भारत को पीछे छोड़ दक्षिण कोरिया ने बनाई नई पहचान वैश्विक शेयर बाजारों की रैंकिंग में भारत को एक और झटका लगा है। कुछ दिन पहले ताइवान के भारत से आगे निकलने के बाद अब दक्षिण कोरिया ने भी भारतीय बाजार को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का छठा सबसे बड़ा शेयर बाजार बनने का दर्जा हासिल कर लिया है। दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में आई जबरदस्त तेजी का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर से जुड़ी कंपनियों का शानदार प्रदर्शन माना जा रहा है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियों ने निवेशकों का भरोसा जीतते हुए बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। 5 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा दक्षिण कोरिया का बाजार ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में दक्षिण कोरिया की सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं भारतीय शेयर बाजार का कुल मूल्य घटकर करीब 4.8 ट्रिलियन डॉलर रह गया है। दिलचस्प बात यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था दक्षिण कोरिया की तुलना में दोगुने से भी अधिक आकार की है, लेकिन शेयर बाजार मूल्यांकन के मामले में दक्षिण कोरिया फिलहाल आगे निकल गया है। AI और चिप कंपनियों ने बदली तस्वीर दक्षिण कोरिया की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान Samsung Electronics और SK Hynix जैसी कंपनियों का रहा है। दोनों कंपनियां AI डेटा सेंटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती वैश्विक मांग के कारण इन कंपनियों के शेयरों में भारी उछाल आया है। इस तेजी ने दक्षिण कोरिया के प्रमुख शेयर सूचकांक Kospi को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। ताइवान के बाद दक्षिण कोरिया को भी मिला फायदा AI क्रांति का लाभ केवल दक्षिण कोरिया को ही नहीं मिला है। हाल ही में ताइवान भी भारत को पीछे छोड़कर वैश्विक शेयर बाजार रैंकिंग में आगे निकल गया था। ताइवान की सफलता के पीछे Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC) जैसी चिप निर्माण दिग्गज कंपनी का बड़ा योगदान रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि AI से जुड़ी वैश्विक दौड़ में सेमीकंडक्टर उद्योग वाले देशों को सबसे अधिक लाभ मिल रहा है। घरेलू सुधारों ने भी निभाई भूमिका AI सेक्टर की मजबूती के अलावा दक्षिण कोरिया में कॉर्पोरेट गवर्नेंस सुधारों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। राष्ट्रपति Lee Jae Myung द्वारा शुरू किए गए सुधारों को बाजार ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है। इससे विदेशी निवेशकों की रुचि भी बढ़ी है और बाजार में नई पूंजी का प्रवाह देखने को मिला है। भारत क्यों पिछड़ रहा है? विशेषज्ञों के अनुसार भारत के सामने इस समय कई चुनौतियां हैं। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली रुपये में कमजोरी बढ़ती तेल कीमतें महंगाई का दबाव कॉर्पोरेट आय वृद्धि में सुस्ती रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 26 अरब डॉलर की निकासी की है। इसके अलावा भारत में अभी ऐसी बड़ी सूचीबद्ध कंपनियां अपेक्षाकृत कम हैं जो सीधे AI इंफ्रास्ट्रक्चर या वैश्विक चिप सप्लाई चेन से जुड़ी हों। फिर भी मजबूत है भारत की दीर्घकालिक कहानी बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान गिरावट के बावजूद भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता बरकरार है। भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और घरेलू खपत (Consumption Story) इसकी सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है। युवाओं की बड़ी आबादी, बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार को फिर मजबूती दे सकते हैं। AI युग में निवेशकों की नई पसंद 2026 में वैश्विक निवेशकों का फोकस उन देशों पर अधिक दिखाई दे रहा है जो AI तकनीक, डेटा सेंटर और चिप निर्माण की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा हैं। दक्षिण कोरिया और ताइवान इस ट्रेंड के सबसे बड़े लाभार्थी बनकर उभरे हैं, जबकि भारत फिलहाल अल्पकालिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि AI और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर भारत भी भविष्य में इस दौड़ में मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी शेयर बाजार अर्थव्यवस्था का दर्जा अब भारत के पास नहीं रहा। ताइवान ने बाजार पूंजीकरण (Market Capitalisation) के मामले में भारत को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक रैंकिंग में पांचवां स्थान हासिल कर लिया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर के निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी कंपनियों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं। भारत से आगे निकला ताइवान हालिया आंकड़ों के अनुसार, ताइवान के शेयर बाजार का कुल मूल्य लगभग 4.95 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है, जबकि भारत का बाजार पूंजीकरण 4.92 ट्रिलियन डॉलर के आसपास रह गया। इसके साथ ही ताइवान अब अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के बाद दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि भारत की आबादी 140 करोड़ से अधिक है, जबकि ताइवान की जनसंख्या करीब 2.3 करोड़ है। भारत में सूचीबद्ध कंपनियों की संख्या भी ताइवान की तुलना में कहीं अधिक है। AI बूम बना ताइवान की सबसे बड़ी ताकत ताइवान की इस छलांग के पीछे सबसे बड़ा कारण सेमीकंडक्टर उद्योग और AI से जुड़ी बढ़ती वैश्विक मांग है। विशेष रूप से Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC) ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। TSMC दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माण कंपनी है और AI क्रांति का प्रमुख लाभार्थी मानी जा रही है। कंपनी के बनाए चिप्स का उपयोग NVIDIA, Apple, Advanced Micro Devices और Qualcomm जैसी दिग्गज कंपनियां करती हैं। AI आधारित तकनीकों की मांग बढ़ने के साथ TSMC के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई है, जिससे ताइवान के पूरे शेयर बाजार का मूल्य बढ़ गया। भारत के सामने अलग तरह की चुनौतियां जहां ताइवान को AI और चिप सेक्टर का फायदा मिला, वहीं भारत फिलहाल कई आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, कॉरपोरेट मुनाफे की धीमी वृद्धि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये पर दबाव ने भारतीय बाजार को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अभी ऐसी सूचीबद्ध कंपनियों की कमी है जो वैश्विक AI इंफ्रास्ट्रक्चर या सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाती हों। इसी वजह से AI थीम पर निवेश करने वाले विदेशी फंड ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। विदेशी निवेशकों ने बढ़ाई चिंता भारतीय शेयर बाजार से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार निकासी भी बाजार पूंजीकरण पर असर डाल रही है। निवेशकों की चिंता के प्रमुख कारण हैं: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रुपये में कमजोरी कॉरपोरेट आय में सुस्ती कुछ सेक्टरों में ऊंचा वैल्यूएशन भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में मध्य पूर्व में तनाव और महंगे होते कच्चे तेल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। फिर भी मजबूत बनी हुई है भारत की कहानी विश्लेषकों का मानना है कि ताइवान का भारत से आगे निकलना भारत की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता पर सवाल नहीं उठाता। भारत में अभी भी लाखों निवेशक हर महीने SIP के जरिए निवेश कर रहे हैं और घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। भारत की अर्थव्यवस्था बैंकिंग, आईटी सेवाओं, विनिर्माण, उपभोक्ता खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई क्षेत्रों पर आधारित है, जबकि ताइवान का बाजार मुख्य रूप से तकनीक और चिप निर्माण पर केंद्रित है। वैश्विक निवेश का नया ट्रेंड ताइवान की सफलता यह दिखाती है कि फिलहाल दुनिया भर की पूंजी AI, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ओर तेजी से बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में यदि भारत भी चिप निर्माण और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी उपस्थिति मजबूत करता है, तो वैश्विक निवेश का बड़ा हिस्सा आकर्षित कर सकता है। फिलहाल ताइवान की बढ़त यह संकेत देती है कि वैश्विक बाजारों में AI आधारित उद्योग सबसे बड़ा निवेश आकर्षण बन चुके हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump चीन की बहुप्रतीक्षित यात्रा पर पहुंचे, जहां उनके साथ टेक दिग्गज कंपनी Jensen Huang समेत कई बड़े अमेरिकी कॉरपोरेट नेता भी मौजूद रहे। इस दौरे का मकसद चीन-अमेरिका व्यापार संबंधों को नए सिरे से मजबूत करना और बीजिंग में अमेरिकी कंपनियों के लिए बाजार खोलने की मांग रखना बताया जा रहा है। व्यापार और कूटनीति एक साथ, ट्रंप का ‘ओपन चाइना’ एजेंडा ट्रंप ने चीन रवाना होने से पहले कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping से अपील करेंगे कि चीन अमेरिकी कंपनियों के लिए अपने बाजार को “अधिक खुला” बनाए। उन्होंने इसे अमेरिकी व्यापार जगत के लिए बड़ा अवसर बताया और कहा कि यह उनकी प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल होगा। इस यात्रा को अमेरिका-चीन के बीच नाजुक व्यापार संघर्ष को संतुलित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। टेक कंपनियों के सीईओ भी डेलिगेशन में शामिल इस बार ट्रंप अपने साथ केवल राजनीतिक प्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि बड़े कॉर्पोरेट नेताओं को भी लेकर गए हैं। इनमें विशेष रूप से Nvidia के सीईओ जेंसन हुआंग शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, हुआंग को अंतिम समय में इस यात्रा में शामिल किया गया, क्योंकि Nvidia चीन में अपने एडवांस AI चिप्स की बिक्री के लिए नियामक मंजूरी पाने की कोशिश कर रही है। टेक इंडस्ट्री के अन्य प्रमुख अधिकारी भी इस डेलिगेशन का हिस्सा हैं, जो चीन में व्यापारिक अवसरों को फिर से खोलने की उम्मीद कर रहे हैं। व्यापार समझौते और वैश्विक तनाव एक साथ यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव पहले से ही संवेदनशील स्थिति में है। पिछले साल हुए अस्थायी व्यापार समझौते को बनाए रखने के लिए दोनों देशों के अधिकारी लगातार बातचीत कर रहे हैं। इसी बीच अमेरिका ईरान संकट और ताइवान मुद्दे को भी चीन के साथ वार्ता में शामिल कर रहा है, जिससे यह दौरा और अधिक जटिल हो गया है। ईरान और ताइवान मुद्दा भी बातचीत के केंद्र में अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मध्य पूर्व में तनाव कम करने में मदद करे। वहीं दूसरी ओर, ताइवान को लेकर बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और अमेरिका की सैन्य बिक्री और समर्थन का विरोध करता रहा है। व्यापार संतुलन और सेमीकंडक्टर नीति पर फोकस वार्ता में सबसे अहम मुद्दों में से एक सेमीकंडक्टर और AI चिप्स का व्यापार है। अमेरिका चीन को उच्च तकनीक वाले चिप्स की बिक्री पर प्रतिबंध में ढील चाहता है, जबकि चीन अमेरिकी कृषि और ऊर्जा उत्पादों के बड़े आयात की मांग कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बातचीत वैश्विक तकनीकी सप्लाई चेन पर बड़ा असर डाल सकती है। ट्रंप की कूटनीति पर वैश्विक नजरें ट्रंप इस यात्रा के जरिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए नए व्यापारिक समझौते और निवेश की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार चीन अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में है, जिससे बातचीत और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि बीजिंग में होने वाली यह बैठक अमेरिका-चीन रिश्तों को नई दिशा देती है या तनाव को और बढ़ाती है।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae-myung तीन दिवसीय भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी (Special Strategic Partnership) को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है। राष्ट्रपति के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जिसमें मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रमुख शामिल हैं। यह दौरा भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक, तकनीकी और सामरिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। आज होगी मोदी-म्युंग की अहम बैठक सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली जे म्युंग के बीच विस्तृत बातचीत होगी। इस बैठक में कई अहम क्षेत्रों पर चर्चा होने की संभावना है, जैसे: पोत निर्माण (Shipbuilding) व्यापार और निवेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री रक्षा और तकनीकी सहयोग सांस्कृतिक आदान-प्रदान इसके अलावा दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति और सप्लाई चेन से जुड़े विषयों पर भी चर्चा कर सकते हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति का कार्यक्रम केवल प्रधानमंत्री से मुलाकात तक सीमित नहीं है। वे भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu से भी मुलाकात करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। विदेश मंत्रालय ने बताया ‘मील का पत्थर’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने इस यात्रा को भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों के लिए “महत्वपूर्ण मील का पत्थर” बताया है। उनके अनुसार, यह दौरा दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देगा। जयशंकर ने जताई उम्मीद भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने राष्ट्रपति म्युंग से मुलाकात के बाद कहा कि: प्रधानमंत्री मोदी के साथ होने वाली वार्ता से द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलेगी भव्य स्वागत, उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति ली जे म्युंग और उनकी पत्नी किम हीया क्यूंग का नई दिल्ली एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री Harsh Malhotra ने स्वागत किया। यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि: यह भारत में राष्ट्रपति म्युंग की पहली आधिकारिक यात्रा है दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर तलाशे जाएंगे क्यों अहम है यह दौरा? भारत और दक्षिण कोरिया के बीच पहले से ही मजबूत आर्थिक और तकनीकी संबंध हैं। यह यात्रा इन क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा कर सकती है: इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन रक्षा उत्पादन हरित ऊर्जा और नई तकनीक
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चिप बनाने वाली दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में शामिल Nvidia ने भारत में अपने कर्मचारियों के लिए बड़ा तोहफा दिया है। कंपनी ने अपने लगभग 10,000 भारतीय कर्मचारियों में से अधिकांश को शेयर के रूप में आकर्षक बोनस प्रदान किया है, जिसकी कुल वैल्यू 5 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है। चार साल में मिलेगा पूरा बोनस रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बोनस एकमुश्त नहीं बल्कि अगले चार वर्षों में चरणबद्ध तरीके से कर्मचारियों को दिया जाएगा। यह “स्पेशल स्टॉक ग्रांट” कंपनी के सीईओ Jensen Huang की पहल का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 2024 में की गई थी। इस स्कीम के तहत कर्मचारियों को उनके मौजूदा Restricted Stock Units (RSU) का अतिरिक्त 25 प्रतिशत तक दिया जा रहा है। पहली किस्त 18 सितंबर 2024 को जारी की गई थी, और इसके बाद हर तिमाही 2028 तक भुगतान जारी रहेगा। कितनी मिल रही है राशि? मिड-लेवल कर्मचारियों को औसतन 5 से 20 लाख रुपये तक का अतिरिक्त स्टॉक कुछ कर्मचारियों की कुल इक्विटी वैल्यू 1 करोड़ रुपये से अधिक यह राशि डॉलर में तय होकर भारतीय रुपये में कन्वर्ट की गई है उदाहरण के तौर पर, एक मिड-लेवल कर्मचारी को 8 अतिरिक्त RSU मिले, जिनकी वैल्यू करीब 5.3 लाख रुपये है। यह उसकी पहले से मौजूद इक्विटी के अलावा है, जिससे उसकी कुल इक्विटी वैल्यू 1.2 करोड़ रुपये से भी अधिक हो गई। सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव Nvidia में कर्मचारियों की सैलरी का बड़ा हिस्सा अब स्टॉक बेस्ड पेमेंट पर निर्भर है। रिपोर्ट के मुताबिक: कुल कंपनसेशन का 50% से 75% हिस्सा इक्विटी (स्टॉक) में होता है टॉप इंजीनियर्स की सालाना सैलरी 2 से 3 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है IC6 लेवल इंजीनियर करीब 1.8 करोड़ रुपये सालाना कमा सकते हैं एंट्री से लेकर टॉप लेवल तक सैलरी एंट्री लेवल (IC1): 10–22 लाख रुपये IC2: 23–32 लाख रुपये IC3 (मिड लेवल): 27–51 लाख रुपये टॉप परफॉर्मर: 85 लाख रुपये तक क्यों खास है यह कदम? AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनियां टॉप टैलेंट को बनाए रखने के लिए ऐसे बड़े स्टॉक अवॉर्ड दे रही हैं। Nvidia का यह कदम भारत में टेक टैलेंट को आकर्षित करने और बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।