Tamil Nadu Politics

Former Tamil Nadu BJP leaders resign and join Annamalai’s new political movement in Chennai
तमिलनाडु बीजेपी में बढ़ी टूट, अन्नामलाई के बाद उपाध्यक्ष और प्रदेश सचिव ने भी छोड़ी पार्टी

  चेन्नई: तमिलनाडु भाजपा में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष कारू नागराजन और राज्य सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। दोनों नेताओं के फैसले ने राज्य इकाई में राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है। अन्नामलाई के नए अभियान के साथ जुड़े कारू नागराजन भाजपा छोड़ने के बाद कारू नागराजन ने स्पष्ट किया कि वह अन्नामलाई के नए राजनीतिक अभियान का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि अपने समर्थकों के साथ विचार-विमर्श के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया है। मीडिया से बातचीत में नागराजन ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी नेता या पार्टी की आलोचना करना नहीं है, बल्कि वे अन्नामलाई की कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता से प्रभावित हैं। उनके अनुसार, अन्नामलाई एक ऊर्जावान और जनसरोकारों से जुड़े नेता हैं, जिनके साथ मिलकर वे काम करना चाहते हैं। प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश ने भी दिया इस्तीफा अन्नामलाई के इस्तीफे के कुछ ही समय बाद तमिलनाडु भाजपा की प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना इस्तीफा साझा करते हुए प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने की जानकारी दी। उनके इस्तीफे को भी राज्य भाजपा में बढ़ते असंतोष और अन्नामलाई के प्रति समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। युवा मोर्चा के नेता ने भी छोड़ा साथ भाजपा युवा मोर्चा की तमिलनाडु इकाई के कानूनी संयोजक अभिलाष गोपीनाथ ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि अन्नामलाई के नेतृत्व, ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन के प्रति समर्पण ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वे अन्नामलाई के राजनीतिक विजन और विचारों का समर्थन करते रहेंगे। नई राजनीति का दावा कर रहे हैं अन्नामलाई पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने भाजपा छोड़ने के बाद एक नए राजनीतिक आंदोलन की घोषणा की है। उनका कहना है कि यह पहल व्यक्ति-पूजा, चाटुकारिता और वंशवादी राजनीति से अलग आम लोगों की राजनीति को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। सोशल मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के इर्द-गिर्द नहीं, बल्कि विचार और सामाजिक परिवर्तन पर आधारित होगा। उन्होंने अपने अभियान का मूल मंत्र “मारुवोम, मातृवोम” (खुद को बदलें, बदलाव लाएं) बताया। किसी दल से टकराव नहीं, वैकल्पिक राजनीति पर जोर अन्नामलाई ने स्पष्ट किया है कि उनका नया राजनीतिक अभियान किसी मौजूदा राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी दलों को अपने विचार रखने का अधिकार है और उनका उद्देश्य केवल जनता के सामने एक वैकल्पिक राजनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर आंदोलन की नीतियों और कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। वेबसाइट लॉन्च होते ही हजारों समर्थक जुड़े अपने नए राजनीतिक अभियान को संगठित करने के लिए अन्नामलाई ने एक विशेष वेबसाइट भी लॉन्च की है। उनके अनुसार, वेबसाइट शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर लगभग 8.9 लाख लोगों ने स्वयंसेवक के रूप में पंजीकरण कराया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा से लगातार हो रहे इस्तीफे और अन्नामलाई के नए अभियान को मिल रहा शुरुआती समर्थन तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत हो सकता है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
TMC Former MLA
बम विस्फोट मामले में फरार चल रहे TMC के पूर्व विधायक को NIA ने किया गिरफ्तार

कोलकाता, एजेंसियां।  एनआईए की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बम विस्फोट मामले में फरार चल रहे टीएमसी के पूर्व विधायक को गिरफ्तार कर लिया है। एनआईए की टीम ने पश्चिम बंगाल के चर्चित भांगड़ बम विस्फोट मामले में यह कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मामले के मुख्य संदिग्ध और फरार चल रहे पूर्व विधायक शौकत मोल्ला को दक्षिण 24 परगना जिले से गिरफ्तार किया है। चुनाव से पहले बम बनाते समय हुआ था धमाका एनआईए की जांच के मुताबिक, यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले का है। जब अवैध रूप से क्रूड बम (कच्चा बम) बनाने के दौरान एक जोरदार विस्फोट हुआ था। इस धमाके में बम बनाने वाले एक शख्स की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। साजिश रचने और सबूत मिटाने का आरोप शौकत मोल्ला इस पूरे मामले में चौथे आरोपी हैं, जिन्हें गिरफ्तार किया गया है। एनआईए की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि पूर्व विधायक ही इस पूरी साजिश के मुख्य सूत्रधार थे। उन्होंने ही अन्य आरोपियों को बम बनाने के निर्देश दिए थे। यही नहीं, विस्फोट होने के बाद कानून के शिकंजे से बचने के लिए मोल्ला ने आरोपियों को घटनास्थल से सबूत मिटाने और दृश्य के साथ छेड़छाड़ करने का भी आदेश दिया था।

Abhishek Singh जून 6, 2026 0
K Annamalai
भाजपा अध्यक्ष ने स्वीकार किया के. अन्नामलाई का इस्तीफा

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई  ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और अन्नामलाई के अगले कदम को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक भविष्य पर बढ़ीं अटकलें अन्नामलाई के इस्तीफे ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि वह भाजपा से अलग राह चुन सकते हैं। उनके समर्थकों के बीच नई राजनीतिक पार्टी या आंदोलन शुरू करने की अटकलें भी तेज हैं। हालांकि अब तक उन्होंने अपने भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। ‘सिंघम’ के नाम से मशहूर हैं अन्नामलाई पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने वर्ष 2020 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। उनकी आक्रामक शैली और जनसंपर्क के कारण समर्थक उन्हें ‘सिंघम’ के नाम से जानते हैं। भाजपा में शामिल होने के एक साल बाद ही उन्हें तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया था। उनके नेतृत्व में पार्टी ने राज्य में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश की। अमित शाह से मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चा इस्तीफे से पहले अन्नामलाई ने 2 जून को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद उनके भविष्य को लेकर अटकलें और तेज हो गई थीं। चेन्नई और कोयंबटूर में उनके समर्थकों ने पोस्टर लगाकर उन्हें मजबूत और निडर नेता बताया तथा नए राजनीतिक नेतृत्व की मांग उठाई। आज दोपहर करेंगे बड़ा खुलासा अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घोषणा की है कि वह शुक्रवार दोपहर 12 बजे जनता और समर्थकों से संवाद करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान वह भाजपा नेतृत्व के साथ हुई चर्चाओं, अपने इस्तीफे के कारणों और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से बात कर सकते हैं। उनकी घोषणा पर पूरे तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति की नजरें टिकी हुई हैं।

Abhishek Singh जून 5, 2026 0
Former Tamil Nadu BJP president K Annamalai resigns from party membership amid political speculation.
बीजेपी से अलग हुए के. अन्नामलाई, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने स्वीकार किया इस्तीफा

  भारतीय जनता पार्टी की तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी नेतृत्व ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मंजूर किया इस्तीफा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अन्नामलाई द्वारा भेजे गए इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। पार्टी की ओर से इस फैसले की पुष्टि होने के बाद तमिलनाडु बीजेपी में भविष्य की रणनीति और नेतृत्व को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। अमित शाह से मुलाकात के बाद बढ़ी थीं चर्चाएं अन्नामलाई ने 2 जून को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah से उनके आवास पर मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं। राजनीतिक गलियारों में यह भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि अन्नामलाई नई राजनीतिक पार्टी बनाने की तैयारी कर सकते हैं, इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी। प्रदेश नेतृत्व ने पहले किया था खंडन इस्तीफे की खबरों के बीच तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष नागेंद्रन ने गुरुवार को इन दावों को खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें अन्नामलाई के इस्तीफे से संबंधित कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है और पार्टी के भीतर किसी तरह के मतभेद नहीं हैं। नागेंद्रन ने यह भी कहा था कि अन्नामलाई ने नई पार्टी बनाने को लेकर न तो उनसे कोई चर्चा की है और न ही ऐसा कोई संकेत दिया है। तमिलनाडु बीजेपी के लिए बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम के. अन्नामलाई को तमिलनाडु बीजेपी के प्रमुख चेहरों में गिना जाता रहा है। पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे अन्नामलाई ने राज्य में पार्टी के विस्तार और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके इस्तीफे के बाद अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर रहेगी कि वह भविष्य में किस राजनीतिक दिशा का चयन करते हैं और इसका तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
Congress leaders announce seven Rajya Sabha candidates for elections across five Indian states.
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 7 उम्मीदवारों का किया ऐलान, खरगे और पवन खेड़ा को टिकट

  राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार (4 जून) को अपने सात उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और झारखंड से अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। कर्नाटक से खरगे, पवन खेड़ा और मंसूर अली खान मैदान में कांग्रेस ने कर्नाटक से पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge को एक बार फिर राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। वे वर्तमान में भी कर्नाटक से राज्यसभा सदस्य हैं और उच्च सदन में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा पार्टी के मीडिया विभाग प्रमुख Pawan Khera को भी कर्नाटक से पहली बार राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है। तीसरे उम्मीदवार के रूप में मंसूर अली खान को टिकट दिया गया है। मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन उम्मीदवार मध्य प्रदेश से कांग्रेस ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है। वह वर्तमान में पार्टी की तेलंगाना प्रभारी हैं। इस सीट पर दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उन्होंने पहले ही राज्यसभा न जाने की इच्छा जताई थी। राजस्थान, तमिलनाडु और झारखंड से भी नाम घोषित राजस्थान से मौजूदा राज्यसभा सदस्य नीरज डांगी को दोबारा उम्मीदवार बनाया गया है। तमिलनाडु से प्रवीण चक्रवर्ती को टिकट मिला है, जो AICC के प्रोफेशनल कांग्रेस और डेटा विभाग के प्रमुख हैं। झारखंड से राष्ट्रीय सचिव प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित किया गया है। 18 जून को होगा राज्यसभा चुनाव राज्यसभा की 24 सीटों के लिए चुनाव 18 जून को होंगे। इन सीटों पर चुनाव 10 राज्यों में कराया जाएगा, जहां सदस्यों का कार्यकाल 21 जून से 19 जुलाई के बीच समाप्त हो रहा है। नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून निर्धारित की गई है।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
Tamil Nadu Chief Minister Joseph Vijay announces support for Congress in Rajya Sabha bypoll
राज्यसभा चुनाव से पहले विजय का बड़ा फैसला, सहयोगी कांग्रेस को सौंपी सीट

  तमिलनाडु की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने राज्यसभा की रिक्त सीट अपने सहयोगी दल कांग्रेस को देने का फैसला किया है। पार्टी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, आगामी राज्यसभा उपचुनाव में गठबंधन की ओर से कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया जाएगा। सरकार गठन में कांग्रेस ने निभाई थी अहम भूमिका हालिया विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या से पीछे रहने के बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों का समर्थन देकर विजय के नेतृत्व वाली सरकार के गठन का रास्ता साफ किया था। इसके बाद अन्य सहयोगी दलों ने भी समर्थन देकर गठबंधन को मजबूत किया। इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट यह उपचुनाव ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के वरिष्ठ नेता सी. वी. शनमुगम के इस्तीफे के कारण कराया जा रहा है। विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिसके चलते यह सीट रिक्त हो गई और उपचुनाव की आवश्यकता पड़ी। 18 जून को होगा मतदान निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, इस सीट के लिए मतदान 18 जून को कराया जाएगा। नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार निर्धारित तिथि तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद नामांकन की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। गठबंधन राजनीति को मिलेगा नया संदेश राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस को राज्यसभा सीट देने का निर्णय टीवीके और कांग्रेस के बीच मजबूत होते राजनीतिक संबंधों का संकेत है। यह कदम न केवल गठबंधन सहयोगियों के बीच विश्वास बढ़ाने वाला माना जा रहा है, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीतियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्यसभा में कांग्रेस की स्थिति मजबूत करने की कोशिश कांग्रेस को यह सीट मिलने से उच्च सदन में उसकी उपस्थिति को मजबूती मिल सकती है। वहीं, टीवीके ने इस फैसले के जरिए सहयोगी दलों के साथ सामंजस्य और साझेदारी की राजनीति को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस इस सीट के लिए किस उम्मीदवार को मैदान में उतारती है और चुनावी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
K Annamalai arrives in Delhi amid speculation over his future role in BJP
क्या बीजेपी छोड़ेंगे अन्नामलाई? आज करेंगे पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात,चर्चाएं तेज

  तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष K. Annamalai के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है। राज्य की राजनीति में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या अन्नामलाई भाजपा में बने रहेंगे या कोई नया राजनीतिक रास्ता चुनेंगे। इन अटकलों के बीच वह सोमवार को दिल्ली पहुंचे, जहां उनकी मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin से मुलाकात होनी है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में पार्टी में उनकी भविष्य की भूमिका और तमिलनाडु की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा हो सकती है। भाजपा की ओर से अब तक किसी बड़े बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। कोयंबटूर में लगे पोस्टरों ने बढ़ाई सियासी हलचल अन्नामलाई के जन्मदिन से पहले कोयंबटूर में उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए पोस्टरों ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। पोस्टरों पर "हमारे नेता, आइए और हमारा नेतृत्व कीजिए" जैसे संदेश लिखे गए हैं, जिसके बाद उनके नए राजनीतिक मंच बनाने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई। इन पोस्टरों को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, अन्नामलाई ने अभी तक इस पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है। 'दो दिन इंतजार कीजिए', अन्नामलाई का संकेत दिल्ली रवाना होने से पहले अन्नामलाई ने मीडिया के सवालों पर कहा कि लोग दो दिन इंतजार करें। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह अपनी स्थिति और आगे की योजना पर खुलकर बात करेंगे। उनके इस बयान ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में कोई बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। आईपीएस अधिकारी से भाजपा के प्रमुख चेहरे तक का सफर पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई वर्ष 2020 में भाजपा में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्होंने तेजी से पार्टी में अपनी पहचान बनाई और 2021 से 2025 तक तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई राज्यव्यापी अभियानों का नेतृत्व किया और युवाओं के बीच मजबूत समर्थन आधार तैयार किया। सोशल मीडिया पर भी उनकी बड़ी लोकप्रियता रही है। त्रिभाषा नीति पर रुख से बढ़ीं चर्चाएं  हाल के दिनों में अन्नामलाई ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए लागू की जा रही त्रिभाषा नीति को लेकर अपनी असहमति जताई थी और अधिसूचना वापस लेने की मांग की थी। उनके इस रुख के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या वह पार्टी नेतृत्व से कुछ मुद्दों पर अलग राय रखते हैं। भाजपा नेताओं ने किसी भी तरह के मतभेद की अटकलों को खारिज किया है। नई पार्टी या भाजपा में बड़ी जिम्मेदारी? राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात को लेकर अलग-अलग राय है। कुछ का मानना है कि अन्नामलाई भाजपा में ही अधिक महत्वपूर्ण भूमिका की तलाश कर रहे हैं, जबकि कुछ पर्यवेक्षकों का अनुमान है कि वह भविष्य में अलग राजनीतिक मंच तैयार कर सकते हैं। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अन्नामलाई पार्टी के महत्वपूर्ण नेताओं में शामिल हैं और उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। पार्टी नेतृत्व भी किसी संभावित अलगाव की संभावना से इनकार कर रहा है। बैठक पर टिकीं राजनीतिक निगाहें फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति की नजरें अन्नामलाई और नितिन नवीन की बैठक पर टिकी हुई हैं। इस मुलाकात के बाद ही साफ हो सकेगा कि अन्नामलाई भाजपा के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखेंगे या कोई नया राजनीतिक कदम उठाएंगे।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
Tamil Nadu CM Vijay administers cabinet expansion as IUML and VCK MLAs take oath as ministers
तमिलनाडु में सीएम विजय का फिर कैबिनेट विस्तार, IUML और VCK के विधायक बने मंत्री

C. Joseph Vijay ने शुक्रवार को अपने मंत्रिमंडल का एक और विस्तार किया। इस विस्तार के साथ तमिलनाडु सरकार में मंत्रियों की संख्या संविधान द्वारा निर्धारित अधिकतम सीमा तक पहुंच गई है। इस बार Indian Union Muslim League (IUML) और Viduthalai Chiruthaigal Katchi (VCK) के एक-एक विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। ए.एम. शाहजहां और वन्नी अरासु ने ली मंत्री पद की शपथ आईयूएमएल विधायक A. M. Shahjahan और वीसीके विधायक Vanni Arasu ने शुक्रवार को मंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar ने लोक भवन में आयोजित समारोह में दोनों नेताओं को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शाहजहां Papanasam विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, जबकि वन्नी अरासु Tindivanam सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। मंत्रियों की संख्या पहुंची 35 नए विस्तार के बाद मुख्यमंत्री विजय समेत मंत्रियों की कुल संख्या 35 हो गई है, जो राज्य में संवैधानिक सीमा के बराबर मानी जा रही है। इस विस्तार के जरिए विजय सरकार ने अपने सहयोगी दलों को भी सत्ता में प्रतिनिधित्व देने की रणनीति को आगे बढ़ाया है। गुरुवार को भी हुआ था बड़ा विस्तार इससे पहले गुरुवार को मुख्यमंत्री विजय ने अपने मंत्रिमंडल में 23 मंत्रियों को शामिल किया था। इनमें 21 विधायक उनकी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) से थे, जबकि दो मंत्री कांग्रेस कोटे से बनाए गए थे। वहीं, 10 मई को जब विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब उनके साथ नौ विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी। कैसे बनी विजय सरकार? तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में इस बार टीवीके को बड़ी सफलता मिली, लेकिन पार्टी पूर्ण बहुमत से करीब 10 सीट पीछे रह गई। इसके बाद Indian National Congress ने विजय को समर्थन दिया। बाद में कम्युनिस्ट पार्टी, मुस्लिम लीग और वीसीके ने भी सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया। अब सहयोगी दलों के नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर विजय ने गठबंधन को और मजबूत करने का संकेत दिया है। कम्युनिस्ट पार्टी अब भी बाहर सरकार को समर्थन देने वाली पार्टियों में से अभी तक कम्युनिस्ट पार्टी को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं कि आने वाले समय में कैबिनेट में और बदलाव हो सकते हैं।  

surbhi मई 22, 2026 0
Election Commission announces Rajya Sabha Election 2026 schedule for 24 seats across 10 states
Rajya Sabha Election 2026: 10 राज्यों की 24 सीटों पर चुनाव का ऐलान, 18 जून को होगी वोटिंग

Election Commission of India ने जून और जुलाई 2026 में खाली होने वाली राज्यसभा की 24 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही महाराष्ट्र और तमिलनाडु की दो राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव कराने का भी ऐलान किया गया है। आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, 10 राज्यों में राज्यसभा के जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनकी सीटों पर 18 जून 2026 को मतदान कराया जाएगा। वोटों की गिनती भी उसी दिन होगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। 1 जून को जारी होगा नोटिफिकेशन चुनाव आयोग के अनुसार, राज्यसभा चुनाव के लिए 1 जून 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 जून तय की गई है। इन सीटों पर चुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 21 जून से 19 जुलाई 2026 के बीच अलग-अलग तारीखों पर समाप्त हो रहा है। किन राज्यों में कितनी सीटों पर चुनाव? राज्यसभा की 24 सीटों के लिए जिन राज्यों में चुनाव होंगे, उनमें कई बड़े राज्य शामिल हैं। सीटों का विवरण इस प्रकार है: Andhra Pradesh – 4 सीट Gujarat – 4 सीट Karnataka – 4 सीट Madhya Pradesh – 3 सीट Rajasthan – 3 सीट Jharkhand – 2 सीट Manipur – 1 सीट Meghalaya – 1 सीट Arunachal Pradesh – 1 सीट Mizoram – 1 सीट इन सभी सीटों के लिए संबंधित राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य मतदान करेंगे। महाराष्ट्र और तमिलनाडु में उपचुनाव चुनाव आयोग ने राज्यसभा की दो सीटों पर उपचुनाव की भी घोषणा की है। ये सीटें सदस्यों के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं। महाराष्ट्र सीट Sunetra Pawar के इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र की एक राज्यसभा सीट खाली हुई है। विधायक बनने के बाद उन्होंने 6 मई को राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल 4 जुलाई 2028 तक था। तमिलनाडु सीट वहीं, C. V. Shanmugam ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मैलाम सीट से विधायक चुने जाने के बाद 7 मई को राज्यसभा सदस्यता छोड़ दी थी। उनका कार्यकाल 29 जून 2028 तक था। इन दोनों सीटों के लिए भी 18 जून को मतदान होगा और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे। निष्पक्ष चुनाव के लिए आयोग की तैयारी चुनाव आयोग ने कहा है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की जाएंगी। आयोग की ओर से पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी और पूरी चुनाव प्रक्रिया की करीबी निगरानी की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इन राज्यसभा चुनावों का असर संसद के ऊपरी सदन में विभिन्न दलों की ताकत पर पड़ सकता है। खासतौर पर गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में मुकाबला दिलचस्प रहने की संभावना है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Tamil Nadu Chief Minister C Joseph Vijay with newly inducted ministers during cabinet expansion ceremony in Chennai.
विजय सरकार का बड़ा विस्तार आज, 23 नए मंत्री लेंगे शपथ

सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार आज अपने मंत्रिमंडल का बड़ा विस्तार करने जा रही है। गुरुवार सुबह चेन्नई में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 23 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री की सिफारिश पर राज्यपाल ने सभी नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है। यह शपथ ग्रहण समारोह सुबह 10 बजे चेन्नई के लोक भवन में आयोजित होगा। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नए मंत्रियों के शामिल होने से प्रशासनिक कामकाज में तेजी और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती मिलने की उम्मीद है। कांग्रेस की सरकार में वापसी इस कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी राजनीतिक खासियत कांग्रेस की सरकार में एंट्री मानी जा रही है। लंबे समय बाद तमिलनाडु में किसी क्षेत्रीय दल के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस को प्रतिनिधित्व मिला है। कांग्रेस के दो विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जिससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं। ये विधायक बनेंगे मंत्री नई कैबिनेट में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। मंत्री पद की शपथ लेने वालों में थूथुकुडी से श्रीनाथ, अविनाशी से कमाली एस, कुमारपालयम से सी विजयलक्ष्मी और कांचीपुरम से आरवी रंजीतकुमार शामिल हैं। इसके अलावा कुंभकोणम से विनोद, तिरुवदानई से राजीव, कडलूर से बी राजकुमार, अरक्कोनम से वी गांधीराज और ओट्टापिडारम से मथन राजा पी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। सूची में राजपालयम से जगदेश्वरी के, किल्लियूर से कांग्रेस विधायक राजेश कुमार एस, ईरोड ईस्ट से एम विजय बालाजी, रासीपुरम से लोगेश तमिलसेल्वन डी और सेलम साउथ से विजय तमिलन पार्थिबन ए के नाम भी शामिल हैं। इसके साथ ही श्रीरंगम से रमेश, मेलूर से कांग्रेस विधायक पी विश्वनाथन, वेलाचेरी से कुमार आर, श्रीपेरंबदूर से थेन्नारासु के और कोयंबटूर नॉर्थ से वी संपत कुमार भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। अंतिम सूची में अरंथांगी से मोहम्मद फरवास जे, तांबरम से डी सरथकुमार, डॉ. राधाकृष्णन नगर से एन मैरी विल्सन और किनाथुकादावु से विग्नेश के को भी शामिल किया गया है। सरकार को मिलेगी नई ऊर्जा राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विस्तार के जरिए विजय सरकार संगठन और प्रशासन दोनों स्तरों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने की रणनीति इस कैबिनेट विस्तार में साफ दिखाई दे रही है।  

surbhi मई 21, 2026 0
Tamil Nadu CM Vijay during a public event amid controversy over astrologer OSD appointment
सीएम विजय ने ज्योतिषी को OSD बनाने का फैसला वापस लिया, सहयोगियों और विपक्ष के दबाव के बाद बड़ा यू-टर्न

तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा विवाद उस समय खत्म होता दिखा जब मुख्यमंत्री C Joseph Vijay ने अपने ज्योतिषी राधान पंडित Rickey Radhan Pandit Vettrivel की विशेष कर्तव्य अधिकारी (OSD) के रूप में हुई नियुक्ति को वापस ले लिया। यह फैसला भारी राजनीतिक विरोध और सहयोगी दलों की नाराज़गी के बाद लिया गया। नियुक्ति के बाद बढ़ा विवाद, विपक्ष और सहयोगियों ने जताई आपत्ति कुछ ही दिन पहले राधान वेत्रिवेल को मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD नियुक्त किया गया था। लेकिन इस फैसले के तुरंत बाद राज्य की राजनीति में हंगामा मच गया। सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दलों–जैसे Viduthalai Chiruthaigal Katchi, Communist Party of India (Marxist) और Communist Party of India–ने इस नियुक्ति पर कड़ी आपत्ति जताई। इन दलों का कहना था कि सरकारी पद पर ज्योतिषी की नियुक्ति “अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला कदम” है और इससे वैज्ञानिक सोच को नुकसान पहुंचता है। “वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दें” – नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया विरोध जताते हुए वकिल और नेताओं ने सरकार से अपील की कि प्रशासन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जाए। एक विधायक ने कहा कि सरकार को जनता के पैसों से ऐसे पद नहीं बनाने चाहिए जो अंधविश्वास को बढ़ावा दें। वाम दलों के नेताओं ने भी कहा कि सरकार का दायित्व है कि वह तर्कसंगत सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करे। DMDK नेता ने भी उठाए सवाल Desiya Murpokku Dravida Kazhagam की नेता ने भी इस फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जनता, खासकर युवाओं ने बदलाव के लिए सरकार को चुना है, ऐसे में इस तरह की नियुक्तियां गलत संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति निजी रूप से ज्योतिष पर विश्वास करता है, तो वह उसका व्यक्तिगत मामला हो सकता है, लेकिन सरकारी पद पर इसकी भूमिका उचित नहीं है। जयललिता के दौर से भी हुई तुलना इस पूरे विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के शासनकाल की भी चर्चा शुरू हो गई, जहां कथित तौर पर ज्योतिष और सलाहकारों की भूमिका को लेकर पहले भी बहस होती रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद पुरानी राजनीतिक परंपराओं की याद भी दिलाता है। दबाव बढ़ा तो सरकार ने लिया यू-टर्न विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री विजय ने संकेत दिया था कि इस नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाएगा। इसके बाद ही आधिकारिक रूप से राधान वेत्रिवेल की OSD नियुक्ति को रद्द कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने यह कदम गठबंधन सहयोगियों की नाराज़गी और विपक्ष के तीखे हमलों को देखते हुए उठाया। राजनीतिक संदेश और आगे की स्थिति हालांकि गठबंधन दलों ने सरकार से समर्थन वापस नहीं लिया है, लेकिन इस घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल जरूर पैदा कर दी है। विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सरकार के लिए एक बड़ा “मैसेजिंग इश्यू” बन गया था, जिसे संभालना जरूरी हो गया था। अब सभी की नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री विजय आगे प्रशासनिक फैसलों में किस तरह संतुलन बनाते हैं और क्या यह विवाद लंबे समय तक राजनीतिक असर छोड़ेगा।  

surbhi मई 13, 2026 0
Tamil Nadu politics
तमिलनाडु में CM विजय ने जीता फ्लोर टेस्ट, 144 विधायकों का मिला समर्थन

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु की राजनीति में पिछले कई दिनों से जारी सियासी हलचल के बीच मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने विधानसभा में विश्वास मत जीतकर अपनी सरकार बचा ली है। फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार को 144 विधायकों का समर्थन मिला, जो बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक है। वहीं सरकार के विरोध में 22 वोट पड़े, जबकि 5 विधायक मतदान से दूर रहे। इस जीत के साथ विजय ने मुख्यमंत्री बनने के बाद विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर दिया और राजनीतिक अनिश्चितता पर फिलहाल विराम लग गया।   DMK ने किया वॉकआउट विश्वास मत के दौरान विपक्षी दल Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) ने सरकार का विरोध किया। विपक्ष के नेता Udhayanidhi Stalin ने टीवीके सरकार पर तीखा हमला बोला और समर्थन न देने की घोषणा करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।   उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय पर AIADMK के बागी विधायकों से संपर्क साधने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि यह “परिवर्तन” है या “लेन-देन”।   मुख्यमंत्री विजय का जवाब विश्वास मत पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री विजय ने सदन में विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पूरी तरह “धर्मनिरपेक्ष” सिद्धांतों पर काम करेगी और जनता के हितों को प्राथमिकता देगी। खरीद-फरोख्त के आरोपों पर पलटवार करते हुए विजय ने कहा, “यह सरकार घोड़े की गति से काम करेगी, लेकिन घोड़ों की खरीद-फरोख्त में शामिल नहीं होगी।”   जनहित योजनाएं जारी रखने का भरोसा मुख्यमंत्री विजय ने यह भी आश्वासन दिया कि पिछली सरकार की सभी जनहितकारी योजनाओं को जारी रखा जाएगा। फ्लोर टेस्ट में मिली जीत के बाद अब विजय सरकार प्रशासनिक और राजनीतिक मोर्चे पर अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है।

Anjali Kumari मई 13, 2026 0
Tamil Nadu Assembly session during C Joseph government’s floor test with MLAs present in the House
तमिलनाडु विधानसभा में सी जोसेफ सरकार का फ्लोर टेस्ट जारी, कांग्रेस और वाम दलों का समर्थन

C. Joseph के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार का फ्लोर टेस्ट बुधवार को विधानसभा में शुरू हो गया। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान माना जा रहा है। सी जोसेफ ने 10 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। हालांकि उनकी पार्टी पूर्ण बहुमत से दूर रही थी, जिसके बाद कई सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनाई गई। अब विधानसभा में उन्हें बहुमत साबित करना है। कांग्रेस और माकपा ने दिया समर्थन फ्लोर टेस्ट के दौरान Indian National Congress ने टीवीके सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। इसके साथ ही Communist Party of India (Marxist) यानी माकपा ने भी विश्वास मत में सरकार के पक्ष में मतदान करने का ऐलान किया। इसके अलावा Viduthalai Chiruthaigal Katchi (VCK) ने भी सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है, जिससे मुख्यमंत्री सी जोसेफ की स्थिति मजबूत होती दिखाई दे रही है। पीएमके मतदान से रहेगी दूर वहीं Pattali Makkal Katchi (PMK) की नेता Soumya Anbumani ने कहा कि उनकी पार्टी विश्वास मत के दौरान मतदान से दूरी बनाए रखेगी। पीएमके के इस रुख को तमिलनाडु की राजनीति में संतुलन साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। AIADMK में अंदरूनी मतभेद बढ़े फ्लोर टेस्ट के बीच All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी के एक गुट ने सी जोसेफ सरकार को समर्थन देने के संकेत दिए हैं, जबकि विधानसभा में विपक्ष के नेता Edappadi K. Palaniswami ने साफ कहा कि उनकी पार्टी टीवीके सरकार के खिलाफ मतदान करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फ्लोर टेस्ट का असर सिर्फ सरकार की स्थिरता पर ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु की विपक्षी राजनीति पर भी पड़ सकता है। विधानसभा में जारी है विश्वास मत की प्रक्रिया तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास मत की प्रक्रिया जारी है और सभी दलों के विधायक सदन में मौजूद हैं। सरकार को सहयोगी दलों का समर्थन मिलने के बाद सी जोसेफ के बहुमत साबित करने की संभावना मजबूत मानी जा रही है, हालांकि विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बनाए हुए है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Udhayanidhi Stalin speaking in Tamil Nadu Assembly during controversy over his Sanatan Dharma remarks.
उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म वाले बयान पर फिर विवाद, बीजेपी ने साधा निशाना

Udhayanidhi Stalin ने एक बार फिर सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान दिया है। तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपने पहले भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि “सनातन धर्म लोगों को बांटता है, इसलिए इसे समाप्त हो जाना चाहिए।” उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी ने इसे हिंदू विरोधी मानसिकता बताते हुए डीएमके पर तीखा हमला बोला है। तमिल थाई वझुथु मुद्दे का भी किया जिक्र विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने “तमिल थाई वझुथु” के कथित अपमान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि तमिल संस्कृति और पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए। हालांकि, उनके सनातन धर्म संबंधी बयान ने ज्यादा राजनीतिक प्रतिक्रिया पैदा की और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस पर बहस तेज हो गई। बीजेपी बोली- जनता माफ नहीं करेगी Shehzad Poonawalla ने डीएमके और उदयनिधि स्टालिन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्षी दल वोट बैंक की राजनीति के लिए सनातन धर्म के खिलाफ नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में चुनावी हार के बावजूद डीएमके ने कोई सबक नहीं सीखा है और पार्टी अब भी सनातन धर्म का अपमान कर रही है। पूनावाला ने कहा कि “तमिलनाडु की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी।” 2023 में भी दिया था ऐसा ही बयान यह पहला मौका नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन के बयान पर विवाद हुआ हो। सितंबर 2023 में भी उन्होंने सनातन धर्म की तुलना “डेंगू और मलेरिया” जैसी बीमारियों से करते हुए कहा था कि इसे खत्म कर देना चाहिए। उस बयान पर देशभर में राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था और कई नेताओं ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। बीजेपी ने बताया वोट बैंक राजनीति का हिस्सा बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा बार-बार सनातन धर्म को निशाना बनाना कोई संयोग नहीं, बल्कि एक राजनीतिक रणनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दल धार्मिक भावनाओं को भड़काकर वोट बैंक मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की थी और इसे नफरती भाषण बताया गया था। राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ा विवाद उदयनिधि स्टालिन के इस बयान के बाद तमिलनाडु समेत देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। बीजेपी और डीएमके के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है।  

surbhi मई 13, 2026 0
TVK leaders JCD Prabhakar and M Ravishankar elected as Tamil Nadu Assembly Speaker and Deputy Speaker.
टीवीके विधायक जेसीडी प्रभाकर बने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष, एम रविशंकर उपाध्यक्ष निर्वाचित

तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बीच मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का चुनाव संपन्न हुआ। टीवीके विधायक जेसीडी प्रभाकर को सर्वसम्मति से तमिलनाडु विधानसभा का नया अध्यक्ष चुना गया, जबकि एम रविशंकर को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिली। 13 मई को मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay को विधानसभा में बहुमत साबित करना है। उससे पहले सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए अध्यक्ष का चुनाव कराया गया। मुख्यमंत्री विजय ने रखा प्रभाकर के नाम का प्रस्ताव विधानसभा की बैठक के दौरान कार्यवाहक अध्यक्ष एमवी करुपैया ने बताया कि मुख्यमंत्री विजय की ओर से जेसीडी प्रभाकर के नाम का प्रस्ताव रखा गया था। अध्यक्ष पद के लिए केवल एक ही नामांकन दाखिल हुआ, जिसके चलते प्रभाकर को निर्विरोध और सर्वसम्मति से चुना गया। उदयनिधि स्टालिन और सेंगोत्तैयान ने दी बधाई सदन की परंपरा के अनुसार नेता सदन केए सेंगोत्तैयान और विपक्ष के नेता Udhayanidhi Stalin नव निर्वाचित अध्यक्ष प्रभाकर को उनकी कुर्सी तक लेकर गए। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर उनका स्वागत किया। एम रविशंकर बने विधानसभा उपाध्यक्ष अध्यक्ष पद संभालने के बाद प्रभाकर ने उपाध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया पूरी कराई। थुरैयूर से टीवीके विधायक एम रविशंकर उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने वाले एकमात्र उम्मीदवार थे। उनका नामांकन सेंगोत्तैयान ने प्रस्तावित किया था। कोई अन्य उम्मीदवार नहीं होने के कारण रविशंकर भी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। नई सरकार के गठन के बाद अब सबकी नजर 13 मई को होने वाले विश्वास मत पर टिकी हुई है, जहां मुख्यमंत्री विजय अपनी सरकार का बहुमत साबित करेंगे।  

surbhi मई 12, 2026 0
Thalapathi Vijay
अभिनय से राजनीति तक, जाने कैसे 27 महीनों में तय किया मुख्यमंत्री पद तक का सफर

चेन्नई, एजेंसियां। दक्षिण भारतीय सुपरस्टार  विजय ने मनोरंजन जगत से राजनीति में कदम रखकर नया इतिहास रच दिया है। फरवरी 2024 में अपनी राजनीतिक पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (टीवीके) की घोषणा करने वाले विजय अब तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। 27 महीनों के भीतर उन्होंने राजनीति में ऐसी पकड़ बनाई कि पारंपरिक दलों को कड़ी चुनौती मिल गई।   लोकसभा चुनाव से पहले किया था पार्टी का एलान विजय ने 2 फरवरी 2024 को सोशल मीडिया के जरिए अपनी पार्टी लॉन्च की थी। हालांकि उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव नहीं लड़े और न ही किसी पार्टी का समर्थन किया। उनका पूरा फोकस 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव पर था। राजनीति में आने के साथ ही विजय ने फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला भी किया।   फैन क्लब बना राजनीतिक ताकत विजय लंबे समय से अपने फैन क्लब “विजय मक्कल इयक्कम” के जरिए सामाजिक और जनसेवा के कार्यों से जुड़े रहे। बाढ़ पीड़ितों की मदद से लेकर सामाजिक अभियानों तक उनकी सक्रियता ने जनता के बीच मजबूत आधार तैयार किया। अक्टूबर 2024 में विक्रवंडी में हुई टीवीके की पहली बड़ी रैली में भारी भीड़ उमड़ी, जिसने विजय की लोकप्रियता का संकेत दे दिया था।   विवादों और चुनौतियों का भी किया सामना राजनीतिक सफर के दौरान विजय को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 2025 में करूर रैली के दौरान भगदड़ की घटना ने बड़ा विवाद खड़ा किया। इस हादसे में कई लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद विजय ने पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता दी। मामले की जांच सीबीआई तक पहुंची और विजय से भी पूछताछ हुई।   आखिरी फिल्म के बाद पूरी तरह राजनीति पर फोकस फिल्म Jana Nayagan को विजय की आखिरी फिल्म माना जा रहा है। अब उन्होंने पूरी तरह राजनीति को अपना भविष्य बना लिया है। शानदार चुनावी जीत के बाद विजय आज तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं।

Anjali Kumari मई 9, 2026 0
TTV Dhinakaran and Vijay amid Tamil Nadu political row over government support letter controversy
सरकार गठन से पहले तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ा तनाव, समर्थन पत्र को लेकर आमने-सामने आए AMMK और TVK

Tamil Nadu Govt Formation : तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. एएमएमके (AMMK) ने विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. आरोप है कि टीवीके ने फर्जी समर्थन पत्र का इस्तेमाल कर यह दिखाने की कोशिश की कि एएमएमके उनकी सरकार को समर्थन दे रही है. इस विवाद ने राज्य की राजनीति को और गर्मा दिया है. पूरा मामला एएमएमके के इकलौते विधायक कामराज एस के समर्थन को लेकर खड़ा हुआ है. एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने आरोप लगाया कि टीवीके ने विधायक कामराज के समर्थन पत्र की “फर्जी कॉपी” राज्यपाल को सौंपी है. उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की चेतावनी दी थी. अब इस मामले में औपचारिक शिकायत भी दर्ज करा दी गई है. TVK ने वीडियो जारी कर दिया जवाब विवाद बढ़ने के बाद टीवीके ने 8 मई की शाम एक वीडियो जारी किया. इस वीडियो में कथित तौर पर विधायक कामराज खुद टीवीके के समर्थन में चिट्ठी लिखते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में वह यह कहते भी नजर आते हैं कि उन्होंने एएमएमके नेतृत्व की जानकारी और मंजूरी के साथ टीवीके को समर्थन दिया है. टीवीके नेताओं ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर करते हुए दावा किया कि दिनाकरन के आरोप पूरी तरह निराधार हैं. पार्टी का कहना है कि समर्थन पत्र पूरी तरह वैध है और इसे लेकर फैलाए जा रहे आरोप राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं. सरकार बनाने के लिए राज्यपाल से मिले विजय तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी टीवीके के अध्यक्ष चंद्रशेखर जोसफ विजय ने वामपंथी दलों के समर्थन के बाद राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की. विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश करते हुए राज्यपाल से सरकार गठन का न्योता देने की मांग की. बताया जा रहा है कि यह राज्यपाल के साथ विजय की तीसरी मुलाकात थी. हालांकि बहुमत के आंकड़े को लेकर अब भी सस्पेंस बना हुआ है और हर विधायक का समर्थन बेहद अहम माना जा रहा है. समर्थन पत्र विवाद से बढ़ा राजनीतिक संकट समर्थन पत्र को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब कानूनी और संवैधानिक मुद्दा बनता जा रहा है. एक ओर एएमएमके टीवीके पर फर्जीवाड़े का आरोप लगा रही है, वहीं टीवीके वीडियो जारी कर खुद को सही साबित करने में जुटी है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस जांच में क्या सच सामने आता है और राज्यपाल किस दल को सरकार बनाने का मौका देते हैं. आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Akhilesh Yadav with MK Stalin and Mamata Banerjee amid opposition alliance political tensions
स्टालिन और ममता के साथ तस्वीर शेयर कर अखिलेश यादव ने कांग्रेस पर कसा तंज

समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने एक बार फिर राजनीतिक संकेतों से भरी पोस्ट कर सियासी हलचल तेज कर दी है. अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर M. K. Stalin और Mamata Banerjee के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हुए कांग्रेस पर इशारों में निशाना साधा. उन्होंने पोस्ट में लिखा, “हम वो नहीं जो मुश्किलों में साथ छोड़ दें.” इस एक लाइन को विपक्षी राजनीति और हाल के चुनावी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है. कांग्रेस के फैसले के बाद बढ़ी सियासी चर्चा अखिलेश यादव की यह पोस्ट ऐसे समय आई है जब तमिलनाडु में कांग्रेस ने चुनाव बाद डीएमके से दूरी बनाते हुए टीवीके (TVK) को समर्थन देने का फैसला किया है. कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव डीएमके के साथ मिलकर लड़ा था, लेकिन नतीजों के बाद पार्टी ने अपना रुख बदल लिया. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, हालांकि उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला. इसके बाद सरकार गठन को लेकर लगातार राजनीतिक जोड़तोड़ जारी है. बंगाल के संदर्भ में भी बड़ा संदेश अखिलेश यादव की पोस्ट को पश्चिम बंगाल की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है. हाल ही में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद कांग्रेस नेताओं के कुछ बयानों पर विपक्षी दलों के बीच असहजता देखी गई थी. इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को नसीहत दी थी कि वे तृणमूल कांग्रेस की हार का मजाक न उड़ाएं. विपक्षी एकता पर नया संदेश? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव की यह पोस्ट विपक्षी दलों के बीच भरोसे और साथ निभाने का संदेश देने की कोशिश है. ममता बनर्जी और स्टालिन दोनों ही INDIA गठबंधन के प्रमुख चेहरे माने जाते हैं, ऐसे में अखिलेश का यह बयान कांग्रेस की रणनीति पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है. तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच यह पोस्ट विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों की ओर भी इशारा कर रही है.  

surbhi मई 8, 2026 0
AIADMK leader EPS and actor Vijay amid Tamil Nadu political alliance discussions and NDA exit buzz
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर! NDA छोड़ सकती है AIADMK, विजय की TVK को मिल सकता है समर्थन

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी सस्पेंस के बीच राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. सूत्रों के मुताबिक, एआईएडीएमके (AIADMK) भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन से अलग होने पर विचार कर रही है. चर्चा है कि पार्टी प्रमुख एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) अभिनेता-विजय की पार्टी टीवीके (TVK) को समर्थन देकर नई सरकार बनाने का रास्ता खोल सकते हैं. पुडुचेरी रिसॉर्ट में हुई अहम बैठक AIADMK महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने 7 मई को पुडुचेरी के बाहरी इलाके अरियानकुप्पम स्थित एक निजी रिसॉर्ट में पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. इस बैठक में करीब 40 विधायक शामिल हुए. बैठक लगभग एक घंटे तक चली, जिसमें मौजूदा राजनीतिक हालात और सरकार गठन के विकल्पों पर चर्चा हुई. सूत्रों के अनुसार, पलानीस्वामी ने विधायकों से एकजुट रहने और धैर्य बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ दिनों में “अच्छी खबर” मिल सकती है, इसलिए सभी विधायक साथ बने रहें. TVK को सत्ता से दूर रखना मुश्किल? तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. हालांकि बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों के आंकड़े से पार्टी अभी पीछे है. कांग्रेस के 5 विधायकों का समर्थन मिलने के बाद भी TVK की संख्या 112 तक ही पहुंचती है. ऐसे में AIADMK का समर्थन विजय के लिए सत्ता का रास्ता आसान बना सकता है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर AIADMK समर्थन देती है, तो तमिलनाडु में नई राजनीतिक धुरी बन सकती है. किस पार्टी को कितनी सीटें? 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में सीटों का गणित इस प्रकार है: TVK – 108 सीट DMK – 59 सीट AIADMK – 47 सीट कांग्रेस – 5 सीट PMK – 4 सीट IUML – 2 सीट CPI – 2 सीट CPM – 2 सीट VCK – 2 सीट BJP, DMDK और AMMK – 1-1 सीट विजय को अपनी जीती हुई दो सीटों में से एक सीट छोड़नी होगी, जिससे TVK की प्रभावी संख्या 107 रह जाएगी. माकपा भी करेगी फैसला इधर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने भी शुक्रवार को बैठक बुलाई है. पार्टी यह तय करेगी कि वह TVK को समर्थन देगी या नहीं. TVK ने सभी धर्मनिरपेक्ष दलों से नई सरकार के समर्थन की अपील की है. तमिलनाडु में बढ़ा सियासी रोमांच तमिलनाडु में अब राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं. अगर AIADMK NDA से अलग होकर TVK का साथ देती है, तो राज्य की राजनीति में यह सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जाएगा. वहीं DMK भी लगातार बैकचैनल बातचीत में जुटी हुई है, ताकि सत्ता समीकरण अपने पक्ष में बनाए जा सकें.  

surbhi मई 8, 2026 0
TVK leaders discuss possible mass resignation amid Tamil Nadu government formation deadlock and political uncertainty
तमिलनाडु में बढ़ा सियासी तनाव, क्या TVK के 107 विधायक देंगे सामूहिक इस्तीफा?

Tamil Nadu में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) या All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ती है, तो TVK अपने सभी 107 विधायकों से सामूहिक इस्तीफा दिलाने पर विचार कर सकती है. TVK के भीतर बढ़ रही नाराजगी सूत्रों के अनुसार, यह संकेत पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी और राजनीतिक बेचैनी को दर्शाता है. TVK नेताओं का मानना है कि चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद उन्हें सत्ता से दूर रखने की कोशिश की जा रही है. हालांकि अभी तक पार्टी प्रमुख Vijay की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा चल रही है. सरकार गठन पर क्यों फंसा मामला? 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में: TVK को 108 सीटें मिलीं DMK ने 59 सीटें जीतीं AIADMK के खाते में 47 सीटें आईं चूंकि विजय दो सीटों से जीते हैं, इसलिए नियम के तहत उन्हें एक सीट छोड़नी होगी. इसके बाद TVK की प्रभावी संख्या 107 रह जाएगी. Indian National Congress के 5 विधायकों के समर्थन के बाद भी TVK का आंकड़ा 112 तक ही पहुंचता है, जबकि 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है. DMK-AIADMK बैकचैनल बातचीत की चर्चा राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि DMK और AIADMK के बीच बैकचैनल बातचीत चल रही है, ताकि TVK को सत्ता से दूर रखा जा सके. हालांकि दोनों दलों ने किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की है. TVK नेताओं का दावा है कि जनता ने बदलाव के पक्ष में वोट दिया है और सबसे बड़ी पार्टी को नजरअंदाज करना जनादेश का अपमान होगा. इस्तीफे की रणनीति से क्या होगा? अगर TVK के विधायक सामूहिक इस्तीफा देते हैं, तो: राज्य में संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है कई सीटों पर उपचुनाव की नौबत आ सकती है सरकार गठन की प्रक्रिया और जटिल हो जाएगी राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दबाव की राजनीति का हिस्सा भी हो सकता है, ताकि अन्य दल TVK के साथ बातचीत के लिए मजबूर हों. तमिलनाडु में अब सबकी नजर राज्यपाल की अगली चाल और राजनीतिक दलों के बीच जारी बातचीत पर टिकी हुई है.  

surbhi मई 8, 2026 0
TVK chief Vijay arriving at Lok Bhavan for key meeting on Tamil Nadu government formation
फिर लोक भवन पहुंचे विजय, सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों के समर्थन का दबाव बढ़ा

Tamil Nadu Government Formation: तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है. TVK प्रमुख विजय एक बार फिर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मिलने लोक भवन पहुंचे. 24 घंटे के भीतर यह उनकी दूसरी मुलाकात रही, जिससे राज्य की राजनीति में सस्पेंस और बढ़ गया है. कांग्रेस समर्थन के बाद फिर राज्यपाल से मुलाकात सूत्रों के मुताबिक, विजय ने 6 मई को कांग्रेस का समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था. हालांकि अभी तक राज्यपाल की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. इसी बीच विजय की दोबारा राज्यपाल से मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है. माना जा रहा है कि सरकार गठन के लिए बहुमत जुटाने और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई है. TVK विधायकों की अहम बैठक सरकार गठन को लेकर विजय ने 7 मई को TVK के निर्वाचित विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक भी बुलायी है. इस बैठक में पार्टी आगे की रणनीति, समर्थन जुटाने और विधायक दल के नेता के चयन पर चर्चा कर सकती है. सूत्रों के अनुसार, TVK अपने विधायक दल के नेता के नाम पर भी औपचारिक मुहर लगा सकती है. बहुमत से अभी पीछे TVK 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है. हालिया चुनाव में TVK ने 108 सीटों पर जीत हासिल की है, जिससे वह राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. हालांकि बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए पार्टी को अभी और समर्थन की जरूरत है. कांग्रेस के पांच विधायकों ने TVK को समर्थन देने की घोषणा की है, लेकिन इसके बावजूद आंकड़ा अभी भी बहुमत से नीचे माना जा रहा है. इसके अलावा विजय को अपनी जीती हुई दो सीटों में से एक सीट छोड़नी होगी, जिससे पार्टी की प्रभावी संख्या और प्रभावित हो सकती है. कांग्रेस ने DMK से तोड़ा साथ कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने का फैसला किया है. इसके साथ ही उसने अपने पुराने सहयोगी DMK से दूरी बना ली है. कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने सरकार गठन में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बहुमत परीक्षण का सही मंच विधानसभा है, न कि राजभवन. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राज्यपाल के माध्यम से राजनीति कर रही है और विजय को तुरंत सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए. राज्यपाल के फैसले पर टिकी नजर फिलहाल तमिलनाडु में सबकी नजर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के अगले कदम पर टिकी हुई है. राजनीतिक दल लगातार जोड़-तोड़ और समर्थन जुटाने में लगे हैं. अगर TVK आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल रहती है, तो राज्य में पहली बार विजय के नेतृत्व में नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो सकता है.  

surbhi मई 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 4, 2026 0