बिहार की राजनीति इन दिनों नए मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे और नए चेहरे की चर्चा के बीच सियासी बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। इसी क्रम में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने जहानाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार की तुलना महाभारत कालीन मगध सम्राट जरासंध से कर दी। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। सम्राट चौधरी ने न सिर्फ नीतीश कुमार को पंडित चाणक्य जैसी रणनीतिक सोच वाला नेता बताया, बल्कि उन्हें चंद्रगुप्त मौर्य और जरासंध जैसी ऐतिहासिक शख्सियतों की श्रेणी में भी रखा। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर जरासंध कौन थे और उनकी तुलना का राजनीतिक अर्थ क्या है। कौन थे जरासंध? महाभारत के अनुसार, जरासंध प्राचीन मगध (आज का बिहार) के एक अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावशाली सम्राट थे। उनकी राजधानी राजगृह (आज का राजगीर) थी। वे राजा बृहद्रथ के पुत्र थे और अपनी सैन्य शक्ति तथा रणनीति के लिए प्रसिद्ध थे। जरासंध का नाम विशेष रूप से इसलिए भी चर्चित है क्योंकि वे भगवान श्रीकृष्ण के सबसे बड़े विरोधियों में गिने जाते थे। श्रीकृष्ण से दुश्मनी की वजह जरासंध की श्रीकृष्ण से दुश्मनी का मुख्य कारण पारिवारिक संबंध था। दरअसल, वे मथुरा के राजा कंस के ससुर थे। जब श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया, तो जरासंध ने इसे व्यक्तिगत अपमान माना और कृष्ण के खिलाफ कई बार युद्ध छेड़ा। कहा जाता है कि जरासंध ने बार-बार मथुरा पर आक्रमण कर श्रीकृष्ण को चुनौती दी और उन्हें काफी समय तक परेशान किया। शक्ति और महत्वाकांक्षा जरासंध सिर्फ एक योद्धा ही नहीं, बल्कि चक्रवर्ती सम्राट बनने की महत्वाकांक्षा रखने वाले शासक थे। उन्होंने 99 राजाओं को बंदी बनाकर रखा था, ताकि एक विशेष यज्ञ के जरिए अपनी सार्वभौमिक सत्ता स्थापित कर सकें। हालांकि, उन्होंने इन राजाओं की हत्या नहीं की थी। कैसे हुई जरासंध की मृत्यु? महाभारत के अनुसार, जरासंध की शक्ति को खत्म करना श्रीकृष्ण के लिए जरूरी हो गया था। इसके लिए उन्होंने भीम को मल्लयुद्ध के लिए आगे किया। राजगीर के अखाड़े में भीम और जरासंध के बीच लंबा और भीषण युद्ध हुआ। अंततः श्रीकृष्ण की रणनीति से भीम ने जरासंध के शरीर के दो हिस्से कर उन्हें विपरीत दिशाओं में फेंक दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनके पुत्र सहदेव को मगध का राजा बनाया गया। बिहार की राजनीति में जरासंध का जिक्र क्यों? हाल के वर्षों में बिहार की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान में जरासंध का नाम फिर से प्रमुखता से उभरा है। 2025 में नीतीश कुमार ने राजगीर में 21 फीट ऊंची जरासंध की प्रतिमा का अनावरण किया था। यह स्मारक करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से बना है। राजगीर स्थित जरासंध स्मृति पार्क में उनके जीवन और युद्धों को भित्तिचित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। इसके अलावा, राज्य में “जरासंध महोत्सव” का भी आयोजन किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह ऐतिहासिक पात्र अब राजनीतिक विमर्श का भी हिस्सा बन चुका है। सियासी संकेत क्या हैं? सम्राट चौधरी द्वारा की गई यह तुलना केवल ऐतिहासिक संदर्भ नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत भी मानी जा रही है। बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच यह बयान इस ओर इशारा करता है कि सत्ता हस्तांतरण की जमीन तैयार हो रही है। करीब दो दशकों तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के संभावित पदत्याग के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
सुबह 11 बजे लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह बिहार को शनिवार से नया राज्यपाल मिल जाएगा। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल Syed Ata Hasnain आज सुबह 11 बजे बिहार के राज्यपाल पद की शपथ लेंगे। यह शपथ ग्रहण समारोह Lok Bhavan में आयोजित होगा। उन्हें Sangam Kumar Sahu, मुख्य न्यायाधीश, Patna High Court द्वारा पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे। कई वरिष्ठ नेता रहेंगे कार्यक्रम में शामिल शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री Nitish Kumar, उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha और Samrat Choudhary शामिल होंगे। इसके अलावा बिहार विधानसभा के अध्यक्ष Prem Kumar और विधान परिषद के सभापति Awadhesh Narayan Singh सहित कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी समारोह में उपस्थित रहेंगे। पटना पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत नए राज्यपाल सैयद अता हसनैन गुरुवार को ही Patna पहुंच गए थे। एयरपोर्ट पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा सहित कई नेताओं ने उनका स्वागत किया। इस दौरान कई अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। 40 वर्षों तक सेना में निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। करीब 40 वर्षों तक सेना में सेवा देने के दौरान उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। खास तौर पर Jammu and Kashmir में आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कई रणनीतिक और सुरक्षा अभियानों का नेतृत्व किया, जिसके कारण उन्हें सुरक्षा मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का रहा उल्लेखनीय कार्यकाल इससे पहले बिहार के राज्यपाल Arif Mohammad Khan रहे, जिनका कार्यकाल करीब 428 दिनों का रहा। उनका कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा होने के बावजूद काफी सक्रिय और विवादों से दूर माना गया। उन्होंने अपने कार्यकाल में विश्वविद्यालयों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर राय रखी और राजभवन को एक सक्रिय संवाद मंच बनाने की कोशिश की। वे अक्सर छात्रों, शिक्षाविदों और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद करते नजर आते थे।
तीसरे चरण की यात्रा का अंतिम दिन बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar की चल रही “समृद्धि यात्रा” का शनिवार को आखिरी दिन है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री Begusarai और Sheikhpura जिलों का दौरा करेंगे। दौरे के दौरान वे दोनों जिलों में करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा भी करेंगे। इस दौरान मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे, जिनके साथ योजनाओं की प्रगति को लेकर विस्तृत चर्चा की जाएगी। बेगूसराय में सैकड़ों योजनाओं की शुरुआत मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के तहत बेगूसराय जिले में 109 करोड़ रुपये की लागत से 189 नई योजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा। इसके अलावा लगभग 165 करोड़ रुपये की लागत से पूरी हो चुकी 211 योजनाओं का उद्घाटन भी मुख्यमंत्री के हाथों होगा। इन योजनाओं के जरिए सड़क, आधारभूत ढांचा, स्वास्थ्य और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। शेखपुरा को भी मिलेगा विकास का बड़ा पैकेज बेगूसराय के बाद मुख्यमंत्री शेखपुरा जिले का दौरा करेंगे। यहां 144 करोड़ रुपये की लागत से 120 योजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा, जबकि 62 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 196 योजनाओं का उद्घाटन होगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री विभिन्न विकास परियोजनाओं का निरीक्षण कर सकते हैं और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दे सकते हैं। जनसंवाद कार्यक्रम में लोगों से करेंगे बातचीत इस यात्रा में मुख्यमंत्री के साथ राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary और Vijay Kumar Sinha भी मौजूद रहेंगे। बेगूसराय में मुख्यमंत्री मेडिकल कॉलेज और कुछ औद्योगिक इकाइयों का भी निरीक्षण कर सकते हैं। इसके बाद शेखपुरा में विभिन्न परियोजनाओं का जायजा लिया जाएगा। दोनों जिलों में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां मुख्यमंत्री स्वयं सहायता समूह से जुड़ी जीविका दीदियों और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करेंगे। सहरसा और खगड़िया में भी हुई थी विकास योजनाओं की शुरुआत समृद्धि यात्रा के तहत शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने Saharsa और Khagaria जिलों का दौरा किया था। इस दौरान भी कई करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया गया। जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विकास योजनाओं का उल्लेख किया और पूर्व की सरकारों की नीतियों पर भी सवाल उठाए। वहीं उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सहरसा एयरपोर्ट के लिए अगले महीने टेंडर जारी करने की घोषणा की।
बिहार की राजनीति में उस समय चर्चाएं तेज हो गईं जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने समृद्धि यात्रा के दौरान मंच पर उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary की पीठ थपथपाते हुए राज्य के विकास की बात कही। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कोई संकेत दिया गया है। पूर्णिया और कटिहार में समृद्धि यात्रा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को अपनी समृद्धि यात्रा के तहत Purnia और Katihar पहुंचे। यहां आयोजित सभाओं में उन्होंने बिहार के विकास के लिए आने वाले पांच वर्षों का रोडमैप जनता के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और खेल जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव की योजना बना रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार में विकास की रफ्तार और तेज होगी। हर प्रखंड में आदर्श स्कूल और डिग्री कॉलेज शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार हर प्रखंड में आदर्श स्कूल और डिग्री कॉलेज खोलने की योजना पर काम कर रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को अपने इलाके में ही उच्च शिक्षा की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। अस्पतालों को बनाया जाएगा विशेष अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रखंड स्तर के अस्पतालों को विशेष अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही ग्रामीण सड़कों को दो लेन में बदलने की योजना भी बनाई गई है, ताकि गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर हो सके। पटना में बनेगी आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी राजधानी Patna में एक आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी बनाने की योजना भी सामने रखी गई है। इसके जरिए खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं दी जाएंगी। सरकार खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की योजना पर भी काम कर रही है, ताकि खेलों को बढ़ावा मिल सके। मखाना किसानों के लिए विशेष योजना मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि Makhana उत्पादन से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इससे मिथिलांचल क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। मंच पर भावुक हुईं मंत्री लेशी सिंह कटिहार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंत्री Leshi Singh अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए भावुक हो गईं और मंच पर ही रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कठिन समय में उनका साथ दिया और राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर दिया। सम्राट चौधरी को लेकर बढ़ी चर्चा कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंच पर मौजूद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाकर भरोसा जताया कि राज्य में विकास कार्य इसी तरह आगे बढ़ते रहेंगे। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई कि क्या यह भविष्य के नेतृत्व को लेकर कोई संकेत है।
बिहार में Rajya Sabha Election 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ National Democratic Alliance (NDA) और विपक्षी Mahagathbandhan दोनों ही खेमों में लगातार बैठकों का दौर जारी है। इसी कड़ी में पटना में 14 और 15 मार्च को NDA की महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठकें होने जा रही हैं, जिनमें राज्यसभा की पांचों सीटों पर जीत का फॉर्मूला तय किया जाएगा। उपेंद्र कुशवाहा और विजय चौधरी के आवास पर बैठक जानकारी के मुताबिक 14 मार्च को बैठक Upendra Kushwaha के आवास पर होगी। कुशवाहा Rashtriya Lok Morcha के अध्यक्ष हैं और NDA के राज्यसभा उम्मीदवार भी हैं। इसके बाद 15 मार्च को अंतिम रणनीतिक बैठक Vijay Kumar Chaudhary के आवास पर होगी। इस बैठक में NDA के विधायक और विधान पार्षद शामिल होंगे और मतदान की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। सभी जनप्रतिनिधियों से कहा गया है कि वे मतदान तक Patna में ही रहें। सम्राट चौधरी के आवास पर पहले ही हो चुकी है बैठक इससे पहले गुरुवार को Samrat Choudhary के आवास पर भी NDA नेताओं की बैठक हुई थी। इस बैठक में Sanjay Saraogi (भाजपा प्रदेश अध्यक्ष) Umesh Singh Kushwaha (जदयू प्रदेश अध्यक्ष) Sanjay Suman (हम नेता) Raju Tiwari (लोजपा-रामविलास प्रदेश अध्यक्ष) सहित कई नेता मौजूद रहे। बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि सभी विधायक और पार्षद NDA के पांचों उम्मीदवारों को वोट देकर जीत दिलाएंगे। महागठबंधन भी बना रहा रणनीति दूसरी ओर विपक्षी महागठबंधन भी अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटा है। नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav अपने आवास पर सहयोगी दलों के नेताओं के साथ लगातार बैठक कर रहे हैं। हाल ही में Akhtarul Iman ने तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद उन्होंने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि अंतिम फैसला Asaduddin Owaisi लेंगे। जीत के लिए चाहिए 41 वोट राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो गया है। जीत के लिए 41 वोटों की जरूरत है। महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायक हैं। उसे उम्मीद है कि All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) के 5 और Bahujan Samaj Party के 1 विधायक का समर्थन मिलने पर उसके उम्मीदवार की जीत संभव हो सकती है।
बिहार में राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में बुधवार को AIMIM विधायक दल के नेता अख्तरुल ईमान ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख असादुदीन ओवैसी के स्तर पर लिया जाएगा. वहीं दूसरी ओर गुरुवार को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास पर NDA विधायकों की अहम बैठक होने वाली है, जिसमें राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर रणनीति तय किए जाने की संभावना है. 5वीं सीट पर दिलचस्प राजनीतिक गणित बिहार विधानसभा में राज्यसभा की इस सीट को जीतने के लिए 41 वोटों की जरूरत है। महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायक हैं. ऐसे में उसे उम्मीद है कि AIMIM के 5 और BSP के 1 विधायक का समर्थन मिलने पर उसके उम्मीदवार की जीत का रास्ता साफ हो सकता है. इसी कारण इस सीट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है और दोनों गठबंधन अपने-अपने विधायकों को साधने में लगे हुए हैं. तेजस्वी से मुलाकात के बाद ‘पॉजिटिव’ संकेत तेजस्वी यादव के बुलावे पर उनके आवास पहुंचे अख्तरुल ईमान ने कहा कि बातचीत सकारात्मक रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ एकजुट होना जरूरी है और इसी दिशा में बातचीत आगे बढ़ी है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समर्थन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और असदुद्दीन ओवैसी के स्तर पर लिया जाएगा. इफ्तार डिप्लोमेसी से बढ़ेगी सियासी नजदीकी सियासी रिश्तों को मजबूत करने के लिए तेजस्वी यादव ने इफ्तार डिप्लोमेसी का सहारा लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि वह 15 मार्च को अख्तरुल ईमान की इफ्तार पार्टी में शामिल होंगे। इसे AIMIM को साधने की बड़ी राजनीतिक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. NDA की रणनीति पर टिकी नजर उधर NDA भी इस सीट को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास पर होने वाली बैठक में सभी NDA विधायकों को बुलाया गया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में पांचवीं सीट को लेकर अंतिम रणनीति तय की जाएगी. इस बीच RJD और महागठबंधन के नेताओं ने अपने उम्मीदवार की जीत का भरोसा जताया है, जिससे बिहार की राजनीति में इस सीट को लेकर मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज