style inspiration

Kajol in blush shimmer saree with floral motifs and diamond choker at Joyalukkas event
Kajol का शिमरी साड़ी लुक बना चर्चा का केंद्र, Rimple & Harpreet के डिजाइन में दिखी क्लासिक एलिगेंस

बॉलीवुड अभिनेत्री Kajol एक बार फिर अपने स्टाइल स्टेटमेंट से सुर्खियों में हैं। हाल ही में ज्वेलरी ब्रांड Joyalukkas के एक इवेंट में उन्होंने ऐसा लुक कैरी किया, जिसने ट्रेडिशनल और मॉडर्न फैशन का खूबसूरत संगम पेश किया। साड़ी में शिमर का नया अंदाज Kajol ने डिजाइनर जोड़ी Rimple & Harpreet की डिजाइन की हुई ब्लश ट्यूल साड़ी पहनी, जो अपने यूनिक टेक्सचर के कारण अलग नजर आई। साड़ी पर वर्टिकल सीक्विन लाइन्स दी गई थीं, जो मूवमेंट के साथ फ्लूइड इफेक्ट देती हैं पल्लू और स्कर्ट में बड़े फ्लोरल मोटिफ्स, टोनल पिंक और मेटैलिक शेड्स में उभरे स्कैलप्ड बॉर्डर ने लुक को सॉफ्ट और एलिगेंट फिनिश दिया ब्लाउज भी इसी थीम को फॉलो करता नजर आया, जिसमें फ्लोरल एम्ब्रॉयडरी और स्कैलप्ड नेकलाइन ने डिटेलिंग को और खास बना दिया। ज्वेलरी ने बढ़ाया ग्लैमर इस आउटफिट को Kajol ने Joyalukkas की स्टेटमेंट ज्वेलरी के साथ पेयर किया: रूबी सेंटर वाला डायमंड चोकर पर्ल ड्रॉप्स मैचिंग ईयररिंग्स और रिंग्स यह ज्वेलरी लुक को रॉयल टच देने में अहम रही। स्टाइलिंग और मेकअप स्टाइलिस्ट: Radhika Mehra मेकअप: Pallavi Symons (स्मोकी कोहल आई और न्यूट्रल लिप) हेयर: Sangeeta Hegde (साइड-पार्टेड वॉल्यूमिनस ब्लोआउट) पूरे लुक में सटल ग्लैम और क्लासिक चार्म का बेहतरीन बैलेंस देखने को मिला।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
Celebrities showcasing soft feminine and structured fashion looks
जैकलीन से जाह्नवी तक: इस हफ्ते फैशन में दिखा क्लास और मॉडर्न ट्विस्ट का परफेक्ट संगम

  इस हफ्ते बॉलीवुड और इंटरनेशनल फैशन सर्किट में सॉफ्ट फेमिनिन स्टाइल और स्ट्रक्चर्ड टेलरिंग का दिलचस्प मेल देखने को मिला। कहीं लेस और पर्ल्स की नजाकत थी तो कहीं क्लीन कट सिल्हूट्स का बोलबाला। कुल मिलाकर, इस हफ्ते के बेस्ट लुक्स में क्लासिक फैशन को नए अंदाज में पेश किया गया। जैकलीन फर्नांडिस का एलिगेंट लेस लुक Jacqueline Fernandez ने Manish Malhotra के डिजाइन किए हुए लेसी आउटफिट को चुना, जिसमें साटन बेस पर शीयर लेस ओवरले और पर्ल डिटेलिंग ने इसे बेहद खूबसूरत बना दिया। हाई नेक और स्कैलप्ड हेम के साथ यह आउटफिट साड़ी पल्लू जैसा इफेक्ट देता नजर आया। फिगर-हगिंग स्कर्ट के साथ पूरा लुक बेहद फेमिनिन और ग्रेसफुल दिखा। जाह्नवी कपूर का पावरफुल टेलर्ड स्टाइल Janhvi Kapoor ने Elie Saab का टॉप-टू-टो टोप मोनोक्रोम लुक कैरी किया। ओवरसाइज़्ड डबल-ब्रेस्टेड ब्लेज़र और ड्रेप्ड हॉल्टर टॉप के साथ यह आउटफिट स्ट्रक्चर और सॉफ्टनेस का परफेक्ट बैलेंस बना रहा था। Ferragamo हील्स और Miu Miu सनग्लासेस ने इसे मॉडर्न टच दिया। जाह्नवी का ओल्ड हॉलीवुड ग्लैमर जाह्नवी ने Sabina Bilenko के Autumn/Winter 2025 कलेक्शन से स्ट्रैपलेस गाउन भी पहना। न्यूड बेस पर फ्लोरल एम्ब्रॉयडरी और क्रिस्टल डिटेलिंग के साथ केप-जैकेट ने इस लुक को क्लासिक हॉलीवुड वाइब दी। रोज़े का ड्रामेटिक व्हाइट गाउन Rosé ने Khaite का व्हाइट गाउन पहना, जिसमें शीयर लेस टॉप और वॉल्यूमिनस स्कर्ट का कॉम्बिनेशन देखने को मिला। ब्लैक बो डिटेल और Tiffany & Co. गाला इवेंट में उनका लुक बेहद स्टाइलिश और एलिगेंट रहा। नीता अंबानी का ट्रेडिशनल रॉयल लुक Nita Ambani ने Swadesh की बनारसी सिल्क साड़ी पहनी, जिसमें गोल्ड मोटिफ्स की रिच डिटेलिंग थी। Anamika Khanna की चैंटिली लेस ब्लाउज ने लुक में सॉफ्टनेस जोड़ी। मृणाल ठाकुर का सिंपल और एलीगेंट स्टाइल Mrunal Thakur ने Mimamsaa की ब्लैक साड़ी पहनी, जिसमें गोल्ड बॉर्डर का हल्का सा टच था। Stoffa के कोल्हापुरी और मिनिमल ज्वेलरी के साथ उनका लुक बेहद सिंपल लेकिन क्लासी रहा।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Aditi Rao Hydari wearing lime silk saree by Raw Mango with elegant jewelry and soft glam makeup look
लाइम सिल्क साड़ी में छाईं अदिति राव हैदरी: Raw Mango के क्लासिक लुक में दिखा रॉयल चार्म

भारतीय फैशन की दुनिया में क्लासिक और मिनिमल एलिगेंस का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है Aditi Rao Hydari ने। इस बार उनका लुक एक लाइम रंग की सिल्क साड़ी में सामने आया, जिसे डिजाइन किया है Raw Mango ने–और यह लुक अपनी सादगी में भी बेहद शाही नजर आता है। लाइम सिल्क में संतुलित खूबसूरती लाइम रंग को कैरी करना आसान नहीं होता, खासकर जब बात सिल्क की हो, जहां रंग पूरी तरह हावी हो जाता है। लेकिन अदिति की इस साड़ी में यही रंग इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरता है। मलबरी सिल्क की इस साड़ी में पूरे कपड़े पर हल्के-हल्के zardozi फ्लोरल मोटिफ्स बनाए गए हैं, जो ज्यादा भरे हुए नहीं बल्कि संतुलित दूरी पर सजाए गए हैं। इससे साड़ी का लुक ओवरडन नहीं लगता, बल्कि एक क्लीन और क्लासी अपील देता है। किनारे पर दिया गया पतला kiran border लाइट को हल्के-हल्के रिफ्लेक्ट करता है, जो साड़ी में सूक्ष्म चमक जोड़ता है। पफ स्लीव ब्लाउज में रोमांटिक टच इस लुक को खास बनाता है इसका ब्लाउज–उसी लाइम टोन में बना पफ स्लीव डिजाइन, जो पूरे आउटफिट में एक सॉफ्ट और रोमांटिक चार्म जोड़ता है। क्लीन नेकलाइन के साथ यह ब्लाउज साड़ी के साथ पूरी तरह मेल खाता है और कोई अतिरिक्त जटिलता नहीं लाता। जूलरी ने बढ़ाया स्टाइल क्वोशेंट अदिति के इस लुक में जूलरी का खास योगदान है, जो Indriya Jewels से ली गई है। गले में फिट चोकर लंबे और स्टेटमेंट ईयररिंग्स यह जूलरी फेस फ्रेम को और उभारती है, जिससे लुक में ग्रेस और डिटेल दोनों जुड़ते हैं। मेकअप और हेयरस्टाइल में सॉफ्ट ग्लो मेकअप में आंखों को हल्का डिफाइन किया गया है, भौंहें नेचुरल रखी गई हैं और लिप कलर न्यूड पिंक टोन में है–जो पूरे लुक को सॉफ्ट और एलिगेंट बनाता है। मॉडर्न ट्विस्ट के साथ स्टाइलिंग टिप इस क्लासिक लुक को और मॉडर्न बनाने के लिए– गोल्ड बैंगल की जगह स्लिम सिल्वर वॉच ट्राई करें बालों को सिंपल बन में बांधें व्हाइट लेस स्क्रंची से गजरा जैसा हल्का इफेक्ट दें क्लासिक साड़ियों के लिए अदिति का प्यार Aditi Rao Hydari का Raw Mango साड़ियों के प्रति प्यार पहले भी कई बार देखा गया है–रेड कार्पेट से लेकर उनकी अपनी शादी के फंक्शंस तक।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Bollywood celebrities in elegant traditional outfits at wedding showcasing simple and personal fashion styles
जब सेलेब्रिटी ‘स्टाइल’ से आगे बढ़कर ‘खुद’ को पहनते हैं: फैमिली वेडिंग्स में बदल जाता है फैशन का मतलब

रेड कार्पेट पर अपने दमदार फैशन से पहचान बना चुके सितारे जब निजी समारोहों खासकर शादी-ब्याह में शामिल होते हैं, तो उनका अंदाज चौंकाने वाला बदलाव दिखाता है। यहां दिखावा नहीं, बल्कि सादगी, आत्मविश्वास और व्यक्तिगत पहचान अहम हो जाती है। यही कारण है कि इन मौकों पर सेलेब्रिटीज का स्टाइल अधिक यादगार और वास्तविक लगता है। ‘खुद को साबित’ नहीं, ‘खुद को सहेजना’ बनता है लक्ष्य जब Anushka Sharma अपनी शादी की तैयारी कर रही थीं, तब चुनौती खूबसूरती नहीं, बल्कि नयापन थी। फिल्मों में कई बार दुल्हन का किरदार निभाने और Ae Dil Hai Mushkil जैसी फिल्म में आइकॉनिक ब्राइडल लुक देने के बाद उनके लिए खुद को दोहराना आसान था। लेकिन डिजाइनर Sabyasachi Mukherjee और उनकी टीम ने एक अलग रास्ता चुना। ओवरड्रामैटिक लुक की बजाय हल्का गुलाबी, सॉफ्ट और संयमित लहंगा चुना गया। यही सादगी उनकी शादी के लुक को हमेशा के लिए यादगार बना गई। परफॉर्मेंस से दूरी Ranbir Kapoor का वेडिंग लुक इसका बेहतरीन उदाहरण है। फिल्मों में भारी-भरकम शेरवानी पहन चुके रणबीर ने अपनी शादी में बेहद सादगी भरा लुक चुना। हल्के रंग, सॉफ्ट एम्ब्रॉयडरी और परफेक्ट फिट-यानी स्टाइल बिना किसी दिखावे के। यह दिखाता है कि जब दर्शक करीबी हों, तो ‘कपड़ों का प्रदर्शन’ नहीं, ‘पर्सनैलिटी’ मायने रखती है। वही सिल्हूट, लेकिन बेहतर डिटेल Saif Ali Khan और Shahid Kapoor जैसे सितारे निजी समारोहों में पारंपरिक सिल्हूट-अचकन, बंधगला या शेरवानी-ही चुनते हैं। फर्क होता है डिटेलिंग में। हैंडवोवन फैब्रिक, खास बटन, सटीक फिटिंग-ये वो बारीकियां हैं जो दिखती कम हैं, लेकिन महसूस ज्यादा होती हैं। कम्फर्ट सबसे बड़ा फैक्टर फैमिली वेडिंग्स में सेलेब्रिटीज घंटों तक एक्टिव रहते हैं-मिलना-जुलना, बैठना, डांस करना। ऐसे में आराम सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाता है। Virat Kohli का स्टाइल इसका उदाहरण है, यह स्ट्रक्चर्ड लेकिन आरामदायक। क्योंकि आत्मविश्वास तभी टिकता है, जब कपड़े सहज हों। रिपीट करने से नहीं डरते रेड कार्पेट के उलट, निजी समारोहों में सेलेब्रिटी अपने पसंदीदा स्टाइल को दोहराने से नहीं हिचकते। Hrithik Roshan जैसे सितारे अक्सर सिंपल, एलिगेंट एथनिक वियर में नजर आते हैं। यही उनकी सिग्नेचर स्टाइल बन जाती है-हर बार थोड़ा अलग, लेकिन हमेशा पहचानी हुई। दिखने से ज्यादा ‘याद’ रहने पर फोकस सबसे बड़ा बदलाव मानसिकता में आता है। यहां न कैमरे होते हैं, न आलोचक-सिर्फ अपने लोग होते हैं। इसलिए कपड़े ‘इंप्रेस’ करने के लिए नहीं, बल्कि ‘मौके को जीने’ के लिए चुने जाते हैं। यही वजह है कि ये लुक्स ज्यादा ईमानदार और लंबे समय तक याद रहने वाले बनते हैं।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0