Security Forces

Pakistan Coast Guard camp in Jiwani, Gwadar, after the claimed BLA suicide attack in Balochistan.
ग्वादर के जिवानी में आत्मघाती हमले का दावा, BLA बोला- 30 से ज्यादा पाकिस्तानी जवान मारे गए

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले के जिवानी क्षेत्र में स्थित पाकिस्तान कोस्ट गार्ड के एक कैंप पर कथित आत्मघाती हमले का दावा किया गया है। प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने कहा है कि उसके आत्मघाती हमलावर ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें 30 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई अन्य घायल हुए। हालांकि, पाकिस्तान सरकार, सेना या किसी आधिकारिक एजेंसी ने अब तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है। BLA ने क्या दावा किया? BLA के प्रवक्ता जीयंद बलोच के नाम से जारी बयान में कहा गया है कि संगठन की मजीद ब्रिगेड ने ग्वादर जिले के जिवानी के पनवान इलाके में स्थित पाकिस्तान कोस्ट गार्ड कैंप को निशाना बनाया। संगठन का दावा है कि आत्मघाती हमलावर पहले सुरक्षा कैंप के भीतर प्रवेश करने में सफल रहे और इसके बाद विस्फोट किया, जिससे भारी नुकसान हुआ। जिवानी क्यों है महत्वपूर्ण? जिवानी, ग्वादर जिले का एक रणनीतिक तटीय क्षेत्र है। यह अरब सागर के किनारे स्थित होने के कारण पाकिस्तान की समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों के लिहाज से अहम माना जाता है। वायरल वीडियो पर नहीं हुई पुष्टि हमले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @Bahotblch नाम के अकाउंट से साझा किया गया है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो हमले का है। हालांकि, इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसकी सत्यता स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं की जा सकी है। पाकिस्तान की ओर से नहीं आया बयान हमले के दावे के बावजूद पाकिस्तान सरकार, सेना या सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। इसलिए हताहतों की संख्या और घटना के वास्तविक स्वरूप की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Maatrubhumi
सलमान खान फिल्म्स का बयान- फिल्म अभी सेंसर बोर्ड को भेजी ही नहीं गई, रिलीज डेट पर भी जारी है काम

मुंबई, एजेंसियां। सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही सेंसर बोर्ड (CBFC) से जुड़े विवाद की खबरों पर आखिरकार मेकर्स ने चुप्पी तोड़ दी है। हाल के दिनों में दावा किया जा रहा था कि फिल्म का सर्टिफिकेशन रोक दिया गया है और यह केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) में अटक गई है। इन खबरों के बाद फिल्म की रिलीज को लेकर प्रशंसकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई थी।   इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए सलमान खान फिल्म्स (SKF) ने आधिकारिक बयान जारी किया। प्रोडक्शन हाउस ने स्पष्ट किया कि फिल्म को अभी तक सर्टिफिकेशन के लिए CBFC के पास भेजा ही नहीं गया है। ऐसे में सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म रोकने या सर्टिफिकेट देने से इनकार करने जैसी खबरें पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं।   आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जारी बयान में कहा  सलमान खान फिल्म्स ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जारी बयान में कहा कि फिल्म को लेकर प्रसारित की जा रही अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें। मेकर्स ने मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की कि किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि अवश्य करें। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म से जुड़ी हर आधिकारिक जानकारी केवल सलमान खान फिल्म्स के अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही साझा की जाएगी।   क्या है मामला ? गौरतलब है कि निर्देशक अपूर्व लाखिया की इस फिल्म का शुरुआती नाम 'बैटल ऑफ गलवान' था। फिल्म 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए संघर्ष से प्रेरित बताई जाती है। बाद में कहानी के व्यापक भावनात्मक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इसका नाम बदलकर 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' कर दिया गया।   फिल्म में सलमान खान के साथ चित्रांगदा सिंह, अभिलाष चौधरी और अंकुर भाटिया अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। पहले इसकी रिलीज अप्रैल 2026 में प्रस्तावित थी, लेकिन इसे आगे बढ़ा दिया गया। फिलहाल निर्माता नई रिलीज डेट तय करने में जुटे हैं। ऐसे में मेकर्स ने साफ कर दिया है कि सेंसर बोर्ड से जुड़े विवाद की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और फिल्म की आधिकारिक प्रक्रिया अभी शुरू ही नहीं हुई है।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Amarnath Yatra 2026
आतंकियों की हर साजिश होगी नाकाम: अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात हुए बम खोजी डॉग स्क्वॉड

नई दिल्ली, एजेंसियां। वार्षिक अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस बार अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने अपनी विशेष K9 डॉग स्क्वॉड टीमों को यात्रा मार्गों, बेस कैंपों और पवित्र गुफा क्षेत्र में तैनात किया है। इन विशेष रूप से प्रशिक्षित स्निफर और ट्रैकर डॉग्स का मुख्य कार्य विस्फोटकों का पता लगाना, संदिग्ध वस्तुओं की पहचान करना और यात्रा मार्गों को सुरक्षित बनाना है।   क्या है यह चार पैरों वाले ‘K9 योद्धा’? CRPF के ये चार पैरों वाले ‘K9 योद्धा’ बम निरोधक दस्तों और क्विक रिएक्शन टीम (QRT) के साथ मिलकर बालटाल और पहलगाम मार्गों, ट्रांजिट कैंपों, काफिले के रास्तों, हेलीपैड तथा संवेदनशील स्थलों पर लगातार एंटी-सबोटाज जांच कर रहे हैं। इसके अलावा, कठिन पहाड़ी इलाकों में खोज एवं बचाव अभियानों के लिए भी इन डॉग्स को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।   सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए K9 टीमों के साथ निगरानी ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, फेसियल रिकग्निशन सिस्टम और आधुनिक सर्विलांस तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पूरे यात्रा मार्ग पर बहु-स्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है।   पूर्व महानिरीक्षक आर.के. यादव के अनुसार CRPF के पूर्व महानिरीक्षक आर.के. यादव के अनुसार, K9 इकाइयों की तीव्र सूंघने की क्षमता उन्हें पारंपरिक तरीकों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से विस्फोटकों और छिपे हुए खतरों का पता लगाने में सक्षम बनाती है। यही वजह है कि हर संवेदनशील स्थान पर तीर्थयात्रियों के पहुंचने से पहले डॉग स्क्वॉड द्वारा गहन जांच की जा रही है।   इस वर्ष की 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने "ऑपरेशन शिव" के तहत एक लाख से अधिक सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 670 से अधिक कंपनियां, सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर बहु-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड में कार्य कर रही हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण में बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकें।

anjali kumari जुलाई 4, 2026 0
Indian Army personnel detain a Pakistani national after foiling an infiltration attempt along the Line of Control in Poonch district
पुंछ में घुसपैठ की कोशिश नाकाम, LoC पार कर भारतीय सीमा में घुसा पाकिस्तानी नागरिक गिरफ्तार

  Poonch Infiltration Attempt: जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर एक घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए एक पाकिस्तानी नागरिक को गिरफ्तार किया है। सेना ने उसे भारतीय सीमा में प्रवेश करते ही हिरासत में ले लिया। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं और उसके भारत में प्रवेश के उद्देश्य का पता लगाने में जुटी हैं। बालाकोट सेक्टर में हुई गिरफ्तारी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई पुंछ जिले के मेंढर सब-डिवीजन के बालाकोट सेक्टर में की गई। सेना के जवान सीमा पर नियमित निगरानी के दौरान सतर्क थे। इसी दौरान एक व्यक्ति को नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करते देखा गया, जिसके बाद जवानों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। पाकिस्तानी नागरिक की हुई पहचान अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान रईस खान (31) के रूप में हुई है। वह पाकिस्तान के राजल पख्तून क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है और बाजिया जादा खान का बेटा है। प्रारंभिक पूछताछ में उसकी पहचान की पुष्टि की गई है, जबकि उसके भारत में आने के मकसद की जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां कर रहीं गहन पूछताछ गिरफ्तारी के बाद आरोपी को सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर दिया गया है। खुफिया और सुरक्षा अधिकारी उससे विस्तृत पूछताछ कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह गलती से सीमा पार कर आया था या किसी सुनियोजित घुसपैठ या अन्य गतिविधि के तहत भारतीय क्षेत्र में प्रवेश किया था। सुरक्षा एजेंसियां उसके संपर्कों, यात्रा मार्ग और संभावित नेटवर्क की भी जांच कर रही हैं। LoC पर हाई अलर्ट हाल के महीनों में नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा बलों ने निगरानी और गश्त को और मजबूत किया है। सेना आधुनिक निगरानी उपकरणों और नियमित गश्त के जरिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर लगातार नजर रख रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Security personnel deployed outside JNIMS mortuary as crowds gather after recovery of six missing Naga bodies in Manipur.
मणिपुर में छह नगा लोगों के शव मिलने के बाद तनाव, JNIMS मोर्चरी के बाहर सुरक्षा कड़ी

  इम्फाल: मणिपुर में छह लापता नगा लोगों के शव बरामद होने के बाद तनाव का माहौल बन गया है। इम्फाल ईस्ट स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) की मोर्चरी के बाहर बुधवार को बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। शव लेने पहुंचे लोगों की भीड़, बढ़ाई गई सुरक्षा जानकारी के अनुसार, छह नगा लोगों के शव लेने के लिए बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग जेएनआईएमएस मोर्चरी पहुंचे थे। भीड़ बढ़ने के साथ माहौल तनावपूर्ण हो गया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने अस्पताल परिसर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए। स्थिति को नियंत्रित करने के दौरान सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े। 24 घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद मिले शव मणिपुर पुलिस के मुताबिक, करीब 24 घंटे तक चले व्यापक तलाशी अभियान के बाद छह लोगों के शव बरामद किए गए। इस अभियान में मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ और असम राइफल्स के लगभग 450 जवान शामिल थे। तलाशी अभियान में स्निफर डॉग और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीमों की भी सहायता ली गई। पुलिस का कहना है कि बरामद शवों की पहचान उन लोगों के रूप में की जा रही है, जिन्हें 13 मई 2026 को लीलोन वैफेई गांव से कथित तौर पर अगवा किया गया था। जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी पुलिस ने बताया कि शवों के पोस्टमॉर्टम और पहचान से जुड़ी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत जांच भी जारी है, ताकि अपहरण और मौत के कारणों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों ने कहा कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में रिहा हुए थे 14 कुकी बंधक यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही मणिपुर के सेनापति जिले में कथित तौर पर अगवा किए गए 14 कुकी लोगों को रिहा कराया गया था। नगालैंड और मेघालय के मुख्यमंत्रियों ने 14 कुकी बंधकों की रिहाई का स्वागत करते हुए छह नगा लोगों की सुरक्षित वापसी की भी अपील की थी। अब उनके शव मिलने से क्षेत्र में शोक और तनाव दोनों बढ़ गए हैं। प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की मणिपुर प्रशासन ने लोगों से संयम बरतने और अफवाहों से बचने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
Jharkhand Naxalism Free
14 वर्षों की मेहनत के बाद नक्सलवाद मुक्त हुआ झारखंड

रांची। कभी नक्सलवाद की गंभीर समस्या से जूझने वाला झारखंड अब लगभग नक्सल मुक्त होने की दिशा में पहुंच चुका है। राज्य में अब केवल कुछ इनामी नक्सली और छोटे समूह ही बचे हैं, जिनकी संगठनात्मक क्षमता और प्रभाव पहले की तुलना में काफी कमजोर हो चुका है। केंद्रीय सुरक्षा बलों और झारखंड पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, लगातार अभियानों और जवानों के बलिदान ने राज्य में लाल आतंक की कमर तोड़ दी है।   14 वर्षों में हजारों गिरफ्तारियां और सैकड़ों सरेंडर पिछले 14 वर्षों के दौरान झारखंड पुलिस ने नक्सलवाद के खिलाफ व्यापक अभियान चलाए। इस अवधि में 225 से अधिक नक्सली मारे गए, 5,000 से ज्यादा गिरफ्तार किए गए और 300 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। सुरक्षा बलों ने बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और आईईडी भी बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, राज्य का अधिकांश हिस्सा नक्सली प्रभाव से मुक्त हो चुका है। वर्तमान में पश्चिम सिंहभूम जिले का सारंडा क्षेत्र ही ऐसा इलाका है जहां कुछ नक्सलियों की मौजूदगी बताई जाती है, लेकिन वहां भी उनकी गतिविधियां बेहद सीमित हो गई हैं।   2025 और 2026 रहे सबसे सफल वर्ष नक्सल विरोधी अभियानों के लिहाज से वर्ष 2025 और 2026 काफी अहम रहे हैं। वर्ष 2025 में 34 नक्सली मारे गए, जबकि 2026 में मई तक 22 नक्सली एनकाउंटर में ढेर किए जा चुके हैं। बूढ़ा पहाड़, पारसनाथ, लुगु पहाड़ी और बुलबुल जैसे कभी नक्सलियों के मजबूत गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों से भी उनका प्रभाव समाप्त कर दिया गया है।   2014 के बाद बदली रणनीति, मिली बड़ी सफलता झारखंड गठन के शुरुआती वर्षों में नक्सलियों का दबदबा काफी मजबूत था। वर्ष 2000 से 2012 तक राज्य के कई इलाकों में नक्सली संगठन खुलेआम सक्रिय थे। हालांकि 2014 के बाद पुलिस और केंद्रीय बलों ने रणनीति में बदलाव किया और लगातार आक्रामक अभियान चलाए। इसके परिणामस्वरूप कई शीर्ष नक्सली नेता मारे गए या गिरफ्तार किए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन ग्रीन हंट और बाद के संयुक्त अभियानों ने नक्सलियों के आर्थिक और सैन्य नेटवर्क को गंभीर नुकसान पहुंचाया, जिससे उनका प्रभाव लगातार घटता गया।   सफलता की राह में जवानों ने दी बड़ी कुर्बानी नक्सलवाद के खिलाफ इस लड़ाई में सुरक्षा बलों को भी भारी कीमत चुकानी पड़ी है। झारखंड राज्य गठन के बाद से अब तक 562 से अधिक पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी शहीद हो चुके हैं। वर्ष 2002 में सबसे अधिक 69 जवान शहीद हुए थे। हालांकि हाल के वर्षों में यह संख्या काफी कम हो गई है, जो सुरक्षा स्थिति में सुधार का संकेत है।   घट रही हैं नक्सली घटनाएं झारखंड पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में पूरे राज्य में नक्सली घटनाओं की संख्या बेहद कम रही है। जनवरी 2026 में केवल पांच मामले दर्ज किए गए, जबकि फरवरी से अप्रैल तक कुल 25 घटनाएं सामने आईं। इनमें अधिकांश मामले नक्सलियों की गिरफ्तारी, एनकाउंटर या हथियार बरामदगी से जुड़े थे।   नक्सल मुक्त झारखंड की ओर बढ़ता राज्य लगातार आत्मसमर्पण, सफल अभियानों और घटती नक्सली गतिविधियों ने संकेत दिया है कि झारखंड नक्सलवाद के अंतिम चरण की लड़ाई लड़ रहा है। पुलिस और सुरक्षा बलों की रणनीति, स्थानीय सहयोग और जवानों के बलिदान ने राज्य को शांति और विकास की नई राह पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में झारखंड पूरी तरह नक्सल मुक्त राज्य के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा।

Unknown मई 30, 2026 0
Security forces display seized weapons and arrested militants during anti-insurgency operation in Manipur forest area.
मणिपुर में सुरक्षा बलों का बड़ा ऑपरेशन, भारी मात्रा में हथियार बरामद; 6 उग्रवादी गिरफ्तार

मणिपुर में सुरक्षा बलों ने सोमवार को बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाते हुए भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए। इस दौरान प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों KYKL, UNLF और PLA से जुड़े कई सक्रिय कैडरों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग अभियानों में अब तक कुल छह उग्रवादियों को पकड़ा गया है। जंगल क्षेत्र में मिला हथियारों का जखीरा अधिकारियों ने बताया कि इंफाल वेस्ट जिले के लामसांग थाना क्षेत्र के अंतर्गत लामदेंग और कामेंग गांव के बीच पहाड़ी और जंगल इलाके में सुरक्षा बलों ने संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए। बरामद हथियारों में तीन बोल्ट-एक्शन सिंगल बैरल बंदूकें, एक .22 पिस्टल, चार 9 एमएम पिस्टल, एक .22 पिस्टल मैगजीन और चार 9 एमएम मैगजीन शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियां बरामद हथियारों की जांच कर रही हैं। KYKL के दो सक्रिय सदस्य गिरफ्तार सुरक्षा बलों ने 17 मई को अलग-अलग अभियानों में प्रतिबंधित संगठन KYKL के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सोरोखैबम प्रियचंद सिंह उर्फ सजाओ (39) और मोइरांगथेम नाओबी सिंह (47) के रूप में हुई है। प्रियचंद सिंह को क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) के पास से गिरफ्तार किया गया, जबकि नाओबी सिंह को उसके घर से पकड़ा गया। इनके पास से दो मोबाइल फोन और एक आधार कार्ड बरामद किया गया। हथियार तस्करी में शामिल UNLF सदस्य गिरफ्तार एक अन्य अभियान में सुरक्षा बलों ने UNLF (कोइरेंग गुट) के सक्रिय सदस्य थांगजम धर्मेंद्र सिंह उर्फ वेनबा उर्फ वॉल्यूम (26) को याइरिपोक बाजार क्षेत्र से गिरफ्तार किया। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी अवैध हथियारों और गोला-बारूद की खरीद-बिक्री तथा तस्करी में सक्रिय रूप से शामिल था। उसके पास से एक 9 एमएम मैगजीन, मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड, पावर बैंक, यूएसबी केबल और एक एटीएम कार्ड बरामद किया गया। PLA और RPF के कैडर भी दबोचे गए 18 मई को सुरक्षा बलों ने RPF/PLA के सक्रिय सदस्य चिंगलेन अथोकपम उर्फ इबुंगो (30) को इंफाल पूर्व जिले के लमलाई थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया। इसी दिन केंद्रीय सुरक्षा बलों ने मोरेह थाना क्षेत्र में म्यांमार सीमा से लगे बॉर्डर पिलर 77 और 79 के बीच अभियान चलाकर PLA के तीन अन्य सदस्यों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वांगथोई नाहकपम उर्फ लिंगजेल (20), नानाओबा नंदेइबम उर्फ अंगौ (19) और मालेम ओइनम उर्फ मणिथोइबा (20) के रूप में हुई है। लगातार जारी हैं सुरक्षा अभियान मणिपुर में पिछले कई महीनों से सुरक्षा बल उग्रवादी गतिविधियों और अवैध हथियारों के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने और सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।  

surbhi मई 19, 2026 0
Pakistani security forces conduct anti-terror operation in Balochistan targeting militant hideouts and armed groups.
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना का बड़ा ऑपरेशन, 35 आतंकवादी ढेर

Pakistan के अशांत Balochistan प्रांत में सुरक्षा बलों ने बड़ा आतंकवाद विरोधी अभियान चलाते हुए 35 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है। इसके साथ ही तीन वरिष्ठ कमांडरों को भी गिरफ्तार किया गया है। बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता Shahid Rind ने रविवार रात क्वेटा में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह ऑपरेशन मंगला जरघून क्षेत्र में 13 मई से चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि पिछले चार दिनों में सुरक्षा बलों ने कई ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए आतंकियों के बेस कैंप भी नष्ट कर दिए। TTP और प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ कार्रवाई प्रवक्ता के मुताबिक यह अभियान प्रतिबंधित संगठन Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) और बलूचिस्तान में सक्रिय उसके प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ चलाया गया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों कमांडर “हाई-प्रोफाइल” और संगठन के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। रिंद ने कहा कि यह कार्रवाई पहले गिरफ्तार किए गए आतंकवादियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर की गई। कई आतंकी ठिकाने तबाह सुरक्षा बलों ने मंगला जरघून इलाके में आतंकवादियों के कई ठिकानों और बेस कैंपों को भी नष्ट कर दिया। प्रवक्ता ने बताया कि प्रांत के अन्य हिस्सों में भी अतिरिक्त अभियान जारी हैं। इन अभियानों का मकसद आतंकवादी नेटवर्क के संचालकों, वित्तीय समर्थकों और उनके सहयोगियों तक पहुंचना है। पाकिस्तानी सेना की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान हालांकि, Pakistan Army ने अब तक इस ताजा अभियान पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इससे पहले 12 मई को बलूचिस्तान के बरखान जिले में एक अन्य सैन्य अभियान के दौरान एक मेजर समेत पांच पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा Inter-Services Public Relations (ISPR) के अनुसार, उस कार्रवाई में कम से कम सात आतंकवादी भी मारे गए थे। बलूचिस्तान में लगातार बढ़ रही हिंसा बलूचिस्तान लंबे समय से अलगाववादी गतिविधियों और आतंकवादी हमलों से प्रभावित रहा है। पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार इस क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में बढ़ती हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों के कारण पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में सैन्य और खुफिया अभियानों को और तेज कर दिया है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Security personnel and rescue teams at blast site after suicide attack in Pakistan’s Khyber Pakhtunkhwa
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में आत्मघाती हमला, 8 लोगों की मौत, 35 से ज्यादा घायल

Pakistan के Khyber Pakhtunkhwa प्रांत में मंगलवार को बड़ा आत्मघाती हमला हुआ। लक्की मारवत जिले के नौरंग बाजार इलाके में हुए इस विस्फोट में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 35 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरे ऑटो रिक्शा में धमाका किया। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा अधिकारी और महिला समेत कई लोगों की मौत अधिकारियों के अनुसार मृतकों में दो सुरक्षा अधिकारी और एक महिला भी शामिल हैं। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसके चलते मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। धमाका नौरंग बाजार के फाटक चौक इलाके में हुआ, जो उस समय काफी भीड़भाड़ वाला क्षेत्र था। गंभीर घायलों को पेशावर और बन्नू रेफर किया गया घायलों को पहले सराय नौरंग के तहसील मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में जिन लोगों की हालत ज्यादा गंभीर थी, उन्हें Bannu और Peshawar के अस्पतालों में रेफर किया गया। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक कई घायलों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। अस्पतालों में आपातकाल घोषित विस्फोट के बाद इलाके के अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई। सभी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को तत्काल ड्यूटी पर बुलाया गया। राहत एवं बचाव एजेंसी Rescue 1122 की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया गया। मुख्यमंत्री ने मांगी रिपोर्ट खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री Mohammad Suhail Afridi ने घटना पर दुख जताते हुए पुलिस महानिरीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि प्रांतीय सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और घायलों के इलाज समेत हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है। बाजार और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जबकि हमले के पीछे शामिल नेटवर्क की तलाश जारी है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Explosion aftermath in Manipur village with damaged house and security forces at site
मणिपुर में दर्दनाक हमला: बम ब्लास्ट में 2 मासूमों की मौत, मां घायल

मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के मोइरांग ट्रोंगलाओबी इलाके में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। उग्रवादियों ने एक घर पर बम फेंक दिया, जिसमें 5 साल के बच्चे और 6 महीने की बच्ची की मौत हो गई, जबकि उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई। क्या हुआ था? घटना के समय मां और दोनों बच्चे बेडरूम में सो रहे थे अचानक घर में बम फेंका गया विस्फोट में दोनों मासूमों की मौके पर ही मौत मां घायल, अस्पताल में भर्ती घटना के बाद भड़का गुस्सा हमले के विरोध में स्थानीय लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया- पेट्रोल पंप के पास 2 ऑयल टैंकर और एक ट्रक में आग लगाई मोइरांग पुलिस स्टेशन के बाहर टायर जलाए एक पुलिस चौकी को तोड़ दिया हालात को काबू में करने के लिए इलाके में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। मुख्यमंत्री का बयान मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह (वाई खेमचंद सिंह) ने अस्पताल जाकर घायल महिला से मुलाकात की और कहा- यह बर्बर और अमानवीय हमला है दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी यह घटना राज्य में बनी शांति को बिगाड़ने की साजिश है संवेदनशील इलाका मोइरांग ट्रोंगलाओबी इलाका चुराचांदपुर के पहाड़ी क्षेत्रों के पास स्थित है 2023–24 में यहां मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच हिंसा हो चुकी है

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Arrested TSPC militants with seized weapons including INSAS rifles and police team in Hazaribagh
क्रांति के नाम पर वसूली! हजारीबाग में TSPC के 8 उग्रवादी गिरफ्तार, हथियारों का जखीरा बरामद

बड़ी वारदात की साजिश नाकाम, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से टला खतरा हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TSPC) के 8 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में होने वाली संभावित बड़ी घटना को समय रहते टाल दिया गया। बड़ी साजिश की थी तैयारी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि उग्रवादी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर विशेष टीम गठित कर संदिग्ध इलाकों में सघन जांच अभियान चलाया गया। फिल्मी अंदाज में पीछा कर पकड़े गए आरोपी कार्रवाई के दौरान उरीमारी ओपी क्षेत्र के कोलियरी इलाके में एक संदिग्ध बोलेरो वाहन नजर आया। पुलिस को देखते ही चालक ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने पीछा कर उसे घेर लिया। भागने के दौरान वाहन अनियंत्रित होकर आसवा और गुडकुवा गांव के बीच पुल और पेड़ से टकरा गया। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर वाहन में सवार सभी संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। हथियारों के साथ पकड़े गए उग्रवादी तलाशी के दौरान दो आरोपियों के हाथ में इंसास राइफल मिली, जिससे उनके इरादों की गंभीरता साफ हो गई। पुलिस ने मौके से- 2 इंसास राइफल भारी मात्रा में जिंदा कारतूस 1 देसी पिस्टल 1 बोलेरो वाहन 7 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। लातेहार और रांची के रहने वाले आरोपी गिरफ्तार उग्रवादियों की पहचान सुनील मुंडा, विरेंद्र मुंडा, सुरेंद्र मुंडा, लालमोहन मुंडा, अनिल मुंडा, रविंद्र गंझू उर्फ रिंकू, सत्येंद्र गंझू उर्फ संतु और संजय मुंडा के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी लातेहार और रांची जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सभी आरोपी टीएसपीसी संगठन से जुड़े हैं और इलाके में सक्रिय होकर वसूली और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। फिलहाल पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
CAPF personnel with IPS officers during security operation highlighting leadership debate over CAPF Bill 2026
IPS नेतृत्व बनाम CAPF स्वायत्तता: राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस के बीच नया CAPF Bill 2026

केंद्र सरकार के प्रस्तावित Central Armed Police Forces (General Administration) Bill, 2026 को लेकर देश में बहस तेज हो गई है। कुछ वर्ग इसे सुप्रीम कोर्ट के 23 मई 2025 के फैसले के खिलाफ मान रहे हैं, जबकि विशेषज्ञों का एक बड़ा तबका इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से जरूरी कदम बता रहा है। यह पूरा विवाद मुख्य रूप से Indian Police Service (IPS) अधिकारियों की CAPFs में भूमिका और नेतृत्व को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि Senior Administrative Grade (SAG) यानी लगभग इंस्पेक्टर जनरल स्तर तक IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम किया जाए। इस निर्णय का उद्देश्य CAPF के अपने अधिकारियों को ज्यादा अवसर देना था, जिन्हें हाल ही में Organised Group A Service (OGAS) का दर्जा मिला है। क्या कहता है CAPF Bill 2026? प्रस्तावित बिल एक तरह से मौजूदा व्यवस्था को कानूनी रूप देने की कोशिश करता है। इसके तहत: IG स्तर पर लगभग 50% पद IPS अधिकारियों के लिए सुरक्षित रहेंगे उच्च स्तर (ADG और DG) पर IPS की भूमिका और मजबूत होगी CAPF कैडर के अधिकारियों के प्रमोशन और करियर ग्रोथ के नए रास्ते भी बनाए जाएंगे सरकार का तर्क है कि यह संतुलन बनाए रखने की कोशिश है-जहां एक तरफ CAPF अधिकारियों को अवसर मिले, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा की कमान अनुभवी IPS अधिकारियों के हाथ में बनी रहे। IPS नेतृत्व क्यों माना जा रहा है अहम? विशेषज्ञों के अनुसार, CAPFs जैसे CRPF, BSF, ITBP, CISF और SSB केवल एक प्रकार की ड्यूटी नहीं निभाते, बल्कि: सीमा सुरक्षा आतंरिक सुरक्षा और नक्सल विरोधी अभियान चुनाव ड्यूटी आतंकवाद-रोधी ऑपरेशन आपदा प्रबंधन जैसी बहुस्तरीय जिम्मेदारियां संभालते हैं। ऐसे में IPS अधिकारी, जो राज्य और केंद्र दोनों स्तर पर काम करने का अनुभव रखते हैं, इन सभी ऑपरेशनों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इतिहास गवाह है कि पंजाब, पूर्वोत्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कई बार समन्वय की कमी से सुरक्षा चुनौतियां बढ़ीं। क्या CAPF अधिकारियों के साथ अन्याय? दूसरी ओर CAPF के अधिकारियों का मानना है कि: दशकों तक उन्हें प्रमोशन में देरी का सामना करना पड़ा OGAS का दर्जा मिलने के बाद अब नेतृत्व के अवसर जरूरी हैं IPS का वर्चस्व उनके मनोबल को प्रभावित करता है हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह “जीरो-सम गेम” नहीं होना चाहिए। एक मिश्रित नेतृत्व मॉडल-जहां IPS की रणनीतिक समझ और CAPF अधिकारियों का जमीनी अनुभव दोनों शामिल हों-अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय उदाहरण क्या कहते हैं? अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में भी: FBI, DHS (USA) में केंद्रीय नेतृत्व और फील्ड अनुभव का मिश्रण होता है MI5 और Border Force (UK) में वरिष्ठ पदों पर अनुभवी पुलिस और खुफिया अधिकारी होते हैं यानी भारत में प्रस्तावित मॉडल कोई नया प्रयोग नहीं, बल्कि वैश्विक मानकों के अनुरूप है। CAPF Bill 2026 को केवल IPS बनाम CAPF की लड़ाई के रूप में देखना अधूरा दृष्टिकोण हो सकता है। असल सवाल यह है कि देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत और समन्वित हो सकती है। यह बिल उसी दिशा में एक संतुलित प्रयास के रूप में सामने आ रहा है-जहां संस्थागत न्याय और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश की गई है।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0