SSC टेक वुमेन

Women engineering graduates applying for Indian Army SSC Tech Women 2026 officer recruitment through the official online portal.
Indian Army SSC Tech Women 2026: महिला इंजीनियरों के लिए भारतीय सेना में अधिकारी बनने का सुनहरा मौका, 30 पदों पर आवेदन शुरू

भारतीय सेना ने 68वें शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) टेक्निकल महिला कोर्स के लिए आधिकारिक भर्ती अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत अविवाहित महिला इंजीनियरिंग स्नातकों को सेना में अधिकारी बनने का अवसर मिलेगा। इच्छुक उम्मीदवार 8 जुलाई 2026 से 6 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। चयनित अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण अप्रैल 2027 से ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), गया (बिहार) में शुरू होगा। 30 पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती अभियान के तहत विभिन्न इंजीनियरिंग शाखाओं में कुल 30 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसके अलावा सेवा के दौरान शहीद हुए रक्षा कर्मियों की विधवाओं के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी श्रेणी में विशेष प्रवेश का प्रावधान भी रखा गया है। भर्ती से जुड़ी प्रमुख जानकारी विवरण जानकारी भर्ती का नाम Indian Army SSC Tech Women 68 Course पद शॉर्ट सर्विस कमीशन (तकनीकी) महिला अधिकारी कुल पद 30 आवेदन शुरू 8 जुलाई 2026 आवेदन की अंतिम तिथि 6 अगस्त 2026 प्रशिक्षण शुरू अप्रैल 2027 प्रशिक्षण स्थल OTA, गया (बिहार) कौन कर सकता है आवेदन? इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाली उम्मीदवारों को निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी। उम्मीदवार अविवाहित महिला इंजीनियरिंग स्नातक हो। इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत छात्राएं भी आवेदन कर सकती हैं, यदि उनका परिणाम 1 अप्रैल 2027 तक घोषित हो जाए। 1 अप्रैल 2027 को उम्मीदवार की आयु 20 से 27 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यानी अभ्यर्थी का जन्म 1 अप्रैल 2000 से 31 मार्च 2007 के बीच हुआ होना चाहिए। शहीद रक्षा कर्मियों की विधवाओं के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित की गई है। ऐसे होगा चयन भारतीय सेना इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में करेगी। आवेदन पत्रों की जांच और शॉर्टलिस्टिंग सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (SSB) इंटरव्यू मेडिकल परीक्षण अंतिम मेरिट सूची जॉइनिंग लेटर जारी SSB इंटरव्यू लगभग पांच दिनों तक चलेगा, जिसमें उम्मीदवारों की नेतृत्व क्षमता, मानसिक योग्यता और व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाएगा। फिजिकल फिटनेस भी होगी जरूरी चयन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को निर्धारित शारीरिक मानकों पर भी खरा उतरना होगा। इसके तहत उम्मीदवार को— 13 मिनट में 2.4 किलोमीटर दौड़ पूरी करनी होगी। कम से कम 15 पुश-अप्स करने होंगे। 2 पुल-अप्स पूरे करने होंगे। 25 सिट-अप्स करने होंगे। तैराकी का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए। ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार नीचे दिए गए चरणों का पालन कर आवेदन कर सकते हैं— भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट Join Indian Army पर जाएं। Officer Entry Apply/Login विकल्प चुनें। यदि पहले से पंजीकरण नहीं है तो नया रजिस्ट्रेशन करें। आधार या मैट्रिक प्रमाणपत्र के माध्यम से सत्यापन पूरा करें। लॉगिन करने के बाद Short Service Commission (Technical) Women Course का चयन करें। व्यक्तिगत, शैक्षणिक और संपर्क संबंधी जानकारी भरें। यदि पहले SSB में शामिल हुए हैं तो उसका विवरण दर्ज करें। सभी जानकारियां जांचने के बाद आवेदन पत्र सबमिट करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंट सुरक्षित रखें। महिला इंजीनियरों के लिए सुनहरा अवसर अगर आप इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं और भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं, तो यह भर्ती आपके लिए बेहतरीन अवसर है। इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Sourav Ganguly
ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल हुए सौरव गांगुली

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को उनके 54वें जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने बड़ा सम्मान दिया है। आईसीसी ने उन्हें प्रतिष्ठित ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल करने की घोषणा की। यह फैसला स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबर्ग में आयोजित आईसीसी बोर्ड की वार्षिक बैठक में लिया गया। गांगुली इस सम्मान को हासिल करने वाले कुल 12वें भारतीय क्रिकेटर और पुरुष वर्ग में 10वें भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।   गांगुली ने इस सम्मान पर खुशी जताते हुए आईसीसी और चेयरमैन जय शाह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हॉल ऑफ फेम में शामिल होना उनके लिए बेहद गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट के महान खिलाड़ियों के साथ इस प्रतिष्ठित सूची का हिस्सा बनना उनके करियर का यादगार पल है।   कप्तान के रूप में बदली भारतीय क्रिकेट की तस्वीर सौरव गांगुली का क्रिकेट करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने 113 टेस्ट मैचों में 7,212 रन बनाए, जबकि 311 वनडे मुकाबलों में 22 शतकों की मदद से 11,363 रन बनाए। इसके अलावा उन्होंने वनडे में 132 विकेट भी अपने नाम किए। वर्ष 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंतिम टेस्ट खेलने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया।   गांगुली का सबसे बड़ा योगदान क्या क्या है? साल 2000 से 2005 के बीच भारतीय टीम की कप्तानी के दौरान माना जाता है। मैच फिक्सिंग विवाद के बाद उन्होंने टीम इंडिया को नई दिशा दी। उनकी कप्तानी में भारत ने 2002 नेटवेस्ट ट्रॉफी जीती, 2002 चैंपियंस ट्रॉफी में संयुक्त विजेता बना, 2003 विश्व कप के फाइनल तक पहुंचा और 2004 में पाकिस्तान में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतकर इतिहास रचा। 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता टेस्ट की ऐतिहासिक जीत भी उनके नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि रही।   संन्यास के बाद गांगुली ने क्रिकेट प्रशासन में अहम भूमिका निभाई। वह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के अध्यक्ष, SA20 में प्रिटोरिया कैपिटल्स के मुख्य कोच तथा आईपीएल और डब्ल्यूपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के क्रिकेट डायरेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

anjali kumari जुलाई 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0