सुबह उठते ही अधिकांश लोग सिर्फ पानी से चेहरा धो लेते हैं और मानते हैं कि रात में अच्छी तरह चेहरा साफ करने के बाद सुबह दोबारा फेसवॉश की जरूरत नहीं होती। लेकिन स्किन एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। रातभर त्वचा पर पसीना, अतिरिक्त तेल (सीबम), स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के अवशेष और धूल-मिट्टी के सूक्ष्म कण जमा हो जाते हैं, जिन्हें केवल पानी से हटाया नहीं जा सकता। फेशियलिस्ट क्रिस्टीना गालमिशे के अनुसार, सुबह त्वचा की सही तरीके से सफाई करना स्वस्थ और दमकती त्वचा के लिए बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ त्वचा साफ रहती है, बल्कि बाद में लगाए जाने वाले सीरम, मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन भी बेहतर तरीके से काम करते हैं। क्या रातभर में त्वचा गंदी हो जाती है? भले ही सुबह उठने पर चेहरे पर गंदगी दिखाई न दे, लेकिन रातभर के दौरान त्वचा पर कई तरह के अवशेष जमा हो जाते हैं, जैसे— पसीना अतिरिक्त सीबम (तेल) नाइट क्रीम या सीरम के अवशेष बालों से आने वाला तेल मृत त्वचा कोशिकाएं यदि इन्हें साफ नहीं किया जाए तो रोमछिद्र (पोर्स) बंद हो सकते हैं, जिससे ब्लैकहेड्स, मुंहासे और त्वचा की चमक कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सुबह फेस क्लींजिंग करने के फायदे नियमित रूप से सुबह फेसवॉश करने से कई लाभ मिलते हैं— त्वचा से पसीना, तेल और रातभर के अवशेष हटते हैं। ब्लैकहेड्स और मुंहासों का खतरा कम होता है। त्वचा में ऑक्सीजन का प्रवाह और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। स्किन टेक्सचर और प्राकृतिक निखार में सुधार आता है। विटामिन C, हायलूरोनिक एसिड और अन्य एक्टिव इंग्रीडिएंट्स बेहतर तरीके से काम करते हैं। त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत (स्किन बैरियर) मजबूत होती है। सुबह चेहरा धोने का सही तरीका 1. अपनी स्किन टाइप के अनुसार फेस क्लींजर चुनें ऑयली या कॉम्बिनेशन स्किन: नियासिनामाइड या सैलिसिलिक एसिड युक्त जेल या फोम क्लींजर चुनें। ड्राई या सेंसिटिव स्किन: सल्फेट-फ्री या क्रीम-बेस्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें। 2. हाथों से करें मसाज कॉटन पैड की बजाय अपनी उंगलियों से लगभग 30 सेकंड तक हल्के गोलाकार (सर्कुलर) मोशन में चेहरे की मसाज करें। इससे त्वचा अच्छी तरह साफ होती है और ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ता है। 3. गुनगुने पानी से धोएं बहुत गर्म पानी त्वचा की प्राकृतिक नमी और लिपिड बैरियर को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि बहुत ठंडा पानी क्लींजर को पूरी तरह हटाने में प्रभावी नहीं होता। 4. साफ तौलिये से हल्के हाथों से सुखाएं चेहरे को रगड़ने की बजाय हल्के-हल्के थपथपाकर सुखाएं। बेहतर होगा कि रोजाना साफ तौलिये का इस्तेमाल करें। सिर्फ पानी से चेहरा धोना क्यों पर्याप्त नहीं है? सिर्फ पानी त्वचा पर मौजूद तेल, पसीना और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के अवशेषों को पूरी तरह नहीं हटा पाता। ऐसे में बाद में लगाए जाने वाले सीरम, मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन त्वचा में सही तरीके से अवशोषित नहीं हो पाते। विशेषज्ञों का मानना है कि साफ त्वचा ही स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के लिए सबसे बेहतर आधार होती है। इसलिए सुबह फेस क्लींजर और पानी दोनों का इस्तेमाल करना त्वचा को स्वस्थ, साफ और चमकदार बनाए रखने का आसान लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कदम है।
क्या आप भी घर में सनस्क्रीन लगाना छोड़ देते हैं? अधिकांश लोग मानते हैं कि सनस्क्रीन केवल बाहर धूप में निकलने, बीच पर जाने या आउटडोर गतिविधियों के दौरान ही जरूरी होती है। लेकिन त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। अगर आप घर के अंदर हैं, ऑफिस में काम कर रहे हैं या खिड़की के पास लंबे समय तक बैठते हैं, तब भी आपकी त्वचा हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों के संपर्क में आ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सनस्क्रीन केवल गर्मियों या धूप वाले दिनों के लिए नहीं, बल्कि हर मौसम और हर दिन की स्किनकेयर रूटीन का महत्वपूर्ण हिस्सा होनी चाहिए। खिड़की के शीशे भी नहीं रोक पाते सभी UV किरणें त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य कांच की खिड़कियां अधिकांश UVB किरणों को रोक देती हैं, जो सनबर्न का कारण बनती हैं। लेकिन UVA किरणें आसानी से कांच के आर-पार होकर त्वचा तक पहुंच सकती हैं। यही UVA किरणें समय से पहले झुर्रियां, पिग्मेंटेशन, डार्क स्पॉट्स और त्वचा की उम्र बढ़ने जैसी समस्याओं के लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से त्वचा कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। घर के अंदर भी क्यों बढ़ सकता है स्किन डैमेज? यदि आपका कार्यस्थल खिड़की के पास है, आप लंबे समय तक प्राकृतिक रोशनी वाले कमरे में बैठते हैं या अक्सर कार चलाते हैं, तो आपकी त्वचा पूरे दिन धीरे-धीरे UVA एक्सपोजर प्राप्त कर सकती है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट लंबे समय में पिग्मेंटेशन और फोटोएजिंग की समस्या को बढ़ा सकती है। ऐसे में ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का उपयोग अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकता है। किन लोगों के लिए घर के अंदर सनस्क्रीन ज्यादा जरूरी? कुछ लोगों को घर के अंदर भी नियमित रूप से सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए, जैसे: जो लोग खिड़की के पास लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं। जिनकी त्वचा पर पिग्मेंटेशन, मेलाज्मा या एक्ने के निशान हैं। जो रेटिनॉल, AHA या BHA जैसे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। जो समय से पहले त्वचा की उम्र बढ़ने के संकेतों को कम करना चाहते हैं। घर के अंदर UV एक्सपोजर कम करने के आसान उपाय 1. सीधे धूप वाले स्थान से दूरी बनाएं जहां तक संभव हो, खिड़कियों से कुछ दूरी पर बैठें। इससे UV किरणों का प्रभाव काफी कम हो सकता है। 2. UV-ब्लॉकिंग विंडो फिल्म लगाएं विशेष प्रकार की पारदर्शी विंडो फिल्म 99 प्रतिशत तक UVA और UVB किरणों को रोकने में मदद कर सकती है। 3. पीक सनलाइट के समय पर्दे बंद रखें सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच धूप सबसे तेज होती है। इस दौरान पर्दे या ब्लाइंड्स का उपयोग लाभदायक हो सकता है। 4. सही प्रकार के ग्लास का उपयोग करें लो-ई (Low-E) या लैमिनेटेड ग्लास सामान्य कांच की तुलना में अधिक UV सुरक्षा प्रदान करते हैं। 5. सुरक्षात्मक कपड़े पहनें यदि आपको लंबे समय तक खिड़की के पास बैठना पड़ता है, तो फुल स्लीव कपड़े या UV प्रोटेक्शन वाले फैब्रिक उपयोगी हो सकते हैं। त्वचा विशेषज्ञों की सलाह विशेषज्ञों का मानना है कि SPF 30 या उससे अधिक और PA+++ या PA++++ रेटिंग वाली ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का नियमित उपयोग त्वचा को UVA और UVB दोनों प्रकार की किरणों से बचाने में मदद करता है। घर के अंदर हों या बाहर, त्वचा की सुरक्षा के लिए सनस्क्रीन को अपनी रोजाना की आदत बनाना लंबे समय में आपकी त्वचा को स्वस्थ, युवा और सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों के मौसम में तेज धूप, उमस और पसीने का सबसे ज्यादा असर त्वचा पर दिखाई देता है। इस दौरान टैनिंग, पिंपल्स, ऑयली स्किन और जलन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में कई लोग चेहरे को ठंडक और ताजगी देने के लिए आइस फेशियल का सहारा लेते हैं। सोशल मीडिया पर भी आइस मसाज को इंस्टेंट ग्लो पाने का आसान उपाय बताया जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बर्फ का सही इस्तेमाल फायदेमंद है, लेकिन लापरवाही त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकती है। आइस फेशियल के प्रमुख फायदे धूप में लंबे समय तक रहने के बाद चेहरे पर बर्फ लगाने से त्वचा को राहत मिलती है। यह गर्मी और जलन को कम करके चेहरे को ताजगी का एहसास कराती है। पिंपल्स और सूजन में राहत बर्फ की ठंडक त्वचा की सूजन और लालिमा को कम करने में मदद कर सकती है। पिंपल्स से होने वाली जलन और दर्द में भी कुछ हद तक आराम मिलता है। चेहरे पर आता है नेचुरल ग्लो आइस मसाज से त्वचा में रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे चेहरा अधिक फ्रेश और चमकदार दिखाई देता है। कई लोग मेकअप से पहले भी आइस फेशियल करते हैं ताकि त्वचा स्मूद और टाइट नजर आए। पोर्स को टाइट करने में मदद बर्फ त्वचा के खुले रोमछिद्रों को अस्थायी रूप से सिकोड़ सकती है, जिससे चेहरा अधिक साफ और आकर्षक दिखता है। ज्यादा इस्तेमाल से हो सकते हैं नुकसान विशेषज्ञों के अनुसार, बर्फ को सीधे त्वचा पर लगाने से स्किन में जलन, लालिमा और संवेदनशीलता बढ़ सकती है। खासकर ड्राई और सेंसिटिव स्किन वाले लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। लंबे समय तक आइस मसाज करने से त्वचा रूखी हो सकती है और उसकी प्राकृतिक नमी प्रभावित हो सकती है। आइस फेशियल का सही तरीका • बर्फ को कभी भी सीधे चेहरे पर न लगाएं। • इसे किसी साफ सूती कपड़े या रूमाल में लपेटकर इस्तेमाल करें। • 1 से 2 मिनट से ज्यादा आइस मसाज न करें। • चेहरे पर हल्के हाथों से गोलाकार गति में मसाज करें। • संवेदनशील त्वचा होने पर पहले पैच टेस्ट जरूर करें। विशेषज्ञों की सलाह आइस फेशियल गर्मियों में त्वचा को ताजगी और इंस्टेंट ग्लो देने का आसान तरीका हो सकता है, लेकिन इसका संतुलित और सही इस्तेमाल जरूरी है। यदि आपको किसी प्रकार की त्वचा संबंधी समस्या है, तो बर्फ का उपयोग करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा। नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी स्किन ट्रीटमेंट को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।
फिटनेस और ब्यूटी की दुनिया में अब एक नया ट्रेंड तेजी से चर्चा में है-“फेस वर्कआउट” या फेसजिम। हाल ही में यूके से शुरू हुए इस कॉन्सेप्ट FaceGym ने भारत में भी एंट्री कर ली है, और मुंबई में इसके अनुभव को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही है। इस अनोखे स्किनकेयर और फिटनेस कॉम्बिनेशन में दावा किया जाता है कि चेहरे की मांसपेशियों को एक्सरसाइज देकर उसे ज्यादा टोन, रिलैक्स और ग्लोइंग बनाया जा सकता है। 60 मिनट का “फेस वर्कआउट” कैसा होता है? रिपोर्ट के मुताबिक, इस अनुभव में पूरा सेशन लगभग एक घंटे का होता है, जिसमें चेहरे की सफाई से शुरुआत होती है और फिर गहरी मसाज तकनीकों के जरिए चेहरे की मांसपेशियों पर काम किया जाता है। इस दौरान: गालों, जबड़े और माथे पर स्ट्रॉन्ग मसाज लिम्फैटिक ड्रेनेज तकनीक स्किन को रिलैक्स करने वाले स्ट्रोक्स टेंशन रिलीज पर फोकस उद्देश्य यह बताया गया है कि चेहरे की उन मांसपेशियों को एक्टिव किया जाए जिन्हें हम रोजमर्रा की जिंदगी में नजरअंदाज कर देते हैं। क्या सच में चेहरा “ट्रेन” हो सकता है? ब्यूटी एक्सपर्ट्स और डर्मेटोलॉजिस्ट का कहना है कि चेहरे की एक्सरसाइज से तुरंत बदलाव तो दिख सकता है, लेकिन यह स्थायी नहीं होता। डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार: चेहरे की संरचना (bone structure) नहीं बदलती लेकिन सूजन (puffiness) कम हो सकती है ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है जबड़े और चेहरे की टाइटनेस में राहत मिलती है इसका मतलब यह है कि यह “स्कल्प्टिंग” से ज्यादा “रिलैक्सेशन थेरेपी” जैसा असर देता है। अनुभव: ग्लो तो मिला, लेकिन असली असर क्या था? रिपोर्ट में बताया गया कि 60 मिनट के सेशन के बाद चेहरा ज्यादा ब्राइट, फ्रेश और रिलैक्स महसूस हुआ। खासकर जबड़े की टाइटनेस में कमी महसूस हुई, जो तनाव और लंबे समय तक स्क्रीन के उपयोग से आम समस्या बन चुकी है। हालांकि विशेषज्ञों का साफ कहना है कि यह असर अस्थायी होता है और इसे बनाए रखने के लिए नियमित सेशन की जरूरत होती है। विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों के अनुसार, फेस वर्कआउट से: चेहरे की ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होती है लिम्फैटिक ड्रेनेज से सूजन कम हो सकती है फेस मसल्स में रिलैक्सेशन मिलता है लेकिन “परमानेंट चीकबोन ट्रांसफॉर्मेशन” संभव नहीं है
भीषण गर्मी, पसीना और डिहाइड्रेशन के बीच नारियल पानी एक नेचुरल एनर्जी ड्रिंक बनकर उभर रहा है। इलेक्ट्रोलाइट्स, पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ पाचन और स्किन हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। अब एक्सपर्ट्स ने बताया है कि इसे किस समय पीना सबसे ज्यादा असरदार हो सकता है। सुबह खाली पेट पीना क्यों फायदेमंद? इंटीग्रेटिव न्यूट्रिशनिस्ट्स के मुताबिक, सुबह खाली पेट नारियल पानी पीने से शरीर को नेचुरल डिटॉक्स सपोर्ट मिलता है। यह पाचन को बेहतर बनाने, शरीर का pH बैलेंस बनाए रखने और दिनभर की हाइड्रेशन जरूरत पूरी करने में मदद कर सकता है। क्लिनिकल डाइटिशियन वेदिका प्रेमानी के अनुसार, गर्मियों में शरीर से पसीने के जरिए तेजी से इलेक्ट्रोलाइट्स निकलते हैं। ऐसे में नारियल पानी उन्हें प्राकृतिक तरीके से रिप्लेस करने में मदद करता है। इससे स्किन हाइड्रेटेड रहती है और थकान भी कम महसूस होती है। वर्कआउट और गर्मी के बाद भी असरदार एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेज धूप, लंबे सफर या वर्कआउट के बाद नारियल पानी पीना शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद कर सकता है। यह बाजार में मिलने वाले शुगर-लोडेड ड्रिंक्स की तुलना में हल्का और ज्यादा हेल्दी विकल्प माना जाता है। कितना नारियल पानी पीना सही? विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में दिन में 1 से 2 गिलास यानी करीब 200-300ml नारियल पानी पर्याप्त माना जाता है। हालांकि, ज्यादा गर्मी या भारी फिजिकल एक्टिविटी के दौरान इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है। लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है। खासकर किडनी रोग या डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बाद ही नियमित सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसमें पोटैशियम और नेचुरल शुगर मौजूद होती है। स्वाद और फायदे बढ़ाने के आसान तरीके एक्सपर्ट्स नारियल पानी में चिया सीड्स, नींबू या खीरा मिलाने की सलाह भी देते हैं। इससे फाइबर, विटामिन C और अतिरिक्त हाइड्रेशन का फायदा मिल सकता है। नारियल पानी के प्रमुख फायदे शरीर को तेजी से हाइड्रेट करता है इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में मदद पाचन और पेट की समस्याओं में राहत स्किन हेल्थ को सपोर्ट वर्कआउट के बाद रिकवरी में मदद गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाता है शुगर ड्रिंक्स का हेल्दी विकल्प
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग फिटनेस और डाइट पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन सबसे जरूरी चीज़—पानी पीना—अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। सही हाइड्रेशन सिर्फ प्यास बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के हर महत्वपूर्ण कार्य—डाइजेशन, ब्रेन फंक्शन, स्किन हेल्थ और एनर्जी लेवल—को सीधे प्रभावित करता है। यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे आप सुबह की शुरुआत से लेकर रात तक छोटी-छोटी आदतों के जरिए खुद को पूरी तरह हाइड्रेटेड रख सकते हैं। क्यों जरूरी है रोज़ हाइड्रेटेड रहना? पानी शरीर के लिए एक “नेचुरल फ्यूल” की तरह काम करता है। इसके नियमित सेवन से: शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है त्वचा हेल्दी और ग्लोइंग बनती है टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं दिमाग तेज़ और फोकस बेहतर होता है थकान और मांसपेशियों में ऐंठन से बचाव होता है पाचन बेहतर रहता है कितना पानी पीना चाहिए? विशेषज्ञों के अनुसार, औसतन: पुरुष: लगभग 3.7 लीटर प्रतिदिन महिलाएं: लगभग 2.7 लीटर प्रतिदिन हालांकि, भारत जैसे गर्म देशों में या अगर आप एक्सरसाइज करते हैं, तो यह मात्रा और बढ़ सकती है। डिहाइड्रेशन के संकेत पहचानें अगर आप इन लक्षणों को महसूस कर रहे हैं, तो समझिए शरीर को पानी की जरूरत है: मुंह सूखना और होंठ फटना थकान और चिड़चिड़ापन गहरे रंग का यूरिन सिरदर्द या चक्कर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई सुबह की शुरुआत ऐसे करें रातभर बिना पानी के रहने के बाद शरीर को तुरंत हाइड्रेशन की जरूरत होती है। उठते ही 1–2 गिलास पानी पिएं नींबू पानी लें—यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है बेड के पास पानी रखें ताकि याद रहे दिनभर हाइड्रेट रहने के स्मार्ट तरीके 1. सिर्फ पानी ही नहीं, ये ड्रिंक्स भी हैं फायदेमंद नारियल पानी नींबू पानी (निंबू पानी) छाछ हर्बल टी ORS (खासकर गर्मियों में) कैफीन और ज्यादा मीठे ड्रिंक्स से दूरी बनाएं। 2. खाने से भी बढ़ाएं हाइड्रेशन कुछ फल और सब्जियां पानी से भरपूर होती हैं: फल: तरबूज, संतरा, अंगूर, खरबूजा सब्जियां: खीरा, टमाटर, लौकी 3. वर्कआउट के दौरान ध्यान रखें एक्सरसाइज से पहले, दौरान और बाद में पानी पिएं इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करें केला, नारियल पानी अच्छे विकल्प हैं 4. ऑफिस में अपनाएं ये आसान टिप्स डेस्क पर पानी की बोतल रखें हर ब्रेक में पानी पिएं मोबाइल में रिमाइंडर लगाएं बार-बार कॉफी की जगह पानी लें गर्मी और सर्दी—दोनों में जरूरी है हाइड्रेशन गर्मियों में: थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार पानी पिएं धूप से बचें हल्के कपड़े पहनें सर्दियों में: प्यास कम लगती है, फिर भी पानी पिएं सूप और हर्बल टी लें स्किन ड्रायनेस से बचाव होता है स्किन और एनर्जी के लिए हाइड्रेशन अगर आपकी त्वचा डल लगती है या बार-बार थकान महसूस होती है, तो पानी की कमी इसकी बड़ी वजह हो सकती है। फायदे: स्किन में नेचुरल ग्लो ड्रायनेस कम एनर्जी लेवल बेहतर फाइन लाइन्स कम नजर आती हैं
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।