस' के तहत शामिल कर दिया गया है। ऐसे में इस वर्ष एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों को बॉटनी या जूलॉजी के बजाय 'लाइफ साइंस' विषय के लिए आवेदन करना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत लिए गए इस फैसले का असर सिर्फ अंगीभूत कॉलेजों तक ही सीमित नहीं रहेगा। आरयू से संबद्ध और अल्पसंख्यक कॉलेजों में नामांकन के लिए आवेदन प्रक्रिया पहले से चल रही है, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने पहले ही बॉटनी और जूलॉजी विषय चुनकर आवेदन कर दिया है। अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद, इन पहले से आए आवेदनों को भी नई प्रणाली के अनुरूप लाइफ साइंस में समायोजित किया जाएगा। एडमिशन शेड्यूल (यूजी) आवेदन की शुरुआत: 12 जून आवेदन की अंतिम तिथि: 29 जून फर्स्ट सेलेक्शन लिस्ट: 3 जुलाई डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: 4 से 14 जुलाई 24 कॉलेजों में सीटों की संख्या 1 मारवाड़ी कॉलेज 3700 2 केओ कॉलेज गुमला 3240 3 रांची वीमेंस कॉलेज 3210 4 एसएसएम कॉलेज 3100 5 बीएस कॉलेज लोहरदगा 2940 6 बिरसा कॉलेज खूंटी 2640 7 आरएलएसवाई कॉलेज 2640 8 पीपीके कॉलेज बुंडू 2580 9 डोरंडा कॉलेज 2440 10 मांडर कॉलेज 2100 11 सिमडेगा कॉलेज सिमडेगा 2040 12 जेएन कॉलेज 1740 13 केसीबी कॉलेज बेड़ो 1740 14 बीएन जलान कॉलेज सिसई 1320 15 डिग्री कॉलेज, खिजरी 900 16 डिग्री कॉलेज सिल्ली 900 17 डिग्री कॉलेज विष्णुपुर 900 18 डिग्री कॉलेज तोरपा 900 19 डिग्री कॉलेज कोलेबिरा 900 20 मॉडल कॉलेज गुमला 720 21 वीमेंस कॉलेज गुमला 720 22 वीमेंस कॉलेज खूंटी 720 23 वीमेंस कॉलेज लोहरदगा 720 24 वीमेंस कॉलेज सिमडेगा 720
रांची। रांची विश्वविद्यालय (आरयू) अपने शैक्षणिक ढांचे में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रहा है। कुलपति प्रो. सरोज शर्मा की अध्यक्षता में 17 जून को होने वाली एकेडमिक काउंसिल की बैठक में 27 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। इनमें प्रोफेशनल विभागों को स्कूल मॉडल में बदलने, नए रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम शुरू करने, करियर काउंसिलिंग सेंटर की स्थापना, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम लागू करने और विभिन्न पाठ्यक्रमों में संशोधन जैसे अहम निर्णय शामिल हैं। स्कूल मॉडल के तहत बदलेगी विभागों की पहचान नई व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालय के चार प्रोफेशनल और वोकेशनल विभागों को 'यूनिवर्सिटी स्कूल' के रूप में विकसित किया जाएगा। इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (आईएमएस) का नाम बदलकर यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज किया जाएगा। वहीं एमसीए और एमएससी आईटी विभागों का विलय कर यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी बनाया जाएगा। इसके अलावा मास कम्युनिकेशन विभाग को यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन तथा लीगल स्टडीज विभाग को यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। पहली बार शुरू होगी डेटा साइंस की पढ़ाई रांची विश्वविद्यालय पहली बार एमएससी डेटा साइंस और एमए/एमएससी स्टैटिस्टिक्स के नए पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे तेजी से उभरते क्षेत्रों में बढ़ती मांग को देखते हुए इन कोर्सों को तैयार किया गया है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों को आधुनिक तकनीकी कौशल से लैस कर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप होंगे बदलाव बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की नई गाइडलाइन के अनुरूप पाठ्यक्रमों और प्रमाणपत्रों के स्वरूप में बदलाव पर भी निर्णय लिया जाएगा। साथ ही करियर काउंसिलिंग सेंटर, दो नए विशेष केंद्रों की स्थापना और गुमला के कार्तिक उरांव कॉलेज सहित अन्य संस्थानों में शैक्षणिक संसाधनों के विस्तार के प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल हैं।
रांची। आरयू द्वारा स्नातकोत्तर (PG) सत्र 2025-27 में नामांकन के लिए पहली सेलेक्शन लिस्ट 13 जून को जारी की जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और नामांकन 15 से 23 जून तक होगा। इसके बाद दूसरी सेलेक्शन लिस्ट 25 जून को जारी की जाएगी।
रांची। रांची यूनिवर्सिटी (RU) ने स्नातकोत्तर (PG) सत्र 2025-27 में नामांकन प्रक्रिया को लेकर नया शेड्यूल जारी किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अब पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए पहली मेरिट लिस्ट 13 जून को प्रकाशित की जाएगी। शेड्यूल में किए गए इस बदलाव के बाद हजारों छात्र-छात्राओं की निगाहें अब पहली मेरिट सूची पर टिकी हुई हैं। मेरिट लिस्ट के बाद होगा दस्तावेज सत्यापन विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि पहली मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को निर्धारित समय के भीतर संबंधित पीजी विभागों और कॉलेजों में नामांकन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए दस्तावेज सत्यापन भी किया जाएगा। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपने सभी जरूरी प्रमाण पत्र और दस्तावेज पहले से तैयार रखें, ताकि नामांकन के समय किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। पारदर्शी और व्यवस्थित प्रक्रिया पर जोर रांची यूनिवर्सिटी का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से शेड्यूल में बदलाव किया गया है। विश्वविद्यालय चरणबद्ध तरीके से नामांकन की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराएगा। जिन छात्रों का नाम पहली मेरिट सूची में शामिल नहीं होगा, उन्हें आगामी मेरिट लिस्ट का इंतजार करना होगा। कॉलेजों और विभागों में बढ़ी तैयारियां पहली मेरिट लिस्ट की नई तारीख घोषित होने के बाद विश्वविद्यालय के विभिन्न पीजी विभागों और संबद्ध कॉलेजों में तैयारियां तेज हो गई हैं। छात्र-छात्राएं भी लगातार प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि सभी प्रक्रियाएं तय समय के अनुसार पूरी की जाएंगी। छात्रों से आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने की अपील विश्वविद्यालय ने छात्रों को सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट और पोर्टल पर जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। किसी भी अफवाह या भ्रामक जानकारी से बचते हुए विश्वविद्यालय के निर्देशों का पालन करें, ताकि नामांकन प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सके।
रांची। रांची यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए बड़ी खबर है। अब यहां के कॉलेजों में जूलॉजी और बॉटनी के विषय बंद किये जा रहे हैं। आगामी नये सेशन से इन विषयों की पढ़ाई बंद हो जायेगी। रांची यूनिवर्सिटी में नये सत्र से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब ग्रेजुएशन के विद्यार्थी जूलॉजी और बॉटनी विषय अलग-अलग नहीं पढ़ेगे, बल्कि इसकी जगह एक ही विषय पढ़ेंगे लाइफ साइंस। इसके अलावा एसएस मेमोरियल कॉलेज में विदेशी भाषाओं की पढ़ाई भी होगी। इनमें फ्रेंच, जर्मन और स्पेनिश भाषा शामिल है। इसी के आधार पर विवि के कॉलेजों में नामांकन लिया जायेगा। विद्यार्थी की जिन विषयों में रूचि होगी वो उसी के अनुसार कॉलेज चुन सकेंगे। इसके अलावा कालेजों में जो सीटें तय की गयी है, उसमें विज्ञान की सीटों में बढोत्तरी की गयी है और कला संकाय की सीटों में कमी कर दी गयी है। इन कॉलेजों में होगी लाइफ साइंस की पढ़ाई रांची यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में जूलॉजी और बॉटनी की पढ़ाई अलग-अलग नहीं होगी। विद्यार्थियों को दोनों विषयों को मिलाकर एक ही विषय लाइफ साइंस की पढ़ाई होगी। वहीं ये कोर्स कुछ ही कॉलेजों में संचालित होगा। शहरी क्षेत्र के कॉलेजों में लाइफ साइंस की पढ़ाई केवल डोरंडा कालेज और मारवाड़ी कालेज में ही होगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र के कॉलेजों में केसीबी कॉलेज बेडो, पीपीके कालेज बुंडू, केओ कालेज गुमला, बिरसा कॉलेज खूंटी, बीएस कॉलेज लोहरदगा और सिमडेगा कॉलेज सिमडेगा शामिल है। कला की तुलना में बढ़ गयी विज्ञान संकाय की सीटे वहीं विवि के कालेजों में सभी विषयों की सीटें कम की गयी हैं। लेकिन, कला संकाय की तुलना में विज्ञान की सीटें बढ़ा दी गयी है। उदाहरण के लिए डोरंडा कालेज में फिजिक्स और केमेस्ट्री में जहां 120 सीटों पर नामांकन लिया जायेगा, वहीं हिंदी और इंग्लिश में केवल 60 सीटों पर ही नामांकन होगा। वहीं मारवाड़ी कालेज में फिजिक्स और केमेस्ट्री में जहां 60-60 सीटों पर नामांकन होगा, वहीं यहां हिंदी और इंग्लिश में 240-240 सीटों पर नामांकन होगा। हालांकि विवि अधिकारियों के मुताबिक, अभी सरकार की ओर से निर्देश का इंतजार है। किस कॉलेज में कितने सीटों पर होगा नामांकन कॉलेज विषय पहले की सीटें अब की सीटें मारवाड़ी कॉलेज वाणिज्य 1800 540 मारवाड़ी कॉलेज इकोनॉमिक्स 900 240 मारवाड़ी कॉलेज बीबीए 900 660 मारवाड़ी कॉलेज हिंदी 165 240 मारवाड़ी कॉलेज इंग्लिश 132 240 मारवाड़ी कॉलेज फिजिक्स 110 60 मारवाड़ी कॉलेज केमेस्ट्री 110 60 मारवाड़ी कॉलेज मैथ्स 165 120 मारवाड़ी कॉलेज लाइफ साइंस 110 120 मारवाड़ी कॉलेज हिस्ट्री 165 240 मारवाड़ी कॉलेज पोल साइंस 165 120 मारवाड़ी कॉलेज सोशियोलाजी 44 60 मारवाड़ी कॉलेज उर्दू 44 120 मारवाड़ी कॉलेज Geography 66 120 मारवाड़ी कॉलेज साइकोलाजी 110 120 डोरंडा कॉलेज फिजिक्स 240 120 डोरंडा कॉलेज केमेस्ट्री 240 120 डोरंडा कॉलेज मैथ्स 360 120 डोरंडा कॉलेज स्टैटिक्स 120 60 डोरंडा कॉलेज लाइफ साइंस 360 180 डोरंडा कॉलेज जियोलाजी 120 120 डोरंडा कॉलेज Geography 360 180 डोरंडा कॉलेज इवीएस 120 60 डोरंडा कॉलेज हिंदी 200 60 डोरंडा कॉलेज इंग्लिश 150 60 डोरंडा कॉलेज हिस्ट्री 250 180 डोरंडा कॉलेज पोल साइंस 250 180 डोरंडा कॉलेज साइकोलाजी 100 60 डोरंडा कॉलेज उर्दू 100 60 डोरंडा कॉलेज वाणिज्य 250 180 जेएन कॉलेज धुर्वा हिस्ट्री 360 240 जेएन कॉलेज धुर्वा पोल साइंस 360 240 जेएन कॉलेज धुर्वा साइकोलाजी 120 120 जेएन कॉलेज धुर्वा हिंदी 240 180 जेएन कॉलेज धुर्वा इंग्लिश 240 120 रामलखन सिंह यादव कॉलेज Geography 240 180 रामलखन सिंह यादव कॉलेज हिस्ट्री 480 360 रामलखन सिंह यादव कॉलेज पोल साइंस 480 360 रामलखन सिंह यादव कॉलेज सोशियोलाजी 180 120 रामलखन सिंह यादव कॉलेज फिलासफी 120 60 रामलखन सिंह यादव कॉलेज एंथ्रोपोलाजी 120 120 रामलखन सिंह यादव कॉलेज हिंदी 360 360 रामलखन सिंह यादव कॉलेज इंग्लिश 360 360 रामलखन सिंह यादव कॉलेज कामर्स 200 240 एसएस मेमोरियल कॉलेज Geography 240 240 एसएस मेमोरियल कॉलेज हिस्ट्री 480 420 एसएस मेमोरियल कॉलेज पोल साइंस 480 420 एसएस मेमोरियल कॉलेज सोशियोलाजी 240 180 एसएस मेमोरियल कॉलेज साइकोलाजी 240 180 एसएस मेमोरियल कॉलेज हिंदी 360 360 एसएस मेमोरियल कॉलेज English 360 360 एसएसएम कॉलेज उर्दू 240 60 एसएसएम कॉलेज कामर्स 200 240 एसएसएम कॉलेज फ्रेंच 00 60 एसएसएम कॉलेज स्पेनिश 00 60 एसएसएम कॉलेज जर्मन 00 60
रांची। रांची विश्वविद्यालय में प्रस्तावित क्लस्टर सिस्टम को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राज्य सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा इस नई व्यवस्था को फिलहाल रांची विश्वविद्यालय में लागू करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इस फैसले के खिलाफ शिक्षक, कर्मचारी और छात्र संगठन खुलकर विरोध में उतर आए हैं। बढ़ते विरोध के बीच स्नातक नामांकन प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है और छात्रों को दाखिले के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव Dr. Guru Charan Sahu ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार क्लस्टर व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्नातक नामांकन शुरू नहीं होगा। पहले विषयों और कॉलेजों के बीच क्लस्टर व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा, उसके बाद ही चांसलर पोर्टल खोला जाएगा। क्या है क्लस्टर सिस्टम क्लस्टर सिस्टम उच्च शिक्षा की ऐसी व्यवस्था है, जिसमें अलग-अलग कॉलेजों को विषय आधारित विशेषज्ञता के अनुसार विकसित किया जाता है। प्रस्तावित योजना के तहत Doranda College में विज्ञान, Marwari College में कॉमर्स और मैनेजमेंट, जबकि J.N. College में सोशल साइंस और भाषा विषयों की पढ़ाई केंद्रित करने की योजना है। विरोध तेज, छात्रों ने जताई चिंता Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad और AJSU Chhatra Sangh समेत कई छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि छात्रों को अलग-अलग विषयों के लिए विभिन्न कॉलेजों में जाना पड़ेगा, जिससे आर्थिक और व्यावहारिक परेशानियां बढ़ेंगी। रांची विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू Dr. Sudesh Kumar Sahu ने भी इस व्यवस्था की व्यावहारिकता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP) और क्लस्टर सिस्टम की कार्यप्रणाली अलग-अलग है, जिन्हें एक साथ लागू करने से शैक्षणिक व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची स्थित रांची विश्वविद्यालय (आरयू) में वित्तीय प्रबंधन को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। हालिया ऑडिट रिपोर्ट ने विश्वविद्यालय और उससे जुड़े कॉलेजों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 55 लाख रुपये का हिसाब-किताब ठीक से दर्ज नहीं किया गया, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है। ऑडिट में पाया गया कि कई चेक की एंट्री समय पर कैशबुक में नहीं की गई। कुछ मामलों में 60 दिन से लेकर 1000 दिन तक की देरी से एंट्री दर्ज की गई। कुल 62 मामलों में 32.55 लाख रुपये की राशि देर से दर्ज हुई। यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि वित्तीय अनुशासन की गंभीर अनदेखी मानी जा रही है। 54.99 लाख रुपये का रिकॉर्ड गायब सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि चार मामलों में 54.99 लाख रुपये की एंट्री कैशबुक में की ही नहीं गई। इसमें 32.21 लाख, 20.59 लाख, 1.67 लाख और 51 हजार रुपये के चेक शामिल हैं। इसका मतलब यह राशि आधिकारिक लेखा रिकॉर्ड से पूरी तरह बाहर रही, जिससे गबन या दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ट्रेजरी कोड के नियमों का उल्लंघन यह मामला झारखंड ट्रेजरी कोड के नियम 19 और 21 के सीधे उल्लंघन का है। इन नियमों के अनुसार हर वित्तीय लेन-देन को तुरंत कैशबुक में दर्ज करना अनिवार्य होता है। लेकिन यहां वर्षों तक एंट्री लंबित रही, जो सिस्टम की गंभीर खामी को दर्शाता है। रिकॉर्ड में विसंगतियां और डुप्लीकेट एंट्री ऑडिट में यह भी सामने आया कि कुछ चेक नंबर (जैसे 678311) एक से अधिक बार दर्ज किए गए। इससे डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। ऐसी गड़बड़ियां यह संकेत देती हैं कि लेखा प्रबंधन प्रणाली में गंभीर त्रुटियां मौजूद हैं। मामले की गंभीरता और आगे की कार्रवाई कैशबुक किसी भी संस्थान की वित्तीय रीढ़ होती है। इसमें गड़बड़ी का मतलब है कि धन की निगरानी कमजोर है। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा सकता है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई संभव है।
रांची। रांची यूनिवर्सिटी में एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। स्नातक सेमेस्टर-4 (सत्र 2023–27) के भूगोल विषय की करीब 70 उत्तर पुस्तिकाएं बिहार मूल्यांकन के लिए भेजी गई थीं, लेकिन ये कॉपियां बीच रास्ते में ही गायब हो गईं। इस घटना ने विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी मनोविज्ञान और भूगोल विषय की कॉपियों के गायब होने के मामले सामने आ चुके हैं। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से यह स्पष्ट है कि परीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया में गंभीर खामियां बनी हुई हैं। कैंपस में इसे लेकर चर्चा तेज है और कई लोग इसे लापरवाही के साथ-साथ संभावित गड़बड़ी भी मान रहे हैं। संविदा कर्मियों पर जिम्मेदारी, निगरानी का अभाव जानकारी के अनुसार, उत्तर पुस्तिकाओं को मूल्यांकन केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी अक्सर संविदा और चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को दी जाती है। सवाल यह उठ रहा है कि इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के बावजूद कोई सख्त निगरानी व्यवस्था क्यों नहीं है। कॉपियों की सुरक्षित ढुलाई और ट्रैकिंग सिस्टम की कमी प्रशासनिक विफलता को उजागर करती है। अधिकारियों की चुप्पी से बढ़ी नाराजगी इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी भी चिंता का विषय बनी हुई है। परीक्षा नियंत्रक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। फोन कॉल्स का जवाब न मिलना भी जवाबदेही की कमी को दर्शाता है। छात्रों को मिलेगा औसत अंक घटना के बाद परीक्षा बोर्ड ने निर्णय लिया है कि जिन छात्रों की कॉपियां गायब हुई हैं, उन्हें औसत (एवरेज) अंक दिए जाएंगे। हालांकि, यह समाधान अस्थायी माना जा रहा है और असली सवाल अब भी बना हुआ है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है। नई कुलपति के सामने बड़ी चुनौती नई कुलपति के लिए यह मामला एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बनकर सामने आया है। विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब सबसे जरूरी कार्य बन गया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।