गर्मियों के फैशन में कुछ कॉम्बिनेशन ऐसे होते हैं जो हर सीजन में क्लासिक बने रहते हैं, और इस बार midi dress और sandals की जोड़ी सबसे ज्यादा चर्चा में है। चाहे ब्रंच डेट हो, बीच वेकेशन, ऑफिस के बाद की पार्टी या वीकेंड आउटिंग-मिडी ड्रेस के साथ सही सैंडल्स आपके पूरे लुक को बेहद एलिगेंट और ट्रेंडी बना सकते हैं। इस सीजन फैशन वर्ल्ड में फ्लोरल प्रिंट्स, बॉडी-हगिंग सिल्हूट, कॉटन मिडी ड्रेसेस और स्लिप स्टाइल ड्रेस का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। वहीं sandals में minimalist designs, clogs, woven styles और heeled flip-flops लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। आइए जानते हैं इस समर midi dress को sandals के साथ स्टाइल करने के 6 आसान और फैशनेबल तरीके। ब्लैक मिडी ड्रेस के साथ मिनिमलिस्ट सैंडल्स क्लासिक ब्लैक मिडी ड्रेस के साथ स्ट्रैपी या मिनिमल सैंडल्स बेहद सॉफिस्टिकेटेड लुक देते हैं। यह कॉम्बिनेशन डिनर डेट, इवनिंग पार्टी या फॉर्मल इवेंट्स के लिए परफेक्ट माना जा रहा है। इस लुक को छोटे हैंडबैग और गोल्ड जूलरी के साथ पूरा किया जा सकता है। स्ट्रैपलेस ड्रेस के साथ क्लॉग सैंडल्स अगर आप आराम और स्टाइल दोनों चाहती हैं, तो strapless midi dress के साथ clog sandals शानदार विकल्प हो सकते हैं। यह लुक समर वेकेशन और कैजुअल आउटिंग के लिए काफी ट्रेंडी माना जा रहा है। फिटेड ड्रेस के साथ पीप-टो सैंडल्स बॉडी-फिटेड midi dress के साथ peep-toe sandals आपके लुक को बेहद ग्लैमरस बना सकते हैं। यह स्टाइल खासतौर पर पार्टी या नाइट आउट के लिए पसंद किया जा रहा है। न्यूट्रल शेड्स के sandals इस लुक को और एलिगेंट बनाते हैं। बोहो ड्रेस के साथ हील्ड सैंडल्स फ्लोई और प्रिंटेड boho midi dress के साथ heeled sandals का कॉम्बिनेशन समर फैशन का बड़ा ट्रेंड बन चुका है। बीच वेकेशन, म्यूजिक फेस्टिवल या डे आउटिंग के लिए यह स्टाइल बेहद परफेक्ट माना जा रहा है। डेनिम ड्रेस के साथ वूवन सैंडल्स डेनिम midi dress के साथ woven sandals कैजुअल और स्टाइलिश दोनों फील देते हैं। यह लुक डे-टू-डे फैशन के लिए आसान और कम्फर्टेबल विकल्प बनता जा रहा है। स्लिप ड्रेस के साथ हील्ड फ्लिप-फ्लॉप्स साटन या स्लिप midi dress के साथ heeled flip-flops इस सीजन का सबसे मॉडर्न और chic फैशन ट्रेंड माना जा रहा है। यह कॉम्बिनेशन मिनिमल मेकअप और sleek accessories के साथ बेहद शानदार नजर आता है। इस समर फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि midi dress और sandals की सही pairing न सिर्फ कम्फर्ट देती है, बल्कि effortless stylish look भी तैयार करती है। यही वजह है कि यह कॉम्बिनेशन इस सीजन वार्डरोब का जरूरी हिस्सा बन चुका है।
गर्मियों के मौसम में जब भारी कपड़े पहनना मुश्किल लगने लगता है, तब सॉफ्ट कॉटन साड़ियां सबसे आरामदायक और स्टाइलिश विकल्प बनकर सामने आती हैं। हल्की, सांस लेने वाली और पूरे दिन आराम देने वाली ये साड़ियां अब सिर्फ पारंपरिक पहनावे तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि मॉडर्न फैशन का भी बड़ा हिस्सा बन चुकी हैं। ऑफिस, ब्रंच, पूजा या कैजुअल आउटिंग—हर मौके पर कॉटन साड़ी बिना ज्यादा मेहनत के एलिगेंट लुक देती है। आजकल फैशन की दुनिया में मुलमुल, जामदानी, खादी, कोटा कॉटन और चंदेरी-कॉटन ब्लेंड साड़ियों का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इनकी खासियत यह है कि ये शरीर पर हल्की महसूस होती हैं और गर्मी में भी स्टाइल बनाए रखती हैं। कौन-सी कॉटन साड़ियां हैं सबसे ज्यादा ट्रेंड में? मुलमुल कॉटन साड़ी मुलमुल फैब्रिक बेहद सॉफ्ट और हल्का होता है। इसकी फ्लोई फॉल और आरामदायक टेक्सचर इसे समर वॉर्डरोब का फेवरेट बनाते हैं। यह डे-टाइम लुक के लिए परफेक्ट मानी जाती है। जामदानी कॉटन साड़ी जामदानी साड़ियों की खूबसूरत बुनाई और मिनिमल डिजाइन इन्हें क्लासी लुक देते हैं। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन ऑप्शन है जो ट्रेडिशनल और मॉडर्न स्टाइल का मिश्रण चाहते हैं। कोटा कॉटन कोटा कॉटन अपनी शीयर और एयरि फील के लिए जानी जाती है। गर्म मौसम में यह बेहद आरामदायक रहती है और एलिगेंट लुक भी देती है। खादी और हैंडलूम कॉटन अगर आप थोड़ा स्ट्रक्चर्ड और फॉर्मल लुक चाहती हैं, तो खादी और हैंडलूम कॉटन साड़ियां शानदार विकल्प हो सकती हैं। ये ऑफिस वियर के लिए खास पसंद की जाती हैं। रंग और डिजाइन भी बनाते हैं खास सॉफ्ट कॉटन साड़ियों में इंडिगो, हल्का गुलाबी, हल्दी पीला, मिट्टी जैसा भूरा, सफेद और हरा जैसे रंग काफी पसंद किए जा रहे हैं। वहीं स्ट्राइप्स, चेक्स और मिनिमल बॉर्डर डिजाइन इन्हें और ज्यादा वर्सेटाइल बनाते हैं। इन साड़ियों को सिर्फ ट्रेडिशनल ब्लाउज के साथ ही नहीं, बल्कि टैंक टॉप, कॉलर शर्ट, क्रॉप जैकेट या प्लेन टी-शर्ट के साथ भी स्टाइल किया जा सकता है। यही वजह है कि Gen-Z फैशन में भी कॉटन साड़ी की एंट्री तेजी से बढ़ रही है। पहली बार खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान अगर आप पहली बार कॉटन साड़ी खरीद रही हैं, तो बहुत ज्यादा स्टार्च वाली या भारी बॉर्डर वाली साड़ी लेने से बचें। सॉफ्ट कॉटन साड़ियों की असली खूबसूरती उनकी सहजता और आराम में होती है। समय के साथ ये और ज्यादा मुलायम और खूबसूरत हो जाती हैं। क्यों बढ़ रही है सॉफ्ट कॉटन साड़ियों की लोकप्रियता? आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग ऐसे कपड़े चाहते हैं जो स्टाइलिश होने के साथ आरामदायक भी हों। सॉफ्ट कॉटन साड़ियां इसी जरूरत को पूरा करती हैं। यही कारण है कि अब ये सिर्फ पारंपरिक पहनावे तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि मॉडर्न फैशन स्टेटमेंट बन चुकी हैं।
गर्मियों ने दस्तक दे दी है और मार्च से ही तेज धूप ने हाल बेहाल कर दिया है। ऐसे में सिर्फ स्टाइल नहीं, बल्कि सही रंग के कपड़े चुनना भी बेहद जरूरी हो जाता है। वैज्ञानिक तौर पर भी यह साबित है कि रंग शरीर के तापमान को प्रभावित करते हैं—कुछ रंग गर्मी को सोखते हैं, तो कुछ उसे रिफ्लेक्ट करते हैं। आइए जानते हैं गर्मियों के लिए 5 ऐसे कूल कलर्स, जो आपको स्टाइलिश भी बनाएंगे और ठंडक भी देंगे 1. सफेद (White) — गर्मियों का किंग सफेद रंग सूरज की किरणों को रिफ्लेक्ट करता है, जिससे शरीर कम गर्म होता है। कॉटन या लिनन की सफेद शर्ट/कुर्ता बेस्ट ऑप्शन है सिंपल, क्लासी और सबसे कूल 2. आसमानी नीला (Sky Blue) — फ्रेश और कूल लुक हल्का नीला रंग आंखों को ठंडक देता है और कम गर्मी सोखता है। हर स्किन टोन पर सूट करता है ऑफिस और कैजुअल दोनों के लिए परफेक्ट 3. बेबी पिंक (Pastel Pink) — सॉफ्ट और ट्रेंडी पेस्टल पिंक न ज्यादा चमकता है, न ज्यादा गर्मी सोखता है। आउटडोर इवेंट्स के लिए बेस्ट ट्रेंडी और एलिगेंट लुक देता है 4. मिंट ग्रीन (Mint Green) — नेचुरल कूलिंग यह रंग आंखों और दिमाग को ठंडक देता है। पसीने के दाग भी कम दिखते हैं कॉलेज और ऑफिस दोनों के लिए शानदार 5. हल्का पीला (Light Yellow) — ब्राइट और एनर्जेटिक नींबू जैसा हल्का पीला रंग गर्मी को रिफ्लेक्ट करता है। आपको फ्रेश और वाइब्रेंट दिखाता है समर वाइब्स के लिए परफेक्ट इन रंगों से करें परहेज काला (Black) नेवी ब्लू डार्क ब्राउन ये रंग ज्यादा गर्मी सोखते हैं, जिससे पसीना और बेचैनी बढ़ती है एक्स्ट्रा समर फैशन टिप्स फैब्रिक का ध्यान रखें: कॉटन, लिनन, शिफॉन पहनें लूज फिटिंग चुनें: हवा का वेंटिलेशन बना रहेगा लाइट कलर्स को प्राथमिकता दें
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।