भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच हीट स्ट्रोक यानी लू लगने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जाती है। कई लोग इसे सामान्य कमजोरी या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है। गंभीर स्थिति में मरीज कोमा तक में जा सकता है। गुरुग्राम स्थित मारेंगो एशिया हॉस्पिटल्स की कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. दीक्षा गोयल के अनुसार, यदि लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए और तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया जाए, तो गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। क्या होता है हीट स्ट्रोक? जब शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला सिस्टम अत्यधिक गर्मी के कारण काम करना बंद कर देता है, तब हीट स्ट्रोक की स्थिति पैदा होती है। इस दौरान शरीर का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट या उससे अधिक पहुंच सकता है, जिससे दिमाग, हृदय और अन्य अंगों पर गंभीर असर पड़ सकता है। हीट स्ट्रोक के 5 प्रमुख लक्षण 1. शरीर का तापमान तेजी से बढ़ना शरीर का तापमान 102 से 105 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच सकता है। 2. त्वचा का लाल और गर्म होना त्वचा गर्म, लाल और सूखी हो सकती है। कुछ मामलों में पसीना भी दिखाई दे सकता है। 3. मानसिक स्थिति में बदलाव मरीज भ्रमित हो सकता है, बड़बड़ाने लग सकता है या बेहोश भी हो सकता है। 4. पसीना आना बंद होना कई बार शरीर पसीना निकालना बंद कर देता है, जिससे शरीर का तापमान और बढ़ जाता है। 5. तेज और मजबूत नाड़ी दिल की धड़कन सामान्य से अधिक तेज महसूस हो सकती है। हीट स्ट्रोक से हो सकती हैं ये गंभीर जटिलताएं विशेषज्ञों के अनुसार, हीट स्ट्रोक के कारण: दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और मरीज कोमा में जा सकता है। मांसपेशियों के टूटने से शरीर में विषैले तत्व बढ़ सकते हैं। शरीर में खून और ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो सकता है। किडनी, लिवर, फेफड़े और हृदय जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। हीट स्ट्रोक होने पर तुरंत क्या करें? मरीज को धूप या गर्म वातावरण से हटाकर ठंडी जगह पर ले जाएं। शरीर पर ठंडा पानी डालें और हवा करें। बर्फ के पानी में भीगा तौलिया शरीर पर रखें और समय-समय पर बदलते रहें। गर्दन, बगल और जांघों के पास बर्फ या कोल्ड पैक लगाएं। जितनी जल्दी हो सके इमरजेंसी मेडिकल सहायता के लिए संपर्क करें। विशेषज्ञों के अनुसार, लक्षण शुरू होने के 30 मिनट के भीतर शरीर का तापमान कम करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। हीट स्ट्रोक में क्या नहीं करना चाहिए? 1. बुखार की दवा न दें पैरासिटामोल या अन्य बुखार कम करने वाली दवाएं हीट स्ट्रोक में फायदेमंद नहीं होतीं और नुकसान पहुंचा सकती हैं। 2. जबरन पानी या कोई तरल पदार्थ न पिलाएं यदि मरीज की चेतना प्रभावित हो चुकी है, तो तरल पदार्थ सांस की नली में जा सकते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। कैसे करें बचाव? दोपहर के समय तेज धूप में निकलने से बचें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। हल्के और ढीले कपड़े पहनें। बाहर निकलते समय टोपी, छाता या सनस्क्रीन का उपयोग करें। बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखें।
गर्मी का मौसम सिर्फ थकान और डिहाइड्रेशन ही नहीं लाता, बल्कि पहले से हर्निया से जूझ रहे लोगों के लिए अतिरिक्त परेशानी भी पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म मौसम सीधे तौर पर हर्निया का कारण नहीं बनता, लेकिन शरीर में होने वाले कुछ बदलाव दर्द, सूजन और असहजता को बढ़ा सकते हैं। अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर कंसल्टेंट (जनरल एंड लैपरोस्कोपिक सर्जरी) डॉ. रत्नेश जेनवा के मुताबिक, गर्मियों में शरीर को सामान्य तापमान बनाए रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इस दौरान ज्यादा पसीना, पानी की कमी, मांसपेशियों की कमजोरी और पेट पर दबाव बढ़ने जैसी समस्याएं हर्निया के लक्षणों को गंभीर बना सकती हैं। क्यों बढ़ सकता है हर्निया का दर्द? 1. डिहाइड्रेशन से कमजोर होती हैं मांसपेशियां अत्यधिक पसीने के कारण शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है। इससे पेट की दीवार की मांसपेशियां कमजोर पड़ सकती हैं और हर्निया वाली जगह पर दर्द और बेचैनी बढ़ सकती है। 2. कब्ज और पेट फूलने से बढ़ता है दबाव गर्मी के मौसम में पाचन संबंधी समस्याएं और कब्ज आम हैं। शौच के दौरान जोर लगाने से पेट के अंदर दबाव बढ़ता है, जिससे हर्निया की समस्या और गंभीर हो सकती है। 3. पसीने से त्वचा में जलन हर्निया वाले हिस्से के आसपास लगातार पसीना आने से खुजली, जलन और सूजन हो सकती है। खासतौर पर इंग्वाइनल हर्निया के मरीजों को यह समस्या ज्यादा परेशान कर सकती है। 4. थकान से कम होता है मांसपेशियों का सहारा अधिक गर्मी के कारण शरीर जल्दी थक जाता है। इससे प्रभावित हिस्से के आसपास की मांसपेशियों का सपोर्ट कम हो सकता है और सामान्य गतिविधियों में भी दर्द महसूस हो सकता है। 5. ज्यादा शारीरिक गतिविधियां भी बढ़ा सकती हैं परेशानी गर्मियों में यात्रा, एक्सरसाइज या भारी सामान उठाने से पेट की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हर्निया के लक्षण बढ़ सकते हैं। हर्निया के मरीज गर्मियों में इन बातों का रखें खास ध्यान दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। कब्ज से बचने के लिए फाइबर युक्त भोजन लें। भारी सामान उठाने से बचें। ढीले और सूती कपड़े पहनें। लंबे समय तक खड़े रहने से बचें। शरीर का वजन नियंत्रित रखें। अत्यधिक गर्मी के समय ठंडी जगह पर रहने की कोशिश करें। एक बार में ज्यादा खाने के बजाय हल्का और कम मात्रा में भोजन करें। दर्द, सूजन या बेचैनी अचानक बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हर्निया की जगह पर अचानक तेज दर्द, अत्यधिक सूजन, उल्टी या गंभीर असहजता महसूस हो, तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत सर्जन या डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
गर्मियों के मौसम में शरीर से पसीने के रूप में बड़ी मात्रा में पानी बाहर निकलता है। यदि इस दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पिया जाए, तो शरीर में डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है, जिसका सीधा असर किडनी की सेहत पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में किडनी स्टोन के मामलों में बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारण शरीर में पानी की कमी है। कानपुर स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत सिंह सोमवंशी के मुताबिक, जब शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है तो पेशाब अधिक गाढ़ा हो जाता है। इससे उसमें मौजूद कैल्शियम, ऑक्सालेट और यूरिक एसिड जैसे तत्वों की सांद्रता बढ़ जाती है, जो आपस में मिलकर क्रिस्टल बनाते हैं। समय के साथ यही क्रिस्टल किडनी स्टोन का रूप ले लेते हैं। कैसे बनती है किडनी स्टोन? गर्म मौसम में अत्यधिक पसीना आने से शरीर से पानी तेजी से निकलता है। यदि इस पानी की भरपाई नहीं की जाती, तो पेशाब की मात्रा कम हो जाती है और उसमें मौजूद खनिज पदार्थ घुलने के बजाय जमा होने लगते हैं। यही जमा हुए कण धीरे-धीरे पथरी का रूप ले लेते हैं। किन लोगों को अधिक खतरा? विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ लोगों में किडनी स्टोन का जोखिम अधिक होता है, जैसे: लंबे समय तक धूप या गर्म वातावरण में काम करने वाले लोग पर्याप्त पानी पिए बिना ज्यादा व्यायाम करने वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स, कैफीन और मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन करने वाले बार-बार डिहाइड्रेशन का शिकार होने वाले पहले किडनी स्टोन की समस्या झेल चुके लोग खानपान भी बढ़ा सकता है जोखिम गर्मियों में प्रोसेस्ड फूड, अधिक नमक वाले स्नैक्स और शुगर युक्त पेय पदार्थों का सेवन किडनी स्टोन बनने की संभावना बढ़ा सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थ शरीर के मिनरल संतुलन को प्रभावित करते हैं और पथरी बनने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। किडनी स्टोन के प्रमुख लक्षण किडनी स्टोन होने पर शरीर कई संकेत देता है, जिन पर ध्यान देना जरूरी है: पीठ, पेट या कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द पेशाब करते समय जलन या दर्द पेशाब में खून आना या रंग बदलना बार-बार पेशाब की इच्छा होना मतली, उल्टी, बुखार या कंपकंपी पेशाब की मात्रा कम होना यदि इन लक्षणों के साथ बुखार भी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। किडनी स्टोन से बचाव के आसान उपाय रोजाना कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं। तरबूज, खीरा, खरबूजा और खट्टे फलों का सेवन बढ़ाएं। नमकीन, प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड से दूरी बनाएं। सॉफ्ट ड्रिंक्स, शराब और कैफीन का सीमित सेवन करें। प्यास लगने का इंतजार न करें, समय-समय पर पानी पीते रहें। धूप में काम करने या बाहर रहने पर पानी की मात्रा और बढ़ाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी स्टोन से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका शरीर को हाइड्रेटेड रखना है। गर्मियों में पानी पीने की आदत को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों का मौसम आते ही बाजार में आम, तरबूज और लीची जैसे फलों की भरमार हो जाती है। इनमें लीची अपने मीठे स्वाद और रसीलेपन के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की पसंद बन जाती है। लीची न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि इसमें विटामिन C, फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट जैसे कई जरूरी पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। ये शरीर को हाइड्रेट रखने, इम्यूनिटी बढ़ाने और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लीची का अधिक सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। खासकर अगर इसे खाली पेट खाया जाए या जरूरत से ज्यादा मात्रा में खा लिया जाए, तो यह कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। एक दिन में कितनी लीची खाना सही? हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को दिनभर में लगभग 10 से 12 लीची से ज्यादा नहीं खानी चाहिए। वहीं डायबिटीज के मरीजों को 6 से 8 लीची तक ही सीमित रहना चाहिए, क्योंकि इसमें प्राकृतिक शुगर की मात्रा अधिक होती है। 100 ग्राम लीची में लगभग 66 कैलोरी, 16.5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और पर्याप्त मात्रा में पानी मौजूद होता है। यही वजह है कि यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देने में मदद करती है, लेकिन अधिक मात्रा में खाने पर ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है। ज्यादा लीची खाने के नुकसान विशेषज्ञों के मुताबिक खाली पेट लीची खाना खास तौर पर खतरनाक हो सकता है। इससे शरीर में ब्लड शुगर का स्तर अचानक प्रभावित हो सकता है, जिससे चक्कर आना, कमजोरी, सिरदर्द, तेज नींद आना और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा जरूरत से ज्यादा लीची खाने से पेट दर्द, गैस, डायरिया, सीने में जलन और स्किन एलर्जी जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। लीची खाने का सही तरीका और समय लीची खाने का सबसे अच्छा समय सुबह का माना जाता है, लेकिन इसे संतुलित मात्रा में ही खाना चाहिए। फ्रिज से निकालकर तुरंत लीची खाने से बचना चाहिए। पहले उसे सामान्य तापमान पर आने दें और फिर अच्छी तरह धोकर खाएं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लीची को हमेशा संतुलित मात्रा में और भोजन के साथ या बाद में खाना बेहतर होता है। सही तरीके से सेवन करने पर यह फल गर्मियों में स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन विकल्प बन सकता है।
देशभर में लगातार बढ़ती गर्मी लोगों की सेहत पर असर डाल रही है। कई इलाकों में तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है, जिसके कारण हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे मौसम में शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी हो जाता है। न्यूट्रिशनिस्ट Nmami Agarwal ने बताया कि तेज गर्मी में शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है। अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती जाए तो डिहाइड्रेशन, चक्कर और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। क्यों बिगड़ने लगती है शरीर की हालत? विशेषज्ञों के अनुसार शरीर सामान्य रूप से पसीने और ब्लड फ्लो के जरिए खुद को ठंडा रखता है। लेकिन अत्यधिक गर्मी में शरीर तेजी से पानी, सोडियम और पोटैशियम खोने लगता है। इससे ब्लड वॉल्यूम कम हो जाता है और शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। ऐसी स्थिति में दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और शरीर का कूलिंग सिस्टम प्रभावित होने लगता है। हीट स्ट्रोक से बचने के 5 आसान तरीके 1. सिर्फ पानी नहीं, इलेक्ट्रोलाइट्स भी लें विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में केवल पानी पीना काफी नहीं होता। शरीर में खोए मिनरल्स की भरपाई करना भी जरूरी है। इसके लिए नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ जैसे ड्रिंक्स बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। ये शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखते हैं और कमजोरी से बचाते हैं। 2. पानी से भरपूर चीजें खाएं गर्मियों में ऐसे फूड्स खाने चाहिए जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा हो। तरबूज, खरबूजा, खीरा, लौकी और दही जैसी चीजें शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ हाइड्रेटेड रखने में मदद करती हैं। 3. दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप सबसे ज्यादा तेज होती है। इस दौरान बाहर निकलने से बचना चाहिए। अगर जरूरी काम से बाहर जाना पड़े तो पहले पर्याप्त पानी पिएं और सिर व शरीर को अच्छी तरह ढककर रखें। 4. ज्यादा मसालेदार खाना कम करें तेज मसालेदार और गर्म तासीर वाला खाना शरीर का तापमान बढ़ा सकता है। ऐसे भोजन से शरीर में गर्मी ज्यादा बनती है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए गर्मियों में हल्का और संतुलित भोजन बेहतर माना जाता है। 5. लंबे समय तक खाली पेट न रहें विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक बिना खाना खाए रहने से शरीर की ऊर्जा कम हो सकती है। बार-बार हल्का और पौष्टिक भोजन करने से ब्लड शुगर और इलेक्ट्रोलाइट्स संतुलित रहते हैं, जिससे शरीर गर्मी को बेहतर तरीके से झेल पाता है। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज अगर तेज गर्मी में चक्कर आना, कमजोरी, सिर दर्द, ज्यादा पसीना या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो तुरंत सावधान हो जाएं। यह हीट एग्जॉशन या हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही खानपान, पर्याप्त पानी और थोड़ी सावधानी अपनाकर गर्मियों में खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नौतपा के दौरान तेज धूप, उमस और लगातार बढ़ते तापमान का असर सीधे शरीर पर पड़ता है। गर्मियों में कई लोगों को बार-बार भूख नहीं लगती, भारी खाना खाने का मन नहीं करता और शरीर सुस्त महसूस होने लगता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गर्म मौसम में शरीर का मेटाबॉलिज्म थोड़ा धीमा हो जाता है, जिससे पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है और भूख कम लगने लगती है। ऐसे मौसम में तला-भुना और ज्यादा मसालेदार भोजन शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है। इससे गैस, एसिडिटी, डिहाइड्रेशन और थकान जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। इसलिए गर्मियों में हल्का, पौष्टिक और आसानी से पचने वाला भोजन खाना सबसे बेहतर माना जाता है। दही-चावल से मिलेगी ठंडक गर्मियों में दही-चावल सबसे आसान और हेल्दी विकल्प माना जाता है। यह पेट को ठंडक पहुंचाता है और जल्दी पच जाता है। दही शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है, जबकि चावल हल्की ऊर्जा देते हैं। इसे मीठे या नमकीन दोनों तरीके से खाया जा सकता है। मूंग दाल खिचड़ी है हल्की और पौष्टिक अगर गर्मी में भारी खाना खाने का मन नहीं करता तो मूंग दाल की खिचड़ी बेहतरीन विकल्प हो सकती है। यह हल्की होने के साथ शरीर को जरूरी पोषण भी देती है। खिचड़ी जल्दी पच जाती है और कमजोरी महसूस नहीं होने देती। फ्रूट सलाद रखेगा शरीर हाइड्रेट तरबूज, खरबूजा, पपीता, खीरा और अन्य मौसमी फलों का सेवन गर्मियों में बेहद फायदेमंद माना जाता है। फ्रूट सलाद शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता और विटामिन्स की पूर्ति भी करता है। जिन लोगों को भूख कम लगती है, उनके लिए फल अच्छा विकल्प हो सकते हैं। छाछ और पुदीना से मिलेगा आराम गर्मी में छाछ और पुदीना शरीर को तुरंत राहत देते हैं। छाछ पाचन को बेहतर बनाने में मदद करती है और शरीर को ठंडा रखती है। इसमें भुना जीरा और पुदीना मिलाकर पीने से फायदा और बढ़ जाता है। ओट्स और दलिया भी हैं फायदेमंद ओट्स और दलिया हल्के होने के बावजूद शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देते हैं। ये पेट को भरा रखते हैं और गर्मियों में कमजोरी महसूस नहीं होने देते। इन्हें मीठा या नमकीन दोनों तरीके से बनाया जा सकता है। इन चीजों से करें परहेज गर्मी के मौसम में ज्यादा तला-भुना खाना, मसालेदार भोजन, कोल्ड ड्रिंक्स और ज्यादा कैफीन लेने से बचना चाहिए। लंबे समय तक खाली पेट रहने से भी शरीर में कमजोरी और डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को खानपान को लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। गर्मियों में शरीर को सामान्य तापमान बनाए रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में गलत खानपान शरीर की गर्मी बढ़ाकर डिहाइड्रेशन, एसिडिटी, बेचैनी और थकान जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार कुछ खाद्य पदार्थों की तासीर गर्म होती है, जिनका अधिक सेवन गर्म मौसम में नुकसानदायक साबित हो सकता है। इन चीजों से करें परहेज विशेषज्ञों के मुताबिक गर्मियों में अदरक और लहसुन का अत्यधिक सेवन कम करना चाहिए। इनकी तासीर गर्म होती है, जिससे पेट में जलन और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। इसी तरह अजवाइन भी शरीर में गर्मी बढ़ा सकती है और ज्यादा सेवन से डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा बाजरे का आटा भी गर्म तासीर वाला माना जाता है। सर्दियों में यह फायदेमंद होता है, लेकिन गर्मियों में इसका ज्यादा सेवन शरीर में भारीपन और अतिरिक्त गर्मी पैदा कर सकता है। तले-भुने और मसालेदार खाने से भी बचने की सलाह दी गई है। ठंडी तासीर वाले फूड्स अपनाएं गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए सौंफ और जीरे को फायदेमंद माना गया है। ये प्राकृतिक कूलिंग एजेंट की तरह काम करते हैं और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इलायची भी शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ एसिडिटी कम करने में सहायक मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार ज्वार और जौ जैसे अनाज गर्मियों के लिए बेहतर विकल्प हैं। ये हल्के होते हैं, शरीर को ऊर्जा देते हैं और गर्मी के प्रभाव को संतुलित रखने में मदद करते हैं। हाइड्रेशन है सबसे जरूरी डॉक्टरों का कहना है कि गर्मियों में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। इसके साथ नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और मौसमी फलों का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। सही डाइट और पर्याप्त पानी गर्मी से होने वाली समस्याओं से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
तेज गर्मी के बाद छोटी गलतियां बन सकती हैं बड़ी परेशानी गर्मियों में बाहर से घर लौटने के बाद लोग अक्सर राहत पाने के लिए कुछ ऐसी आदतें अपना लेते हैं जो बाद में सेहत पर भारी पड़ सकती हैं। तेज धूप, पसीना और गर्म हवाओं के बीच शरीर पहले से ही थका और गर्म होता है। ऐसे में अचानक की गई कुछ गलतियां सर्दी-जुकाम, पेट दर्द, कमजोरी और स्किन प्रॉब्लम्स का कारण बन सकती हैं। अगर आप भी गर्मी में खुद को फिट और हेल्दी रखना चाहते हैं, तो इन 5 गलतियों से बचना बेहद जरूरी है। 1. बाहर से आते ही ठंडा पानी पीना धूप से लौटने के बाद शरीर का तापमान काफी बढ़ जाता है। ऐसे में तुरंत फ्रिज का बर्फीला पानी पीना नुकसान पहुंचा सकता है। इससे गले में खराश, खांसी और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बेहतर होगा कि घर आने के बाद 10-15 मिनट आराम करें और फिर सामान्य तापमान का पानी पिएं। 2. तुरंत AC या कूलर के सामने बैठ जाना गर्मी से राहत पाने के लिए कई लोग घर आते ही सीधे एसी या कूलर के सामने बैठ जाते हैं। लेकिन शरीर के गर्म होने पर अचानक ठंडी हवा लगने से तापमान तेजी से बदलता है। इस वजह से सिरदर्द, बदन दर्द और सर्दी-जुकाम जैसी परेशानी हो सकती है। पहले कुछ देर सामान्य तापमान में रहें, फिर धीरे-धीरे ठंडी जगह पर जाएं। 3. पसीने में तुरंत नहाना बहुत ज्यादा पसीने में भीगने के तुरंत बाद ठंडे पानी से नहाना शरीर के लिए नुकसानदायक माना जाता है। ऐसा करने से नसों पर असर पड़ सकता है और कमजोरी या चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है। पहले शरीर को सामान्य होने दें और पसीना सूखने के बाद ही नहाएं। 4. तुरंत भारी या तला-भुना खाना खाना धूप और गर्मी से लौटने के बाद शरीर पहले से ही थका होता है। ऐसे समय में भारी, मसालेदार या तला-भुना खाना खाने से पाचन खराब हो सकता है। इससे गैस, अपच और आलस महसूस हो सकता है। बेहतर होगा कि पहले नींबू पानी, छाछ या हल्के फल लें और कुछ देर बाद भोजन करें। 5. पसीने वाले कपड़ों में ज्यादा देर रहना गर्मी में भीगे हुए कपड़ों में लंबे समय तक रहने से स्किन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे खुजली, लाल दाने और फंगल इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। बाहर से घर लौटते ही सूखे और साफ कपड़े पहन लेना चाहिए। गर्मियों में इन बातों का रखें खास ध्यान गर्मी के मौसम में शरीर को अचानक ठंडक देने की बजाय धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लाना ज्यादा जरूरी होता है। सही आदतें अपनाकर आप खुद को बीमारियों से बचा सकते हैं और पूरे मौसम में स्वस्थ रह सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों में कच्चा आम खाना लोगों को खूब पसंद होता है। इससे चटनी, अचार, पना और कई स्वादिष्ट चीजें बनाई जाती हैं। हालांकि, सीमित मात्रा में कच्चा आम फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। डॉक्टरों और आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार जरूरत से ज्यादा कच्चा आम खाने से पेट, गले और दांतों से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं। पेट दर्द, दस्त और कब्ज की परेशानी कच्चे आम में फाइबर और एसिड की मात्रा अधिक होती है। जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर पेट दर्द, मरोड़ और दस्त जैसी शिकायतें हो सकती हैं। कुछ लोगों में यह कब्ज की समस्या भी बढ़ा सकता है। जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर होता है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। गले में जलन और संक्रमण का खतरा कच्चे आम के ऊपर एक सफेद चिपचिपा पदार्थ पाया जाता है, जिसे ‘चीप’ कहा जाता है। अगर आम को अच्छी तरह साफ किए बिना खाया जाए, तो यह गले में खुजली, जलन और संक्रमण का कारण बन सकता है। इसलिए सेवन से पहले इसे अच्छी तरह धोना जरूरी माना जाता है। एसिडिटी और हार्टबर्न बढ़ने की आशंका कच्चे आम का स्वाद काफी खट्टा होता है, जिससे पेट में एसिड का स्तर बढ़ सकता है। इससे हार्टबर्न, खट्टी डकार और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है। जिन लोगों को पहले से गैस या एसिडिटी की परेशानी है, उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। दांतों और जोड़ों पर भी असर विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे आम में मौजूद साइट्रिक और मैलिक एसिड दांतों के इनेमल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अधिक सेवन से दांतों में संवेदनशीलता बढ़ सकती है। वहीं आयुर्वेद के अनुसार अधिक खट्टा भोजन शरीर में ‘वात’ बढ़ाता है, जिससे गठिया और जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ सकती है।
क्यों बढ़ रही है शरीर में inflammation की समस्या? आजकल खराब लाइफस्टाइल, तनाव, कम नींद, ज्यादा शुगर और प्रोसेस्ड फूड की वजह से शरीर में inflammation यानी अंदरूनी सूजन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसके शुरुआती संकेत अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जैसे लगातार थकान, पेट फूलना, स्किन पर पिंपल्स, सुस्ती या शरीर में भारीपन महसूस होना। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रोजमर्रा की छोटी हेल्दी आदतें शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं। ऐसे में anti-inflammatory drinks शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ सूजन कम करने में भी सहायक मानी जाती हैं। 1. हल्दी और काली मिर्च की चाय हल्दी में मौजूद curcumin शरीर की सूजन कम करने में मदद करता है। वहीं काली मिर्च इसके असर को बढ़ाने का काम करती है। कैसे बनाएं? एक कप पानी में आधा चम्मच हल्दी, थोड़ा अदरक और एक चुटकी काली मिर्च डालकर 5-7 मिनट तक उबालें। चाहें तो इसमें शहद या थोड़ा दूध मिला सकते हैं। 2. अदरक और नींबू पानी अदरक को प्राकृतिक anti-inflammatory माना जाता है, जबकि नींबू शरीर को detox करने और hydration बनाए रखने में मदद करता है। कैसे बनाएं? पानी में अदरक उबालें और फिर उसमें नींबू का रस मिलाएं। स्वाद के लिए थोड़ा शहद भी डाल सकते हैं। इसे गर्म या ठंडा दोनों तरह से पिया जा सकता है। 3. ग्रीन टी और पुदीना ग्रीन टी में antioxidants भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। पुदीना इसे refreshing बनाता है और पाचन में मदद करता है। कैसे बनाएं? गर्म पानी में ग्रीन टी और पुदीने की पत्तियां डालकर 2-3 मिनट तक छोड़ दें। चाहें तो नींबू भी मिला सकते हैं। गर्मियों में इसे chilled drink की तरह भी पिया जा सकता है। 4. Tart Cherry Spritzer टार्ट चेरी में ऐसे compounds पाए जाते हैं जो शरीर की सूजन और muscle soreness कम करने में मदद कर सकते हैं। कैसे बनाएं? एक गिलास में बिना शक्कर वाला tart cherry juice लें और उसमें sparkling water मिलाएं। ऊपर से थोड़ा नींबू निचोड़ें और बर्फ डालकर सर्व करें। 5. खीरा, पुदीना और चिया सीड्स वाला पानी यह ड्रिंक गर्मियों में शरीर को ठंडक और hydration देने के साथ digestion में भी मदद कर सकता है। Chia seeds में fiber और omega-3 fatty acids पाए जाते हैं। कैसे बनाएं? पानी में खीरे के टुकड़े, पुदीने की पत्तियां और चिया सीड्स डालें। 15-20 मिनट बाद इसमें नींबू का रस मिलाकर पिएं। रोजाना की छोटी आदतें दे सकती हैं बड़ा फायदा विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी ड्रिंक अकेले चमत्कार नहीं कर सकती, लेकिन रोजाना sugary beverages की जगह हेल्दी drinks अपनाने से शरीर को फायदा मिल सकता है। सही खानपान, पर्याप्त नींद और hydration के साथ ये drinks overall health बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने के लिए फल खाना बेहद फायदेमंद माना जाता है। लेकिन हर चीज की तरह फलों का सेवन भी संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। कई ऐसे फल हैं, जिनका जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर शरीर में गर्मी बढ़ सकती है या पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि किन फलों को सीमित मात्रा में खाना चाहिए। आम: स्वादिष्ट लेकिन सीमित मात्रा में जरूरी आम गर्मियों का सबसे पसंदीदा फल है, लेकिन इसमें प्राकृतिक शुगर और कैलोरी काफी अधिक होती है। अधिक मात्रा में आम खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है, जिससे मुंह में छाले, पिंपल्स और पेट में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। डायबिटीज के मरीजों को खासतौर पर इसका सेवन नियंत्रित करना चाहिए। पपीता: ज्यादा खाने से हो सकती है परेशानी पपीता पाचन के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन अधिक सेवन करने पर यह पेट दर्द और दस्त जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। कुछ लोगों में इससे एलर्जी या स्किन रिएक्शन भी हो सकता है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही खाएं। लीची: बढ़ा सकती है शुगर और शरीर की गर्मी लीची में शुगर की मात्रा अधिक होती है। ज्यादा लीची खाने से ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है और चक्कर, कमजोरी या सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। खासतौर पर खाली पेट इसका सेवन नुकसानदायक माना जाता है। अंगूर: पाचन पर डाल सकता है असर अंगूर में भी प्राकृतिक शुगर अधिक होती है। इसका ज्यादा सेवन गैस, ब्लोटिंग और पेट खराब जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। कुछ लोगों में यह ब्लड शुगर को भी प्रभावित कर सकता है। कटा हुआ तरबूज: सावधानी जरूरी तरबूज गर्मी में राहत देता है, लेकिन लंबे समय तक कटा हुआ तरबूज खुले में रखने से उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं। ऐसा तरबूज खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी और दस्त की समस्या हो सकती है। संतुलन और सावधानी है जरूरी विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में फल जरूर खाएं, लेकिन संतुलित मात्रा में। ताजे और साफ फलों का सेवन करें, और किसी भी फल को जरूरत से ज्यादा खाने से बचें। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर ही फल सेहत के लिए लाभकारी साबित होते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों में शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने के लिए Bael Sharbat एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। स्वाद के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। आयुर्वेद में भी बेल को औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है, जिसकी वजह से इसका शरबत गर्मी के मौसम में खास तौर पर पीने की सलाह दी जाती है। पेट की समस्याओं से राहत बेल का शरबत गट हेल्थ के लिए काफी लाभकारी होता है। यह ब्लोटिंग, कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है। साथ ही, लू से बचाव में भी यह असरदार माना जाता है। रोजाना एक गिलास बेल का शरबत पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर को ठंडक मिलती है। ब्लड शुगर कंट्रोल में मददगार विशेषज्ञों के अनुसार, खाली पेट बेल का शरबत पीना ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, डायरिया और दस्त जैसी समस्याओं में भी यह राहत देता है। हालांकि, इसका सेवन सही मात्रा और संतुलन के साथ करना जरूरी है। इम्यूनिटी बढ़ाने में कारगर कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं, लेकिन बेल का शरबत शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को डिटॉक्स करने में भी सहायक होते हैं, जिससे शरीर अंदर से साफ और मजबूत बनता है। डॉक्टर की सलाह जरूरी हालांकि बेल का शरबत कई फायदों से भरपूर है, लेकिन किसी भी नई डाइट को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। सही मात्रा और नियमित सेवन से यह गर्मियों में आपकी सेहत को “टनाटन” बनाए रखने में मदद कर सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के मौसम में पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे दस्त, उल्टी और पेट दर्द अचानक बढ़ जाती हैं। कई लोग इसे सिर्फ खराब खाना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं, जिनमें मौसम, पानी और लाइफस्टाइल सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। गर्मी में क्यों बढ़ जाते हैं पेट के इंफेक्शन? डॉक्टरों के मुताबिक जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, वैसे-वैसे बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं। ऐसे में खाना देखने और सूंघने में ठीक लग सकता है, लेकिन उसमें हानिकारक सूक्ष्मजीव पहले ही विकसित हो चुके होते हैं। केयर हॉस्पिटल के क्लिनिकल डायरेक्टर और वरिष्ठ सलाहकार डॉ. आकाश चौधरी के अनुसार, जिसे लोग आमतौर पर फूड पॉइजनिंग समझते हैं, वह अक्सर कई कारणों का मिला-जुला असर होता है। इसमें गर्मी, खाना रखने का तरीका और साफ-सफाई की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पानी भी बन सकता है बीमारी की वजह अक्सर लोग सोचते हैं कि पेट खराब सिर्फ खाने से होता है, लेकिन डॉक्टर बताते हैं कि पानी भी बड़ा कारण हो सकता है। दूषित पेयजल, बर्फ, या ठीक से न धोए गए फल-सब्जियां इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं। कई बार लोग पानी की स्वच्छता को नजरअंदाज कर देते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। बदलती लाइफस्टाइल बढ़ा रही है खतरा गर्मियों में लोग ज्यादा बाहर का खाना खाते हैं, यात्रा करते हैं और स्ट्रीट फूड का सेवन बढ़ जाता है। ऐसे में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। कई बार एक ही परिवार में कई लोग बीमार पड़ जाते हैं, जिसका कारण सिर्फ खाना नहीं बल्कि वायरस का एक व्यक्ति से दूसरे में फैलना भी हो सकता है। गंदे हाथ और अस्वच्छ सतहें इस संक्रमण को तेजी से फैलाती हैं। शरीर पर गर्मी का असर भी अहम गर्मी में शरीर पहले से ही डिहाइड्रेशन और थकान का सामना कर रहा होता है। ऐसे में पाचन तंत्र संवेदनशील हो जाता है और सामान्य भोजन भी परेशानी पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकतर मामलों में यह समस्या कुछ दिनों में खुद ठीक हो जाती है, लेकिन सावधानी जरूरी है। कब लें डॉक्टर की सलाह? अगर लगातार उल्टी हो, तेज बुखार आए, मल में खून दिखे या शरीर में पानी की कमी के लक्षण नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज गंभीर समस्या से बचा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भीषण गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में लोग आमतौर पर गन्ने का जूस, नींबू पानी और नारियल पानी का सेवन करते हैं। लेकिन इन तीनों में कौन सा पेय सबसे ज्यादा फायदेमंद है, यह जानना जरूरी है क्योंकि हर ड्रिंक के अपने अलग लाभ होते हैं। गन्ने का जूस: तुरंत ऊर्जा का स्रोत गन्ने का जूस प्राकृतिक शुगर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और थकान या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत राहत पहुंचाता है। जो लोग लंबे समय तक धूप में काम करते हैं, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प है। नींबू पानी: इम्यूनिटी और पाचन के लिए बेहतर नींबू पानी विटामिन C का अच्छा स्रोत है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है। साथ ही यह पाचन को बेहतर बनाता है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में भी सहायक होता है। नारियल पानी: सबसे अच्छा हाइड्रेशन ड्रिंक नारियल पानी में भरपूर इलेक्ट्रोलाइट्स और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखते हैं। यह खासतौर पर गर्मी में होने वाली कमजोरी और थकान को दूर करने में मदद करता है। व्यायाम या बाहर से आने के बाद इसे पीना बेहद फायदेमंद माना जाता है। कब कौन सा पेय पिएं अगर आपको तुरंत ऊर्जा चाहिए तो गन्ने का जूस लें। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए नारियल पानी सबसे अच्छा विकल्प है। वहीं, इम्यूनिटी बढ़ाने और पाचन सुधारने के लिए नींबू पानी का सेवन करें। इस तरह, गर्मियों में सही समय पर सही ड्रिंक चुनकर आप अपनी सेहत को बेहतर बनाए रख सकते हैं।
गर्मी का मौसम शुरू होते ही तेज धूप और बढ़ता तापमान लोगों की सेहत पर असर डालने लगता है। ऐसे में लोग ऐसी चीजें खाने की कोशिश करते हैं जो शरीर को ठंडा रखने में मदद करें। आमतौर पर माना जाता है कि Raw Onion यानी कच्चा प्याज गर्मियों में शरीर को ठंडक देने और लू से बचाने में सहायक हो सकता है। पोषक तत्वों से भरपूर है कच्चा प्याज हेल्थ रिपोर्ट्स के अनुसार कच्चा प्याज कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें विटामिन C, फोलेट, पोटैशियम और फाइबर अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें क्वेरसेटिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करने और दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। गर्मियों में शरीर को रखता है हाइड्रेट कच्चे प्याज में पानी की मात्रा अच्छी होती है, जिससे गर्म मौसम में शरीर को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है। यह शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है और डिहाइड्रेशन के खतरे को कम कर सकता है। शरीर को देता है ठंडक गर्मियों में कच्चा प्याज अपने कूलिंग इफेक्ट के लिए जाना जाता है। इसे खाने से शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद मिलती है। यह पसीना आने की प्रक्रिया को भी बढ़ावा देता है, जिससे शरीर स्वाभाविक रूप से ठंडा रहता है। इसलिए इसे सलाद या खाने के साथ साइड डिश के रूप में खाना फायदेमंद माना जाता है। इम्यूनिटी और पाचन को बनाता है बेहतर कच्चे प्याज में मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करने में मदद करते हैं। वहीं इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक हो सकता है। ब्लड शुगर को भी रख सकता है नियंत्रित कच्चे प्याज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इसमें मौजूद कुछ तत्व ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं। इसलिए Diabetes से जूझ रहे लोग भी इसे सीमित मात्रा में अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे प्याज का सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि अधिक मात्रा में खाने से कुछ लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।