सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह सप्ताह बेहद अहम है। 10वीं, 12वीं पास और ग्रेजुएट उम्मीदवारों के लिए विभिन्न विभागों में हजारों पदों पर आवेदन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यदि आपने अभी तक फॉर्म नहीं भरा है, तो अब देर करना भारी पड़ सकता है। एसएससी सीजीएल, यूपीएसएसएससी लोअर पीसीएस, राजस्थान कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर, इंडियन नेवी अग्निवीर समेत कुल 7 बड़ी भर्तियों की अंतिम तिथि 30 जून तक समाप्त हो जाएगी। ऐसे में उम्मीदवारों को जल्द से जल्द आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए। 1. SSC CGL Recruitment 2026 कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने Combined Graduate Level (CGL) परीक्षा 2026 के तहत 12,256 पदों पर भर्ती निकाली है। यह केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में अधिकारी स्तर की नौकरियों के लिए शानदार अवसर माना जा रहा है। योग्यता: ग्रेजुएशन आयु सीमा: 18 से 27-32 वर्ष (पद के अनुसार) अंतिम तिथि: 22 जून 2026 2. UPSSSC Lower PCS Recruitment 2026 उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने लोअर पीसीएस भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाकर 2,516 कर दी है। योग्यता: ग्रेजुएशन + UPSSSC PET 2025 स्कोर कुछ पदों के लिए O-Level सर्टिफिकेट आवश्यक अंतिम तिथि: 25 जून 2026 करेक्शन विंडो: 2 जुलाई 2026 तक 3. RSSB Computer Instructor Recruitment 2026 राजस्थान में बेसिक और सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर के कुल 3,951 पदों पर भर्ती की जा रही है। योग्यता: बीई/बीटेक, बीएससी, पीजीडीसीए या संबंधित डिग्री आयु सीमा: 18 से 40 वर्ष अंतिम तिथि: 23 जून 2026 4. Allahabad High Court RO/ARO Recruitment 2026 इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रिव्यू ऑफिसर, असिस्टेंट रिव्यू ऑफिसर और कंप्यूटर असिस्टेंट के 543 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। योग्यता: बैचलर डिग्री, कंप्यूटर डिप्लोमा, CCC या O-Level प्रमाणपत्र अंग्रेजी टाइपिंग स्पीड: 25 शब्द प्रति मिनट अंतिम तिथि: 21 जून 2026 5. BPSSC ASI Technical Recruitment 2026 बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (टेक्निकल) के 22 पदों पर भर्ती निकाली है। योग्यता: इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी या संबंधित शाखा में डिप्लोमा आवेदन शुल्क: 100 रुपये अंतिम तिथि: 21 जून 2026 6. UPSSSC Excise Constable Recruitment 2026 उत्तर प्रदेश में विधान भवन रक्षक और अग्निरक्षक के 170 पदों पर भर्ती की जा रही है। योग्यता: 12वीं पास + UPSSSC PET 2025 स्कोर अंतिम तिथि: 29 जून 2026 पुरुषों और महिलाओं के लिए निर्धारित शारीरिक मानक लागू 7. Indian Navy Agniveer Recruitment 2026 भारतीय नौसेना में अग्निवीर अप्रेंटिस के पदों पर अविवाहित पुरुष उम्मीदवारों से आवेदन मांगे गए हैं। योग्यता: 10वीं पास और AICTE मान्यता प्राप्त 3 वर्षीय डिप्लोमा न्यूनतम अंक: 50 प्रतिशत आवेदन शुल्क: 550 रुपये अंतिम तिथि: 29 जून 2026, शाम 5 बजे सरकारी नौकरी का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए यह आखिरी मौका साबित हो सकता है। अंतिम तिथि निकलने के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
अगर आप ग्रेजुएट हैं और एक प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, तो SSC CGL 2026 आपके लिए बेहतरीन अवसर लेकर आया है। इस बार कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (CGL) के माध्यम से गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) में Sub-Inspector (SI) और Junior Intelligence Officer (JIO) के पदों पर भर्ती की जाएगी। SSC CGL के जरिए हर साल केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में ग्रुप-B और ग्रुप-C पदों पर नियुक्तियां की जाती हैं। NCB में शामिल ये पद युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। कब शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया? SSC CGL 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया 21 मई 2026 से शुरू होगी। उम्मीदवार 22 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। फीस जमा करने की अंतिम तिथि 23 जून 2026 निर्धारित की गई है। इसके अलावा आवेदन फॉर्म में सुधार के लिए करेक्शन विंडो 29 जून से 1 जुलाई 2026 तक खुली रहेगी। Tier-1 परीक्षा का आयोजन अगस्त या सितंबर 2026 में किया जाएगा। शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा इन पदों के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) पास होना अनिवार्य है। आयु सीमा पद के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है— न्यूनतम आयु: 18 वर्ष अधिकतम आयु: 27 से 32 वर्ष आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। ऐसे करें आवेदन उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके आवेदन कर सकते हैं— SSC की आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर जाएं। SSC CGL 2026 रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें। बेसिक जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन पूरा करें। लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरें। जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन शुल्क जमा करें। फॉर्म सबमिट करके उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। आवेदन शुल्क सामान्य, OBC और EWS वर्ग: ₹100 SC, ST और PwBD उम्मीदवार: कोई शुल्क नहीं सभी महिला अभ्यर्थियों को भी आवेदन शुल्क से छूट दी गई है। फीस का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या UPI के माध्यम से किया जा सकता है। कितनी मिलेगी सैलरी? नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में Sub-Inspector पद पे-लेवल 6 के अंतर्गत आता है। चयनित उम्मीदवारों को ₹35,400 से लेकर ₹1,12,400 प्रति माह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) समेत कई अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा। युवाओं के लिए शानदार अवसर अगर आप केंद्र सरकार के प्रतिष्ठित विभाग में नौकरी करने का सपना देख रहे हैं, तो SSC CGL 2026 के जरिए NCB में भर्ती आपके लिए एक शानदार अवसर साबित हो सकती है। अच्छी सैलरी, स्थिर करियर और सरकारी सुविधाओं के कारण यह भर्ती लाखों उम्मीदवारों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (SSC CGL) के माध्यम से केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) में इनकम टैक्स इंस्पेक्टर के पद पर भर्ती की जाती है। यह केंद्र सरकार की ग्रुप ‘बी’ श्रेणी की प्रतिष्ठित नौकरियों में शामिल है, जिसे हर साल लाखों अभ्यर्थी अपना लक्ष्य बनाते हैं। आकर्षक वेतन, स्थायी नौकरी, विभिन्न सरकारी भत्तों और बेहतर प्रमोशन संभावनाओं के कारण यह पद युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय माना जाता है। हाल ही में SSC ने CGL भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत इच्छुक उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। क्या होता है इनकम टैक्स इंस्पेक्टर का काम? इनकम टैक्स इंस्पेक्टर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अंतर्गत कार्य करता है। इस पद पर नियुक्त अधिकारी का मुख्य कार्य आयकर से जुड़े मामलों की जांच करना, करदाताओं के रिटर्न की निगरानी करना, कर चोरी से संबंधित मामलों की जांच करना तथा कर कानूनों के पालन को सुनिश्चित करना होता है। इसके अलावा विभागीय सर्वे, दस्तावेजों की जांच और विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी इस पद का हिस्सा होती हैं। आयु सीमा SSC CGL के माध्यम से इनकम टैक्स इंस्पेक्टर पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार की आयु 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाती है। कितनी मिलेगी सैलरी? इनकम टैक्स इंस्पेक्टर का पद वेतन स्तर-8 (पे लेवल-8) के अंतर्गत आता है। वेतन विवरण: मूल वेतन: 47,600 रुपये प्रति माह वेतनमान: 47,600 रुपये से 1,51,100 रुपये प्रति माह इसके अलावा कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) और अन्य सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं। सभी भत्तों को जोड़ने के बाद शुरुआती इन-हैंड सैलरी शहर और पोस्टिंग के अनुसार 70,000 रुपये या उससे अधिक हो सकती है। शैक्षणिक योग्यता इस पद के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (ग्रेजुएशन) पास होना अनिवार्य है। किसी भी विषय से स्नातक अभ्यर्थी SSC CGL परीक्षा के माध्यम से इस पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया कैसे होगी? इनकम टैक्स इंस्पेक्टर पद पर चयन SSC CGL परीक्षा के माध्यम से किया जाता है। चयन प्रक्रिया में शामिल हैं: टियर-1 परीक्षा टियर-2 परीक्षा दस्तावेज सत्यापन इन सभी चरणों में प्रदर्शन और मेरिट के आधार पर उम्मीदवारों को अंतिम रूप से पद आवंटित किया जाता है। आवेदन कैसे करें? आवेदन करने के लिए उम्मीदवार निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाएं: SSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) पूरा करें। SSC CGL 2026 आवेदन लिंक पर क्लिक करें। आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सावधानीपूर्वक भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन शुल्क का भुगतान करें। फॉर्म जमा करने के बाद उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। SSC CGL के माध्यम से इनकम टैक्स इंस्पेक्टर का पद उन युवाओं के लिए एक शानदार अवसर है जो प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी, अच्छा वेतन और करियर में स्थिरता चाहते हैं। ग्रेजुएट अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती सरकारी सेवा में प्रवेश का एक बेहतरीन माध्यम साबित हो सकती है।
Income Tax Department में नौकरी करना आज भी लाखों युवाओं का सपना माना जाता है। अच्छी सैलरी, सरकारी सुविधाएं और सम्मानजनक पद के कारण इस विभाग की नौकरियों का काफी क्रेज रहता है। हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद “Office Superintendent” पद चर्चा में आ गया है, जिसके बारे में कई अभ्यर्थी जानकारी जुटा रहे हैं। यह पद Central Board of Direct Taxes (CBDT) के अंतर्गत आता है और इसे Staff Selection Commission की SSC CGL परीक्षा के जरिए भरा जाता है। ग्रुप-B की प्रतिष्ठित पोस्ट Income Tax Department में Office Superintendent एक Group-B Non-Gazetted पद होता है। यह Pay Level-6 के अंतर्गत आता है और इसमें प्रशासनिक व सुपरवाइजरी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। यह नौकरी उन उम्मीदवारों के लिए काफी आकर्षक मानी जाती है जो सरकारी सेक्टर में स्थिर करियर और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस चाहते हैं। क्या होता है Office Superintendent का काम? इस पद पर नियुक्त कर्मचारी विभाग के प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करता है। ऑफिस के संचालन को व्यवस्थित रखना इसकी मुख्य जिम्मेदारी होती है। प्रमुख जिम्मेदारियां ऑफिस के दैनिक कार्यों की निगरानी कर्मचारियों के कार्यों का समन्वय प्रशासनिक रिपोर्ट तैयार करना विभागीय प्रक्रियाओं और रिकॉर्ड का प्रबंधन ऑफिस मैनेजमेंट से जुड़े कार्यों को संभालना यह पूरी तरह प्रशासनिक और सुपरवाइजरी प्रकृति की नौकरी होती है। कितनी मिलती है सैलरी? Office Superintendent पद पर शुरुआती बेसिक पे ₹35,400 प्रति माह होती है। इसके अलावा HRA, DA और अन्य सरकारी भत्ते भी मिलते हैं। अनुमानित सैलरी स्ट्रक्चर वेतन विवरण राशि शुरुआती बेसिक पे ₹35,400 प्रति माह HRA, DA और अन्य भत्ते नियमानुसार अनुमानित इन-हैंड सैलरी ₹48,000 से ₹58,000 प्रति माह मेट्रो शहरों में पोस्टिंग होने पर HRA ज्यादा मिलने के कारण इन-हैंड सैलरी ₹60,000 के करीब भी पहुंच सकती है। कैसे बन सकते हैं Office Superintendent? इस पद पर चयन के लिए उम्मीदवारों को SSC CGL परीक्षा पास करनी होती है। मेरिट और पोस्ट प्रेफरेंस के आधार पर उम्मीदवारों को विभाग और पद आवंटित किए जाते हैं। जरूरी योग्यता किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन SSC CGL परीक्षा में सफलता मेरिट लिस्ट में अच्छा प्रदर्शन क्यों लोकप्रिय है यह नौकरी? इस पद की लोकप्रियता के पीछे कई वजहें हैं: आकर्षक सरकारी सैलरी स्थिर और सुरक्षित करियर प्रमोशन के अच्छे अवसर केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के लाभ बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस इसी वजह से हर साल लाखों उम्मीदवार SSC CGL परीक्षा देकर इनकम टैक्स विभाग में नौकरी पाने का सपना देखते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।