Smartphone Leaks

Leaked render of Xiaomi 18 Pro showing dedicated AI button and dual camera module with secondary display
Xiaomi 18 Pro Leak: नया AI बटन, बड़ी बैटरी और सूक्ष्म डिजाइन बदलाव की चर्चा

  टेक जगत में एक बार फिर Xiaomi के आगामी फ्लैगशिप स्मार्टफोन को लेकर हलचल तेज हो गई है। हालिया लीक के मुताबिक, कंपनी अपने नए प्रीमियम डिवाइस Xiaomi 18 Pro पर काम कर रही है, जिसमें एक खास डेडिकेटेड AI बटन और कुछ सूक्ष्म डिजाइन बदलाव देखने को मिल सकते हैं। डिजाइन में क्या नया? ऑनलाइन सामने आए कथित रेंडर्स से संकेत मिलता है कि फोन के साइड में एक नया फिजिकल बटन दिया जा सकता है, जिस पर AI ब्रांडिंग होगी। यह बटन यूजर्स को एक टैप में कई स्मार्ट फीचर्स एक्सेस करने की सुविधा देगा। बताया जा रहा है कि यह बटन: स्मार्ट होम डिवाइसेज को कंट्रोल करने में मदद करेगा कनेक्टेड कार फीचर्स को मैनेज करेगा और AI आधारित टूल्स जैसे “Xiaomi Miclaw” तक तुरंत पहुंच देगा हालांकि कंपनी ने अभी तक इन फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कैमरा और सेकेंडरी डिस्प्ले रेंडर में डिवाइस का कैमरा मॉड्यूल भी दिखा है, जिसमें: दो बड़े कैमरा लेंस और पीछे की तरफ सेकेंडरी डिस्प्ले होने की संभावना यह डिजाइन पिछले मॉडल Xiaomi 17 Pro की तरह ही नजर आता है, जिसमें बैक पैनल पर एक छोटा डिस्प्ले दिया गया था। दमदार बैटरी और चार्जिंग रिपोर्ट्स के अनुसार, Xiaomi 18 Pro में: 7,000mAh या उससे बड़ी बैटरी 100W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट जैसी हाई-एंड सुविधाएं मिल सकती हैं, जो इसे पावर यूजर्स के लिए बेहद आकर्षक बना सकती हैं। कैमरा स्पेसिफिकेशन (संभावित) लीक्स के मुताबिक फोन में: दो 200MP कैमरे टेलीफोटो और मैक्रो कैपेबिलिटी जैसे एडवांस्ड फीचर्स शामिल हो सकते हैं, जो फोटोग्राफी एक्सपीरियंस को नई ऊंचाई दे सकते हैं। पुराने मॉडल से तुलना पिछला मॉडल Xiaomi 17 Pro सितंबर 2025 में लॉन्च हुआ था, जिसकी शुरुआती कीमत लगभग ₹75,000 थी। इसमें: Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट 6,300mAh बैटरी Leica ट्यून कैमरा सिस्टम जैसे फीचर्स दिए गए थे।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Google Pixel 11 Pro XL leaked render showing horizontal camera bar and premium large display design
Google Pixel 11 Pro XL Leak: पुराने डिजाइन के साथ आएगा नया फ्लैगशिप, जानिए क्या है खास

स्मार्टफोन बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Google के आगामी फ्लैगशिप स्मार्टफोन Google Pixel 11 Pro XL के CAD रेंडर्स लीक हो गए हैं, जिससे इसके डिजाइन और संभावित फीचर्स की झलक सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार कंपनी डिजाइन में बड़ा बदलाव करने के बजाय पुराने फॉर्मूले को ही आगे बढ़ाती नजर आ रही है। डिजाइन में नहीं होगा बड़ा बदलाव लीक हुए रेंडर्स के अनुसार Pixel 11 Pro XL का डिजाइन लगभग अपने पिछले मॉडल Google Pixel 10 Pro XL जैसा ही होगा। वही सिग्नेचर horizontal camera bar ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप बॉडी और कैमरा मॉड्यूल का समान डिजाइन यह दर्शाता है कि Google इस बार डिजाइन के बजाय परफॉर्मेंस और इंटरनल अपग्रेड पर ज्यादा ध्यान दे सकता है। बड़ी स्क्रीन के साथ XL एक्सपीरियंस Pixel 11 Pro XL में बड़ा डिस्प्ले देखने को मिल सकता है: 6.8-इंच LTPO AMOLED स्क्रीन बड़ा फॉर्म फैक्टर, प्रीमियम लुक पावर और वॉल्यूम बटन दाईं तरफ यह डिवाइस उन यूजर्स को टारगेट करेगा जो बड़ी स्क्रीन और प्रीमियम अनुभव चाहते हैं। संभावित स्पेसिफिकेशन लीक्स के मुताबिक इस स्मार्टफोन में दमदार हार्डवेयर मिल सकता है: नया Tensor G6 प्रोसेसर 16GB RAM 256GB स्टोरेज लगभग 162.7 x 76.5 x 8.5mm डाइमेंशन हालांकि, अभी तक कंपनी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। क्या है खास? Pixel 11 Pro XL में भले ही डिजाइन पुराना लगे, लेकिन इसकी ताकत इसके अंदर छिपी हो सकती है। बेहतर AI और कैमरा प्रोसेसिंग की उम्मीद Tensor चिप के साथ स्मार्ट फीचर्स फ्लैगशिप परफॉर्मेंस निष्कर्ष Google Pixel 11 Pro XL उन यूजर्स के लिए दिलचस्प हो सकता है जो डिजाइन से ज्यादा परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस को प्राथमिकता देते हैं। अब देखना होगा कि लॉन्च के समय कंपनी इसमें क्या नए इनोवेशन जोड़ती है  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Motorola Edge 70 Pro series and Razr 70 foldable smartphone leaked design and features
Motorola Edge 70 Series: नए Pro मॉडल्स और Razr 70 की बड़ी लीक्स, प्रीमियम सेगमेंट में बढ़ेगी टक्कर

स्मार्टफोन बाजार में अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए Motorola लगातार नए डिवाइस लॉन्च करने की रणनीति पर काम कर रहा है। हाल ही में पेश की गई Edge 70 सीरीज़ के बाद अब कंपनी अपने पोर्टफोलियो को विस्तार देने जा रही है। ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, Edge 70 लाइनअप में तीन नए “Pro” मॉडल्स जल्द शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही कंपनी के आगामी फोल्डेबल स्मार्टफोन Motorola Razr 70 से जुड़ी अहम जानकारी भी सामने आई है। Edge 70 Series में आएंगे तीन नए Pro मॉडल्स रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी तीन नए प्रीमियम स्मार्टफोन लॉन्च करने की तैयारी में है: Motorola Edge 70 Pro Motorola Edge 70 Pro+ Motorola Edge 70 Pro Lite इन डिवाइसेज़ के कोडनेम क्रमशः Terrain, Terrain+ और Terrain Lite बताए जा रहे हैं। ये नए मॉडल्स मौजूदा लाइनअप - Motorola Edge 70, Motorola Edge 70 Fusion और Motorola Edge 70 Fusion+  को और मजबूत करेंगे। हालांकि कंपनी की ओर से लॉन्च डेट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन लीक्स से संकेत मिलते हैं कि इनका अनावरण जल्द हो सकता है। Edge 70 Fusion+ के फीचर्स ने बढ़ाई चर्चा हाल ही में ग्लोबल मार्केट में पेश किया गया Motorola Edge 70 Fusion+ पहले से ही यूज़र्स के बीच चर्चा में है। इसके प्रमुख फीचर्स इसे मिड-रेंज सेगमेंट में प्रीमियम अनुभव देने वाला बनाते हैं: 6.8 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले (144Hz रिफ्रेश रेट) Snapdragon 7s Gen 4 प्रोसेसर 5200mAh की बैटरी हाई-रेज़ोल्यूशन कैमरा सेटअप Razr 70: फोल्डेबल सेगमेंट में बड़ा दांव फोल्डेबल स्मार्टफोन बाजार में भी Motorola अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। आगामी Motorola Razr 70 को लेकर जो जानकारी सामने आई है, वह इसे स्टाइल और परफॉर्मेंस का संतुलित मिश्रण बनाती है। संभावित कलर ऑप्शन्स: Pantone Hematite Pantone Sparkling Green Pink स्टोरेज और RAM विकल्प: RAM: 8GB / 12GB / 16GB स्टोरेज: 256GB / 512GB / 1TB रिपोर्ट्स के अनुसार, यह डिवाइस भी जल्द लॉन्च हो सकता है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। क्या है बड़ा संकेत? Motorola की यह रणनीति साफ दिखाती है कि कंपनी मिड-रेंज से लेकर प्रीमियम और फोल्डेबल सेगमेंट तक अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है। Edge 70 Pro मॉडल्स जहां हाई-एंड यूज़र्स को टारगेट करेंगे, वहीं Razr 70 फोल्डेबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। निष्कर्ष कुल मिलाकर, आने वाले Motorola Edge 70 Pro सीरीज़ और Motorola Razr 70 स्मार्टफोन यूज़र्स को नए विकल्प और बेहतर टेक्नोलॉजी देने का वादा करते हैं। अब सबकी निगाहें कंपनी की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जो इस साल के स्मार्टफोन ट्रेंड्स को नई दिशा दे सकती है।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0