मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की बढ़ती चिंता के बीच बाजार में जोरदार बिकवाली हावी रही। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी भी 23,300 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में आई इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। लाल निशान में खुला बाजार घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत ही कमजोर रही। सेंसेक्स 142 अंकों की गिरावट के साथ 74,507 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 67 अंकों की कमजोरी के साथ 23,415 पर कारोबार शुरू हुआ। हालांकि दिन चढ़ने के साथ बिकवाली और तेज हो गई। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 726.56 अंक गिरकर 73,923.28 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 190 अंक से अधिक टूटकर 23,285 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। मिडिल ईस्ट तनाव का असर विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया घटनाक्रम ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और उसके जवाब में ईरान की प्रतिक्रिया ने क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने की आशंका को जन्म दिया है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम भरे निवेश से दूरी बनाकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। एशियाई बाजारों का मिला-जुला रुख एशियाई बाजारों में मिश्रित तस्वीर देखने को मिली। जापान का Nikkei 225 रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया और 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की। वहीं Hang Seng Index में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही। दक्षिण कोरिया के बाजार सार्वजनिक अवकाश के कारण बंद रहे। अमेरिकी बाजारों में रही मजबूती इसके विपरीत मंगलवार को अमेरिकी बाजार मजबूत बंद हुए थे। Dow Jones Industrial Average नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जबकि S&P 500 ने पहली बार 7,600 का स्तर पार किया। Nasdaq Composite में भी मामूली बढ़त दर्ज की गई। कच्चे तेल और डॉलर में बढ़त वैश्विक तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दिया। ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 94 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता नजर आया। दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में भी हल्की मजबूती दर्ज की गई। रुपये पर दबाव बना रहा और हालिया कारोबारी सत्र में भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई। निवेशकों के लिए सतर्क रहने का समय विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने और दीर्घकालिक निवेश रणनीति पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में शानदार रिकवरी देखने को मिली। आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी के दम पर प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 382.50 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,649.84 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 100.96 अंक चढ़कर 23,483.55 के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कमजोरी के बाद बाजार ने दिखाई मजबूती कारोबार के दौरान बाजार में शुरुआत में दबाव देखने को मिला और सेंसेक्स एक समय 73,815.12 तक फिसल गया था। हालांकि बाद में निवेशकों की खरीदारी लौटने से बाजार ने जोरदार वापसी की और दिन के अंत तक 1,000 अंकों से अधिक की रिकवरी दर्ज की। इससे पहले सोमवार को सेंसेक्स 508 अंक और निफ्टी 165 अंक गिरकर बंद हुए थे। आईटी शेयर बने बाजार के हीरो मंगलवार की तेजी में आईटी सेक्टर की सबसे बड़ी भूमिका रही। बीएसई आईटी इंडेक्स 4.40 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। सबसे ज्यादा बढ़त टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में 6.53 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके अलावा इन्फोसिस 5.66 प्रतिशत, एचसीएल टेक 4.08 प्रतिशत और टेक महिंद्रा 1.76 प्रतिशत चढ़े। आईटी कंपनियों के अलावा अदाणी पोर्ट्स, टाइटन, एचडीएफसी बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। वहीं एनटीपीसी, एक्सिस बैंक, पावर ग्रिड और आईसीआईसीआई बैंक जैसे शेयर दबाव में रहे। वैश्विक संकेतों से मिला समर्थन विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी टेक कंपनियों के मजबूत नतीजों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्लाउड तथा एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी में बढ़ते निवेश ने आईटी शेयरों को मजबूती दी है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल और बड़े शेयरों के आकर्षक मूल्यांकन ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। निवेशकों की नजर आगे किन कारकों पर? हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 3,911 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, लेकिन बाजार की मजबूती बरकरार रही। दूसरी ओर, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट और एशियाई तथा यूरोपीय बाजारों में सकारात्मक रुख ने भी भारतीय बाजार को सहारा दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में विदेशी निवेश, वैश्विक आर्थिक संकेतक और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की दिशा शेयर बाजार की अगली चाल तय करेगी। \
घरेलू शेयर बाजार ने जून महीने की शुरुआत मजबूती के साथ की है। लगातार तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद सोमवार को बाजार में शानदार रिकवरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 400 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि Nifty 50 23,600 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। बाजार में इस तेजी के पीछे आईटी शेयरों में खरीदारी, बेहतर तिमाही नतीजे और निवेशकों की वापसी को प्रमुख वजह माना जा रहा है। शुरुआती कारोबार में मजबूत बढ़त पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 74,775.74 पर बंद हुआ था, जबकि सोमवार को यह 75,203 के स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा उछलकर 75,000 के ऊपर पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी करीब 23,650 के स्तर तक चढ़ गया। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले सप्ताह की भारी बिकवाली के बाद बाजार में वैल्यू बाइंग देखने को मिली, जिससे निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक लौटा है। इंडिगो के शेयरों में सबसे बड़ी तेजी सोमवार के कारोबार में सबसे ज्यादा चर्चा InterGlobe Aviation के शेयरों की रही। इंडिगो के शेयरों में लगभग 5 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। हालांकि कंपनी ने तिमाही नतीजों में घाटा दर्ज किया है, लेकिन ब्रोकरेज फर्मों ने भविष्य की आय संभावनाओं और मजबूत यात्री मांग को देखते हुए सकारात्मक रुख बनाए रखा है। इसी वजह से निवेशकों ने इंडिगो के शेयरों में जोरदार खरीदारी की। इन शेयरों में भी दिखी मजबूती बाजार में तेजी के दौरान कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। प्रमुख बढ़त वाले शेयर: Asian Paints Infosys Tata Consultancy Services Tech Mahindra HCL Technologies Bajaj Finserv आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा मजबूती देखने को मिली और निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 3 प्रतिशत तक चढ़ा। बैंकिंग और कुछ ऊर्जा शेयर दबाव में जहां अधिकांश शेयर हरे निशान में रहे, वहीं कुछ बैंकिंग और ऊर्जा कंपनियों में कमजोरी देखने को मिली। गिरावट वाले प्रमुख शेयर: Kotak Mahindra Bank Axis Bank NTPC Limited Trent Limited मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी बाजार की तेजी सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में बढ़त निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में भी मजबूती इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की दिलचस्पी व्यापक बाजार में भी बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता शेयर बाजार में तेजी के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल चिंता का विषय बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 93 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की बढ़ती कीमतें आने वाले दिनों में भारतीय बाजार पर दबाव बना सकती हैं। अमेरिका-ईरान तनाव पर टिकी नजर वैश्विक बाजारों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव पर भी बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिए हैं कि उनका प्रशासन ईरान के साथ ऐसा समझौता चाहता है जिससे परमाणु हथियारों की संभावना खत्म हो सके। हालांकि फिलहाल निवेशक भू-राजनीतिक हालात को लेकर सतर्क बने हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट के बाद बाजार में खरीदारी लौटती दिखी और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 350 अंकों से अधिक उछलकर 76 हजार के पार पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24 हजार के करीब कारोबार करता दिखा। सुबह 9 बजकर 27 मिनट पर सेंसेक्स 78.34 अंकों की बढ़त के साथ 75,946.14 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 10.40 अंकों की मजबूती के साथ 23,917.55 पर कारोबार करता नजर आया। शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी का माहौल देखने को मिला, हालांकि बाद में कुछ मुनाफावसूली भी देखने को मिली। कच्चे तेल में नरमी से मिला सहारा विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार को सबसे बड़ा समर्थन कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से मिला है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी हुई है, जिससे निवेशकों की धारणा मजबूत हुई है। इससे महंगाई को लेकर चिंता भी कुछ कम हुई है। आईटी और फार्मा शेयरों में जोरदार खरीदारी सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी और फार्मा शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। निफ्टी आईटी इंडेक्स दो प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा, जबकि फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर भी बढ़त में रहे। पीएसयू बैंक, ऑटो, मेटल और ऑयल एंड गैस शेयरों में भी खरीदारी का माहौल बना रहा। हालांकि एफएमसीजी और मीडिया सेक्टर में हल्की गिरावट दर्ज की गई। ग्लोबल बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिले मजबूत संकेतों ने भी भारतीय बाजार को सपोर्ट दिया। वॉल स्ट्रीट में टेक शेयरों की तेजी का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर निफ्टी 24,000 के स्तर को मजबूती से पार कर लेता है, तो आने वाले दिनों में इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं 23,800 का स्तर बाजार के लिए मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।
मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, रुपये की कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद घरेलू बाजार लाल निशान पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान खरीदारी और बिकवाली के बीच जोरदार खींचतान देखने को मिली, लेकिन आखिर में बिकवाली का दबाव भारी पड़ गया। कारोबारी सत्र के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 141.90 अंक यानी 0.18% गिरकर 75,867.80 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स 6.55 अंक यानी 0.03% टूटकर 23,907.15 पर आ गया। हालांकि रुपये में मामूली मजबूती देखने को मिली और डॉलर के मुकाबले यह 95.69 पर स्थिर रहा। एचडीएफसी बैंक सबसे बड़ा लूजर बाजार में सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग सेक्टर पर दिखा। HDFC Bank के शेयर करीब 3% तक टूट गए और यह सेंसेक्स का सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाला शेयर रहा। बताया जा रहा है कि ब्याज भुगतान से जुड़ी आंतरिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद निवेशकों में घबराहट बढ़ी। ब्रॉडर मार्केट ने दिखाई मजबूती मुख्य सूचकांकों में गिरावट के बावजूद ब्रॉडर मार्केट ने अपेाकृत मजबूत प्रदर्शन किया। कई मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार में पूरी तरह निराशा का माहौल नहीं बना। इंडिया VIX में गिरावट से राहत बाजार में उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडिया VIX करीब 6% गिरकर 15.24 पर आ गया। यह संकेत देता है कि वैश्विक तनाव के बावजूद निवेशकों में बहुत ज्यादा घबराहट नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय तनाव कम नहीं होता और रुपये को मजबूती नहीं मिलती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि ब्रॉडर मार्केट की मजबूती निवेशकों के लिए राहत की बात मानी जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। BSE Sensex और Nifty 50 में बुधवार को कमजोर शुरुआत देखने को मिली। अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 479 अंक टूटकर 76,009 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 118 अंक गिरकर 23,913 के करीब कारोबार करता दिखा। निवेशकों में भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली को लेकर चिंता बनी हुई है। बैंकिंग और आईटी शेयरों पर दबाव बाजार में सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग और आईटी सेक्टर के शेयरों पर देखा गया। HDFC Bank के शेयर करीब 2 प्रतिशत टूट गए। इसके अलावा Infosys, Reliance Industries, Axis Bank और InterGlobe Aviation के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, NTPC, Power Grid Corporation of India और UltraTech Cement के शेयर बढ़त में रहे। विदेशी बिकवाली से बढ़ा दबाव विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में कमजोरी की बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली है। मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने 2,400 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना। वैश्विक निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों पर नजर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। हालांकि राहत की बात यह है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1.5 प्रतिशत गिरकर 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं तो भारतीय बाजार को कुछ राहत मिल सकती है। निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक राजनीतिक अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 175 अंक टूटकर 76,313 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी गिरावट के साथ 24,000 के नीचे फिसल गया। बाजार खुलते ही निवेशकों में सतर्कता का माहौल दिखाई दिया और कई प्रमुख शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख एशियाई बाजारों में हालांकि कुछ मजबूती देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया, जबकि कोस्डैक में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। दूसरी ओर जापान का निक्केई और टॉपिक्स इंडेक्स कमजोरी के साथ कारोबार करते नजर आए। हांगकांग का हैंग सेंग फ्यूचर्स भी हल्की गिरावट में रहा। वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। ये रहे टॉप गेनर्स और लूजर्स सेंसेक्स में टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस, एसबीआई, एचसीएल टेक, एचडीएफसी बैंक और अदाणी पोर्ट्स जैसे शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। वहीं इंडिगो, भारती एयरटेल, सन फार्मा, टाइटन, ट्रेंट, कोटक महिंद्रा बैंक, एलएंडटी और आईटीसी जैसे शेयर दबाव में रहे। पिछले कारोबारी दिन बाजार में थी बड़ी तेजी सोमवार, 25 मई को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखी गई थी। बीएसई सेंसेक्स 1,073 अंक चढ़कर 76 हजार के पार बंद हुआ था, जबकि निफ्टी में भी 300 अंकों से अधिक की मजबूती दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई थी, जिससे बाजार को समर्थन मिला। हालांकि मंगलवार को मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों के कारण बाजार में दबाव देखने को मिला।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को शानदार तेजी देखने को मिली। वैश्विक तनाव कम होने की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने बाजार को मजबूती दी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,073.61 अंकों की बड़ी छलांग लगाकर 76,488.96 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 312.41 अंक चढ़कर 24,031.70 पर पहुंच गया और 24,000 का अहम स्तर पार करने में सफल रहा। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों ने संभाली कमान बाजार की इस शानदार रिकवरी में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयर सबसे आगे रहे। HDFC Bank और Bajaj Finance के शेयरों में करीब 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो और वित्तीय कंपनियों में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। कच्चे तेल में गिरावट से बाजार को राहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। तेल सस्ता होने से भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिलती है, जिससे बाजार का सेंटीमेंट मजबूत हुआ। निवेशकों को उम्मीद है कि इससे महंगाई और आयात लागत पर दबाव कम हो सकता है। रुपया भी मजबूत, निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें शेयर बाजार में तेजी के साथ भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ। रुपया 35 पैसे की बढ़त के साथ 95.25 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। बाजार जानकारों का कहना है कि यदि वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और विदेशी निवेश बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में बाजार में और मजबूती देखने को मिल सकती है।
BSE Sensex और NIFTY 50 ने सोमवार, 25 मई 2026 को शानदार शुरुआत की। ग्लोबल मार्केट से मिले मजबूत संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के चलते भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी 23,900 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया। शुरुआती कारोबार में बाजार ने पकड़ी रफ्तार कारोबार शुरू होते ही: BSE Sensex करीब 800 अंक चढ़कर 76,241.44 पर पहुंच गया NIFTY 50 लगभग 240 अंकों की बढ़त के साथ 23,959.20 के स्तर तक पहुंच गया बाजार में खरीदारी का माहौल खासतौर पर बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में देखने को मिला। बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह क्या है? इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट मानी जा रही है। Brent Crude करीब 5.4% टूटकर 95-97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती शांति वार्ता की उम्मीदों ने बाजार का सेंटिमेंट मजबूत किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक: ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर सैद्धांतिक सहमति दे सकता है अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करने की दिशा में भी बातचीत आगे बढ़ रही है इन खबरों से वैश्विक निवेशकों को राहत मिली है और जोखिम लेने की भावना मजबूत हुई है। एशियाई बाजारों में भी दिखी हरियाली तेल की कीमतों में गिरावट का असर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशियाई बाजारों में देखने को मिला। Nikkei 225 में 3% से ज्यादा तेजी ताइवान इंडेक्स करीब 2.9% मजबूत दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग सपाट रहा वहीं तेल कीमतों में नरमी के चलते डॉलर की मांग भी घटी, जिससे भारतीय रुपया मजबूत होकर डॉलर के मुकाबले 95.42 के स्तर तक पहुंच गया। आगे बाजार की दिशा क्या हो सकती है? मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल बाजार का सेंटिमेंट सकारात्मक बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार: अगर निफ्टी 23,850 के ऊपर टिकता है, तो जल्द 24,000 से 24,200 तक पहुंच सकता है निफ्टी के लिए 23,600 मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है सेंसेक्स के लिए 75,100 अहम सपोर्ट लेवल रहेगा NIFTY Bank में भी तेजी जारी रह सकती है और यह 54,500 तक जा सकता है हालांकि निवेशकों को अमेरिका-ईरान वार्ता से जुड़ी खबरों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। निवेशकों को क्या करना चाहिए? विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा तेजी में जल्दबाजी से बचना जरूरी है। मजबूत फंडामेंटल वाले सेक्टर्स और क्वालिटी स्टॉक्स में निवेश फिलहाल बेहतर रणनीति हो सकती है। साथ ही ग्लोबल घटनाक्रमों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान शानदार तेजी देखने को मिली। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई रोकने और समझौते की उम्मीद जताने के बाद निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। इसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। आईटी और अदाणी समूह के शेयरों में उछाल बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 367 अंक चढ़कर 75,706 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 23,760 के पार कारोबार करता दिखा। बाजार की तेजी में आईटी कंपनियों और अदाणी समूह के शेयरों की बड़ी भूमिका रही। Infosys, HCLTech, Tech Mahindra और Tata Consultancy Services के शेयरों में अच्छी खरीदारी हुई। वहीं, अदाणी समूह की कंपनियों में तेजी अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा Gautam Adani और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोप हटाने की खबर के बाद आई। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा और समूह के शेयर मजबूत हुए। कच्चे तेल में गिरावट से मिला समर्थन वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब दो फीसदी गिरकर 109.9 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भी सोमवार को 2,813 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जिससे बाजार की धारणा मजबूत बनी रही। निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला, जबकि अमेरिकी बाजार भी मिश्रित संकेतों के साथ बंद हुए। इसके बावजूद भारतीय बाजार में फिलहाल सकारात्मक माहौल बना हुआ है।
मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। सुबह 9:22 बजे बीएसई सेंसेक्स 448.92 अंकों की बढ़त के साथ 75,057.90 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 139.11 अंक चढ़कर 23,551.70 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। हालांकि, बाजार खुलने के कुछ समय बाद मुनाफावसूली के चलते बढ़त सीमित हो गई। 10:01 बजे तक सेंसेक्स 83 अंक और निफ्टी 52 अंक की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। अदाणी समूह और बैंकिंग-ऑटो शेयरों में खरीदारी शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 में से 25 से अधिक शेयरों में तेजी देखने को मिली। खासकर अदाणी समूह के शेयरों ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। अदाणी एंटरप्राइजेज का शेयर बीएसई पर 5.3 प्रतिशत तक उछलकर 2,634 रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और ट्रेंट जैसे शेयरों में भी 1.5 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा एनटीपीसी, सन फार्मा, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में अच्छी खरीदारी रही। आईटी शेयरों पर दबाव, वैश्विक संकेतों से उम्मीद दूसरी ओर आईटी सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली। टेक महिंद्रा, टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और चीन के बीच होने वाली शिखर वार्ता से निवेशकों में उम्मीद बढ़ी है। माना जा रहा है कि व्यापार और तकनीकी मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत वैश्विक बाजारों को स्थिरता दे सकती है। वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 4,703 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 5,869 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया।
मुंबई, एजेंसियां। BSE Sensex और Nifty 50 में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। कारोबारी सप्ताह के पहले दिन घरेलू शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,312.91 अंक टूटकर 76,015.28 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 360.30 अंक गिरकर 23,815.85 पर पहुंच गया। विश्लेषकों के मुताबिक विश्लेषकों के मुताबिक, प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल में किफायत बरतने की अपील, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों का असर भी भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दिया। रुपये में ऐतिहासिक गिरावट शेयर बाजार में गिरावट के साथ-साथ मुद्रा बाजार में भी भारतीय रुपये पर भारी दबाव देखने को मिला। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 85 पैसे टूटकर 95.34 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी मुद्रा निकासी और डॉलर की मजबूती के कारण रुपये में यह कमजोरी आई है। निवेशकों की चिंता बढ़ी दलाल स्ट्रीट पर बैंकिंग, मेटल और ज्वैलरी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। बढ़ती महंगाई और ऊर्जा आयात लागत को लेकर भी निवेशकों में चिंता बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियां अभी मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं। फिलहाल निवेशकों की नजर आने वाले दिनों में रुपये की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर टिकी हुई है।
शुरुआती कारोबार में बाजार में बड़ी बिकवाली सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 में भी करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सुबह करीब 9:39 बजे Sensex 1016 अंक गिरकर 76,311 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 करीब 23,879 अंक पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या है? विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार पर इस समय दो बड़े दबाव बने हुए हैं– पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रिपोर्ट्स के अनुसार Brent Crude Oil की कीमत फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। इससे भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, गैरजरूरी विदेश यात्रा से बचने और सोना, खाद्य तेल व उर्वरक जैसे आयातित उत्पादों पर निर्भरता घटाने की बात कही थी। बाजार इसे सरकार की आर्थिक चिंता और बढ़ते आयात बिल के संकेत के तौर पर देख रहा है। किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव? गिरावट का असर कई सेक्टरों में साफ दिखाई दिया। ज्वेलरी और कंजम्प्शन सेक्टर Titan Company के शेयर करीब 5.6 प्रतिशत टूट गए। बाजार को डर है कि सोने की मांग में कमी आने से ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। एविएशन सेक्टर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से एयरलाइन कंपनियों पर दबाव बढ़ा। InterGlobe Aviation के शेयर 3.5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। बैंकिंग सेक्टर बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी रही– State Bank of India करीब 3% टूटा HDFC Bank में 1% से ज्यादा गिरावट ICICI Bank और Axis Bank भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे ऑटो और एनर्जी कंपनियां भी दबाव में Maruti Suzuki, Bajaj Auto और Reliance Industries के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। किन शेयरों में दिखी मजबूती? बाजार की भारी गिरावट के बीच कुछ डिफेंसिव सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। Tata Consumer Products के शेयरों में तेजी रही। इसके अलावा फार्मा सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर दिखा। Sun Pharmaceutical Industries और Cipla जैसे शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद संभले रहे। आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों की नजर अब– कच्चे तेल की कीमतों पश्चिम एशिया की स्थिति रुपये की चाल सरकार के अगले आर्थिक संकेतों पर बनी रहेगी।
शुरुआती कारोबार में बाजार में बड़ी बिकवाली सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 में भी करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सुबह करीब 9:39 बजे Sensex 1016 अंक गिरकर 76,311 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 करीब 23,879 अंक पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या है? विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार पर इस समय दो बड़े दबाव बने हुए हैं– पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रिपोर्ट्स के अनुसार Brent Crude Oil की कीमत फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। इससे भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, गैरजरूरी विदेश यात्रा से बचने और सोना, खाद्य तेल व उर्वरक जैसे आयातित उत्पादों पर निर्भरता घटाने की बात कही थी। बाजार इसे सरकार की आर्थिक चिंता और बढ़ते आयात बिल के संकेत के तौर पर देख रहा है। किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव? गिरावट का असर कई सेक्टरों में साफ दिखाई दिया। ज्वेलरी और कंजम्प्शन सेक्टर Titan Company के शेयर करीब 5.6 प्रतिशत टूट गए। बाजार को डर है कि सोने की मांग में कमी आने से ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। एविएशन सेक्टर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से एयरलाइन कंपनियों पर दबाव बढ़ा। InterGlobe Aviation के शेयर 3.5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। बैंकिंग सेक्टर बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी रही– State Bank of India करीब 3% टूटा HDFC Bank में 1% से ज्यादा गिरावट ICICI Bank और Axis Bank भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे ऑटो और एनर्जी कंपनियां भी दबाव में Maruti Suzuki, Bajaj Auto और Reliance Industries के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। किन शेयरों में दिखी मजबूती? बाजार की भारी गिरावट के बीच कुछ डिफेंसिव सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। Tata Consumer Products के शेयरों में तेजी रही। इसके अलावा फार्मा सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर दिखा। Sun Pharmaceutical Industries और Cipla जैसे शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद संभले रहे। आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों की नजर अब– कच्चे तेल की कीमतों पश्चिम एशिया की स्थिति रुपये की चाल सरकार के अगले आर्थिक संकेतों पर बनी रहेगी।
मुंबई, एजेंसियां। बैंकिंग शेयरों में बिकवाली के बीच शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। हफ्ते के कारोबारी सत्र का समापन लाल निशान पर हुआ। सेंसेक्स 516.33 (0.66%) अंक टूटकर 77,328.19 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 150.50 (0.62%) अंक गिरकर 24,176.15 के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 25 पैसे गिरकर 94.47 (अस्थायी) पर बंद हुआ।
ग्लोबल तनाव का भारतीय बाजार पर बड़ा असर BSE Sensex और NIFTY 50 में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते बाजार की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 553 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 100 अंकों से ज्यादा फिसल गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 77,400 और निफ्टी 24,213 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बैंकिंग और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली आज के कारोबार में बैंकिंग और ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। HDFC Bank, ICICI Bank और Reliance Industries जैसे दिग्गज शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली बाजार की गिरावट की बड़ी वजह बन रही है। हालांकि आईटी और फार्मा सेक्टर में कुछ खरीदारी देखने को मिली, लेकिन वह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को तेज कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई, रुपये और शेयर बाजार पर पड़ता है। यही वजह है कि निवेशकों में घबराहट बढ़ी हुई है। बाजार को अब किस बात का इंतजार? मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी। अगर वैश्विक तनाव कम होता है, तो भारतीय बाजार और रुपये को राहत मिल सकती है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) और रिटेल निवेशक अभी भी बाजार में सक्रिय हैं, जिसकी वजह से मिडकैप और पावर सेक्टर के कुछ शेयर मजबूती दिखा रहे हैं।
तेहरान/वाशिंगटन, एजेंसियां। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। होर्मुज स्ट्रेट में गोलीबारी की खबरों के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई, जिसके चलते घरेलू बाजार लाल निशान में खुला। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में नजर आए। सेंसेक्स 200 अंक से ज्यादा टूटा बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 212 अंकों की गिरावट के साथ 77,631 के स्तर पर खुला। वहीं एनएसई का निफ्टी 93 अंक टूटकर 24,233 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में कोल इंडिया, महिंद्रा एंड महिंद्रा और एक्सिस बैंक जैसे शेयरों में बिकवाली देखी गई। विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट में हालात बिगड़ने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। वहीं WTI क्रूड भी करीब 97 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है। एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी दबाव एशियाई बाजारों में भी गिरावट का माहौल रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 1.9 फीसदी गिर गया, जबकि जापान का निक्केई भी कमजोर बंद हुआ। हांगकांग के हैंग सेंग फ्यूचर्स में भी दबाव देखा गया। अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए। S&P 500, Nasdaq Composite और Dow Jones Industrial Average सभी लाल निशान में बंद हुए। निवेशकों में बढ़ी चिंता विश्लेषकों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
मुंबई, एजेंसियां। चुनावी नतीजों के शुरुआती रुझानों के बीच भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। BSE Sensex खुलते ही करीब 500 अंकों की बढ़त के साथ 77,400 के पार पहुंच गया और कुछ ही देर में 900 अंकों से ज्यादा उछल गया। वहीं Nifty 50 भी करीब 193 अंकों की तेजी के साथ 24,190 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में जोरदार खरीदारी बाजार में तेजी का असर अलग-अलग सेक्टरों में भी देखने को मिला। Nifty Bank करीब 325 अंक चढ़कर 55,188 पर पहुंच गया, जबकि फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। ऑटो सेक्टर में 2% से ज्यादा की तेजी रही, वहीं FMCG शेयर भी 1% से अधिक ऊपर कारोबार करते नजर आए। चुनावी रुझानों का असर विश्लेषकों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी जैसे राज्यों में सत्तारूढ़ दल को बढ़त मिलने के संकेत से बाजार में सकारात्मक माहौल बना। राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिससे खरीदारी में तेजी आई। अधिकांश शेयर हरे निशान में शेयर बाजार में आज व्यापक तेजी देखने को मिली। कुल 903 शेयरों में ट्रेडिंग शुरू हुई, जिनमें से 742 शेयर बढ़त में रहे, जबकि केवल 107 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। 69 शेयर अपने 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए, जो बाजार में मजबूत रुझान का संकेत है। तेजी के संकेत बरकरार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चुनावी नतीजे इसी दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो बाजार में यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है। फिलहाल निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है।
मुंबई, एजेंसियां। बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में मजबूती देखने को मिली। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 358 अंकों की बढ़त के साथ 77,245 के पार पहुंच गया, जबकि Nifty 50 भी 100 अंकों से ज्यादा चढ़कर 24,096 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वैश्विक संकेतों के चलते निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। ईरान-अमेरिका तनाव में नरमी का असर पश्चिम एशिया में Iran और United States के बीच तनाव कम होने की उम्मीद से बाजार को सहारा मिला। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सैन्य गतिविधियों में कमी के संकेतों ने निवेशकों की धारणा को सकारात्मक बनाया है, जिससे बाजार में तेजी लौटी। मिडकैप और स्मॉलकैप में भी खरीदारी सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी देखी गई। आईटी, ऑटो और ऊर्जा सेक्टर के शेयरों में खासतौर पर खरीदारी रही। Reliance Industries, Infosys और Maruti Suzuki जैसे दिग्गज शेयरों में उछाल दर्ज किया गया। कच्चे तेल और एफआईआई की चिंता बरकरार हालांकि बाजार में तेजी के बावजूद जोखिम बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं, जो भारत के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली भी बाजार पर दबाव डाल रही है। रुपया कमजोर, डॉलर मजबूत शुरुआती कारोबार में भारतीय मुद्रा Indian Rupee 11 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.79 पर पहुंच गई। आयातकों की बढ़ती डॉलर मांग और विदेशी पूंजी की निकासी इसके मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। आगे क्या रहेगा रुख? विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की आगे की दिशा वैश्विक घटनाक्रम, खासकर पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिकी नीतियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद सोमवार को मजबूत वापसी देखने को मिली। BSE Sensex 639 अंकों की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ, जबकि Nifty 50 24,050 के स्तर को पार कर गया। इस तेजी ने निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बना दिया। RIL और IT शेयरों में तेजी से बाजार को सहारा दिनभर के कारोबार में Reliance Industries और Wipro के शेयरों में करीब 3% तक की बढ़त दर्ज की गई, जिसने बाजार को मजबूती प्रदान की। आईटी सेक्टर में कुछ कमजोर नतीजों के बावजूद आकर्षक वैल्युएशन के कारण निवेशकों की रुचि बनी रही। मजबूत तिमाही नतीजों से लौटा निवेशकों का भरोसा विशेषज्ञों के अनुसार, चौथी तिमाही के बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों और वैश्विक संकेतों में सुधार से बाजार को समर्थन मिला। अमेरिका-ईरान वार्ता दोबारा शुरू होने की उम्मीद ने भी निवेशकों की धारणा को सकारात्मक बनाया। बैंकिंग, एफएमसीजी, कैपिटल गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे घरेलू सेक्टरों ने बाजार की रिकवरी में अहम भूमिका निभाई। कच्चे तेल और महंगाई बनी चिंता हालांकि बाजार में तेजी के बावजूद कुछ जोखिम बने हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जो महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती हैं। निवेशक अब Federal Reserve की आगामी ब्याज दर नीति पर नजर बनाए हुए हैं। आगे की राह पर नजर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत बने रहते हैं, तो बाजार में आगे भी सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है। फिलहाल, निवेशकों के लिए यह राहत की खबर है कि गिरावट का सिलसिला टूट गया है और बाजार ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है।
मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव में बाजार लाल निशान पर खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 330 अंक टूटा, निफ्टी 24,100 के नीचे शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 330 अंक गिरकर 77,334 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 93 अंक फिसलकर 24,079.75 पर कारोबार करता दिखा। इससे पहले गुरुवार को भी बाजार में भारी गिरावट रही थी, जब सेंसेक्स 852 अंक टूटकर 77,664 पर और निफ्टी 205 अंक गिरकर 24,173 पर बंद हुआ था। विदेशी निवेश और तेल कीमतों का दबाव बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। गुरुवार को ही विदेशी निवेशकों ने करीब 3,254 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है। ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे महंगाई और करंट अकाउंट डेफिसिट का खतरा बढ़ रहा है। रुपया भी दबाव में, लगातार कमजोरी जारी डॉलर के मुकाबले रुपये में भी गिरावट देखी जा रही है। शुरुआती कारोबार में रुपया 24 पैसे कमजोर होकर 94.25 के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता, तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी पूंजी निकासी इसके प्रमुख कारण हैं। वैश्विक तनाव से बढ़ी चिंता विश्लेषकों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिर स्थिति ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका असर सीधे शेयर बाजार और मुद्रा पर पड़ रहा है। आगे क्या रहेगा रुख विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक संकेत स्थिर नहीं होते और विदेशी निवेश की बिकवाली रुकती नहीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।