हर व्यक्ति के चेहरे की बनावट अलग होती है। किसी का चेहरा गोल होता है, तो किसी का अंडाकार, चौकोर, हार्ट शेप या लंबा। मेकअप एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मेकअप चेहरे की शेप के अनुसार किया जाए, तो चेहरे की प्राकृतिक खूबसूरती और भी निखरकर सामने आती है। सही तकनीक अपनाने से आपका लुक अधिक संतुलित, आकर्षक और प्रोफेशनल नजर आ सकता है। गोल (Round) चेहरे के लिए मेकअप गोल चेहरे में गाल भरे हुए और फीचर्स मुलायम दिखाई देते हैं। ऐसे में चेहरे को थोड़ा लंबा और स्लिम दिखाने पर ध्यान देना चाहिए। क्या करें? जॉलाइन और चेहरे के किनारों पर हल्की कंटूरिंग करें। ब्लश को गालों से ऊपर की ओर ब्लेंड करें। विंग्ड आईलाइनर या सॉफ्ट स्मोकी आई मेकअप चुनें। हाईलाइटर का संतुलित इस्तेमाल करें। अंडाकार (Oval) चेहरे के लिए मेकअप ओवल फेस को सबसे संतुलित फेस शेप माना जाता है। इस पर लगभग हर तरह का मेकअप अच्छा लगता है। क्या करें? हल्का फाउंडेशन और नैचुरल बेस रखें। सॉफ्ट ब्लश और न्यूड लिपस्टिक चुनें। गाल, नाक और माथे पर हल्का हाईलाइटर लगाएं। आंखों पर शिमरी या न्यूट्रल आईशैडो अच्छे लगते हैं। चौकोर (Square) चेहरे के लिए मेकअप चौकोर चेहरे में जॉलाइन अधिक उभरी हुई होती है। ऐसे में उद्देश्य फीचर्स को थोड़ा सॉफ्ट दिखाना होता है। क्या करें? हल्की कंटूरिंग करें, बहुत शार्प लुक से बचें। पीच, पिंक और न्यूड ब्लश का इस्तेमाल करें। ब्राउन या सॉफ्ट स्मोकी आई मेकअप चुनें। क्रीमी या ग्लॉसी लिपस्टिक चेहरे को सॉफ्ट लुक देती है। हार्ट (Heart) फेस शेप के लिए मेकअप हार्ट शेप चेहरे में माथा चौड़ा और ठुड्डी अपेक्षाकृत पतली होती है। क्या करें? आंखों को बोल्ड लुक दें। मस्कारा और आईलाइनर से आंखों को उभारें। ब्राइट या ग्लॉसी लिपस्टिक का इस्तेमाल करें। ठुड्डी के आसपास हल्का ब्रॉन्जर लगाकर चेहरे का संतुलन बनाए रखें। लंबे (Long) चेहरे के लिए मेकअप लंबे चेहरे की सबसे बड़ी खासियत उसकी एलिगेंट बनावट होती है, लेकिन कई बार यह जरूरत से ज्यादा लंबा दिखाई देता है। क्या करें? माथे और ठुड्डी पर हल्का ब्रॉन्जर लगाएं। ब्लश को क्षैतिज (Horizontal) दिशा में ब्लेंड करें। बहुत लंबा विंग्ड आईलाइनर लगाने से बचें। ब्राइट लिपस्टिक चेहरे को बेहतर बैलेंस देती है। मेकअप करते समय रखें इन बातों का ध्यान अपनी स्किन टोन के अनुसार सही फाउंडेशन चुनें। मेकअप से पहले त्वचा को अच्छी तरह मॉइस्चराइज करें। जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट लगाने से बचें। अच्छे ब्रश और ब्लेंडिंग तकनीक का इस्तेमाल करें। दिन और रात के मेकअप में अंतर रखें। एक्सपर्ट की सलाह मेकअप एक्सपर्ट्स के अनुसार हर ट्रेंड हर चेहरे पर अच्छा लगे, यह जरूरी नहीं है। इसलिए किसी और का मेकअप कॉपी करने के बजाय अपने फेस शेप और फीचर्स को समझकर मेकअप करें। सही मेकअप वही है जो आपकी प्राकृतिक खूबसूरती को छिपाने के बजाय उसे और निखारे। आत्मविश्वास के साथ किया गया मेकअप ही सबसे प्रभावशाली नजर आता है।
एक्ने-प्रोन और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए रेटिनॉइड्स का इस्तेमाल अक्सर चुनौतीपूर्ण माना जाता है। जलन, लालिमा और स्किन पर्जिंग जैसी समस्याओं के कारण कई लोग इनसे दूरी बना लेते हैं। हालांकि, हाल ही में लॉन्च हुआ Amahvas Ocean of Milk Nocturnal Renewal Concentrate अपनी हल्की और बैरियर-फ्रेंडली फॉर्मूलेशन की वजह से चर्चा में है। शुरुआती अनुभव बताते हैं कि यह सीरम प्रभावी होने के साथ-साथ अपेक्षाकृत सौम्य भी है। क्या है Ocean of Milk रेटिनल सीरम? Amahvas का Ocean of Milk एक नाइट सीरम है, जिसमें 0.1% Encapsulated Retinaldehyde (रेटिनल) के साथ बायो-फर्मेंट्स, नायसिनामाइड, पीएचए, पेप्टाइड्स, ह्यूमेक्टेंट्स और अश्वगंधा जैसे तत्व शामिल किए गए हैं। ब्रांड का दावा है कि यह फॉर्मूला त्वचा की मरम्मत, टेक्सचर सुधारने और स्किन बैरियर को मजबूत बनाने में मदद करता है। रेटिनल और रेटिनॉल में क्या अंतर है? रेटिनल और रेटिनॉल दोनों ही विटामिन-A के डेरिवेटिव हैं, लेकिन दोनों की कार्यप्रणाली अलग होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, रेटिनल (Retinaldehyde) त्वचा में सक्रिय रूप लेने के लिए केवल एक चरण से गुजरता है, जबकि रेटिनॉल को दो चरणों से गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि रेटिनल कम मात्रा में भी बेहतर परिणाम दे सकता है। हालांकि, इसकी प्रभावशीलता के कारण सही फॉर्मूलेशन बेहद जरूरी माना जाता है ताकि त्वचा में जलन या अत्यधिक संवेदनशीलता न हो। एक्ने-प्रोन स्किन पर कैसा रहा अनुभव? रिव्यू के अनुसार, पहली बार इस्तेमाल करने पर सीरम की बनावट हल्की महसूस हुई और अगले दिन त्वचा में न तो लालिमा दिखी और न ही किसी तरह की जलन हुई। लगातार कुछ दिनों तक उपयोग करने के बाद स्किन पहले से अधिक स्मूद और संतुलित नजर आई। सबसे खास बात यह रही कि सीरम ने त्वचा पर बिना अधिक इरिटेशन के असर दिखाया, जो संवेदनशील और एक्ने-प्रोन स्किन वाले लोगों के लिए राहत की बात हो सकती है। एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं? त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि 0.1% Encapsulated Retinaldehyde एक संतुलित विकल्प माना जा सकता है, जो सामान्य रेटिनॉल और प्रिस्क्रिप्शन रेटिनॉइड्स के बीच का स्तर प्रदान करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल एक्टिव इंग्रीडिएंट ही नहीं बल्कि पूरी फॉर्मूलेशन महत्वपूर्ण होती है। यदि रेटिनल के साथ त्वचा को हाइड्रेट और शांत रखने वाले तत्व भी मौजूद हों, तो स्किन बैरियर को बेहतर सुरक्षा मिल सकती है। कैसे करें इस्तेमाल? अगर आप पहली बार रेटिनल का उपयोग कर रहे हैं, तो विशेषज्ञ इन बातों का ध्यान रखने की सलाह देते हैं। शुरुआत सप्ताह में केवल 2 रात करें। धीरे-धीरे त्वचा की सहनशीलता के अनुसार उपयोग बढ़ाएं। हर बार मॉइस्चराइज़र जरूर लगाएं। दिन में सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। शुरुआत में तेज एसिड या अन्य एक्टिव्स के साथ इसे एक साथ न लगाएं। क्या यह सभी के लिए सही विकल्प है? हालांकि शुरुआती अनुभव सकारात्मक रहे हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति की त्वचा एक जैसा प्रतिक्रिया दे। कुछ लोगों को शुरुआती दिनों में हल्की पर्जिंग या छोटे ब्रेकआउट का अनुभव हो सकता है। इसलिए किसी भी नए एक्टिव स्किनकेयर प्रोडक्ट को अपनाने से पहले पैच टेस्ट करना और जरूरत पड़ने पर त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा। क्या है निष्कर्ष? Amahvas का Ocean of Milk उन लोगों के लिए एक दिलचस्प विकल्प बनकर सामने आया है जो रेटिनल के फायदे चाहते हैं लेकिन अत्यधिक जलन या स्किन इरिटेशन से बचना चाहते हैं। यह सीरम रातोंरात चमत्कारी बदलाव का दावा नहीं करता, बल्कि नियमित और संतुलित स्किनकेयर रूटीन के साथ धीरे-धीरे त्वचा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर देता है।
तेज धूप हो या बादलों से भरा मानसून, त्वचा को सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से बचाने के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल बेहद जरूरी माना जाता है। हालांकि, कई लोग इस वजह से सनस्क्रीन लगाने से बचते हैं क्योंकि कुछ उत्पाद चेहरे पर सफेद परत (व्हाइट कास्ट) छोड़ देते हैं, जिससे त्वचा का रंग असमान या फीका दिखाई देने लगता है। आजकल बाजार में ऐसे कई सनस्क्रीन उपलब्ध हैं, जिन्हें खासतौर पर भारतीय त्वचा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इनकी हल्की बनावट त्वचा में आसानी से समा जाती है और व्हाइट कास्ट की समस्या भी नहीं होती। व्हाइट कास्ट क्या होता है? व्हाइट कास्ट वह सफेद परत होती है जो सनस्क्रीन लगाने के बाद चेहरे पर दिखाई देती है। यह समस्या आमतौर पर जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम डाइऑक्साइड वाले कुछ मिनरल सनस्क्रीन में अधिक देखने को मिलती है। हालांकि नई तकनीक से बने कई आधुनिक सनस्क्रीन अब इस समस्या से काफी हद तक राहत देते हैं। भारतीय त्वचा के लिए 7 अच्छे सनस्क्रीन विकल्प 1. The Derma Co 1% Hyaluronic Sunscreen Aqua Gel SPF 50 PA++++ यह जेल-बेस्ड सनस्क्रीन हल्का और नॉन-ग्रीसी है। इसमें हायलूरोनिक एसिड मौजूद है, जो त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। यह अधिकांश भारतीय स्किन टोन पर बिना व्हाइट कास्ट के आसानी से ब्लेंड हो जाता है। 2. Mamaearth Vitamin C Daily Glow Sunscreen SPF 50 विटामिन C और हल्दी से युक्त यह सनस्क्रीन त्वचा को सूरज से बचाने के साथ प्राकृतिक ग्लो देने में भी मदद करता है। इसकी हल्की बनावट रोजाना इस्तेमाल के लिए उपयुक्त मानी जाती है। 3. Bioderma Photoderm Crème Claire SPF 50+ PA++++ संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए यह एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इसका टिंटेड फॉर्मूला त्वचा की रंगत को समान दिखाने में मदद करता है और सफेद परत भी नहीं छोड़ता। 4. RE' EQUIL Ultra Matte Dry Touch Sunscreen SPF 50 PA++++ ऑयली और एक्ने-प्रोन स्किन वाले लोगों के बीच यह सनस्क्रीन काफी लोकप्रिय है। इसका मैट फिनिश लंबे समय तक त्वचा को ऑयल-फ्री रखने में मदद करता है। 5. Beauty of Joseon Relief Sun Aqua-fresh SPF 50+ PA++++ कोरियन स्किनकेयर का यह सनस्क्रीन राइस एक्सट्रैक्ट और विटामिन B5 से भरपूर है। यह त्वचा को नमी देने के साथ बिना व्हाइट कास्ट के प्राकृतिक फिनिश देता है। 6. ASAYA Spot Light Depigmenting Sunscreen SPF 50 PA++++ इसमें नियासिनामाइड और लिकोरिस एक्सट्रैक्ट जैसे तत्व शामिल हैं, जो सूरज से सुरक्षा के साथ पिग्मेंटेशन की समस्या को कम करने में भी सहायक माने जाते हैं। 7. Plum SPF 50 PA++++ Sunscreen हल्की बनावट वाला यह सनस्क्रीन सभी प्रकार की त्वचा के लिए उपयुक्त माना जाता है। यह आसानी से त्वचा में समा जाता है और रोजाना इस्तेमाल के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। सनस्क्रीन खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान? कम से कम SPF 30 या SPF 50 वाला सनस्क्रीन चुनें। PA+++ या PA++++ रेटिंग वाले उत्पाद को प्राथमिकता दें। अपनी त्वचा के प्रकार (ऑयली, ड्राई या सेंसिटिव) के अनुसार सनस्क्रीन चुनें। बाहर रहने पर हर 2 से 3 घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाएं। केवल महंगे ब्रांड पर नहीं, बल्कि उत्पाद की सामग्री और त्वचा के अनुसार उसकी उपयुक्तता पर ध्यान दें। क्या सिर्फ गर्मियों में ही सनस्क्रीन जरूरी है? विशेषज्ञों के अनुसार, यूवी किरणें केवल गर्मियों में ही नहीं बल्कि बादलों वाले मौसम और मानसून में भी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए मौसम चाहे कोई भी हो, रोजाना सनस्क्रीन का इस्तेमाल त्वचा की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। नोट: किसी भी नए स्किनकेयर उत्पाद का उपयोग करने से पहले पैच टेस्ट करना और अपनी त्वचा की जरूरत के अनुसार उत्पाद चुनना बेहतर रहता है। यदि त्वचा संबंधी कोई गंभीर समस्या है, तो त्वचा विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
सुबह उठते ही अधिकांश लोग सिर्फ पानी से चेहरा धो लेते हैं और मानते हैं कि रात में अच्छी तरह चेहरा साफ करने के बाद सुबह दोबारा फेसवॉश की जरूरत नहीं होती। लेकिन स्किन एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। रातभर त्वचा पर पसीना, अतिरिक्त तेल (सीबम), स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के अवशेष और धूल-मिट्टी के सूक्ष्म कण जमा हो जाते हैं, जिन्हें केवल पानी से हटाया नहीं जा सकता। फेशियलिस्ट क्रिस्टीना गालमिशे के अनुसार, सुबह त्वचा की सही तरीके से सफाई करना स्वस्थ और दमकती त्वचा के लिए बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ त्वचा साफ रहती है, बल्कि बाद में लगाए जाने वाले सीरम, मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन भी बेहतर तरीके से काम करते हैं। क्या रातभर में त्वचा गंदी हो जाती है? भले ही सुबह उठने पर चेहरे पर गंदगी दिखाई न दे, लेकिन रातभर के दौरान त्वचा पर कई तरह के अवशेष जमा हो जाते हैं, जैसे— पसीना अतिरिक्त सीबम (तेल) नाइट क्रीम या सीरम के अवशेष बालों से आने वाला तेल मृत त्वचा कोशिकाएं यदि इन्हें साफ नहीं किया जाए तो रोमछिद्र (पोर्स) बंद हो सकते हैं, जिससे ब्लैकहेड्स, मुंहासे और त्वचा की चमक कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सुबह फेस क्लींजिंग करने के फायदे नियमित रूप से सुबह फेसवॉश करने से कई लाभ मिलते हैं— त्वचा से पसीना, तेल और रातभर के अवशेष हटते हैं। ब्लैकहेड्स और मुंहासों का खतरा कम होता है। त्वचा में ऑक्सीजन का प्रवाह और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। स्किन टेक्सचर और प्राकृतिक निखार में सुधार आता है। विटामिन C, हायलूरोनिक एसिड और अन्य एक्टिव इंग्रीडिएंट्स बेहतर तरीके से काम करते हैं। त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत (स्किन बैरियर) मजबूत होती है। सुबह चेहरा धोने का सही तरीका 1. अपनी स्किन टाइप के अनुसार फेस क्लींजर चुनें ऑयली या कॉम्बिनेशन स्किन: नियासिनामाइड या सैलिसिलिक एसिड युक्त जेल या फोम क्लींजर चुनें। ड्राई या सेंसिटिव स्किन: सल्फेट-फ्री या क्रीम-बेस्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें। 2. हाथों से करें मसाज कॉटन पैड की बजाय अपनी उंगलियों से लगभग 30 सेकंड तक हल्के गोलाकार (सर्कुलर) मोशन में चेहरे की मसाज करें। इससे त्वचा अच्छी तरह साफ होती है और ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ता है। 3. गुनगुने पानी से धोएं बहुत गर्म पानी त्वचा की प्राकृतिक नमी और लिपिड बैरियर को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि बहुत ठंडा पानी क्लींजर को पूरी तरह हटाने में प्रभावी नहीं होता। 4. साफ तौलिये से हल्के हाथों से सुखाएं चेहरे को रगड़ने की बजाय हल्के-हल्के थपथपाकर सुखाएं। बेहतर होगा कि रोजाना साफ तौलिये का इस्तेमाल करें। सिर्फ पानी से चेहरा धोना क्यों पर्याप्त नहीं है? सिर्फ पानी त्वचा पर मौजूद तेल, पसीना और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के अवशेषों को पूरी तरह नहीं हटा पाता। ऐसे में बाद में लगाए जाने वाले सीरम, मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन त्वचा में सही तरीके से अवशोषित नहीं हो पाते। विशेषज्ञों का मानना है कि साफ त्वचा ही स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के लिए सबसे बेहतर आधार होती है। इसलिए सुबह फेस क्लींजर और पानी दोनों का इस्तेमाल करना त्वचा को स्वस्थ, साफ और चमकदार बनाए रखने का आसान लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कदम है।
ग्लोइंग और हेल्दी स्किन के लिए मॉइश्चराइजर को स्किनकेयर रूटीन का सबसे जरूरी हिस्सा माना जाता है। लेकिन अगर वही मॉइश्चराइजर लगाते ही त्वचा में जलन, चुभन या तीखापन महसूस होने लगे, तो यह सामान्य बात नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में आपकी त्वचा किसी गहरी समस्या का संकेत दे रही होती है। मॉइश्चराइजर से जलन क्यों होती है? त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, जब मॉइश्चराइजर लगाने पर जलन महसूस होती है तो इसका सबसे बड़ा कारण स्किन बैरियर का कमजोर या क्षतिग्रस्त होना हो सकता है। स्किन बैरियर त्वचा की बाहरी सुरक्षा परत होती है, जो नमी को बनाए रखने और बाहरी हानिकारक तत्वों को अंदर जाने से रोकने का काम करती है। जब यह सुरक्षा परत कमजोर हो जाती है, तब सामान्य और हल्के उत्पाद भी त्वचा में चुभन या जलन पैदा कर सकते हैं। पहले ठीक लगने वाले उत्पाद अचानक क्यों करने लगते हैं परेशान? स्किन बैरियर खराब होने पर कई ऐसे तत्व भी त्वचा को परेशान कर सकते हैं जो पहले किसी तरह की समस्या नहीं पैदा करते थे। इनमें रेटिनॉल, विटामिन-सी, नियासिनामाइड, लैक्टिक एसिड, एएचए, सुगंध वाले उत्पाद और कुछ केमिकल सनस्क्रीन शामिल हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये तत्व अपने आप में खराब नहीं होते, लेकिन संवेदनशील या क्षतिग्रस्त त्वचा पर इनका असर अलग हो सकता है। क्या मॉइश्चराइजर लगाने पर हल्की चुभन सामान्य है? विशेषज्ञ बताते हैं कि बहुत ज्यादा रूखी त्वचा, हाल ही में एक्सफोलिएशन कराने, शेविंग के बाद या त्वचा में पहले से मौजूद जलन की स्थिति में कुछ सेकंड की हल्की झनझनाहट महसूस हो सकती है। हालांकि अगर यह जलन बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। स्किन बैरियर खराब होने के पीछे ये आदतें हैं जिम्मेदार त्वचा की सुरक्षा परत अचानक नहीं टूटती। कई छोटी-छोटी गलतियां धीरे-धीरे इसे नुकसान पहुंचाती हैं। इनमें शामिल हैं: जरूरत से ज्यादा एक्सफोलिएशन करना एक साथ कई एक्टिव इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल बार-बार चेहरा धोना कठोर फेसवॉश का उपयोग लगातार नए-नए स्किनकेयर उत्पाद बदलना पर्याप्त सनस्क्रीन न लगाना बहुत गर्म पानी से चेहरा धोना विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकतर लोगों के लिए क्लेंजिंग, मॉइश्चराइजिंग और सन प्रोटेक्शन पर आधारित सरल स्किनकेयर रूटीन ही पर्याप्त होता है। स्किन बैरियर को कैसे करें रिपेयर? अगर आपकी त्वचा मॉइश्चराइजर से जलन महसूस करा रही है, तो सबसे पहले स्किनकेयर रूटीन को सरल बनाना जरूरी है। कुछ दिनों के लिए रेटिनॉल, विटामिन-सी, ग्लाइकोलिक एसिड, सैलिसिलिक एसिड, स्क्रब और केमिकल पील जैसे एक्टिव उत्पादों का इस्तेमाल बंद कर दें। इसके बजाय: माइल्ड क्लेंजर का उपयोग करें सेरामाइड्स युक्त बैरियर-रिपेयर मॉइश्चराइजर लगाएं मिनरल सनस्क्रीन चुनें सुगंध वाले उत्पादों से दूरी बनाएं गर्म पानी की जगह गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है? यदि मॉइश्चराइजर लगाने पर लगातार जलन बनी रहती है, तो यह एक्जिमा, रोसैशिया या डर्मेटाइटिस जैसी त्वचा संबंधी बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। कम उत्पाद, ज्यादा फायदा आजकल लंबी और जटिल स्किनकेयर रूटीन का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि हर त्वचा को दर्जनों उत्पादों की जरूरत नहीं होती। कई बार कम उत्पादों वाला संतुलित रूटीन ही त्वचा को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका साबित होता है। यदि आपका मॉइश्चराइजर अचानक चुभने लगे, तो नया प्रोडक्ट खरीदने से पहले अपनी त्वचा की वास्तविक जरूरतों को समझना ज्यादा जरूरी है।
आजकल आइब्रो मेकअप सिर्फ बालों को सेट करने तक सीमित नहीं रह गया है। फ्लफी, लैमिनेटेड या नेचुरल लुक पाने के लिए ब्रो जेल कई लोगों की डेली ब्यूटी रूटीन का हिस्सा बन चुका है। लेकिन रोज़ाना इसका इस्तेमाल करने वालों के मन में एक सवाल जरूर आता है—क्या इससे आइब्रो के बाल कमजोर हो सकते हैं? क्या हर दिन ब्रो जेल लगाना सुरक्षित है? ब्यूटी एक्सपर्ट मोनिका अरांगुएज़न के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में रोज़ ब्रो जेल लगाने से आइब्रो की ग्रोथ या उनकी गुणवत्ता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। असली समस्या तब होती है जब: प्रोडक्ट में बहुत ज्यादा कठोर या ड्राइंग इंग्रीडिएंट्स हों। मेकअप हटाते समय बालों को जोर से रगड़ा जाए। रात में बिना सफाई किए प्रोडक्ट लगा रहने दिया जाए। खराब गुणवत्ता या एक्सपायर्ड प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जाए। इन आदतों से आइब्रो के बाल कमजोर होकर टूट सकते हैं। अच्छा ब्रो जेल कैसा होना चाहिए? एक अच्छा ब्रो जेल: बालों को बिना कठोर बनाए सेट करे। आसानी से हट जाए। मॉइस्चराइजिंग और कंडीशनिंग तत्वों से भरपूर हो। त्वचा में खुजली, जलन या रूखापन पैदा न करे। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे प्रोडक्ट्स से बचें जिनमें अत्यधिक ड्राइंग अल्कोहल, तेज़ खुशबू या त्वचा को परेशान करने वाले तत्व मौजूद हों। ब्रो जेल लगाते समय किन बातों का रखें ध्यान? जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट न लगाएं। ब्रश को बहुत जोर से न चलाएं। दिनभर आइब्रो को बार-बार छूने या सेट करने से बचें। मेकअप हटाते समय रगड़ने के बजाय जेंटल क्लेंजर का इस्तेमाल करें। सोने से पहले आइब्रो की अच्छी तरह सफाई जरूर करें। क्लियर या कलर्ड ब्रो जेल, कौन बेहतर? क्लियर ब्रो जेल उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जिनकी आइब्रो पहले से घनी हैं और जो नेचुरल लुक चाहते हैं। कलर्ड ब्रो जेल पतली या गैप वाली आइब्रो को भरा हुआ और अधिक डिफाइंड दिखाने में मदद करता है। फाइबर वाले जेल वॉल्यूम भी बढ़ाते हैं, लेकिन इन्हें हटाने के लिए अच्छी सफाई जरूरी होती है। आइब्रो को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें? रोज़ रात को मेकअप पूरी तरह हटाएं। आइब्रो के आसपास की त्वचा को मॉइस्चराइज रखें। जरूरत से ज्यादा थ्रेडिंग या प्लकिंग से बचें। अच्छी गुणवत्ता वाले कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स चुनें। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही प्रोडक्ट और सही तकनीक अपनाई जाए, तो रोज़ाना ब्रो जेल का इस्तेमाल करना नुकसानदायक नहीं है। खूबसूरत आइब्रो सिर्फ स्टाइलिंग से नहीं, बल्कि उनकी सही देखभाल से भी बनती हैं।
अगर आप दिनभर की भागदौड़ के बीच अपनी पसंदीदा खुशबू को लंबे समय तक बनाए रखना चाहते हैं, तो सॉलिड परफ्यूम आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। पारंपरिक परफ्यूम की भारी कांच की बोतलों और बार-बार स्प्रे करने की झंझट से अलग, सॉलिड परफ्यूम छोटे, सुविधाजनक और ट्रैवल-फ्रेंडली होते हैं। इनका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन्हें सीधे पल्स पॉइंट्स पर लगाया जाता है, जिससे खुशबू नियंत्रित रहती है और आसपास के लोगों को परेशान किए बिना लंबे समय तक बनी रहती है। मोम, तेल और बटर बेस्ड फॉर्मूला होने के कारण ये त्वचा पर धीरे-धीरे एक्टिव होते हैं और सामान्य स्प्रे परफ्यूम की तुलना में ज्यादा समय तक टिक सकते हैं। क्यों बढ़ रही है सॉलिड परफ्यूम की लोकप्रियता? आज की व्यस्त जीवनशैली में सुबह लगाया गया परफ्यूम अक्सर शाम तक फीका पड़ जाता है। यात्रा, पसीना, एयर कंडीशनिंग और लंबे कार्यदिवस के कारण खुशबू की तीव्रता कम हो जाती है। ऐसे में सॉलिड परफ्यूम दिन के दौरान आसान टच-अप का विकल्प बनकर उभरे हैं। इनकी खास बात यह है कि इनमें लीकेज का डर नहीं होता, ओवर-स्प्रे की समस्या नहीं होती और इन्हें आसानी से हैंडबैग या पॉकेट में रखा जा सकता है। 6 सॉलिड परफ्यूम जो आपके बैग में होने चाहिए 1. Diptyque Orphéon Solid Perfume यह रिफिलेबल कॉम्पैक्ट पैक में आता है और इसमें सीडर, टोंका बीन, जुनिपर बेरी और जैस्मिन की खुशबू का मिश्रण मिलता है। इसकी वुडी और स्मोकी फ्रेगरेंस इसे बेहद प्रीमियम बनाती है। 2. Dior Miss Dior Mini Miss लगभग ₹7,700 कीमत वाला यह लग्जरी फ्रेगरेंस स्टिक रोज और सैंडलवुड नोट्स के साथ आता है। इसका स्लिम डिज़ाइन इसे लिपस्टिक जैसा लुक देता है, जिससे इसे कहीं भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। 3. The Bare Bar Colors of Autumn ₹499 की कीमत वाला यह बजट-फ्रेंडली विकल्प गर्म, मसालेदार और वुडी खुशबू पसंद करने वालों के लिए बेहतरीन है। इसका टिन पैक इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए आदर्श बनाता है। 4. Forest Essentials Parijat ₹4,200 की कीमत वाला यह अल्कोहल-फ्री सॉलिड परफ्यूम पारिजात फूल की सुगंध पर आधारित है। इसमें आम और महुआ बटर का इस्तेमाल किया गया है, जो त्वचा को भी पोषण देता है। 5. The Joon Shop Solid 3 – Clean Fruity ₹3,200 की कीमत वाला यह परफ्यूम लाइम, वायलेट और मस्क नोट्स के साथ आता है। इसकी फ्रेश और हल्की खुशबू ऑफिस और दिनभर के उपयोग के लिए उपयुक्त है। 6. Sol de Janeiro Cheirosa 62 Jelly Perfume Balm ₹3,200 की कीमत वाला यह परफ्यूम पिस्ता, साल्टेड कैरामेल और वैनिला नोट्स के साथ आता है। मीठी और बीच-वेकेशन जैसी खुशबू पसंद करने वालों के लिए यह शानदार विकल्प है। सॉलिड परफ्यूम खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान? खुशबू के साथ-साथ फॉर्मूलेशन भी देखें। ट्रैवल फ्रेंडली पैकेजिंग को प्राथमिकता दें। यदि आपकी त्वचा संवेदनशील है तो अल्कोहल-फ्री विकल्प चुनें। लंबे समय तक टिकने वाले वुडी और मस्क बेस्ड फ्रेगरेंस अधिक प्रभावी होते हैं। सॉलिड परफ्यूम पारंपरिक परफ्यूम का विकल्प नहीं हैं, लेकिन दिनभर खुशबू बनाए रखने और आसान टच-अप के लिए ये एक स्मार्ट और स्टाइलिश समाधान जरूर बन चुके हैं।
फिटनेस और ब्यूटी की दुनिया में अब एक नया ट्रेंड तेजी से चर्चा में है-“फेस वर्कआउट” या फेसजिम। हाल ही में यूके से शुरू हुए इस कॉन्सेप्ट FaceGym ने भारत में भी एंट्री कर ली है, और मुंबई में इसके अनुभव को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही है। इस अनोखे स्किनकेयर और फिटनेस कॉम्बिनेशन में दावा किया जाता है कि चेहरे की मांसपेशियों को एक्सरसाइज देकर उसे ज्यादा टोन, रिलैक्स और ग्लोइंग बनाया जा सकता है। 60 मिनट का “फेस वर्कआउट” कैसा होता है? रिपोर्ट के मुताबिक, इस अनुभव में पूरा सेशन लगभग एक घंटे का होता है, जिसमें चेहरे की सफाई से शुरुआत होती है और फिर गहरी मसाज तकनीकों के जरिए चेहरे की मांसपेशियों पर काम किया जाता है। इस दौरान: गालों, जबड़े और माथे पर स्ट्रॉन्ग मसाज लिम्फैटिक ड्रेनेज तकनीक स्किन को रिलैक्स करने वाले स्ट्रोक्स टेंशन रिलीज पर फोकस उद्देश्य यह बताया गया है कि चेहरे की उन मांसपेशियों को एक्टिव किया जाए जिन्हें हम रोजमर्रा की जिंदगी में नजरअंदाज कर देते हैं। क्या सच में चेहरा “ट्रेन” हो सकता है? ब्यूटी एक्सपर्ट्स और डर्मेटोलॉजिस्ट का कहना है कि चेहरे की एक्सरसाइज से तुरंत बदलाव तो दिख सकता है, लेकिन यह स्थायी नहीं होता। डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार: चेहरे की संरचना (bone structure) नहीं बदलती लेकिन सूजन (puffiness) कम हो सकती है ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है जबड़े और चेहरे की टाइटनेस में राहत मिलती है इसका मतलब यह है कि यह “स्कल्प्टिंग” से ज्यादा “रिलैक्सेशन थेरेपी” जैसा असर देता है। अनुभव: ग्लो तो मिला, लेकिन असली असर क्या था? रिपोर्ट में बताया गया कि 60 मिनट के सेशन के बाद चेहरा ज्यादा ब्राइट, फ्रेश और रिलैक्स महसूस हुआ। खासकर जबड़े की टाइटनेस में कमी महसूस हुई, जो तनाव और लंबे समय तक स्क्रीन के उपयोग से आम समस्या बन चुकी है। हालांकि विशेषज्ञों का साफ कहना है कि यह असर अस्थायी होता है और इसे बनाए रखने के लिए नियमित सेशन की जरूरत होती है। विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों के अनुसार, फेस वर्कआउट से: चेहरे की ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होती है लिम्फैटिक ड्रेनेज से सूजन कम हो सकती है फेस मसल्स में रिलैक्सेशन मिलता है लेकिन “परमानेंट चीकबोन ट्रांसफॉर्मेशन” संभव नहीं है
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।