वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जायदी के साथ द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। बैठक के दौरान ट्रंप ने इराक में अमेरिकी निवेश बढ़ाने, तेल क्षेत्र में नए समझौतों और सैन्य मौजूदगी कम करने के संकेत दिए। तेल क्षेत्र में बढ़ेगा अमेरिकी निवेश ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इराक के बीच ऊर्जा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। उनके अनुसार, अमेरिकी तेल कंपनियां रिकॉर्ड स्तर पर इराक में निवेश कर रही हैं और जल्द ही नए ऊर्जा प्रोजेक्ट्स की घोषणा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इन समझौतों से दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे। होर्मुज रणनीति पर भी बोले ट्रंप राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका लंबे समय से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता रहा है। उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा शुल्क के बजाय कई देशों ने अमेरिका में अरबों डॉलर का निवेश करने की इच्छा जताई है, जिसे उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा अवसर बताया। इराक में सैन्य मौजूदगी घटाने के संकेत ट्रंप ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका को इराक में पहले जैसी सैन्य तैनाती की आवश्यकता नहीं दिख रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका इराक की सुरक्षा में सहयोग देने के लिए तैयार रहेगा। ईरान पर साधा निशाना बैठक के दौरान ट्रंप ने ईरान पर भी टिप्पणी करते हुए दावा किया कि हाल के महीनों में उसकी सैन्य क्षमता कमजोर हुई है। उनके अनुसार, इससे इराक को अधिक स्वतंत्रता मिली है और विदेशी निवेश के लिए बेहतर माहौल बना है। द्विपक्षीय संबंधों पर जोर ट्रंप ने इराक के प्रधानमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों के संबंध बेहतर हुए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि ऊर्जा, निवेश और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग आगे भी तेजी से बढ़ेगा।
भारत और न्यूजीलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए 2030 तक 6 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (करीब ₹35,000 करोड़) के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य तय किया है। दोनों देशों ने यह फैसला एक नए रणनीतिक साझेदारी रोडमैप के तहत लिया, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, कृषि और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 से 11 जुलाई तक न्यूजीलैंड की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह करीब 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा है और इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। 2030 तक व्यापार बढ़ाने पर सहमति दोनों देशों ने 2030 तक करीब ₹35,000 करोड़ (6 अरब न्यूजीलैंड डॉलर) के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने और नए आर्थिक अवसरों पर मिलकर काम करने पर सहमति बनी। सरकारों का मानना है कि यह लक्ष्य दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को नई गति देगा। कई क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग रणनीतिक साझेदारी रोडमैप के तहत भारत और न्यूजीलैंड ने कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है, जिनमें शामिल हैं— व्यापार और निवेश कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण डिजिटल तकनीक और नवाचार शिक्षा और कौशल विकास रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु सहयोग दोनों देशों ने लोगों के बीच संपर्क (People-to-People Ties) को मजबूत करने और शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख भारत और न्यूजीलैंड ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए हर प्रकार के आतंकवाद की कड़ी निंदा की। संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता है तथा इस चुनौती से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं। प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। लगभग चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड का आधिकारिक दौरा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगा नया आयाम भारत और न्यूजीलैंड लंबे समय से लोकतांत्रिक मूल्यों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग के साझेदार रहे हैं। नया रणनीतिक रोडमैप व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ रक्षा, तकनीक और वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग को भी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीन दिवसीय ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान ऐतिहासिक मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने खेल सहयोग को बढ़ावा देने और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा की। क्रिकेट से समझाया भारत-ऑस्ट्रेलिया का रिश्ता एमसीजी में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी की तुलना क्रिकेट से करते हुए कहा कि दोनों देशों की कूटनीति भी क्रिकेट की तरह है। उन्होंने कहा, "जब हम मेलबर्न में हैं तो क्रिकेट की बात न करना ऐसा होगा जैसे टॉस के बाद मैच ही शुरू न हो।" पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों का एजेंडा वनडे मैच की तरह स्पष्ट और केंद्रित, फैसले टी-20 की तरह तेज, जबकि साझेदारी टेस्ट मैच की तरह लंबी, मजबूत और भरोसेमंद है। क्रिकेट दोनों देशों के लोगों को जोड़ता है प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम है। उन्होंने कहा कि एमसीजी का नाम सुनते ही हर भारतीय के मन में भारत-ऑस्ट्रेलिया मुकाबलों की कई यादें ताजा हो जाती हैं। खेल सहयोग को मिलेगा नया आयाम पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करेंगे। भारत वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच: खेल अवसंरचना में सहयोग खिलाड़ियों के प्रशिक्षण खेल तकनीक निवेश और खेल उद्योग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को नई गति मिलेगी। खेल के जरिए मजबूत होंगे द्विपक्षीय संबंध प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि खेल दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के जुड़ाव को और मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया खेल, शिक्षा, व्यापार, रक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में मिलकर नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे। एमसीजी दौरे को भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जा रहा है, जहां क्रिकेट के साझा जुनून के जरिए दोनों देशों ने अपने रिश्तों को और मजबूत बनाने का संदेश दिया।
Netflix के रियलिटी शो 'Lock Upp 2' में लगातार बढ़ते विवादों के बीच अब टीवी अभिनेता सुधांशु पांडे की प्रतिक्रिया भी चर्चा में है। अभिनेता ने सोशल मीडिया पर एक लाइव सेशन के दौरान शो में दिखाई जा रही भाषा और व्यवहार पर सवाल उठाए। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन सोशल मीडिया पर कई यूजर्स का मानना है कि उनका इशारा गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा की ओर था। 'देश में क्या हो रहा है?' 'अनुपमा' में वनराज की भूमिका निभा चुके सुधांशु पांडे ने लाइव सेशन में कहा कि आजकल सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जिस तरह का कंटेंट लोकप्रिय हो रहा है, वह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि लोग ऐसी चीजों को क्यों पसंद कर रहे हैं, जिन्हें वह समाज के लिए सही नहीं मानते। उनके मुताबिक, केवल नई पीढ़ी ही नहीं बल्कि पिछली पीढ़ियां भी इस तरह के कंटेंट को सामान्य मानने लगी हैं। गाली-गलौज को लेकर जताई चिंता सुधांशु पांडे ने कहा कि उन्होंने हाल ही में एक ओटीटी शो की कुछ क्लिप देखीं, जिनमें प्रतिभागी लगातार अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें यह देखकर आश्चर्य होता है कि आजकल कुछ लोग गाली-गलौज को "कूल" समझने लगे हैं। अभिनेता के अनुसार, यह प्रवृत्ति समाज और खासकर युवा दर्शकों के लिए अच्छा संदेश नहीं देती। 'सीनियर एक्टर की पत्नी' वाले बयान से बढ़ी चर्चा अपने लाइव सेशन के दौरान सुधांशु पांडे ने कहा कि उन्होंने एक शो में एक वरिष्ठ अभिनेता की पत्नी को भी दूसरों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते देखा। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि यदि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग ही ऐसा व्यवहार करेंगे, तो युवा पीढ़ी के सामने गलत उदाहरण जाएगा। हालांकि अभिनेता ने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इसे सुनीता आहूजा से जोड़कर देख रहे हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ओटीटी प्लेटफॉर्म से की अपील सुधांशु पांडे ने स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स से भी अपील की कि ऐसे कंटेंट पर ध्यान दिया जाए, जिसमें अनावश्यक गाली-गलौज और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल होता है। उनका कहना था कि मनोरंजन के नाम पर ऐसी चीजों को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए।
मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तेजी से मजबूत हो रहे द्विपक्षीय संबंधों, रणनीतिक साझेदारी और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की। माना जा रहा है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच आर्थिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलेगी। भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर हुई विस्तृत चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, मजबूत जनसंपर्क और आपसी विश्वास पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार, शिक्षा, रक्षा, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह साझेदारी और मजबूत होगी। रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा, तकनीकी विकास और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमति जताई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई दिशा मिलेगी। 'मेलबर्न मीट्स मोदी' बना मुख्य आकर्षण प्रधानमंत्री मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे का सबसे चर्चित कार्यक्रम 'मेलबर्न मीट्स मोदी' माना जा रहा है। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम को लेकर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के बीच खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रवासी भारतीयों को देंगे विशेष संदेश प्रधानमंत्री मोदी अपने संबोधन में विकसित भारत के विजन, भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, प्रवासी भारतीयों के योगदान और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के भविष्य पर अपने विचार रखेंगे। माना जा रहा है कि उनका संबोधन दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल कूटनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि आर्थिक सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इससे व्यापार, निवेश, ग्रीन एनर्जी, शिक्षा, तकनीक और रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच नए अवसर खुलने की संभावना है। भारत और ऑस्ट्रेलिया की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक सहयोग को भी नई मजबूती दे सकती है.
मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की मौजूदगी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। दोनों देशों ने रक्षा, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, साइबर तकनीक, अंतरिक्ष, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। रक्षा साझेदारी को मिलेगा नया आयाम शिखर वार्ता के बाद ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की है। इसके तहत रक्षा संबंधों को और व्यावहारिक बनाया जाएगा तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा। समझौते के तहत नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा मामलों पर रणनीतिक परामर्श और दोनों सेनाओं की इंटरऑपरेबिलिटी (साझा संचालन क्षमता) को मजबूत करने पर सहमति बनी है। परमाणु ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा पर बढ़ेगा सहयोग भारत और ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भी फैसला किया है। दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) और ग्रीन एनर्जी सप्लाई चेन के विकास पर मिलकर काम करेंगे। दोनों नेताओं ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन भविष्य की साझेदारी के प्रमुख स्तंभ होंगे। समुद्री सुरक्षा और साइबर क्षेत्र पर भी जोर बैठक में हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एंथनी अल्बनीज ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने कहा कि किसी भी रूप में आतंकवाद स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा वार्ता में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। शिक्षा, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन और उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में नई साझेदारियों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते आर्थिक और रणनीतिक संबंध आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा करेंगे। इंडो-पैसिफिक पर साझा रणनीति बैठक के दौरान दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। नेताओं ने कहा कि क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का समाधान सैन्य टकराव के बजाय संवाद, सहयोग और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। भारत और ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाकर क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और वैश्विक स्थिरता को नई दिशा दी जा सकती है।
हाल ही में आध्यात्मिक गुरु Sri Sri Ravi Shankar ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया— "Reverse Ageing With Your Breath!"। इसके बाद सुदर्शन क्रिया (Sudarshan Kriya) एक बार फिर चर्चा में आ गई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक उम्र को वास्तव में पीछे नहीं ले जाती, लेकिन तनाव कम करके स्वस्थ जीवन और बेहतर उम्रदराज़ी (Healthy Ageing) में सहायक हो सकती है। क्या है सुदर्शन क्रिया? सुदर्शन क्रिया एक विशेष लयबद्ध श्वास (Rhythmic Breathing) तकनीक है, जिसे श्री श्री रविशंकर ने वर्ष 1981 में विकसित किया था। इस अभ्यास में धीमी, मध्यम और तेज गति से सांस लेने की निश्चित प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस तकनीक को प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा सिखाया जाता है और इसका उद्देश्य शरीर, मन और भावनाओं के बीच संतुलन स्थापित करना माना जाता है। सांस और भावनाओं का क्या है संबंध? श्री श्री रविशंकर के अनुसार, हर भावना का संबंध सांस लेने के तरीके से होता है। तनाव, चिंता और गुस्से की स्थिति में सांस तेज और छोटी हो जाती है, जबकि शांत मन की अवस्था में सांस स्वतः गहरी और धीमी होती है। इसी सिद्धांत के आधार पर माना जाता है कि यदि सांसों की गति को नियंत्रित किया जाए, तो मानसिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। तनाव का उम्र बढ़ने से क्या संबंध है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक रहने वाला तनाव (Chronic Stress) केवल मानसिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करता है। लगातार तनाव रहने से— नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है। शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ सकती है। उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ सकता है। हृदय और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। शरीर की जैविक उम्र (Biological Ageing) पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में तनाव कम करने वाली तकनीकें शरीर को बेहतर तरीके से रिकवर करने में मदद कर सकती हैं। शोध क्या कहते हैं? अब तक हुए कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि सुदर्शन क्रिया से: तनाव और चिंता कम हो सकती है। मूड बेहतर हो सकता है। नींद की गुणवत्ता में सुधार आ सकता है। भावनात्मक संतुलन मजबूत हो सकता है। समग्र मानसिक स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके दीर्घकालिक प्रभावों को पूरी तरह समझने के लिए बड़े स्तर पर और अधिक शोध की आवश्यकता है। क्या सुदर्शन क्रिया वास्तव में उम्र कम कर सकती है? विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि सुदर्शन क्रिया या कोई भी ब्रीदिंग तकनीक वास्तविक (Chronological) उम्र को कम या उल्टा कर सकती है। लेकिन नियमित श्वास अभ्यास तनाव कम करने, मानसिक शांति बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मददगार हो सकता है। यही कारण है कि इसे स्वस्थ उम्रदराज़ी (Healthy Ageing) का एक सहायक अभ्यास माना जा रहा है। बेहतर उम्रदराज़ी के लिए क्या जरूरी है? विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ जीवन के लिए केवल ब्रीदिंग एक्सरसाइज ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ-साथ इन बातों का पालन भी जरूरी है— संतुलित और पौष्टिक भोजन नियमित व्यायाम पर्याप्त और अच्छी नींद तनाव का प्रभावी प्रबंधन सकारात्मक सामाजिक संबंध नियमित स्वास्थ्य जांच सुदर्शन क्रिया इन आदतों के साथ मिलकर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक भूमिका निभा सकती है।
मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के तहत ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न पहुंच गए हैं, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने एयरपोर्ट पर उनका अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। वार्षिक शिखर सम्मेलन में होंगे अहम मुद्दों पर मंथन मेलबर्न में प्रधानमंत्री मोदी भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, निवेश, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज, साइबर सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों देशों के बीच कई नए समझौतों और सहयोगी परियोजनाओं पर भी सहमति बनने की संभावना है। 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम रहेगा खास आकर्षण दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय समुदाय के लिए आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग शामिल होंगे। प्रधानमंत्री मोदी प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए भारत की वैश्विक भूमिका, भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी और दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों पर अपने विचार साझा करेंगे। चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सहयोग बढ़ाने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है— शिक्षा और कौशल विकास कृषि एवं खाद्य सुरक्षा पर्यटन ग्रीन एनर्जी और सप्लाई चेन इन क्षेत्रों में संयुक्त निवेश और नई परियोजनाओं के जरिए दोनों देश आर्थिक सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलेगी। स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल तकनीक और स्टार्टअप सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी नई पहल की उम्मीद है। रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत भारत और ऑस्ट्रेलिया पिछले कुछ वर्षों में रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में तेजी से करीब आए हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और आपसी रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर भी दोनों देशों के नेताओं के बीच विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के रिश्तों को मिलेगी नई दिशा विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई ऊर्जा देगा। व्यापार, निवेश, शिक्षा, ग्रीन एनर्जी और रक्षा सहयोग में बढ़ती साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।
जकार्ता: भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल भुगतान, व्यापार और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति Prabowo Subianto के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2018 में शुरू हुई भारत-इंडोनेशिया की व्यापक रणनीतिक साझेदारी अब नए दौर में प्रवेश कर रही है और दोनों देश रक्षा, अर्थव्यवस्था तथा तकनीक जैसे क्षेत्रों में मिलकर आगे बढ़ेंगे। ब्रह्मोस मिसाइल पर बनी सहमति दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को नई मजबूती देते हुए इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली उपलब्ध कराने पर सहमति बनाई है। हालांकि, मिसाइलों की संख्या और डील से जुड़े अन्य विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसके अलावा रक्षा उत्पादन, सैन्य आदान-प्रदान, रक्षा उद्योग सहयोग और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ाने पर सहमति बनी है। महत्वपूर्ण खनिज और स्टील सेक्टर में निवेश भारत और इंडोनेशिया ने महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के लिए संयुक्त निवेश बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों देश इस्पात, बिलेट और दुर्लभ स्थायी चुंबकों (रेयर अर्थ मैग्नेट) के निर्माण में सहयोग करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए यह साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। UPI और इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली होगी आपस में जुड़ी बैठक में भारत के डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म UPI को इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली से जोड़ने पर भी सहमति बनी। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा तथा यात्रियों और कारोबारियों के लिए भुगतान प्रक्रिया आसान होगी। सबांग पोर्ट के संयुक्त विकास पर सहमति भारत और इंडोनेशिया ने रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सबांग पोर्ट के संयुक्त विकास पर भी सहमति जताई। मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित यह बंदरगाह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के समुद्री सहयोग और रणनीतिक उपस्थिति को और मजबूत करेगा। वैश्विक मुद्दों पर भी हुई चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति समेत कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति सबसे प्रभावी रास्ता है। उन्होंने फलस्तीन मुद्दे पर भारत की दो-राष्ट्र समाधान की नीति और स्थायी शांति के समर्थन को भी दोहराया। साझेदारी का नया अध्याय बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध अब नए और मजबूत दौर में प्रवेश कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगा।
जकार्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सोमवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंच गए। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने हवाई अड्डे पर स्वयं मौजूद रहकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री के विमान के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही वहां की वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने सुरक्षा घेरे में लेकर एयर एस्कॉर्ट भी प्रदान किया। यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी को नई मजबूती देने के लिहाज से अहम मानी जा रही है। राष्ट्रपति प्रबोवो ने किया व्यक्तिगत स्वागत जकार्ता एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत गार्ड ऑफ ऑनर के साथ किया गया। इस दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनसे मुलाकात की और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ एक-दूसरे का अभिवादन किया। पीएम मोदी ने जताया आभार इंडोनेशिया पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी यात्रा की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि जकार्ता पहुंचकर उन्हें बेहद खुशी हुई और एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत से वह प्रभावित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक पहुंचाया था, जिसका लाभ दोनों देशों के नागरिकों को मिला है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा के दौरान दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच द्विपक्षीय वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से— व्यापार एवं निवेश रक्षा सहयोग समुद्री सुरक्षा डिजिटल अर्थव्यवस्था ऊर्जा सहयोग शिक्षा एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दे शामिल हैं। प्रम्बानन मंदिर परिसर का करेंगे दौरा प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। इस दौरान दोनों नेता भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी जोर देंगे। भारतीय समुदाय से भी करेंगे मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि वह प्रवासी भारतीयों से मिलने को लेकर उत्साहित हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम का लिया आनंद हवाई अड्डे पर स्वागत समारोह के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की पारंपरिक कला और संस्कृति पर आधारित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आनंद लिया। कार्यक्रम के माध्यम से दोनों देशों के सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को प्रदर्शित किया गया। 6 से 8 जुलाई तक रहेगा दौरा प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2018 में उनकी पहली इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों ने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचाया था और अब उसी साझेदारी को आगे बढ़ाने का यह महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह यात्रा जनवरी 2025 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति प्रबोवो की भारत यात्रा के बाद दोनों नेताओं की पहली द्विपक्षीय मुलाकात है।
Benjamin Netanyahu on India: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि अमेरिका के अलावा भारत भी इजरायल का एक मजबूत और भरोसेमंद सहयोगी है। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब आबादी वाले भारत से उन्हें व्यापक समर्थन मिल रहा है। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि अमेरिका ही इजरायल का एकमात्र ताकतवर सहयोगी है। 'भारत से मिल रहा है जबरदस्त समर्थन' फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल के कई मित्र देश हैं और भारत उनमें प्रमुख है। उन्होंने कहा, "अमेरिका के अलावा हमारे और भी दोस्त हैं। भारत भी उनमें से एक है। 1.4 अरब आबादी वाले इस देश से हमें जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।" नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि उन्हें सोशल मीडिया, विशेष रूप से फेसबुक पर भारतीयों का व्यापक समर्थन मिलता है। उन्होंने कहा कि उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारत से बड़ी संख्या में समर्थक जुड़े हुए हैं। भारत-इजरायल संबंधों का किया जिक्र इजरायली प्रधानमंत्री ने भारत और इजरायल के बीच मजबूत होते संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच वर्षों से रणनीतिक और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने रिश्तों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी अच्छे संबंध हैं। इसी वर्ष नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना "पर्सनल फ्रेंड" बताया था और भारत को एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति (Global Power) कहा था। जेडी वेंस ने क्या कहा था? नेतन्याहू की यह टिप्पणी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही इस समय ऐसे नेता हैं, जो पूरी मजबूती से इजरायल के साथ खड़े हैं। वेंस ने कहा था कि यदि वह इजरायल की सरकार में होते, तो अपने सबसे बड़े और ताकतवर सहयोगी अमेरिका की सार्वजनिक आलोचना नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों में इजरायल की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अधिकांश हथियार अमेरिका में बने हैं और उनका खर्च अमेरिकी करदाताओं के पैसे से उठाया गया है। पीएम मोदी के इजरायल दौरे का भी किया जिक्र रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2025 में इजरायल का दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत पूरी मजबूती और विश्वास के साथ इजरायल के साथ खड़ा है। यह बयान ऐसे समय आया था, जब कुछ दिनों बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी, जिसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था। रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा, तकनीक, नवाचार और व्यापार समेत कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देश आतंकवाद विरोधी सहयोग और सामरिक साझेदारी को भी मजबूत करने पर लगातार काम कर रहे हैं। नेतन्याहू का ताजा बयान दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों की एक और पुष्टि के तौर पर देखा जा रहा है।
नई दिल्ली: जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का 1 से 3 जुलाई 2026 तक भारत दौरा केवल एक औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं माना जा रहा है। बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच यह दौरा भारत और जापान की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। रक्षा सहयोग, आर्थिक सुरक्षा, उन्नत तकनीक, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग इस दौरे के प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता दोनों देशों के लिए साझा चिंता का विषय बनी हुई है। दो दशक में मजबूत हुई रणनीतिक साझेदारी भारत और जापान के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। उसी वर्ष दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप' का दर्जा दिया। वर्ष 2014 में इसे और आगे बढ़ाते हुए 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप' घोषित किया गया। आज दोनों देशों के बीच 70 से अधिक द्विपक्षीय संवाद तंत्र, 2+2 मंत्री स्तरीय वार्ता और रक्षा, विदेश एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़े नियमित संवाद स्थापित हो चुके हैं। रक्षा और तकनीक पर बढ़ेगा सहयोग इस बार की वार्ता में दोनों देश रक्षा तकनीक, समुद्री सुरक्षा, ड्रोन, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहे हैं। भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति', SAGAR (Security and Growth for All in the Region) और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव का मेल जापान के 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' विजन के साथ देखा जा रहा है। आर्थिक साझेदारी भी होगी मजबूत जापान भारत का प्रमुख निवेशक और आधिकारिक विकास सहायता (ODA) देने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा सहयोग का प्रमुख उदाहरण मानी जाती है। इसके अलावा जापान भारत में सेमीकंडक्टर, विनिर्माण, हरित ऊर्जा और औद्योगिक कॉरिडोर में निवेश बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है। क्या चीन सबसे बड़ा कारण है? विश्लेषकों का मानना है कि भारत-जापान सहयोग के पीछे चीन का बढ़ता प्रभाव एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कारण है। जापान पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में चीन की गतिविधियों को लेकर लगातार चिंतित रहा है। वहीं भारत भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी एक देश के प्रभुत्व के पक्ष में नहीं है। इसी कारण दोनों देश समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं। हालांकि दोनों देशों का दृष्टिकोण पूरी तरह समान नहीं है। जापान अमेरिका का औपचारिक सहयोगी है, जबकि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए बहुपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता देता है। क्वाड को भी मिलेगी मजबूती विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-जापान की बढ़ती साझेदारी क्वाड (Quad) को भी और मजबूत करेगी। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था, समुद्री सुरक्षा और वैकल्पिक आर्थिक ढांचे को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कुछ चुनौतियां भी मौजूद हालांकि मजबूत रिश्तों के बावजूद दोनों देशों के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया है। कई बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में समय और लागत दोनों बढ़ी हैं। सुरक्षा और विदेश नीति के मामलों में दोनों देशों की प्राथमिकताएं पूरी तरह समान नहीं हैं। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और जापान की साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन, सुरक्षित सप्लाई चेन, नई तकनीकों के विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। यही कारण है कि जापानी प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
वॉशिंगटन: Steve Daines ने भारत की विश्वसनीयता की सराहना करते हुए चीन पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब वह चीन की यात्रा करते हैं तो अपना मोबाइल फोन वॉशिंगटन में छोड़ देते हैं, लेकिन भारत आते समय वही फोन अपने साथ लेकर आते हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। भारत पर भरोसा, चीन को लेकर सतर्कता Steve Daines ने U.S.-India Strategic Partnership Forum के लीडरशिप समिट में कहा कि उनका यह व्यवहार दोनों देशों के प्रति भरोसे के स्तर को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "जब मैं चीन जाता हूं, तो मेरा यह फोन मेरे साथ नहीं जाता। यह वॉशिंगटन में ही रहता है। लेकिन जब मैं दिल्ली या भारत के किसी भी शहर में आता हूं, तो यही फोन मेरे साथ होता है।" उनके अनुसार, यही एक विश्वसनीय मित्र और रणनीतिक साझेदार की पहचान है। भारत-अमेरिका मिलकर दे सकते हैं चीन को चुनौती सीनेटर डेंस ने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर तकनीक, नवाचार और उन्नत उद्योगों के क्षेत्र में चीन को प्रभावी चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्रतिभा और अमेरिका की तकनीकी क्षमता का संयोजन वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प तैयार कर सकता है। चीन से रिश्ते पूरी तरह खत्म नहीं हो सकते डेंस ने माना कि अमेरिका चीन के साथ अपने संबंध पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकता, लेकिन उसे आर्थिक और रणनीतिक जोखिम कम करने की दिशा में काम करना होगा। उनके मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत जैसे भरोसेमंद साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाना आवश्यक है। भारत-अमेरिका साझेदारी को बताया अहम सीनेटर ने कहा कि वॉशिंगटन में चीन से जुड़ी चुनौतियों पर लगातार चर्चा होती रहती है, लेकिन अब अमेरिका को यह तय करना होगा कि भविष्य में किन देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत संबंध केवल दोनों लोकतांत्रिक देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता, आर्थिक विकास और तकनीकी सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे।
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता (ट्रेड डील) अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है और समझौते को जल्द अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि भारत वैश्विक मंच पर तेजी से मजबूत भूमिका निभा रहा है और आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और गहरी होगी। भारत की बढ़ती भूमिका की सराहना गोर ने कहा कि भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली शक्ति बन चुका है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अत्याधुनिक तकनीक, विमानन, नवाचार और भरोसेमंद सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ेगा। ट्रंप और पीएम मोदी से जुड़ा दिलचस्प किस्सा अपने संबोधन के दौरान सर्जियो गोर ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और प्रधानमंत्री Narendra Modi से जुड़ा एक रोचक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने सुबह करीब छह बजे प्रधानमंत्री मोदी को फोन करने की इच्छा जताई। जब उन्हें बताया गया कि भारत और अमेरिका के समय में बड़ा अंतर है, तो ट्रंप ने मुस्कुराते हुए कहा, "मोदी जाग रहे होंगे, वो मेरी तरह कम सोते हैं।" गोर के अनुसार, ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी मित्र मानते हैं और दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर मजबूत संबंध हैं। '50 साल बाद भी दोस्त रहेंगे दोनों देश' गोर ने बताया कि नई दिल्ली में एक भारतीय मंत्री ने उनसे कहा था कि आने वाले 50 वर्षों में भी भारत और अमेरिका मजबूत साझेदार बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्रों के साझा मूल्य इस रिश्ते को और मजबूत बनाते हैं। AI, टेक्नोलॉजी और एविएशन पर रहेगा जोर अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र होंगे: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उन्नत प्रौद्योगिकी एविएशन नवाचार भरोसेमंद वैश्विक सप्लाई चेन उन्होंने कहा कि अगले दो वर्ष भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होंगे। व्यापार वार्ता में हुई अहम प्रगति गोर ने बताया कि 22 से 24 जून के बीच नई दिल्ली में भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer के बीच महत्वपूर्ण बैठकें हुईं। इन बैठकों में व्यापार समझौते की प्रगति की समीक्षा की गई और निवेश, आर्थिक सहयोग तथा व्यापार विस्तार पर चर्चा हुई। जल्द हो सकता है समझौता सर्जियो गोर ने विश्वास जताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील अब अंतिम चरण में है और जल्द ही इस पर सहमति बन सकती है। उनके अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देगा तथा भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग के नए अवसर खोलेगा।
विक्टोरिया (सेशेल्स): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सेशेल्स दौरे के दौरान हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा, आर्थिक विकास और रणनीतिक साझेदारी को लेकर बड़ा संदेश दिया। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में पीएम मोदी ने कहा कि हिंद महासागर दोनों देशों का साझा घर है और इसकी सुरक्षा, स्थिरता तथा समृद्धि सुनिश्चित करना भारत और सेशेल्स की साझा जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ऐसे हिंद महासागर की परिकल्पना करता है, जहां समुद्री सुरक्षा के साथ आर्थिक प्रगति, ब्लू इकोनॉमी और क्षेत्रीय सहयोग को भी समान प्राथमिकता मिले। उन्होंने कहा कि यही सोच भारत के 'महासागर (MAHASAGAR) विजन' का आधार है। सेशेल्स के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित हुए पीएम मोदी सेशेल्स सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मानों में शामिल 'गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन' (Guardian of the Blue Horizon) से सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने के बाद पीएम मोदी ने इसे भारत के 1.4 अरब नागरिकों का सम्मान बताते हुए कहा कि वह इसे उन सभी देशों को समर्पित करते हैं जो जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत-सेशेल्स संबंधों के 50 वर्ष पूरे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक अवसर है, क्योंकि सेशेल्स अपनी स्वतंत्रता के 50 वर्ष पूरे कर रहा है और भारत-सेशेल्स के राजनयिक संबंधों की भी स्वर्ण जयंती मनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच दशकों में दोनों देशों के रिश्ते भरोसे, साझेदारी और जन-कल्याण पर आधारित मजबूत संबंधों में बदल गए हैं। सदियों से हिंद महासागर ने दोनों देशों के बीच व्यापार, संस्कृति और लोगों के आपसी संबंधों को मजबूत किया है। सेशेल्स में लागू होगा भारत का UPI तकनीकी सहयोग को नई दिशा देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि अब सेशेल्स में भी भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लागू किया जाएगा। इसके लिए दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी और भुगतान प्रणाली को मजबूत करने से व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। साथ ही पूर्वी अफ्रीका और हिंद महासागर क्षेत्र के साथ संपर्क और सहयोग भी बढ़ेगा। भारत की मदद से बनेगा नया राष्ट्रीय अस्पताल प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी की मौजूदगी में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल बैंकिंग, स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और अंतरिक्ष सहयोग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। भारत के सहयोग से सेशेल्स में नए राष्ट्रीय अस्पताल के निर्माण की दिशा में भी सहमति बनी है। इसके अलावा तीन सोलर वॉटर पंपिंग सिस्टम का उद्घाटन किया गया, जिससे स्वच्छ ऊर्जा और जल प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने भारत को संकट के समय हमेशा साथ खड़े रहने वाला विश्वसनीय मित्र बताया। उन्होंने भारत के सहयोग से बने प्रोफेशनल और टेक्निकल एजुकेशन सेंटर को देश के युवाओं के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे उन्हें विश्वस्तरीय कौशल प्रशिक्षण मिलेगा। राष्ट्रपति ने कहा कि नई साझेदारियों के माध्यम से विदेश सेवा, स्वास्थ्य, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष, कृषि और प्रत्यर्पण जैसे क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत होगा। प्रमुख समझौते सेशेल्स में भारत के UPI सिस्टम को लागू करने पर सहमति। भारत के सहयोग से नए राष्ट्रीय अस्पताल के निर्माण का फैसला। तीन सोलर वॉटर पंपिंग परियोजनाओं का उद्घाटन। समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी में सहयोग बढ़ाने पर सहमति। अंतरिक्ष, कृषि, स्वास्थ्य और प्रत्यर्पण संधि सहित कई समझौतों पर हस्ताक्षर। डिजिटल कनेक्टिविटी और आर्थिक साझेदारी को नई गति देने पर जोर। भारत और सेशेल्स के बीच हुए ये समझौते हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा और सतत विकास को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के रणनीतिक तथा व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलने जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना तथा लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना होगा। रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बेहद अच्छे संबंध हैं और दोनों देशों की साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। अगले साल की शुरुआत में प्रस्तावित है यात्रा समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को आगे बढ़ाने के लिए यह दौरा महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा, "हम उम्मीद कर रहे हैं कि अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप भारत आएंगे। यही हमारी कोशिश है और इस दिशा में तैयारियां जारी हैं।" अंतिम चरण में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता मार्को रुबियो ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और दोनों पक्ष जल्द ही समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। 'भारत अमेरिका का करीबी साझेदार' अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "भारत अमेरिका का बहुत करीबी साथी और सहयोगी है। दोनों देशों के रिश्ते पहले से अधिक मजबूत हुए हैं और भविष्य में इन्हें और विस्तार देने की दिशा में काम किया जा रहा है।" मोदी-ट्रंप मुलाकात पर रहेगी नजर ट्रंप के प्रस्तावित भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है। माना जा रहा है कि बैठक में व्यापार समझौते के अलावा रक्षा सहयोग, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, तकनीकी साझेदारी, निवेश और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। करीब 16 महीनों बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने की यह पहली मुलाकात थी। इससे पहले दोनों नेता फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में मिले थे। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट की स्थिति, वैश्विक स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना दुनिया के लिए जरूरी : पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसे हर हाल में खुला और सुरक्षित बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लाखों नाविक समुद्री मार्गों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय नाविक भी शामिल हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण : ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की बातों का समर्थन करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। ट्रंप ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है और मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता बनाए रखने में उसकी भूमिका बेहद अहम है। आर्थिक और व्यापारिक सहयोग पर भी हुई चर्चा बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका में भारतीय निवेश और भारतीय कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। व्यक्तिगत संबंधों का भी किया जिक्र राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी लंबे समय से उनके मित्र रहे हैं और उनसे मुलाकात हमेशा सुखद अनुभव रहती है। जी7 सम्मेलन के दौरान हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत और अमेरिका की बढ़ती साझेदारी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। बैठक के दौरान ट्रंप ने भारत-अमेरिका संबंधों को बेहद मजबूत बताते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर कोई हमला होता है, तो अमेरिका पूरी ताकत के साथ भारत के समर्थन में खड़ा रहेगा। भारत की सुरक्षा को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "भारत और अमेरिका के बीच शानदार रिश्ते हैं। अगर भारत पर कोई हमला होता है, तो हम उसकी मदद के लिए खड़े रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर यदि कोई भी हमला करता है, तो अमेरिका पूरी ताकत से भारत के साथ दिखाई देगा।" पीएम मोदी को बताया सख्त नेगोशिएटर डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें बेहद सख्त और कुशल नेगोशिएटर बताया। उन्होंने कहा, "वह दिखने में बेहद शांत और सौम्य हैं, लेकिन बातचीत और डील्स के मामले में उतने ही सख्त और माहिर खिलाड़ी हैं। वह अक्सर सामने वाले को चौंका देते हैं।" ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी जितने कड़े वार्ताकार हैं, उतने ही बड़े देशभक्त भी हैं। वह भारत की जनता से बेहद प्यार करते हैं और अमेरिका के लिए भी उनके मन में सम्मान है। जल्द भारत दौरे का किया वादा अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि वह भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं और भविष्य में जल्द ही भारत का दौरा करेंगे। 'व्हाइट हाउस में हूं, तब तक भारत का एक दोस्त अमेरिका में है' प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने कहा, "जब तक मैं व्हाइट हाउस में हूं, भारत का अमेरिका में एक दोस्त है।" उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया समेत कई अहम वैश्विक मुद्दों पर भारत बड़ी भूमिका निभा रहा है और दोनों देशों के बीच रोजगार, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। ऊर्जा सहयोग पर भी बोले ट्रंप भारत की ओर से अमेरिका से ऊर्जा खरीद बढ़ाने के सवाल पर ट्रंप ने कहा, "भारत हमारे साथ जो चाहे कर सकता है। हमारे संबंध बेहद अच्छे हैं। मैं और प्रधानमंत्री मोदी तथा हमारे दोनों देश पहले से कहीं अधिक करीब हैं।" ईरान समझौते पर क्या बोले ट्रंप? ईरान के साथ संभावित समझौते पर ट्रंप ने कहा कि यह सिर्फ दो पैराग्राफ का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक विस्तृत मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) है, जो आगे चलकर एक नियमित समझौते का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि ईरान इस समझौते को आगे बढ़ाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हमें प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी होगी। फिलहाल वे समझौते के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रहे हैं।"
नीस (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच फ्रांस के नीस शहर में हुई उच्चस्तरीय वार्ता कई महत्वपूर्ण समझौतों और घोषणाओं के साथ संपन्न हुई। दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा, अंतरिक्ष, व्यापार, शिक्षा, डिजिटल भुगतान, रेलवे और परमाणु ऊर्जा सहित 13 प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति जताई। बैठक के दौरान भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से कई नई पहलों की घोषणा की गई। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने विशेष ब्रीफिंग में बताया कि दोनों देशों ने उभरती तकनीकों, आर्थिक सुरक्षा और नवाचार के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। भारत-फ्रांस के बीच हुईं 13 बड़ी डील्स 1. इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030 को मंजूरी दोनों देशों ने अनुसंधान, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों में दीर्घकालिक सहयोग के लिए ‘इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030’ अपनाया। 2. AI पर संयुक्त वर्किंग ग्रुप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उसके वैश्विक नियमन पर सहयोग बढ़ाने के लिए भारत-फ्रांस संयुक्त AI वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा। 3. पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए एक उच्चस्तरीय तंत्र स्थापित करने का फैसला किया। 4. आर्थिक सुरक्षा संवाद की शुरुआत महत्वपूर्ण खनिजों, सप्लाई चेन सुरक्षा और रणनीतिक संसाधनों पर सहयोग बढ़ाने के लिए ‘इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग’ शुरू किया जाएगा। 5. फ्रांस में UPI का विस्तार भारत के डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म UPI के उपयोग को फ्रांस में और व्यापक बनाने पर सहमति बनी। 6. 19 संस्थागत समझौतों पर हस्ताक्षर दोनों देशों के स्टार्टअप, अनुसंधान और नवाचार से जुड़े संस्थानों के बीच 19 अलग-अलग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। 7. कानपुर में एयरोनॉटिक्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI), कानपुर में एयरोनॉटिक्स और संबद्ध क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। 8. पेरिस के स्टेशन-एफ में 10 नए भारतीय स्टार्टअप दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप परिसरों में शामिल पेरिस के स्टेशन-एफ में 10 अतिरिक्त भारतीय स्टार्टअप्स को जगह दी जाएगी। 9. डिजिटल साइंस सेंटर की स्थापना भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और फ्रांस की INRIA संस्था मिलकर डिजिटल साइंस सेंटर स्थापित करेंगे। 10. पेरिस-सैकले विश्वविद्यालय में इंडिया चेयर ‘AI, Innovation and Culture’ विषय पर आईसीसीआर इंडिया चेयर की स्थापना की जाएगी। 11. स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और फ्रांस के हेल्थ डेटा हब के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर हुए। 12. रेलवे और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं में साझेदारी भारत में रेलवे आधुनिकीकरण और हाई-स्पीड रेल विकास के लिए सहयोग बढ़ाने संबंधी घोषणा-पत्र जारी किया गया। 13. अंतरिक्ष और सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती इसरो और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी CNES ने माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान और मानव अंतरिक्ष मिशनों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। साथ ही गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान और सुरक्षा से जुड़ा जनरल सिक्योरिटी एग्रीमेंट भी हुआ। रक्षा और परमाणु ऊर्जा पर विशेष जोर बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने रक्षा उपकरणों के सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन पर विशेष जोर दिया। इसके अलावा नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी व्यापक चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने माना कि भारत में लागू ‘शांति अधिनियम’ (SHANTI Act) के बाद छोटे और उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं खुली हैं। छात्रों और पेशेवरों के लिए खुलेंगे नए अवसर प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांसीसी विश्वविद्यालयों को नई शिक्षा नीति के तहत भारत में अपने परिसर खोलने का निमंत्रण दिया। वहीं राष्ट्रपति मैक्रों ने फ्रांस में अध्ययन कर रहे भारतीय छात्रों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। दोनों नेताओं ने छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही आसान बनाने तथा शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता बढ़ाने पर भी चर्चा की। भारत-फ्रांस संबंधों को मिलेगी नई गति नीस स्थित विला केरीलोस में हुई यह बैठक उस समय हुई है जब भारत और फ्रांस ने इस वर्ष की शुरुआत में अपने संबंधों को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के स्तर तक पहुंचाया है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-फ्रांस साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक शांति, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फ्रांस दौरे के पहले चरण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्लोवाकिया की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर रवाना हो गए हैं। इसके बाद वह दोबारा फ्रांस लौटकर जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
ढाका: भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश में अपनी नई जिम्मेदारी संभालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शुक्रवार सुबह वह बेनापोल भूमि बंदरगाह के रास्ते बांग्लादेश पहुंचे, जहां भारतीय उप उच्चायुक्त पवन बधे ने उनका स्वागत किया। त्रिवेदी मौजूदा उच्चायुक्त प्रणय वर्मा का स्थान लेंगे और ऐसे समय में कार्यभार संभाल रहे हैं जब भारत और बांग्लादेश के संबंध कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक और रणनीतिक मुद्दों के दौर से गुजर रहे हैं। भारत सरकार ने 27 अप्रैल को दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में अगला उच्चायुक्त नियुक्त करने की घोषणा की थी। इसके बाद 5 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें औपचारिक रूप से प्रत्यय पत्र (Letters of Credence) सौंपे, जिससे उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हुई। द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर रहेगा जोर भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई मुद्दे लंबे समय से द्विपक्षीय एजेंडे का हिस्सा रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में कुछ चुनौतियां भी सामने आईं, जिनमें सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और क्षेत्रीय राजनीतिक घटनाक्रम प्रमुख रहे हैं। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, नई नियुक्ति का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करना तथा लंबित मुद्दों पर संवाद को आगे बढ़ाना होगा। राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव का मिलेगा लाभ दिनेश त्रिवेदी भारतीय राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम हैं। वह पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और पूर्व सांसद रह चुके हैं। राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ बांग्ला भाषा और क्षेत्रीय सामाजिक-सांस्कृतिक समझ को भी उनकी नियुक्ति में एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका अनुभव दोनों देशों के बीच जन-स्तर और संस्थागत स्तर पर संबंधों को मजबूत बनाने में मददगार साबित हो सकता है। ढाका रवाना होने से पहले पहुंचे नेताजी भवन बांग्लादेश रवाना होने से पहले दिनेश त्रिवेदी ने कोलकाता स्थित नेताजी भवन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के संबंध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साझा इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के बीच गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत संबंध भविष्य में सहयोग के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों को अपने सार्वजनिक जीवन की प्रेरणा बताया। सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर भी रहेगा ध्यान नई जिम्मेदारी संभालने से पहले दिनेश त्रिवेदी ने भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी से भी मुलाकात की थी। इस दौरान भारत-बांग्लादेश रक्षा सहयोग, सीमा सुरक्षा और सैन्य समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है और इसे भविष्य में और मजबूत करने की दिशा में प्रयास जारी हैं। रणनीतिक महत्व की नियुक्ति विश्लेषकों के अनुसार, ढाका में दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति केवल एक नियमित राजनयिक बदलाव नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत और बांग्लादेश दक्षिण एशिया में आर्थिक, सामरिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से एक-दूसरे के महत्वपूर्ण साझेदार हैं। ऐसे में आने वाले समय में व्यापार, ऊर्जा, संपर्क परियोजनाओं, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग को नई गति देने में दिनेश त्रिवेदी की भूमिका अहम मानी जा रही है।
रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और इसे कमजोर करने की पश्चिमी देशों की कोशिशें सफल नहीं होंगी। भारत-रूस साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में भारत-रूस व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ‘भारत पर दबाव बनाना गलत’ — पुतिन राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर बाहरी दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों का कोई असर नहीं पड़ा है और भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है। भारत की आर्थिक प्रगति की तारीफ पुतिन ने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और मजबूत विकास दर की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और नीतिगत निरंतरता का परिणाम है। उन्होंने भारत को दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बताया। पश्चिमी देशों के दबाव पर रूस का रुख पुतिन ने कहा कि पश्चिमी देशों की कोशिशें भारत और रूस के संबंधों को प्रभावित करने में विफल रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस को भारत के अन्य देशों के साथ संबंधों से कोई आपत्ति नहीं है। भारत-अमेरिका संबंधों पर भी टिप्पणी पुतिन ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर सभी देशों के साथ संबंध विकसित कर रहा है और अमेरिका के साथ उसके बढ़ते संबंध रूस-भारत साझेदारी पर कोई नकारात्मक असर नहीं डालेंगे। ‘भारत एक भरोसेमंद साझेदार’ रूस के राष्ट्रपति ने भारत को एक “विश्वसनीय साझेदार” बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक भरोसा और रणनीतिक सहयोग मजबूत बना हुआ है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।