चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में अभिनेता से नेता बने Thalapathy Vijay ने अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज कर राजनीति में नया अध्याय लिख दिया है। अपने पहले ही चुनाव में विजय ने राज्य की राजनीति में दशकों से प्रभावी रही DMK और AIADMK को कड़ी टक्कर देते हुए सत्ता हासिल की। दिग्गज सितारों ने दी बधाई विजय की इस बड़ी जीत के बाद फिल्म इंडस्ट्री में खुशी की लहर दौड़ गई। सुपरस्टार Rajinikanth ने सोशल मीडिया पर विजय और उनकी टीम को शानदार जीत के लिए बधाई दी। वहीं Kamal Haasan ने भी इसे जनता के विश्वास की जीत बताते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साउथ सितारों का समर्थन एक्टर Dhanush और Suriya ने भी विजय की सराहना करते हुए कहा कि यह जीत जनता के अपार समर्थन का प्रतीक है। दोनों ने उम्मीद जताई कि विजय के नेतृत्व में राज्य में सकारात्मक बदलाव आएगा। तेलुगु इंडस्ट्री से भी शुभकामनाएं तेलुगु सिनेमा के मेगास्टार Chiranjeevi, Ram Charan और Mahesh Babu ने भी विजय को इस ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी। उन्होंने इसे जनता के भरोसे की जीत बताते हुए उनके नेतृत्व में राज्य के विकास की कामना की। अन्य सितारों ने भी जताई खुशी इसके अलावा Samantha Ruth Prabhu, Dulquer Salmaan, Rashmika Mandanna और Vijay Deverakonda समेत कई कलाकारों ने विजय को शुभकामनाएं दीं। सभी ने उनकी जीत को नए युग की शुरुआत बताया। थलपति विजय की यह जीत सिर्फ एक राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और बदलाव की चाह का प्रतीक मानी जा रही है। फिल्मी दुनिया से मिले इस जबरदस्त समर्थन ने उनकी जीत को और भी खास बना दिया है।
चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के शुरुआती रुझानों में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता फेलिक्स गेराल्ड ने भरोसा जताया है कि TVK बिना किसी बाहरी समर्थन के पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। रुझानों में TVK बहुमत के करीब 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है। शुरुआती रुझानों में TVK 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है। जैसे-जैसे आंकड़े सामने आ रहे हैं, पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और कई जगह जश्न का माहौल है। विजय के नेतृत्व पर भरोसा विजय के पिता एसए चंद्रशेखर ने इस प्रदर्शन पर गर्व जताते हुए कहा कि उनके बेटे ने बिना किसी गठबंधन के अपने दम पर चुनाव लड़ने का साहस दिखाया। उन्होंने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और विजय के नेतृत्व की सराहना की। समर्थकों के बीच विजय को अब “मुथलमैचार” (मुख्यमंत्री) के रूप में देखा जाने लगा है। जनता ने बदलाव के लिए दिया समर्थन TVK का दावा है कि राज्य की जनता ने पारंपरिक राजनीतिक दलों से निराश होकर बदलाव के लिए वोट दिया है। प्रवक्ता गेराल्ड ने कहा कि लोगों ने TVK को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्वीकार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी का चुनाव प्रचार जमीनी स्तर पर आधारित था, न कि संसाधनों के दम पर। गठबंधन की अटकलें, पर आत्मविश्वास कायम हालांकि कुछ राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि यदि TVK बहुमत से थोड़ा पीछे रह जाती है तो अन्य दल समर्थन दे सकते हैं, लेकिन पार्टी ने इन अटकलों को खारिज किया है। TVK का कहना है कि वह अपने दम पर सरकार बनाने में सक्षम है। बदलाव की ओर संकेत अगर यही रुझान अंतिम नतीजों में तब्दील होते हैं, तो तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहां एक नई पार्टी सत्ता की कमान संभालती नजर आएगी।
चेन्नई/पुडुचेरी, एजेंसियां। तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के बीच राजनीतिक तस्वीर तेजी से साफ होती नजर आ रही है। तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खुद को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित कर लिया है और बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचती दिख रही है। वहीं, पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन बढ़त बनाए हुए है। तमिलनाडु में टीवीके का शानदार प्रदर्शन 234 सीटों वाले तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है। शुरुआती रुझानों में टीवीके 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर सत्ता के बेहद करीब नजर आ रही है। एआईएडीएमके और डीएमके क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान के लिए संघर्ष करते दिख रहे हैं। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी कोलाथुर सीट से पीछे चल रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। विजय के घर जश्न का माहौल रुझानों के सामने आते ही विजय के घर पर जश्न का माहौल बन गया है। उनके परिवार ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है और विजय राज्य में नई राजनीति की शुरुआत करेंगे। उनकी बहन और पिता ने भरोसा जताया कि विजय युवाओं की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे। पुडुचेरी में NDA की बढ़त कायम पुडुचेरी में एनडीए गठबंधन एक बार फिर सरकार बनाता दिख रहा है। यहां AINRC, बीजेपी और सहयोगी दल बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि कांग्रेस और अन्य दल पीछे नजर आ रहे हैं। बड़े नेताओं की साख दांव पर इस चुनाव में कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। विजय की पहली राजनीतिक परीक्षा में ही उनकी पार्टी का प्रदर्शन चर्चा का केंद्र बन गया है। वहीं डीएमके और कांग्रेस के लिए यह चुनाव आत्ममंथन का संकेत भी माना जा रहा है। क्या होगा आगे? फिलहाल रुझान टीवीके के पक्ष में हैं, लेकिन अंतिम नतीजों का इंतजार बाकी है। यदि यही रुझान परिणाम में बदलते हैं, तो तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने मदुरै की जनसभा से बड़ा चुनावी संदेश दिया। उन्होंने लोगों से DMK और उसके सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस को समर्थन देने की अपील करते हुए कहा कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि तमिलनाडु की पहचान, भाषा और भविष्य का चुनाव है। स्टालिन ने कहा कि अगर जनता फिर से भरोसा जताती है, तो राज्य विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा और देश में और मजबूती से अपनी अलग पहचान बनाए रखेगा। ANI-आधारित रिपोर्टों के मुताबिक, मदुरै रैली में उन्होंने खुद को “न्याय की धरती” से जुड़ा बताते हुए भावनात्मक अपील भी की। तीन-भाषा नीति पर फिर स्पष्ट एलान स्टालिन ने रैली में नई शिक्षा नीति (NEP) और तीन-भाषा फॉर्मूले का कड़ा विरोध दोहराया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “जब तक DMK सत्ता में है, तमिलनाडु में तीन-भाषा नीति लागू नहीं होने दी जाएगी।” उनका आरोप है कि यह नीति गैर-हिंदी राज्यों पर हिंदी थोपने का परोक्ष तरीका है। हाल के दिनों में उन्होंने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा नीति के जरिए संघीय ढांचे और भाषाई विविधता को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। यह मुद्दा अब चुनावी बहस का बड़ा केंद्र बन चुका है। 234 सीटों पर जीत का दावा, मुकाबला हुआ दिलचस्प सीएम स्टालिन ने चुनाव को लेकर पूरा आत्मविश्वास दिखाते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी 234 की 234 सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है, जबकि 4 मई को नतीजे आएंगे। इस बार मुख्य मुकाबला DMK-नेतृत्व वाले गठबंधन और AIADMK-नेतृत्व वाले NDA के बीच माना जा रहा है, लेकिन अभिनेता-राजनेता Vijay की सक्रियता ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है। ऐसे में भाषा, पहचान और क्षेत्रीय स्वाभिमान इस चुनाव के सबसे बड़े मुद्दों में उभरते दिख रहे हैं।
चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने शुक्रवार को 27 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। राज्य में 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। कांग्रेस इस बार सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। सीट बंटवारे के तहत कांग्रेस को 234 सदस्यीय विधानसभा में से 28 सीटें मिली हैं, जिन पर पार्टी अपने उम्मीदवार उतार रही है। जारी सूची के अनुसार, तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगई को श्रीपेरंबुदूर (SC) सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता एस. राजेश कुमार को किलियूर सीट से मैदान में उतारा गया है। इसके अलावा, पूर्व सांसद ए. चेल्ला कुमार को कृष्णागिरी विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया गया है। कांग्रेस की यह सूची पार्टी के प्रमुख चेहरों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, जिससे गठबंधन को मजबूती मिल सके। गौरतलब है कि तमिलनाडु में इस बार मुख्य मुकाबला द्रमुक गठबंधन और विपक्षी दलों के बीच माना जा रहा है। कांग्रेस, DMK के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरी है और राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। अब सभी की नजरें 23 अप्रैल को होने वाली वोटिंग और 4 मई को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हैं।
देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। तमिलनाडु समेत असम, पश्चिम बंगाल, केरल और पुडुचेरी में चुनाव प्रचार तेज हो गया है। इस बीच तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जहां मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और अभिनेता से नेता बने विजय ने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया। स्टालिन ने कोलाथुर से भरा पर्चा, जताया भरोसा डीएमके प्रमुख स्टालिन ने चेन्नई की कोलाथुर सीट से नामांकन दाखिल किया। यह सीट वे 2011 से लगातार जीतते आ रहे हैं। नामांकन के बाद उन्होंने रोड शो भी किया और दावा किया कि उनकी पार्टी इस बार भी भारी बहुमत से सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के वादों पर जनता को भरोसा है और पिछले कार्यकाल में किए गए कामों का फायदा उन्हें चुनाव में मिलेगा। विजय का सियासी डेब्यू, पेरंबूर से मैदान में तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार विजय ने भी पेरंबूर सीट से नामांकन दाखिल कर राजनीति में औपचारिक एंट्री कर ली है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। विजय के नामांकन के दौरान भारी भीड़ और समर्थकों का उत्साह देखने को मिला। वे इस चुनाव के जरिए अपनी लोकप्रियता को राजनीतिक ताकत में बदलने की कोशिश करेंगे। चुनावी मैदान में बढ़ी टक्कर विजय की एंट्री ने तमिलनाडु चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ सत्ताधारी डीएमके अपनी उपलब्धियों के दम पर मैदान में है, वहीं दूसरी ओर नए चेहरे के रूप में विजय का करिश्मा भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अन्य राज्यों में भी तेज प्रचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चुनावी राज्यों में सक्रिय हैं और ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत संवाद’ अभियान के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़ रहे हैं। बीजेपी को असम और पुडुचेरी में जीत का भरोसा जताया गया है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ DMK (द्रमुक) ने अपने सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। अब सिर्फ VCK (विदुथलाई चिरुथैगल काची) के साथ समझौता बाकी है, जिसे आज फाइनल किया जा सकता है। राज्य के परिवहन और बिजली मंत्री एस.एस. शिवशंकर ने बताया कि DMK और VCK के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। किसे कितनी सीटें मिलीं? DMK के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस में सीटों का बंटवारा इस तरह हुआ है- कांग्रेस: 28 सीटें भाकपा (CPI): 5 सीटें माकपा (CPM): 5 सीटें एमडीएमके: 4 सीटें IUML, MMK, KMDK: 2-2 सीटें कई दौर की बातचीत के बाद वाम दलों के साथ भी सहमति बन गई है। 23 अप्रैल को होंगे चुनाव तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने हैं। चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही सभी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। DMK ने शुरू किया प्रचार अभियान DMK ने पहले ही अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन लगातार रैलियां और जनसभाएं कर रहे हैं। मंत्री शिवशंकर के मुताबिक, पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतर चुकी है और गठबंधन भी मजबूत स्थिति में है। क्या है राजनीतिक मायने? सीट बंटवारे का लगभग पूरा होना यह संकेत देता है कि DMK गठबंधन चुनाव से पहले एकजुट दिखना चाहता है। VCK के साथ समझौता होते ही गठबंधन पूरी तरह तैयार हो जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।